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 संस्कृत को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हजारों बच्चे

उत्तराखंड में प्राचीन काल से ही संस्कृत भाषा के कई गुरुकुल आश्रम रहे है लेकिन आज तक सरकारी मदद न मिलने के कारण इनमे पड़ रहे हजारों छात्रों का भविष्य अन्धकार में है। लगातार अपनी उपेक्षा के चलते और संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी, ऋषिकेश ने एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जिसमे बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया।

प्राचीन काल से ही उत्तराखण्ड देव भूमि के रूप में अपनी विशेष पहचान रखती है, यहाँ कई ऋषि-मुनियों के गुरुकुल और आश्रम होने के चलते देववाणी संस्कृति का विशेष अध्यन्न केंद्र मन जाता था। लेकिन वर्तमान समाज में पश्चिमी सभ्यता का तेजी से प्रसार होने के चलते संस्कृत भाषा पिछड़ती चली गयी और वर्तमान में गुरुकुल और आश्रमों की शिक्षा पद्धति बदहाल और संकट में है।

कई बार सरकार ने संस्कृत भाषा के उथान के लिए वादे तो किये लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम न होने के चलते आज स्थिति खराब होती जा रही है, वहीँ संस्कृत भाषा में अपना करियर तलाश रहे युवायों को अब भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा में संस्कृत भाषा को भी उतना सम्मान दे और इस विषय में अध्यन कर रहे छात्रों के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करे। जबकि हक़ीकत ये है कि यहाँ चल रहे कई संस्कृत महाविद्यालयों में अध्यापकों की कमी है और ये विद्यालय निजी संस्था के सहयोग से चल रहे हैं, जिनमे सरकारी सहायता न मिल पाने के कारण इनकी बंद होने की नोबत आ गई है।

सरकार भाषा संस्थान और संस्कृत अकादमी खोल कर, प्रतिक रूप में संस्कृत को बढ़ावा देने का काम तो कर रही है, लेकिन ये ऊँठ के मुँह में जीरा साबित हो रहा है। जमीनी हक़ीक़त में कई विद्यालय और माहविद्यालय दान पूण्य के पैसों से चल रहे है जिससे वहां पड़ने वाले छोत्रों को शिक्षा में ज्यादा सुविधा नहीं मिल पा रहीं है। अगर यही हालात रही तो आने वाले वक़्त में संस्कृत भाषा विलुप्ति के कगार में पहुच जाएगी।

ऐसे साधा मन की शांति को इस सरकारी अधिकारी ने

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देहरादून में चल रहे पुस्तक मेले में हर उम्र के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। ये मेला 28 सितम्बर से 5 सितम्बर तक परेड ग्राउंड में चलेगा। तमाम विषयों की किताबों के इस मेले में पाठकों को अपनी रुची और नये आयामों से जुड़ी किताबों से रूबरू होने का मौका मिल रहा है। मेले में प्रभात प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित, ‘मैडिटेशन के नवीन आयाम’ और ‘आत्म दीप बने’ का भी स्टाॅल लगा है, यह दोनों पुस्तक पोजिटिव थिंकिंग और तनाव प्रबंधन पर आधारित है।

इनके विषय अनुक्रम, कार्मिक एकाउंट, क्रोध,माफी, पेरैंटिग, स्वीकार भाव,डिटैचमेंट, कॉम्पिटिशन, वैल्यू मूल्य, आंतरिक सुंदरता आदि पर अाधारित है। इनके लेखक मनोज श्रीवास्तव बताते हैं कि कैसे मेडिटेशन ने उनका जीवन परिवर्तित किया।

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मनोज कहते हैं कि, “मार्च 2015 से रोजना आधे घंटे मैनें मैडिटेशन करना शुरु किया, इससे मेरे जीवन पर खासा अच्छा असर पड़ा।” और यहीं से उन्हें अपने अनुभवों को लोगों के साथ साझा करने की प्रेरणा मिली। वो कहते हैं कि, “मैडिटेशन से नेगेटिव थॉट खत्म होते है और हमारी एनर्जी बचती है।”

और इसी पोजिटिव एनर्जी का नतीजा रहा 197 पन्नों की ये किताब। ध्यान करने के सिद्दातों पर आधारित ये किताब लोगों के बीच खासी पसंद की जा रही है। गौरतलब है कि यह किताब मनोज ने केवल 45 दिन में लिख डाली। मनोज का मानना हैं कि ये पल उनके लिये किसी सपने के सच होने जैसा है।

उनकी दूसरी किताब ‘आत्म दीप बने’ का अंग्रीजी संस्करण ‘Be your own light’ के नाम से बाजार में है। इसका अंग्रेजी अनुवाद पत्रकार राधिका नागरथ ने किया है।

नई पीढ़ी को मनोज यही संदेश देते हैं कि अगर वो सही लगन से मेडिटेशन करें तो वो अपने जीवन में एक बहुत सकारातमक बदलाव ला सकते हैं।

इन दिनों मनोज अपनी तीसरी किताब पर काम कर रहे हैं। ये किताब जीवन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को और आसान बनाने के बारे में हैं।

पलायन का एक और अंदाज़ बयान करता है ये वीडियो

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उत्तराखंड के रहने वाले हो और खुद को उत्तराखंड कहने में संकोच!! अगर आप भी ऐसा महसूस करते हो तो यह स्टोरी आपके लिए है। मेट्रोपाॅलिटन सिटी में रहते हुए और वहां की चकाचौंध में अगर आप भूल चुके हैं कि आप पहाड़ी राज्य उत्तराखंड से हैं तो यह विडियो आपके लिए हैं। मूल रुप से उत्तराखंड निवासी विजय आर्यन(द्वाराहाट), मैडी(टिहरी), मुक्ता कंडियाल(कोटद्वार), दिपक नेगी(रानीखेत) और कैमरामेन निखिल गौतम(दिल्ली) ने अपना एक छोटा उत्तराखंडी विडियो लाॅंच किया है।

टीम न्यूजपोस्ट से विडियो के बारे में बात करते हुए विजय आर्यन ने बताया कि वह पिछले 4 साल से दिल्ली में रह रहे हैं और एक चीज जो उन्हें हमेशा खटकती थी वह थी लोगों में अपने राज्य को छुपाने की भावना और खुद को दिल्ली वाला दिखाना। विजय ने बताया कि वह हमेशा लोगो को मेट्रो में या तो अंग्रेजी या हिंदी में गाने सुनते देखा है।एसे में अपनी परंपरा और अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हम दोस्तों ने एक विडियो बनाया ।इस विडियों में एक मैसेज है कि चाहें आप कहीं भी रहो अपने राज्य का होने पर गर्व करना सबसे ज्यादा खुशी देता है।

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विजय कहते हैं कि अगर हर कोई अंग्रेजी और हिंदी गाने सुनेगा तो उत्तराखंड के गायक और उनके काम की इज्जत कौन करेगा, आज के दिन बहुत से उभरते सितारे उत्तराखंड से हैं।विजय का मानना हैं कि उनके इस विडियो से वह उन लोगों को संदेश देना चाहते हैं जिन्हें अपने लोकगीतों को लोगों के सामने सुनने और खुद को उत्तराखंडी बताने में शरम आती है। इसके माध्यम से वह सभी देखने वालों को उत्तराखंडी होने पर गर्व महसूस कराना चाहते हैं।

इस विडियो में काम करने वाले चारों की किरदार उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों से हैं। इनमें से कुछ मीडिया की पढ़ाई कर चुकें हैं तो कुछ अलग-अलग क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं।इसके अलावा इनके ग्रुप का एक एफबी पेज ”देख मिस्टर जोक्स उत्तराखंड” नाम का है जिसके जरिए यह लोगों तक अपने काम को आसानी से पहुंचा सकते हैं।विजय आर्यन और उनकी टीम के इस विडियों ने अलग-अलग माध्यमों से खूब वाह-वाही बटोरी है।अब तक लाखों हिट्स ला चुका इस विडियो ने एक मैसेज तो दे दिया है कि उत्तराखंडी किसी से कम नहीं हैं।

टीम न्यूजपोस्ट की तरफ से विजय आर्यन और सभी किरदारों को उनके काम के लिए बधाइयां और आने वाले प्रोजेक्ट के लिए शुभकामनाएं।

फूलों की घाटी को नुकसान पहुंचा रहा गोल्डन फर्न

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विश्व धरोहर फूलों की घाटी को पहले पोलीगोनियम नुकसान पहुंचा रहा था और अब एक और नई मुसीबत यहां पैर पसारने लगी है। इस घाटी में अब गोल्डन फर्न ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। फूलों की घाटी पर अब एक और काली छाया ने फूलों को नष्ट करना शुरू कर दिया है।

फूलों की घाटी में एक दशक पहले पोलीकोनियम नामक एक फूल ने पैर पसारते हुए फूलों की घाटी को काफी नुकसान पहुंचाया है। इस पौध ने अपने आसपास के सभी फूलों को नष्ट कर दिया है, जिसको देखते हुए नंदादेवी वायोस्फियर रिजर्व ने इसे नष्ट करने पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया, मगर अभी भी यह पौधा घाटी में मौजूद है। इस पौधे से ही नंदादेवी वन विभाग निजात नहीं पाया था कि अब एक नया पौधा जिसे गोल्डन फर्न कहा जा रहा है, ने घाटी में पांव पसारने शुरू कर दिये हैं। तेजी से यह पौधा फैल रहा है। यदि इसे रोकने के ठोस उपाय नहीं किये गये तो फूलों की घाटी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। गोल्डन फर्न नामक यह पौधा अपने आसपास के पौधों को नष्ट कर देता है। नंदादेवी वन सरंक्षण के अधिकारियों की माने तो इस पौधे को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है और जल्द ही इस पौध से घाटी को निजात दिलायी जायेगी।

उत्तराखंड में पहला: पूरी तरह धुंऐ से आजाद होगा ये गांव

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गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी से महज 40 किलोमीटर के फासले पर स्थित 116 परिवारों वाले नौगांव में घरों की रसोइयां 15 दिन में धुंआरहित होने जा रही है। इसके साथ यह राज्य का ऐसा पहला गांव हो जाएगा। दरअसल, पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस गांव को गोद लिया है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के माध्यम से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गांव के उन 75 परिवारों को नि:शुल्क चूल्हा और गैस कनेक्शन मुहैया कराए जा रहे हैं, जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं है। नौगांव प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ धन सिंह रावत का गांव है और इस पहल से वह खासे उत्साहित भी हैं।

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उत्तराखंड में भी डेढ़ लाख बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन मिल चुके हैं। बावजूद इसके, तमाम लोग ऐसे हैं, जो बीपीएल सूची में नाम न होने के कारण योजना के लाभ से वंचित हैं। इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी देशभर में कुछ गांवों को गोद लेकर इन्हें धुआंरहित करने का ऐलान कर दिया। इस कड़ी में उत्तराखंड के नौगांव को भी गोद लिया गया है। थलीसैण विकासखंड का सड़क से लगा है नौगांव। गांव के निवासी और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ धन सिंह रावत के अनुसार 119 परिवारों वाले नौगांव में बीपीएल श्रेणी के सात परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन मिले थे। इन सात परिवारों में से तीन ने बाद में पलायन कर दिया। वर्तमान में गांव में 116 परिवार रह रहे हैं। इनमें से 37 के पास गैस कनेक्शन हैं, जबकि चार बीपीएल परिवारों को भी कनेक्शन मिले हैं। शेष 75 परिवारों के पास कनेक्शन नहीं है और वे ईंधन के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।

पेट्रोलियम मंत्री से योजना में शामिल होने का आग्रह
डॉ रावत ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर नौगांव को धुंआरहित गांव योजना में शामिल करने का आग्रह किया। इसे पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया और गांव को गोद लेकर वंचित ग्रामीणों को चूल्हा व गैस कनेक्शन मुहैया कराने की जिम्मेदारी ओएनजीसी को सौंप दी। डॉ रावत के अनुसार यह कवायद पूरी हो चुकी है और एक पखवाड़े के भीतर नौगांव के सभी परिवारों के पास गैस कनेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे। इसके साथ ही नौगांव राज्य का पहला धुंआरहित गांव हो जाएगा।

नियमित रूप से मिलेंगे सिलेंडर
नौगांव के 42 कनेक्शनधारियों को वर्तमान में पौड़ी से गैस सिलेंडर की सप्लाई होती है। संख्या कम होने के कारण गैस की गाड़ी वक्त पर नहीं आती। धुंआरहित गांव घोषित होने पर वहां हर माह सिलेंडर का वाहन पहुंचेगा। वैसे भी वहां तब कनेक्शन बढ़कर 116 हो जाएंगे।

औद्योगिक इकाइयों पर शिकंजा कसेगी पीसीबी

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उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने अब राज्यभर में मौजूद औद्योगिक इकाइयों की कुंडली बांचने का फैसला किया है। इसमें भी खास फोकस उन इकाइयों पर रहेगा, जो खतरनाक अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण में लापरवाह रवैया अपनाए हुए हैं।

राज्यभर में तमाम औद्योगिक इकाइयां पर्यावरण संबंधी मानकों की अनदेखी करती आ रही हैं। बीते मंगलवार को यह बात तब सामने आई, जब प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित जनता दरबार में सेलाकुई (देहरादून) की एक दवा फैक्ट्री की शिकायत हुई। वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के निर्देश पर हरकत में आई मशीनरी ने मौके पर जाकर पड़ताल की तो पता चला कि यह इकाई पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर ही रही, नोटिस के बाद भी फैक्ट्री संचालकों ने पीसीबी से संचालन की अनुमति नहीं ली। इससे पीसीबी के कान खड़े हुए और फिर इस फैक्ट्री को सीज कर दिया गया। जाहिर है, इससे पीसीबी की कार्यशैली पर सवाल उठने लाजिमी थे। जब राजधानी से लगे क्षेत्रों का यह हाल है तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी, समझा जा सकता है। मामले से सबक लेते हुए पीसीबी ने अब सभी औद्योगिक इकाइयों का रिव्यू करने का फैसला किया है।
पीसीबी के सदस्य सचिव विनोद सिंघल के अनुसार सभी क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र की इकाइयों की पड़ताल कर इसका संपूर्ण ब्योरा मुख्यालय को भेजना सुनिश्चित करें। सिंघल ने बताया कि इस पड़ताल में मुख्य फोकस उन औद्योगिक इकाइयों पर होगा, जहां से खतरनाक अपशिष्ट पदार्थ निकलते हैं। देखा जाएगा कि वे इसका ठीक से निस्तारण कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण में रुचि न लेने वाली इकाइयों को नोटिस जारी करने के साथ ही इन्हें सीज करने की कारवाई अमल में लाई जाएगी।
84 इकाइयां पहले ही हैं चिह्नित
पीसीबी ने 2012 में राज्यभर में 984 औद्योगिक इकाइयों की पड़ताल की थी। ये सभी वे इकाइयां थी, जिनसे खतरनाक अपशिष्ट पदार्थ निकलते हैं। तब बात सामने आई कि 900 इकाइयां तो ठीक से निस्तारण कर रही हैं, लेकिन 84 हीलाहवाली बरत रही हैं। इन सभी को नोटिस जारी किए गए थे। अधिकांश ने खतरनाक कचरे के निस्तारण के इंतजाम करने की जानकारी पीसीबी को दी है। अब नए सिरे से होने वाली पड़ताल में इन इकाइयों के दावों की कलई भी सामने आ जाएगी।

कैबिनेट विस्तार में मोदी ने फिर चौंकाया

एक निर्णय अत्‍याशित है| कोई यह स्‍वप्‍न में भी उम्‍मीद नहीं कर सकता था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में निर्मला सीतारमन का प्रमोशन करते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर रक्षा मंत्री की अहम जिम्मेदारी सौंपेंगे। किंतु अपने स्‍वभाव के अनुसार ही उन्‍होंने ये निर्णय कर सभी को एक बार फिर चौंकाया है। वस्‍तुत: यह भारत के संदर्भ में पहली बार हुआ है कि यहां उसका कोई रक्षामंत्री महिला वह भी पहली फुल टाइम रक्षा मंत्री है, क्‍योंकि महिला स्‍तर पर पूर्व में रक्षा विभाग प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने दो बार अपने पास रखा था।
प्रधानमंत्री मोदी एवं उनकी पार्टी द्वारा लिया गया यह निर्णय बताता है कि वास्‍तव में वे महिलाओं को आगे लाने की सिर्फ बात ही नहीं करते, सच में उन्‍हें अपने शासनकाल में रहते हुए अहम जिम्‍मेदारियां भी सौंपते हैं। पूरे मंत्रिमंडल को इस संदर्भ में देखा जा सकता है, सुषमा स्‍वराज हों, उमा भारती हों या फिर निर्मला सीतारमन सभी की जिम्‍मेदारियां अहम हैं। लोकसभा की अध्‍यक्ष भी एक महिला ही हैं।
एक सामान्य परिवार से निकली निर्मला सीतारमन के लिए रक्षा मंत्री बनना निश्‍च‍ित तौर पर एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। समूचे देश को लेकर यदि इस निर्णय को देखा जाए तो रक्षा मंत्रालय शक्ति और सामर्थ्य का पुंज है| वहां एक ऐसा ही व्यक्‍तित्‍व मंत्री के रूप में चाहिए था जो बौद्धिक हो, प्रबुद्ध हो, स्‍पष्‍ट वक्‍ता हो और इसी के साथ निर्णय लेने एवं बिना लागलपेट के अपनी बात रखने ओर मनवाने में सफल हो। एक तरह से देखें तो ये सभी गुण निर्मला सीतारमन में पूरी तरह दृष्‍ट‍िगत होते हैं। निर्मलाजी की यह रक्षामंत्री तक की यात्रा एक सामान्‍य परिवार से आरंभ होकर असामान्‍य एवं श्रेष्‍ठ स्‍तर तक पहुँचती है। जो यह संदेश भी देती है कि यदि आपमें क्षमता है तो परिस्‍थ‍ितियां कितनी भी प्रतिकूल क्‍यों न हों, संसाधन आपके पास हों अथवा नहीं हों, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आपके कार्य का मूल्‍यांकन कहीं न कहीं हो रहा होता है और जब वक्‍त आता है तो आपके किए कार्य ही आपको उत्‍तम पद एवं प्रतिष्‍ठा पर सुशोभित करते हैं।
18 अगस्त 1959 को जन्मीं सीतारमन के पिता रेलवे में काम करते थे। उनकी मां एक सामान्य गृहिणी थी। सीतारमन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मौसी के यहां रहकर की। जिसमें उन्‍होंने 1980 में सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु से स्नातक की शिक्षा पूर्ण की, फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (दिल्‍ली) से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विषय में एम.फिल. की। वे प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स के साथ वरिष्ठ प्रबंधक (शोध एवं विश्लेषण) के तौर पर भी कार्य कर चुकीं हैं। उन्होंने कुछ समय के लिए बीबीसी विश्‍व सेवा के लिए भी कार्य किया। जब उनके पति लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी कर रहे थे, तब सीतारमन ने खाली हाथ बैठने की बजाय लंदन की ऑक्सफॉर्ड स्ट्रीट में हैबिटेट होम डेकोर पर सेल्स गर्ल की नौकरी तक की।
सीतारमन 2006 में भाजपा में शामिल हुई थीं। उन्‍होंने शिक्षा क्षेत्र की उत्‍कृष्‍टता के लिए भी कार्य किया है । वे 2003 से 2005 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं। इसी के साथ उन्‍हें भारतीय जनता पार्टी की ओर से निरंतर राष्‍ट्रीय प्रवक्ता बनाए रखा गया। केंद्र में सरकार आने के बाद भारत की वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्यमंत्री बनीं, जिसके बाद वे 03 सितंबर-2017 को रक्षा मंत्री बनी हैं।
आज भारत के अतिरिक्‍त दुनिया के कई देशों में महिलाएं सफलतम रूप से अपने देश का रक्षा मंत्रालय संभाल रही हैं। फ्रांस में फ्लोरेंस पार्ली को देश का रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। रिपब्लिक ऑफ मैसिडोनिया की सोशल डेमोक्रैटिक यूनियन की नेता रादमिला सेकेरिंस्का यहां रक्षा मंत्री हैं। स्पेन में मारिया डोलोरेस दि कोस्पेदाल सत्तारूढ़ पीपुल्स पार्टी की सेक्रेटरी जनरल को नवंबर 2016 में देश का रक्षा मंत्री बनाया गया, तब से वे इसी पद पर हैं। ऑस्ट्रेलिया में देश की लिबरल पार्टी से सिनेटर मरीस एन पेन को टर्नबुल सरकार ने 2015 में रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। यूरोपीय देश स्लोवेनिया में एंद्रेजा कटिक के पास देश की सुरक्षा का जिम्मा है। इटली में 2014 से रॉबर्टा पिनोट्टी रक्षा मंत्री के पद पर तैनात हैं। जर्मनी के इतिहास में पहली बार 2013 में ओजोला फर्द वॉन लायेन को रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई जो अब भी बरकरार है। हमारे पड़ोसी मुल्‍क बांग्लादेश में रक्षा विभाग यहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पास श्रीमती इंदिरा गांधी की तरह ही रखा हुआ है। इनके अतिरिक्‍त दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, निकारागुआ, केन्या, अल्बानिया, नॉर्वे और बॉस्निया एंड हर्जेगोविना में भी रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी एक महिला के हाथों से ही संचालित हो रही है।
यदि हम भारत की नई रक्षामंत्री एवं अन्‍य देशों की रक्षामंत्रि‍यों विशेषकर महिलाओं में भी तुलना करें तो हम यही पाते हैं कि निर्मला सीतारमन का देश का रक्षा मंत्री बनाया जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देशहित में और महिला सशक्‍तिकरण की दिशा में दिया गया सफलतम संदेश है। यह बताता है कि 21 वीं सदी का भारत महिला सशक्‍तिकारण की ओर बढ़ता भारत है। जहां अब महिलाएं अबला नहीं रहीं। कह सकते हैं कि जिस शक्‍ति की आराधना हिन्‍दी के प्रख्‍यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अपनी कविता राम की शक्‍ति पूजा में करते नजर आते हैं। इन दिनों देश के क्षितिज पर वही शक्‍ति आराधना एवं मुख्‍य दायित्‍वों से शक्‍ति को सुशोभित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आ रहे हैं। आखिर इसका उद्देश्‍य क्‍या है ? यह तो आप सभी भलीभांति समझ ही सकते हैं! ‘होगी जय, होगी जय, हे पुरूषोत्तम नवीन।’ कह महाशक्ति राम के वदन में हुई लीन। उपरोक्‍त कथन राष्‍ट्र की शक्‍ति के संबंध में है।

लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुमार झा बने आईएमए के कमांडेंट

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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) को नया कमाडेंट मिल गया है। लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुमार झा अब आईएमए के नए कमाडेंट होंगे। वह लेफ्टिनेंट जनरल एसके उपाध्याय की जगह लेंगे। एसके झा अकादमी के 48वें कमांडेंट होंगे। वह दिसंबर 1980 में सिख रेजीमेंट की 17वीं बटालियन में शामिल हुए। आईएमए कमांडेंट का पदभार संभालने से पहले वे पूर्वोत्तर में त्रिशक्ति कोर के चीफ जनरल ऑफिसर कमांडिंग थे।

अलग-अलग मोर्चों का अनुभव
लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुमार झा सोमवार से बतौर कमांडेंट आईएमए की कमान संभालेंगे। गौरतलब है कि ले.ज. झा इससे पहले देश के विभिन्न मोर्चों पर तैनात रहे हैं। झा ने अपने 36 वर्ष के सैन्य अनुभवों के साथ सेना के कई अहम मोर्चों और पदों पर अपनी सेवाएं दी। वे असम राइफल सेक्टर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और उत्तर-पूर्व में एक माउंटेन डिवीजन को भी कमांड कर चुके हैं। इसके अलावा कई अलग अलग आॅपरेशंस का भी हिस्सा रहे।
बतादें कि झा नेशनल डिफेेंस अकेडमी और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से स्नातक हैं। उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र मिशन में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड के उप कमांडर और चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में भी काम किया है। अपनी नि:स्वार्थ सेवा के लिए, ले.ज. झा को अतिविशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल, दो बार जीओसी-इन-सी कमेंडेशन कार्ड और वीकोस प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किया गया है।

रेलवे स्टेशन पर मैड ने चलाया स्वच्छता अभियान

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सामाजिक संस्था ए दिफरंस बाए बीईंग द दिफरंस (मैड) के सदस्यों ने रविवार को रेलवे स्टेशन के विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया।
रविवार को मैड के करीब ढाई दर्जन कार्यकर्ता सुबह एस्ले हॉल में एकत्रित हुए और वहां से रेलवे स्टेशन पहुंचकर छात्रों ने स्टेशन पर जगह-जगह बिखरा हुआ अजैविक कूड़े को एकत्रित किया। सभी कार्यकर्ताओं ने कूड़े की सफाई करने के साथ-साथ वहां लोगों को स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया। मैड संस्था के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सफाई अभियान में शहर के हर वर्ग के लोगों का साथ मिल रहा है। इस मुहिम के लिए हमें अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना होगा, तभी स्वच्छता अभियान का असर दिखेगा। दो दिनों से लगातार हो रही बारिश में सफाई करना काफी मुश्किल था। मगर सभी ने उसे एक चुनौती की तरह लिया और समाज के लिए अपना योगदान रहे हैं।
शार्दुल ने आगे कहा कि यदि हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझें तो देहरादून में गंदगी की समस्या समाप्त हो जाएगी। एक अन्य कार्यकर्ता के अनुसार, लोग नगर निगम पर दोष डालकर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते और हमें इस समस्या से लड़ने की सामूहिक जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। इस अभियान में लोक चेतना मंच, संयुक्त नागरिक संगठन, संयुक्त नागरिक मंच, फ्रेंड्स ऑफ दून सोसाइटी ने सहयोग प्रदान किया। इस अभियान में मैड के संस्थापक अभिजय नेगी, आकांशा, अक्षत, अलीशा, आयूष व अन्य मौजूद थे। फ्रेंड्स ऑफ दून के भरत शर्मा भी इस अभियान के साथ जुड़े।

बरेली व गाजियाबाद के दो युवक डूबने से हुई मौत

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जनपद के कलियर में जियारत करने आए दो युवकों की डूबने से मौत हो गई। मृतकों में एक बरेली व दूसरा गाजियाबाद का बताया गया है।

पुलिस के अनुसार, बरेली निवासी रिजवान (18) परिवार के साथ जियारत करने आया था। शाम को वह बाबनदरा पुल के पास नहाने गया था। वहां बने कुंड में वह डूब गया। इससे पहले गंगनहर में नहाने गए गाजियाबाद निवासी आरिफ पुत्र नवाब भी डूब गया। दोनों की मौत हो गई। पुलिस ने दोनों के शव निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं जिस स्थान पर युवक डूबे, वहां पुलिस ने नहाने से मनाही का बोर्ड लगा रखा है। इसके बावजूद युुवकों ने ध्यान नहीं दिया।