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बीएसएनएल सेवा ठप्प, सरकारी कामकाज प्रभावित

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शहर की बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड सेवा पिछले एक हफ्ते से ठप पड़ी हुई है। उसके बावजूद बीएसएनएल के अधिकारियों की ओर से शहर की कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे सरकारी विभागों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।  पिछले रविवार से बीएसएनएल की सेवा में खराबी आने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में व्यापारियों और इंटरनेट कैफे वालों का व्यवसाय भी ठप पड़ा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में शहर में बीएसएनएल के साढ़े चार हजार कनेक्शन हैं, जबकि दो साल पहले कनेक्शनों की संख्या सात हजार से पार थी। खराब नेटवर्क के चलते साल दर साल बीएसएनएल के ग्राहकों की संख्या कम हो रही है। व्यापारियों के अनुसार, हफ्ते भर से अधिक समय गुजरने के बाद भी समस्या को दूर नहीं किया जाता है।

रुद्रपुर आरटीओ विभाग में बीएसएनएल इंटरनेट सेवा ठप होने से विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है। इधर, रोडवेज बस स्टेशन में भी बीएसएनएल की इंटरनेट सेवा खराब होने के चलते कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों के अनुसार, बीएसएनएल कार्यालय में फोन के माध्यम से इंटरनेट नहीं चलने की सूचना दी जा रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रुद्रपुर बीएसएनएल कार्यालय के सब डिविजनल इंजीनियर शिलाजीत चौहान से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वहां से फोन नहीं उठाया गया। बीएसएनएल के अन्य अधिकारियों ने बताया कि मौसम की खराबी के कारण परेशानी आ रही है, जिसे विभाग की ओर से ठीक कराया जा रहा है।

उत्तराखण्ड में क्या कर रही राजस्थान पुलिस

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राजस्थान की पुलिस उत्तराखण्ड की वादियों में कुछ खास तलाश में जुटी है। राजस्थान पुलिस एेसे शातिर चोरों की तलाश में है जिन्होने 18 लाख के टायरों की चोरी की है और जिनके उत्तराखण्ड के खटीमा में होने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि राजस्थान के लालसौर क्षेत्र में टायर शोरूम से 18 लाख के टायर चोरी करने वालों की खोजबीन करते हुए राजस्थान की पुलिस खटीमा पहुंची। पुलिस टीम को चोरी के टायर लेकर आने वाले ट्रक को पकड़ने में सफलता भी मिली है। लेकिन शातिर चोर भागने में कामयाब रहे। टायर चोरी करने वाले बहेड़ी-रिछा के रहने वाले हैं। चोरी में ट्रक मालिक भी शामिल बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।

rajasthan police

राजस्थान के दौसा जिले के लालसौर थानाक्षेत्र में 10-15 दिन पूर्व टायर के शोरूम से 18 लाख के टायर चोरी हुए थे। इस मामले में शोरूम स्वामी की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। बताया जा रहा है कि चोरी करते वक्त सीसीटीवी कैमरे में ट्रक नंबर की पहचान कर ली गई थी। इसके बाद ट्रक मालिक का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाया तो पता चला कि वह पहले यूपी में रुके हैं। लोकेशन मिलते ही राजस्थान पुलिस के एसएसआइ रजत के नेतृत्व में टीम उनकी तलाश में यहां पहुंची। इसके बाद उनकी लोकेशन मझोला गांव के कंचनपुरी में मिली। इस पर राजस्थान पुलिस टीम ने यहां डेरा जमा लिया। लोकेशन का सही पता मिलते ही पुलिस ने दबिश दी, लेकिन चोर एक दिन पहले ही यहां से निकल चुके थे। पुलिस की घेराबंदी देख चोर ट्रक को अमरिया रोड पर छोड़ भाग निकले, जिसे राजस्थान पुलिस ने कब्जे में ले लिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। एसएसआइ जगदीश ढकरियाल ने बताया कि राजस्थान से टायर चोरी हुए है। उस मामले में वहां की पुलिस यहां पहुंची है।

ग्रामीणों ने की जंगली जानवरों से निजात दिलाने की मांग

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चमोली जिले के देवर खडोरा के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चमोली से मांग की है कि जंगली जानवरों द्वारा उनकी खेती को नष्ट होने से बचाया जाए।

जिलाधिकारी को दिए गये अपने ज्ञापन में ग्रामीण चंद्र सिंह पंवार, राजेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, आनंद सिंह का कहना है कि जंगली जानवरों द्वारा उनकी खेती को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनके खेतो में खड़ी फसल को तबाह कर दिया। जिससे उनकी आजीविका पर भी काफी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मांग है कि उनके नुकसान का आंकलन कर उन्हें मुआवजा दिया जाए। 

उत्तराखंड: 16 साल में काटे गए 51 लाख से अधिक पेड़

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deforestation becomes a menace

16 वर्षों में प्रदेश में 17 हजार हेक्टेयर में पौधों को काटा जा चुका है, इस हिसाब से यह आंकड़े करोड़ों में हो सकते हैं। अब इसी कटान को रोकने के लिए वन विभाग समेत सामाजिक संगठन उतर पड़े हैं ताकि यहां के पर्यावरण को पुन: पहले जैसे किया जाए। वैश्विक गर्मी को रोकने के लिए वृक्षारोपण से बड़ा कोई आधार नहीं है। वन विभाग ने 9.9 सौ एकड़ में वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है,जो कम से कम एक करोड़ एक लाख वृक्ष लगाने का लक्ष्य है। इस मामले में प्रदेश का हर विभाग अपने-अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहा है।

एक आंकलन के अनुसार करोड़ों पेड़ प्रतिवर्ष कटते हैं और करोड़ों लगाए जाते हैं, लेकिन लगने वाले पेड़ शत प्रतिशत नहीं लग पाते। जिसके कारण कटने वाले पेड़ों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जाती है, उससे अधिक पेड़ लगाए जाते हैं, लेकिन उन पेड़ों के पूरी तरह संरक्षित नहीं होने के कारण असमय ही समाप्त हो जाते हैं, जिसके कारण कटने वाले पेड़ों की संख्या अधिक होती है पर इस बार विभिन्न विभागों और सामाजिक संगठनों ने जो निर्णय लिया है वह राज्य के लिए सुखकर है।

आंकलन के अनुसार उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 17 हजार हेक्टेयर में वृक्षों का कटान हुआ है। एक हेक्टेयर में अनुमानत: दो सौ से तीन सौ पेड़ माने जाते हैं। इस लिहाज से लगभग 51 लाख पेड़ अब तक काटे जा चुके हैं, लेकिन यह आंकड़े केवल वन विभाग द्वारा दिए गए आंकड़े के हैं यदि शहरी क्षेत्र का आंकड़ा जोड़ दिया जाए तो यह संख्या करोड़ों में पहुंचती है। यह बात अलग है कि वन विभाग प्रतिवर्ष करोड़ों की संख्या में पेड़ लगाता है। अकेले गढ़वाल जोन में 46.12 लाख पौधे लगने हैं, जबकि वृहद वृक्षारोपण अभियान के तहत 19 लाख 21 हजार पौधे लगाए जाएंगे।

सीसीएफ मुख्य वन संरक्षक आरके मिश्र का कहना है कि, ‘विभाग धरती को हरा भरा करने के लिए विशेष रूप से प्रयासतरत है और चाहता है कि प्रदेश को हरियाली का गहना पहनाया जाए। इसके लिए हर विभाग को सचेत किया गया है, गढ़वाल जोन जिसमें चमोली, पौड़ी, रूद्रप्रयाग और उत्तरकाशी शामिल है, जिनमें 4 हजार 4 सौ 70 हेक्टेयर में वृक्षारोपण चलाया जाएगा। अभी हाल ही में हर विभाग को पौधा लगाने का लक्ष्य दिया गया है।’ समाज कल्याण से जुड़े आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने  एक ही दिन में 2 करोड़ 16 लाख 150 पौधों का रोपण किया। यह अभियान अपने आप में एक उदाहरण हो सकता है।’

निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले, प्रबंधन व सरकार में टकराव

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नीट परीक्षा के बाद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए जहां छात्र-छात्राओं में मारा-मारी है, वहीं सरकार और निजी मेडिकल कॉलेजों के बीच जंग छिड़ गई है। सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगाने का सार्थक पहल कर रही है। सरकार का मानना है कि छात्रों का हित सर्वोपरि है, सरकार चाहती है कि निजी विश्वविद्यालय लूट खसोट बंद कर छात्रों को राहत दें और नियमानुसार प्रवेश दें।

प्रदेश में फिलहाल छह मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें से तीन निजी तथा तीन सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुशीला देवी तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज तथा देहरादून मेडिकल कॉलेज के नाम शामिल हैं, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में श्रीगुरूराम राम मेडिकल कॉलेज देहरादून, सुभारती मेडिकल कॉलेज देहरादून तथा हिमालयन मेडिकल कॉलेज जौलीग्रांट के नाम शामिल हैं। सरकारी विश्वविद्यालय तो सरकार के निर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं,जबकि तीनों निजी मेडिकल कॉलेज अपने हिसाब से प्रवेश परीक्षा प्रारंभ कर रहे हैं। इसके लिए हिमालयन मेडिकल कॉलेज जौलीग्रांट ने तो बाकायदा विज्ञापन देकर सीटें भरने का उपक्रम किया है।

पहली काउंसलिंग में अधिकांश लोगों ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों को वरीयता दी है। पूरे देश में नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सामूहिक काउंसलिंग का कार्य प्रारंभ हो गया है। 16 जुलाई से प्रारंभ हुई इस मेडिकल काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। उत्तरराखंड में आठ हजार सात सौ से अधिक बच्चों ने पंजीकरण कराया और वे प्रवेश लेने के इच्छुक हैं। मेडिकल काउंसलिंग के लिए 24 जुलाई को काउंसलिंग का परिणाम घोषित किया जा सकता है, जिसमें वरीयता के आधार पर अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद दूसरी सूची मिलेगी। इसी प्रवेश के लिए सरकार और निजी विश्वविद्यालयों के बीच मामला ठना है।

निजी विश्वविद्यालय चाहते हैं कि उनके ऊपर प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति का आदेश जबरन न थोपा जाए। वो चाहते हैं कि वे स्वतंत्र इकाई के रूप में अपना नियम कानून बनाने को स्वतंत्र हैं। इसके लिए वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए तैयार बैठे हुए हैं। समय की कमी न होती तो अब तक निजी मेडिकल कॉलेज न्यायालय तक पहुंच चुके होते, लेकिन सरकार है कि आम जनता के हित के लिए मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को राहत देना चाहती है और उनकी लूट खसोट रोकने के लिए सरकारी नियमों का अनुपालन कराना चाहती है।

फिलहाल मामला सरकार और विश्वविद्यालयों के बीच विवाद का मुद्दा बन रहा है,लेकिन सरकार को संभावना है कि वह इस मामले का समुचित समाधान ढूंढ़ लेगी। मेडिकल विभाग के मुखिया स्वास्थ्य निदेशक आर.सी.सयाना मानते हैं कि, ‘प्रदेश में मेडिकल काउंसलिंग के लिए निजी विश्वविद्यालय और सरकारी विश्वविद्यालयों में एक्ट की लड़ाई है। सरकार चाहती है कि राज्य में प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के नियमों का अनुपालन किया जाए और शासनादेश के अनुसार काम हो।’ डा. सयाना का कहना है कि सरकार शासनादेश का अनुपालन इन विश्वविद्यालयों से कराएगी।

दूसरी ओर श्री गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज के जन संपर्क अधिकारी भूपेन्द्र रतूड़ी का कहना है कि, ‘विश्वविद्यालय अपने नियमों कानूनों से परिचालित होते हैं और वो स्वतंत्र इकाई हैं और उन्हें अपना शुल्क स्वयं निर्धारित करने का अधिकार है।’ एसजीआरआर तथा हिमालयन द्वारा अपना प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। निजी विश्वविद्यालय के लिए उच्च न्यायालय द्वारा जो दिशा निर्देश जारी किए गए हैं हम उनके अनुसार कार्यवाही करेंगे। इसी संदर्भ में जौलीग्रांट द्वारा एमबीबीएस की सीटों के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे गए थे, जिस पर उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा स्पष्टीकरण गया था,जिसे इन कॉलेजों द्वारा भेज दिया गया है।

आशिकी में बेटी बनी हैवान

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प्यार का अंधापन इस कदर भी अपनी हदें पार सकता है ये शायद ही किसी ने सोचा होगा। एक बेटी ने ही अपने प्यार को पाने की चाहत में अपने पुरे परिवार को जहर देकर जान से मारने का प्रयास किया, मगर समय पर अस्पताल पहुंचने से परिवार के पांच लोगों की जान किसी तरह से बच पायी। आशिक के प्यार में अंधी बेटी का ये कारनामा कहीं और का नहीं बल्कि उधमसिंहनगर के जसपुर क्षेत्र का है। जहां एक बेटी ने ही अपने पिता मां, दादी और दोनों भाईयों को अपने प्यार का दुश्मन मानते हुए जान से मारने की पुरी कोशिश कर डाली थी।
जसपुर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली कामिनी ने अपने आशिक की चाहत को पाने के लिए पुरे परिवार को खाने में जहर देकर मारने की पुरी कोशिश कर ली थी। मगर खाना खाने के बाद जब सभी की हालत खराब होने लगी तो किसी तरह से परिवार के पांच लोगो को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कडी मशक्कत के बाद डाक्टरों ने पांचों की जान बचाई। वहीं दुसरी ओर माता, पिता। दादी और दोनों भाईयों को जहर देने वाली घर की लाडली को घटना के बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
बताया जा रहा है कि युवती का पिछले लम्बे समय से पास के ही युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा है। परिवार वाले इस प्रेम प्रसंग के खिलाफ थे और आये दिन घर में विवाद कि स्थिति बनी रहती थी, जिससे युवती ने प्रेम को पाने के लिए जुर्म के इस रास्ते को चुना और बन गयी जीवन देने वाले माता पिता की जान की दुश्मन।  वहीं घटना के बाद पहले तो सभी को इलाज के लिए अस्पताल भर्ती कराया गया लेकिन जहर की पुष्टी होने के बाद पुलिस ने परिजनों के बयान के आधार पर आरोपी युवती को हिरासत में ले लिया है।
पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी, वहीं चिकित्सकों ने बताया कि सभी कि स्थिति स्थिर बनी है और इलाज जारी है। साल भर के प्यार में अपने माता पिता और भाईयों की कुर्बानी देने वाली क्रूर बेटी की इस करतूत से रिश्ते शर्मसार हुए हैं। आशिक के बहकावे में आकर जुर्म की दहलीज पर पहुंच चुकि इस युवती की प्रेम कहानी घटना के बाद भले ही परवान चढ जाए मगर समाज में इस बेटी को हमेशा ही माता पिता के दुश्मन के रुप में ही देखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने निजी ट्रामा सेंटर का किया उद्घाटन

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रिस्पना पुल के निकट एक निजी ट्रामा सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा की सड़कों पर वाहनों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है। प्रदेश में न्यूरो सर्जरी के चिकित्सकों का भी नितांत अभाव है। लोगों को आपात स्थिति में इलाज के लिए दिल्ली तक जाना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी प्रयासों से इस प्रकार के ट्रामा सेंटर खुलने से लोगों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने मां जगदम्बा ट्रामा सेंटर द्वारा कुल 70 बेड में से 30 बेड आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को निशुल्क उपचार हेतु उपलब्ध करवाने की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ट्रामा सेंटर में आने वाले लोग शीघ्र से शीघ्र स्वास्थ्य होकर यहां से जाएं, ऐसी मेरी कामना है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने ग्रीन इंडिया समाचार पत्र तथा गुर्जर समाज पर एक पुस्तक का विमोचन किया। राज्यमंत्री श्रीमती रेखा आर्य, विधायक श्री गणेश जोशी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवार को दी सांत्वना

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शहीद जीत बहादुर थापा के बंजारावाला आवास पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। विगत माह जम्मू कश्मीर में शहीद हुए लांस नायक जीत बहादुर थापा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने शहीद जीत बहादुर थापा की माँ को चार लाख रुपए, पत्नी को 6 लाख तथा दो लाख की अनुमन्य राशि का चैक सौंपा। इसके साथ ही शहीद थापा की पत्नी को उपनल के माध्यम से नौकरी का नियुक्ति पत्र भी सौंपा, शहीद की पत्नी को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

 मुख्यमंत्री ने बताया कि बंजारावाला के अंदर आने वाले सड़क को पक्का करवाया जाएगा तथा शहीद जीत बहादुर थापा के नाम पर उसका नामकरण किया जाएगा। एक प्रवेश द्वार भी शहीद थापा के नाम पर निर्मित किया जाएगा।

लिपस्टिक’ व ‘मुन्ना माइकल’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत

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इस शुक्रवार को रिलीज हुई दोनों नई फिल्मों की बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन धीमी शुरुआत हुई है। टाइगर श्रॉफ की फिल्म ‘मुन्ना माइकल’ ने पहले दिन 6.5 करोड़ की कमाई की, तो बालाजी द्वारा रिलीज निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ की पहले दिन की कमाई एक करोड़ से भी नीचे की रही।

पहले दिन की इस फिल्म की कमाई 90 लाख के आसपास तक रही। बेहद छोटे बजट के साथ बनी इस फिल्म की लागत पांच करोड़ रही, जबकि प्रमोशन का बजट एक करोड़ रहा। इसे मिलाकर छह करोड़ की लागत रही। दूसरी ओर, ‘मुन्ना माइकल’ का अधिकारिक तौर पर बजट 30 करोड़ से ज्यादा का रहा और पांच करोड़ के आसपास प्रमोशन का बजट रहा।
इन दोनों फिल्मों की पहले दिन की कमाई को लेकर फिल्मी कारोबार के जानकारों का कहना है कि कमाई के मामले में पहले दिन दोनों के आंकड़े निराश करने वाले हैं। अगले दो दिनों के लिए माइकल मुन्ना की संभावनाएं ज्यादा अच्छी बताई जा रही हैं और माना जा रहा है कि ये फिल्म वीकेंड तक 20 करोड़ का कारोबार कर सकती है। दूसरी ओर, ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ को लेकर संभावना है कि अगले दो दिनों में ये फिल्म चार करोड़ के आसपास कमाई कर सकती है। 

रेमो डिसूजा की वजह से ‘बची’ अक्षय कुमार की फिल्म

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11 अगस्त को रिलीज होने जा रही अक्षय कुमार की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ को ऑनलाइन लीक किए जाने का मामला कंट्रोल में आ गया है। फिल्म के निर्माण में अक्षय की पार्टनर कंपनी क्रीअर्ज की हेड प्रेरणा अरोड़ा ने मुंबई पुलिस की साइबर ब्रांच का हवाला देते हुए बताया कि मामला अब नियंत्रण में है और फिल्म को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

दो दिन पहले फिल्म के ऑनलाइन लीक होने की खबर से हड़कंप मच गया था। अक्षय कुमार की ओर से फौरन मामला साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज कराया गया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया, जिसके पास से पैनड्राइव में फिल्म की कॉपी बरामद हुई थी। अक्षय कुमार इसके लिए कोरियोग्राफर और डायरेक्टर रेमो डिसूजा को क्रेडिट देते हैं, जिनको सबसे पहले फिल्म के लीक होने की खबर मिली, उन्होंने ही तुरंत अक्षय कुमार की टीम को इसके लिए आगाह किया।

रेमो कहते हैं कि, ‘पाइरेसी से हम सबका नुकसान होता है, इसलिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।’ मामला संभल जाने के बाद कल देर शाम अक्षय कुमार की ओर से भी अपने चाहने वालों के नाम एक संदेश रिलीज किया गया, जिसमें अक्षय ने इस वारदात का हवाला देते हुए सबसे पाइरेसी से दूर रहने की अपील की और इस लड़ाई में सबसे सहयोग मांगा। 11 अगस्त को रिलीज होने जा रही ये फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को समर्पित की गई है। फिल्म में अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, सुधीर पांडे और अनुपम खेर मुख्य भूमिकाओं में हैं।