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पुराने हैंड ग्रेनेड को बम निरोधक दस्ते ने किया डिफ्यूज

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कंट्रोल रूम के माध्यम से थाना रायपुर को सूचना मिली कि एमडीडीए कॉलोनी लीची बाग के पास कच्चे रास्ते में बम जैसी कोई संदिग्ध चीज पड़ी है।

सूचना पर थाना रायपुर से पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा तथा बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। मौके से एक पुराना हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ, जिसे बम निरोधक दस्ते द्वारा सेंड बैग में रख कर अपने साथ डिफ्यूज करने के लिये फायरिंग रेंज में ले जाया गया।

प्रथमदृष्टया किसी अज्ञात कबाड़ी द्वारा आर्मी फायरिंग रेंज से अपने कबाड़ के सामान में उक्त हैंड ग्रेनेड को रख कर लाया गया प्रतीत होता है, जो संभवत: यहां गिर गया होगा। हैंड ग्रेनेड किन परिस्थितियों में उक्त स्थान पर आया, इस संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है।

विस अध्यक्ष ने 60 गरीब छात्रों को वितरित किए चेक

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देहरादून। विधान सभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल ने उदयन शालिनी फैलोशिप ट्रस्ट के माध्यम से 60 गरीब छात्राओं को छात्रवृत्ति के चेक वितरित किए।
रविवार को उदयन शालिनी फैलोशिप ट्रस्ट द्वारा वेल्हम गर्ल्स स्कूल में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में उन्होंने 60 गरीब छात्राओं को छात्रवृत्ति के चेक वितरित करते हुए उदयन शालिनी फैलोशिप के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह ट्रस्ट समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता एवं मार्गदर्शन प्रदान कर उनके पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए कार्य कर रही है। इस अवसर पर उदयन शालिनी फेलोशिप ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. किरण मोदी ने बताया कि ट्रस्ट के माध्यम से 8 राज्यों में बारह हजार सात सौ गरीब छात्राओं एवं उनके परिवार समुदाय को लाभान्वित किया जा चुका है।
श्री अग्रवाल द्वारा कमजोर वर्ग के छात्राओं को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने और स्वच्छता को लेकर शपथ दिलायी गयी। उन्होंने समाज में जितने भी सक्षम वर्ग के लोग है उनसे आहवान किया है कि वे भी अपने स्तर से इन गरीब छात्राओं को अपना लक्ष्य प्राप्त करने की सलाह एवं मार्गदर्शन प्रदान करें। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में गीता शर्मा उप प्रधानाचार्य वेल्हम गर्ल्स स्कूल, डॉ. किरण मोदी, गिरधारी लाल काक, शील अग्रवाल, विमल डबराल, डा. दलजीत कौर, श्रीमती रोमिला यादव, सुमन तिवारी उपस्थित थे।

मिस ग्लोबल क्वीन इंडिया प्रतियोगिता में दून की प्रिया लेंगी भाग

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देहरादून। कोरिया में आयोजित होने वाले ‘मिस ग्लोबल ब्यूटी क्वीन इंडिया-2017’ में दून की प्रिया शाह भी प्रतिभाग करेंगी। प्रतियोगिता के लिए देशभर से चुने गए 11 प्रतिभागियों में प्रिया का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा है। अब दूनवासियों को ग्लोबल प्रतिस्पर्धा में प्रिया से खासी उम्मीदें हैं।

देहरादून निवासी प्रिया शाह (22 वर्ष) ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ग्लोबल ब्यूटी क्वीन इंडिया-2017 में उनका चयन हो गया है। प्रतियोगिता कोरिया में दो से 22 अक्टूबर तक होगी। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के लिए मुंबई में देशभर से 11 टॉप मॉडल्स का चयन हुआ है। उनमें वह टॉप में चुनी गई हैं। प्रतियोगिता में विदेश में रह रही भारतीय युवतियां भी प्रतिभाग करेंगी।

प्रिया शाह ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन बिग ब्रेक एंटरटेनमेंट की ओर से किया जाता है। इसमें प्रतिभागी मॉडल्स के अनुशासन, मेहनत, टैलेंट, बुद्धिमता, सुंदरता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रिया ने कहा कि प्रतियोगिता किसी भी युवा मॉडल के लिए भविष्य की राह खोलने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रिया का कहना है कि वह इस प्रतियोगिता के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्हें प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतियोगिता में चयन होने के बाद से देहरादून समेत अन्य क्षेत्रों के मित्रों एवं परिचितों लगातार शुभ संदेश आ रहे हैं। वहीं, देहरादून में प्रिया का प्रतियोगिता के लिए चयन होने से खुशी का माहौल है। अब दूनवासी प्रतियोगिता में प्रिया से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।

काशीपुर की बेटी के बरसेंगे वियतनाम में मुक्के

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काशीपुर की बेटी प्रियंका के मुक्के अब वियतनाम में बरसेंगे, मैरिकाम के साथ प्रियंका अपने मुक्कों का दम दिखायेगी। अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर प्रियंका चौधरी वियतनाम में होने वाली एशियन महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता में अपने मुक्कों से प्रतिद्वंद्वियों को ढेर करेंगी। प्रियंका 60 किलो भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व  करेंगी। उनके साथ ओलंपियन मैरीकॉम समेत नौ और मुक्केबाज भारतीय टीम में शामिल हैं, यह प्रतियोगिता चार से 10 नवंबर के बीच वियतनाम में होगी।
आर्य नगर की प्रियंका ने बताया कि, “महिला बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए 25 से 28 सितंबर तक दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स स्टेडियम में चयन प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें 10 महिला मुक्केबाजों का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि चयन के दौरान उनके भार वर्ग में काफी कठिन मुकाबला था।”
मालूम हो कि प्रियंका के पिता पूर्व कोतवाल विजय चौधरी भी एथलीट रहे हैं, मां आशा चौधरी ने बताया कि, “बेटा और बेटी में फर्क नहीं किया, यही वजह है कि आज प्रियंका इस मुकाम पर है, प्रियंका तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। प्रियंका के बड़े भाई पुष्पेंद्र चौधरी देहरादून में सेल्स टैक्स कमिश्नर हैं, वहीं दूसरे भाई विडियोकॉन में मैनेजर।”
रोजाना आठ घंटे बहा रही पसीना
प्रियंका चौधरी ने बताया कि फुफेरी बहन और पंतनगर विवि असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट्स पूनम त्यागी से प्रेरणा लेकर मुक्केबाजी में करिअर बनाने की ठानी और 2003 से बॉक्सिंग सीखनी शुरू की। 2008 में स्पोर्ट्स स्टेडियम में साई कोच हरजिंदर सिंह संधू के प्रशिक्षण से उनकी प्रतिभा में और निखार आया। सफलता का श्रेय उन्होंने कोच संधू को दिया। प्रियंका अब तक वह कई पदक जीत चुकी हैं और 2014, 2015 और 2016 में नेशनल बॉक्सिंग चैंपियन भी रह चुकी हैं। खेलों को लेकर सुविधा को लेकर प्रियंका का कहना है कि दूसरे राज्यों के मुकाबले अभी प्रदेश बहुत पीछे है। अगर यहां सुविधाएं बढ़ाई जाएं तो यहां के बच्चे बहुत आगे जाएंगे।
भारतीय टीम में शामिल खिलाड़ी
वियतनाम में होने वाली महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप के 48 किलोग्राम भार वर्ग में मैरीकॉम, 51 किग्रा में नीरज, 54 किग्रा में शिक्षा, 57 किग्रा में सोनिया, 60 किग्रा में प्रियंका चौधरी, 64 किग्रा में एल सरिता देवी, 69 किग्रा में लवलेना नॉट, 75 किग्रा में स्वीटी, 81 किग्रा में पूजा रानी, 81 से अधिक किग्रा में सीमा पूनिया भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

फिर से नदियों में दौडेंगे खनन के वाहन

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सरकार की खनन से झोली भरने के साथ-साथ जनता को भी राहत देने के मकसद से पट्टों से खनन व चुगान कल से शुरू हो गया। इससे हल्द्वानी के 28 पट्टों में बेल्चे-फावड़े खनकने लगेंगे। साथ ही सरकार की मंशा का अनुपालन सुनिश्चित न करने पर वन निगम व अन्य जिम्मेदार विभागों पर भी कार्रवाई होगी।

गौला, कोसी, दाबका, नंधौर आदि नदियों से वन निगम द्वारा कराए जाने वाले खनन के अलावा पट्टों पर भी जिले में खनन होता है। बारिश को देखते हुए जून से निकासी बंद होने के बाद नदियों के अलावा खनन पट्टों से भी खनन/चुगान बंद करा दिया गया था। तब से लोगों को स्टॉक का रेता-बजरी आदि महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। दूसरी ओर सरकार को अपनी झोली भी भरनी है। ऐसे में सरकार की ओर से आनन फानन में सभी जिलों को खनन कार्य एक अक्टूबर से शुरू करवाने का फरमान जारी हो गया।

नैनीताल जनपद में गौला से खनन मामले में हाई कोर्ट के स्टे को देखते हुए एक अक्टूबर से काम शुरू हो पाना संभव नहीं है। पांच अक्टूबर को खनन गेटों पर कांटे लगने के मामले में सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। इसे देखते हुए उपनिदेशक खनन राजपाल लेघा की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने सभी खनन पट्टों पर एक अक्टूबर से चुगान कार्य शुरू कराने का आदेश जारी कर दिया है।

एक अक्टूबर से हर हाल में पट्टों से खनन निकासी शुरू कराने के लिए शासन स्तर पर जबरदस्त दबाव है। वहीं पट्टा स्वामी भी इसके लिए काफी समय से टकटकी लगाए हुए हैं। हालांकि पिछले साल अक्टूबर अंत में ही पट्टों से खनन शुरू हो सका था, ऐसे में वन निगम, वन विभाग, आरटीओ एवं जिला प्रशासन की जिम्मेदारी व जवाबदेही भी अचानक बढ़ जाएगी।

त्रिवेणी घाट चौक से चन्द्रभागा पुल तक मुश्किल हो गया चलना 

चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार, पर्यटन और योग नगरी के रूप में पुरे विश्व में अपनी अलग पहचान बना चूका ऋषिकेश लगातार हो रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण से त्रस्त है। देश भर से यहाँ घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यहाँ की संकरी गलियो और राष्ट्रीय राजमार्ग में सिर्फ जाम ही जाम मिलता है,वीकेंड में हालात इंतने बुरे हो जाते है कि ट्रेफिक रेंग रेंग के चलता है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक स्थानीय प्रशाशन ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान नहीं छेड़ा है ,जिसके चलते अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद है। आलम यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 72 के त्रिवेणी घाट चौक से चन्द्रभागा पुल तक जाम की समस्या से आम जनता के साथ साथ पर्यटकों को भी निजात नहीं मिल पा रही है।
शहर की सामाजिक संस्थाए कई बार इस और प्र्शशन का ध्यान आकर्षित कर चुकी है लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जिसके तीर्थनगरी के लोगो में रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर प्रशाशन का डंडा नहीं चलता तब तक तीर्थ नगरी की फिजा नहीं सुधरेगी, अब देखने लायक होगा की ऋषिकेश में लोगों को जाम से निजाद कब तक मिलेगी ?

फिर सुर्खियों में आयी चमोली पुरसाड़ी जेल

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रुड़की के एक व्यापारी की हत्या की साजिश के आरोप में रुड़की में गिरफ्तार चार शार्प शूटरों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें इस हत्या को अंजाम देने के लिए चमोली जेल में बंद प्रवीण वाल्मीकि ने कहा था।

पुरसाड़ी जेल के कारापाल प्रमोद पांडेय ने बताया कि प्रवीण वाल्मीकि एक साल से पुरसाड़ी जेल में बंद है, जिसे एकांत में रखा गया है। यहां पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम है और जब से वह इस जेल में बंद है, उससे कोई भी मिलने नहीं आया है। फोन से संपर्क का तो मतलब ही नहीं होता है। ऐसे में यह कहना कि उसने यहां से किसी से संपर्क किया हो गलत है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वह जब यहां से कोर्ट में हाजिरी के लिए रुड़की व हरिद्वार गया तो उस वक्त किसी ने उससे मुलाकात की हो। बताया कि रुड़की, देवबंद और हरिद्वार में विभिन्न मामलों में वह कोर्ट में हाजिर होने के लिए जाता रहता है। बताते चलें कि चमोली जिले की पुरसाड़ी जेल में इससे पहले भी विभिन्न अपराधों में सजा याफ्ता कैदी सुशील गुर्जर, सचिन खोक्कर, वसीम कालिया आदि रह चुके है। खुंखार अपराधियों को विभिन्न जेलों में बारी-बारी से शिफ्ट किया जाता रहता है। उनमें पुरसाड़ी जेल भी एक है। 

सरकार से वार्ता नहीं होने से शिक्षा प्रेरकों में रोष

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देहरादून। शिक्षा प्रेरकों को राज्य सरकार में समायोजित/राज्य संचालित योजनाओं से जोड़े जाने व धरने के दौरान साथी शिक्षा प्रेरक गुड्डूलाल की मौत पर सरकार से 50 लाख का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाने समेत सात मांगों को लेकर तीसरे दिन धरने पर डटे रहे। शिक्षा प्रेरक संगठन का एक प्रनिधिमंडल शनिवार को मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन वार्ता नहीं हो सकी जिससे शिक्षा प्रेरकों में रोष है।

शिक्षा प्रेरक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राणा ने कहा कि सभी शिक्षा प्रेरक धरना स्थल पर राज्य सरकार के विरोध में रतजगा करेंगे। इस दौरान उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी शिक्षा प्रेरक के साथ कोई अनहोनी घटित होती है तो उसके परिवार के सदस्य को मृतक आश्रित में नौकरी का प्रावधान दिया जाए। गौरतलब हो कि शिक्षा प्रेरक संगठन 27 सितंबर से धरने पर बैठे है। शिक्षा प्रेरकों का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
यह शिक्षा प्रेरकों की मांग
1.सभी शिक्षा प्रेरकों को राज्य सरकार में समायोजित किया जाए /राज्य संचालित योजनाओं से जोड़ा जाए ।
2.सभी शिक्षक प्रेरकों का मानदेय 3000 रुपये से बढ़ाकर संविदा कर्मचारी के बराबर किया जाए।
3.सभी शिक्षा प्रेरकों को भी आयोग के कार्य करने की स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ।
4.सभी शिक्षा प्रेरकों से डीएलएड कराया जाए।
5.सभी शिक्षा प्रेरकों को नमामि गंगे व स्वच्छ भारत कार्यक्रम से जुड़ा जाए।
6.राज्य सरकार पर भारत सरकार की ओर से रुका हुआ मानदेय निर्गत कराया जाए।
7.धरने के दौरान शिक्षा प्रेरक मृतक गुड्डू लाल के परिवार का उचित मुआवजा में मृतक के परिवार के सदस्य को सरकारी सेवा में नौकरी दी जाए।

केंद्रीय गृह मंत्री के साथ शस्त्र पूजा में शामिल हुए सीएम

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देहरादून। दशहरा पर्व पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को रिमखिम, जोशीमठ एवं औली में आईटीवीपी कैम्प में जवानों से मुलाकात की और दशहरा एवं दीपावली पर्व की बधाई दी। गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ने जोशीमठ में आईटीबीपी के शस्त्र पूजा कार्यक्रम में भाग लिया और निःशुल्क चिकित्सा शिविर व रक्तदान शिविर का निरीक्षण भी किया।
शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बद्रीनाथ पहुंचकर बीआरओ के विश्रामगृह में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उन्होंने दशहरा पर्व पर रिमखिम, जोशीमठ और औली में जवानों से मुलाकत कर हौसला अफजाई की। इस अवसर पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की पत्नी ने आईटीबीपी के जवानों को विजयदशमी के पर्व पर टीका लगाकर बधाई दी। विजयदशमी पर्व के अवसर पर आईटीबीपी कैम्प जोशीमठ में आयोजित कार्यक्रम में गृहमंत्री ने शस्त्र पूजा कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा हमारे आईटीबीपी के जवानों ने विकट परिस्थितियों में भी कठिनाइयों एवं ऊंचाई पर विजय प्राप्त की है। 1962 से लगातार आईटीबीपी के जवान देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत हिमवीरों को देश की सीमाओं की सुरक्षा करने से रोक नहीं सकती। जवानों को स्नो स्कूटर, अच्छी क्वाल्टी की गाड़ियां, गर्म कपड़े व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सीमा पर तैनात जवानों को अपने परिवार के साथ बात करने के लिए सस्ती दर पर बीएसएनएल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
डोकलाम विवाद पर पत्रकारों के सवालों का जबाव देते हुए गृहमंत्री ने बताया कि सकारात्मक सोच के साथ डोकलाम विवाद को सुलझाया गया है। गृहमंत्री ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर निवास कर रहे देश के नागरिकों के लिए केन्द्र सरकार हरसम्भव सहायता देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों से पलायन को रोकने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने आईटीबीपी के जवानों को भी सीमा पर रहने वाले नागरिकों को दोस्त बनाकर उनके अन्दर विश्वास जगाने को कहा।
गृहमंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में बार्डर एरिया डेवलपमेंट (बीएडीपी) के तहत संचालित कार्यो की भी सराहना की तथा बीएडीपी के तहत दी जाने वाली धनराशि को दोगुना करने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य के पांच जिलों के नौ ब्लॉकों में बीएडीपी के तहत कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। बताया कि बीएडीपी के तहत देश में 27 सड़कें स्वीकृत थीं, जिसमें से 10 सड़कें अकेले उत्तराखण्ड राज्य के लिए स्वीकृत की गई है तथा दूसरे चरण में भी राज्य के लिए अन्य सड़के स्वीकृत की जाएंगी। उन्होंने सड़क निर्माण के कार्यो में तेजी लाने पर भी जोर दिया।
गृहमंत्री ने आईटीबीपी के जवानों तथा सीमा पर रह रहे सभी नागरिकों को दशहरा व दीपावली पर्व की बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्होंने जोशीमठ में आईटीबीपी की प्रथम वाहनी को खाने के लिए दो लाख की धनराशि भी दी। इसके साथ उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं को साड़ियां एवं बच्चों को स्कूल बैग व खेल सामग्री भी वितरित की। आईटीबीपी की प्रथम वाहिनी जोशीमठ ने केन्द्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री को विजयदशमी के अवसर पर प्रतीक चिन्ह एवं शॉल भेंट किया।
इस अवसर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य आगमन पर केन्द्रीय गृहमंत्री का प्रदेश की ओर से हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। आईटीबीपी कैम्प में जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा में प्रदेश के शहीद जवानों के आश्रित को राज्य सरकार द्वारा सरकारी नौकरी प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि सीमांत क्षेत्रों के गांवों में आय के साधन बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं। अच्छी किस्म के अखरोट एवं चिलगोजे के लाख-लाख पेड़ लगाने की योजना है, जिसके तहत देहरादून में नर्सरी विकसित की गई है और दो साल में ये सभी पौधे सीमांत क्षेत्रों में नर्सरी से ट्रान्सप्लांट किए जाएंगे। साथ ही दो ईको टास्कफोर्स कम्पनी बनाने का फैसला किया गया है, जिसमें भूतपूर्व सैनिकों की भर्ती की जाएगी। इस अवसर पर डीजी आईटीबीपी आरके पंचनन्दा, आईटीबीपी के कमांडेन्ट विक्रान्त थपलियाल, आईजी एचएस गुरैया सहित आईटीबीपी के जवान, क्षेत्रीय जनता आदि मौजूद रहे।

सीमा पर निवास करने वाले नागरिकों को केंद्र सरकार देगी मददः राजनाथ सिंह

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गोपेश्वर। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर निवास कर रहे देश के नागरिकों के लिए केंद्र सरकार हर संभव सहायता देने की कोशिश कर रही है। कहा कि सीमांत गांवों से पलायन को रोकने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आईटीबीपी के जवानों को भी सीमा पर रहने वाले नागरिकों को दोस्त बनाकर उनके अन्दर विश्वास जगाने को कहा। उत्तराखंड दौरे पर आए गृहमंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को जोशीमठ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

गृहमंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में बार्डर एरिया डेबलपमेंन्ट (बीएडीपी) के तहत संचालित कार्यों की भी सराहना की तथा बीएडीपी के तहत दी जाने वाली धनराशि को दो गुना करने की बात कही। कहा कि राज्य के 05 जिलों के 09 ब्लॉकों में बीएडीपी के तहत कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। बताया कि बीएडीपी के तहत देश में 27 सड़के स्वीकृत थी जिसमें से 10 सड़के अकेले उत्तराखंड राज्य के लिए स्वीकृत की गयी है तथा दूसरे चरण में भी राज्य के लिए अन्य सड़के स्वीकृत की जाएंगी। उन्होंने सड़क निर्माण के कार्यों में तेजी लाने पर भी जोर दिया।
गृहमंत्री ने जोशीमठ सुनील में आईटीबीपी की प्रथम वाहनी को बडा खाने के लिए 02 लाख की धनराशि भी दी। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं को साडियां एवं बच्चों को स्कूल बैग व खेल सामग्री भी वितरित किए। आईटीबीपी की प्रथम वाहिनी सुनील, जोशीमठ की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री को विजयदशमी के अवसर पर प्रतीक चिन्ह एवं शाॅल भेंट किया।
इस अवसर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य आगमन पर केन्द्रीय गृहमंत्री का प्रदेश की ओर से हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। आईटीबीपी कैंप में जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा में प्रदेश के शहीद जवानों के आश्रित को राज्य सरकार द्वारा सरकारी नौकरी दी जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि सीमांत क्षेत्रों के गांवों में अच्छी किस्म के अखरोट एवं चिलगोजे के 04 लाख पेड़ लगाए जाने की योजना बनाई गई है, जिसके तहत देहरादून में नर्सरी विकसित की गई है तथा 02 सालों में ये सभी पौधे सीमांत क्षेत्रों में नर्सरी से ट्राॅन्सप्लांट किए जाएंगे। इसके साथ ही दो ईको टास्कफोर्स कम्पनी बनाई गई है जिसमें भूतपूर्व सैनिकों की भर्ती की जा रही है। इस अवसर पर डीजी आईटीबीपी आरके पंचनन्दा, आईटीबीपी के कमांडेन्ट विक्रान्त थपलियाल, आईजी एचएस गुरैया सहित आईटीबीपी के जवान, क्षेत्रीय जनता आदि मौजूद थे।