Page 680

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर, 17 केस पॉजिटिव

0

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। अब तक स्वाइन फ्लू के 21 मामले दिल्ली टेस्ट के लिए भेजे जा चुके हैं, इनमें से 17 केस पॉजिटिव आ चुके हैं। चार मामले अब तक संदिग्ध पाए गए हैं। उधर, पिछले 8 दिनों में 4 मरीजों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी है।

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के कहर से अब तक जनवरी से 21 मामले स्वाइन फ्लू के आ चुके हैं। जिसमें से 17 केस पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि 4 मामले संदिग्ध अवस्था में हिमालयन अस्पताल, मैक्स, सीएमआई व दून अस्पताल में भर्ती हैं। सीएमओ डॉ. टीसी पंत ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। और किसी भी मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इधर जिन 17 केस पॉजिटिव आए हैं उनमें से 10 देहरादून, 3 यूपी और 4 अन्य जिलों से आए हैं। जो संदिग्ध मरीज अस्पताल में भर्ती हैं उनमें से एक टिहरी, एक पौड़ी, दो देहरादून के मरीज हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वाइन फ्लू को देखते हुए आइसोलेशन वार्ड बना दिया गया है। वार्ड में अभी 10 बेड रखे गए हैं। दून अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अभी तक 10 बेड वार्ड में रखे गए हैं। जैसे-जैसे मरीज बढ़ेंगे, वैसे ही बेड बढ़ा दिए जाएंगे।

एम. वेकैया नायडूः परिचय और राजनीतिक सफर

0

आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के एक छोटे से गांव चवतपालेम के किसान परिवार में जन्मे एम. वेंकैया नायडू ने अपने संघर्ष के बूते धीरे-धीरे छोटे से कस्बे से निकल राष्ट्रीय सियासत की फलक पर चमकने तक का सफर पूरा किया। उपराष्ट्रपति चुनाव में राजग के उम्मीदवार नायडू का सार्वजिनक जीवन काफी लंबा है। उनके पास लगभग 25 वर्ष का संसदीय अनुभव है। वह मौजूदा समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में सूचना प्रसारण व शहरी विकास मंत्री हैं। इतना ही नहीं, उनको मोदी सरकार में संकटमोचक की भूमिका में भी देखा जाता है।

उपराष्ट्रपति चुनाव में आंकड़ों पर गौर करें तो राजग के पास जीत के लिए पर्याप्त मत हैं। ऐसे में चार बार से राज्यसभा सदस्य रहे नायडू का उच्च सदन का सभापति बनना तय है।
एम. वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले स्थित चवतपालेम में हुआ था। नायडू 2002 व 2004 (दो बार) में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री भी रह चुके हैं।
नायडू ने नेल्लोर के वी.आर. हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और वी.आर. कालेज से राजनीति तथा राजनयिक अध्ययन में स्नातक किया। वे स्नातक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए| तत्पश्चात उन्होंने आन्ध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम से कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की। वह 1974 में वे आंध्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुये। कुछ दिनों तक वे आंध्र प्रदेश के छात्र संगठन समिति के संयोजक भी रहे। 70 के दशक में ही वह संघ से जुड़े।
वेंकैया नायडू की पहचान हमेशा एक आंदोलनकारी के रूप में रही है। वे 1972 में ‘जय आंध्र आंदोलन’ के दौरान पहली बार सुर्खियों में आए। उन्होंने इस दौरान नेल्लोर के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए विजयवाड़ा से आंदोलन का नेतृत्व किया। छात्र जीवन में उन्होने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित होकर आपातकालीन संघर्ष में हिस्सा लिया। वे आपातकाल के विरोध में सड़कों पर उतर आए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1973-74 आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे। आपातकाल के बाद वे 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के युवा शाखा के अध्यक्ष रहे। नायडू 1978-85 में आंध्र विधानसभा के दो बार सदस्य रहे। वर्ष 1988 से 1993 तक वह आंध्र प्रदेश भाजपा ईकाई के अध्यक्ष रहे। उसके बाद वह 1993 से 2000 तक भाजपा की केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय महासचिव बने। इस अवधि में वह पार्टी की सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड के सचिव, राष्ट्रीय प्रवक्ता समेत कई अहम पदों पर दायित्व निर्वहन किया। 1998 कर्नाटक से वह 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं ।

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह ने किया रोजगार मेले का उद्घाटन

0

राज्य के वन एवं आयुष मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत ने सर्वे चौक स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में आयोजित रोजगार मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डाॅ हरक सिंह रावत ने कहा कि, ‘वर्तमान में सरकारी नौकरी में सीमित अवसर हैं, उत्तराखण्ड का अधिकांश क्षेत्र पर्वतीय होने के चलते उद्योग व खेती के लिए अनुकूल न होने केे कारण राज्य सरकार स्किल्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को हुनरमंद बना रही है तथा सेवायोजन विभाग के प्लेटफार्म द्वारा विभिन्न कम्पनियों के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है।’

उन्होने विभागीय अधिकारियों को सम्बन्धित विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए आउटसोर्सिंग वाली सेवाओं का पंजीकरण भी सेवायोजन विभाग के माध्यम से करने सम्बन्धित प्रस्ताव निर्मित करने तथा पंजीकृत बेरोजगार युवाओं के चयन में उचित पारदर्शिता अपनाने के निर्देश दिये।

उन्होने कहा कि राज्य सरकार ऐसे आई.टी.आई विद्यालय तथा ऐसे ट्रेड को बन्द करेंगे जहां पर्याप्त छात्र/छात्रा नही हैं तथा जो क्रमशः व्यापार की मांग आधारित जाॅब की पूर्ति करने में नाकाम है। उन्होने कहा कि हम आई.टी.आई में ऐसे ट्रेड शामिल करेंगे जो युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए ऋण तथा अन्य तकनीक सहयोग साथ करने में सहयोग दिया जायेगा।

इस अवसर पर निदेशक सेवायोजन/अपर सचिव अशोक कुमार ने कहा कि, ‘आज के रोजगार मेले में 15 कम्पनियों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए हैं तथा अपनी-अपनी आवश्यकता के अनुसार युवाओं को प्रेजेन्टेशन दे रही है। उन्होने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करने का कार्य भी किया जा रहा है तथा रोजगार पाने में उनकी हर सम्भव मदद भी की जा रही है।’

काशीपुर में चोर चुस्त और पुलिस सुस्त

0

लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने काशीपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक सप्ताह में तीन दुकानों में चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले शातिर चोर अब भी खुले में घुम रहे हैं और लगातार दुकानों से चोरी की वारदातें बढती जा रही है, जबकि चोरों को पकडने के पुलिस के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

ताजा मामला काशीपुर के रामनगर रोड का है जहां चोरों ने एक दुकान से नगदी समेत लाखों का सामान चोरी कर लिया। चोर गोदाम की खिड़की तोड़कर दुकान में घुसे। चोर इतने शातिर थे कि उन्होंने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ डाले। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी ली, पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है। पुलिस ने पूछताछ के लिए दो लोगों को हिरासत में लिया है।

आर्य नगर निवासी नितिन अरोरा की काशीपुर-रामनगर रोड स्थित प्रकाश रेडियम स्टोर नाम से दुकान है। शनिवार रात नितिन रोज की तरह दुकान बंद कर घर चले गए। रविवार सुबह जब उन्होंने दुकान खोली तो दुकान का सारा सामान बिखरा हुआ था। दुकान में तीनों सीसीटीवी कैमरे टूटे हुए थे। इसे देख उनके होश उड़ गए, उन्होंने गल्ले में देखा तो उसमें रखे करीब 30 हजार रुपये भी गायब थे। उन्होंने बताया कि चोर दुकान से कार में लगने वाले म्यूजिक सिस्टम, एलसीडी सहित एक लाख से भी अधिक का सामान ले गए।

नितिन ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर दुकान है और पहली मंजिल पर गोदाम है। चोर दूसरे मकान से गोदाम तक पहुंचे और गोदाम की खिड़की तोड़कर अंदर घुस आए। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले एक कबाड़ी आया था और उसे गोदाम में ले जाकर कबाड़ बेचा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी ली। पुलिस ने पास में ही एक दुकान के चौकीदार व एक कबाड़ी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस आसपास की दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है। सूचना पर व्यापार मंडल अध्यक्ष दीपक वर्मा सहित व्यापारी भी मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली। कटोराताल पुलिस चौकी इंचार्ज जयपाल चौहान ने बताया कि शक के आधार पर कबाड़ी व चौकीदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। चोरों का पता लगाया जा रहा है।

चार सालों से परिनियमावली की बाट जोह रहा तकनीकी विश्वविद्यालय

0

उत्तराखंड सरकार लगातार शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के दावे तो करती रही है, लेकिन हकीकत की जमीन पर सभी दावे और वादे धूल फांकते दिखाई देते हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार साल से उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूटीयू) की परिनियमावली शासन में अटकी है। शासन की इस सुस्ती के चलते यूनिवर्सिटी में तमाम अव्यवस्थाएं फैली हैं, इस कारण यूनिवर्सिटी की पूरी कार्यप्रणाली बेहाल हैं।

यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों को भारी टोटा है, अधिकारियों की गिनती भी नाम की है। आलम यह है कि यूनिवर्सिटी में नाम मात्र के अधिकारी ही काम काज को संभाल रहे हैं। दरअसल यूनिवर्सिटी स्थापना के वक्त यूनिवर्सिटी का एक्ट तो तैयार कर दिया गया, लेकिन परिनियमावली तय न होने के कारण एक्ट लागू करने में भी परेशानियां आ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो यूनिवर्सिटी का एक्ट जहां नीति निर्देशक का काम करता है, वहीं एक्ट काम कैसे करेगा यह परिनियमावली तय करती है। इसके अलावा यूटीयू में अभी तक केवल वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और फाइनेंस कंट्रोलर ही नियुक्त हो पाए हैं। जब तक परिनियमावली तय नहीं होगी अन्य पदों पर नियुक्ति संभव नहीं होगी। परिनियमावली के न होने से यूनिवर्सिटी के आंतरिक कार्यो में बाधा आना स्वभाविक है। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पीके गर्ग का कहना है कि यूनिवर्सिटी की ओर से तीन साल पहले ही परिनियमावली तैयार कर शासन को भेज दी गई थी, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। परिनियमावली तय हो जाएगी तो यूनिवर्सिटी को आ रही तमाम परेशानियों को दूर किया जा सकेगा।

परिनियमावली नहीं होने से आने वाली दिक्कतें-
– यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट्स का स्वरूप कैसा हो।
– कॉलेजों को संबद्धता देने का कार्य।
– बोर्ड ऑफ स्टडीज का स्वरुप कैसा हो।
– नई डिग्री या पाठ्यक्रम को कैसा होना चाहिए।
– यूनिवर्सिटी में ग्रुप बी और सी की नियुक्ति प्रक्रिया।
– विभागों को सुविधाओं से संपन्न करना।
– यूनिवर्सिटी में एचओडी और डीन आदि का कार्यकाल।

उत्तराखंड में पहली बार फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी 

उत्तराखंड के लोगों को मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जल्द ही सस्ते में फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी की सहूलियत देने जा रहा है जिसमे दिल के मरीजों को कम समय मे बेहतर ईलाज मिल सकेगा।

ऋषिकेष स्तिथ एक निजी होटल में मैक्स अस्पताल के सिनियर कंसल्टेंट डॉ मनीष मेसवानी ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी। मीडिया से बात करते हुए डॉ मनीष मेसवानी ने बताया कि मैक्स अस्पताल की पहल से फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी शुरू किया है जिसमें प्रदेश के लोगों को कम खर्चे में बाईपास सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी।

vlcsnap-2017-07-17-14h39m40s584

उन्होंने बताया की अभी तक बाईपास सर्जरी के ईलाज में कई दिन लग जाते थे लेकिन अब फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी के जरिये कुछ घंटों में ही मुमकिन हो सकेगा, साथ ही साथ जरूरतमंदों को 25 से 35 हजार तक की मेडिकल सुविधा की दी जाएगी।

 

 

केदारनाथ के पास जल्द शुरु होंगे जंगल सफारी और होमस्टे

0

केदारनाथ मंदिर में आने वाले पर्यटकों को क्षेत्र में स्थानीय लोगों के जीवन का अनुभव कराने के साथ-साथ आस-पास के घने जंगलों के अलग-अलग वनस्पतियों और जीवों से परिचित होने के अवसर प्रदान करने के लिए, जिला प्रशासन जंगल सफारी को शुरू करने की प्रक्रिया में है। जल्द ही केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को जंगल सफारी और ‘रुरल एक्सपिरियेंस पैकेज को अनुभव करने का मौका मिलेगा।

रुद्रप्रयाग डीएम मंगेश घिल्डियाल के अनुसार, जिसके क्षेत्राधिकार में केदारनाथ क्षेत्र आता है, ने कहा कि, ‘यह कदम पर्यटक संख्या में आ रही तेज गिरावट को कम करेगा जो बरसात के मौसम में केदारनाथ में देखा गया है। इतना ही नहीं यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बनाए रखेगा, जो पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है।’ उन्होंने कहा कि, ‘इस कदम से उन जगहों को बढ़ावा मिलेगा जो आज तक लोगों ने देखी भी नहीं हैं और जो पहाड़ों की खुबसूरती से लकदक है, इस पहल से टूरिस्ट का फुटफाल भी अच्छा होगा।’

घिल्डियाल ने कहा, “हम केदारनाथ के आसपास के क्षेत्रों की पहचान करने की प्रक्रिया में हैं जहां जंगल सफारी और ग्रामीण पर्यटन की पहल की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि, ‘रात में सफारी करने के लिए पर्यटकों के लिए चुनिंदा स्थानों पर मचान बनाने की योजना भी है, जिससे रात को पर्यटक तेंदुए, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे जानवरों को देखा सकते हैं। इसके अलावा विलेज होमस्टे के जरिए पर्यटक गांववालों के साथ मधुमक्खी पालन और पहाड़ी खेती जैसी गतिविधियों में भागीदारी करके हिमालयी गांवों में जीवन का अनुभव करने में सक्षम होगें।’ घिल्डियाल का मानना हैं कि, “खेतों में बैलों की खेती करके, पारंपरिक व्यंजनों की बनाने में मदद करने और गांव की रोजमर्रा के कामों में भाग लेने से पर्यटकों को एक अलग तरह का अपना अनुभव मिल सकता है जो किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शायद ही मिलता है। ‘

उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी सतीश बहुगुणा ने कहा कि, ‘इस पहल से बड़ी संख्या में पर्यटकों का आर्कषण मिलेगा, यह सोच अपने आप में बिल्कुल सटीक है क्योंकि आजकल कई पर्यटकों को होटल के बजाय घरों में रहना पसंद हैं और उस जगह की संस्कृति के बारे में जानने और एक परिवारिक माहौल में रहना पसंद हैं।’

स्थानीय एनजीओ की गायत्री देवी ने कहा कि, ‘कई अनुभव हैं जो पर्यटकों के गांवों में हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कई गांववाले मधुमक्खी पालन कर रहें हैं जिसके बारे में वे पर्यटकों को बता सकते हैं और उन्हें अपने मधुमक्खी पालन के ओरिजिनल शहद बेच सकते हैं।’

यहां जाने के लिए रखनी पडती है जान हथेली पर

0

देश की नेपाल और चीन सीमा से लगे सीमांत क्षेत्र जैसे पिथौरागढ़ में कागजी विकास के लंबे-चौड़े दावे होते हैं। इन दावों की हकीकत गोरी नदी घाटी में देखने को मिलती है। जहां आज भी गोरी सहित उसकी सहायक नदियों को पार करने के लिए कच्चे झूलापुल और जानलेवा गरारियां ही बनी हैं। सचाई तो यह है कि डोलने वाले झूला पुल और जानलेवा गरारिया दर्जनों गांवों की लाइफ लाइन हैं।

विश्व प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली विशाल गोरी नदी और उसकी सहायक नदियां तिब्बत सीमा से लगे क्षेत्र में जनजीवन को थर्राती रहती हैं। ग्रीष्मकाल में जब बर्फ पिघलती है तो सभी नदियों का जल स्तर बढ़ जाता है। मानसून काल में तो ये नदियां विकराल रूप धारण कर लेती हैं। मिलम से लेकर जौलजीवी तक लगभग 132 किमी तक गोरी नदी के किनारे घनी बसासत है। नदी के पूर्वी छोर की तरफ जहां बाजार, विद्यालय सहित अन्य उपक्रम हैं तो पश्चिमी छोर पर बड़े-बड़े गांव हैं। कुछ गांवों की तो स्थिति यह है कि खेत भी नदी के दूसरी तरफ हैं। इसके चलते ग्रामीणों को रोज नदी के दूसरी तरफ जाना पड़ता है।

brige

विकास का सच यह है कि जौलजीवी से लेकर मिलम तक 132 किमी की दूरी पर मात्र तीन मोटर पुल जौलजीवी, कौली और मदकोट में हैं। जौलजीवी से कौली की दूरी 15 किमी जबकि कौली से मदकोट की दूरी 30 किमी है। इसके अलावा गर्जिया में सौ साल पुराना झूला पुल, चामी, बंगापानी में झूला पुल हैं। हुड़की, आलम, फगुवा और बसंतकोट के पास गरारी हैं। जो सभी क्षतिग्रस्त हैं। इन गरारियों से आर-पार करने में प्रतिवर्ष कई लोग जानें चली जाती हैं। इसके अलावा उच्च हिमालय में भी गोरी नदी पर कच्चे पुल हैं, जो प्रतिवर्ष शीतकाल में हिमपात से तो मानसून काल में नदी के प्रवाह से बह जाते हैं।

मानसून के चार माह में गोरी नदी घाटी के दर्जनों गांवों का शेष जगत से संपर्क भंग हो जाता है। स्कूली बच्चों का विद्यालय जाना बंद हो जाता है। इन गांवों के लिए बनी लाइफ लाइन खुद ही बीमार है।

ट्रांसफर के ल‌िए शिक्षकों ने पार की हदें, मंत्री ने भी पकड़ लिया सर

0

पहाड़ों में शिक्षकों की बहाली और वहां शिक्षकों का रुके रहना शिक्षा विभाग के लिये एक बड़ा मसला बन गया है। विभाग लगातार नये तरीके निकाल रहा है स्कूलों में शिक्षकों को पहुंचाने की लेकिन वहीं शिक्षक भी विभाग के नहले पर दहले मार रहे हैं। शिक्षा विभाग के नियमों के तोड़ने के मामले सामने आये हैं। इनकी पुष्टि होने के बाद ही शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने अनुरोध के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया पर रोक लगाई है।

तबादला पाने के लिए कई शिक्षिकाओं ने अपने पति से फर्जी तलाक लिया है, घर पर भले ही सब कुछ सामान्य हो, लेकिन कागजों में पति और पत्नी एक-दूसरे से तलाक ले चुके हैं। विधवा और तलाकशुदा शिक्षिकाओं की सहायता के लिए उन्हें अनुरोध के आधार पर तबादले का लाभ दिया जाता है। लेकिन कई शिक्षिकाओं ने इसका दुरुपयोग किया है, उन्होंने कागजों में अपने पति से तलाक ले लिया और खुद को तलाकशुदा दिखाते हुए अनुरोध के आधार पर तबादले का लाभ लिया है जबकि, आज भी वह अपने पति के साथ ही रह रही हैं। इस बार की तबादला प्रक्रिया में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र तक बनाए गए हैं।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि टीचरों ने स्टेट मेडिकल बोर्ड से फर्जी प्रमाण-पत्र भी बनवाए हैं। प्रमाण-पत्र में टीचरों को ‘सुनने में असमर्थ’, ‘चलने-फिरने में असमर्थ’, ‘बोलने में असमर्थ’ बताया गया है। लेकिन अंत में नोट देकर ‘पढ़ाने में समर्थ’ लिखा गया है।
गंभीर बीमार शिक्षकों के होंगे तबादले
 

वहीं शिक्षा मंत्री के सामने ब्रेन हैमरेज से पीड़ित चमोली निवासी शिक्षक लक्ष्मण सिंह रावत का मामला भी उठा। लक्ष्मण सिंह को कुछ समय पहले ब्रेन हैमरेज हो गया था, इसके बाद जौलीग्रांट में उनका उपचार हुआ। उन्हें लगातार जांच के लिए दून आना पड़ता है। उन्होंने अनुरोध के आधार पर तबादले के लिए आवेदन करना चाहा तो पोर्टल में बीमारियों की कैटेगरी में ब्रेन हैमरेज नहीं मिला। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लक्ष्मण जैसे वास्तविक बीमार शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

अब छुट्टी लेने के लिए टीचरों को दफ्तरों और बाबू के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने ‘उज्ज्वल सेवा’ मोबाइल एप तैयार किया है, इस एप में शिक्षकों को छुट्टी के लिए एप्लीकेशन अपलोड करना होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि एक अगस्त से एप काम करने लगेगा, जिसका टीचर लाभ उठा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश का विकल्प भरने वाले कई टीचरों ने एनओसी हासिल करने के लिए अधिकारियों को रिश्वत दी। इसकी जानकारी मिलने के बाद ऐसे सभी मामलों की फाइल रोक दी गई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि उन्होंने रिश्वत लेने वाले सभी अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है।

डीम्ड संस्थानों के नाम में शामिल नहीं होगा यूनिवर्सिटी शब्द

0

देश भर के डीम्ड संस्थान अब अपने नाम के आगे यूनिवर्सिटी शब्द को प्रयोग नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं इंडियन, नेशनल या इंटरनेशनल जैसे शब्द भी वर्जित होंगे, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के नए रेगूलेशन में डीम्ड संस्थानों को इस शब्द के उपयोग करने पर रोक लगा दी गई है।

नए नियम के मुताबिक, अब संस्थान अपने नाम के आगे विश्वविद्यालय के समकक्ष या श्बराबरश् जैसे शब्दों का उपयोग करेंगे। यूजीसी द्वारा प्रस्तुत किए गए ड्रॉफ्ट में यह तमाम जानकारी दी गई है। आयोग के डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए तैयार किए गए नए रेगूलेशन पर गौर करें तो कोई भी डीम्ड संस्थान अब यूनिवर्सिटी शब्द का प्रयोग नहीं करेगा। इसके स्थान पर उसे अपने नाम के साथ समकक्ष या फिर यूनिवर्सिटी के बराबर जैसे शब्दों का प्रयोग करना होगा।

उत्तराखंड की बात करें तो यहां प्रदेश भर में तीन डीम्ड विश्वविद्यालय हैं। इनमें हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, देहरादून के एफआरआई और निजी विश्वविद्यालय ग्राफिक एरा शामिल हैं। नए नियम के मुताबिक, इन सभी के नाम से यूनिवर्सिटी हटाया जाना तय है, इसके अलावा देशभर के अन्य राज्यों में संचालित होने वाली डीम्ड यूनिवर्सिटी भी अपने नाम से यूनिवर्सिटी शब्द को हटाकर समकक्ष यूनिवर्सिटी शब्द का उपयोग करेंगी।

इंडियन, नेशनल या इंटरनेशनल शब्द भी नहीं होगा उपयोग:
डीम्ड संस्थानों को यूनिवर्सिटी शब्द से अलग अपने नाम में इंडियन, नेशनल या फिर इंटरनेशनल शब्द को भी उपयोग न किए जाने के निर्देश आयोग ने दिए हैं। आयोग ने साफ किया कि रेगूलेशन के तहत संस्थानों को विभिन्न कसौटियों पर तभी परखा जाएगा जब वे रेगूलेशन के अंतर्गत मानकों को पालन कर रहे होंगे। आयोग ने यह भी कहा कि कोई भी डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी एक से ज्यादा कैंपस संचालित नहीं कर सकेंगी। इतना ही नहीं, कोई भी नया डीम्ड संस्थान डिस्टेंस मोड यानि दूरस्थ माध्यम से डिग्री कोर्स भी संचालित नहीं कर सकेगा। आयोग ने इसे पूरी तरह से नए संस्थानों के लिए वर्जित रखा है।

उत्तराखंड भाषा विभाग के उपनिदेशक डा. सुशील उपाध्याय ने बताया कि आयोग के रेगूलेशन 2017 को लेकर ड्राफ्ट प्रस्तुत कर दिया गया है। आयोग ने डीम्ड संस्थानों पर कई तरह की बाध्यताएं लगाईं हैं। नए नियमों में संस्थानों को यूनिवर्सिटी शब्द के उपयोग की भी मनाही रहेगी। उन्होंने बताया कि अक्सर देखने में आता है कि यूनिवर्सिटी शब्द का प्रयोग कर संस्थान कई मामलों में न सिर्फ मनमानी करते हैं बल्कि नियमों को भी दरकिनार कर देते हैं। नए नियमों से ऐसे संस्थानों पर लगाम लगेगी। आयोग का मकसद है देशभर में शिक्षा का एक ऐसा माहौल तैयार हो जो शिक्षा क्षेत्र को बेहतर दिशा देने का कार्य करें।