Page 241

संस्कृत भाषा को मिले बढ़ावा

संस्कृत के विद्वान आचार्य स्वर्गीय श्री गिरजा प्रसाद सिरोड़ी जी की चौदहवीं पुण्यतिथि पर ऋषिकेश स्थित श्री दर्शन महाविद्यालय में संस्कृत छात्र सेवा समिति द्वारा उनकी मूर्ति का अनावरण और श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया जिसमें उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मौजूद रहे।

मीडिया से बात करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि, “उत्तराखंड की पहचान संस्कृत भाषा से ही है ऐसे में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उनकी सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है।” तो वही कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भी संस्कृत भाषा को पूरी तरह से बढ़ावा देने की बात कही है, उन्होंने बताया कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा संस्कृत स्कूल खुलने चाहिए जिससे संस्कृत भाषा को ज्यादा बढ़ावा मिल सके.

जनता के हितों को ध्यान में रख कर होगा प्राधिकरण का गठनःकौशिक

0

रुद्रपुर, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित ऊधम सिंह नगर विकास प्राधिकरण की प्रथम बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिला विकास प्राधिकरणों के गठन का मुख्य उद्देश्य सुनियोजित व व्यवस्थित तरीके से क्षेत्रों का चहुंमुखी विकास करना है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रों के विकास व जनता के हितों का ध्यान देते हुए ही प्राधिकरण का गठन किया गया है।

प्राधिकरणों को जो भी राजस्व प्राप्त होगा उसका उपयोग सम्बन्धित क्षेत्रों के विकास में खर्च किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर प्राधिकरण के कार्यों एवं उद्देश्यों की पूरी जानकारी देने के साथ ही नक्शे स्वीकृत पास कराने व पूर्व प्लानिंग के साथ कार्य करने से होने वाले लाभों के विषय में भी जनता को जागरूक करने और जनता की प्रतिक्रिया लेने के निर्देश दिए।  उन्होंने नगर निगम, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा विकास प्राधिकारण के अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने तथा विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद का एक मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।

घर से भागी तीन छात्राओं को रेलवे स्टेशन से लौटाया

0

देहरादून,  मां को पत्र लिखा और अपने-अपने घर छोड़कर मंगलवार को तीन छात्राएं भाग निकलीं। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में बिना रिजर्वेशन चढ़ने पर पुलिस को शक हुआ तो उन्हें पकड़ लिया।

एसओ जीआरपी दिनेश कुमार ने बताया कि, “देहरादून प्लेटफार्म संख्या तीन पर दिल्ली जाने के लिए खड़ी शताब्दी एक्सप्रेस में तीन छात्राएं चढ़ीं। ट्रेन में बिना रिजर्वेशन चढ़ने का शक होने पर प्लेटफार्म ड्यूटी पर नियुक्त हेड कांस्टेबल ने महिला आरक्षी निर्मला और अनीता को साथ लेकर तीनों से पूछताछ की, तीनों छात्राएं घबरा गईं। ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं होने पर पुलिस ने तीनों से जीआरपी थाने लाकर पूछताछ की। तीनों ने बताया कि वे अपने-अपने घर से स्कूल जाने के बहाने भागकर आई हैं।”

letter

तीनों छात्राओं ने बताया कि वे रोजगार की तलाश और अपने पैरों पर खड़े होने की उम्म्मीद से अपने-अपने घर एक-एक पत्र छोड़कर निकली थीं। पुलिस ने तीनों छात्राओं के परिजनों को थाना बुलाया और बच्चियों को उनके सुपुर्द कर दिया। इस दौरान छात्राओं के घर से उनका छोड़ा गया पत्र भी बरामद हो गया। रायपुर थाना क्षेत्र निवासी तीनों छात्राओं में एक की उम्र 16 वर्ष जबकि दो लड़कियां चौदह-14 वर्ष की हैं।

मुख्यमंत्री ने किया बायो-क्रश रिवर्स वेन्डिंग मशीन का शुभारम्भ

0
मुख्यमंत्री ने सचिवालय परिसर में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्तर्गत बायो-क्रश रिवर्स वेन्डिंग मशीन का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, “स्वजल परियोजना एवं इलाहाबाद बैंक के सहयोग से स्थापित इस बायो-क्रश रिवर्स वेन्डिंग मशीन का उद्देश्य सचिवालय परिसर में प्लास्टिक बोतलों के उपयोग के पश्चात् उनका निस्तारण एवं रिसाइक्लिंग किया जाना है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि, “सचिवालय में विभागीय कार्यों के लिए जनता का आवगमन बना रहता है एवं कार्मिकों की संख्या भी अधिक है। इस रिवर्स वेन्डिंग मशीन के प्रयोग से लोगों के व्यवहार परिवर्तन के साथ ही इसका प्रभाव स्वच्छता के लिए बड़े स्तर पर पड़ेगा। उपयोग की गई प्लास्टिक बोतलों का उचित निस्तारण भी किया जा सकेगा।”
इसका शुभारम्भ सचिवालय में किया जा रहा है, जिससे सचिवालय परिसर को स्वच्छ रखा जा सके, प्लास्टिक की बोतलों को लोग उपयोग करने के बाद खुले स्थान पर फेंक देते हैं, जिससे गंदगी फैलने व नालियों के चोक होने की संभावना बनी रहती है व पानी का निकास नहीं हो पाता है। प्लास्टिक की बोतलों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। मशीन द्वारा प्लास्टिक की बोतलों के निस्तारण होने  से स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ पर्यावरण साफ सुथरा रहेगा।
स्वजल परियोजना के निदेशक डाॅ. राघव लंगर ने जानकारी दी कि इस आर.वी.एम. द्वारा प्लास्टिक की बोतलों को क्रश कर प्लास्टिक फ्लैक्स के रूप में परिवर्तित किया जाता है। प्लास्टिक की बोतल को मशीन के अन्दर डालने पर सम्बन्धित व्यक्ति द्वारा स्क्रीन पर अपना मोबाईल नम्बर डालने के पश्चात् धन्यवाद संदेश आयेगा। उन्होंने बताया कि इस रिवर्स वेन्डिंग मशीन में एक डिजिटन स्क्रीन लगी है। जिसको पेन ड्राइव के माध्यम से चलाया जायेगा तथा राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आडियो-वीडियो के माध्यम से प्रसारित की जायेगी।

गीता नगर क्षेत्र मे बंदरों का आतंक

0

ऋषिकेश, गीता नगर क्षेत्र में इन दिनों बंदरो ने आंतक मचा रखा हैं। अचानक बंदरो की फौज के आ धमकने से भगदड़ के चलते पिछले एक पखवाड़े में कई स्कूली बच्चें और महिलाएं चोटिल हो चुके हैं।

ऋषिकेश क्षेत्र में बंदरों के आंतक से लोग पहले ही परेशान थे। अब आईडीपीएल से सटे गीता नगर क्षेत्र में भी बंदरों ने लोगों को आंतकित करना शुरू कर दिया है। जाड़े के मौसम मे बंदरों के खौफ की वजह से घरों की छतों पर लोग धूप सेकने से भी घबराने लगें हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब तक तो बंदर छतों पर सूख रहे कपड़ों को ही निशाना बना रहे थे, लेकिन अब उन्होंने बेखौफ होकर घर के आंगन और कमरों तक घुसकर खाद्य सामग्री चट करना शुरू कर दिया है।

महाविद्यालय के पूर्व छात्र संघ महासचिव मंयक रैवानी ने बंदरो के आंतक को लेकर वन विभाग से कारवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही वन विभाग की और से बंदरों पर नकेल कसने के लिए अभियान न चलाया गया जो मजबूरन उन्हें क्षेत्रवासियों के सहयोग से वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

डीएम के खिलाफ मुकदमा, धारा 144 पर न्यायालय की रोक

0

हरिद्वार, मातृ सदन में धारा 144 पर जिला न्यायालय ने रोक लगा दी है, मातृ सदन की ओर से डीएम व उनके गनर के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसमें मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद के 27 जनवरी को सीजेएम कोर्ट में बयान दर्ज होंगे।

एडीएम प्रशासन की ओर से बीते 29 दिसम्बर को मातृसदन के आसपास धारा 144 लागू की गई थी। मातृसदन के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने जिला जज की अदालत में एडीएम के नोटिस को चुनौती दी थी।  इस पर सुनवाई करते हुए जिला जज राजेंद्र सिंह ने एडीएम के धारा 144 के नोटिस पर स्टे दिया है, साथ ही एडीएम से तीन दिन में जवाब मांगा है। मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की ओर से उनके अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने सीजेएम कोर्ट में डीएम दीपक रावत व उनके गनर के खिलाफ वाद दायर किया है।

विदित हो कि 25 दिसम्बर को महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती पर आयोजित समारोह में ऋषिकुल सभागार में कार्यक्रम के दौरान आत्मबोधानंद ने डीएम दीपक रावत को सम्मान देने का विरोध किया था। तथा विरोध में पर्चें उछाले थे। इसके बाद आत्मबोधानंद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

मातृसदन ने जिलाधिकारी पर आत्मबोधानंद को कमरे में बंधक बनाकर मारपीट करने का आरोप लगाया गया था। मामले में अब सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। मातृ सदन के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने बताया कि सीजेएम कोर्ट में दायर वाद में 27 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। गंगा में खनन के खिलाफ मातृ सदन पिछले कई सालों से आंदोलन करता आ रहा है। 

सायरा बानों को है उम्मीद, जीतूंगी जंग

0

काशीपुर, ट्रीपल तलाक की जंग लडने वाली सायरा बानो को उम्मीद है कि राज्य सभा में भी ट्रीपल तलाक को लेकर बनने वाले नये कानून पर मुहर लगेगी और देश में ट्रीपल तलाक को लेकर नई क्रांति आयेगी। सायरा बानों से खास बातचीत करते हुए कहा कि लोक सभा में जिस तरह से पूर्ण बहुमत मिला है उम्मीद है कि राज्य सभा मे भी मुस्लिम महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जरुर सभी साथ देंगे।

वहीं सायरा का परिवार पुरी बेसब्री से राज्य सभा के फैसले के इन्तजार में है। ट्रीपल तलाक का दर्द झेलने वाली सायरा ने अपने दर्द को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाया और ट्रीपल तलाक के खिलाफ अपनी जंग शुरु की, शुरुवाती दौर में भले ही सायरा को दिक्कतों का सामना करना पडा मगर जब निचली अदालतों से सायरा को कोी मदद नहीं मिली तो आखिर सुप्रीम कोर्ट ने सायरा बानों की याचिका पर सुनवायी की और एक एतिहासिक निर्णय लिया, जिसके बाद केन्द्र सरकार ने भी सायरा बानो का साथ दिया और पुरजोर तरीके से मुस्लिम महिलाओं के दर्द मं सरीख होकर उनको धार्मिक कुरीतियों से उभारने का काम किया, वहीं ट्रीपल तलाक पर बनने जा रहे नये कानून पर जहां लोक सभा में मुहर लग गयी उसके बात राज्य सभा की परीक्षा अभी बाकि है जहां से पुरे परिवार को उम्मीद है कि सकारात्मक निर्णय सामने आयेगा, वहीं सायरा बानों का कहना है कि, “ट्रीपल तलाक से साथ ही उनकी जंग अभी जारी रहेगी और बहु विवाह के साथ ही हलाला जैसी कुप्रथा के खिलाफ भी वो अपनी लडाई जारी रखेंगी।”

 सायरा बानों फिलहाल निचली अदालत में अपने बच्चों को पाने के लिए भी लडाई लड रही है, जहां अभी तक सायरा को सफलता नहीं मिली है, सायरा ढाई साल से अपने बच्चों से दूर है और उनसे दूरी का गम भी उनके दिल में रोज चुभता है। लेकिन उन्हे देश की न्यापालिका और सरकार से पुरी उम्मीद है कि उनको न्याय मिलेगा और उनके जैसी और भी कई महिलाओं को न्याय मिलेगा जो इस दर्द से जूझ रही हैं।

तीन गिरफ्तार, अवैध शराब बरामद

0

गोपेश्वर, चमोली पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान अलग-अलग स्थानों से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से अवैध शराब बरामद की गई है। अभियुक्तों के पास कुल 216 बोतल और 96 पव्वे शराब के बरामद हुए है। जिनके विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया गया है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कोतवाली कर्णप्रयाग ने बद्रीनाथ हाईवे पर डाट पुलिया के पास वाहन चेकिंग के दौरान हरियाणा निवासी धर्मपाल की कार से 180 बोलत अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। थराली थाना पुलिस ने थराली के तलवाडी में धर्माराम के पास से 24 बोतल तथा कुराड गांव के पास से दिग्पालराम से 96 पव्वे तथा 12 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। पकड़े गये सभी अभियुक्तों पर आबकारी अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। 

उत्तराखंड में वनों के जीर्णोंधार के जनक हैं ग्रीन अम्बेसडर “जंगली जी”

0

उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले के कोट मल्ला गांव में रहते हैं।जगत सिंह सीमा सुरक्षा बल के पूर्व सैनिक रह चुके हैं जो अब जंगली के नाम से मशहूर है। जगत सिंह हिमालय की गोद में पले-बढ़े और सन् 1968 में सीमा सुरक्षा बल में शामिल होने का फैसला किया। एक गढ़वाली किसान के परिवार में पैदा होने की वजह से बचपन से ही उनका जुड़ाव प्रकृति से तो था ही पहाड़ो के लिए भी उनका प्रेम अतुल्यनीय था।1973 में जब वह अपने परिवार से मिलने के लिए पहाड़ों पर लगभग छः किलोमीटर की चढ़ाई कर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक महिला बुरी तरह से जख्मी हालत में थी जिसका पैर घास काटते हुए फिसल गया था और वह गिर गई थी। इस एक घटना ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया। उन्होंने उस महिला की मदद तो कि ही लेकिन इस समस्या का स्थायी सामाधान ढूढने के लिए वो बेचैन हो उठे। उस महिला की परेशानी देखकर उन्होंने अंदाजा लगा लिया कि उनके गांव के अन्य लोगों को पहाड़ की खतरनाक चढ़ाई चढ़कर खाने के लिए लकड़ी लानी पड़ती है।

jagat singh pic 2

1974 से वह जब भी सर्दियों की छुट्टी में घर आते अपने पिता जी के दिए हुए उस बंजर जमीन के टुकड़े पर पेड़ पौधे और घास उगाने के लिए बेस तैयार करते। 1980 में उन्होंने अपनी वर्दी त्याग दी और पूरी तरह से उस बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने में लग गए जिससे वो गांव वाली की मदद कर सके। उन्होंने उस बंजर जमीन के किनारों में तरह तरह के पौधे लगाए जैसे कि रामबन्स, सिवाली और नागफली (कैक्टस) जो उस जमीन में बाड़ की तरह काम कर सके।

जंगली जी द्वारा उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग तरकीबों से पानी के स्त्रोत के साथ ही जैविक खाद भी बनाया जाता हैः

गढ़ढा यन्त्र तकनीक एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके कारण जल संरंक्षण एवे वनस्पति खाद आसानी से तैयार की जा सकती है। इस प्रक्रिया में मिश्रित वन के अन्दर 5 फीट लम्बा एवं 3 फीट चौड़े गढ़ढे खोद लिया जाते है और इनमें मिश्रित वन में जमा सड़ी पत्तियों को डाल दिया जाता है, और इसे मिट्टी से ढक दिया जाता हैै। वर्षा होने पर जल गढ़ढे के जरिये जमीन की निचली सतह तक चला जाता है और मिट्टी कटाव भी नही होता है। गढढे की उपरी सतह पर बीजों का अकुरण किया जाता है। कुछ समय बाद गढढे में डाली गयी पत्यिों को निकालकर जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। काफी मात्रां में ऐसा करने से पानी के स्रोत भी उत्पन्न हो जाते है।

जलवायु निर्माण (स्टोन टेक्नोलाॅजी) किसी भी स्थान की जलवायु को संतुलित रखने के लिए सुक्ष्म जलवायु का निर्माण किया जा सकता है। जिस प्रकार से ग्लोबल वार्मिग की दर बढ़ रही वही इस संतुलित करने के लिए सूक्ष्म जलवायु तैयार करना आवश्यक है। सूक्ष्म जलवायु निर्माण की (स्टोन टेक्नोलाॅजी) वह प्रक्रिया है, जिसे मिश्रित विन में तैयार किया गया है इस प्रक्रिया में पत्थरों में ब्रायोफाइट वंश के सूक्ष्म पौधे माॅस को जमा देते है, बारीक होने के कारण  इनमें पानी काफी समय तक जमा रह सकता है, इसका फायदा यह है, इन पौधों को पत्थरों में जमाकर पेड़ पौधों से लटका देते है जिससे समय पर जब हवा इनको होकर गुजरेगी तो वह ठण्डी हो जायेगी और वातावरण में नमी आ जायेगी, ऐसा करने से वातावरण ठण्डा हो जाता है, जिसकों सूक्ष्म जलवायु भी कहते है। जहाॅ कें बड़े मैदान होतें है। जिनकें कारण वहांहा तापमान ठण्डा रहता है, और हिमालयी ग्लेशियर भी संरंक्षित रहते है। स्टोन टेक्नोलाॅजी विधि सो उच्च हिमालयी पादपोंका संरंक्षण निमन्न भू- भाग में भी किया जा सकता है। सूक्ष्म जलवायु निर्माण से ही ग्लोबल वार्मिग को कम कर सकते है, ये तकनीकी किसी भी स्थान पर पत्थरों की दीवार बनाकर उनपर जमाकर लागू की जा सकती है।

jagat singh image 3

ऐसे बहुत से पर्यावरण संरक्षण के काम जगत सिंह चौधरी अपने स्तर पर कर रहे हैं लेकिन विकास के लिए उत्तराखंड में कांटे जा रहे हजारों पेड़े से जंगली जी भी आहत हैं।हिमालयी क्षेत्रों में पेड़ काटने को लेकर टीम न्यूजपोस्ट से बातचीत में पर्यावरणविद और उत्तराखंड के ग्रीन अम्बेसडर जगत सिंह चौधरी यानि जंगली जी ने कहा कि, “उत्तराखंड को पर्यावरण और विकास को साथ लेकर चलना होगा।विकास कौन नहीं चाहता,अच्छी सड़के कौन नहीं चाहता लेकिन उसके लिए जंगलों को निर्ममता से काटना कोइ विकल्प नहीं।हिमलाय पहले से ही संवेदनशील है।भूकंप जोन में पांचवे स्थान पर आने वाला प्रदेश है,ब्लासटिंग और लैंडस्लाइडिंग में भी उत्तराखंड का नाम काफी ऊपर है।इसके साथ ही उत्तराखंड की नदियां सूख रहीं,जल स्तर गिर रहा और अब यह योजनाओं के लिए जंगलों का काटना पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है।जंगली जी ने कहा कि सरकार को अगर सच में विकास करना ही है तो इसके लिए नए सिरे से सोचना होगा और नई तकनीक विकासित करनी होगी जिसपर किसी का ध्यान नहीं जा रहा।” जंगली जी ने कहा कि, “अगर सच में उत्तराखंड को विकासित करना है तो आने वाली पीढ़ी के लिए पेड़ों को काटने से बेहतर विकल्प है पेड़ों को रिप्लानट करना यानि की एक जगह से पेड़ उठाकर दूसरी जगह लगाना।ऑल वेदर रोड में करोडो़ं का बजट खर्च होगा अगर थोड़ा सा बजट पेड़ों को रिप्लांट करने में किया जाएगा तो ऑल वेदर रोड के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी कि जाएगी। जंगली जी ने कहा कि राज्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की जरुरत है।विकास के नाम पर हम हिमालय को नुकसान नहीं पहुंचा सकते और एनजीटी भी इस मुद्दे पर कोइ ठोस कदम नहीं उठा रहा।”

आपको बतादें कि पर्यावरण मंत्रालय ने उनके मिक्सड एग्रो वन के महत्व को और उनके विकास कार्य़ को भी समझा। उनके इस योगदान को 1998 में भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने उन्हें राष्ट्रीय इंदिरा गांधी वृक्षमित्र पुरस्कार से नवाजा। सन् 2012 में उत्तराखण्ड के राज्यपाल अजीज कुरैशी ने उन्हें उत्तराखण्ड के ग्रीन अम्बेसडर की उपाधि दी। अपने कामों के लिये जगत सिंह को उत्तराखण्ड गौरव अवार्ड, गौरा देवी अवार्ड, पर्यावरण प्रहरी अवार्ड के साथ साथ कई सरकारी संगठनों, डिपार्टमेंट, और इंस्टीट्यूटों ने उन्हें 30 से भी ज्यादा पुरस्कारों से नवाज़ा है।

आज जगत सिंह जी की कड़ी मेहनत और लगन से उत्तराखंड में एक लाख से ज्यादा पेड़,और 60 से भी ज्यादा प्रजाति के जड़ी बूटी वाले पौधे हमारे बीच हैं।जगत सिंह के पास पर्इ्न्होयावरण को लेकर कोई डिग्री नही है लेकिन इतने सालों से वो भारत के उच्च विश्वविधालयों जैसे की दिल्ली युनिर्वसिटी, जेएनयू, जी.बी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन इन्वारमेंट एंज डेवलेपमेंट, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविधालय,आदि में लेक्चर देते रहे हैं।

जगत सिंह का जीवन आज की पीड़ी के लिये मिसाल है इस बात की अगर मन में अपने समाज के लिये कुछ करने का जज्बा़ हो ते रास्ते अपने आप निकलते जाते हैं।

रिपोर्ट नहीं देने के मामले में ऊर्जा निगम को लगाई फटकार

0

देहरादून। लंबित बिजली कनेक्शन की रिपोर्ट नहीं देने के मामले में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने सुनवाई की और ऊर्जा निगम के ‘बहानों’ पर तल्ख टिप्पणी करते हुए जमकर फटकार लगाई। साथ ही फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में आयोग की ओर से कड़ा आदेश आने की संभावना है।

आयोग के अध्यक्ष सुभाष कुमार ने कहा कि रेगलूेशन बने एक दशक हो चुका है, पर निगम इनका अभी तक पालन नहीं कर पा रहा है। यह गंभीर स्थिति है। पहले कम से कम तीन-चार महीने में लंबित कनेक्शनों की रिपोर्ट आ जाती थी, लेकिन हद है कि पिछले नौ महीने में एक बार भी रिपोर्ट नहीं दी गई। जबकि, हर महीने रिपोर्ट प्रस्तुत करने का प्रावधान है। इसी अंदाजा लग सकता है कि व्यवस्थाएं सुधर रही हैं, या बिगड़ रही हैं। आयोग ने सुनवाई में ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा और निदेशक परिचालन अतुल अग्रवाल से कनेक्शन समय पर जारी नहीं होने का कारण पूछा तो कहा गया कि फील्ड स्टाफ की भारी कमी है। आयोग ने कहा कि ये कोई तर्क नहीं हुआ, रेगूलेशन का पालन करते हुए उपभोक्ता को कनेक्शन समय पर देना निगम की जिम्मेदारी है। कई रिपोर्ट में कनेक्शन जारी करने में हुई देरी का कारण मीटर उपलब्ध नहीं होना अंकित किया है। क्या निगम मीटर का इंतजाम भी नहीं कर पा रहा। फिर, निगम के अधिकारियों ने कहा कि अगर जुर्माना माफ कर दिया जाए तो सुधार हो जाएगा। आयोग ने कहा कि ये तो अजीब बात हुई। जब जुर्माना लगने के बावजूद स्थिति और सुधरने के बजाय बिगड़ रही है, अगर माफ कर दिया तो फिर तो निगम बेलगाम हो जाएगा। कहा कि निगम प्रबंधन ने आजतक कोई ऐसी योजना नहीं बनाई, जिससे सुधार हो। बहाने बनाने के बजाय सिस्टम में सुधार की जरूरत है। इस दौरान यूईआरसी सचिव नीरज सती, निदेशक तकनीकी प्रभात डिमरी, निदेशक वित्त दीपक पांडे आदि मौजूद रहे।