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देहरादून ही नहीं, मसूरी भी कर रहा रिस्पना का दमनः मैड संस्था

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देहरादून। रिस्पना नदी में गंदगी का कारण केवल देहरादून नहीं, बल्कि मसूरी और आसपास का इलाका भी है। यह तथ्य मैड संस्था के शोध के बाद सामने आया। संस्थान के आठ घंटे में किए गए सात किलोमीटर के सफर में शोध में यह तथ्य सामने आए।

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देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन मेकिंग ए डिफ्फेरेंस बाय बीइंग द डिफ्फेरेंस (मैड) संस्था के सदस्यों द्वारा किया गया आठ घंटे का रिस्पना नदी का ट्रैक कुछ चौंका देने वाले तथ्य सामने ला रहा है। इस बार सदस्यों ने उस क्षेत्र से अपनी शोध यात्रा शुरू की जहां तक वह शिखर फॉल्स एवं राजपुर से होते हुए पहुंच गए थे। शिखर फॉल्स से बरलोगंज तक का सफर तय करने के बाद इस बार संस्था के सदस्यों ने बरलोगंज के ही पास स्थित मौसी फॉल्स से मौसी नदी, जो रिस्पना की सबसे बड़ी सहायक नदी है, उसका पीछा करना शुरू किया और अंत में लगभग आठ घंटो में सात किलोमीटर की जटिल यात्रा तय करने के बाद मैड के युवा वुडस्टॉक स्कूल के समीप के जंगल से निकले। शोध यात्रा के दौरान यह सामने आया कि आम जन मानस में जो प्रचलित है उसके विपरीत, रिस्पना का दमन न सिर्फ देहरादून में हो रहा है बल्कि मसूरी भी अनियंत्रित तरीके से रिस्पना का पानी चूस रही है।

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मौसी फॉल्स के ऊपर के क्षेत्र में चलते चलते मैड संस्था के सदस्यों ने लगभग चार पांच पानी के टैंक देखे जिससे यह साफ हुआ कि यह पानी नदी से सीधे खींचा जा रहा है। आम तौर अधिकारीगण सिर्फ इतना मानते थे कि रिस्पना का पानी जल संस्थान द्वारा शिखर फॉल्स से लिया जा रहा है जबकि अब यह सामने आ रहा था कि कई जगहों पर शिखर फॉल्स पहुंचने से कई कदम पहले मौसी फॉल्स से भी पूर्व मसूरी क्षेत्र में रिस्पना का पानी लिया जा रहा है। सबसे चौंका देने वाली बात तो यह थी कि कई जगह यह पानी जल संस्थान एवं जल निगम द्वारा नहीं बल्कि नामी गिरामी निजी स्कूलों द्वारा सीधे नदी से खींचा जा रहा है और बड़ी बड़ी मोटर लगा कर ऐसा किया जा रहा है जिसकी ध्वनि पूरे वातावरण को दूषित कर रही है। और तो और संस्था के सदस्यों ने यह भी देखा कि एक ओर जहां जल की अविरल धारा साफ पानी के साथ बह रही है, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर का कूड़ा कचरा मसूरी द्वारा भी रिस्पना में डाला जा रहा है। इस सबके बीच जल ने अपना बहाव किसी तरीके से रखा हुआ है लेकिन इससे यह साफ़ है कि रिस्पना को खतरा दून से ही नहीं बल्कि मसूरी के असंतुलित विकास से भी है। 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कहने पर ही संस्था ने इस क्षेत्र को पूरा करने की ठानी जिस पर दस्तावेज और तथ्य मौजूद ही नहीं हैं। मैड के संस्थापक अभिजय नेगी ने बताया कि ”शोध का मकसद था कि रिस्पना संरक्षण को लेकर न सिर्फ लोगों को जागरूक किया जाए बल्कि मसूरी और देहरादून में बैठे अधिकारीयों की आंखे भी खुले ताकि नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिये उचित कार्यवाही की जायगी। उन्होंने बताया कि शोध में यह भी पाया कि मौसी फॉल्स के ऊपर ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां जल संवर्धन के प्रयास किये जा सकते हैं और इस और भी सरकार व जो भी जरूरी संस्थान हैं उनका ध्यान आकर्षित किया जाए। संस्थान की ओर से शोध करने वालों में संस्था के संस्थापक अध्यक्ष अभिजय नेगी, शार्दुल असवाल, विजय प्रताप सिंह, हृदयेश शाही शामिल रहे।”

उत्तराखंड पुलिस में हुए फेरबदल

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उत्तराखण्ड शासन द्वारा भारतीय पुलिस सेवा/प्रान्तीय पुलिस सेवा के  निम्नलिखित अधिकारियों को तात्कालिक प्रभाव से उनकी वर्तमान तैनाती से उनके नाम के सम्मुख अंकित पद पर नियुक्त किया गया हैः-

  • मोहन सिंह बंग्याल, पुलिस उपमहानिरीक्षक, कार्मिक से पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण, पुलिस मुख्यालय देहरादून
  • पूरन सिंह, रावत,पुलिस उपमहानिरीक्षक,कुमायूं परिक्षेत्र सेपुलिस महानिरीक्षक, कुमायूं परिक्षेत्र
  • अनन्त राम चौहान, पुलिस उपमहानिरीक्षक,सीबीसीआईडी सेपुलिस महानिरीक्षक, सीबीसीआईडी
  •  केवल खुराना,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,कार्मिक से पुलिस उपमहानिरीक्षक/निदेशक यातायात
  •  रामचन्द्र राजगुरु,पुलिस अधीक्षक,चम्पावत से पुलिस अधीक्षक, अभिसूचना देहरादून
  • धीरेन्द्र सिंह गुंज्याल,पुलिस अधीक्षक,यातायात से पुलिस अधीक्षक,चम्पावत
  • असीम श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक,प्रतीक्षारत पुलिस मुख्यालय सेपुलिस अधीक्षक, हाईडिल विजिलेंस
  • लोकेश्वर सिंह,सहायक पुलिस अधीक्षक,देहरादून से पुलिस अधीक्षक यातायात, देहरादून
  • मंजुनाथ टीसी,सहायक पुलिस अधीक्षक,देहरादून से पुलिस अधीक्षक यातायात,हरिद्वार
  • प्रकाश चन्द्र आर्य,अपर पुलिस अधीक्षक,यातायात/अपराध हरिद्वार सेअपर पुलिस अधीक्षक,जीआरपी, हरिद्वार

उत्तराखंड को एडीबी का बेस्ट परफार्मिंग प्रोजेक्ट अवार्ड

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देहरादून। भारत सरकार के आर्थिक मामले एवं वित्त मंत्रालय और एशियाई विकास बैंक द्वारा उत्तराखण्ड को बेस्ट परफार्मिंग प्रोजेक्ट अवार्ड प्रदान किया गया है। 10 विभिन्न संकेतकों में उत्तराखण्ड इमरजेंसी असिस्टेंस प्रोजेक्ट को अवार्ड दिया गया। देश की 84 परियोजनाओं में इस परियोजना का चयन किया गया।

यह जानकारी मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड इमरजेंसी असिस्टेंस की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में दी गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया जाय। प्रस्तावित एसडीआरएफ के भवन का निर्माण पर्वतीय स्थापत्य से कराया जाए। जिन विभागों की परिसंपत्तियों का सृजन हुआ है, उन्हें हस्तांतरित किया जाए। आगे से जो भी निर्माण कार्य हों, उनमे नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2013 में आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए एशियाई विकास बैंक ने आर्थिक सहायता दी थी। इस धनराशि से क्षतिग्रस्त पेयजल आपूर्ति, प्रभावित सड़कों, पर्यटन स्थलों, नागरिक उड्डयन के कार्य किये गए। आपात के समय बचाव के लिए सड़कों के साथ-साथ वैकल्पिक मार्गों का भी निर्माण किया गया। 147 ट्रैक रूट भी बनाए गए। जनपद अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी में सड़कों का पुनर्निर्माण किया गया। इसके साथ ही गंभीर स्लिप जोन का उपचार भी किया गया। जगह-जगह भूकंपरोधी हट भी बनाये गए। पर्यटन विभाग के अतिथिगृहों की मरम्मत कराई गई। नागरिक उड्डयन विभाग के हेलीपैड और हैंगर बनाये गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश, सचिव आपदा प्रबंधन श्री अमित सिंह नेगी, अपर सचिव श्री सविन बंसल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अब तक शहर में 50 फीसद भी काम पूरे नहीं

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देहरादून। भले ही अगले 20 दिन में एडीबी का राज्य सरकार के साथ अनुबन्ध समाप्त हो रहा हो, लेकिन एडीबी अब तक शहर में 50 फीसद भी काम पूरा नही कर पाया है। स्थिति यह है कि अब तक कनेक्शन देना तो दूर, पानी की लाइन तक नही बिछाई गई है। वहीं, सीवर लाइन के काम भी अधूरे पड़े हैं। यही कारण है की एडीबी के अधिकारी सरकार के साथ अपना अनुबंध आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे है ताकि काम पुरे किए जा सकें। इतना ही नहीं चार साल पहले डालनवाला में शुरू हुआ पेजयल लाइन डालने का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके साथ ही लोहिया नगर में लाइन डालने का काम तो शुरू भी नहीं हो पाया। इनके आलावा पटेलनगर और मातावाला बाग़ में लाइन बिछाने का काम भी अधूरा पड़ा है, वहीं खुड़बुडा में लाइन चालू करने के बावजूद लो प्रेशर की समस्या एडीबी दूर नहीं कर पाया है।

करनपुर-पेयजल लाइन टूटने से पानी का संकट
पानी की लाइन टूटने और नलकूप खराब होने से करनपुर क्षेत्र की करीब दो हजार की आबादी पानी का संकट झेल रही है। स्थानीय निवासी घनश्याम वर्मा, सीमा, जगदीप, शिवनारायण का कहना है कि वैसे तो यहां पिछले एक साल से पानी का संकट बना है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से नलकूप खराब होने और कई जगह से लाइन टूटने से ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 15-15 दिन तक घरों में पानी नहीं आता। आरोप है कि एडीबी और जलसंस्थान के अफसरों से मौखिक और लिखित रूप में कई बार शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।

सरस्वती विहार-गंदे पानी की शिकायतें
सरस्वती विहार में इन दिनों एडीबी की ओर से सीवर लाइन का कार्य किया जा रहा है। कार्य के चलते पेयजल लाइन टूट गई है, जिस कारण यहां लोगों के घरों में गंदा पानी आ रहा है। स्थानीय निवासी प्रशांत, आरती रावत, संजय, संदीप, सौरव ने बताया कि पिछले दस दिन से यह समस्या बनी है। कहा कि कई बार एडीबी और जल संस्थान के अफसरों से शिकायत की, लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया।

लोहिया नगर- खराब गुणवत्ता का आरोप
लोहिया नगर में सीवर लाईन डालने पहुंचे एडीबी के अधिकारियों को लोगो ने लाईन डालने से पहले ही काम रुकवा दिया। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अधिकारी कार्य में अच्छी गुणवत्ता का उपयोग नहीं कर रहे।


राजीव नगर-कनेक्शन तोड़े, जोड़े नहीं
राजीव नगर में सीवर लाइन के कार्य के चलते कई लोगों के पेयजल कनेक्शन टूट गए है। स्थानीय निवासी विभोर रामोला, अली अब्बास ने बताया कि शिकायत करने पर जल संस्थान के कर्मचारियों ने कुछ लोगों ने कनेक्शन तो जोड़ दिए, लेकिन एक दर्जन से अधिक परिवारों के कनेक्शन अभी भी टूटे हैं, ऐसे में लोगों को दूसरों के घरों से पानी लेकर या टैंकर मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है।

अपर नत्थनपुर- मलबा घुसने से लाइनें चोक
अपर नत्थनपुर के आधे क्षेत्र में पेयजल लाइन में मलबा घुसने से पानी का संकट बना है। क्षेत्रीय निवासी जगमोहन यादव, मनीष, दिनेश, मंजू, श्वेता ने बताया कि यहां पानी की लाइन डालने का काम चल रहा था। इस दौरान पानी की लाइन में मिट्टी घुसने वह आधी चोक हो गई। बिना मिट्टी निकाले लाइन को ज्वाइंट कर दिया गया। जिस कारण आधे क्षेत्र में पानी नहीं पहुंच रहा है। आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
एडीबी ने मच्छीबाजार क्षेत्र के लुनिया मोहल्ले में भी लाइन डालने का काम शुरू किया, लेकिन लोगों ने काम रुकवाते हुए कर्मचारियों को वहां से भगा दिया। लोगों का आरोप है कि दो साल पहले मन्नूगंज में एडीबी विंग ने पानी की लाइन डाली थी। लेकिन, आज तक इस लाइन से लोगों को कनेक्शन नहीं दिए गए। इतना ही नहीं, लाइन डालते वक्त एडीबी ने पुरानी लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया तो वही सीवर लाइन के चैंबर भी तोड़ डालें। सड़कों को खोदकर उसी हाल में छोड़ दिया गया, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

बालिका निकेतन में महिला होमगार्ड की तैनाती

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देहरादून। आखिरकार जिला प्रशासन के सख्त रुख के बाद विभागीय अधिकारियों को बालिका निकेतन में सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने को विवश होना ही पड़ा। बालिका निकेतन में संवासिनियों के बाहर जाने पर निगरानी के लिए अतिरिक्त महिला होमगार्ड की तैनाती कर दी गई है। इतना ही नही, सुरक्षा के लिहाज से गलत स्थान पर बने गार्ड रूम को भी शिफ्ट किये जाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। लेकिन सवाल ये भी है कि सुरक्षा के प्रबंध तो किए जा रहे है, किन्तु दोषी लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी या नही।

बालिका निकेतन प्रकरण की जांच टीम के सदस्य डीएम एसए मुरुगेशन व एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बालिका निकेतन के मौजूदा सुरक्षा इंतजामों में कई खामियां बताई है। सदस्यों का कहना है कि लड़किया जब स्कूल जाती हैं तो उन पर निगरानी के लिए कोई कर्मी की तैनाती नही है । इससे लड़कियां गलत लोगों के संपर्क में भी आ सकती हैं और गलत राह में जाने की संभावना बनी रहती है। वही, यह भी पाया गया कि वर्तमान में गार्ड रूम जिस स्थान पर है, वहां से मुख्य गेट से आने जाने वालों पर ठीक से नजर नही रखी जा सकती है। साथ ही सुरक्षा दृष्टि के लिहाज से चाहरदीवारी के ऊपर वायर वॉल बनाने की भी आवश्यकता महसूस की।

डीएम ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को तत्काल कार्यवाही के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने बुधवार को बालिका निकेतन में एक अतिरिक्त महिला होमगार्ड की तैनाती कर दी है। मुख्य गेट के समीप नए गार्ड रूम का निर्माण कार्य भी शुरू किया चुका है। वहीँ, परिसर के चारों ओर चाहरदीवारी के ऊपर वायरवॉल बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया, तीन-चार दिन के भीतर फेंसिंग भी शुरू कर दी जाएगी।

राफ्टिंग के दौरान रैपिड में गिरी महिला, मौत

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ऋषिकेश, ऋषिकेश में एक महिला की डूबने से मौत हो गर्इ। बताया जा रहा है कि महिला अपने दल के साथ राफ्टिंग कर रही थी। इस दौरान शिवपुरी और ब्रह्मपुरी के बीच महिला रैपिड में गिर गर्इ, जिससे उसकी मौत हो गई।

मुनि की रेती पुलिस के मुताबिक शाम करीब 4 बजे राफ्ट में सवार आठ लोग जब शिवपुरी से लौट रहे थे तो गोल्फ कोर्स रैपिड पर पहुंचे ही चार लोग राफ्ट से नीचे गिर पड़े। उन्हें पानी से निकाला गया और राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सक ने भगवती वर्मन(33 वर्ष) पत्नी अंशुमन वर्मन निवासी लक्ष्मी नगर नई दिल्ली को मृत घोषित कर दिया।

डीएम मंगेश की पहल से रुद्रप्रयाग देगा राज्य को युवा डॉक्टर और इंजीनियर

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9 महीने पहले बागेश्वर से रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी बने मंगेश घिल्डियाल का पदभार ग्रहण से शुरू हुआ आमजन के लिए मंगल अभियान नये साल में भी बदस्तूर जारी है। जिसके तहत उनकी दूरदर्शी सोच से अब रूद्रप्रयाग जनपद में भी पहाड़ के मेधावी युवाओं को डाॅक्टर और इंजीनियर की ऑनलाइन कोचिंग मिलेगी, जिससे युवा अपने सपनों को हकीकत में साकार कर पायेंगे।

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गौरतलब है कि पहाडो में डाॅक्टर और इंजीनियर की बेहतर तैयारी के लिये कोई अग्रणी संस्थान न होने से से पहाड़ के मेधावी प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते थे। लेकिन अब उनके सपने जरूर पूरे होंगे, श्री 108 स्वामी सच्चिदानंद राजकीय आदर्श इण्टर काॅलेज रूद्रप्रयाग में प्रोजेक्ट लक्ष्य के अन्तर्गत जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में जनपद के तीन स्थानों रूद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि व गुप्तकाशी में इंजीनियरिंग, मेडिकल प्रवेश-परीक्षा के लिये आॅनलाइन कोचिंग कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया है। एक माह पूर्व आॅनलाइन कोचिंग का ट्रायल किया गया था जिसे आज साकार रूप में परिणीत किया गया।

आनॅलाइन कोचिंग में शासकीय व अशासकीय विद्यार्थियों को 2019 की मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश-परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। पाठयक्रम की अवधि 2 वर्ष की होगी, हाईस्कूल में शासकीय विद्यालय में 70 प्रतिशत से अधिक व निजी विद्यालय में 85 प्रतिशत से अधिक प्राप्त करने वाले विद्यार्थि कोचिंग ले सकते है। आॅनलाइन कोचिंग में विद्यार्थी शिक्षक से लाइव इंटरेक्शन कर सकेगा व अपनी शंकाओं कों दूर कर सकता है, साथ ही विद्यार्थियों को प्रैक्टिस के लिये टेस्ट सीरिज भी दी जाएगी।

वर्तमान में स्कूलों के शीतकालीन अवकाश के समय प्रातः 10 से 1 बजे तक कक्षायें चलेगी। शीतकालीन अवकाश के बाद कोचिंग का समय परिवर्तन किया जाएगा जिससे विद्यार्थी की स्कूल टाइमिंग में बाधा उत्पन्न न हो। आॅनलाइन कोचिंग में हंस फाउण्डकेशन द्वारा वित्तीय व डीआईओ एनआईसी द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। आइाॅनलन कोचिंग कोब्योबो (नोलैज बियाॅन्ड बाउंडरिज) द्वारा दी जाएगी। कोब्योबो के अन्तर्गत शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले भारत के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान व शिक्षक पंजीकृत है।

वास्तव मे जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग की ये पहल आने वाले दिनों में पहाड़ के युवाओं के लिए वरदान साबित होगी। मंगेश के मंगल अभियान को ढेरों बधाईया।

उत्तराखंड आकर फिल्मों की शूटिंग करना पड़ रहा महंगाः तिग्मांशु धूलिया

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देहरादून। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता तिग्मांशु धूलिया ने बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भेंट की और फिल्म नीति में सुधार को लेकर कई सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने सुझावों पर गंभीरता पूर्वक विचार करने का भरोसा दिया। साथ ही कहा कि उनके साथ बैठक फिल्म नीति में संशोधन को लेकर विस्तार से चर्चा भी करेंगे। तिग्मांशु ने कहा कि आठ जनवरी से उनकी एक फिल्म की शूटिंग शुरू हो रही है। जैसे ही वक्त मिलेगा, वह इस बाबत यहां आएंगे।

तिग्मांशु ने कहा कि फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड में खींचने के लिए सब्सिडी देने के साथ ही राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के टैक्स में छूट देनी पड़ेगी। क्योंकि, फिलहाल कोई सब्सिडी नहीं मिलती है और यहां आकर शूटिंग करना बहुत महंगा पड़ता है। यहां से सस्ता तो विदेश में शूटिंग करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार सब्सिडी के लिए मानक कड़े करे। क्योंकि, कुछ लोग तो सिर्फ सब्सिडी के लिए ही फिल्म बनाते हैं। सेंसर बोर्ड से रिलीज सर्टिफिकेट जारी होने के बाद ही सब्सिडी दी जाए। अगर सरकार ये निर्णय ले तो बड़ी संख्या में यहां शूटिंग होंगी। क्योंकि, यहां की लोकेशंस स्विट्जरलैंड से भी खुबसूरत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि राज्यों की फिल्म नीति के बारे में बताया। साथ ही उनकी फिल्म रागदेश को टैक्स फ्री करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी जताया। इस फिल्म की 60 फीसद शूटिंग उत्तराखंड में हुई थी। इस दौरान मेजर जनरल शत्रुघ्न सिंह चौहान, तिग्मांशु धूलिया फिल्म्स के उत्तराखंड प्रतिनिधि अभिनव थापर भी मौजूद रहे।

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आलू-पूरी का नाश्ता किया
तिग्मांशु बुधवार सुबह नाश्ता करने के लिए अचानक सहारनपुर चौक स्थित एक दुकान में पहुंच गए। उन्हें देख दुकानदार समेत आसपास के लोग भी चौंक गए, क्योंकि किसी को अंदाजा नहीं था कि वह यहां आकर नाश्ता करेंगे। तिग्मांशु ने आलू की सब्जी-पूरी का नाश्ता किया। इस दौरान यहां काफी भीड़ लगी रही और लोगों ने उनके साथ सेल्फी भी ली।

अनाथालयों में रह रहे बच्चों की स्थिति पर सभी राज्यों को नोटिस

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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने अनाथालयों में रह रहे बच्चों की स्थिति पर दायर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश का भविष्य बच्चों की अस्मिता और उनके पालन-पोषण पर निर्भर करता है। किसी बच्चे को अनाथालय के प्रभारी की इच्छा पर नहीं छोड़ा जा सकता है।

आयोग ने अपनी याचिका पश्चिम बंगाल के अनाथालयों में रह रहे बच्चों के एडॉप्शन के लिए कमेटियों के गठन को कानून का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। बाल संरक्षण आयोग ने जब इस बारे में पश्चिम बंगाल सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया तो पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया जिसके बाद हाईकोर्ट ने आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बाल संरक्षण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों से अनाथालयों में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं और बच्चों के एडॉप्शन के लिए अपनाई जानेवाली प्रक्रिया के बारे में पूछा है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों के पूछा है कि मानवाधिकार एक्ट के तहत हर जिलों में मानवाधिकार कोर्ट की स्थापना अभी तक क्यों नहीं हुई।

उचित दर पर बच्चों को मिलेगी स्कूल बस की सुविधा

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देहरादून, अब स्कूलों के बच्चों को स्कूल जाने व छोड़ने के लिए अपने वाहनों से आने की फजीहत नहीं झेलनी पड़ेगी। जिला प्रशासन उचित दरों पर स्कूल बसों का संचालन करने की व्यवस्था करने जा रहा है। व्यवस्था के तहत बच्चों को स्कूल आने जाने में स्कूल बसों का संचालन किया जाएगा। खास बात यह कि इन बसों का किराया भी बच्चों को आर्थिक रूप से काफी कम होगा। इसके अलावा दून के बेलगाम स्कूली वाहनों पर लगाम लगाने और यातायात के नियमों के पालन को लेकर प्रशासन बेहद गंभीर नजर आ रहा है।

देहरादून के जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन की अध्यक्षता में जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय में विशेष बैठक आयोजित हुई। बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने एवं दुर्घटनाओं को कम करने और बच्चों को स्कूल लाने एवं घर छोड़ने के लिए उचित दरों पर स्कूल बसों का संचालन करने के दृष्टिगत परिवहन, पुलिस, शिक्षा विभाग सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों से वार्ता की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ स्कूल बसों का रूट निर्धारित करने और स्कूल बसों के लिए प्रबन्ध करने पर चर्चा की। इसके साथ ही इसके लिए कितनी बसों की आवश्यकता है इसकी भी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।

स्कूल निर्धारित फॉर्मेट में देंगे जानकारी 
जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि शहर के आन्तरिक क्षेत्र में पड़ने वाले नामी स्कूल के प्रबन्धकों व प्रधानाध्यापकों से बैठक कर उनके यहां अध्ययनरत् कक्षा 5 से कक्षा 12 तक के बच्चों में कौन बच्चे स्कूल बसों से और कौन अपने संसाधन, टू-व्हीलर आदि से स्कूल आ रहे हैं इसका डाटा एकत्र किया जाएगा। जानकारी के लिए स्कूल निर्धारित फार्मेट में जानकारी देंगे। ताकि कितने बच्चें स्कूल बसों व कितने बच्चे अपने संसाधन से स्कूल आ रहे है इसकी सटीक जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इस बात की भी जानकारी ली जाएगी कि कितने अभिभावक स्कूल बस लगाए जाने के समर्थन में हैं। उन्होने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि उनकी ओर से स्कूल प्रबन्धकों को पत्र प्रेषित किया जाए। कहा कि स्कूल बसों कें संचालन का मुख्य उद्देश्य स्कूल टाइम पर शहर की यातायात व्यवस्था को ठीक करना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है।

परिवहन विभाग को भी दिए निर्देश
जिलाधिकारी ने परिवहन व पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूल टाइम पर बस संचालित करने हेतु सिटी बस और अन्य बस संचालकों से बैठक कर ली जाए व जिन बसों को स्कूल बस के रूप में चलाना है उनकी कंडिशन बेहतर होनी चाहिए। उन्होने स्कूल बसों का रूट निर्धारण के लिए एसपी, यातायात, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी, सीओ यातायात को निर्देश दिए। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को पूर्ण प्लान तैयार कर अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए।