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वेतन मामले पर सरकार को हाईकोर्ट के निर्देश 

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हाई कोर्ट ने राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार वेतन भत्ते नहीं देने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में 24 घंटे में निर्णय लेने का आदेश पारित किया है।

कोर्ट का आदेश मुख्यमंत्री के उस बयान के एक दिन बाद आया है,  जिसमें उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती पर 30 फीसद अतिरिक्त वेतन देने के बाद भी चिकित्सकों द्वारा ज्वाइनिंग नहीं देने का जिक्र किया था।

दूरस्थ क्षेत्र में तैनात डॉ. दर्शन गौड़ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के रेग्युलेशन 9 (2) डी के अनुसार सुदूरवर्ती क्षेत्रों कार्यरत चिकित्सकों को एक साल की सेवा में दस फीसद, दो साल की सेवा में 20 फीसद व तीन साल की सेवा में 30 फीसद अतिरिक्त वेतन देने को कहा गया है।

इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के दिशा-निर्देशों का लाभ नहीं दे रही है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अन्य राज्य उक्त आदेश का अनुपालन कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार को 24 घंटे में फैसला लेने के आदेश पारित किए।

कैसे बच गये एसडीएम

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विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण शंकर राज की कोर्ट ने कृषि भूमि को अकृषि करने के एवज में 22 हजार रिश्वत लेने के दोषी एसडीएम के पेशकार को सात साल कैद व 30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में शासन द्वारा अनुमति नहीं देने की वजह से विजिलेंस एसडीएम के खिलाफ अभियोग नहीं चला सका।

24  मई 2012 को जिले के कोशयां कुटोलि तहसील के एसडीएम के पेशकार नरेंद्र दीक्षित के खिलाफ क्षेत्र के ही ललित मोहन सुयाल ने विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी। विजिलेंस ने मामला प्रारंभिक जांच में सही पाया तो एसडीएम के पेशकार को 22 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। अदालत में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ट्रायल शुरू हुआ।

संयुक्त निदेशक विधि सोहन चंद्र पांडेय द्वारा आरोप साबित करने को सात गवाह पेश किए गये। इसमें तत्कालीन डीएम शैलेश बगौली शामिल थे। बीते रोज कोर्ट ने पेशकार को भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया था। आज कोर्ट ने सजा सुनाई। धारा सात में 5 साल कारावास व 10 हजार जुर्माना और धारा 13(2)में सात साल जुर्माना व 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने किया चारधाम रेल प्रोजेक्ट का शिलान्यास

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डबल इंजन की सरकार का तौहफा अब उत्तराखंड की जनता को मिल चुका है। आज  रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने एक बड़ी सौगात उत्तराखंड की जनता को दे दिया हैं। ये सौगात चारोंधाम को रेल लाइन से जोड़े जाने की है।

जी हां रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर दोपहर साढ़े बारह बजे चार धाम रेल प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। चारधाम रेल प्रोजेक्ट के शिलान्स के इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह,सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत व अन्य नेता भी मौजूद थे। रेलवे विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चारों धामों तक रेल प्रोजेक्ट को पहुंचाने के लिए प्रारंभिक सर्वे पूरा हो चुका है, जिसकी रिपोर्ट केद्र सरकार को भेज दी गई है। केंद्र सरकार से सर्वे को मंजूरी मिल गई है, जिसके लिए रेलवे लाइन के सर्वे के लिए 120 करोड रूपये भी मंजूरी भी केद्र सरकार ने दे दी है।

आप को बात दे कि प्रारंभिक सर्वे में जो प्रस्तावित सर्वे हुआ है, उसके अनुसार कर्णप्रयाग के बाद बद्रीनाथ धाम के लिए जोशीमठ तक रेल लाइन बिछाने का सर्वे होगा। वहीं केदारनाथ धाम के लिए जोशीमठ से पहले रूट सोनप्रयाग के लिए कट जाएगा। वहीं गंगोत्री और यमनोत्री धाम के लिए सर्वे डोईवाला से किया जाएगा।

उत्तरकाशी से पहले बडकोट से गंगोत्रीधाम के लिए मनेरी के लिए रूट कट जाएगा,जबकि यमुनोत्री के लिए बड़कोट से मातली के लिए सर्वे होगा।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल सर्वे प्रोजेक्ट का किया शिलान्यास। यहां देखेंः

नहीं मिलेगी इस बार दून की लीची कि मिठास

दून घाटी पर मौसम इस मई में गजब ढा रहा है। गर्मी और सूरज की तपिश से जहां लोगों का जीना मुश्किल होता जा रहा है तो वही बागवानो को भी अंधी-तूफ़ान से भारी नुकसान हो रहा है। जिसका सीधा असर दून के रसीले फल लीची की फसल पर पड़ा है। आंधी तूफ़ान और तेज़ गर्मी , मौसम के बदलाव ने इस बार लीची की फसल पर खासा असर डाला है। दून भोपुर-रानीपखरी में लीची ख़राब हो गयी है और इस बार लीची के प्रेमियों को लीची के स्वाद के लिए अभी और इंतज़ार करना पड़ेगा साथ ही इस बार कुछ ज्यादा ही जेब ढीली करनी पड़ सकती है। दून घाटी का जायदातर हिस्सा अपने फलों के बगीचे के लिए जाना जाता है दून घटी अपने रसीले फल लीची के लिए विशेष पहचान रखती है और यहाँ के बागवानो में गर्मियों में मुह में पानी ले आने वाली लीची अपनी खुशबु बिखेरती है।

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डोईवाला -रानीपोखरी और भोगपुर ,डालनवाला ,ये दून घाटी  की  वो जगह है जो लीची बागानों के लिए मशहूर है। इस बार लगातार हो रहे मौसमी बदलाव और गर्मी की तपिश ने बागवानो की पूरी मेहनत पर असर डाला है। जिसके चलते लीची का उत्पादन घटा और इस बार देहरादून की मशहुर लीची को बाज़ार में आने के लिए थोडा और इंतज़ार करना पड़ेगा ,और लीची के स्वाद के कद्रदानो को इसकी थोड़ी ज्यादा कीमत भी चुकानी पड़ेगी। राज्य में कृषि और उद्यान के भारी भरकम विभाग तो है पर किसानो और बागवानो को हो रहे आर्थिक नुकसान के लिए कोई ठोस नीती नहीं है जिस का खामियाजा यहाँ के लोगो को हर साल उठाना पड़ता है। मौसम की मार से हर साल लीची की फसलों को भारी नुकसान होता  है लेकिन सरकार ठोस कृषि निति न होने से कभी भी किसानो और बागवानो की मदद नहीं कर पाती , और वो साल दर साल भारी  नुक्सान उठाते है। फिलहाल किसानों और कास्तकारों को उम्मीद है की आने वाले समय में लीची की फसल सही हो सकेगी।

छोटे राज्य में रोजगार का सबसे आसान तरीका कृषि और बागवानी है जो पलायन  पर कुछ हद तक रोक लगाये हुयी है धीरे -धीरे युवा भी नगदी फसलों के जरिये इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे है ऐसे में कृषि मंत्रालय को भी इन के समय-समय हो रहे नुकसान के लिए भी ठोस कदम उठाने चाहिए ,जिससे युवा स्व रोजगार के जरिये अपनी रोज़ी रोटी कम कर पलायान पर अंकुश लगा सकेगे और उत्तराखंड भी हिमाचल की तर्ज़ पर विकास कर सकेगा।

 

पर्वतीय क्षेत्रों मे खेती के लिए होगा उपयोगी छोटा ट्रेक्टर

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बाइक के इंजन से बीजों की बुवाई की जा सकती है। स्टेयरिंग के जरिये किसान अपने हिसाब से मशीन को घुमाकर बुवाई कर सकते हैं। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज, काशीपुर के विद्यार्थियों ने पॉवर सीड ड्रिल नामक उपकरण तैयार किया है, जो खासकर पर्वतीय क्षेत्र के किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।

पर्वतीय क्षेत्रों की जमीन ढलान होती है।, ऐसे में ट्रैक्टर चलाकर सीड ड्रिल से बुवाई करने में दिक्कत होती है। इसको ध्यान में रखकर कृषि इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने पॉवर सीड ड्रिल उपकरण बनाया है। इसमें बाइक के इंजन, स्टेयरिंग, लोहे की टंकी, गियर, सीड बॉक्स लगे हैं। यह बाइक की तरह ही स्टार्ट होती है। इसकी खासियत यह है कि बाजार में जो भी सीड ड्रिल है, वह ट्रैक्टर से चलने वाला है, जबकि यह पॉवर सीड ड्रिल स्टार्ट करने के बाद हाथ से घुमाया जा सकता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में भी इस उपकरण का प्रयोग किया जा सकता है। शिक्षक एके शर्मा ने बताया कि इस उपकरण को प्रियंका व्यास, मीनाक्षी, कविता जोशी, नेहा रावत, हिमानी उनियाल, सौरभ नेगी, सुरेंद्र पाल, नवीन पांडे, हिमांशु, रजत किशोर, उपेंद्र सिंह ने बनाया है। विद्यार्थियों ने बताया कि पॉवर सीड ड्रिल पर्वतीय क्षेत्रों की जमीन को देखकर बनाया गया है। किसान अपने हिसाब से स्टेयरिंग घुमाकर गेहूं, उड़द, चना, मटर आदि बीजों की बुवाई कर सकते हैं। एक लीटर पेट्रोल में करीब डेढ़ घंटे तक उपकरण चलेगा। इसे शासन स्तर से प्रोजेक्ट करना किया जाना चाहिए।

रानीखेत मे शुरु हुई कुमांऊ रेजीमेंट की भर्ती

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कुमाऊं रेजीमेंट सेंटर (केआरसी) की यूनिट हेड क्वार्टर,रानीखेत मे कोटा भर्ती रैली दूसरे दिन भी जारी रही। इसमें राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य व विश्वविद्यालय स्तर के खिलाड़ियों को खास तवज्जो दी गई है। दूसरे दिन विभिन्न प्रांतो से पहुंचे 2000 में से 1183 नौजवान दौड़ के उतरे। इनमें 236 युवाओं ने दौड़ पूरी कर पहली बाधा पार की।

एतिहासिक सोमनाथ ग्राउंड में कोटा भर्ती रैली के दूसरे दिन खिलाड़ियों को खास तवज्जो दी गई। भर्ती रैली में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रेदश, राजस्थान, हरियाणा व उत्तर पूर्व के अन्य राज्यों से पहुंचे करीब दो हजार युवाओं में से 1183 को प्री-हाइट टेस्ट के बाद को दौड़ के लिए सही पाया गया। इनमें 236 युवाओं ने दौड़ पूरी की। इनमें से 116 खिलाड़ी तथा 120 सैन्य आश्रित थे।

इनके अभिलेखों की जांच कर ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन किया गया। 151 युवा शारीरिक दक्षता परीक्षा सफल हुए, इस दौरान भर्ती अधिकारी जीएसओ-1 (प्रशिक्षण) ले. समर राघव, ले. कर्नल उमेश सती, ले. कर्नल एमके सिंह, कैप्टन दीपक जोशी, एसएम जगदीश प्रसाद आदि समेत कई अधिकारी व जवान मौजूद रहे। भर्ती अधिकारी के अनुसार आज सभी राज्यों के युवाओं की सोल्जर ट्रेडमैन के लिए भर्ती होगी।

हल्द्वानी में कंकाल मिलने के बाद काम रोकने के आदेश

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परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने हल्द्वानी के अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आइएसबीटी) निर्माण स्थल पर कब्र और हड्डियों के अवशेष मिलने के बाद निर्माण कार्य पर रोक के आदेश जारी कर दिए हैं। जिला प्रशासन, पुलिस तथा पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग को मामले की पूरी जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच प्राथमिकता के आधार पर होगी।

गुरुवार शाम आइएसबीटी निर्माण स्थल गौलापार पहुंचे आर्य ने मुआयना करने के साथ ही पत्रकारों से बातचीत में कहा कि निर्माण स्थल पर कब्रगाह सामने आना एक गंभीर और जांच का विषय है। मौके से बरामद हड्डियों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाएगी, ताकि सच सामने आ सके। इस बीच परिवहन मंत्री ने आइएसबीटी की जरूरत पर जोर देते हुए निर्माण बाधित न होने की मंशा भी जताई।

कहा कि हल्द्वानी ही नहीं, पूरे कुमाऊं के लिए यह परियोजना बेहद अहम है। जांच पूरी होने के बाद निर्माण शुरू होगा। इस दौरान उनके साथ आरटीओ राजीव मेहरा, एसडीएम एपी बाजपेयी, कार्यदायी संस्था नागार्जुन कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर एसएसआरएम नायडू, सत्यनारायण रेड्डी भी थे।

सरकारी कमाई को बढ़ाने की जुगत में लगे अधिकारी: मुख्यमंत्री

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सूबे के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सरकार के खजाने और राजस्व को बढ़ाने की तरकीबें निकालने की हिदायत दी हैं। ये बात त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक मं साफ की।

वित्त और वाणिज्य कर विभागों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के वित्तीय संसाधनों को बढ़ाया जाय।जिसमें खास ध्यान वन और खनन से आने वाली कमाई को बढ़ाने पर रहे। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में निर्देश दिये है कि राजस्व प्राप्ति के लिये जिम्मेदार सभी विभागों में ईमानदार एवं पारदर्शी तरीके से काम किया जाय और इसमें कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। इसके साथ ही:

  • स्वरोजगार को बढ़ावा दे, पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकें
  • युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है।
  • स्किल डिवेलपमेंट और ट्रेनिंग पर ध्यान दिया जाय।
  • शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा की ईकाइयों को और प्रभावी बनाने के लिये एक कमेटी बनाकर रिपेार्ट तैयार की जाये।
  • डिजिटल बैंकिंग और कैशलेस अभियान, भीम ऐप और भीम आधार ऐप के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाय।

साल 2015-16 में राज्य का कुल खर्चा 29.6 हजार करोड़ रूपये रहा जबकि कुल कमाई 28.6 हजार करोड़ रूपये। राज्य पर कुल कर्विजा 39.03 हजार करोड़ रूपये है जो केंद्र सरकरा के तय मानकों से 25 प्रतिशत कम हैं। साल 2015-16 में राज्य का प्लैनड खर्च 10.58 हजार करोड़ रूपये और नोन प्लैन्ड खर्च लगभग 19 हजार करोड़ रूपये था। वर्ष 2015-16 में राज्य का कर राजस्व 9378 करोड़ रूपये तथा टैक्स के बाद राजस्व 1219 करोड़ रूपये था। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के कमाई के साधनों में इज़ापा करने की हिदायत दी है वहीं सरकार के सामने गैर ज़रूरी और फिजूलखर्ची को रोकना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

कुमाऊं का ग्रासलैंड बना बाघों का नया अाशियाना

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यह पूरे देश में शायद पहली बार होगा जब आप उत्तराखंड क्षेत्र के कुमाऊं मे पहला मानव निर्मित ग्रासलैंड दिखेगा जहां बाघिन और उसके बच्चों को आप घूमते हुए देख सकते हैं जिसे वो अपना घर मानते हैं। एक मानव रचित ग्रासलैंड, जो सालों की कड़ी मेहनत के बाद कुमाऊं के जंगल में बनाया गया है उसको आखिरकार सफलता का स्वाद चखने का मौका मिल गया है।

डाली रेंज के पूरब तराई की तरफ जंगलों में विभाजन पर बसा यह ग्रासलैंड लगभग 60 हेक्टेयर में फैला हुआ है, और पिछले 2 सालों से एक्सपेरिमेंट के आधार पर चल रहा है जिसमें इस क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा बाघों को और हाथियों को बसाया जा सके।

आफिसरों के अनुसार इस प्रोजेक्ट का टेस्ट सफलतापूर्वक किया गया जिसके बाद इसका उद्देश्य एक ऐसा हैबिटेट बनाना है जिसके बाद इसमें ज्यादा से ज्यादा बाघों को इस ग्रासलैंड में बसाया जा सके और उनके बच्चों की जनसंख्या को ट्रैक किया जा सके।

चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से ईवीएम पर सील हटाने को करी अपील

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ईवीएम से छेड़छाड़ मामले में चुनाव आयोग की ओर से शुक्रवार को नैनीताल कोर्ट में संशोधित प्रार्थना पत्र दायर किए गए। आयोग ने प्रार्थना पत्र में कोर्ट से ईवीएम की न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सील लगाने संबंधी आदेश को हटाने की मांग की है। आयोग के अनुसार ईवीएम पहले से ही सीलबंद हैं। वहीं कोर्ट ने प्रार्थना पत्रों पर आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

बीते दिनों न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की एकलपीठ ने विकास नगर से कांग्रेस प्रत्याशी नवप्रभात के अलावा मसूरी से गोदावरी थापली समेत अन्य प्रत्याशियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जीते हुए प्रत्याशियों को नोटिस जारी किया था। साथ ही ईवीएम को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सील करने के आदेश पारित किए थे।

आयोग के अधिवक्ता की ओर से एकलपीठ में बयान दर्ज कराते हुए कहा गया था कि ईवीएम पहले से ही सील बंद कर कंट्रोल रूम में रखी गई हैं। इनका रखरखाव राज्य सरकार कर रही है। अब चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि पिछले वक्तव्य में राज्य सरकार शब्द भूलवश रिकॉर्ड हो गया, जबकि यह रखरखाव सरकार के जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से निर्वाचन आयोग कर रहा है।

इसलिए आयोग ने अदालत से ईवीएम को न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सील बंद किए जाने के आदेश को हटाने की मांग की है। जस्टिस गुप्ता की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद याचिकाकर्ता व प्रत्याशी रहे राजकुमार, प्रभुलाल बहुगुणा, गोदावरी थापली, अमरीश कुमार, विक्रम सिंह नेगी, चरन सिंह से तीन सप्ताह में आपत्ति दाखिल करने के आदेश पारित किए।