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कुमाऊं का ग्रासलैंड बना बाघों का नया अाशियाना

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यह पूरे देश में शायद पहली बार होगा जब आप उत्तराखंड क्षेत्र के कुमाऊं मे पहला मानव निर्मित ग्रासलैंड दिखेगा जहां बाघिन और उसके बच्चों को आप घूमते हुए देख सकते हैं जिसे वो अपना घर मानते हैं। एक मानव रचित ग्रासलैंड, जो सालों की कड़ी मेहनत के बाद कुमाऊं के जंगल में बनाया गया है उसको आखिरकार सफलता का स्वाद चखने का मौका मिल गया है।

डाली रेंज के पूरब तराई की तरफ जंगलों में विभाजन पर बसा यह ग्रासलैंड लगभग 60 हेक्टेयर में फैला हुआ है, और पिछले 2 सालों से एक्सपेरिमेंट के आधार पर चल रहा है जिसमें इस क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा बाघों को और हाथियों को बसाया जा सके।

आफिसरों के अनुसार इस प्रोजेक्ट का टेस्ट सफलतापूर्वक किया गया जिसके बाद इसका उद्देश्य एक ऐसा हैबिटेट बनाना है जिसके बाद इसमें ज्यादा से ज्यादा बाघों को इस ग्रासलैंड में बसाया जा सके और उनके बच्चों की जनसंख्या को ट्रैक किया जा सके।

चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से ईवीएम पर सील हटाने को करी अपील

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ईवीएम से छेड़छाड़ मामले में चुनाव आयोग की ओर से शुक्रवार को नैनीताल कोर्ट में संशोधित प्रार्थना पत्र दायर किए गए। आयोग ने प्रार्थना पत्र में कोर्ट से ईवीएम की न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सील लगाने संबंधी आदेश को हटाने की मांग की है। आयोग के अनुसार ईवीएम पहले से ही सीलबंद हैं। वहीं कोर्ट ने प्रार्थना पत्रों पर आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

बीते दिनों न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की एकलपीठ ने विकास नगर से कांग्रेस प्रत्याशी नवप्रभात के अलावा मसूरी से गोदावरी थापली समेत अन्य प्रत्याशियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जीते हुए प्रत्याशियों को नोटिस जारी किया था। साथ ही ईवीएम को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सील करने के आदेश पारित किए थे।

आयोग के अधिवक्ता की ओर से एकलपीठ में बयान दर्ज कराते हुए कहा गया था कि ईवीएम पहले से ही सील बंद कर कंट्रोल रूम में रखी गई हैं। इनका रखरखाव राज्य सरकार कर रही है। अब चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि पिछले वक्तव्य में राज्य सरकार शब्द भूलवश रिकॉर्ड हो गया, जबकि यह रखरखाव सरकार के जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से निर्वाचन आयोग कर रहा है।

इसलिए आयोग ने अदालत से ईवीएम को न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सील बंद किए जाने के आदेश को हटाने की मांग की है। जस्टिस गुप्ता की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद याचिकाकर्ता व प्रत्याशी रहे राजकुमार, प्रभुलाल बहुगुणा, गोदावरी थापली, अमरीश कुमार, विक्रम सिंह नेगी, चरन सिंह से तीन सप्ताह में आपत्ति दाखिल करने के आदेश पारित किए।

13 मई से लगेगा 7 दिनों का कृषि मेला

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शुक्रवार को सहकारिता मंत्री डा.धन सिंह रावत ने प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। इस कांफ्रेंस में धन सिंह रावत ने कल यानि 13 मई से 19 मई तक होने वाले मेले के आयोजन के बारे में बताया।उन्होंने बताया कि देहरादून के परेड ग्राउंड में सहकारिता मेले का आयोजन होगा । केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन और सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत करेंगे मेले का उद्घाटन। उन्होंने कहा कि सहकारिता से सम्बंधित पहली बार आयोजित हो रहा है ये मेला। 2 लाख के करीब किसानों को लाभ दिए जाने का है लक्ष्य। डा.रावत ने बताया कि कल से शुरु होने वाला मेला, अंर्तराष्ट्रीय लेवल का होगा। इसके अलावा डीसीबी  के चेयरमैन और सांसद हर दिन भाग लेंगे साथ ही प्रदेश के 8 मंत्री भी अलग-अलग दिन मौजूद रहेंगे। डा.रावत ने कहा कि शायद यह पहली बार होगा जब सहकारिता को राजनिति से हट कर किसी कार्यक्रम में बुलाया जाएगा।

कार्यक्रम के बीच-बीच में टेक्निकल सेशन भी होंगे, डा. रावत ने कहा कि आने वाले समय में सहकारी समिति का नाम बदलकर बहुदेसीय सहकारी समिति रखा जाएगा। इसके साथ ही सहकारी समितियों को डिजिटल इंडिया मुहिम से जोड़ा जाएगा और 1 साल के अंदर 7 जगह सहकारी मेले का आयोजन किये जायेंगे। डा.धन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मुझे 2 लक्ष्य दिये थे एक पलायन और दूसरा रोजगार, इसके लिए हम एक साथ 20 हजार लोगों को रोजगार देने में सक्षम होंगे।

डा.धन सिंह रावत ने बताया कि कल से शुरु होने वाले मेले में 225 स्टॉल लगेंगे, और इस कार्यक्रम के जरिए 80 फीसदी सहकारिता से जुड़े रहने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही 13 मई को सहकारिता को डिजीटल मीडियम से जोड़ने के लिए वेबसाइट लांच की जाएगी।

राज्य में पेट्रोल 25 पैसे तो डीजल होगा 50 पैसे सस्ता

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त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल ने अहम फैसला लेते हुए उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को नए निर्माण कार्य देने पर रोक लगा दी। वहीं निगम को दिए गए पुराने कार्यों का तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन नियोजन विभाग करेगा, जबकि इन कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी।

कैबिनेट ने पेट्रोल और डीजल पर कार्बन सेस खत्म करने का निर्णय कर जनता को कुछ राहत दी, लेकिन उसे बिजली का टैरिफ बढऩे का झटका लगना भी तय है। राज्य में पेट्रोल प्रति लीटर 25 पैसे और डीजल प्रति लीटर 50 पैसे सस्ता हो जाएगा। 252 मेगावाट की दस जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादित बिजली का टैरिफ 80 पैसे प्रति यूनिट से बढ़ाकर दो रुपये प्रति यूनिट किया। इससे आम बिजली उपभोक्ता पर 15 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा टैरिफ की मार पड़ने जा रही है।आयकर जांच में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से संबद्ध अधिकारियों पर शिकंजा कसने के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपना लिया है।

मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ करते हुए सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि निगम को अब राज्य के भीतर नए कार्य आवंटित नहीं किए जाएंगे। मंत्रिमंडल ने यह फैसला भी लिया कि निगम को सौंपे गए पुराने कार्यों का तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन पर भी सख्ती से कराया जाएगा।

यह जिम्मा नियोजन महकमे को सौंपा गया है। निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच भी होगी। गौरतलब है कि राज्य में प्रोक्योरमेंट नियमों की अनदेखी कर निगम को बड़े निर्माण कार्य सौंपे जाते रहे हैं। ‘दैनिक जागरण’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आखिरकार मंत्रिमंडल को इस मामले में फैसला लेने को मजबूर होना पड़ा। मंत्रिमंडल ने पेट्रोल और डीजल पर कार्बन सेस खत्म कर जनता और उपभोक्ताओं को राहत दी है। इससे करीब 100 करोड़ का राजस्व की हानि होगी, लेकिन इस हानि की पूर्ति राज्य में पेट्रोल और डीजल की अधिक बिक्री से होने वाली आय से मुमकिन होगी।

उत्तराखंड में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के करीब बराबर हो गई हैं। मंत्रिमंडल ने राज्य में गंगा व सहायक नदियों के लिए मैनेजमेंट बोर्ड के गठन को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए मसौदे पर विचार को मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित की है।

मंत्रिमंडल ने राज्य की सभी तकरीबन 9200 राशन की दुकानों पर प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें जुलाई माह तक लगाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति भी गठित की गई है।

 

गढ़वाल कमिश्नर ने ऋषिकेश तहसील का किया औचक निरीक्षण

ऋषिकेश तहसील में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक ही गढ़वाल कमिश्नर ने तहसील ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया। कमिश्नर ने निरीक्षण में तरह-तरह कई तरह की अनियमितताएं पाई जिसको लेकर उन्होंने तहसीलदार सहित कई अधिकारियों को फटकार लगाई और निरक्षण के दौरान तहसील से गायब रहने पर कमिश्नर का पारा चढ़ गया और उन्होंने तत्काल प्रभाव से रजिस्ट्रार ललित सिंह को निलंबित कर दिया और रजिस्ट्रार ऑफिस के ताले तुड़वाकर फाइलों की जाँच की। कमिश्नर का कहना है कि कर्मचारी यहां अपने कार्य को ठीक ढंग से नहीं कर रहे हैं जिसकी शिकायत लगातार मिल ही थी और निरीक्षण में भी इन शिकायतों को सही पाया गया जिसके चलते अधिकारियों पर कार्यवाही की गई।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू पहुँचे ऋषिकेश

भाजपा के वरिष्ट नेता और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू तीर्थनगरी ऋषिकेश कार्यकर्तायों से मुलाक़ात करने पहुँचे,जहां कार्यकर्तायों द्वारा उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती पर लगे आरोपों पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि पहले तो विपक्ष ही उनपर आरोप लगाते थे लेकिन अब तो उन्ही की पार्टी के कार्यकर्ता आरोप लगा रहे है।

उन्होंने प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी की वजय से देश में नया कल्चर आया है, ओर लोगों को पता भी चल रहा है कि अब ज़ीरो परसेंट टॉलरेंस वाली सरकार देश में काम कर रही है। गौरतलब है कि बसपा के बागी नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती पर आरोप लगाते हुए बसपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हल्द्वानी आईएसबीटी की खुदाई में मिले नर कंकाल से मचा हड़कंप

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यह खबर नैनीताल के पास हल्द्वानी जिले के गौलापुर इलाके की है जहां एक हफ्ता पूर्व एक अंतर्राज्यीय बस अड्डे की इमारत के लिए खुदाई का काम चल रहा था। इस दौरान वहां काम करने वाले लोगों को करीब 40 मानव कंकाल और 300 पत्थर की कब्र जैसे ढांचे मिले। मंगलवार को इसकी सूचना के सार्वजनिक किए जाने के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों, अधिकारियों और इतिहासकारों के दरम्यान इसको लेकर कौतूहल बना हुआ है। कुछ स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि ये 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से सम्बंधित हो सकता है जिसमें बरेली के मुस्लिम रोहिल्ला सरदारों ने अंग्रेजों से युद्ध करते हुए अपनी जान गंवा दी थी। तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये प्लेग, मलेरिया या फिर किसी दूसरी महामारी से मरे लोगों के कंकाल हो सकते हैं।

गौलापार में निर्माणाधीन अन्तर्राज्जीय बस टर्मिनल निर्माण स्थल पर मिले कंकाल मामले को परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने गम्भीरता से लिया है। आर्य ने गौलापार पहुचकर आईएसबीटी स्थल का निरीक्षण किया। उन्होने कार्यदायी संस्था नार्गाजुन को तत्काल प्रभाव से कार्य बन्द करने के आदेश दिये। उन्होने कहा कि इस प्रकार कंकालों का मिलना एक गम्भीर मसला है, तथा जांच का विषय भी है। उन्होने कहा कि इस प्रकरण की पूरी छानबीन करायी जायेगी तथा कंकालो एव हडडियों का डीएनए टैस्ट कराकर तथ्यों की जानकारी जुटाई जायेगी। यह कार्य पुरात्तव, सर्वेक्षण एवं पुलिस व जिला प्रशासन के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर कराया जायेगा।

आर्य ने बताया कि यह  महत्वपूर्ण जनसरोकार से जुडा मेगा प्रोजेक्ट है ऐसे में इसके निर्माण को बाधित नही किया जायेगा। आधुनिकतम आईएसबीटी क्षेत्र के अलावा कुमायू की आवश्यकता है, साथ ही हल्द्वानी महानगर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधार के साथ ही वाहनो के दबाव को कम करने के लिए आईएसबीटी आवश्यक है।

दिल्ली की महिला पर्यटक पर पुलिस के अत्याचार

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उत्तराखंड को पर्यटक प्रदेश के रूप में पहचाना जाता है। यहाँ देश विदेश से लाखों करोड़ों यात्री घूमने फिरने और चारधाम के दर्शन करने आते हैं पर इसी पर्यटन प्रदेश में अगर उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस ही अगर उनसे मारपीट करने लग जाए और वो भी एक महिला पर्यटक के साथ तो फिर कैसे पर्यटक इस प्रदेश का रुख करेंगे। सवाल बेहद महत्वपूर्ण है।

मामला हरिद्वार के आनंद वन समाधी की पार्किंग का है, जहाँ नयी दिल्ली से आयी एक महिला पर्यटक को एक पुलिस कर्मी ने सिर्फ इस बात पर पीटना शुरू कर दिया की वो अपने साथ लाये वाहन को जल्दी से पार्किंग में नहीं लगा पायी। गुंजन नामक महिला पर्यटक अपने दो बच्चों के साथ हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए आयी थी, पर शायद वो ये नहीं जानती थी की जिस प्रदेश की पुलिस को मित्र पुलिस का तमगा मिला हुआ है वो इतनी कठोर हो जाएगी की पार्किंग के नाम पर ही महिला पर थप्पड़ की बरसात करना शुरू कर देगी।

रोड़ीबेलवाला चौकी में तैनात पुलिस कर्मी ने एक मामूली बात पर ही महिला की जिस कदर पिटाई की वो पर्यटन प्रदेश के लिए एक अच्छा संकेत नहीं क्यूंकि जिस प्रदेश की अधिकांश जीविका पर्यटन पर निर्भर करती है वहां पर ऐसी बर्बरता सोच से भी परे है।

पुलिस जहाँ इस मामले को रफादफा करने में लगी थी तो वहीँ दूसरी और सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत ही कड़ी कार्यवाही करते हुए पुलिस कर्मी को ससपेंड कर मामले की जांच सीधे एसएसपी हरिद्वार को सौंप दी है।

कुछ यूँ होगा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन का स्वरुप

जल्द ही पहाड़ पर रेल का सपना सच होने जा रहा है। उत्तराखंड के तीर्थो को रेलवे लाइन से जोड़ने को लेकर केंद्र सरकार काफी गंभीर है जिसके लिए तेज़ी से  पहाड़ो पर रेल लाइन विस्तार की योजना बन रही है। हरिद्वार -रुड़की – ऋषिकेश के स्टेशन के भी कायाकल्प की तैयारी में विभाग जुट गया है और इसके लिए रेल मंत्री ने कर्णप्रयाग से बिगुल भी फूंक दिया है।

उत्तराखण्ड के पहाड़ों पर रेल चलना एक सपने के जैसा ही है, लेकिन ये सपना अब साकार रूप लेने लगा है। इस सपने को लेकर रेल मंत्रालय कसरत में जुट गया है, जिसके लिए उत्तराखंड के तीर्थो को रेलवे से जोड़ना पहली प्राथमिकता है रेल मंत्री के हरी झंडी दिखने के बाद अब विभाग भी अपनी तैयारियों में जुट गया है।  इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत 12 स्टेशनों सहित 16 सुरंगों और पुलों का  निर्माण किया जाएगा।

ओ पी मालगुड़ी, प्रोजेक्ट मेनेजर का कहना है की रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु 13 मई को उत्तराखंड आएंगे और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के विस्तार के काम का शिलान्यास करेंगे रेलवे ने ऋषिकेश से कर्णप्रयाग  तक रेल लाईन बिछाने के लिए अपना मास्टर प्लान तैयार कर लिया है ।  जिसके लिए भूमि अधिग्रहण काम भी लगभग पूरा हो चूका है। विभाग का मानना है कि शुरूवाती चरणों का कार्य पूरा हो चूका है और बाकि की तैयारियों में भी विभाग लगा हुआ है। एक बार कार्य शुरु हो जाने के बाद 8 से 10 सालों में यह योजना पूरी हो जायेगी।

ऋषिकेश देवभूमि के प्रवेश द्वार के साथ साथ  चार धाम यात्रा का मुख्य केंद्र है यहाँ से पहाड़ो पर अभी रेल को पहुचना एक चुनौती है जिस पर रेल मंत्रालय लगतार कामों को अंजाम देने में लगा है उम्मीद है आने वाले कुछ सालो में पहाड़ो पर तीर्थयात्रा का लुफ्त रेल से भी उठाया जायेगा।

राजा जी पार्क में हो रहा है अवैध अतिक्रमण

राजा जी नेशनल पार्क की स्थापना 1983 में हुई थी लगभग सभी जंगली जानवर पार्क में पाए जाते है। एक अनुमान के अनुसार पार्क में मुख्य तय 500 हाथी,12 टाइगर,250 पेनथर अन्य जीव जंतु विचरण करते है। इस पार्क की सीमा हरिद्वार,देहरादून, पौडी से मिलती है। शासना आदेशों को दर किनार करते हुए पार्क की सीमा पर अधिकांश रिहायसी कौलोनीस लगातर बनती जा रही। प्रॉपर्टी डीलरो व सक्षम अधिकारियों का गठ जोड कभी भी बड़ी विनाश लीला रच सकता है।

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पार्क से 10 किमी का क्षेत्र ईको सेन्सटिव जोन में आता है, इस क्षेत्र में कोई भी निर्माण विशेष अनुमति से ही संभव है। प्रशासन के दावे कुछ भी हो लेकिन हकीकत कुछ और ही बया करती है रोशना बाद के पास टिहरी विस्थापित की कालोनी पार्क की दिवाल तक जा पहुँची है। पार्क के जंगली जानवरों और इंसान के आशियाने में बस कुछ इंचों की ही दूरी रह गईं है। पार्क हो या वन विभाग जानवर तो वहाँ रहेंगे ही आने वाले कल की चिंता कोई नही कर रहा है। पार्क व वन विभाग के समीप  जहां भी रिहाइश है वहाँ जंगली जानवरो की आवाजाही हमेशा बनी रहती है चाहे 1965 में बनी भेल की आवासीय कालोनी हो या नया निर्माण। आज प्रशासन स्थिति को नज़र अंदाज़ कर सकता है पर आने वाला कल बड़ी समस्या लेकर प्रशासन के द्वार ही खड़ा नज़र आयेगा।