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यहां जाने के लिए रखनी पडती है जान हथेली पर

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देश की नेपाल और चीन सीमा से लगे सीमांत क्षेत्र जैसे पिथौरागढ़ में कागजी विकास के लंबे-चौड़े दावे होते हैं। इन दावों की हकीकत गोरी नदी घाटी में देखने को मिलती है। जहां आज भी गोरी सहित उसकी सहायक नदियों को पार करने के लिए कच्चे झूलापुल और जानलेवा गरारियां ही बनी हैं। सचाई तो यह है कि डोलने वाले झूला पुल और जानलेवा गरारिया दर्जनों गांवों की लाइफ लाइन हैं।

विश्व प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली विशाल गोरी नदी और उसकी सहायक नदियां तिब्बत सीमा से लगे क्षेत्र में जनजीवन को थर्राती रहती हैं। ग्रीष्मकाल में जब बर्फ पिघलती है तो सभी नदियों का जल स्तर बढ़ जाता है। मानसून काल में तो ये नदियां विकराल रूप धारण कर लेती हैं। मिलम से लेकर जौलजीवी तक लगभग 132 किमी तक गोरी नदी के किनारे घनी बसासत है। नदी के पूर्वी छोर की तरफ जहां बाजार, विद्यालय सहित अन्य उपक्रम हैं तो पश्चिमी छोर पर बड़े-बड़े गांव हैं। कुछ गांवों की तो स्थिति यह है कि खेत भी नदी के दूसरी तरफ हैं। इसके चलते ग्रामीणों को रोज नदी के दूसरी तरफ जाना पड़ता है।

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विकास का सच यह है कि जौलजीवी से लेकर मिलम तक 132 किमी की दूरी पर मात्र तीन मोटर पुल जौलजीवी, कौली और मदकोट में हैं। जौलजीवी से कौली की दूरी 15 किमी जबकि कौली से मदकोट की दूरी 30 किमी है। इसके अलावा गर्जिया में सौ साल पुराना झूला पुल, चामी, बंगापानी में झूला पुल हैं। हुड़की, आलम, फगुवा और बसंतकोट के पास गरारी हैं। जो सभी क्षतिग्रस्त हैं। इन गरारियों से आर-पार करने में प्रतिवर्ष कई लोग जानें चली जाती हैं। इसके अलावा उच्च हिमालय में भी गोरी नदी पर कच्चे पुल हैं, जो प्रतिवर्ष शीतकाल में हिमपात से तो मानसून काल में नदी के प्रवाह से बह जाते हैं।

मानसून के चार माह में गोरी नदी घाटी के दर्जनों गांवों का शेष जगत से संपर्क भंग हो जाता है। स्कूली बच्चों का विद्यालय जाना बंद हो जाता है। इन गांवों के लिए बनी लाइफ लाइन खुद ही बीमार है।

ट्रांसफर के ल‌िए शिक्षकों ने पार की हदें, मंत्री ने भी पकड़ लिया सर

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पहाड़ों में शिक्षकों की बहाली और वहां शिक्षकों का रुके रहना शिक्षा विभाग के लिये एक बड़ा मसला बन गया है। विभाग लगातार नये तरीके निकाल रहा है स्कूलों में शिक्षकों को पहुंचाने की लेकिन वहीं शिक्षक भी विभाग के नहले पर दहले मार रहे हैं। शिक्षा विभाग के नियमों के तोड़ने के मामले सामने आये हैं। इनकी पुष्टि होने के बाद ही शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने अनुरोध के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया पर रोक लगाई है।

तबादला पाने के लिए कई शिक्षिकाओं ने अपने पति से फर्जी तलाक लिया है, घर पर भले ही सब कुछ सामान्य हो, लेकिन कागजों में पति और पत्नी एक-दूसरे से तलाक ले चुके हैं। विधवा और तलाकशुदा शिक्षिकाओं की सहायता के लिए उन्हें अनुरोध के आधार पर तबादले का लाभ दिया जाता है। लेकिन कई शिक्षिकाओं ने इसका दुरुपयोग किया है, उन्होंने कागजों में अपने पति से तलाक ले लिया और खुद को तलाकशुदा दिखाते हुए अनुरोध के आधार पर तबादले का लाभ लिया है जबकि, आज भी वह अपने पति के साथ ही रह रही हैं। इस बार की तबादला प्रक्रिया में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र तक बनाए गए हैं।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि टीचरों ने स्टेट मेडिकल बोर्ड से फर्जी प्रमाण-पत्र भी बनवाए हैं। प्रमाण-पत्र में टीचरों को ‘सुनने में असमर्थ’, ‘चलने-फिरने में असमर्थ’, ‘बोलने में असमर्थ’ बताया गया है। लेकिन अंत में नोट देकर ‘पढ़ाने में समर्थ’ लिखा गया है।
गंभीर बीमार शिक्षकों के होंगे तबादले
 

वहीं शिक्षा मंत्री के सामने ब्रेन हैमरेज से पीड़ित चमोली निवासी शिक्षक लक्ष्मण सिंह रावत का मामला भी उठा। लक्ष्मण सिंह को कुछ समय पहले ब्रेन हैमरेज हो गया था, इसके बाद जौलीग्रांट में उनका उपचार हुआ। उन्हें लगातार जांच के लिए दून आना पड़ता है। उन्होंने अनुरोध के आधार पर तबादले के लिए आवेदन करना चाहा तो पोर्टल में बीमारियों की कैटेगरी में ब्रेन हैमरेज नहीं मिला। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लक्ष्मण जैसे वास्तविक बीमार शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

अब छुट्टी लेने के लिए टीचरों को दफ्तरों और बाबू के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने ‘उज्ज्वल सेवा’ मोबाइल एप तैयार किया है, इस एप में शिक्षकों को छुट्टी के लिए एप्लीकेशन अपलोड करना होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि एक अगस्त से एप काम करने लगेगा, जिसका टीचर लाभ उठा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश का विकल्प भरने वाले कई टीचरों ने एनओसी हासिल करने के लिए अधिकारियों को रिश्वत दी। इसकी जानकारी मिलने के बाद ऐसे सभी मामलों की फाइल रोक दी गई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि उन्होंने रिश्वत लेने वाले सभी अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है।

डीम्ड संस्थानों के नाम में शामिल नहीं होगा यूनिवर्सिटी शब्द

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देश भर के डीम्ड संस्थान अब अपने नाम के आगे यूनिवर्सिटी शब्द को प्रयोग नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं इंडियन, नेशनल या इंटरनेशनल जैसे शब्द भी वर्जित होंगे, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के नए रेगूलेशन में डीम्ड संस्थानों को इस शब्द के उपयोग करने पर रोक लगा दी गई है।

नए नियम के मुताबिक, अब संस्थान अपने नाम के आगे विश्वविद्यालय के समकक्ष या श्बराबरश् जैसे शब्दों का उपयोग करेंगे। यूजीसी द्वारा प्रस्तुत किए गए ड्रॉफ्ट में यह तमाम जानकारी दी गई है। आयोग के डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए तैयार किए गए नए रेगूलेशन पर गौर करें तो कोई भी डीम्ड संस्थान अब यूनिवर्सिटी शब्द का प्रयोग नहीं करेगा। इसके स्थान पर उसे अपने नाम के साथ समकक्ष या फिर यूनिवर्सिटी के बराबर जैसे शब्दों का प्रयोग करना होगा।

उत्तराखंड की बात करें तो यहां प्रदेश भर में तीन डीम्ड विश्वविद्यालय हैं। इनमें हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, देहरादून के एफआरआई और निजी विश्वविद्यालय ग्राफिक एरा शामिल हैं। नए नियम के मुताबिक, इन सभी के नाम से यूनिवर्सिटी हटाया जाना तय है, इसके अलावा देशभर के अन्य राज्यों में संचालित होने वाली डीम्ड यूनिवर्सिटी भी अपने नाम से यूनिवर्सिटी शब्द को हटाकर समकक्ष यूनिवर्सिटी शब्द का उपयोग करेंगी।

इंडियन, नेशनल या इंटरनेशनल शब्द भी नहीं होगा उपयोग:
डीम्ड संस्थानों को यूनिवर्सिटी शब्द से अलग अपने नाम में इंडियन, नेशनल या फिर इंटरनेशनल शब्द को भी उपयोग न किए जाने के निर्देश आयोग ने दिए हैं। आयोग ने साफ किया कि रेगूलेशन के तहत संस्थानों को विभिन्न कसौटियों पर तभी परखा जाएगा जब वे रेगूलेशन के अंतर्गत मानकों को पालन कर रहे होंगे। आयोग ने यह भी कहा कि कोई भी डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी एक से ज्यादा कैंपस संचालित नहीं कर सकेंगी। इतना ही नहीं, कोई भी नया डीम्ड संस्थान डिस्टेंस मोड यानि दूरस्थ माध्यम से डिग्री कोर्स भी संचालित नहीं कर सकेगा। आयोग ने इसे पूरी तरह से नए संस्थानों के लिए वर्जित रखा है।

उत्तराखंड भाषा विभाग के उपनिदेशक डा. सुशील उपाध्याय ने बताया कि आयोग के रेगूलेशन 2017 को लेकर ड्राफ्ट प्रस्तुत कर दिया गया है। आयोग ने डीम्ड संस्थानों पर कई तरह की बाध्यताएं लगाईं हैं। नए नियमों में संस्थानों को यूनिवर्सिटी शब्द के उपयोग की भी मनाही रहेगी। उन्होंने बताया कि अक्सर देखने में आता है कि यूनिवर्सिटी शब्द का प्रयोग कर संस्थान कई मामलों में न सिर्फ मनमानी करते हैं बल्कि नियमों को भी दरकिनार कर देते हैं। नए नियमों से ऐसे संस्थानों पर लगाम लगेगी। आयोग का मकसद है देशभर में शिक्षा का एक ऐसा माहौल तैयार हो जो शिक्षा क्षेत्र को बेहतर दिशा देने का कार्य करें।

आस्था के सैलाब में डूबी शिव नगरी

उत्तराखंड के  कण-कण में भगवान शिव का वास है। कुछ ऐसा ही है मणिकूट पर्वत के नीलकंठ महादेव में।  हर साल सावन मास में बड़ी संख्या में शिवभक्त जल लेकर नीलकंठ महादेव का जलाभिषेक के लिए निकल पड़ते हैं – नीचे गंगा और उसके सिर पर मणिकूट पर्वत का विद्वान भगवान शिव रहते हैं।

जब समुद्र मंथन में अमृत के साथ विष निकला था तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया था इसलिए इसे नीलकंठ महादेव कहां जाता है, यही वह स्थान है जहां पर भगवान शिव को विश्व की तपस से राहत मिली थी और यहीं पर शिव भगवान समाधी में लीन हो गए थे। तब से लगातार शिवभक्त अपने भोले बाबा के दर्शन करने के लिए नीलकंठ धाम, ऋषिकेश्त पहुंचते हैं और बाबा भोलेनाथ उनकी हर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

बड़ी संख्या में शिवभक्त विभिन्न राज्यों से पैदल कावड़ को देकर गंगा से जल भरकर अपने आराध्य भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए नीलकंठ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए भी इन लाखों भक्तों को कंट्रोल करना चुनौती भरा काम होता है जिसके लिए प्रशासन भी मुस्तैद नजर आ रहा है। कावड़ यात्रा पर आतंकी अलर्ट होने के बावजूद शिव भक्तों की आस्था पर कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है, शिवभक्तों की आस्था के आगे आतंकी साया ओझल होता दिख रहा है।

श्रद्धा कपूर की ‘हसीना पारकर’ 18 अगस्त को होगी रिलीज

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श्रद्धा कपूर की चर्चित फिल्म हसीना पारकर की नई रिलीज डेट तय हो गई है। नई डेट के मुताबिक, ये फिल्म आगामी 18 अगस्त को रिलीज होगी। पहले ये फिल्म 14 जुलाई को रिलीज होने जा रही थी। ये फिल्म इंडिया के मोस्ट वांटेड अपराधियों में से एक दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की जिंदगी पर बनी है।

अपूर्व लखिया ने इसका निर्देशन किया है। इस फिल्म में श्रद्धा कपूर ने हसीना का रोल किया है, जबकि पहली बार श्रद्धा इस फिल्म में अपने सगे भाई सिद्धार्थ कपूर के साथ परदे पर नजर आएंगी। इस फिल्म में भी सिद्धार्थ और श्रद्धा बहन-भाई का रोल ही कर रहे हैं।

अंकुर भाटिया ने फिल्म में हसीना पारकर के पति का रोल किया है। हाल ही में फिल्म का नया पोस्टर सोशल मीडिया पर जारी हुआ, जिसमें हसीना पहली बार अपने पूरे परिवार, पति तथा बच्चों के साथ नजर आ रही हैं। फिल्म का नया ट्रेलर मंगलवार 18 जुलाई को रिलीज होने जा रहा है। हसीना पारकर के लिए माना जाता है कि 1993 में मुंबई में बम धमाके के बाद दाऊद के दुबई भाग जाने के बाद मुंबई में डी कंपनी का सारा कारोबार हसीना ने खुद संभाला था।

कौन लगा रहा निगम को चूना

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नगर निगम काशीपुर, ने दुकानों का सर्वे किया तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आए हैं। सर्वे में अभी तक तीन हजार से अधिक दुकानें चिह्नित हो चुकी हैं, जबकि वर्तमान में करीब 927 दुकानों से ही टैक्स वसूला जा रहा है। इससे साबित हो गया है कि टैक्स विभाग नगर निगम को राजस्व का चूना लगा रहा था।

नगर निगम के दायरे में 20 वार्ड हैं। इसमें ड्राइक्लीनर्स, लॉजिंग हाउस, प्रिटिंग प्रेस, पेट्रोल पंप, आटा, मसाला चक्की, चाय की दुकान, घी की डेरी, रेस्टोरेंट, ढाबा आदि दुकानें हैं। सैकड़ों कॉमर्शियल भवन भी हैं। फिर भी निगम का टैक्स विभाग के मुताबिक करीब 927 दुकानों से टैक्स वसूला जा रहा है। 20 हजार से ढाई लाख रुपये वार्षिक शुल्क वसूलने का प्रावधान है।

टैक्स विभाग की मिलीभगत से कम दुकानों को पंजीकृत किया गया, इससे निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा था। दुकानों की संख्या कम पंजीकृत होने पर अफसर हैरत में थे। नगर आयुक्त ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने दुकानों का सर्वे करने के लिए एक टीम गठित कर दी है। सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आया है कि अभी तक तीन हजार से अधिक दुकानें चिह्नित किए गए हैं। सर्वे का कार्य चल रहा है, जिन दुकानों से टैक्स वसूला नहीं जाता है, उन दुकानों से टैक्स वसूला जाएगा। जो लोग सेटिंग से टैक्स नहीं देते हैं, वे अब टैक्स देने से नहीं बच पाएंगे

राष्ट्रपति चुनाव: विधानसभ में चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ

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उत्तराखंड विधानसभा में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए प्रक्रिया अपने निर्धारित समय पर प्रारंभ हो गई है। मतदान प्रक्रिया सुबह दस बजे से प्रारंभ होकर सांय पांच बजे तक चलेगी। विधानसभा में 71 विधायक अपने मत का प्रयोग करेंगे। इनमें 70 विधायक उत्तराखंड के और एक विधायक बिहार के हैं। प्रदेश के पांच लोकसभा सांसद और तीन राज्यसभा सांसद दिल्ली में मतदान करेंगे।

राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए विधानसभा में सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से बनाए गए पर्यवेक्षक निकुंज किशोर सुंदरे मतदान के दौरान पूरी गतिविधियों पर नजर रखेंगे। सचिव विधानसभा जगदीश चंद्र रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका में रहेंगे। मतदान में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए विशेष पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने बताया कि मतदान के बाद मतपेटी सील कर दी जाएगी। इसके बाद इसे मंगलवार को फ्लाइट से दिल्ली भेजा जाएगा।

यूथ हॉस्टल एसोसिएशन उत्तराखंड के चेयरमैन बने डॉ. भसीन

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यूथ हॉस्टल एसोसिएशन उत्तराखंड चैप्टर के चुनाव में डॉ. धीरेंद्र शर्मा अध्यक्ष व डीएवी पीजी के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन को निर्विरोध चेयरमैन चुना गया।

रविवार को यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उत्तराखंड चैप्टर की काउंसिल की बैठक में चुनाव अधिकारी डॉ. एसके सिंह द्वारा संपन्न चुनाव में डॉ. धीरेन्द्र शर्मा निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए, जबकि डॉ. देवेंद्र भसीन चेयरमैन निर्वाचित हुए। उपाध्यक्ष पद पर लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) ओपी कौशिक, डॉ. रेनू सक्सेना व डॉ. रवि दीक्षित और कोषाध्यक्ष पद पर मो. उस्मान चुने गए।

चुनाव के बाद एसोसिएशन के संविधान के अनुरूप चेयरमैन डॉ. देवेंद्र भसीन ने संजय टंडन को सचिव व डॉ. गिरिजा पांडे को संगठन सचिव नामित किया। वहीं, एलके मेहता को साहसिक पर्यटन की राष्ट्रीय समिति में सदस्य चुना गया। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय से पर्यवेक्षक के रूप में आंध्रप्रदेश से आए पुण्डरीकाक्ष व उत्तरप्रदेश से आए राजेश कुमार शामिल हुए।

बैठक में एसोसिएशन की विभिन्न जिलों में विस्तार का निर्णय लिया गया। साथ ही साहसिक पर्यटन, आपदा प्रबंधन जैसे विषयों में विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों के साथ एसोसिएशन के कार्यक्रमों को जोड़ने के बारे में योजना बनाने का निर्णय भी लिया गया। बैठक में बताया गया कि दक्षिण कोरिया में 12 से 16 सितंबर तक होने वाली विश्व यूथ रैली में देश के सात प्रतिनिधियों में उत्तराखंड की कु. सुमरिन टंडन भी शामिल होंगी।

प्रतिभा की राह में बाधा न बने अभाव: डीएम

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हरिद्वार, जिलाधिकारी दीपक रावत ने भल्ला काॅलेज इंडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम में बने बैडमिंटन कोर्स का निरीक्षण किया। उन्होंने बैडमिंटन खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया, यहां प्रशिक्षण लेने वाली एक छोटी खिलाड़ी का हरेला के दिन जन्मदिन होने पर जिलाधिकारी ने बच्ची को भेंट स्वरूप नकद धनराशि प्रदान की।

डीएम ने कहा कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले निर्धन और मेधावी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण शुल्क का प्रबंध डीएम व एचआरडीए की ओर से किया जाएगा। एचआरडीए की ओर से छात्रों के लिए किए गए जलपान की व्यवस्था में मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किए जाने पर जिलाधिकारी ने एचआरएडीए सचिव बंशीधर तिवारी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि पौधा लगाकर वन संवर्धन के साथ-साथ प्रदूषण से दूरी बनाकर कर काम करते हुए पर्यावरण संरक्षण भी किया जाए।

तेरह दिन बाद सकुशल मिला अगवा अंकित

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देहरादून से अगवा हुए चार वर्ष के अंकित साहनी को 13 दिन बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रामपुर से सकुशल बरामद कर लिया है। तीन जुलाई की शाम को शहर के लक्ष्मण चौक क्षेत्र से अंकित को बदमाशों ने अगवा किया था। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि अंकित का अपहरण उसे बेचेने के उद्देश्य से किया गया था। इस घटना में शामिल रहे दोनों आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने अंकित की बरामदगी का खुलास करते हुए कहा कि तीन जुलाई रात सूचना मिली कि सुरेश, कांवली रोड देहरादून का निवासी का 4 साल का पुत्र अंकित साहनी सुबह से लापता है। उन्होंने बताया कि तहरीर के आधार पर अंकित साहनी के बारे में जानकारी प्राप्त करनी प्रारम्भ की गयी तो घर के पास स्थित गुरुद्वारे के सीसीटीवी कैमरे में एक अज्ञात व्यक्ति शिकायत कर्ता के बच्चे को बहला फुसलाकर कांवली की तरफ ले जाते हुए दिखाई दिया। जिसमें नाबालिग बालक को पीड़ित के गॉव के पास का रहने वाला लाला साहनी पुत्र पलदारी साहनी निवासी गायघाट जिला मुजफ्फरपुर व्यक्ति पर शक हुआ।

पुलिस ने जब लाला साहनी के समस्त रिश्तेदार जो कांवली रोड के आसपास निवासरत थे से जानकारी की तो अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर नाबालिग बालक को बहला फुसलाकर अपहरण करने की बात समाने आयी। एसएसपी ने बताया कि बच्चे की सकुशल बरामदगी के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस की टीम रवाना किया गया।

पुलिस ने मामले में छह जुलाई को एक आरोपी राजीव साहनी को गिरफ्तार किया। जिसने पूछताछ पर बताया कि वह अपहृत नाबालिग बालक लाला साहनी को दिल्ली में देकर अपने को बेकसुर साबित करने के लिए में देहरादून आ गया। उन्होंने कहा बच्चे के सन्दर्भ में अब कोई जानकारी नही है कि लाला साहनी इस बच्चे को लेकर कहा गया हैं।

आरोपी राजीव के निशानदेही पर सम्भावित स्थानों पर संयुक्त टीम द्वारा दबिश दी गयी तो आरोपी लाला साहनी को गिरफ्तार किया गया। दोनों अभियुक्तों से संयुक्त रूप से पूछताछ की गयी तो लाला साहनी ने बच्चे को रेवाड़ी हरियाणा में ले जाकर रोहित नाम के आदमी को बेचना बताया गया। आरोपी राजीव साहनी के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्यवाही करते हुए जिला कारागार न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया व अन्य टीमों को लाला साहनी की निशानदेही पर नाबालिग बच्चे की बरामदगी के लिए उचित निर्देश जारी किए गये।

14 जुलाई को पुसिल ने सोशल मीडिया/फेसबुक/ट्वीटर/वाट्सअप के माध्यम से प्रचार प्रसार करते हुए पुनः विभिन्न जिलों के चाइल्ड लाइन व अन्य प्रदेशों की पुलिस को नाबालिग अपहृत बालक के तलाश व फोटो जारी किये गये। इस दौरान सहारनपुर के सिटी जीआरपी थाना के का. मनोज कुमार द्वारा वटसअप पर नाबालिग बच्चे का फोटो देखने के उपरान्त प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को सूचना दी।

बताया कि अंकित को तीन जुलाई को डीएलएस पेसेन्जर ट्रेन दिल्ली सहारनपुर रूट के यात्रियों द्वारा बच्चे को जीआरपी थाने पर लाया गया था। नाम बताने में असमर्थ होने के कारण बच्चे का फोटो प्राप्त कर जनपद सहारनपुर की 1098 चाइल्ड लाईन की सहायता से बच्चे को बाल सुधार समिति के समक्ष भेज दिया गया। जिले में 10 साल से कम की उम्र के बच्चों का शैल्टर होम न होने के कारण बच्चे को जिला रामपुर के चाइल्ड शैल्टर होम में दाखिल किया गया था।

15 जुलाई को अपहृत के परिजनों को सम्बन्धित जीआरपी थाने के कर्मचारी द्वारा उपलब्ध फोटो की शिनाख्त परिजनों से कराई गयी तो परिजनों द्वारा अपना अपहृत पुत्र अंकित साहनी की पुष्टि की। पुलिस ने अपहृत के परिजनों को साथ लेकर आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने के बाद अपहृत बालक को सकुशल बरामद कर निशक्त परिजनों से मिलवाया।