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दुर्लभ प्रजाति की मछली का शिकार पड़ा महँगा, वन विभाग ने किया केस दर्ज

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में 150 किलोग्राम की गौल मछली पकड़ी गई है । दुर्लभप्राय गौल मछली वन्यजीव श्रेणी में शेडयूल एक में रखी गई है । उत्तराखंड की रहस्यमय नदियों में से एक रामगंगा नदी में मिलने वाली इस मछली को पकड़ने के बाद क्षेत्रवासियों ने एक लकड़ी की बल्ली में बांधकर क्षेत्र में घुमाया और सेल्फी खिचवाई,यह सेल्फी उनके लिए आफत का फरमान लेकर आई है,इस संरक्षित गौल मछली की उम्र लगभग 35 वर्ष बताई जा रही है । इस मछली को गुछ और डेविल कैट फिश भी कहते हैं जबकी मछली का बायोलॉजिकल नाम बैगेरियस येरीली है, जो सामान्यतया शर्मीली होती है और कम ही दिखाई जाती है ।
gaul fish
अल्मोड़ा के सल्ट ब्लाक के अंर्तगत इनोलो गांव के समीप रामगंगा नदी बहती है। नदी में संरक्षित प्रजाति की गोल्डन महाशीर, गौंल सहित अनेक प्रजातियों की मछलियां पाई जाती हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ग्रामीणों ने नदी से गौंल मछली को पकड़ा। विशालकाय मछली को गांव में लाकर नुमाइश की गई और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की गई। मछली को देखने के लिए ग्रामीणों का सैलाब भी उमड़ा था। गांव लाने तक मछली की सांसें चल रही थी। इतनी विशालकाय मछली को देख ग्रामीण भी भौंचक्के रह गए।
जैसे ही मछली की फोटो सोशल साइट्स में वायरल हुई तो मामला चर्चाओं में आ गया। ज्यादातर लोगों ने मछली के शिकार को लेकर आक्रोश जताया। बरसात के दिनों में मछलियां बहाव के विपरीत तैरते हुए किनारे पर आ जाती हैं। वहीं डीएफओ एस.आर प्रजापति ने कहा कि ओनोलु गांव में यह मछली पकड़ी गई थी, 5 लोगों ने कल यह मछली पकड़ी थी।शेड्यूल एक के अंदर रामगंगा में इस मछली को नहीं पकड़ते हैं। फारेस्ट और पुलिस की ज्वाइंट टीम गठीत की गई है, फिलहाल पांच लोगों को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972  के तहत गिरफ्तार किया गया है।’

37 सौ करोड़ के घोटालेबाज के खिलाफ कोर्ट ने दिए आदेश

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मित्तल के खिलाफ कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। विजय कुमार की ओर से अधिवक्ता कमल चिलाना ने कोर्ट में केस करके कहा था कि विजय कुमार ने नोएडा की अनुभव मित्तल की कंपनी में 40250 रुपये जमा किए थे, जिसमें से उसे बहुत कम रकम ही वापस मिली। आरोप था कि सोशल साइड के नाम पर उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। जिस पर सिविल जज सीनियर डिवीजन लक्षम्ण सिंह ने सोशल ट्रेड चलाने वाले अनुभव मित्तल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके विवेचना करने के निर्देश दिए हैं।

कौन है अनुभव मित्तल

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स एसएटीएफ ने 37 सौ करोड़ रुपये के घोटालेबाज अनुभव मित्तल के बारे में कई अहम खुलासे किए थे। दो फरवरी को यूपी एसटीएफ ने नोएडा की एक कंपनी के डायरेक्टर अनुभव मित्तल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। कंपनी के डायरेक्टर और सीईओ पर आरोप है कि सोशल साइट चलाने की आड़ में लाखों लोगों को नुकसान पहुंचाया गया है। यूपी एसटीएफ का कहना है कि एब्लेज इंफो सॉल्यूशंस नाम की कंपनी मेंबर बनाने के नाम पर सोशल नेटवर्किंग साइट पर लोगों को गुमराह करती थी। मेंबर बनाने के बाद कंपनी अपने यूजर्स को एक आईडी और पासवर्ड मुहैया कराती थी, जिस पर कुछ लिंक भेजे जाते थे। हर लाइक पर लोगों को पांच रुपए दिए जाते थे। कुछ दिनों तक तो पैसे मिले पर बाद में पैसे मिलने बंद हो गए।

ऐशोआराम का शौकीन है अनुभव

एक तरफ अनुभव मित्तल आम लोगों को ठग रहा था तो दूसरी तरफ  उसी पैसे का इस्तेमाल अपनी निजी जिंदगी में शानोशौकत दिखाने के लिए करता था। महंगे फिल्मी कलाकारों के साथ पार्टी करना उसके शगल में शामिल था। सनी लियोनी और अमीषा पटेल जैसी फिल्मी अभिनेत्रियां अनुभव मित्तल के जन्म दिन की पार्टी में शरीक हो चुकी हैं।

हापुड़ से नोएडा वाया गाजियाबाद

यूपी के हापुड़ के रहने वाले अनुभव ने 2010 में बीटेक की डिग्री हासिल की थी। बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उसने साल 2011 में कपनी बना ली। कंपनी बनाने के बाद अनुभव को साल 2012 से लेकर जुलाई 2015 तक मुनाफा नहीं मिल रहा था। अगस्त 2015 में अनुभव ने सोशल ट्रेड डॉट बिज नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया। जिसमें सदस्यों को जोडऩे के लिए पांच हजार 750 रुपए से लेकर 50 हजार 750 रुपये तक की सीमा निर्धारित की गई।

फालतू फिल्म से लिया था आइडिया

कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही अनुभव नेटवर्किंग कंपनी से जुड़ गया था। कमाल तो यह है कि उसे नेटवर्किंग कंपनी बनाने का आयडिया बॉलीवुड फिल्म ‘फालतूÓ देखकर आया था। ये फिल्म उसने अपने कॉलेज के दिनों में देखी थी। अनुभव ने साल 2010 में एब्लेज इंफो सॉल्यूशन नाम की कंपनी बनाई। कंपनी का शुरुआती कामकाज अनुभव ने अपने कॉलेज के हॉस्टल से शुरू किया। रातों रात अमीर बनने के लिए अनुभव ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।

हाई प्रोफाइल लोगों तक थी पहुंच

अनुभव की गिरफ्तारी के बाद यह भी खुलासा हुआ है कि उसके बहुत हाई प्रोफाइल संबंध हैं। वह फेसबुक पर नेताओं और फिल्मी अभिनेता और अभिनेत्रियों के साथ फोटो लगाने का भी विशेष शौक रखता था, जिससे कि उसके फॉलोवर को लगे कि वाकई कंपनी मुनाफे में जा रही है। खास बात यह है कि इन कंपनियों के मायाजाल में आम आदमी से लेकर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, सीएस, वकील और पत्रकार तक शामिल हैं।

फिल्मों में मोबाइल नंबर के प्रयोग को लेकर सेंसर बोर्ड का नया फरमान

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विवादों में घिरे रहे सेंसर बोर्ड की ओर से एक और ऐसा फरमान जारी किया गया है, जिसके विवाद में घिरने की आशंका है। सेंसर बोर्ड ने फरमान जारी किया है कि अब किसी भी फिल्म में अगर किसी व्यक्ति के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हो सकता है, तो उस व्यक्ति का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट निर्माता की ओर से सेंसर बोर्ड में जमा कराना होगा। इसके बिना फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।

सेंसर बोर्ड का मानना है कि फिल्म में किसी का भी ऐसे ही नंबर दिखा देने से उस व्यक्ति को परेशानी होती है और लोग उसके मोबाइल पर कॉल लगाकर उसे परेशान करते हैं। सेंसर बोर्ड के मुताबिक, इस तरह की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सेंसर बोर्ड ने ये कदम उठाया है, जिससे अब किसी को परेशानी नहीं होगी। बॉलीवुड में सेंसर बोर्ड के इस नए फरमान की आलोचना भी शुरू हो गई है।

वरिष्ठ निर्माता मुकेश भट्ट ने कहा है कि, ‘सेंसर फिल्म निर्माताओं के लिए परेशानियां बढ़ाता जा रहा है, ये भी संभव है कि सेंसर बोर्ड कल को ये भी फरमान जारी कर दे कि फिल्म में अगर किसी की मकान या दुकान दिखाया गया है, तो उससे भी एनओसी लेना पड़ेगा। ऐसे में फिल्म बनाना मुश्किल हो जाएगा।’

सेंसर बोर्ड पहले ही नियम बना चुका है कि अगर फिल्म में किसी जिंदा व्यक्ति या किसी संस्थान का नाम लिया जाता है, तो उससे एनओसी लेना अनिवार्य होगा। मधुर भंडारकर की नई फिल्म ‘इंदु सरकार’ 1975 के आपातकाल पर है, लेकिन इस फिल्म को इस नियम से छूट दी गई थी। ये अलग बात है कि बाद में सेंसर बोर्ड ने 16 कट्स देकर मधुर की इस फिल्म को संकट में ला खड़ा किया। सेंसर के आदेश को चुनौती देते हुए मधुर ने एपीलेट ट्रिब्यूनल में केस दर्ज किया है। 

जग्गा जासूस को लेकर अनुराग पर भड़के ऋषि कपूर

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फिल्म जग्गा जासूस की असफलता को लेकर आपस में झगड़े शुरु हो गए हैं। पहले रणबीर कपूर ने फिल्म की असफलता के लिए निर्देशक अनुराग बसु को जिम्मेदार ठहराया, तो अनुराग ने रणबीर कपूर की खिंचाई की और अब इस फिल्म को लेकर ऋषि कपूर की नाराजगी सामने आई है। ऋषि कपूर ने कहा कि निर्देशक की लापरवाही इस फिल्म के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हुई। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में ये फिल्म इसलिए रिलीज नहीं हो सकी, क्योंकि टाइम पर फिल्म के प्रिंट्स तैयार नहीं किए गए। ऋषि कपूर ने कहा कि इससे ज्यादा बदकिस्मती की बात और क्या होगी कि फिल्म के संगीतकार फिल्म के रिलीज से एक सप्ताह पहले तक काम कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जब निर्देशक का फिल्म पर नियंत्रण न रहे, तो ऐसी फिल्म का यही हाल होता है। ऋषि कपूर ने याद दिलाया कि अनुराग बसु के काम करने के तरीके से नाराज होकर ही एकता कपूर ने उनको अपनी फिल्म से अलग किया था और ‘काइट’ के निर्माण के दौरान राकेश रोशन भी इसीलिए अनुराग बसु के साथ नाराज थे।

उनका कहना था कि एक निर्देशक अपनी अक्षमता के चलते कलाकारों की मेहनत पर पानी फेर देता है। उन्होंने अपने बेटे रणबीर के लिए भी सुझाव दिया कि आगे उसे इस तरह के निर्देशकों के साथ काम करने से बचना चाहिए। लगभग 90 करोड़ रु की लागत वाली ये फिल्म तकरीबन साढ़े तीन साल के बाद रिलीज हुई, जिसमें कई बार फिल्म की रिलीज डेट में बदलाव हुए और बाक्स आफिस पर ये फिल्म 47 करोड़ का ही कारोबार कर सकी, जिसके बाद इसे साल की बड़ी फ्लाप फिल्मों की लिस्ट में शामिल कर दिया गया। 

पेयजल निगम की 537 योजनाएं तीन साल से ठंडे बस्ते में

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बारिश की बूंदे यूं तो राहत देती हैं, लेकिन उत्तराखंड में बारिश के कारण पेयजल निगम की 537 योजनाएं तीन साल से ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। इससे एक लाख से ज्यादा की आबादी को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, निगम इन योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

उत्तराखंड में बीते तीन वर्ष में हुई बारिश ने पेयजल योजनाओं को खासा नुकसान पहुंचाया है। कभी मलबा आने के कारण, तो कभी भूस्खलन के कारण पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त होती रही हैं। फिलहाल उत्तराखंड के नौ जिलों की 537 योजनाएं क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।  इनमें सबसे ज्यादा 210 योजनाएं पिथौरागढ़ जिले में हैं, जबकि 120 योजनाओं के साथ देहरादून जिला दूसरे स्थान पर है। उत्तरकाशी व चमोली में यह आंकड़ा सबसे कम दस-दस योजनाओं का है। जब निगम ने इन योजनाओं को ठीक करने का प्रस्ताव तैयार किया तो बजट 20 करोड़ रुपये जा पहुंचा।

इसके लिए निगम ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत केंद्र सरकार से दैवीय आपदा मद में बजट की मांग की। लेकिन, अब तक निगम को पैसा नहीं मिला, जिस कारण इन योजनाओं का काम अधर में लटका हुआ है। पेयजल निगम के मुख्य अभियंता प्रभात राज का कहना है कि इन योजनाओं की मरम्मत के लिए शासन व केंद्र सरकार को पत्र भेजा है। पैसा मिलते ही क्षतिग्रस्त योजनाओं को ठीक करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

एक सितंबर तक अानलाइन होंगी 1409 पंचायतें

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राज्य में 1409 ग्राम पंचायतों में समयबद्ध सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से इन्हें डिजिटलाइज किया जा रहा है। पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय ने विभागीय समीक्षा बैठक में कहा कि सभी पंचायतें एक सितम्बर से ऑनलाइन सेवाएं देना शुरू कर देंगी। कोई भी व्यक्ति परिवार रजिस्टर का पंजीकरण, परिवार रजिस्टर की प्रतिलिपि जन्म प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र ऑनलाइन प्राप्त कर पाएगा।

सोमवार को विद्यालय शिक्षा, प्रौढ शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, खेल, युवा कल्याण एवं पंचायतीराज मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने सचिवालय के एफआरडीसी सभाकक्ष में पंचायतीराज विभाग की समीक्षा की। बैठक में पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि भारत गांव में बसता है और सरकार द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं को उन तक पंहुचाने की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग की है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने दायित्वों एवं अधिकारों का निर्वहन निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ करें ताकि ग्राम स्तर पर कोई भी व्यक्ति सरकार की योजनाओं से वंचित न रहे। उन्होने कहा कि कोई भी अधिकारी किसी के भी दबाव में कार्य न करे। उन्होने कहा कि सरकार की योजनाओं को ग्रामसभा की खुली बैठकें आयोजित कर प्रस्ताव पारित कराकर लोगों को लाभावंनित करें।
उन्होंने निदेशक पंचायती राज को निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर आयोजित होने वाले बैठकों के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों की तैनाती करते हुए मॉनिटिरिंग की जाए। उन्होने पंचायतों को सुदृढ एवं मजबूत करने व आय के स्त्रोत बढाने के लिए कहा। उन्होने जिला पंचायत के अधीन गेस्ट हाउसों का जिर्णोद्धार कर उन्हें पीपीपी मोड देने का सलाह दी। उन्होने यह भी निर्देश दिए हैं कि ब्लाक मुख्यालय एवं ग्राम स्तर पर जो भी पद रिक्त हैं, उन्हे आउटसोर्सिंग से भरा जाए।
पंचायतीराज मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की 1409 ग्राम पंचायतों में एक सितम्बर ऑनलाइन सेवा शुरू की जाए। सभी ग्राम पंचायतों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए। जिन ग्राम पंचायतों में कम्यूटर उपलब्ध नही कराए गए, उन्हें कम्पयूटर उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक में पंचायतीराज मंत्री ने केन्द्रपोषित योजनाओं में 14वें वित्त आयोग, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (शत-प्रतिशत), दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार(शत-प्रतिशत), नाना जी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार(शत-प्रतिशत) और राज्य सेक्टर योजनाओं में राज्य वित्त आयोग, क्षेत्र पंचायत विकास निधि, निर्वाचित प्रतिनिधियों, कर्मचारियों का प्रशिक्षण एवं महिला प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण एवं पंचायत भवन निर्माण योजनाओं की समीक्षा की।
बैठक में निदेशक पंचायतीराज/अपर सचिव पंचायतीराज हरिचन्द्र सेमवाल ने बताया कि 14वें वित्त आयोग के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन, जिसमें सेप्टैज प्रबन्धन, स्वच्छता, जल निकासी, सामुदायिक परिसम्पत्तियों का रख-रखाव, सड़को, फुटपाथों, स्ट्रीट लाइट, कब्रिस्तान एवं शमशान घाटों के रख-रखाव के लिए 2016-17 में 28145 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई है, जिसका व्यय किया जा चुका है। 2017-18 के लिए माह जुलाई में 16259.50 लाख की धनराशि आंवटित हुई है। उन्होने अवगत कराया कि 7955 ग्राम पंचायतों में से 1409 ग्राम पंचायतों में विभिन्न मदों से क्म्प्यूटर उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। 

नशे पर लगाम लगाने के लिए स्पेशल टीम का गठन:एसएसपी नैनीताल

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एसएसपी नैनीताल जन्मेजय खंडूरी ने नशे पर रोक लगाने के लिए स्पेशल टीम एण्टी ड्रग्स स्कवॉड का किया गठन, जिसमें 5 सदस्यों को किया गया नियुक्त, जो जिले में जगह जगह छापेमारी कर नशे पर कड़ी कार्यवाही करेंगे। एसएसपी नैनीताल ने न्यूज़पोस्ट से हुई बातचीत में बताया कि ”हालांकि हल्द्वानी और नैनीताल में ड्रग्स का खतरा बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन हम इसे कम करने की कोशिश कर रहे हैं, ड्रग्स सप्लाई के ठिकाने ज्यादातर बरेली,रामपुर और रुद्रपुर में है और इनकी सप्लाई की कड़ी यहीं पर हैं हम सप्लाई की कड़ी को सीधा अपने टारगेट पर रख रहे हैं।इसके जरिए हम ड्रग्स के ड्रिस्ट्रब्यूशन को रोक पाऐंगे।”

5 लोगों की ये टीम केवल ड्रग्स के केस पर काम करेंगी, और उन्हें कोई और काम नहीं दिया जाएगा। यह एक निरंतर प्रक्रिया होगी जिसके माध्यम से हम पूरी कोशिश करेंगे की ड्रग्स की वजह से होने वाले खतरे को रोक सकें। इस टीम में एसओजी प्रभारी दिनेश चंद्र पंत, जितेंद्र कुमार, मनमोहन सिंह, रिजवान और जगपाल सिंह शामिल है। एसएसपी ने बताया की ये टीम जिले के बाहर से आकर तस्करी करने वालो पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाकर प्रभावी कार्यवाही करेगी।

हाईस्कूल के भवन में चल रहा इंटर कॉलेज

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वर्ष 1996 में हाईस्कूल से इंटर स्तर पर उच्चीकृत होने के बाद आज तक चमोली जनपद के विकास खंड घाट का कांडई माणखी इंटर कॉलेज पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है। इस संबंध में कई बार प्रशासन को लिखा जा चुका, लेकिन भवन विस्तारित नहीं किया गया। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता व उत्तराखंड राज्य आंदोलकारी पृथ्वी सिंह कठैत बताते है कि गांव वालों के अथक प्रयास के बाद 1996 में कांडई माणखी का हाईस्कूल स्तर का विद्यालय इंटर मीडिएट किया गया, लेकिन आज भी यह विद्यालय हाईस्कूल के उसी भवन में संचालित हो रहा है।

विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है, लेकिन शिक्षा विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इस संबंध में कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखा जा चुका है पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही है। वहीं, विद्यालय में शिक्षकों का भी टोटा है। इंटरमीडिएट में विज्ञान, गणित, भूगोल, अंग्रेजी, जीव विज्ञान सहित अन्य कई विषयों के अध्यापक ही नहीं है। इससे बच्चों के पढ़ाई में भी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।

उधर, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक आशुतोष भंडारी का कहना है कि, ‘भवन निर्माण के लिए सभी पत्रावली तैयार कर शासन को भेजी गई हैं, बजट आने पर कार्य शुरू कराया जाएगा।’ 

बिछड़े बेटे की तलाश में दर-दर भटक रही मां

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कांवड़ मेले में बिछड़ गए बेटे की तलाश में एक मां दर-दर भटक रही है। पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद भी अब तक बेटे का कुछ पता नहीं चलने पर बेबस मां ने सिटी मजिस्ट्रेट से गुहार लगायी है।

सिटी मजिस्ट्रेट से बेटे को ढूंढने की गुहार लगाने आयी पंजाब के राजपुरा की रहने वाली पिंकी ने बताया कि वह अपने 12 वर्षीय बेटे करण के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार आयी थी। 15 जुलाई को मोतीबाजार में करण भीड़ में कहीं गुम हो गया। काफी तलाशने के बाद जब उसका कुछ पता नहीं चला तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उसकी सूचना नोट कर ली, लेकिन बेटे को अभी तक ढूंढ नहीं पायी।
पिंकी ने बताया कि उसके पति का देहांत हो चुका है। वह खुद दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाती है। बेटा करण उसका इकलौता सहारा है। बेटे को ढूंढने में उसके पैसे भी खत्म हो चुके हैं। भूखी प्यासी रहकर ही बेटे को ढूंढने की कोशिशों में लगी हुई है।
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए कांवड़ मेले में आयी लाखों की भीड़ में कई लोग गुम हो चुके हैं। मेला समाप्त होने के बाद परिजन उनकी तलाश में लगे हुए हैं। सूचना मिलने पर कुछ लोगों को पुलिस ने ढूंढ भी निकाला है, लेकिन कुछ लोग अब भी लापता हैं जिनकी तलाश में परिजन दिन रात पुलिस व थानों के चक्कर लगा रहे हैं। 

मतदाता सूची में 10 अगस्त तक जोड़े जाएंगे युवा

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राज्य में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज के कराने के लिए अभियान 10 अगस्त तक जारी रहेगा। निर्वाचन आयोग के आदेश के तहत तहसील प्रशासन ने सभी बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों को तैनात कर दिया है।

नये मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए 10 जुलाई से 10 अगस्त तक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत ऋषिकेश विधानसभा के 180 बूथ लेवल अधिकारियों को पोलिंग बूथ पर तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन, प्रशासन के आदेश के बावजूद अभी भी तमाम बूथों से बीएलओ नदारद हैं।

इसे गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार रेखा आर्य ने सुपरवाइजरों को व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, उन्होंने कहा कि, ‘सभी पोलिंग बूथो पर बीएलओ निर्धारित समय पर पहुंचे, अन्यथा उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ आर्य का कहना था कि, ‘की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए युवा मतदाता बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, बीएलओ घर-घर जाकर भी मतदाताओं के फार्म भर रहे हैं।’