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ट्रेन के आगे कूदी महिला

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एक युवती ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इससे आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। साथ ही आसपास पूछताछ कर शव की शिनाख्त की, लेकिन युवती की शिनाख्त नहीं हुई, पुलिस युवती की शिनाख्त में जुटी है।

रामनगर से मुरादाबाद जाने वाली ट्रेन संख्या 55306 रोजाना की तरह आज सुबह भी रामनगर से काशीपुर आ रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रामनगर रोड स्थित, अनन्या होटल के पास झाड़ियों में एक युवती काफी देर से बैठी थी। जैसे ही ट्रेन वहा से गुजरी युवती ने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। इससे युवती का सिर कटने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना से आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आसपास पूछताछ की, लेकिन युवती की शिनाख्त नहीं हो सकी। युवती की उम्र करीब 22 वर्ष है। युवती ने शूट पहना हुआ है। साथ ही पैरों में फूलदार गुलाबी रंग की चप्पल पहन रखी थी। पुलिस युवती के शव की शिनाख्त में जुटी है। स्टेशन मास्टर मदन पाल ने बताया की ट्रेन संख्या 55306 का काशीपुर पहुंचने का समय 7:35 बजे का है, लेकिन आज ट्रेन करीब 25 मिनट देर से आई थी।

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वाति सेमवाल पहुँची ऋषिकेष, मनाया शहीद कारगिल दिवस

छोटे पर्दे के सीरियल ‘प्यार तूने क्या किया’, ‘ये है आशिकी’ औऱ ‘आहट’ में मुख्य किरदार निभा चुकी उत्तराखण्ड की अभिनेत्री स्वाति सेमवाल ऋषिकेष स्तिथ निशुल्क उड़ान स्कूल में शहीद कारगिल दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुची। इस मौके पर गढ़वाल सभा मंच द्वारा उनका स्वागत किया गया।

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आपको बता दे कि टीवी से करियर शुरू करने वाली देहरादून की स्वाति सेमवाल अब जल्द ही बॉलीवुड में एक लीड रॉल में नज़र आने वाली है, अगले महीने बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना के साथ वो ‘बरेली की बर्फी’ में नजर आने वाली है।

मीडिया से बात करते हुए स्वाति सेमवाल ने बताया कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य से निकलकर बड़े शहरों में नाम कमाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है उत्तराखंड में लोगो के अंदर वो क़ाबलियत है जिसके दम पर वह बड़े शहरों में जाकर उत्तराखंड का नाम रोशन कर रहे है  ।

 

उत्तराखंड में जुटेंगे विभीन्न राज्यों के योग साधक

उत्तराखंड योग एंड कल्चर फेडरेशन के तत्वाधान में ऋषिकेष राजकीय महाविद्यालय में आगामी 16 अगस्त को राज्य स्तर की योग प्रतियोगिता करने जा रहा है जिसमें अव्वल आने वाले प्रतिभागियों को सितंबर माह में होने वाली राष्ट्रीय योग प्रतियोगिता में जाने का अवसर मिलेगा।

आपको बता दे कि अगस्त में होने वाली राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में योगाचार्य ‘योग अौफ द ईयर’ का खिताब दिया जाएगा, ये प्रतियोगिता आठ समूह के अंतर्गत योगी जिसमें 10 से 65 वर्ष तक के लोग प्रतिभाग कर सकते है। उत्तराखंड योग एंड कल्चर फेडरेशन के अद्यक्ष राजीव थपलियाल ने प्रेस वार्ता कर इस बारे में जानकारी दी। मीडिया से बात करते हुए राजीव थपलियाल ने बताया कि प्रतियोगिता १६ से १७ अगस्त को  होने जा रही है, उम्मीद है कि इस प्रतियोगिता में युवा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे।

उत्तराखंड में दिखी नेताओं की अंघभक्ति, अधिकारी ने समारोह में छूए मंत्री के पैर

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शिष्टाचार भेंट अगर हो तो अलग बात है मगर ड्यूटी पर तैनात अधिकारी जब मंत्री के पैर छुए तो इसे आप क्या कहेंगे। जी हां अधिकारियों की मंत्री परिक्रमा कोई नई बात भले ही ना हो मगर अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी मंत्रियों को सार्वजनिक स्थानों पर पैर छूकर अपने पद और गरिमा की लाज तक नहीं रखते। ऐसा ही कुछ मामला राज्य के बाजपुर इलाके में सामने आया। यहां शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण पद पर शिक्षक मंत्री जी की आवभगत में ये भी भूल गये कि उनके पद की गरिमा क्या है। एक कार्यक्रम में यहां कबीना मंत्री यशपाल आर्या एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।

बाजपुर के क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य बालिका छात्रावास में वृक्षा रोपण के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। वहीं खण्ड शिक्षा अधिकारी और कई शिक्षक भी मौजूद थे। इस समारोह के बीच ही खण्ड शिक्षा अधिकारी सभी के सामने मंत्री जी के पैर छूते दिके। शायद काबिले तारीफ होता कि अगर मंत्री जी किसी शिक्षक के पैर छूते मगर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की पैर छूने वाली चापलूसी देखकर तो आप समझ ही गये होंगे कि ये वो अधिकारी है जो नेताओं और मंत्रियों की परिक्रमा कर अपने ट्रांसफर पोस्टिंग कराने मे विश्वास रखते है।

बताया जाता है कि खण्ड शिक्षा अधिकारी हवलदार प्रसाद 2010 से 2012 तक यहां तैनात थे। उसके बाद फिर मई 2017 में खण्ड शिश्रा अधिकारी अपनी मानचाही जगह बाजपुर में फिर से तैनात हो गये। राजनैतिक ताल्लुकात रखने की वजह से ही बताया जाता है कि शिक्षा अधिकारी अपनी मनचाही जगह पर पोस्टिंग करा लेते हैं। फिर मंत्री जी के पैर छूने का आखिर कुछ तो इनको फल मिलना ही चाहिए था।

अब बाबा रामदेव करेंगे उत्तराखंड के किसानों का बेढ़ा पार

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उत्तराखंड सरकार ने बाबा रामदेव के साथ मिलकर राज्य में किसानों की फसल खरीद और जैविक क्षेत्र में विकास करने की तैयारी कर ली है। इसके लिये मंगलवार को मुख्यमंत्री, बाबा रामदेव औऱ आचार्य बालकृष्ण के बीच लंबी मीटिंग हुई।स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखण्ड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है। सिक्किम जिसे हाल ही में आॅर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है, उससे कही अधिक भूभाग पर उत्तराखण्ड में आॅर्गेनिक खेती हो रही है। पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। सरकार और रामदेव की संस्था पतंजलि के बीच

  • उत्तराखण्ड को जैविक कृषि एवं जड़ीबूटी राज्य बनाना
  • राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना
  • राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना
  • एक विशाल गौधाम(गौशाला) की स्थापना करना और
  • पर्यटन को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सारे सेक्टर राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। इन सारे क्षेत्रों में सम्भावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है,परन्तु अब इसमें कुछ करके दिखाने की जरूरत है। इसके लिये अधिकारियों को एक महीने के अन्दर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जड़ीबूटी, औद्यानिकी, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से राज्य के लोगो की आमदनी बढ़ाने पर कार्य किया जायेगा।

राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गौशाला की स्थापना करने की योजना है, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जायेगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि

  • पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जायेगा।
  • पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ीबूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डाॅक्यूमेंटेशन कर सकते है।
  • राज्य में होने वाले 5 हजार कुंतल ऊन को पतंजलि द्वारा खरीदने पर भी सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की गई।
  • गोपेश्वर में स्थित जड़ी बूटी शोध संस्थान द्वारा उत्पादित किये जाने वाली सभी जड़ीबूटियों को खरीदने की सहमति भी दी। 

काॅर्बेट और राजाजी में बढ़ गई है बाघों की संख्या!!

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को कार्बेट और राजाजी टाईगर रिजर्व में बाघो की गणना के 2016-17 के ताजे आंकडे़ जारी किये। इन आंकड़ों के मुताबिक कार्बेट टाईगर रिजर्व में 208 खास बाघ और राजा जी टाइगर रिजर्व में 34 बाघों की पहचान की गई है। पिछले साल यह संख्या कार्बेट टाईगर रिजर्व में 163 एवं राजा जी टाईगर रिजर्व में 16 थी। मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों पर वन विभाग के अधिकारियों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि 340 बाघों के साथ क्षेत्रफल के अनुपात में बाघों की संख्या के मामले में उत्तराखण्ड देश का नम्बर एक राज्य है। वहीं सर्वाधिक संख्या 400 के साथ कर्नाटक प्रथम स्थान पर है। 

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कार्बेट टाइगर रिजर्व।

कार्बेट टाइगर रिजर्व की सभी रेंजो में ग्रिड के आधार पर 535 कैमरे उपयोग में लाए गए। इस प्रकार कार्बेट टाइगर रिजर्व की कुल 25453 ट्रैप नाईट से 424870 फोटो मिले ।  जिसमें 142 बाघों के दोनो बायें तथा दांये पहलू (फ्लेंक) प्राप्त हुए। 66 विश्ष्टि बाघों के केवल बांये पहलू प्राप्त हुए। बाघों की गणना बांये पहलू का आधार मानकर की गयी है। 96 बाघों के दांये पहलू प्राप्त हुए जिनका मिलान नही किया गया तथा जिन्हें गणना में सम्मिलित नही किया गया हैं।

राजाजी टाइगर रिजर्व।

राजाजी टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत न्यूनतम 34 बाघों तथा 05 शावकों की पहचान की गयी। वर्ष 2014 में किये गये अखिल भारतीय बाघ गणना में यह संख्या 16 पायी गयी थी।

गौरतलब है कि राज्बयभर से लगातार बाघों के शिकार या मौत की खबरें आती रही हैं। जानकरा भी इस मामले को बाघों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मान रहे हैं। बहरहाल सरकार ने तो आंकड़े जारी कर दिये हैं पर वन्य जीव के मामलों को ध्यान से देखने वाले जानकार इन आंकड़ों से ज्यादा उत्साहित नही हैं। वन्यजीव अक्सपर्ट डॅा हरेंद्र सिंह बर्गली कहता हैं कि “ये अच्छी बात है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। लेकिन बाघों के सही मा.ने में संरक्षण के लिये अभी हमें कापी कुछ करना बाकी है। हमारे पास बाघों के रख रखाव के लिये स्टाफ की कमी है, पैसे की कमी, और आने वाले दिनों में मैन ऐनिमल काॅन्फिल्कट एक बड़ी समस्या बन जायेगा।”

गंगा को निर्मल बनाए रखने के लिए दल गोमुख रवाना

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स्वच्छ भारत मिशन और नमामि गंगे योजना के तहत ओएनजीसी और इंडियन माउंटेनरिंग फाउंडेशन (आईएमएफ) के संयुक्त तत्वाधान में गंगा को निर्मल बनाए रखने के लिए आठ सदस्यीय दल गोमुख के लिए रवाना हुआ।

दल के सदस्य 25 जुलाई से एक अगस्त तक गोमुख से लेकर लेकर गंगोत्री तक गंगा किनारे फैली गंदगी की सफाई करेंगे। साथ ही दल सदस्य नदी किनारे बसे गांव हर्षिल, धराली, सूखी गांव, झाला के आसपास लोगों को गंगा संरक्षण के लिए जागरुक करेंगे। दल में नेहरु पर्वतारोहण और स्थानीय सदस्य शामिल हैं।
मंगलवार को गढ़वाल मंडल विकास निगम में पर्यटन अधिकारी खुशाल सिंह नेगी ने दल को तिरंगा दिखाकर रवाना किया। पर्यटन अधिकारी नेगी ने कहा कि इस तरह के अभियान से भागीरथी नदी के तटों की सफाई होगी। साथ ही आसपास लोग गंगा संरक्षण के प्रति जागरुक होंगे। टीमलीडर दिगंबर सिंह ने बताया कि श्रावणमास की कांवड़यात्रा में विभिन्न प्रांत से आए शिवभक्त गंगोत्रीधाम पहुंचे। यहां से कुछ शिवभक्तों ने गोमुख से गंगाजल भरा। इस दौरान गोमुख से लेकर गंगोत्री तक शिवभक्तों ने गंगा किनारे गंदगी फैला दी है। नमामि गंगे योजना के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत नदी तटों की सफाई की जाएगी। अभियान दल में यशवंत सिंह, विकास सिंह, सुजाम सिंह, सुरेश पंवार, सौरव सिंह, सतल सिंह और संजय त्रिपाठी शामिल हैं। जो एक साथ मिलकर गोमुख से लेकर गंगोत्री तक गंगा किनारे सफाई करेंगे।
मौके पर भगवती प्रसाद टम्टा, पीताबंर सिंह, मनोज कुमार, बुद्धि सिंह राणा, विनोद पंवार, जगदीश पंवार, हरि सिंह आदि मौजूद रहे। 

राजाजी पार्क में मादा बाघों के लिए लाए जाएंगे नर बाघ

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राजाजी पार्क में नर बाघों को लाने के लिए चल रहे प्रयास को कुछ कयासों ने धता बता दिया था, जबकि ऐसा नहीं है। दोनों मादा बाघ कैमरा ट्रैप के तहत देखी जा सकती हैं। इनके लिए पांच नर बाघ इसी क्षेत्र में छोड़े जाने हैं।

सूत्रों का मानना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में दोनों मादा बाघ कैमरा ट्रैप के तहत हैं। पार्क के दक्षिणी हिस्से में बाघ शिफ्टिंग की योजना थी।
राजाजी पार्क में बाघों की तादाद बढ़ाने के लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व के तराई क्षेत्र से पांच बाघ शिफ्ट किए जाने आरटीआर प्रशासन लंबे समय से प्रयासरत है। पार्क प्रशासन चाहता है कि बाघ शिफ्टिंग से पहले यहां मौजूद दोनों मादा बाघ को ट्रैंकुलाइज कर उसके गले में रेडियो कॉलर लगा दिया जाए ताकि उसकी पूरी निगरानी हो सके। बाघों को लाने से पहले राजस्थान के सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व में यहां के 27 से 28 कर्मचारियों को तीन-चार वर्गों को प्रशिक्षित होने के लिए भेजा गया है। जहां प्रशिक्षिण लेकर वहां बाघ भी लाए जा सकते हैं।
मादा बाघों की संख्या में नर बाघों की संख्या कम है। पार्क सूत्र मानते हैं कि राजाजी टाइगर रिजर्व के दक्षिणी हिस्से मोतीचूर, बेरीवाड़ा और धौलखंड रेंज में सिर्फ दो मादा बाघ मौजूद हैं। इनकी उम्र छह वर्ष के आसपास है। नर बाघों की संख्या न होने के कारण अभी बाघों की संख्या कम होने के कारण बाघों की संतति नहीं बढ़ पा रही है। पार्क प्रशासन चाहता है कि इस सीजन में इन मंइन दोनों मादा बाघों का अकेलापन दूर करने के साथ ही पार्क में बाघों की संख्या बढ़ाने पर विचार चल रहा है और प्रयास हो रहा है। यह भी पता चला है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कार्बेट टाइगर रिजर्व से यहां दो नर व तीन मादा बाघ लाने की की अनुमति दी है। इसके लिए मादा बाघ के मुख्य वास स्थल के करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र को बाड़े के रूप परिवर्तित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी क्षेत्र में नर बाघों को छोड़ जाएगा ताकि नर और मादा साथ-साथ आ सकें। जिन जगहों पर मादा बाघ का चित्र कैमरे में आया है तथा उनके पदचिह्न भी देखे गए हैं,उसी क्षेत्र में इन बाघों को छोड़ा जाएगा। राजाजी पार्क के निदेशक वीके गांगटे के प्रशिक्षण में होने के कारण उनका पक्ष नहीं प्राप्त हो सका, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दोनों मादा बाघ कर्मचारियों के संज्ञान में हैं और उनकी संतति वृद्धि के लिए बाघ स्थानांतरण योजना पर काम चल रहा है। 

जापान के भूस्खलन विशेषज्ञों से मिले वन मंत्री

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राज्य में भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने जापान के भू-स्खलन प्रबन्धन विशेषज्ञ दल से मुलाकात की। इस दौरान उत्तराखण्ड में भूस्खलन के उपचार के लिए नवीनतम जापानी तकनीकों पर विचार-विमर्श किया।

डॉ. रावत ने कहा कि, ‘कुछ दशकों में जापान ने सभी प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के समाधान को लेकर प्रगति और तकनीकी विकास किया है। इसे देखते हुए भारत और उत्तराखण्ड व सभी हिमालयी राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबन्धन में इन तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर जापान से काफी कुछ सीखा जा सकता है।’

डॉ. रावत ने कहा कि, ‘जापान, भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार के बीच अगस्त, 2016 में एक करार हुआ था। इसके अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य में भू-स्खलन क्षेत्रों के उपचार के लिए नई जापानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना सुनिश्चित हुआ।’ इस परियोजना को जिका टेक्नीकल को-ओपरेशन प्रोजेक्ट फॉर मैनेजमेंट अफ लैंड स्लाइड्स इन फॉरेस्ट कहा गया है। इस परियोजना पर होने वाला तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का भ्रमण आदि पर व्यय जापान सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण भूस्खलन उत्तराखण्ड के लिए बड़ी समस्या हैं। इससे न केवल सड़कें और मूलभूत सेवाएं प्रभावित होती है, बल्कि वन क्षेत्रों पर भी इनका बुरा प्रभाव पड़ता है।

यह परियोजना वन विभाग की क्षमता के विकास में भी अहम साबित होगी। देहरादून पहुंचे जापानी दल को वन मंत्री ने सरकार की ओर से हरसम्भव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। 

भीख मांगने पर उत्तराखंड में लगी रोक, पकड़े जाने पर पांच साल की जेल

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उत्तराखंड में भीख मांगने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। समाज कल्याण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम 1975 की धाराओं में संशोधन किया है। इसके साथ ही उत्तराखंड 20 अन्य राज्यों और दो संघ शासित प्रदेशों की लीग में शामिल हो गया है जिन्होंने भीख पर प्रतिबंध लगाया है।

अब सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगते या देते पकड़े जाने पर यह अपराध की श्रेणी में होगा और इसमें बगैर वारंट के गिरफ्तारी हो सकेगी। अधिनियम में अपराध साबित होने पर जुर्माने के साथ एक से तीन साल की सजा का प्रावधान है। दूसरी बार अपराध सिद्ध होने पर सजा की अवधि पांच साल तक हो सकती है। निजी स्थलों पर भिक्षावृत्ति की लिखित और मौखिक शिकायत पर अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई होगी।

सार्वजनिक स्थलों पर भीख देने को भी अपराध की श्रेणी में माना गया है। इस तरह भीख देना और लेना दोनों अपराध श्रेणी में होंगे। किशोर न्याय अधिनियम की तहत अभी तक 14 साल तक के बच्चों से भिक्षावृत्ति को संज्ञेय अपराध माना गया था और इस पर पूरी तरह से रोक थी। मगर अब सभी उम्र के लोगों पर सार्वजनिक स्थलों में भीख मांगने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में 274 बच्चों सहित करीब 3,000 भिखारी हैं। हालांकि, गौर करने वाली बात है कि देश के कई राज्यों ने भीख मांगने पर प्रतिबंध लगा दिया है, इसके बाद भी बीते वर्षों में भिखारियों की संख्या में वृद्धि हुई है।