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गड्ढायुक्त सड़कों से नहीं मिल रही निजात

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राजधानी देहरादून की सड़कें गड्ढों को समर्पित हो गई हैं, समझ में यह नहीं आ रहा है कि गड्ढे में सड़कें हैं या सड़कों में गड्ढे। केवल शहर के ही नहीं शहर की आसपास की स्थिति इससे बदतर है।

महारानी बाग से इन्दिरा कॉलोनी को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह बदहाल है। कैंट विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर इस क्षेत्र के विधायक हैं, लेकिन उनके प्रयासों को ठेंगा दिखा रहे हैं सरकारी विभाग। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क के आसपास लगभग हजार परिवार रहते हैं, जिन्हें इस सड़क के बदहाली का खामियाजा उठाना पड़ रहा है।
दुर्घटनाओं के कारण लड़ाई झगड़े,जिसके कारण क्षेत्रवासी पूरी तरह परेशान हैंं। सेठी मार्केट से बल्लूपुर और आशीर्वाद इंक्लेव व महारानी बाग को अलग करने वाली यह सड़क पूरी तरह बदहाली की कगार पर है।
क्षेत्र के प्रतिष्ठित चिकित्सक डा. गगन नातरा व इन्द्रजीत नंदा का कहना है कि जहां-जहां भी संभव था,इस सड़क के लिए प्रयास किया गया। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक हरबंस कपूर और क्षेत्रीय पार्षद अमिता को भी इस मामले में संपर्क किया है,लेकिन अब तक कामयाबी हाथ नहीं लगी है,जिसके कारण क्षेत्रवासियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। यही स्थिति अन्य सड़कों की भी है।
जब इस संदर्भ में क्षेत्रीय विधायक हरबंस कपूर से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि सड़क के लिए आदेश हो गए हैं शीघ्र ही यह सड़क बन जाएगी,लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह आश्वासन मुझे कई महीनों से मिल रहा है। यही स्थिति पूरे महानगर की हो गई है।
पिछले दिनों हुई बरसात में लबालब सड़कों के कारण तमाम दुर्घटनाएं हुई। मुख्यमंत्राी त्रिवेन्द्र सिंह द्वारा दिये गये आदेशों के बाद भी यह गढ्ढें जस के तस है। लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी पिछले 15 दिनों से इन सड़कों के गढ्ढों को भरने में जुटे हुए है उनका श्रम और सरकार का धन बेकार जा रहा है। 

मोबाइल बना मौत का कारण ,बच्चो के सर चढ़ कर बोल रहे गैजेट

क्या मोबाइल किसी की जिन्दगी से ज्यादा कीमती हैं, आपका जवाब ना होगा, लेकिन ऋषिकेश में एक युवक ने परिजनों द्वारा मोबाइल की मांग पूरी न होने पर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। ऋषिकेश के आइडीपीएल में 15  वर्षीय युवक ने परिजनों के मोबाइल खरीदकर न देने पर आत्महत्या कर ली, परिजनों के मोबाइल खरीदकर न देने से युवक पिछले कई दिनों से खफा चल रहा था। युवक आईडीपीएल केंद्रीय विद्यालय के 9वी क्लास में पड़ता था।मंगलवार देर रात युवक ने इसी बात को लेकर पंखे से लटककर की आत्महत्या कर दी। सुबह जब युवक की मां ने दरवाजा खोला तो बेटे को पंखे से लटका पाया, जिसके बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हैं। वही पुलिस ने मौके पर पहुच शव को कब्जे में ले पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया हैं। घटना आई डी पी एल कालोनी की है जंहा 15 वर्षीय किशोर ने की पंखे में चुनी से फंदा लगाकर की आत्महत्या।

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पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पी एम के लिए भेजा आजमगढ़ के रहने वाले ऋषिपुनित कुमार 9 वी कक्षा में  केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाई करता था। उसके पिता बी आर ओ में बद्रीनाथ में कार्य कर रहे है बताया जा रहा है कि बीती रात उसने मोबाइल की मांग की जो पूरी ना होने के कारण  मौत को गले लगाया। आशंका जताई जा रही है कि ब्लू व्हेल गेम खेलने की वजह से भी उसने अपनी जान गवाई फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

ऋतिक रोशन के समर्थन में आगे आईं सुजैन खान

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एक बार फिर से सुर्खियों में आए कंगना और ऋतिक रोशन के विवाद के बीच उनकी पूर्व पत्नी सुजैन खान मैदान में आगे आई हैं और कंगना के आरोपों को उन्होंने एक साजिश करार दिया है। कंगना का नाम लिए बिना सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में सुजैन ने लिखा कि साजिशों से सच को नहीं झूठलाया जा सकता। सुजैन ने कहा कि वे ऋतिक पर भरोसा करती हैं और आगे भी ऐसा न करने की उनके पास कोई वजह नहीं है।

सुजैन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आरोपों और साजिश से अच्छी आत्मा पर कोई विजय नहीं पा सकता। ऋतिक के साथ सुजैन का 2014 में तलाक हो चुका है, फिर भी वे हमेशा अक्सर बच्चों के साथ नजर आते हैं। कंगना ने एक बार फिर ऋतिक के साथ रिश्तों के विवाद को हवा देते हुए उन पर संगीन आरोप लगाए हैं। कंगना ने ऋतिक और उनके पापा राकेश रोशन, दोनों पर उनको धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी वजह से वे मानसिक रूप से प्रताड़ना का शिकार रहीं।

कंगना का दावा है कि शादी-शुदा ऋतिक 2014 तक उनके साथ रिलेशनशिप में थे और उनसे शादी का वादा कर चुके थे। कंगना के आरोपों के नए दौर में अब तक ऋतिक या उनके पापा राकेश रोशन की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऋतिक से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि ऋतिक के वकीलों की टीम कंगना के मीडिया में आए उन इंटरव्यूज की जांच कर रही है, जिसमें कंगना ने उन पर आरोप लगाए हैं। कहा जा रहा है कि जांच के बाद ये टीम कंगना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर ऋतिक को सुझाव देगी। 

विशाल भारद्वाज की नई फिल्म से जुड़ी टी-सीरीज

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इस साल फरवरी में रिलीज हुई फिल्म ‘रंगून’ की असफलता के बाद विशाल भारद्वाज की नई फिल्म शुरू होने जा रही है, जिसको लेकर खबर मिल रही है कि इस फिल्म के निर्माण में टी-सीरीज सहनिर्माता होगी। ‘रंगून’ का निर्माण साजिद नाडियाडवाला ने किया था।

विशाल की नई फिल्म में उनके साथ पहली बार दीपिका पादुकोण काम करने जा रही हैं और दीपिका के साथ उनके जोड़ीदार इरफान होंगे। शुजीत सरकार की फिल्म ‘पीकू’ में ये जोड़ी साथ काम कर चुकी है। विशाल के साथ इरफान अतीत में ‘मकबूल’, ‘सात खून माफ’ और ‘हैदर’ फिल्मों में काम कर चुके हैं।

टी-सीरीज के अलावा खुद विशाल भारद्वाज और करीअर्ज एंटरटेनमेंट की भागेदारी होगी। विशाल की इस फिल्म की कहानी मुंबई के एक क्राइम रिपोर्टर हुसैन जैदी के नॉवेल पर है, जो सपना दीदी के नाम से आंतक फैलाने वाली महिला डॉन राहिमा खान के बारे में है। विशाल की इस फिल्म का निर्देशन उनके सहायक रहे हनी त्रेहन करेंगे। ये फिल्म अगले साल जनवरी में शुरू होगी और 2018 में ही अक्टूबर में इसे रिलीज किया जाएगा।

अज्ञात शव मिलने से हड़कंप

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हिम्मतपुर डोटियाल गांव में अज्ञात शव मिलने से हड़कंप मंच गया। लोगों ने सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मृतक की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन पहचान नहीं हो सकी।

मंगलवार की सुबह ग्रीमीणों ने कानिया रोड पर एक युवक का शव पड़ा देखा। युवक का सिर पत्थरों से कुचला गया था। आशंका जताई जा रही थी कि हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे कोतवाल विक्रम राठौर ने बताया कि मृतक का चेहरा बुरी तरह पत्थरों से कुचला गया था। घटनास्थल के पास ही सफेद पेंट गिरा हुआ था।

पुलिस ने ग्रामीणों से जानकारी लेने के लिए पूछताछ भी की, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

10 सितंबर को बेनकाब होंगे अखाड़ा परिषद के फर्जी संत

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आसाराम, नारायण सांई और हाल में ही बलात्कार के आरोप में जेल भेजे गए राम रहीम के बाद समाज में हो रही संतों की किरकिरी को रोकने व फर्जी संतों से समाज को अवगत कराने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद गंभीर दिखाई दे रहा है। परिषद ने देशभर में फैले फर्जी संतों की सूची तैयार कर ली है। यह सूची 10 सितम्बर को होने वाली अखाड़ा परिषद की बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी को सौंप दी जाएगी।
देशभर में फैले अखाड़ों से जुड़े संतों को ऐसे फर्जी संतों की सूची बनाने के लिए कहा गया था, जो स्वयंभू हैं और जिनका किसी भी मठ या अखाड़े से संबंध नहीं है। खासकर इस लिस्ट में आसाराम व राम-रहीम जैसे संतों की भरमार है। बताया जाता है कि सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है, किन्तु उसका अभी खुलासा नहीं किया गया है। इस लिस्ट में जूना अखाड़े की महामण्डलेश्वर राधे मां भी शामिल हैं, जिन्हें जूना अखाड़े ने रातोंरात महामण्डलेश्वर बना दिया था। विवाद सामने आने पर जांच कमेटी बनाई गई थी।
वहीं, इलाहाबाद में बार चालने वाले सचिन दत्ता ऊर्फ सचिदानन्द को भी मण्डलेश्वर बनाया गया था। समाज में संतों की फजीहत होने के बाद सचिन दत्ता का निष्कासन कर दिया गया था। इन सब विवादों के बाद अपनी फजीहत को बचाने के लिए अखाड़ा परिषद सक्रिय हो गया है, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेन्द्रगिरि महाराज ने फर्जी संतों की सूची को अभी सार्वजनिक करने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि यदि फर्जी संत राम रहीम व आसाराम जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, तो अखाड़ा परिषद की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा है कि सूची इस आशय से जारी की जाएगी कि यदि फर्जी संत कोई भी गैरकानूनी कार्य करते हैं तो उनकी जिम्मेदारी सरकारों की होगी। साथ ही कुंभ व अर्द्धकुंभ जैसे पर्वों पर भी फर्जी संतों व फर्जी शंकराचार्यों को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

जापानी तकनीक से रुकेगा उत्तराखंड में भूस्खलन

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बारिश, भूकंप और भूस्खलन से उत्तराखंड को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस पर लगाम लगाने के लिए अब जापान की तकनीक अपनाई जाएगी। इसके लिए जापान में इस क्षेत्र में कार्य कर रही जापान इंटरनेशल काॅपरेशन एजेंसी (जायका) ने अपनी तकनीक उत्तराखंड से साझा करने पर सहमति भी दे दी है।
जापान इंटरनेशल काॅपरेशन एजेंसी (जायका) के आमंत्रण पर जापान पहुंचे प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डाॅ़ हरक सिंह रावत ने जायका के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर भूस्खलन के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। जापान दौरे के पहले दिन ही वन एवं पर्यावरण मंत्री डाॅ़ रावत के साथ गए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जायका की सीनियर वाइस प्रेजीडेंट सुजुकी नोरिको के नेतृत्व में जायका के प्रतिनिधिमंडल से जापान में भूस्खलन एवं उसके ट्रीटमेंट की तकनीक पर विस्तृत वार्ता की।
उत्तराखंड में 71 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र में आता है। इसी से समानता रखते हुए जापान में भी 67 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र है। जापान में भू-स्खलन के बाद उसके ट्रीटमेंट के लिए ही जायका की स्थापना की गई है। जायका ने भू-स्खलन प्रभावी क्षेत्रों का व्यापक ट्रीटमेंट करते हुए पूरी दुनिया के सामने अपनी तकनीक की मिसाल पेश की। अब जायका ने उत्तराखंड के साथ अपनी तकनीक को साझा करने पर भी सहमति जताई है। डॉ़ रावत ने जापान की फारेस्ट्री एजेंसी के महानिदेशक ओकी से भी मुलाकात कर भूस्खलन को रोकने की तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस मौके पर उत्तराखंड की ओर से वन मंत्री के साथ मुख्य सचिव एस रामास्वामी, पीसीसीएफ ( मानव संशाधन) मोनिश मलिक, जायका के मुख्य परियोजना अधिकारी अनूप मलिक एवं उप निदेशक राजाजी पार्क किशन चन्द आदि शामिल रहे। 

टिहरी बांध में परियोजनाओं की श्रृंखला

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टिहरी बांध अकेले ही नहीं वरन बांधों का एक समूह, जिसमें कई परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। उत्तराखंड में ही मनेरी भाली फेज-1, फेज-2, टिहरी बांध, कोटेश्वर बांध जैसी योजनाओं का समूह है, जिसे टिहरी बांध का ही उपांग माना जा सकता है।

टिहरी बांध परियोजना ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। टिहरी बांध परियोजना भागरथी नदी पर एक हजार मेगावाट की, अलकनंदा पर 444 मेगावाट की, धौलीगंगा पर 108 मेगावाट की, धौलीगंगा 2 में 65 मेगावाट की, धौलीगंगा 3 में 303 मेगावाट की, विराही गंगा में 50 मेगावाट की, जाड़ गंगा में 140 मेगावाट की, जाड़गंगा-6 में 50 मेगावाट की परियोजनाओं को महाआकार देने जा रही है, जो पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र प्रदान करेगा। कोटेश्वर हाइड्रो परियोजना 400 मेगावाट की परियोजना है, जो भागीरथी में ही संचालित हो रही है। इसी प्रकार पम्प स्टोरेज प्लांट के माध्यम से एक हजार मेगावाट का उत्पादन और किया जाएगा। आंकड़े बताते हैं कि इन परियोजनाओं से बिजली तो मिलती है ही, बाढ़ नियंत्रण का कार्य भी अच्छा खासा होता है, जो परियोजना के लाभों में से एक है।
टीएचडीसी के प्रचार विभाग के अधिकारी गौरव कुमार का कहना है कि टिहरी पीएसपी में भागीरथी नदी के बाएं किनारे पर प्रत्येक 250 मेगावाट यूनिट की 4 रिवर्सीबल पम्प टरबाइन सहित एक भूमिगत मशीन हाल का निर्माण सम्मिलित है। परियोजना में मुख्य विशेषता अधिकतम एवं न्यूनतम शीर्ष के बीच लगभग 90 मीटर का विशाल शीर्ष परिवर्तन है। जिसमें रिवर्सीबल यूनिटें परिचालित होंगी।
टिहरी पम्प स्टोरेज संयंत्र का प्रचालन ऊपरी जलाशय ऊपरी जलाशय तथा कोटेश्वर जलाशय निचले संतुलक जलाशय के रूप में कार्य करेंगे। परियोजना उत्तरी क्षेत्र के 1288 मि.यू. की वार्षिक की वार्षिक उत्पादन के साथ 100 मेगावाट की पीकिंग पावर उपलब्ध कराएगी। परियोजना के प्रमुख कार्य एकल ईपीसी संविदा के जरिए निष्पादित कराए जा रहे हैं। परियोजना पर कार्य 27 जुलाई 2011 से शुरू हो गया था। परियोजना 2019-20 में कमीशन की जानी निर्धारित है। बांध परियोजना लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है।
टिहरी बांध को इसकी अद्वितीय परिकल्पना और निर्माण विशेषताओं पर विचार करते हुए चीन में अक्तूबर 2009 में इंटरनेशनल कमीशन ऑफ लार्ज डैम का अन्तर्राष्ट्रीय माइलस्टोन परियोजना को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है।
कोटेश्वर एचईपी को 2011-2012 के लिए लंबी अवधि की परियोजनाओं की श्रेणी में पीएमआई इंडिया बेस्ट प्रोजेक्ट अवार्ड प्रदान किया गया है। कोटेश्वर परियोजना को इस श्रेणी में सभी क्षेत्रों में 70 से भी अधिक आवेदनों में से सर्वश्रेष्ठ निर्माण परियोजना की श्रेणी में विजेता चुना गया।
टीएचडीसी को मई 2012 में केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा बेस्ट परफॉरमिंग जनरेशन कंपनी की श्रेणी में पावर लाइन अवार्ड अप्रैल 2012 में कारपोरेट सामाजिक जवाबदेही एवं उत्तरदायित्व के लिए स्कोप का प्रतिष्ठित अवार्ड तथा सार्वजनिक क्षेत्र प्रबंधन हेतु 2013-2014 के लिए स्कोप गोल्ड ट्राफी प्रदान किया गया है।

पेयजल निगम को झटका, श्रीकोट गंगनाली को नमामि गंगे में नहीं मिली मंजूरी

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नेशनल मिशन क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने पेयजल निगम को झटका देते हुए श्रीकोट गंगनाली प्रोजेक्ट को नमामि गंगे में शामिल करने से इन्कार कर दिया है। बताया जा रहा है कि एनएमसीजी ने इस प्रोजेक्ट को कुछ खामियों के चलते अनुमति नहीं दी है।

प्रोजेक्ट में श्रीकोट में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के साथ ही वहां गंगा में गिर रहे सभी नालों को ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने का प्रस्ताव है। इसमें करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पेयजल निगम ने इस योजना को भी नमामि गंगे में शामिल करते हुए एनएमसीजी को प्रस्ताव भेजा था। मगर जब एनएमसीजी ने इस प्रस्ताव का अध्ययन किया तो उन्हें इसमें तमाम खामियां नजर आईं। इस कारण एनएमसीजी ने उक्त प्रस्ताव पर अनुमति देने से इन्कार कर दिया। अब पेयजल निगम उक्त प्रस्ताव को दोबारा तैयार करने में जुट गया है। निगम की ओर से अगले दो माह में नया प्रस्ताव एनएमसीजी के समक्ष रखा जाएगा। अगर एनएमसीजी नए प्रस्ताव से संतुष्ट हुआ तो पेयजल निगम की इस योजना को मंजूरी मिल पाएगी।
हरिद्वार के लिए टेंडर जारी
श्रीकोट गंगनाली को छोड़कर नमामि गंगे की बाकी 20 योजनाओं को चार माह पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से हरिद्वार की योजनाओं के लिए पेयजल निगम ने टेंडर जारी कर दिए हैं। निगम का दावा है कि दो माह के भीतर इन योजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। वहीं पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने बताया कि हमें नमामि गंगे में सिर्फ श्रीकोट गंगनाली योजना पर मंजूरी मिलना बाकी है। इस संबंध में निगम की कार्यवाही गतिमान है। जल्द ही नया प्रस्ताव एनएमसीजी के समक्ष पेश किया जाएगा।

दूर-दूर से पहुच रहे गणपति विसर्जन को श्रद्धालु 

गणेश चतुर्थी के 10 दिनों के उत्सव के बाद अब गणपति को विदा करने का समय आ गया ह , आस-पास  के कई छेत्रो के पंडाल से गणपति शोभा यात्रा के रूप में लेकर ऋषिकेश पहुँच रहे है और धूम धम से नाच-गा कर बप्पा से अगले साल आने की मुराद मांग कर विदा किया जा रहा है।

दो दिनों से गंगा के तट गणपति विसर्जन की धूम में रंगे हुए हर तरह भक्तो का काफिला गणपति के दर्शन और विदा को पहुच रहा है और इस भव्य द्रश्य को देखने के लिए देशी विदेशी पर्यटक गाना तटों पर पहुच रहे है, 10 दिनों तक चले इस महोत्सव के बाद अब विसर्जन के मौके पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीड़ देखने को मिली।