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तुम्हारी सुलू का एक और पोस्टर जारी

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17 नवंबर को रिलीज होने जा रही विद्या बालन की फिल्म ‘तुम्हारी सुलू’ का एक और पोस्टर आज सोशल मीडिया पर रिलीज किया गया। ये फिल्म का तीसरा पोस्टर है, जिसे रिलीज किया गया है।

फिल्म का ट्रेलर लांच हो चुका है और अब रिलीज की तैयारियां तेज हो गई हैं। फिल्म की टीम का कहना है कि अभी दो और पोस्टर रिलीज किए जाएंगे। सभी पोस्टरों में विद्या बालन को ही प्राथमिकता दी गई है।

सुरेश त्रिवेणी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विद्या बालन एक रेडियो जाकी का रोल कर रही हैं, जो अपनी आवाज के जादू से लोगों में लोकप्रिय हो जाती है। फिल्म में उनके साथ मानव कौल और नेहा धूपिया हैं। तुनज गर्ग, अतुल कसबेकर और टी सीरिज ने मिलकर ये फिल्म बनाई है।

पुलिस की अवैध वसूली का वीडियो हुआ वायरल

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उधमसिंहनगर में पुलिस द्वारा अवैध वसूली करना आम बात है, मगर मामला तक ज्यादा सुर्खियों में आया जब एक वाहन से वसूली करने पर कुछ लोगों ने उसका वीडियों बना दिया, जिसमें सिपाही से कुछ लोग पैसे लेने की बात कर रहे हैं और ट्रेफिक सिपाही उन लोगों से मुंह छुपाकर बागता हुआ दिख रहा है, तभी वहीं सिपाही को घिरा देख ट्रेफिक इन्सपेक्टर पहुंच जाता है जो बीच बचाव करता है और मामले को रफा दफा करने की बात कहता है, जिसकी पुरी वीडियों अब चर्चाओं में है।

काशीपुर रोड का है जहां यातायात पुलिस के सिपाही ने एक ट्राले वाले से पांच सौ रुपये बतौर घूस के लिए। यह आरोप लगाकर लोगों ने सिपाही के साथ जमकर अभद्रता की, बीच बचाव को पहुंचे टीएसआई यशवंत पाल से भी अभद्रता की गई, इस मामले की पुरी वीडियो वहां खडे लोगों ने बना ली।

वीडियो के वायरल होने पर एसएसपी सदानंद दाते ने संज्ञान लेते हुए यातायात पुलिस के सिपाही को निलंबित कर दिया। साथ ही टीएसआई से भी पूछताछ की, एसएसपी का कहना है कि, “कानून हाथ में लेकर अभद्रता करने वालों को भी चिह्नित किया जा रहा है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी, यदि सिपाही वसूली कर रहा था तो उसकी शिकायत की जानी चाहिए थी।”

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें कुछ युवकों ने बाइक पर सवार यातायात पुलिस के आरक्षी अमित गिरी पर ट्राले से पांच सौ रुपये वसूलने का आरोप लगाकर उसके साथ बदसलूकी शुरू की। उसकी नेम प्लेट पर बैच नंबर देखने के लिए हाथ बढ़ाया तो सिपाही ने नेम प्लेट उतार कर जेब में रख ली। युवक सिपाही से पांच सौ रुपये का नोट वापस मांग रहे थे।

वीडियो में सिपाही पर्स निकालता दिख रहा है, सिपाही ने हेल्मेट पहन रखा है, लेकिन युवक जबरन उसका हेल्मेट उतरवा रहे हैं। अंतत: सिपाही हेल्मेट उतार देता है, लोग दिन में लूट मचाने का आरोप लगाते हैं। यह लोग सिपाही की तलाशी लेने की बात भी कहते हैं। टीएसआई यशवंत पाल भी मौके पर दिखाई देते हैं, लेकिन गुस्से में लोग टीएसआई से भी अभद्रता करते हैं। हाथापाई होने पर सिपाही गिरी भागता है तो दो तीन युवक उसके पीछे दौड़ते हैं। वह एक शोरूम में घुस जाता है। इस बीच टीएसआई एक व्यापारी नेता से मदद मांग कर उनकी कार में बैठकर चले जाते हैं।

सात करोड़ की बार्ज खरीदकर भूल गए ‘सरकार’

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टिहरी, आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहे उत्तराखंड जैसे राज्य में पैसे की बर्बादी का इससे बड़ा नमूना और क्या होगा कि सात करोड़ की लागत से तैयार कराई गई बार्ज बोट (माल ढुलाई) में छेद हो गया है, यह बोट अब चलने लायक नहीं रह गई है। दो साल पहले सिर्फ उद्घाटन वाले दिन ही बार्ज झील में तैरी। इसके बाद यह खड़ी हुई तो कभी नहीं चल पाई। यह अलग बात है कि अफसरों के लिए यह मसला गंभीर नहीं है। उनकी नजर में बोट थोड़ी खराब है, जिसकी मरम्मत के बाद संचालन होने लगेगा, लेकिन दो साल में बार्ज क्यों नहीं चली। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

दरअसल, टिहरी झील बनने के बाद प्रतापनगर ब्लाक के सत्तर से ज्यादा गांवों की करीब डेढ़ लाख आबादी अलग-थलग पड़ गई। जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए यहां के लोगों को 120 किलोमीटर की दूरी अतिरिक्त तय करनी पड़ती है। इसमें करीब चार घंटे लग जाते हैं। जबकि झील को पार कर यह दूरी सिर्फ 50 किलोमीटर रह जाती है। ऐसे में माल ढुलाई के लिए पर्यटन विभाग ने इस बार्ज को तैयार किया। 28 अक्टूबर 2015 को भव्य समारोह कर इसका उद्घाटन किया गया। उस दिन बार्ज का संचालन किया गया। इसके बाद कभी यह नौबत नहीं आई। झील के जलस्तर में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। जब पानी कम हो जाता है तो बार्ज नीचे डूबी चट्टान से टकरा जाती है। यही वजह है कि एक जगह खड़े रहने से यह क्षतिग्रस्त हो गई। छेद होने से इसमें पानी का रिसाव भी होता है। जिसे बार-बार उलीचना पड़ता है।

बार्ज तो खरीदा, पर नहीं बनाए रास्ते 
स्थानीय लोगों का कहना है कि माल ढुलाई के लिए इलाके में सड़कों की भी जरूरत है। दरअसल बार्ज से सामान को उस पार उतारने के बाद उसे ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बार्ज तैयार कराने से पूर्व लिंक रोड बनाई जानी चाहिए थीं। दूसरी ओर बोट संचालन से जुड़े और कोटी कॉलोनी व्यापार मंडल के अध्यक्ष कुलदीप पंवार कहते हैं कि, “यदि बोट संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों को दी जाती तो स्थिति कुछ और होती, यह तो सरासर अफसरों की लापरवाही है।” मामले में जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी गढ़वाल सोबत सिंह का कहना है कि, “झील में खड़े रहने के कारण बार्ज बोट थोड़ा खराब हुई है, जल्द ही मरम्मत कराई जाएगी और इसके बाद संचालन किया जा सकेगा।”

आयोग ने लिया मसूरी वॉल्वो न चढ़ पाने का संज्ञान

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देहरादून, मानवाधिकार आयोग ने 15.63 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च किए जाने के बाद भी वॉल्वो बसों के मसूरी न चढ़ पाने का मामला संज्ञान लिया है। आयोग ने इसको लेकर प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया तो आयोग को गोलमोल जवाब थमा दिया गया। आयोग अध्यक्ष जगदीश भल्ला व सदस्य डॉ. हेमलता ढौंडियाल की खंडपीठ ने जवाब को खारिज करते हुए अब मुख्य अभियंता को मूल पत्रावलियों के साथ व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होने को कहा है। मामले में सुनवाई की अगली तिथि चार नवंबर तय की गई।

मसूरी रोड के अंधे मोड़ों व हेयर क्लिप बैंड को दुरुस्त करने के नाम पर जो 15.63 करोड़ रुपये खर्च किए, उसके बाद भी वॉल्वो बसें मसूरी नहीं चढ़ पा रही हैं। जबकि अब अधिकारियों ने वॉल्वो को मसूरी चढ़ाने के लिए 44.72 करोड़ रुपये का नया इस्टीमेट तैयार किया है।

वहीं, जब लोनिवि ने उत्तराखंड परिवहन निगम अधिकारियों की मौजूदगी में वॉल्वों बसों का ट्रायल के रूप में संचालन कराया तो पता चला कि मार्ग अभी भी वॉल्वो बसों के लिए उपयुक्त नहीं है। पता चला कि 34 और स्थलों पर चौड़ीकरण की जरूरत है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए लोनिवि प्रांतीय खंड से जवाब मांगा था और खंड के अधिशासी अभियंता ने जवाब दिया कि मसूरी रोड पर कार्य करने से पहले वाहनों की औसत स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जबकि अब 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है। इस तरह उन्होंने यह भी बताने का प्रयास किया कि मोड़ों को दुरुस्त करने में अब तक खर्च की गई राशि निरर्थक साबित नहीं हुई। आयोग ने इसी जवाब को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि, अधिकारी वास्तविक स्थिति पर पर्दा डाल रहे हैं, देखने वाली बात यह है कि चार नवंबर को होने वाली व्यक्तिगत सुनवाई में लोनिवि के मुख्य अभियंता क्या जवाब दाखिल करते हैं। 

कम छात्र संख्या वाले हाईस्कूल-इंटर कॉलेज भी किए जाएंगे बंद

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देहरादून, बेसिक स्कूलों के विलय के बाद अब सूबे में शिक्षा विभाग ने जनपदों में एक ही परिसर में चल रहे हाईस्कूल और इंटर कॉलेज की लिस्ट तलब की है जिनमें हाईस्कूल में 50 और इंटर में 100 से कम छात्र संख्या हो। विभाग ने ऐसे स्कूलों को इसमें शामिल किया है जिनको 3 साल हो गये हों। गौर हो कि प्रदेश के 400 बेसिक स्कूलों के विलय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सूबे में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और विभाग के बजट को सही जगह खर्च करने के लिए शिक्षा महकमा लगातार कई प्लान पर काम कर रहा है। शिक्षा मंत्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों के विलय की योजना पर काम कर रहा है, जहां छात्र संख्या बहुत कम है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि, “ऐसे स्कूलों का विलय कर शिक्षा की गुणवत्ता को सुधार करने के अलावा बजट को सही जगह पर खर्चा किया जा सकता है। हालांकि ऐसे स्कूलों के विलय से पहले विभाग आरटीई के नियमों की भी अनदेखी नहीं करता है।”

बेसिक स्कूलों के बाद हाईस्कूल और इंटर के स्कूलों के विलय की खबर पर हालाकि अधिकारी अभी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशक उत्तराखंड ने हाईस्कूल और इंटर कॉलेज की सूचना मांगी गई है जिनमें छात्र संख्या हाईस्कूल में 50 और इंटर में 100 से कम हों। साथ ही जिन्हें संचालित हुए 3 साल हो गए हों। इसके साथ ही एक ही परिसर में संचालित वे विद्यालय जो जूनियर हाईस्कूल व हाईस्कूल स्तर पर अलग-अलग संचालित हो रहें हो।

बद्रीनाथ पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा

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गोपेश्वर, साफ मौसम के बीच बद्रीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या भी हर दिन बढ़ ही रही है। मंगलवार को 1230 यात्रियों ने भगवान के दर्शन किये। कपाट खुलने से लेकर मंगलवार तक 8,44,645 तीर्थ यात्री भगवान बद्री नारायण के दर्शन कर चुके है।

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रचार अधिकारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया बद्रीनाथ में हल्की ठंड बढ़ने लगी है। इसके बावजूद दिन में मौसम काफी खुशनुमा है। जिसके चलते अब भी बद्रीनाथ धाम पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा है। हा

लांकि नवंबर माह में बद्रीनाथ में ठंड काफी बढ़ जाती है। फिर भी अनुमान लगाया जा रहा है कि बद्रीनाथ धाम की यात्रा में कोई कमी नहीं आयेगी। बताया कि मंगलवार को 1230 तीर्थ यात्रियों ने भगवान के दर्शन किए। कहा कि कपाट खुलने से लेकर अब तक 8,44,645 तीर्थ यात्री भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर चुके हैं। 

जंगली हाथियों के प्रवेश से लोगों में दहशत का माहौल

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हरिद्वार,  भेल सेक्टर-एक व आसपास के रिहायशी काॅलोनियों में जंगली हाथियों का उत्पात जारी है। भेल कैम्पस में जंगली हाथियों के झुण्ड आए दिन उत्पात मचा रहे हैं। जिस कारण से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

सप्ताह भर से भेल मुख्य मार्ग पर जंगली हाथियों के प्रवेश से सड़क पर राहगीरों को अनेकों दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शाम ढलते ही हाथियों के झुण्ड भेल सेक्टर-एक में आ जाते हैं। रात्रि में सड़कों पर उत्पात मचाने वाले जंगली हाथियों से परेशान लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। मुख्य मार्गों, भेल काॅलोनियों में हाथियों का प्रवेश आए दिन हो रहा है।

स्थानीय लोगों द्वारा वन विभाग को हाथियों के काॅलोनी में प्रवेश करने की सूचना भी दी जा रही हैं। बावजूद इसके वन विभाग उदासीन बना हुआ है। बुधवार को भेल सेक्टर-एक मस्जिद के बाहर हाथियों के झुण्ड ने जमकर उत्पात मचाया। नमाज अदा करने वाले लोगों को भी अनेको दिक्कत झेलनी पड़ी। जंगल से सटी काॅलोनियों में जंगली हाथियों की आमद से लोग डरे सहमे हैं।

विशाल भटनागर का कहना है कि, “रात में ड्यूटी जाना भी दिक्कतों भरा हो रहा है। कई बार तो सड़क पर चलने वाले लोगों के पीछे हाथी भागने लगते हैं। बच्चे व महिलाएं घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वन विभाग के आला अधिकारियों को बार-बार हाथियों के काॅलोनी में प्रवेश की सूचना दी जाती है लेकिन समय से वन विभाग की टीम नहीं पहुंच पाती है। ”

सोमवार रात्रि में भी हाथियों के झुण्ड ने सेक्टर-एक में जमकर उत्पात मचाया। लोगों का कहना है कि, “वन विभाग की टीम को रात्रि में गश्त को बढ़ाना चाहिये। साथ ही भेल कैम्पस की सुरक्षा को लेकर भी उपाय करना चाहिये। जंगली हाथियों के झुण्ड शहरी क्षेत्र में लगातार उत्पात मचा रहे है।” 

25 अक्टूबर से शुरु हुअा मसूरी में पाँच दिवसीय ऑटम फेस्टिवल

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एक समय पर पहाड़ों की रानी मसूरी की शान माने जाने वाला ऑटम फेस्टिवल लगभग आठ साल बाद एक बार फिर वापसी कर रहा है। यह फेस्टिवल आखिरी बार साल 2009 में मनाया गया था लेकिन उसके बाद अलग-अलग लोगों के विरोध और कुछ फाइनेंनशियल मसलों की वजह से आॅटम फेस्टिवल को मनाना बंद कर दिया गया।

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लेकिन एक और बार लोगों की डिमांड पर मसूरी यह फेस्टिवल  फिर से होस्ट करने वाला है, जो ना केवल इसमें भाग लेने वालों के लिए एक हर्ष का विषय है बल्कि इससे क्षेत्रीय लोगों की पुरानी यादें भी ताजा होंगी।

ऑटम फेस्टिवल को एक बार फिर शूरु करने के बारे में म्यूनिसिपल काउंसिल स्टेट के प्रेसिडेंट मनमोहन सिंह मल्ल का कहना है कि, “ऑटम फेस्टिवल मसूरी के लिए एक पारंपरिक उत्सव है और अब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर 25-30 अक्टूबर यानि की पांच दिन एक बार फिर उसी हर्षोउल्लास के साथ मनाया जायेगा। क्षेत्रीय लोगों की डिमांड पर इस ऐतिहासिक फेस्टिवल में गढ़वाली कलाकारों के साथ ही उत्तराखंड की विलुप्त हो रही संस्कृति का समावेश कराया जाएगा, स्पोर्ट,कल्चरल इविनिंग के साथ ही आईटीबीपी का जुडो कराटे, म्यूजिकल बैंड के परर्फामेंस का आयोजन होगा और इन सबके साथ लोगों को एक ही संदेश दिया जाएगा कि उत्तराखंड की संस्कृति अभी भी बरकरार है।

मसूरी में लंबे समय से रहने वाले धीरु रतूड़ी को इस बात की खुशी है कि पहाड़ की परंपरा को एक बार फिर से शुरु किया जा रहा, रतूड़ी जी कहते हैं कि, “ऑटम फेस्टिवल के साथ बहुत सी पुरानी यादें जुड़ी हुई हैं। मसूरी की सड़कों पर अलग-अलग तरह का प्रदर्शन,म्यूजिकल बैंड, मन मोहने वाले स्कूल के बच्चों का प्रदर्शन वो भी मसूरी की सर्दियों की शाम में, यह सारी यादें सभी मसूरी वालों के दिलों दिमाग में एक बार फिर तरोताजा होंगी।”

टीम भावना से कार्य करने का आह्वान: मुख्य सचिव, उत्पल कुमार सिंह

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मुख्य सचिव पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद उत्पल कुमार सिंह ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से टीम भावना से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने एसडीएम रानीखेत से डीएम नैनीताल तक और शासन में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में अपने उत्तराखंड राज्य में 12 वर्षों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह राज्य की बुनियादी समस्याओं से परिचित हैं। खुले दिमाग से इन समस्याओं को चिन्हित कर उन्हें दूर करना है।
नवनियुक्त मुख्य सचिव ने कहा कि अगले तीन साल में राज्य अपनी स्थापना के बीस वर्ष पूरा कर लेगा। हमें 2020 तक का लक्ष्य तय करना है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि लोगों के जीवन की बेहतरी के लिए मिलजुल कर कार्य करना है। इसके साथ ही फ्लैगशिप कार्यक्रमों की गति में और तेजी लानी है। संकल्प से सिद्धि के तहत तय किये गये लक्ष्यों को हासिल करना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल इंडिया सहित विभिन्न विभागों की समीक्षा करेंगे। अधिकारी विचार करें कि वे अपने विभाग में कौन-कौन नवाचारी(इनोवेटिव) कार्य कर सकते हैं।

छठ पूजा की तैयारी हुई पूरी

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रुद्रपुर, छठ महापर्व के लिए छठ पूजा समिति ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। छठ पूजा समिति ने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जताई है। अलबत्ता विधायक राजकुमार ठुकराल ने छठ के मौके पर सूर्य को अघ्र्य देने के लिए स्वच्छ पानी महैया कराने के लिए कुंड का निर्माण कराकर आर्टीजन चालू करा दिया है।

छठ पर्व पर पूर्वांचल समाज की महिलाएं डूबते सूरज को और अगले दिन उदय होते सूर्य को अघ्र्य देती हैं। पूर्वांचल में छठ पर्व का बड़ा महत्व है। कल्याणी व्यू नदी पर स्थित छठ पूजा घाट पर छठ पूजा की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। घाट पक्के कर दिए गए हैं। घाट की साफ सफाई कर दी गई है। छठ पूजा के लिए वेदियां तैयार की जा रही है। छठ पूजा स्थल पर रौनक बढ़ गई है। छठ पूजा समिति के लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि प्रशासन का कोई अधिकारी पूजा स्थल पर नहीं पहुंचा।

छठ के मौके पर बुधवार को महिलाओं ने उपवास रखा। यह उपवास कल भी जारी रहेगा। यह मान्यता है कि छठ मइया भगवान सूर्य की बहन हैं। छठ को साक्षी मान कर सूर्य की उपासना की जाती है। कल महिलाएं डूबते सूर्य को पानी में खड़े होकर अघ्र्य देंगी। शुक्रवार को सूर्योदय समय भी अघ्र्य दिया जाएगा। इस बार स्वच्छ पानी में सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा।

विधायक राजकुमार ठुकराल ने विधायक निधि से छठ पूजा के लिए कुंड बनवाया है, जिसमें आर्टीजन के जरिए पानी की आपूर्ति होगी। छठ पूजा के लिए महिलाओं ने जमकर खरीदारी की।