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शादी से इंकार किया तो शुरू कर दी बदसलूकी

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राजपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल की स्टॉफ नर्स ने एक युवक पर गाली गलौज कर मारपीट और बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक एक युवती निवासी पौड़ी गढ़वाल राजपुर रोड स्थित एक अस्पताल में स्टॉफ नर्स हैं। पुलिस के मुताबिक उसकी रूपेंद्र नाम के एक लड़के से जान-पहचान थी। दोनों आपस में दोस्त हैं। बताया जा रहा है कि पीडि़ता की शादी तय हो चुकी है। इसलिए अब उसने रूपेंद्र से बातचीत करनी बंद कर दी है। जबकि रूपेंद्र उस पर शादी करने का दबाव बना रहा है।

पुलिस के मुताबिक विगत दिनों रूपेंद्र ने पीड़िता को मिलने के लिए राजपुर रोड स्थित अस्पताल के पास बुलाया और शादी के लिए दबाव बनाने लग गया। पीड़िता ने जब शादी करने से मना किया तो आरोपी ने उसके साथ गाली गलौज, मारपीट और बदसलूकी की। मंगलवार रात को पीड़िता ने राजपुर थाने में इसकी शिकायत की। चौकी इंचार्ज जाखन उमेश कुमार ने बताया कि तहरीर के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अतिक्रमण से सड़कों पर जाम, आमजन परेशान

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रुड़की, अतिक्रमण के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद प्रशासन और नगर निगम गहरी नींद में सो गया है। अतिक्रमणकारियों ने बाजार से लेकर शहर की सड़कों पर फिर से अतिक्रमण करना शुरू कर दिया है।

शहर में पिछले दिनों नगर-निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम की ओर से मुख्य बाजार, बीटी गंज, सिविल लाइंस, अनाज मंडी, रामनगर आदि स्थानों में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस दौरान सड़कों पर स्थाई और अस्थाई दोनों ही तरह के अतिक्रमण ध्वस्त करने के साथ ही अतिक्रमणकारियों को भी भविष्य में अतिक्रमण न करने की हिदायत दी गई थी लेकिन, अतिक्रमणकारियों ने फिर से कब्जा जमा लिया।

अतिक्रमण से सड़कें तंग होने के कारण जहां दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया, वहीं शहर के बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन चालक सड़कों पर ही अपने वाहन खड़े करने को मजबूर हैं। शहर में अतिक्रमण और जगह-जगह पार्किंग होने के कारण अधिकांश समय यहां जाम की स्थिति बनी रहती है। इस कारण खरीदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

मजिस्ट्रेट निकिता खंडेलवाल ने बताया कि, “जल्द ही शहर में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। अतिक्रमणकारियों को प्रशासन और नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं।”

प्रधानमंत्री के मसूरी दौरे के चलते ट्रैफिक डायवर्ट प्लान

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प्रधानमंत्री भारत सरकार के लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, मसूरी आवागमन के दौरान यातायात डायवर्ट प्लान: –

1. जीरो बैण्ड से उपर मसूरी एलबीएस की ओर कोई भी पर्यटक वाहन एवं व्यवसायिक वाहन नही जायेगा। स्थानीय लोग आवागमन कर सकेगें।
2. किंक्रेग से लाईब्रेरी चैक से जीरो बैण्ड से एलबीएस तक सड़क पर कोई भी वाहन पार्क नही किया जायेगा।
3. पोलो ग्राउण्ड से एलबीएस तक सम्पूर्ण मार्ग पर कोई भी वाहन पार्क नही होगा।
4. कैम्पटी फाॅल में गये हुए पर्यटकों को विकासनगर होते हुए भेजा जायेगा।
5. मसूरी रूट पर समस्त भारी वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेंगे।
6. किंग्रेग से जीरो बैण्ड तक कोई भी वाहन मार्ग पर पार्क नही होगा। मार्ग पर पार्क वाहनों को हटाकर पार्किंग स्थलों पर भेजा जायेगा।
7. देहरादून शहर के भीतर भी भारी वाहनों का संचालन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा।
8. कटींजेन्सी रूट जाॅलीग्रान्ट से एलबीएस तथा जीटीसी से एलबीएस तक समस्त भारी वाहनों का आवागमन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा।

पर्यटकों एवं सम्बन्धित क्षेत्र के निवासिंयों एवं मार्गो का प्रयोग करने वाले वाहन चालको से अनुरोध है कृपया अपने गन्तव्य स्थान तक पहुंचने एवं किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गाेंका प्रयोग करें। अपने वाहनों को वीआईपी के मार्ग पर पार्क न करें। कृपया व्यवस्था बनाने के लिए जनपद पुलिस को अपना सहयोग प्रदान करें।

औली से भारतीय नौ सेना का साइकिल अभियान दल हुआ रवाना

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गोपेश्वर। पर्वतारोहरण एवं स्कीइंग संस्थान जोशीमठ से बुधवार को भारतीय नौ सेना का साइकिल अभियान दल को आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान दल 600 किमी की यात्रा तय कर देहरादून पहुंचेगा। जहां इसका समापन किया जाएगा।
बुधवार को चमोली जिले के जोशीमठ के औली से नौ सेना का साइकिल अभियान शुरू हुआ। जिसको हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक गंभीर सिंह चैहान ने अपनी शुभकामनाएं दी। अभियान दल के कंमाडर गुरुप्रताप सिंह ने बताया कि नौ सेना के इस अभियान को औली से प्रारंभ करने का मुख्य कारण यह है कि औली अपने आप में लोगों को साहसिक कार्यों के लिए प्रेरित करता है।
साथ ही औली में स्थापित सेना का पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान जो साहसिक खेलों के लिए जाना जाता है और यहां से कई अभियान दलों ने सफलता हासिल की है। साथ इसके पीछे एक और मकसद यह भी है कि दूर दराज के लोगों को नौ सेना के बारे में भी जानकारी मिले ताकि युवा इससे प्रेरित होकर नौ सेना में भर्ती होने के लिए आगे आयें। इस मौके पर डॉ. महेंद्र कुमार, सहायक सेनानी नरेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे।

31 अक्टूबर से फिर श्रीहरि के हाथों होगी सृष्टि की सत्ता

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दीपावली के पश्चात सबसे बड़ा पर्व देवोत्थान एकादशी होता है। प्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देवोत्थान एकादशी के साथ ही चार माह से भगवान शंकर के हाथों से संसार की सत्ता भगवान विष्णु के हाथों आ जाती है। देवोत्थान एकादशी को देव दीपावली भी कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार 31 अक्टूबर को देवउठनी एकादशी है, लेकिन 13 अक्टूबर से देवगुरु बृहस्पति पश्चिामास्त हैं, जो कि देवउठनी एकादशी के सात दिन बाद 7 नवम्बर को पूर्व दिशा में उदित होंगे और आगामी तीन दिन बाल अवस्था में रहने के बाद 10 नवम्बर को बालत्व निवृत्ति होगी। 16 नवम्बर को सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। इन समस्त दोषों की निवृत्ति के पश्चात 19 नवम्बर से शादियों की शुरुआत होगी। वैसे देव उठनी एकादशी को किसी मुहुर्त की जरूरत नहीं होती। देवोत्थान एकादशी स्वंय सर्वार्थ सिद्धि योग होता है। देवोत्थान एकादशी के साथ चार माह से बंद पड़े मंगल कार्यों की भी शुरुआत हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार इस साल नवंबर में 19, 22, 23, 24, 28, 29 और 30 नवम्बर को विवाह के विशिष्ट मुहूर्त हैं। दिसम्बर में 3, 4, 10, 11 और 12 दिसम्बर को विवाह मुहूर्त बन रहे हैं। 15 दिसम्बर से 14 जनवरी, 2018 तक मलमास रहेगा। मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होते हैं, किंतु इस बार जनवरी में कोई मुहूर्त नहीं है। 22 जनवरी को बसंत पंचमी को देवलग्न होने के कारण विवाह आयोजन कर पाएंगे, लेकिन लग्न शुद्धि के शुभ मुहूर्त फरवरी में ही मिलेंगे। फरवरी में 4, 5, 7, 8, 9, 11, 18 और 19 तथा मार्च में 3 से 8 और 11 से 13 मार्च को शादियों के मुहूर्त हैं।

देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी विवाह का भी शास्त्रों में वर्णन है। इसे तुलसी विवाह एकादशी भी कहा जाता हैै। मान्यतानुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन तुलसी जी और विष्णु जी का विवाह कराने की प्रथा है। तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम पाषाण का पूर्ण वैदिक रूप से विवाह कराया जाता है। ये त्योहार दिवाली के 11 दिन बाद मनाया जाता है और इस वर्ष तुलसी विवाह का शुभ दिन 31 अक्टूबर को है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी शालिग्राम विवाह कराने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन नए चावल, रुई, शकरकंद, सिगाड़ा, बेर, गन्ना, आंवला आदि का दान देना विशेष फलदायी होता है।

एकादशी व्रत के सबंध में जोशी के अनुसार एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यांसियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। 

जल प्रजाति संरक्षण के लिये डब्लूआईआई देगा ट्रैनिंग

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वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्लूआईआई) आने वाले दिनों में उत्तराखंड समेत अन्य राज्योें के वन कर्मियों को नदियों में पाये जाने वाले जीवों के संरक्षम के लिये ट्रेनिंग देगी। गौरतलब है कि  केंद्र सरकार के नेशनल मिशन फॉर गंगा क्लीनिंग ने डब्लूआईआई को गंगा और उसकी सहायक नदियों में मिलने वाले जल जीवों के संरक्षण के लिये प्लान बनाने का जिम्मा दिया है। इसी के तहत संस्थान उत्तराखंड के साथ साथ उत्तरा प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन कर्मियों और अधिकारियों को ट्रैनिंग देगा।
संस्थान के मुताबिक इस ट्रैनिंग में खासतौर पर जल प्रजातियों जैसे कि डोलफिन, घड़ियाल, कछुओं के संरक्षण करने के लिये सही करीके सुखाने पर ज़ोर रहेगा। इसके साथ साथ सभी अधिकारियों को मध्यप्रदेश के चंबल राष्ट्रीय पार्क ले जाया जायेगा। ये पार्क लुप्त होने की कगाप पर पहुंचे चुके जल जीवों के संरक्षण का हब माना जाता है। केंद्र सरकार ने 25 करोड़ के इस प्रॉजेक्ट को पिछले साल डब्लूआईआई को दिया था।

संस्थान के निदेशक वीबी माथुर कहते हैं कि, ”अभी डब्लूआईआई ने जल्द ही एक प्रोजेक्ट बायोडायर्वसिटी कन्जरवेशन एंड गंगा रिजुविनेशन नाम से चलाया है जिसके स्पॉंसर मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिर्सोसेस,रिवर डेवलेपमेंट और गंगा रिजुविनेशन हैं।” उन्होंने कहा कि, “इस प्रोजेक्ट की मुख्य बात है स्टेकहोल्डरों में क्षमता बढ़ाना,जिसेक अंर्तगत अलग-अलग डिर्पाटमेंट के ऑफिसर जैसे कि फॉरेस्ट,फिशरी,एग्रीकल्चर,ईरिगेशन और रुरल डेवलपमेंट जैसे विभागों को ट्रेनिंग दी जा रही, जिसके माध्यम से एक्वेटिक बायोडायर्वसिटी का संरक्षण स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ किया जा सके।”

इसके अलावा वीबी माथुर ने कहा कि, “ग्राम पंचायत की मदद से “गंगा प्रहारी या गंगा की सुरक्षा के लिए युवाओं” की पहचान की जा रही है,जिनकी मदद से पानी में रहने वाले जीव विशेषकर डॉल्फिन, कछुओं, मगरमच्छ आदि से जल संरक्षण, उनका बचाव और पुनर्वास में मदद की जा रही है।”

कैबिनेट बैठक में मिली नई केदारपुरी के निर्माण कार्यों को मंजूरी

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देहरादून। केदारनाथ धाम में बनाई जा रही नई केदारपुरी के निर्माण कार्यों के लिए 16 बिंदुओं की गाइडलाइन को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉंसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत होने वाले निर्माण कार्यों के लिए ऑनलाइन डोनेशन की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ में नई केदारपुरी का शिलान्यास किया था। त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल ने नई केदारपुरी की कार्ययोजना पर अपनी मुहर लगा दी। वहीं राज्य के पर्वतीय जिलों में अब राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग के इर्द-गिर्द 200 मीटर के दायरे में स्थित राजस्व गांव अब जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण का हिस्सा होंगे। यानी इन राज्यमार्गों के दोनों ओर अब वाणिज्यिक-व्यावसायिक भवनों के साथ ही एक से ज्यादा आवासीय भवनों के लिए मानचित्र स्वीकृत कराना जरूरी होगा। उक्त 200 वर्गमीटर के भू-भाग में सिर्फ एकल या संयुक्त परिवार के आवासीय भवन और 30 वर्ग मीटर तक एक व्यावसायिक दुकान को मानचित्र पास कराने से छूट मिलेगी। वहीं राज्य में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को विस्थापन की स्थिति में भवन निर्माण के लिए तीन लाख के बजाए चार लाख रुपये दिए जाएंगे। विधायकों को विधायक निधि से कराए जाने वाले कार्यों में राहत दी गई है। अब निर्माण कार्यों में सिंगल प्रोजेक्ट कॉस्ट की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने का निर्णय लिया गया है।

त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल की सचिवालय में बुधवार देर शाम तक चली बैठक में आपदा प्रभावितों, विधायकों को राहत दी गई तो खडिय़ा के खनन को ई-टेंडङ्क्षरग से बाहर कर पुरानी व्यवस्था बहाल करने समेत कई अहम फैसले लिए गए। सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी ने नई केदारपुरी के निर्माण कार्यों को अंजाम देने और उसके अनुश्रवण को लेकर कार्ययोजना बनाई गई है। मंत्रिमंडल ने इस पर अपनी मुहर लगा दी। सीएसआर से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को लेकर जिंदल औद्योगिक समूह के साथ राज्य सरकार एमओयू करेगी। इसके लिए बैंक में खाता खोला जाएगा। पर्यटन सचिव को निर्माण कार्यों का नोडल अधिकारी बनाया गया है। निम एक कार्यदायी संस्था के तौर पर काम करेगा। बर्फबारी के दौरान निर्माण कार्यों के लिए दरें तय की जाएंगी। केदारनाथ विकास प्राधिकरण के साथ सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड भी उक्त कार्यों के लिए जुड़ेंगे। प्राधिकरण के कार्यालय केदारनाथ व गुप्तकाशी में होंगे। केदारनाथ में स्मृति वन भी बनाया जाएगा। निर्माण कार्यों समेत तमाम मामलों में फैसले लेने के लिए मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
ब्रिडकुल का रूप ले चुके राज्य अवस्थापना विकास निगम में 46 पद बढ़ाने और पहले से मौजूद तीन पद घटाने का मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया। पुनर्गठन के बाद ब्रिडकुल का संरचनात्मक ढांचा 223 पद का हो गया है। इसमें उप महाप्रबंधक के दो, परियोजना प्रबंधक का एक और कनिष्ठ अभियंता के सात पद सृजित किए गए हैं। निर्माण व पर्यवेक्षण मुख्य महाप्रबंधक, आइटी महाप्रबंधक व पीपीपी मोड महाप्रबंधक के पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। प्रेस ब्रीफिंग में नए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह व वित्त सचिव अमित नेगी मौजूद थे।

कैबिनेट के फैसले:

  • विधायक निधि से कराए जाने वाले कार्यों की सिंगल प्रोजेक्ट कॉस्ट की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख
  • विधायक निधि से वर्क ऑर्डर पर कराए जाने वाले निर्माण कार्य की सीमा तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये
  • आपदा प्रभावित परिवारों को विस्थापन होने पर भवन निर्माण को तीन लाख के बजाय मिलेंगे चार लाख रुपये
  • विधानसभा का शीतकालीन सत्र भराड़ीसैंण में सात दिसंबर से 13 दिसंबर तक
  • गंगा नदी पर उत्तरकाशी में गंगोरी से बढ़ेती चुंगी के 10 किमी क्षेत्र और हरिद्वार से लक्सर तक 50 किमी क्षेत्र को बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण (फ्लड प्लेन जोनिंग) की अंतिम अधिसूचना जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी
  • ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (ब्रिडकुल) में 46 नए पदों के सृजन और तीन पुराने पद खत्म करने को अनुमति
  • उपखनिजों में ई-टेंडङ्क्षरग की व्यवस्था से खडिय़ा का खनन बाहर, खडिय़ा खनन की पुरानी व्यवस्था यथावत
  • ग्राम मोहकमपुर में हरिद्वार मार्ग पर स्थित भूखंड पर प्रस्तावित फिलिंग स्टेशन के लिए भूमि की गहराई में मानक से 2.23 मीटर की कमी को शिथिल करने पर मुहर
  • पूर्व मुख्य सचिव एस रामास्वामी के कार्यों को सराहा, नए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का किया स्वाग

भाजपा के वरिष्ठ नेता हरबंश कपूर ने किया छठ महोत्सव का शुभारंभ

ऋषिकेश, त्रिवेणी के संगम पर छठ महोत्सव का आगाज हो चुका है विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में पूर्वांचली तीर्थ नगरी ऋषिकेश पहुंचकर गंगा नदी के तट पर सूर्य की उपासना के पर्व को बड़ी धूमधाम से मना रहे हैं। बाहर से आए इन श्रद्धालुओं के लिए छठ समिति ऋषिकेश ने सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। त्रिवेणी घाट पर एक भव्य पंडाल बनाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था भी की गई है, जिसका शुभारंभ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता हरबंश कपूर ने दीप जलाकर किया।
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कार्यक्रम के पहले दिन ऋषिकेश के विभिन्न स्कूलों से आए छात्र छात्राओं ने अपनी प्रस्तुति के जरिए समा बांध दिया। एसबीएम पब्लिक स्कूल के छात्र छात्राओं ने गढ़वाल की संस्कृति को प्रस्तुत करते हुए बाहर से आए पूर्वांचली और विदेशी पर्यटकों को उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू कराया।  इस अवसर पर बोलते हुए हरबंस कपूर ने कहा कि, “ऋषिकेश एक ऐसा स्थान है जहां विभिन्न राज्यों की संस्कृति को करीब से महसूस किया जा सकता है और हर तीज त्यौहार यहां के रंग में समा जाता है।”
कल्चरल प्रोग्राम के जरिए एसबीएम में स्कूल के शताक्षी पुरोहित, टीया गोयल, सृष्टि उपाध्याय, मनीषा गुप्ता ,संजना आदि ने समा बांध दिया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने इन बच्चों का उत्साह वर्धन किया

गिरिजा देवी के देहांत से शोकाकुल बाॅलीवुड

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भारतीय शास्त्री संगीत की प्रख्यात गायिका गिरिजा देवी के देहांत पर बालीवुड की दिग्गज हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में खास तौर पर ठुमरी गाने के लिए विश्व प्रसिद्ध गायिका गिरिजा देवी का कल रात कोलकाता में निधन हो गया था, वे 88 वर्ष की थीं।

सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने उनके निधन पर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ अपनी फोटो भी शेयर की। लता जी ने अपने संदेश में लिखा कि, “उनके साथ हमारे करीबी संबंध थे और वे बहुत महान गायिका तथा एक महान महिला थीं।”

गीतकार जावेद अख्तर ने अपने संदेश में लिखा कि, उनके यूं चले जाने से भारत का शास्त्रीय संगीत हमेशा के लिए सूना हो गया है, संगीत की दुनिया में वे अपनी गायिकी के जादू से बनी रहेंगी।”

संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने कहा कि, “उनके जाने से भारतीय संगीत को अपूर्णीय क्षति हुई है।”

मशहूर बांसुरी वादक हरि प्रसाद चौरसिया ने कहा कि, “ये हमारे संगीत के लिए काला दिन जैसा है, जब वे हमारे बीच नहीं रही।”

भजन गायक अनूप जलोटा ने गिरिजा सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, “वे संगीत की उपासक थीं और उन पर सरस्वती मां का वरदान था।” गायिका शुभा मुदगल ने कहा कि, “वे संगीत की एक मिसाल थीं।”

ईशा देओल की बेटी का नाम राध्या

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ईशा देओल की बेटी का नाम रख दिया गया है, ईशा की मां हेमा मालिनी के मुताबिक, बेटी का नाम ‘राध्या’ रखा गया है। हेमा मालिनी ने कहा कि, “इस नाम का सुझाव उन्होने दिया, जिसे परिवार ने खुशी से मान लिया।”

ईशा देओल ने 20 अक्तूबर को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। 23 अक्तूबर को ईशा अपनी पहली संतान के साथ घर आ गईं। हेमा मालिनी ने बताया कि जल्दी ही राध्या के आने की खुशी में वे करीबी दोस्तों के लिए एक पार्टी देंगी। हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के न आने को लेकर कहा कि, “वे अपने फाम हाउस पर हैं और जल्दी ही मुंबई आ रहे हैं।”

हेमा मालिनी के मुताबिक, धर्मेंद्र ने फोन पर ईशा से बात की। एक बार फिर दादा बनकर वे बहुत खुश हैं, कहा जा रहा है कि बाबी भी अपनी भांजी को देखने के लिए ईशा के घर गए हैं।