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पलायन एक चिंतन: भराड्सर ताल, भाग-4

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दिनांक-13-10-2017

इस ट्रेकिंग के दौरान बीते दिनों की सुबह से कुछ अलग ये सुबह थी। आज “हिमालय दिग्दर्शन” की पदयात्रा का आखिरी दिन था। बहुत दिनों से उच्च हिमालयी क्षेत्र में पानी की किल्लत के चलते ढ़ंग से मुंह तक नहीं धो सके थे। इसलिए नजदीक में बह रहे पानी के छोटे झरने पर अच्छे ढंग से सेविंग के साथ देह को धोया गया। सुबह नाश्ते/भोजन के रूप में तैयार खिचड़ी को अंतिम वन प्रसाद के रूप में बड़े चाव के साथ खाया गया।

सफर में हमारे साथ चल रहे पोटर और गाइड को तो मोरी बाजार तक हमारे साथ चलना था, लेकिन खच्चरों को आज भितरी गाँव से वापस इसी रास्ते से लौटना था। अतः इस कठिन सफर के मध्यनजर नेत्रपाल यादव जी द्वारा एक स्लीपिंग बैग, रतन भाई ने एक टार्च और मैंने रैनकोट के साथ बच गये प्रयाप्त भूने हुऐ चने और किशमिश किर्तम मामटी को भविष्य की शुभकामनाओं सहित भेंट स्वरूप दिये।

पिठु फिर पीठ पर कसा गया और ढ़लान दार पहाड़ी रास्ते पर हमारा कारवां आगे बढ़ा। जंगल का वातावरण और घिसा हुआ रास्ता आस पास गाँव की नजदीकी का एहसास करा रहा था। कुछ जगह पर तो जंगली सूंअरों के झुंडों द्वारा खुर्द-पुर्द जमीन दिख रही थी। रास्ते पहले से थोड़ा ठीक और बरसाती नालों पर जंगलात के लकड़ी के बने नये पुल नजर आ रहे थे।

चलते-चलते मुकेश बहुगुणा द्वारा गांधी दर्शन पर शानदार परिचर्चा और वर्तमान राजनीतिक दृष्टिकोण काबिले तारीफ था।वायुसेना में 20 साल की नौकरी के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में घासाहारी से मांसाहारी बने उनके जोखिम भरे अनुभव शानदार थे। गपशप में मशगूल अचानक हमारे सामने से एक पालतू मृत पशु से गिद्धों का एक बड़ा झुंड उड़ा। पूरे राष्ट्रीय गोविंद वन पशु बिहार के इस आरक्षित वन क्षेत्र के भ्रमण में हमें आश्चर्य जनक रूप में ये पहले वन्य जीव दिखाई दिये। थोड़ा आगे बढ़े तो अचानक एक बड़ा बरसाती नाला हमारे रास्ते को निगला हुआ नजर आया। उसे पार करना थोड़ा कठिन था लेकिन पहले अरविंद धस्माना फिर मैंने और तनु जोशी तथा गणेश काला ने उसे पार किया। टीम लीडर रतन असवाल ने जंगल में बिना कोई जोखिम लिये ऊपर बने रास्ते से चलने की हिदायत दी।

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पूरे जंगल में एक बात जो हम देख और समझ पा रहे था वो ये थी की जगह-जगह टूटे पेड़ जहाँ-तहाँ पड़े सड़ रहे थे। इन पेड़ों को अगर यहाँ के ग्रामीणों को घर बनाने के लिये दे दिया जाये तो इस वन संपदा का सदुपयोग हो जाता। लेकिन जंगल का तो काला कानून ठैरा सड़ जाये मगर जंगल का माल जंगल में ही रहना चाहिए। यही कारण है जो ग्रामीण अपनी इस जरूरत के लिये और तरीके अपनाने को मजबूर हैं।

उतरती ढलान भरे रास्ते से अब मिशरी गाँव और भीतरी गांव की छानीयां नजर आने लगी। हरे-भरे पहाड़ी खेतों-बगीचों में काम करते लोग। जंगल को चरने के लिये जाते पालतू पशुओं के झुंड पहाड़ी ग्रामीण समाज की अदभुत छट्टा पेश कर रहे थे। हर कोई रास्ते का अंजान ग्रामीण भी प्रणाम कर हमारा अभिवादन कर रहा था। खेती-बाड़ी के औजारों से सुसज्जित मेरे इस पहाड़ के ये अन्नदाता अपने महान उपक्रम पर गतिशील थे। खामोश जंगल से निकल इस मानवीय शौरगुल का एहसास बार-बार मोबाइल नेटवर्क की आस जगा रहा थे लेकिन अंबानी के जीयो से लेकर भारत सरकार के बीएसनएल के सिग्नल तक यहाँ से नदारद थे। देश में मेक इन इंडिया से लेकर बुलेट ट्रेन तक दावों से कोसों दूर हम बिना बिजली के सुदूर पहाड़ के इस ग्रामीण परिवेश में भीतरी गाँव की तरफ बढ़ रहे थे।

सबको बराबर समझने के लिये मैं हर बार हमराही बदल बदल कर चल रहा था। मैं अब भाई अरविंद धस्माना की मीठी बातचीत के सुनते हुए चल रहा था। भीतरी गांव से ठीक पहले राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों के सेब बगानों में बने हिमांचल शैली के ताजा-तरीन बंगले भी इस पिछड़े क्षेत्र पर हो रहे अतिक्रमण की दुहाई दे रहे थे। भितरी गाँव पंहुचे तो ग्रामीण बूढ़ी औरतों ने हम से बुखार की दवा मांगी जो हमारे पास नहीं थी तो उन्होंने फिर कान दर्द और पेट दर्द की दवा मांगी। फिर धिरे-धिरे मामला समझ आया की ये बदहाल पड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते यहाँ आने वाले पर्यटकों से दवाओं के मिलने का सहारा रखते है जो बुरे वक्त में इनके काम आ जाती है।

अंततोगत्वा सड़क पर पंहुचे तो एक छोर पर सामान और अन्य साथियों के साथ रतन असवाल नजर आये। उन्होंने मुझे फोन द्वारा मोरी से गाड़ी मंगवाने के लिये कहा। दोपहर के लगभग एक बजे तक गाँव की सभी गाड़ीयां मोरी जा चुकी थी जो शाम ढ़लते ही वापस गांव लौटती थी। हमारे फोन पर बीएसनएल का कनेक्शन होने बावजूद नेटवर्क नही आ रहा था, तो मुकेश बहुगुणा ने मुझे हिदायत दी की थोड़ी दूर पर स्थित सरकारी स्कूल में जाकर वहां अध्यापकों से इस बाबत कुछ मदद ले ली जाये। भारी थकान के बावजूद वस्तु स्थिति के मध्यनजर मैं तुरंत उनके साथ स्कूल के लिये चल पड़ा। ऐसे दूरस्थ क्षेत्र मे सरकारी स्कूल विदेश में फंसे आदमी के लिये भारतीय दूतावास से कम नहीं होते। अंजान जगह में यह काफी राहत देय होता है।वहां पंहुच कर एक अध्यापक के फोन से मैंने मोरी से अपने स्थानीय साथी अमर सिंह से तत्काल दो गाड़ीयां भेजने का अनुरोध किया। पांच मिनट बाद फोन पर अमर सिंह ने दो यूटीलटी टैक्सीयां भेजने की सूचना भेजी तो राहत महसूस हुई। लगे हाथ अपने-अपने घर पर फोन कर खैरियत जान हम वापस अन्य साथियों के पास लौट गये।

टैक्सीयों के आने में लगभग दो घंटे का समय बाकी था। हम गाँव की सड़क के एक छोर पर गाड़ी की प्रतीक्षारत मुसाफ़िरों की तरह बैठे थे। मैं इस गाँव में पहले भी एक बार रतन असवाल और सुभाष तराण के साथ आया था। हम नौजवान साथी सकलचंद के घर रूके थे जो आज गांव में नहीं था।यहाँ के बदइंतजाम हालात पर हमने तब भी काफी कुछ लिखा था। रतन भाई ने तो शासन में लड़-झगड़ कर यहाँ लाइट पंहुचाने के लिये जोर दिया था। अब यहाँ आये हैं तो गाँव में बिजली के कुछ नये खंभे गड़े दिखाई दिये हैं। इन खंबों पार तारों का झूलना और बिजली दौड़ना अभी दूर की कौड़ी साबित जान पड़ता था। जबकि ठीक सामने नदी के उस पार हिमांचल के गाँव रात को बिजली की रोशनी से चमचमाते नजर आते थे। खैर “किस की माँ को मौसी बोलें” वाले एहसास से पहाड़ के ये गाँव वाफिक थे।

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थोड़ी देर बाद स्कूल के एक अध्यापक कृष्ण कुमार शाह हमारे पास आये और घर में चलकर चाय-पानी पीने का अनुरोध किया। उनका घर गाँव के सबसे ऊपरी छोर पर था और सब बहुत थके थे तो सब ने ठीक है, ठीक है, कोई बात नहीं जैसे जवाबों से ससम्मान मना करा दिया। अंततः मैंने और मुकेश बहुगुणा तथा अरविंद धस्माना ने गुरूजी के साथ चलने का फैसला किया।

भीतरी इस इलाके का काफी बड़ा गाँव है। लोक मान्यताओं के अनुसार ये यौद्धाओं का गाँव है, जिन्हें स्थानीय भाषा में खूंद कहा जाता है। विश्व के महान भारतीय रेसलर द ग्रेट खली के पूर्वज भी कभी इसी गाँव से हिमांचल में बस गये थे। जो आज भी इसी गाँव के अराध्य ग्राम देवता सैड़कुडिये महाराज को कुल देवता के रूप में पूजते हैं। गाँव के भवन पत्थर और लकड़ी की नकाशेदार शैली की स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने थे। कृषी एवं पशु-पालन, के साथ भेड़ की ऊन के कुछ बुनकर परिवार भी थे। जिन्हें यहाँ किनौर हिमांचल से बसे होने कारण किनौरी कहा जाता है।

सरकार की तमाम दुश्वारियों के बावजूद ये गाँव शून्य पलायन वाला गाँव था। यही एक कारण “पलायन एक चिंतन” दल के हमारे साथियों को बार-बार शोध हेतु टौंस और यमुनाघाटी के इन गाँवों में खींच लाता है। हम यहाँ आकर ये समझने की कोशिश करते है की आखिर वो कौन सी ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था है जो यहाँ से शून्य पलायन का मुख्य कारण है। इस समाधान की तरफ हमने काफी कुछ ठोस कारणों के दस्तावेज तैयार किये हैं जो हमारे इस राज्य के पलायन से बंजर हो चुके गांवों के लिये भविष्य में संजीवनी साबित होगें। हमारी लोक-कला-संस्कृति से फलीभूत यह गाँव हमेशा हरा-भरा रहे, यही हमारी ईश्वर से कामना रहेगी।

काफी ऊपर गाँव में मंदिर के पास एक दुकान से हमने नकली मैगी के 10-15 पैकट लेकर गुरूजी के कमरे में गाँव वालों के सहयोग से बड़े पतीले में मैगी तैयार करायी। गुरूजी के कमरे में सुसज्जित देवदार के पलंग पर पैर लंबे कर हमने थकान मिटाते हुऐ चाय की चुस्कियों का आनंद उठाया। गुरूजी से परिचय बढ़ाया तो पता चला वे उत्तरकाशी के रहने वाले तथा मेरे बचपन के सहपाठी दोस्त रमेश शाह के बड़े भाई हैं। काफ़ी देर होने के कारण हमारा गाइड सुरेन्द्र हमें ढूंढता हुआ वहीं पंहुच गया। उसने बताया की रतन भाई ने जल्दी नीचे सड़क पर बुलाया है। हम भी सबके लिये फटाफट मैगी बाल्टी में भर सड़क की तरफ तेजी से चल पड़े।

आसपास के घरों से थालीयां मंगवाकर और पत्यूड़ के पत्तों पर सभी साथियों को मैगी का भंडारा खिला कर सबका साधुवाद प्राप्त किया। लगभग शाम के 4 बज चुके थे लेकिन हमारी गाड़ीयों का कोई पता नहीं था। अंततः हमने बारिश की संभावना के मध्यनजर अभी अभी गाँव में पंहुची एक यूटीलीटी गाड़ी को मोरी जाने के लिये बुक किया। सारा सामान पीछे डालकर गाड़ी की छत और अंदर सीटों पर जगह बना ली। लगभग 6 किलो मीटर चलने के बाद हमें हमारी दोनों यूटीलीटी गाड़ीयां सरपट चढ़ाई पर चढ़ती नजर आयी। जिन्हें रूकवाकर हमने सारा सामान उनमें शिफ्ट करते हुऐ नैटवाड़ से मोरी पंहुच गये। अश्वमार्ग से भी बदहाल सड़क पर मोरी आते आते रात हो गयी थी।

लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाऊस से हमने अपने इस पैदल अभियान के गाइड सुरेन्द्र और पोटर जुनैल को नियमित भुगतान कर विदाई ली। वहां पहले से खड़े मुकेश बहुगुणा के नीजी वाहन तथा एक और अन्य लोकल टैक्सी से हम सब कुकरेड़ा-तलवाड गाँव के लिये निकल पड़े।

त्यूणी के निकट टौंस नदी के ठीक किनारे बसे इस तलवाड़ गाँव में जब हम पंहुचे तो “पलायन एक चिंतन” के साथी और ग्राम प्रधान चत्तर सिंह ने स्थानीय वादय यंत्रों से गांव वासियों के साथ हमारा खूब गर्मजोशी से स्वागत किया। यहां पहले से मौजूद हमारे अजीज साथी अखिलेश डिमरी और विनय केडी, समय साक्ष्य प्रकाशन के प्रवीण भट्ट से मिलकर खुशी का ठिकाना ना रहा। ये सभी साथी आज ही देहरादून से यहां कल आयोजित होने वाली गोष्ठी में शामिल होने को पंहुचे थे।

मैने रात को गर्म पानी से नहाकर खुद को तरोतजा किया। सभी घासखारीयों को साग-सब्जी और मांसभक्षीयों को मीट-भात खिलाया गया। यात्रा के अनुभवों पर बातचीत करते हुऐ हम सब गर्म और नर्म बिस्तर के अंदर दुबक कर गहरी नींद में डूब गये।

पद्मावती का पहला गाना रिलीज

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संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ का पहला गाना आज रिलीज कर दिया गया। राजस्थानी शैली के इस गाने के बोल घूमर हैं, इसे श्रेया घोषाल के साथ राजस्थानी गायक स्वरुप खान ने गाया है और इसे एक विशाल महल के भव्य सेट पर दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर पर फिल्माया गया है। इसे खुद संजय लीला भंसाली ने संगीतबद्ध किया है।

बताया जाता है कि राजस्थान की परंपराओं में घूमर गाना तब गाया जाता है, जब कोई नई दुल्हन पहली बार अपनी ससुराल आती है। फिल्म की टीम का कहना है कि अभी फिल्म के तीन और गानों की झलक आएगी, जिसमें एक गाना दीपिका और शाहिद का रोमांटिक गाना होगा।

फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज होने जा रही है। दीपिका इस फिल्म में रानी पद्मावती के रोल को निभा रही हैं, जबकि उनके पति महाराज रतन सिंह के रोल में शाहिद कपूर हैं। अलाउद्दीन खिलजी के रोल में रणबीर सिंह और उनकी पत्नी के रोल में अदिति राव हैदरी हैं।

गोलमाल 5 में होगी करीना की वापसी

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दीवाली पर रिलीज हुई रोहित शेट्टी की फिल्म ‘गोलमाल अगेन’ इस वक्त कामयाबी की धूम मचा रही है। इस कामयाबी का जश्न मना रही ‘गोलमाल’ की टीम की ओर से इसकी पांचवी कड़ी बनने के संकेत भी अब साफ तौर पर मिलने लगे हैं। खास तौर पर निर्देशक रोहित शेट्टी ने स्पष्ट कह दिया है कि इस सीरिज की पांचवी कड़ी पर जल्दी काम शुरु होगा।

रोहित शेट्टी ने ये भी संकेत दिया है कि ‘पांचवी गोलमाल’ में करीना कपूर की भी वापसी होगी। करीना कपूर ने इस सीरिज की दूसरी और तीसरी कड़ियों वाली फिल्मों में काम किया था। कहा जाता है कि गर्भवती होने की वजह से करीना ने ‘गोलमाल’ की चौथी कड़ी का हिस्सा बनने से मना कर दिया था, तो परिणीती चोपड़ा को इस टीम में शामिल किया गया। अब रोहित शेट्टी कह रहे हैं कि हम सबने ‘गोलमाल अगेन’ में करीना कपूर को बहुत मिस किया और हम अगली कड़ी में उनको टीम में वापस ले आएंगे।

रोहित शेट्टी ने ‘गोलमाल 5’ के बारे में इससे ज्यादा कुछ नहीं बताया है, लेकिन उनकी टीम की ओर से संकेत मिला है कि 2019 में दीवाली पर ‘गोलमाल 5’ आ सकती है। अभी रोहित शेट्टी को रणबीर सिंह के साथ नई फिल्म शुरु करनी है, जो एक एक्शन पैक फिल्म होगी और अगले साल फरवरी में शुरु हो जाएगी।

गजिनी गर्ल असिन बनीं बेटी की मां

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हाल ही में बालीवुड की कई हीरोइनों ने बतौर मां अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत की है। सोहा अली खान ने कुछ दिनों पहले बेटी को जन्म दिया, तो हेमा मालिनी की बेटी ईशा भी हाल ही में बेटी की मां बनी हैं। अब बालीवुड से लेकर साउथ तक की फिल्मों की दिग्गज एक्ट्रेस भी मां बनी हैं।

आमिर खान के साथ गजनी और अजय देवगन के साथ बोल बच्चन जैसी फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री असिन थोट्टूमकल ने कल पहली संतान के रुप में एक बेटी को जन्म दिया। असिन के पति राहुल शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपने परिवार की नई मेहमान की खुश खबरी दुनिया के साथ शेयर की, तो उनको बधाई देने वालों का तांता लग गया।

असिन के करीबी दोस्तों में माने जाने वाले अक्षय कुमार पहले बालीवुड सितारे बने, जो असिन की बेटी से मिलने पंहुचे और अक्षय ने सोशल मीडिया पर फोटो भी शेयर किए। असिन और दिल्ली के बड़े कारोबारी राहुल शर्मा की शादी 16 जनवरी 2016 को दिल्ली में हुई थी। इस शादी में भी बालीवुड की ओर से अक्षय कुमार शामिल हुए थे।

शादी से इंकार किया तो शुरू कर दी बदसलूकी

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राजपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल की स्टॉफ नर्स ने एक युवक पर गाली गलौज कर मारपीट और बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक एक युवती निवासी पौड़ी गढ़वाल राजपुर रोड स्थित एक अस्पताल में स्टॉफ नर्स हैं। पुलिस के मुताबिक उसकी रूपेंद्र नाम के एक लड़के से जान-पहचान थी। दोनों आपस में दोस्त हैं। बताया जा रहा है कि पीडि़ता की शादी तय हो चुकी है। इसलिए अब उसने रूपेंद्र से बातचीत करनी बंद कर दी है। जबकि रूपेंद्र उस पर शादी करने का दबाव बना रहा है।

पुलिस के मुताबिक विगत दिनों रूपेंद्र ने पीड़िता को मिलने के लिए राजपुर रोड स्थित अस्पताल के पास बुलाया और शादी के लिए दबाव बनाने लग गया। पीड़िता ने जब शादी करने से मना किया तो आरोपी ने उसके साथ गाली गलौज, मारपीट और बदसलूकी की। मंगलवार रात को पीड़िता ने राजपुर थाने में इसकी शिकायत की। चौकी इंचार्ज जाखन उमेश कुमार ने बताया कि तहरीर के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अतिक्रमण से सड़कों पर जाम, आमजन परेशान

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रुड़की, अतिक्रमण के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद प्रशासन और नगर निगम गहरी नींद में सो गया है। अतिक्रमणकारियों ने बाजार से लेकर शहर की सड़कों पर फिर से अतिक्रमण करना शुरू कर दिया है।

शहर में पिछले दिनों नगर-निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम की ओर से मुख्य बाजार, बीटी गंज, सिविल लाइंस, अनाज मंडी, रामनगर आदि स्थानों में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस दौरान सड़कों पर स्थाई और अस्थाई दोनों ही तरह के अतिक्रमण ध्वस्त करने के साथ ही अतिक्रमणकारियों को भी भविष्य में अतिक्रमण न करने की हिदायत दी गई थी लेकिन, अतिक्रमणकारियों ने फिर से कब्जा जमा लिया।

अतिक्रमण से सड़कें तंग होने के कारण जहां दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया, वहीं शहर के बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन चालक सड़कों पर ही अपने वाहन खड़े करने को मजबूर हैं। शहर में अतिक्रमण और जगह-जगह पार्किंग होने के कारण अधिकांश समय यहां जाम की स्थिति बनी रहती है। इस कारण खरीदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

मजिस्ट्रेट निकिता खंडेलवाल ने बताया कि, “जल्द ही शहर में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। अतिक्रमणकारियों को प्रशासन और नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं।”

प्रधानमंत्री के मसूरी दौरे के चलते ट्रैफिक डायवर्ट प्लान

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प्रधानमंत्री भारत सरकार के लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, मसूरी आवागमन के दौरान यातायात डायवर्ट प्लान: –

1. जीरो बैण्ड से उपर मसूरी एलबीएस की ओर कोई भी पर्यटक वाहन एवं व्यवसायिक वाहन नही जायेगा। स्थानीय लोग आवागमन कर सकेगें।
2. किंक्रेग से लाईब्रेरी चैक से जीरो बैण्ड से एलबीएस तक सड़क पर कोई भी वाहन पार्क नही किया जायेगा।
3. पोलो ग्राउण्ड से एलबीएस तक सम्पूर्ण मार्ग पर कोई भी वाहन पार्क नही होगा।
4. कैम्पटी फाॅल में गये हुए पर्यटकों को विकासनगर होते हुए भेजा जायेगा।
5. मसूरी रूट पर समस्त भारी वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेंगे।
6. किंग्रेग से जीरो बैण्ड तक कोई भी वाहन मार्ग पर पार्क नही होगा। मार्ग पर पार्क वाहनों को हटाकर पार्किंग स्थलों पर भेजा जायेगा।
7. देहरादून शहर के भीतर भी भारी वाहनों का संचालन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा।
8. कटींजेन्सी रूट जाॅलीग्रान्ट से एलबीएस तथा जीटीसी से एलबीएस तक समस्त भारी वाहनों का आवागमन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा।

पर्यटकों एवं सम्बन्धित क्षेत्र के निवासिंयों एवं मार्गो का प्रयोग करने वाले वाहन चालको से अनुरोध है कृपया अपने गन्तव्य स्थान तक पहुंचने एवं किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गाेंका प्रयोग करें। अपने वाहनों को वीआईपी के मार्ग पर पार्क न करें। कृपया व्यवस्था बनाने के लिए जनपद पुलिस को अपना सहयोग प्रदान करें।

औली से भारतीय नौ सेना का साइकिल अभियान दल हुआ रवाना

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गोपेश्वर। पर्वतारोहरण एवं स्कीइंग संस्थान जोशीमठ से बुधवार को भारतीय नौ सेना का साइकिल अभियान दल को आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान दल 600 किमी की यात्रा तय कर देहरादून पहुंचेगा। जहां इसका समापन किया जाएगा।
बुधवार को चमोली जिले के जोशीमठ के औली से नौ सेना का साइकिल अभियान शुरू हुआ। जिसको हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए आईटीबीपी के उप महानिरीक्षक गंभीर सिंह चैहान ने अपनी शुभकामनाएं दी। अभियान दल के कंमाडर गुरुप्रताप सिंह ने बताया कि नौ सेना के इस अभियान को औली से प्रारंभ करने का मुख्य कारण यह है कि औली अपने आप में लोगों को साहसिक कार्यों के लिए प्रेरित करता है।
साथ ही औली में स्थापित सेना का पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान जो साहसिक खेलों के लिए जाना जाता है और यहां से कई अभियान दलों ने सफलता हासिल की है। साथ इसके पीछे एक और मकसद यह भी है कि दूर दराज के लोगों को नौ सेना के बारे में भी जानकारी मिले ताकि युवा इससे प्रेरित होकर नौ सेना में भर्ती होने के लिए आगे आयें। इस मौके पर डॉ. महेंद्र कुमार, सहायक सेनानी नरेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे।

31 अक्टूबर से फिर श्रीहरि के हाथों होगी सृष्टि की सत्ता

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दीपावली के पश्चात सबसे बड़ा पर्व देवोत्थान एकादशी होता है। प्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देवोत्थान एकादशी के साथ ही चार माह से भगवान शंकर के हाथों से संसार की सत्ता भगवान विष्णु के हाथों आ जाती है। देवोत्थान एकादशी को देव दीपावली भी कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार 31 अक्टूबर को देवउठनी एकादशी है, लेकिन 13 अक्टूबर से देवगुरु बृहस्पति पश्चिामास्त हैं, जो कि देवउठनी एकादशी के सात दिन बाद 7 नवम्बर को पूर्व दिशा में उदित होंगे और आगामी तीन दिन बाल अवस्था में रहने के बाद 10 नवम्बर को बालत्व निवृत्ति होगी। 16 नवम्बर को सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। इन समस्त दोषों की निवृत्ति के पश्चात 19 नवम्बर से शादियों की शुरुआत होगी। वैसे देव उठनी एकादशी को किसी मुहुर्त की जरूरत नहीं होती। देवोत्थान एकादशी स्वंय सर्वार्थ सिद्धि योग होता है। देवोत्थान एकादशी के साथ चार माह से बंद पड़े मंगल कार्यों की भी शुरुआत हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार इस साल नवंबर में 19, 22, 23, 24, 28, 29 और 30 नवम्बर को विवाह के विशिष्ट मुहूर्त हैं। दिसम्बर में 3, 4, 10, 11 और 12 दिसम्बर को विवाह मुहूर्त बन रहे हैं। 15 दिसम्बर से 14 जनवरी, 2018 तक मलमास रहेगा। मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होते हैं, किंतु इस बार जनवरी में कोई मुहूर्त नहीं है। 22 जनवरी को बसंत पंचमी को देवलग्न होने के कारण विवाह आयोजन कर पाएंगे, लेकिन लग्न शुद्धि के शुभ मुहूर्त फरवरी में ही मिलेंगे। फरवरी में 4, 5, 7, 8, 9, 11, 18 और 19 तथा मार्च में 3 से 8 और 11 से 13 मार्च को शादियों के मुहूर्त हैं।

देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी विवाह का भी शास्त्रों में वर्णन है। इसे तुलसी विवाह एकादशी भी कहा जाता हैै। मान्यतानुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन तुलसी जी और विष्णु जी का विवाह कराने की प्रथा है। तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम पाषाण का पूर्ण वैदिक रूप से विवाह कराया जाता है। ये त्योहार दिवाली के 11 दिन बाद मनाया जाता है और इस वर्ष तुलसी विवाह का शुभ दिन 31 अक्टूबर को है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी शालिग्राम विवाह कराने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन नए चावल, रुई, शकरकंद, सिगाड़ा, बेर, गन्ना, आंवला आदि का दान देना विशेष फलदायी होता है।

एकादशी व्रत के सबंध में जोशी के अनुसार एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यांसियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। 

जल प्रजाति संरक्षण के लिये डब्लूआईआई देगा ट्रैनिंग

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वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्लूआईआई) आने वाले दिनों में उत्तराखंड समेत अन्य राज्योें के वन कर्मियों को नदियों में पाये जाने वाले जीवों के संरक्षम के लिये ट्रेनिंग देगी। गौरतलब है कि  केंद्र सरकार के नेशनल मिशन फॉर गंगा क्लीनिंग ने डब्लूआईआई को गंगा और उसकी सहायक नदियों में मिलने वाले जल जीवों के संरक्षण के लिये प्लान बनाने का जिम्मा दिया है। इसी के तहत संस्थान उत्तराखंड के साथ साथ उत्तरा प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन कर्मियों और अधिकारियों को ट्रैनिंग देगा।
संस्थान के मुताबिक इस ट्रैनिंग में खासतौर पर जल प्रजातियों जैसे कि डोलफिन, घड़ियाल, कछुओं के संरक्षण करने के लिये सही करीके सुखाने पर ज़ोर रहेगा। इसके साथ साथ सभी अधिकारियों को मध्यप्रदेश के चंबल राष्ट्रीय पार्क ले जाया जायेगा। ये पार्क लुप्त होने की कगाप पर पहुंचे चुके जल जीवों के संरक्षण का हब माना जाता है। केंद्र सरकार ने 25 करोड़ के इस प्रॉजेक्ट को पिछले साल डब्लूआईआई को दिया था।

संस्थान के निदेशक वीबी माथुर कहते हैं कि, ”अभी डब्लूआईआई ने जल्द ही एक प्रोजेक्ट बायोडायर्वसिटी कन्जरवेशन एंड गंगा रिजुविनेशन नाम से चलाया है जिसके स्पॉंसर मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिर्सोसेस,रिवर डेवलेपमेंट और गंगा रिजुविनेशन हैं।” उन्होंने कहा कि, “इस प्रोजेक्ट की मुख्य बात है स्टेकहोल्डरों में क्षमता बढ़ाना,जिसेक अंर्तगत अलग-अलग डिर्पाटमेंट के ऑफिसर जैसे कि फॉरेस्ट,फिशरी,एग्रीकल्चर,ईरिगेशन और रुरल डेवलपमेंट जैसे विभागों को ट्रेनिंग दी जा रही, जिसके माध्यम से एक्वेटिक बायोडायर्वसिटी का संरक्षण स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ किया जा सके।”

इसके अलावा वीबी माथुर ने कहा कि, “ग्राम पंचायत की मदद से “गंगा प्रहारी या गंगा की सुरक्षा के लिए युवाओं” की पहचान की जा रही है,जिनकी मदद से पानी में रहने वाले जीव विशेषकर डॉल्फिन, कछुओं, मगरमच्छ आदि से जल संरक्षण, उनका बचाव और पुनर्वास में मदद की जा रही है।”