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बेटी की पुकार: उन्हें भी मिले अधिकार

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रुद्रपुर। होली चाइल्ड स्कूल में हुए वार्षिकोत्सव स्पंदन. द बीट्स के मौके बच्चों द्वारा प्रस्तुत बेटी की पुकार नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर मौजूद लोगों के मन को झकझोर दिया। उन्होंने दिखाया कि कन्या भ्रूण हत्या कानून से नहीं बल्कि समाज का नजरिया बदलने से थमेगी। बताया कि कानून भले ही कितना भी कड़ा क्यों न हो। समाज बेटे और बेटी को एक नजर से नहीं देखेगा। दोनों को बराबर स्नेह सम्मान और अवसर नहीं देगा, तब तक लड़कियों का गर्भ में यूं ही कत्ल होता रहेगा।

बच्चों ने नाटक के जरिए बताया कि जहां जैन एवं वैदिक शास्त्रों में सौभाग्यवती पतिव्रता नारी तथा कुमारी कन्याओं को महान पवित्रता तथा व्यवहारिक मंगल का प्रतीक माना गया है, वहीं वैदिक पुराणों में भी नारी को देवी के रूप में स्वीकार किया गया है। मनुस्मृति में तो यहां तक कह दिया है कि, एक आचार्य दस अध्यापकों से श्रेष्ठ हैं, एक पिता सौ आचार्यों से श्रेष्ठ है और एक माता एक हजार पिताओं से श्रेष्ठ है। इतनी सारी विशेषताओं से समन्वित एक समाज अब अपनी स्वाभाविक ममता का गला घोंटकर गर्भपात जैसे क्रूर कर्म की ओर आगे बढ़ता है तब उसे वर्तमान युग में क्या संज्ञा प्रदान की जाए, इसके बारे में आप स्वयं चिंतन करें। आज विश्व में 10 से 15 प्रतिशत विवाहित जोड़े सन्तानहीन हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों से यह ज्ञात हुआ है कि सन्तानहीनता की यह व्याधि दिनों दिन तेजी से बढ़ रही है तथा दूसरी ओर गर्भपात का प्रचलन भी तेजी से बढ़ रहा है जो हमारे लिए लिए सबसे अधिक विचारणीय विषय बन गया है।

जैसे जैसे विज्ञान प्रगति कर रहा है, मानव के विचार व व्यवहार पतन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मानव मानव का भक्षक वैसे बन सकता है यह तथ्य गर्भपात करवाने की इच्छा से ही स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज बेटी बेटों से कम नहीं हैं। जहां वह घर की देखभाल करती हैं, वहीं देश की रक्षा के लिए भी शरहद पर तैनात है। हमें आज अपनी सोच बदलनी होगी, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब शादियों के लिए लड़कियां नहीं बचेंगी।

बच्ची पर खौलता पानी फेंकना अमानवीयः रेखा

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देहरादून। बाल एवं महिला विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने शिशु निकेतन मामले में बाल आयोग की सक्रियता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि अगर बाल आयोग रिपोर्ट पर मुख्य सचिव को आदेश नहीं देता तो शायद शिशु निकेतन प्रकरण नजरों में नहीं आता। साथ ही उन्होंने शिशु निकेतन में व्यवस्थाओं को सख्त और जवाबदेही बनाने पर जोर दिया।

शुक्रवार को एक कार्यक्रम से इतर राज्यमंत्री रेखा आर्य ने शिशु निकेतन प्रकरण पर पूछे सवाल पर कहा कि चार वर्ष की छोटी बच्ची पर गरम पानी फेंकना अमानवीय घटना है। साथ ही पीड़ित बच्ची का इलाज न कराना और भी शर्मनाक है। करीब तीन साल से घटना का किसी को पता न लगने पर भी उन्होंने हैरानी जताई। उन्होंने शिशु निकेतन की व्यवस्थाओं में पाई तमाम खामियों को भी गंभीर माना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने उक्त प्रकरण में बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी के हस्तक्षेप को सराहा। उन्होंने कहा कि अगर आयोग अपर सचिव की रिपोर्ट पर तुरंत संज्ञान नहीं लेता तो शायद मामला दबकर रह जाता।
गौरतलब है कि समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन अपर सचिव ने बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी को शिशु निकेतन प्रकरण के संबंध में गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी। इस गोपनीय रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए खंडूड़ी ने तुरंत मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए। जिसके बाद मामला उजागर हो पाया था। आयोग के अध्यक्ष की ओर से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को उक्त प्रकरण की भेजी रिपोर्ट में भी इस गोपनीय रिपोर्ट का उल्लेख है। कहा गया कि अपर सचिव ने उक्त जांच रिपोर्ट को सरकार को भी भेजा था। लेकिन संज्ञान नहीं लिया गया। इसके बाद उन्होंने आयोग को गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी।

22 लाख परिवारों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएगी सरकार

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देहरादून। राज्य सरकार कम आय वाले परिवारों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करने की योजना तैयार कर रही है। यह बात शुक्रवार को प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 22 लाख परिवारों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा का लाभ देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस दायरे में उन परिवारों को शामिल किया जाएगा जिनकी सालाना आय पांच लाख से कम है। उन्होंने यह बात भी स्वीकार की है कि सूबे की आधे से अधिक आबादी स्वास्थ्य सुविधाआें के लिए प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर है। एेसें में सरकारी अस्पतालों में सुविधाआें में और इजाफा किया जा रहा है ताकि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही इलाज की उचित सुविधा मिल सके।

यह बात प्रकाश पंत ने मैक्स अस्पताल में डे केयर सर्जरी का शुभारंभ करते हुए कही। इस प्रक्रिया में मरीज सर्जरी के 24 घंटे के अंदर घर वापस जा सकते हैं। काबीना मंत्री ने अस्पताल के इस प्रयास की सराहना की। अस्पताल के सीनीयर कंसलटेंट डॉ मोहम्मद आतिख खान ने बताया कि डे केयर सर्जरी आधुनिक तकनीक है। इसका लाभ मरीजों को मिलेगा। मरीज सर्जरी के बाद चौबीस घंटे के अंदर ही अपने घर वापस लौट सकता है। इस तरह की शल्यक्रिया में शरीर के प्रभावित हिस्से पर छोटा चीरा लगाया जाता है। इससे खून का ज्यादा बहाव भी नहीं होता और दर्द भी नहीं। साथ ही मरीज पर खर्च का बोझ भी कम पड़ता है। अस्पताल के वाइस प्रेसीडेंट डॉ संदीप सिंह तंवर, मैक्स इंस्टीट्यूट आफ न्यूरो साइंसेज के चेयरमैन डॉ एके सिंह आदि भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यूपीसीएल समेत तीनों निगमों में नई भर्ती पर रोक

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देहरादून। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) समेत तीनों निगमों में नई भर्ती पर रोक है और यूपीसीएल रिक्त अधिकांश पद फील्ड कार्मिकों के हैं, लेकिन फिर भी यूपीसीएल प्रबंधन मुख्यालय में एक और आलीशान बिल्डिंग बना रहा है। इस पर करीब एक करोड़ से भी ज्यादा का खर्च आएगा। घूम-फिरकर यह पैसा भी उपभोक्ताओं से वसूला जाना है क्योंकि प्रबंधन वार्षिक राजस्व रिपोर्ट में इस खर्च को शामिल करेगा, जिसके हिसाब से ही बिजली की दरों में वृद्धि होती है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर ये बिल्डिंग किसके लिए और क्यों बनाई जा रही है। इसके अलावा भी पिछले छह महीने में बड़े पैमाने पर फिजूलखर्ची हुई है और शायद ही उपभोक्ताओं के हित में कोई काम हुआ हो।

वहीं, यूपीसीएल का पक्ष रखते हुए मुख्य अभियंता एवं प्रवक्ता एके सिंह का कहना है कि कक्षों की कमी महसूस की गई तो मुख्य भवन के ऊपर एक बिल्डिंग बनाई जा रही है। अब कितने कक्षों की कमी है या कितने कर्मचारियों को कक्षों से बाहर बैठकर काम करना पड़ रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं और हकीकत में ऐसा है भी नहीं। खैर, सवाल उठने इसलिए भी लाजिमी हैं, क्योंकि उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाएं और सेवाएं दोयम दर्जे की हैं। बिल संग्रह केंद्रों की कमी और केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव की वजह से ऊर्जा निगम पर वर्ष 2005 से रोजाना ढाई हजार रुपये का जुर्माना लग रहा है। यह रकम एक करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। सूबे में कुल 160 बिल संग्रह केंद्र हैं, जबकि उपभोक्ता हैं 20 लाख। निगम ने केंद्रों पर शेड, पेयजल, पंखे-कूलर, टॉयलेट, बैठने आदि का समुचित प्रबंध करने के लिए 11 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तो बनाई है लेकिन अभी शायद ही कहीं कोई सुविधा दी गई हो। इसके अलावा कनेक्शन लेने से लेकर तमाम सेवाओं और शिकायतों के निस्तारण के लिए उपभोक्ताओं को कितनी फजीहत झेलनी पड़ती हैं, ये बात भी किसी से छिपी नहीं है।

पलायन को रोकने को पतंजलि बड़ी पोखरी में तैयार कर रहा कृषि मॉडल

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हरिद्वार। उत्तराखंड से पलायन को रोकने, उत्तराखंडवासियों के जीवन को बेहतर बनाने एवं प्रांत के कृषक समाज को उनकी सीमाओं में कृषि उत्पाद तैयार करा उसे आर्थिक समृद्धि दिलाने के संकल्प के साथ पतंजलि योगपीठ अपने विविध केंद्रों पर विशेष कृषि मॉडल विकसित कर रहा है। इन कृषि माडलों का उत्तराखंड की हस्तियों से लेकर देश-विदेश विशिष्ट कृषि वैज्ञानिकों का दल अवलोकन करने पहुंच रहा है।

इसी क्रम में जैविक कृषि एवं वातावरण परिशोधन पर कार्य कर रहीं डाॅ. वदना शिवा अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, जापान, इंडोनेशिया, कोरिया के विशिष्ठ वैज्ञानिकों के दल के साथ पतंजलि के बड़ी पोखरी के विशेष कृषि मॉडल केंद्र पहुची। उन्होंने वहां तैयार किए गए नींबू, मिर्च, आडू, खूबानी, पल्म, सफेद चन्दन के सैकड़ों पेड़ों का अवलोकन किया और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण से मुलाकात कर जैविक कृषि एवं उत्तराखण्ड के पलायन से जुड़ी समस्याओं पर अनेक जिज्ञासाओं का समाधन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के पलायन को रोकने के लिए पतंजलि बड़ी पोखरी में तैयार हो रहे इस कृषि मॉडल से किसानों में अपनी कृषि के प्रति विश्वास जगाने का अभियान चलाएगा। उन्होंने बताया कि यहां तीन किमी. नीचे से बड़ीपोखरी तक पानी पहुंचाना पतंजलि का विशिष्ट प्रयोग कहा जा सकता है।
आचार्य ने कहा यह उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा ड्रिप ऐरिगेशन कहा जा सकता है। इस विधि से इस परिसर में तैयार सैकड़ों की संख्या में नींबू, मिर्च, आडू, खूबानी, पल्म, सफेद चन्दन आदि के सैकड़ों पेड़ किसानों को समृद्धि की प्रेरणा दे रहे हैं। कहा उत्तराखण्ड का प्रत्येक किसान अपनी भूमि पर विशेष कृषि विधि से खेती करे और अपने को समृद्धशाली बनाये, युवाओं का रोजगार मिले और उत्तराखण्ड से युवाओं का पलायन रुके यही पतंजलि का संकल्प है।

स्कूलों में चार माह से एनसीईआरटी की किताबें मुहैया नहीं करा पाया विभाग

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देहरादून। प्रदेश में क्लास एक से बारह तक शिक्षा विभाग के निर्देशन में चल रहे स्कूलों में अगले सत्र तक किताबें उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा है। दरअसल जुलाई में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने प्रदेश में सभी स्कूलों में एनसीईआरटी का सिलेबस लागू करने और किताबें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद सिलेबस तैयार कर सीएमओ में फाइल पहुंचाई गई लेकिन सीएमओ से अब तक इस मामले में मुहर नहीं लगी है। ऐसे में 4 माह में प्रदेश के सभी स्कूलों के लिए किताबें छापने के लिए टेंडरिंग प्रक्रिया, किताबें छपवाने और स्कूलों को उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती शिक्षा विभाग के लिए खड़ी हो गई है।

नवम्बर में अब तक नहीं शुरू हुई प्रक्रिया 
बता दें कि अब तक प्रदेश में एससीईआरटी किताबें छपवाने का काम करती थी। जिसके लिए प्रक्रिया नवंबर से शुरू हो जाती थी। इसके बाद फरवरी मार्च तक किताबें डिस्ट्रीब्यूट कर दी जाती थी लेकिन इस साल शिक्षा मंत्री ने एनसीईआरटी की किताबें छपवाने के निर्देश दिए हैं। जिससे अब एससीईआरटी ने किताबें छापनी बंद कर दी है। मामला सीएम ऑफिस में लटका पड़ा है, जिसके पास होने के बाद टेडरिंग प्रक्रिया भी होगी। जिसमें एक माह से ऊपर का समय लगेगा। इसके बाद किताबों को छपवाने में भी समय लगेगा। फिर जिलों के माध्यम से स्कूलों को किताबें उपलब्ध होंगी, जो 4 माह में किसी भी सूरत में नहीं हो पाएंगी।
सूत्रों का दावा है कि विभाग को करोड़ों की संख्या में किताबें छपवानी है। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी सीएम कार्यालय से जल्द ही सहमति मिलने की बात कह रहे हैं। साथ ही अप्रैल तक किताबें भी उपलब्ध कराने की बात कर रहे हैं। मामले में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि सीएम कार्यालय से फाइल पर मुहर लगते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अप्रैल तक किताबें हर हाल मेें स्कूलों में उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। 

संजय लीला भंसाली को अब तेजाब फेंकने की मिली धमकी

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संजय लीला भंसाली को फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर अब मेरठ से एक व्यक्ति ने तेजाब फेंकने धमकी दी है। इससे पहले मेरठ से ही एक राजपूत नेता ने संजय लीला भंसाली के सिर काट के लाने वाले को 5 करोड़ की इनामी राशि दिए जाने की बात कही थी।

फिल्म पद्मावती की प्रस्तावित तारीख 01 दिसम्बर जैसे-जैसे नजदीक आ रही है उसको लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे हालात को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने फिल्म पद्मावती में रानी पद्मामवती का मुख्य किरदार निभा रही दीपिका पादुकोण औऱ निर्देशक संजय लीला भंसाली की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

उल्लेखनीय हो राजस्थान की करणी सेना इस फिल्म की शुरुआत से ही विरोध कर रही है। इस क्रम में ही जयपुर में शूटिंग के दौरान निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ हाथापाई तक हुई थी। जिसके बाद से यह संगठन लगातार इसका विरोध करता आ रहा है। करणी सेना के प्रमुख लोकेन्द्र सिंह कल्वी ने 01 दिसम्बर को ‘भारत बंद’ तक का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म किसी हालत में 01 दिसम्बर को रिलीज नहीं होगी।

फिल्म को विरोध का कारण
विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती में अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच ड्रीम सीक्वेंस दर्शाया गया है साथ ही रानी पद्मावती के उपर फिल्माए गए झूमर गाने पर भी आपत्ति जाताई है। उनका कहना है कि राजपूत घराने की महिलाएं पुरुषों के सामने नाच गाना नहीं करती थीं। हालांकि संजय लीला भंसाली ने एक वीडियो के माध्यम से यह साफ कर दिया था कि फिल्म में एेसा कुछ नहीं दिखाया गया। फिल्म में राजपूतों के मान-मर्यादा का पूरा ध्यान रखा गया है।

चालान से बचने के लिए फोडा पुलिस कर्मी का सर

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रुद्रपुर- चालान से बचने के लिए तीन नाबालिग बाइकर्स ने डयूटी में तैनात होमगार्ड पर पत्थर से हमला बोल दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह देख नैनीताल रोड से गुजर रहे एसएसपी डॉ. सदानंद दाते मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तत्काल वायरलेस कर आरोपी बाइक सवारों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। साथ ही घायल होमगार्ड को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

रुद्रपुर में सिविल लाइन रोड से आ रहे तीन नाबालिग बाइक सवार को गज्जन सिंह ने रोक लिया और चाबी निकाल दी। इसके बाद तीनों नाबालिगों जैसे तैसे बाइक स्टार्ट कर मौके से चलते बने। बताया जा रहा है कि इसके करीब 15 मिनट बाद तीनों नाबालिग बाइक से वापस आए और परशुराम चौक पर डयूटी कर रहे गज्जन सिंह के सिर पर पत्थर से हमला कर दिया। इससे गज्जन सिंह लहुलूहान हो गए।

शोर होने पर तीनों बाइक से फरार हो गए। सड़क पर होमगार्ड को लहुलूहान देख नैनीताल रोड से गुजर रहे एसएसपी डॉ. सदानंद दाते मौके पर पहुंच गए। उन्होंने होमगार्ड से मामले की जानकारी लेते हुए वायरलैस पर पुलिस को अलर्ट किया। बताए गए नंबर के आधार पर आरोपी बाइक सवारों की तलाश शुरू कर दी।

तीन साल में हो चुके हैं 50 हमले

रुद्रपुर- यूएसनगर में पुलिस पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रही है। पुलिस आंकड़ों की बात करें तो अब तक जिले के जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता, खटीमा थाना क्षेत्र में 50 से अधिक हमले हो चुके हैं। इससे पुलिस कर्मियों का मनोबल भी टूट रहा है।

पुलिस द्वारा आयोजित हॉफ मैराथन की थीम होगी ”महिला सुरक्षा एंव जागरुकता”

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उत्तराखण्ड़ पुलिस द्वारा आयोजित की जा रही हॉफ मैराथन प्रतियोगिता का थीम ” महिला सुरक्षा एंव जागरुकता” अभियान के तहत देहरादून पुलिस ने महिला सुरक्षा एंव सशक्तिकरण के संबध में पुलिस लाइन देहरादून में स्कूली छात्राओं के साथ 3 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया ।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्राओं को सम्बोधित करते हुये एसएसपी दून ने उनके साथ अपने अनुभवों को साझा  किया व आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता व निर्णय लेने की क्षमता के आधार पर अपने जीवन में उच्च मुकाम प्राप्त करने वाली महिलाओं का उदाहरण दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेष अतिथि सचिव लोकायुक्त, कहकशा खान ने छात्राओ को महिलाओ के सवैधानिक अधिकारो व कर्तव्यो के सम्बन्ध में अवगत कराया गया, साथ ही महिला सम्बन्धित कानूनो व कानूनी संरक्षण एंव अधिकारो से अवगत कराते हुये जागरुक किया गया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि रामेन्द्री मन्द्रवाल, सचिव राज्य महिला आयोग द्वारा अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसकी प्राप्ती के लिये कठिन परिश्रम व अनुशासन से जीवन में आगे बढने हेतु प्रेरित किया गया। कार्यशाला के दौरान साईबर यूनिट देहरादून ने स्लाइड प्रेजन्टैशन के माध्यम से उपस्थित छात्राओ को साइबर क्राईम के तरिको व उनसे बचाव के उपायों के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी। इस दौरान छात्राओ को सोशल मीडिया के उपयोग के दौरान बरती जाने वाली सावधानीयों से अवगत कराया गया।

छात्राओं के अन्दर आत्मविश्वास /आत्मरक्षा की भावना पैदा करने के उदेश्य से उन्हे शूटिंग, घुडसवारी, तथा जुडो का अभ्यास कराया गया।  साथ ही शस्त्रो के सम्बन्ध में जानकारी देते हुये उनका अभ्यास कराया गया। इस दौरान महिलाओ को किसी भी आकस्मिक स्थिति में आग लगने व घायलो की सहायता करने के लिये डेमो के माध्यम से फायर ब्रिगेट के कर्मचारीयो द्वारा आवश्यक जानकारियां दी गयी।

कार्यशाला अगले 4 हफ्तो तक प्रत्येक हफ्ते में तीन दिवस आयोजित की जायेगी, जिसमें प्रत्येक सप्ताह विभिन्न स्कूलों से छात्राओं ने प्रतिभाग किया जायेगा। कार्यशाला के दौरान अग्रिम 2 दिवसों में विशेषज्ञों द्वारा छात्राओं को चिकित्सा व अन्य महिला सुरक्षा सम्बन्धित पहलूओं की जानकारी दी जायेगी, जिससे व मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक रुप से मजबूत होकर राष्ट्र हित में अपना योगदान दे सके।

वास्तविक हकदार घोटालेबाजों के चक्कर में रह गये वंचित

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नानकमत्ता- एन एच 74 में हुए मुआवजे के घोटाले के बाद जहां तहसील प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन और एन एच के अधिकारी एक एक कदम फूट फूट कर रख रहे हैं वहीं जो वास्तविक हकदार है वो मुआवजे के लिए तरस रहे हैं, दरअसरल नानकमत्ता के एनएच125 में जिन लोगों की भूमि को अधिगृहित किया गया उनको मुआवजा नहीं मिल पाया है एसे में किसान की खेती तो गयी और मुआवजा भी लटक गया, जिससे गुस्साय ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर जल्द कार्यवाही की मांग की है।

एनएच 125 में आ रही भूमि के मुआवजे की मांग को लेकर ग्राम सिद्धा के लोग नानकमत्ता थाने में पहुंचे। एसडीएम विनोद कुमार और एनएच अधिकारी निशांत त्रिपाठी, जीएम प्रोजेक्ट हरीश कालरा का घेराव कर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की। इस दौरान एसडीएम का घेराव करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि एनएच 125 में आ रही भूमि के मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर विगत दिनों उन्होंने प्रदर्शन भी किया था, लेकिन अभी तक उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया है। ग्रामीणों  का कहना था कि विगत 40 वर्षों से वह काबिज होकर खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी भूमि एनएच चौड़ीकरण में जाने से रोजी रोटी का संकट गहरा जाएगा। उन्होंने मांग की कि एनएच 125 में आ रही भूमि का मुआवजा दिलाया जाए। एसडीएम ने कहा कि एनएच चौड़ीकरण में उन्हीं लोगों को मुआवजा दिया जाएगा जिनके नाम सरकारी रिकार्डों में दर्ज होंगे।