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आजीवन सहयोग निधि में भाजपा ने जुटाई 4 करोड़ से ज्यादा राशि

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देहरादून,  भाजपा देहरादून महानगर की पूरी आजीवन सहयोग निधि टीम ने 8000 से अधिक चेकों द्वारा 4 करोड़ 12 लाख रुपये अब तक जमा कराये हैं। यह जानकारी भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल ने दी। विनय गोयल को पार्टी कार्यालय में अपनी पूरी आजीवन सहयोग निधि टीम के साथ प्रेस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देहरादून महानगर ने बखूबी अपना लक्ष्य पार करते हुए अपने बूथ स्तर से विधायक स्तर तक के कार्यकर्ताओं के द्वारा 8000 से अधिक चेक प्राप्त किए, जिससे 4 करोड़ 12 लाख रुपये अब तक जमा करा दिए हैं और अभी बहुत से चेक और रसीद बुक है लगातार आ रही है।

विनय गोयल ने बताया कि सभी मंडलों और विधानसभाओं ने भी अपना लक्ष्य पार कर लिया है। अब भारतीय जनता पार्टी देहरादून महानगर सफलतापूर्वक आजीवन सहयोग निधि संग्रह महाभियान का लक्ष्य पार करने के बाद नगर निगम चुनाव विजय अभियान में जुटेगी। यहां भी सफलता शत-प्रतिशत सफलता के लक्ष्य के साथ चुनाव में विजय के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।

गोयल ने कहा कि वह अब शीघ्र ही वरिष्ठ नेतृत्व एवं सभी विधायकों से सलाह मशवरा कर परिणाम देने वाली अपनी नई टीम की घोषणा अगले 10 दिनों के भीतर कर देंगे तथा ऐसा करते समय संगठन के प्रति निष्ठावान योग्य तथा पार्टी के पिछले कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर योगदान करने वाले पार्टी के लिए समय दे सकने वाले कार्यकर्ताओं को अपनी टीम में प्राथमिकता देंगे।

सड़क पर दीवार लगाने से मार्ग छह घंटा बाधित

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गोपेश्वर, चमोली जिले के पलेठी मोटर मार्ग पर ग्रामीण मातवर सिंह के दीवार लगाये जाने से छह घंटे तक मोटर मार्ग बाधित रहा। जिसे बाद में लोनिवि के अधिकारियों से वार्ता के बाद खोल दिया गया है।

सोमवार को पलेठी के ग्रामीण मातवर सिंह ने सड़क के बीचों बीच दीवार बना दी। उनका आरोप है कि उन्होंने पूर्व में सड़क के लिए जिस खेत को दिया था उस खेत में लोनिवि ने स्कवर बना कर सडक पास करनी थी। लेकिन विभाग अब उस खेत पर स्कवर बनाये बिना उनके दूसरे खेत से वाहन ले जा रहा है। जबकि यह व्यवस्था स्कवर बनाये जाने तक के लिए की गई थी लेकिन विभाग छह साल से स्कवर नहीं बना रहा है।

सड़क पर के बीचों बीच स्कवर बनने से वाहनों की आवाजाही ठप होने पर प्रधान धरकोट लोकेश तोपाल मौके पर पहुंचे और उन्होंने अधिशासी अभियंता लोनिवि से मातवर सिंह की दूरभाष पर वार्ता करवायी जिस पर अधिशासी अभियंता ने 16 फरवरी को पलेठी पहुंच कर स्कवर का कार्य शुरू करवाने का आश्वासन दिया है। जिसके बाद सड़क को खोला गया।

मातवर सिंह का कहना है कि यदि 16 तारीख तक स्कवर का कार्य शुरू नहीं होता है तो वे पुनः अपने खेत का मार्ग बंद कर देंगे।

एम्स परिसर में खुली पुलिस सुरक्षा चौकी

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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश प्रशासन द्वारा एम्स परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी का मंगलवार को उद्घाटन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल एम्स के निदेशक डॉ रविकांत और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती ने संयुक्त रूप से एम्स परिसर में पुलिस सुरक्षा चौकी का रिबन काटकर उद्घाटन किया।
इस अवसर पर प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि एम्स उत्तराखंड राज्य के लिए ही नहीं अपितु उत्तराखंड से लगे अन्य राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। यहां सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी का खोला जाना अत्यंत आवश्यक था। इसी के दृष्टिगत मंगलवार यहां पुलिस चौकी खोली गई है।
डॉ रविकांत ने कहा कि एम्स प्रशासन पिछले काफी समय से एम्स परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी खोले जाने की मांग कर रहा था, जो कि आज पूरी हो गई है। डॉ रविकांत का कहना था कि एम्स में शीघ्र ही पोस्टमार्टम सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इसी के साथ उच्च स्तरीय फॉरेंसिक लैब भी अस्तित्व में आ जाएगी। जिसके अस्तित्व में आने के बाद बड़े मामलों का समाधान और उनका परीक्षण भी यही संभव हो पाएगा।
पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह पुलिस चौकी सुरक्षा के मद्देनजर काफी उपयोगी सिद्ध होगी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सरिता डोभाल, पुलिस क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह रावत, ऋषिकेश कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक हरिद्वार के मंजूनाथ टीसी के अतिरिक्त भाजपा नेता रविंद्र राणा, सुमित पवार, सभासद कविता शाह, दिनेश सती, सहित तमाम पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे।

कांवड़ यात्रा संपन्न, गंगा घाटों पर लगा गंदगी का अंबार

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हरिद्वार। पिछले एक पखवाड़े से हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा मंगलवार को सम्पन्न हो गई। इस कांवड़ यात्रा के दौरान जहां एक ओर गंगा घाटों पर एनजीटी के आदेशों की खुलकर धज्जियां उड़ी। वहीं, घाटों पर फैले कूड़े को उठाने में नगर निगम पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। आलम ये है कि घाटों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

इस कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगाजल भरने हरिद्वार पहुंचे। यहां से कांवड़िए गंगा तो ले गये लेकिन गंगा घाटों की साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखा। स्थानीय तीर्थ पुरोहित भी गंगा घाटों पर फैली इस गंदगी से काफी आहत हैं। उनका कहना है कि जो लोग यहां पर गंदगी फैला कर जाते हैं, वे यहां से पुण्य नहीं बल्कि पाप कमाते हैं। युवा तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित का कहना है कि अन्य तीर्थ स्थलों की तुलना में हरिद्वार की स्थिति बहुत ही अधिक दयनीय बन गई है। निगम भी व्यवस्थाएं सुधारने में फेल साबित हो रहा है। हरिद्वार के मेयर मनोज गर्ग का कहना है कि निगम अधिकारियों को 24 घंटे सफाई व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। कहा कि कावड़ के बाद सफाई का एक महाभियान चलाया जाएगा। जिसके बाद पूरा शहर साफ होगा।

खुद बैंडमिंटन खेलकर सीएम ने की बैडमिंटन चैंपियनशिप 2018 की शुरुआत

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देहरादून। मंगलवार 13 फरवरी से 18 फरवरी तक होने वाले “ऑल इंडिया सीनियर रैंकिंग बैडमिंटन चैंपियनशीप 2018” का शुंभारम्भ मुंख्यमत्री उत्तराखण्ड त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा परेड ग्राण्ड बैडमिन्टन बहुउद्दशीय क्रीडा हॉल में किया गया। इस प्रतियोगिता का शुंभारम्भ मुंख्यमत्री उत्तराखण्ड द्वारा स्वंय भी बैडमिन्टन मैच खेल कर किया गया। डबल्स मैच में मुंख्यमत्री के साथ संजय गुप्ता व अशोक कुमार व राजेश निजावन की जोडी को 21-19 से हराकर किया।

cm playing badmintonइस मौके पर अशोक कुमार पुलिस महानिदेशक अपराध/कानून व्यवस्था अध्यक्ष उत्तराखण्ड बैडमिंटन एशोसियन ने बताया कि इस बैडमिंटन महासग्रांम में देश के सभी राज्यों से प्रतियोगियों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। जिसमें राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय खिलाडियों द्वारा अपना जलवा दिखाया जायेगा। साथ ही उन्होंने मुंख्यमत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य देश को जूनियर में टाप शटलर देने में कामयाब रहा हैसाथ ही अशोक कुमार ने सीएम से अनुरोध किया कि अगर अनर्तराष्ट्रीय स्तर पर बैंडमिटन कोंचिग सेन्टर बन जाये, तो हमारे शटलरों को कोचिंग के लिये बैगलूर व हैदराबाद नहीं जाने पडेगा।

इस बैडमिन्टन महाकुंम्भ में देश के लगभग 1050 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता तीन स्थानों में होगी। जोकि परैड ग्राउण्ड, महाराणा प्रताप स्पोट्रस कोलेज व जे0पी एकडेमी में संचालित की जायेगी। इस प्रतियोगिता का मुंख्य आक्रासरण का केन्द्र होगे, चेतन आंनद, वी0दीजू, रुपेश कुमार व उत्तराखण्ड की ओर से चिराग सेन,कुंहु गर्ग व बोधित जोशी पर होगा मेडल की दावेदारी। इस प्रतियोगिता की प्राईज मनी होगी पांच लाख रुपये।मुंख्यमत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने कहा कि ये बड़े ही हर्ष का विषय है, कि हमारे प्रदेश के शटलरों द्वारा पूरे देश में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है। साथ ही मैं आप सभी को भी बताना चाहुंगा कि पौडी में 6,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित रासि स्टेडियम को भारत सरकार ने अपने रजामदीं दे दी है। आने वाले समय में पौडी में देश के खेलों का आयोजन होगा।

इस दौरान विधायक केदारनाथ मनोज रावत,देशराज कनवाल विधायक झबरेडा, संजय गुंज्याल पुलिस महानिरीक्षक, पुष्पक ज्योति पुलिस उपमहानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र, नारायण सिंह राणा,अंलकनन्दा अशोक, पुनीता नागलिया,संजय गुप्ता, बी0एस0मनकोटी,लोकेश ओहरी,एस.ए.रावल,मनीषा नेगी, सतीश सरर्की,रोकेश डोभाल,दीपक नेगी,दीपक रावत,दिनेश शर्मा आदि मौजूद रहै।

नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने प्रदेश के 32 गांव में विद्युतीकरण को दी हरी झंडी

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देहरादून, सालों से एक अदद रोशनी  का इंतजार कर रहे उत्तराखंड के 32 गांव के लोगों को मार्च आखिर तक बिजली के दर्शन हो जाएंगे।

उत्तरकाशी चमोली और पिथौरागढ़ जिले के प्रदेश के 32 गांव में विद्युतीकरण का रास्ता साफ हो गया है ।नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने इन गांवों में विद्युतीकरण का कार्य शुरू करने को मंजूरी प्रदान कर दी है। 31 मार्च 2018 तक इन गांव में रोशनी पहुंच जाएगी।

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दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के सभी गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जब यह योजना शुरू हुई थी तो प्रदेश में 100 से अधिक गांव ऐसे थे जहां बिजली नहीं पहुंच पाई थी। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने कई गांव में बिजली तो पहुंचा दी लेकिन 32 गांवों का विद्युतीकरण नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की मंजूरी नहीं मिलने से लटक गया था, क्योंकि यह गांव आरक्षित वन क्षेत्र में आते थे, इस वजह के चलते अभी तक इनका विद्युतीकरण नहीं हो पाया था।

इस संदर्भ में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ हर्षवर्धन से बात की जिसके बाद नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने इन गांवों के विद्युतीकरण का कार्य शुरू करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। ऊर्जा सचिव राधिका झा के अनुसार, “उत्तरकाशी चमोली और पिथौरागढ़ के इन 32 गांव में विद्युतीकरण शुरू करने की मंजूरी नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड दे दी है और इन गांव में 31 मार्च तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।”

उत्तराखंड में पहाड़ों से उतरकर मैदानों तक आवाज का जादू बिखेरती

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देहरादून, नमस्कार, आदाब और सत-श्री-अकाल! “मैं हूं आपकी दोस्त, आपकी खोज, चुलबुली सी नूपुर कर्णवाल और आप हैं मेरे साथ रेडियो-खुशी में!”  कुछ इसी अंदाज में अपनी खनकती आवाज का जादू बिखेर रही नूपुर की आवाज पहाड़ों से उतर कर मैदानों तक अपने लिसनर को रेडियो तक खींच के लाती है।

उत्तराखंड में कहीं खो गए रेडियो को एक बार फिर लोकप्रिय बनाने का काम मसूरी की नूपुर ने शुरू किया। शुरुआत में FM रेनबो के जरिए अपनी आवाज को श्रोताओ तक पहुंचाया, उसके बाद रेडियो खुशी के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई नूपुर ने। इस कामयाबी में उनके हमसफ़र अर्जुन का साथ एक मजबूत पिलर की तरह काम करता रहा। देहरादून मे कम्युनिटी रेडियो खुशी की शुरुआत कर नूपुर ने अपना एक नया मुकाम बनाया है।

आज विश्व रेडियो दिवस है,13 फरवरी 1946 को यूनेस्को में स्थापित रेडियो से प्रसारण प्रारंभ हुआ था। शिक्षा के प्रसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक बहस में रेडियो की भूमिका को रेखांकित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने पहली बार, 13 फरवरी, 2012 को पहली बार विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाया। तभी से हर साल इसी दिन विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विश्व की 95 प्रतिशत जनसंख्या तक रेडियो की पहुंच है और यह दूर-दराज के समुदायों और छोटे समूहों तक कम लागत पर पहुंचने वाला संचार का सबसे सुगम साधन है। बात भारत की करें तो वर्तमान में आकाशवाणी के करीब 223 केंद्र है इसके अलावा कई विश्वविद्यालयों और निजी कम्पनियों के रेडियो केंद्र हैं।

हमारे आसपास हल्द्वानी में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और पंतनगर सामुदायिक रेडियो केंद्र चल रहे हैं। यूओयू का सामुदायिक रेडियो हैलो हल्द्वानी बदलते शहर की धड़कन के रूप में सामने आया है, वहीं पंतनगर जनवाणी सामुदायिक रेडियो ने किसानों की समस्याओं को आवाज देने का काम किया है। और ऐसे में रेडियो आज भी लोकप्रियता हासिल करता जा रहा है

महिला नशा तस्कर चरस के साथ गिरफ्तार

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देहरादून, जनपद में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के अन्तर्गत थाना सहसपुर पुलिस ने संदिग्ध व्यक्तियों/वाहनों आदि का चेकिंग अभियान चलाया गया जिसके फलस्वरूप एक अभियुकता गुलशाना को अवैध चरस के साथ घमोलो रोड के पास से धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की गई।

अभियुकता से गहनता से पूछताछ की गई तो बताया कि, “औपचारिक रूप से इनके पति ने इनको तलाक दे दिया है, जिस कारण पैसो की तंगी के कारण पैसो के लालच में नशा बेचकर पैसा कमाने लगी।

पुछताछ में बताया कि वह सहारनपुर, मिर्जापुर आदि से सस्ते दाम पर चरस लाकर सहसपुर अौर आसपास में पढ़ने वाले स्टूडेंट आदि को मोटे दाम में बेचती थी। गुलशाना के पास से एक किलो सौ ग्राम चरस जिसकी कीमत करीब ₹ 1 लाख 10 हजार है पाई गई।

आज अभियुक्त को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।।

मिसाल: मायानगरी से अभिनय के गुर पहाड़ों तक लाता है ये उत्तराखंडी कलाकार

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32 साल के विरेंद्र पुंडियाल आज कला और रंगमंच के क्षेत्र का जाना माना नाम है। विरेंद्र की जड़ें अल्मोड़ा के सल्ट इलाके से हैं और अब ये इलाका वीरेंद्र की कर्मभूमि भी बन गया है।बचपन से ही वीरेंद्र थियेटर,नृत्य,कला से जुड़े रहे हैं। आज भी अपने सफर को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे स्कूल में उनकी टीचरें सभी कार्यक्रमों में उनसे परफॉर्म करने को कहतीं थी और वो खुशी- खुशी इन सभी में हिस्सा लेते थे।

दिल्ली में स्कूल की पढ़ाई करने के बाद वीरेंद्र ने आर्मी में भर्ती की इच्छा के चलते बारहवीं की परीक्षा सल्ट से ही दी। स्कूल खत्म करने के बाद वीरेंद्रे ने दिल्ली से ग्रेजुएशन किया अौर प्राइवेट कंपनियों में काम किया लेकिन अपने रंगमंच के शौक को बरकरार रखने के लिये साथ-साथ पहाड़ी थियेटर ग्रुपस के साथ देश के अलग अलग कोनों में परफॉर्म करना भी जारी रखा।

वो बताते हैं कि, “2006 में मेरठ में मैने रामलीला में हिस्सा लिया और फिर वहां थियेटर के लोगों के साथ जुड़ा, तब तक मुझे थियेटर के बारे में ज्यादा नहीं पता था। इसके बाद 2007 में मैनें पार्ट टाइम थियेटर शुरू किया और 2010 में नौकरी छोड़ कर फुल-टाइम थियेटर से जुड़ गया।”

24 साल की कम उम्र में नौकरी छोड़ना जैसा फैसला लेना वीरेंद्र के लिये आसान नहीं था। लेकिन जहां हुनर और लगन होता है वहां हार कभी नहीं होती और इसकी मिसाल है वीरेंद्र। 2012 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के सिक्किम सेंटर में वीरेंद्र को दाखिला मिला और 2013 में पास आउट होने के बाद वीरेंद्र के पास काम की कोई कमी नही रही।

वीरेंद्र ने स्टार प्लस के सीरियल जैसे कि एक घर बनाऊंगा, एक हसीना थी, सावधान इंडिया में भी अपनी कला और निर्देशन का जौहर दिखाये हैं।

लेकिन मायानगरी में इस कामयाबी से वीरेंद्र को शांति नहीं मिली। वो हर साल गांव जाते थे और अपने पुराने दोस्तों से मिलते थे जो उनकी कामयाबी को देखकर खासे खुश होते हैं। दोस्तों ने वीरेंद्र को गांव आकर अपने गांव और आसपास के बच्चों को कला और अदाकारी के गुर सिखाने की बात कही। बस फिर क्या था मानो वीरेंद्र को अपनी मंज़िल की तरफ जाती सीढ़ी मिल गई।

2015 में इसी सोच के साथ अल्मोड़ा में रंगमठ थियेटर ग्रुप की शुरुआत हुई। शुरु में इस थियेटर ग्रुप से 10-15 बच्चे जुड़े और हाल ही में वीरेंद्र ने 30 दिन की वर्कशॉप रामनगर में की जिसमे 20 बच्चों ने हिस्सा लिया।

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वीरेंद्र बताते हैं कि, “टीम बनाने में कठनाई होती है। स्कूल के बच्चे आते हैं पर स्कूल खत्म होने के बाद ये बच्चे अलग-अलग जगह चले जाते हैं और फिर से नई टीम बनानी पड़ती है। बच्चों और अभिभावकों की सोच है कि कोर्स करते करते उन्हे फिल्म या टीवी में रोल या नौकरी मिल जाये।” वीरेंद्र इसी सोच को बदलने में लगे हुए हैं। वो चाहते हैं कि छात्र इस बात को समझे कि इस क्षेत्र में भी कड़ी मेहनत औऱ अभ्यास उतना ही ज़रूरी है जितना किसी और क्षेत्र में।

इस साल अप्रैल में वो अल्मोड़ा के दूरदराज़ के इलाकों में एक वर्कशॉप करना चाहते हैं ताकि वहां के बच्चों को भी अपनी कला तराशने का मौका मिल सके। वीरेंद्र अपने सफर को याद करते हुए कहते हैं कि, “मेरे दोस्तों में भी टैलेंट था लेकिन दिशा देने वाला कोई नहीं मिला इसलिये सबके मन में थियेटर है पर वो सरकारी नौकरी कर रहे हैं। मुझे मौका और दिशा दोनों मिली इसलिये मैं आज इस मुकाम पर हूं कि देश को और कई वीरेंद्र दे सकता हूं।”

न्यूजपोस्ट की टीम वीरेंद्र के इस सफर और पहाड़ों में छुपे टैलेंट को तराशने की कोशिश को सलाम करता है। हम उम्मीद करते हैं कि वीरेंद्र की कोशिश रंग लायेगी और फिल्म, थियेटर और टीवी की दुनिया को ज्यादा से ज्यादा पहाड़ का टैलेंट देखने को मिलेगा।

शनि की बहन को फिल्मों में काम करने का शौक नहीं

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बांदा,  कलर्स चैनल में आ रहे कर्मफल दाता शनि सीरियल में यमी (शनि की बहन) का रोल निभा रही काजोल श्रीवास्तव को फिल्मों में काम करने का शौक नहीं है। उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करने का आॅफर मिल रहा है, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है।

बुन्देलखण्ड की बेटी काजोल श्रीवास्तव ने यह बात टीम इनोवेशन कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही, वह यहां अपने ननिहाल अर्दली बाजार में सौरभ श्रीवास्तव जीतू के यहां आई थी। उन्होंने कहा कि मेरा पूरा बचपन बांदा में बीता है। आज जब 12 साल बाद लौटी हूं, तो सारे वह स्थान चलचित्र की तरह घूमने लगे जहां मैने पानी पूरी, कुल्फी खाई है।

काजोल बताती हैं कि, “इस समय मैं कलर्स पर आ रहे ‘कर्मफल दाता शनि’ सीरियल में काम कर रही हूं। इसके अलावा कलर्स के ही अशोका सीरियल में लीड रोल मिलने से पहचान मिली। इसी तरह स्टार प्लस में आने वाले सीरियल ‘एक घर बनाऊंगा’ में मुझे अच्छी शोहरत मिली है। ‘ससुराल सीमर का’ में मैंने वैदेही का रोल किया है।”

बुन्देलखण्ड के पन्ना (म.प्र) के सुनील श्रीवास्तव की बेटी काजोल श्रीवास्तव का ननिहाल अर्दलीबाजार में पत्रकार अवधेश कुमार निगम के घर पर है। एक प्रश्न के जबाव मे उन्होेंने कहा कि वह धारावाहिकों में काम करके खुश है। फिल्मों में काम करने का शौक नहीं है। हालांकि साउथ की फिल्मों में काम करने का आॅफर मिला है लेकिन मैने मना कर दिया है।

उन्होंने इन ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए अपनी मां को पूरा श्रेय दिया तथा अपना प्रेरणास्त्रोत अमिताभ बच्चन को बताते हुए अभिनय के क्षेत्र में उनकी तरह ख्याति प्राप्त करने का लक्ष्य बताया।