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केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए 29 अप्रैल को खुलेंगे

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देहरादून ,विश्व प्रसिद्ध बाबा केदारनाथ के धाम  2018 की यात्रा के लिए  29 अप्रैल  प्रातः  6:15 पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। परंपरा के अनुसार शिवरात्रि के दिन कपाट खुलने की तिथि  को तय किया जाता है।  श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि उखीमठ में विश्वप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि शिवरात्रि को पंचाग गणना के अनुसार तय की  जाती है।

श्री केदारनाथ जी के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में कपाट खुलने की तिथि निर्धारित किये जाने के लिये प्रात: 8 बजे से  कार्यक्रम शुरु हो गया था। कार्यक्रम में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, हक-हकूक धारी, स्थानीय जनता एवं श्रद्धालु- दानीदाता शिरकत करेंगे। मंदिर समिति  द्वारा कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही हैं।

श्री केदारनाथ मंदिर के  कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के साथ ही शीतकालीन पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से श्री केदारनाथ भगवान की चलविग्रह डोली के प्रस्थान की भी तिथि 26 अप्रैल तय हुई। इस अवसर पर श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ,मुख्यकार्याधिकारी बी.डी. सिंह, रावल भीमाशंकर लिंग उपस्थित रहे।

मीट कारोबारियों ने गंगा घाटों पर की सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग

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हरिद्वार। जन सेवा युवा समिति के अध्यक्ष विकास कुमार व उनकी टीम ने गंगा में बहाये जा रहे मांस के टुकड़ों को लेकर मीट कारोबारियों से ज्वालापुर के कस्साबान मौहल्ले में मंगलवार को बैठक कर विचार विमर्श किया। बैठक में मीट कारोबारियों ने भी गंगा में मिल रहे मांस के टुकड़ों पर हैरानी जताई जबकि जन सेवा युवा समिति के अध्यक्ष विकास कुमार ने मीट कारोबारियों से सुझाव लिये। इस अवसर पर अध्यक्ष विकास कुमार ने कहा कि लगातार गंदे नाले से गंगा मंे मीट के टुकड़े बहाये जा रहे हैं जिससे विवाद उत्पन्न हो रहा है। मीट कारोबारियों को जनमानस की भावनाओं का आदर सम्मान करना चाहिये। किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होना चाहिये। एकता भाईचारा दिखाते हुए हमें सभी की भावनाओं का आदर सत्कार करना होगा। कहाकि गंगा में बहाये जा रहे मीट के टुकड़े डालने वालों को स्वयं मीट कारोबारियों को चिन्हित कर अंकुश लगाना चााहिये। जिससे शहर का माहौल शांत रहे तथा किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न ना हो। बैठक में अब्दुल सत्तार ने मीट कारोबारियों से आग्रह किया कि गंगा में मीट के टुकड़े गंदे नाले से नहीं बहाएं। गंगा सभी धर्म समुदाय की आस्था का केन्द्र है। किसी भी रूप से भावनायें आहत नहीं होनी चाहिये। मीट कारोबारियों मीट की वेस्टेज को डम्प करने की व्यवस्था को दुरुस्त करें। साथ ही ऐसे कारोबारी को चिन्हित करें जो कि हरिद्वार की फिजा को खराब करने में लगे हुए हैं। मीट कारोबारी उस्मान, ईनाम, मेहरबान, वसीम, आमिर, आरिफ, शाहबाज, आसिफ, दानिश ने भी बैठक में अपने विचार रखे। कहा कि मीट कारोबारी अपनी दुकानों के आस पास नियमित रूप से सफाई रखते हैं। साथ ही गंगा में किसी भी प्रकार के मांस के लोथड़े कारोबारियों द्वारा नहीं बहाये जा रहे हैं लेकिन कुछ असमाजिक तत्व माहौल को खराब करने की नीयत से ऐसा काम कर रहे है। उन्होंने प्रशासन से भी ऐसे व्यक्ति को चिन्हित कर कार्यवाही की मांग की। मीट कारोबारियों ने एक सुर में कहा कि धार्मिक आयोजनों एवं अन्य पर्वों पर स्वयं ही कारोबारी अन्य धर्म समुदाय के लोगों की आस्था को देखते हुए मीट का कारोबार बंद कर देते हैं। विवाद के निस्तारण को लेकर शासन प्रशासन को गंगा घाटों पर सीसीटीवी कैमरे लगा देने चाहिये जिससे असमाजिक तत्वों पर रोक लगेगी साथ ही गंगा मंे मैला कुचैला एवं वेस्ट मांस के लोथड़े डालने वालों को भी चिन्हित किया जा सकेगा। बैठक में जन सेवा युवा समिति के सदस्यों में सचिन जोन, रजत वर्मा, सूरज भारती, करण क्षेत्री, विक्की राजपूत, सत्यम चैहान आदि उपस्थित रहे।

इलाज के लिए तय करनी पड़ रही 28 किमी की दूरी

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चकराता/विकासनगर। राजकीय एलोपेथिक अस्पताल मयरावना में तैनात स्टॉफ बीते एक सप्ताह से गायब हैं। अस्पताल पर ताला लटका हुआ है। लोगों को इलाज के लिए 28 किमी दूर चकराता और विकासनगर की दौड़ लगानी पड़ रही है।

अस्पताल में एक चिकित्सक, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय की तैनाती की गई है। लेकिन तीनों ही बीते एक सपताह से गायब हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल पाटी, रावना, बुरास्वा, शिरबा, बगोती, टुंगरोली, मैपावटा, बेहमू, कोल्हा, डेरिया, कोटुवा, घण्ता गांव समेत 14 गांव का केंद्र बिंदु हैं। क्षेत्र में अस्पताल के सिवाए कोई दूसरा प्राइवेट और सरकार अस्पताल नहीं है। ऐसे में चिकित्सक और फार्मासिस्ट न होने से लोगों को अस्पताल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण केशरदास, टीकाराम, दौलत रावत, सरदार सिंह, मेहर सिंह आदि का कहना है कि डॉक्टर और अन्य स्टॉफ मनमर्जी से अस्पताल में आते हैं। जिसके चलते लोगों को अस्पताल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोई उच्चाधिकारी कभी अस्पताल का निरीक्षण भी नहीं करते।
सीएमओ डॉ. वाईएस थपलियाल ने कहा कि मामले में संबंधित डॉक्टरों और स्टॉफ का स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। ड्यूटी में हीलाहवाली बरतने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार को स्वच्छ और सुंदर बनाने में प्रशासन का सहयोग करे जनताः डीएम

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हरिद्वार। महाशिवरात्रि के मौके पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने हरिद्वार की जनता से अपील की है कि अगर उनका साथ दें तो वो धर्मनगरी को अद्भुत, अकल्पनीय और अद्वितीय बनाना चाहते हैं। दीपक रावत चाहते हैं कि हरिद्वार को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए लोग जिला प्रशासन की मुहिम से जुड़ें।
अपने काम की वजह से चर्चाओं में रहने वाले दीपक रावत का कहना है कि उत्तराखंड का हर एक जिला अपने आप में अपनी कहानी कहता है। इससे पहले भी वह जिन जगहों पर रहे हैं, वह बेहद खूबसूरत है और वहां के लोग भी लेकिन हरिद्वार धर्म नगरी के साथ एक अलग शहर है। लिहाजा अकेले प्रशासन से कुछ नहीं होगा, इसके लिए हरिद्वार की जनता को भी आगे आना होगा।
दीपक रावत ने कहा कि हरिद्वार के लोग बड़े दिलवाले हैं और समझदार भी हैं इसलिए उन्होंने लोगों से अपील की है कि हरिद्वार को स्वच्छ बनाने की जो मुहिम जिला प्रशासन ने चलाई है, उसमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। दीपक रावत ने कहा कि बीते दिनों से हरिद्वार में चलाए जा रहे सफाई सर्वेक्षण में यहां की जनता ने प्रशासन का खूब साथ दिया है और उन्हें उम्मीद है कि जिला प्रशासन आगे जो भी कदम हरिद्वार को अलग पहचान दिलाने में उठाएगा जनता उनके साथ रहेगी।
पवित्र नगरी हरिद्वार के बारे में दीपक रावत ने अपनी राय देते हुए कहा कि प्रत्येक 12 साल में लगने वाले कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार जो कदम उठा रही है, वह हरिद्वार की जनता को बेहद पसंद आने वाले हैं। इस बार का कुंभ मेला पिछले कुंभ मेले के मुताबिक कुछ अलग होगा। राज्य सरकार इस बार हरिद्वार में कुंभ मेले को कुछ इस तरह से बसाना चाहती है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ हरिद्वार की जनता को ना केवल उसका लाभ मिल सके बल्कि किसी तरह की कोई भी दिक्कत लोगों को ना आए।
दीपक रावत ने कहा कि वह हरिद्वार में रहते हुए यहां के स्कूलों, कॉलेजों और दूसरे शिक्षा संस्थानों की हालत में सुधार ला पाएं। डीएम इसके लिए हरिद्वार के कई कॉलेजों को डिजिटल फॉर्मेट में लाना चाहते हैं। जिसके लिए उन्होंने कुछ स्कूलों को चुना भी है, जिसमें जल्द ही छात्रों को डिजिटल लाइब्रेरी के साथ-साथ इंटरनेट से मिलने वाली दूसरी सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा। साथ ही अगर किस को उनकी जरूरत महसूस होती है, तो बेझिझक उन्हें कोई भी फोन कर सकता है। हर रोज अपने दफ्तर में वह लगभग 100 से डेढ़ सौ लोगों से मिलते हैं, जिनसे मिलकर उन्हें ना केवल अच्छा लगता है बल्कि यह भी लगता है कि अभी भी हरिद्वार में बहुत कुछ होना बाकी है। जिसके लिए वह निरंतर प्रयास कर रहे हैं और करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी में बजट के लिये मांगी लोगों की राय

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मुख्यमंत्री ने उत्तकाशी के गंगाणी में ’’आपकी राय-आपका बजट’’ कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के किसानों से सीधा संवाद कर उनकी बाते सुनी। उन्होंने प्रदेश के आगामी बजट में गांवो के विकास एवं कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये किसानों के सुझाव लिये।
जनता का बजट जनता से पूछकर ही बनाया जायेगा-मुख्यमंत्री
इस पहल के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि, “आगामी बजट जनता से पूछकर बनाया जायेगा, यह पूरी तरह जनता का बजट होगा। हमनें एक नई शुरूआत की है। आम आदमी, गांववासियों, युवाओं , महिलाओं, सैनिकों, अनुसूचित जनजातियों सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के सुझाव बजट में शामिल किये जायेंगे। केन्द्र सरकार द्वारा कृषि व सम्बिधत क्षेत्र के लिये 6000 करोड़ रूपये प्रदान किये गये है।”
यहां लोगों से बजट के लिये सुझाव लेते हुए मुख्यमंत्री ने अरनी सरकरा की तरफ से किसानों के लिये रोडमैप के बारे में बात की।
फूड प्रोसेसिंग से किसानों की उन्नति होगी 
मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि, “फूड प्रोसेसिंग द्वारा कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन होती है । किसानों को फूड प्रोसेसिंग व अच्छी पैकेजिंग पर ध्यान देना होगा। जहां विदेशों में कुल कृषि उत्पादों की 40 प्रतिशत तक फूड प्रोसेसिंग होती है हमारे देश में यह अभी मात्र 15 प्रतिशत ही है।”
इन्टिग्रेटेड फार्मिग को अपनाये किसान
किसानों को परम्परागत कृषि उत्पादों के अतिरिक्त मधुमक्खी पालन जैसे अन्य सम्बन्धित कार्यो पर भी ध्यान देना होगा। हमें इन्टिग्रेटेड फार्मिग की ओर आधिक प्रोत्साहित करना होगा।
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री को कृषि से सम्बन्धित विभिन्न सुझाव दिये।अब देखना ये होगी कि किसानों से मिले ये सुझाव राज्य के बजट में अपने लिये कितनी जगह बना पातेहैं।

उत्तरकाशी लिंगानुपात के मामले में देश व दुनिया में ब्रांड एम्बेसडरः सीएम

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देहरादून। उत्तरकाशी जिले में 1000 पुरुषों पर 1097 महिलाएं हैं। उत्तरकाशी जिले ने बेटियों को सरंक्षण दिया है। यह देश व दुनिया के सामने एक उदाहरण है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को उत्तरकाशी जनपद के तहसील बडकोट के गंगाणी में पौराणिक, धार्मिक सांस्कृतिक बसंत मेले के शुभारंभ के मौके पर यह विचार व्यक्त किए।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें मात्र घोषणाएं करने में विश्वास नहीं है। वह शासनादेश के द्वारा कार्य करने में विश्वास करते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा यमुना वैली में पलायन नहीं हुआ है। यहां के लोग बागवानी करते है, खेती करते है व स्वरोजगार करते है। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल उत्पादन के अलावा खाद्य प्रसंस्करण व पैंकेजिंग पर ध्यान देना होगा। किसानों को सीधी मार्केटिंग पर भी विशेष बल देना होगा। किसान सहकारिता को अपनाएं। किसानों को प्रोफेशनल बनना होगा। चेन बनाकर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों की क्लबिंग की जाएगी ताकि बच्चो व शिक्षकों को लाभ हो। सरकार द्वारा 400 डॉक्टरों को भर्ती किया गया है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं पहुचाईं जा सके। 900 नर्सो की भर्ती की जा रही है। नौगावं के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में टेलीमेडिसन व टेलीरेडियालोजी सेवा आरम्भ की जाएगी। 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार को 11 महीने पूरे होने जा रहे है। हमने कोशिश की भ्रष्ट्राचार को हर स्तर से समाप्त किया जाए। भ्रष्टाचार व निजी हितों से सामाजिक कार्यो में बाधा उत्पन्न होती है। शासन स्तर पर ऐसे अधिकारियों में जिम्मेदारी दी गयी है जिनके निजी हित विकास कार्यो में बाधा नही डालते। हम भ्रष्टाचारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्य नही कर रहे है। किसी को भी गरीब का पैसा हजम नही करने देंगे। भ्रष्टाचार से गरीब जनता को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहलों को जनता को पूरा सहयोग मिल रहा है। हमने जो भी कदम उठाए उसमें जनता ने हमारा पूरा समर्थन किया। हमारी सरकार गरीब, मजदूरो व किसानों की सरकार है। केन्द्र सरकार के बजट में गांव के विकास का विशेष ध्यान रखा गया है। फरवरी से एलईडी का वितरण आरम्भ कर दिया जायेगा। यह जनता के लिये सस्ते दर पर उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विकास खण्ड मोरी के जखोल में निरीक्षण भवन के निमार्ण, मोरी नेटवाड़ साकरी 12 किमी मोटर मार्ग, मोरी ओसला बिनगोड़ा खड़ आरसीसी पुल का निर्माण, गंगाड़ पवाड़ी पैदल मार्ग की मरम्मत, सटूडी से शिवाडी खडड तक पैदल स्टील गार्डर सेतु के निमार्ण आदि विभिन्न निमार्ण कार्यो के शासनादेश निर्गत किये जाने की जानकारी दी।

होनहारों का सपना पूरा करेंगे गेल उत्कर्ष सुपर-100 केंद्र

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देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पहल पर राज्य के गरीब परिवारों के होनहार बच्चे अब प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अन्य शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त करने का सपना देख सकेंगे। ऐसे विद्यार्थियों को लाभान्वित करने के लिए मंगलवार को न्यू कैन्ट रोड़ स्थित जनता मिलन हॉल में आयोजित समारोह में उत्तराखण्ड सरकार, गेल (इण्डिया) लिमिटेड तथा सेंटर फॉर सोशल रेस्पांसबिलिटी एण्ड लीडरशिप(सीएसआरएल) के मध्य कुमाऊं और गढ़वाल मण्डल के अल्मोड़ा एवं श्रीनगर में गेल उत्कर्ष सुपर-100 के दो केन्द्र स्थापित करने में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन का आदान प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत व गेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री.बी.सी.त्रिपाठी की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन पर गेल(इण्डिया) की कार्यकारी निदेशक वन्दना चानना तथा सेंटर फॉर सोशल रिस्पांसबिलिटी एण्ड लीडरशिप(सीएसआरएल) के निदेशक एसके शाही द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने गेल उत्कर्ष सुपर 100 की शुरूआत के लिए गेल के सीएमडी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य के मेधावी छात्रों को उच्च तकनीकि संस्थानों में प्रवेश हेतु प्रशिक्षण के लिये गेल द्वारा प्रतिवर्ष 2.50 करोड़ की धनराशि व्यय किये जाने तथा उच्च तकनीकि संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को 05 हजार प्रतिमाह छात्रवृत्ति दिया जाना निश्चित रूप से सराहनीय प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों में प्रतिभा जन्मजात होती है, कुछ बच्चों में प्रतिभा अन्दर छिपी होती है, उसे उभारने की जरूरत है। परिश्रम या मेहनत के गुण भी सभी के अन्दर है। इसका भरपूर उपयोग कर हम जो चाहे प्राप्त कर सकते है। परिश्रम से परिणाम भी निश्चित रूप से अच्छे आयेंगे। राज्य के प्रतिभावान छात्रों को आगे बढ़ने के बेहतर रास्ते हम तलाश रहे है। प्रतिभाओं की गुणवत्ता की पहचान के लिये अच्छे योजक की जरूरत रहती है। अच्छा योजक ही अच्छा प्रबन्धन कर सकता है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे संकोच की प्रवृत्ति को त्यागे अपने मन की भावनाओं को व्यक्त करें। यदि इसके लिये चिल्लाना भी पडे, तो भी अपनी बात रखें, तभी जिस लक्ष्य को लेकर वे आगे बढ़ेंगे, उसमें सफल हो सकेंगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि देश की आजादी के समय अंग्रेजों के अधीन रही गुजरात काटन मिल को खरीदने के लिये एक साधारण सा व्यापारी सामने आया। अंग्रेजों ने कहा कि आप इस मिल को कैसे चला सकते हो तो व्यापारी ने जवाब दिया कि परमात्मा का आशीर्वाद है मैं जानता हूं कि इसे कौन चला सकता है। इस मिल को दुनियां मोरारजी मिल्स के नाम से जानती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रेल टेल आकांक्षा सुपर-30 के छात्रों को भी सम्मानित किया।
इस मौके पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से आज यह योजना धरातल पर उतरी है। उन्होंने कहा कि पहले हमारे बच्चे कोटा कोचिंग के लिए जाते थे, लगभग 03 लाख का खर्च इसमें आता था। गेल उत्कर्ष सुपर 100 के अन्तर्गत श्रीनगर व अल्मोडा के 50-50 छात्रों को उच्च तकनीकी संस्थाओं में प्रवेश हेतु प्रशिक्षित किए जाने से पर्वतीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि उच्च तकनीकी संस्थानों में प्रवेश के बाद छात्रों को लगभग 2.50 से 03 लाख तक की धनराशि की आवश्यकता होती है। इसके लिए छात्रों को सहकारिता विभाग के माध्यम से एक प्रतिशत ब्याज पर धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी। देहरादून में एन.डी.ए. के लिये 50 छात्रों को प्रशिक्षित करने की भी कोचिंग प्रारम्भ की जायेगी। जिसमें 10 सीट शहीद सैनिकों की विधवाओं एवं उनके बच्चों के लिए निर्धारित रहेगी। सभी जनपद मुख्यालयो के डिग्री कॉलेजों में आईएएस एवं आईपीएस आदि को भी कोचिंग संचालित की जाएगी। जिसमें सम्बंधित जिले के जिलाधिकारी भी सप्ताह में एक दिन छात्रों को पढ़ायेंगे। इनमें से 50 छात्रों को सेलेक्ट कर देहरादून व दिल्ली में कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 03 लाख से कम आय वाले 100 छात्रों को रिसर्च के लिए तैयार किया जाएगा इसकी विषय सामग्री राज्य सरकार निर्धारित करेगी। इससे प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने व उन्हें प्रदेश के विकास से जोडने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर गेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बीसी त्रिपाठी ने कहा कि देश की अग्रणी प्राकृतिक गैस कम्पनी, गेल(इण्डिया) लिमिटेड ने उत्तराखण्ड में सक्रिय रूप से कई सीएसआर कार्यों का क्रियान्वयन किया है। इन दो केन्द्रों की स्थापना गेल की उत्कर्ष परियोजना के तहत की गई है जो गेल का फ्लैगशिप सीएसआर कार्यक्रम है तथा जिसका लक्ष्य हाशिए के समुदायों के होनहार विद्यार्थी है। दोनो नए केन्द्रों में 50-50 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी सम्बोधित किया। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो.अजीत कुमार चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विधायक महेश नेगी, एनआईटी श्रीनगर के निदेशक सहित विभिन्न संस्थानों एवं उच्च शिक्षा के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सुजवां में हुए आतंकी हमले में उत्तराखंड का लाल शहीद

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देहरादून, उत्तराखंड का एक और लाल आंतकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया है। जम्मू कश्मीर के सुजवां में हुए आतंकी हमले के दौरान जवान राकेश रतूड़ी घायल हो गए थे। जिसके बाद उन्होंने मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

जम्मू कश्मीर के सुजवां में दो दिन पहले आतंकियों ने हमला किया था। इस दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए हवलदार राकेश रतूड़ी(44 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सेना के अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

जवान राकेश रतूड़ी मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के पाबौ ब्लॉक की बाली कंडारस्यूं पट्टी स्थित सांकर सैंण गांव के रहने वाले थे। सालभर पहले ही उन्होंने प्रेमनगर के बड़ोवाला में घर बनाया था। वह अपने पीछे पत्नी नंदा देवी और दो बच्चों नितिन और किरण को छोड़ गए हैं। उनका बेटा नितिन (17 वर्ष) एसजीआरआर पटेलनगर में कक्षा ग्यारह का छात्र है। जबकि बेटी किरण(19 वर्ष) पत्राचार से बीए कर रही।बताया गया कि मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे शहीद का शव जम्मू एयरपोर्ट से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट भेजा जाएगा।

शहीद के चाचा शेखरानंद रतूड़ी ने बताया कि महार रेजीमेंट में तैनात राकेश साल 1996 में फौज में भर्ती हुए थे। उनकी शिक्षा राइंका सांकर सैंण में हुई। वह तीन जनवरी को छुट्टी पर आए थे और 9 जनवरी को वापस चले गए। पिछले तीन दिन से उनका फोन नहीं उठ रहा था। जिस कारण परिवार चिंतित था। लेकिन कल रात उन्हें राकेश की शहादत की खबर मिली।

महाशिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़े भक्त

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देहरादून। राजधानी देहरादून सहित प्रदेश भर के शिवालयों में महाशिवरात्री पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि पर नगरभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ देर रात्री से ही जुटने लगी थी। मंदिर खुलते ही भक्त भगवान शिव के जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजन करते नजर आए।
शिवालयों में देर रात से ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया है। मंदिरों में महिला मंडलियां भजन व शिव का भेष धारण कर बालक-बालिकाएं शिव तांडव करते नजर आए। जगह-जगह भक्तों द्वार शिव प्रसाद की व्यवस्था की गई थी।
मंगलवार को देहरादून के प्रमुख मंदिरों में टपकेश्वर, पृथ्वीनाथ मंदिर, किद्दूवाला-रायपुर स्थित शिवमंदिर, राजपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर बावड़ी, पलटन बाजार जंगम शिवालय, नागेश्वर मंदिर डाकरा, नेहरु कॉलोनी सनातम धर्म मंदिर, प्रेमनगर के सनातन धर्म मंदिर, धर्मपुर स्थित राधास्वामी मंदिर आदि जगहों पर मध्यरात्रि से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ लगी हुई थीं घंटियां और शंख व बम-बम के जयकारें के स्वर लगातार गूंज रह रहे थे।
भगवान भोले पर जल चढ़ाने के लिए महिला-पुरुष बेल पत्र, धतूरा व बेर लेकर कतारों में खड़े थे। भक्तों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए मंदिर सेवा दल व समाजसेवी संगठनों की ओर से विशेष व्यवस्था की गई थी। चकराता रोड स्थित शनिदेव मंदिर पर भक्तों शिव तांडव करते नजर आए। इसके साथ ही भक्तों के लिए खास प्रसाद की व्यवस्था की गई थी।
टपकेश्वर मंदिर में भक्तों के हुजूम को संभालने के लिए सेवादल के सदस्य तैनात रहे। सीसीटीवी व पुलिस की मदद से व्यवस्थाओं को बनाने में सहयोग लिया गया। मंदिर में भीड़ बढ़ने पर भक्तों को कतारबद्ध किया गया। ठीक 12 बजते ही मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खोल दिए गए। इसके बाद जलाभिषेक अनवरत जारी रहा। दूर दराज से आए भक्त जयबोले, बोल बम के उद्घोष लगाते हुए उत्साह से बढ़ते रहे।
सहारनपुर रोड स्थित श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में शाम को 2100 दीयों की भव्य रंगोली सजाई गई। इसके बाद दिगम्बर भागवत पुरी व पंडित भारत भूषण ने श्रद्धालुओं व सेवादारों के साथ पूजा अर्चना कर भगवान शिव का आह्वान किया। मध्य रात्रि में सेवादारों व श्रद्धालुओं द्वारा हरिद्वार से लाए गंगाजल व पूजा की 51 प्रकार की अन्य सामग्रियों से श्री पृथ्वीनाथ महादेव जी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामूहिक रुद्राभिषेक किया।
श्री सनातन धर्म मंदिर प्रेमनगर में महाशिवरात्रि पर्व पर तड़के जलाभिषेक शुरू हुआ। समिति पदाधिकारी रवि भाटिया के अनुसार जलाभिषेक के लिए मंदिर समिति की ओर से विशेष व्यवस्था की गई थी। गंगाजल से भरा एक टैंकर हरिद्वार से लाया गया है।
हल्द्वानी नगर के पिपलेश्वर महादेव, आंवलेश्वर महादेव, नीलियम कॉलोनी स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, मंगलपड़ाव स्थित प्राचीन शिव मंदिर, मुखानी शिव मंदिर, बेरीपड़ाव अष्टादश भुजा महालक्ष्मी मंदिर स्थित शिव मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटी। गोलापार के कालीचौड़ स्थित शिव मंदिर में आधी रात के बाद से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। यहां महाशिवरात्रि पर विशेष मेला लगता है। रानीबाग स्थित सिद्धेश्वर शक्तिपीठ मंदिर में भी भक्तों की कतार लगी रही।

10 साल के अस्तित्व ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मैडल से किया राज्य का नाम रोशन

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थाइलैंड के पटाया शहर में एशियन रोलर स्केटिगं स्पोर्ट्स एक्सपर्ट काउंसिल कमेटी जो एशिय़न देशों का संघ है, वहां के ओपन इंटरनेशन रूलर स्पोर्ट्स टूर्नामेंटमें में मूल रुप से उत्तरकाशी, चक्रगांव निवासी 10 साल के अस्तित्व डोभाल ने 10 फरवरी को 500 मीटर व 1000 मीटर स्केटिंग प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक और रिले रेस मे एक सिल्वर मैडल जीता।

अस्तित्व डोभाल देहरादून के हिल ग्रेंज स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ते है व बचपन से ही स्केटिगं का शौक रखते है। कई बार स्कूल, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर अस्तित्व ने प्रतियोगितअों में भाग लिया और मैडल जीते है ।

astitva dobhal

इस जनवरी माह में नेशनल स्केटिंग प्रतियोगिता के लिए उत्तराखंड रोलर स्केटिंग स्पोर्टस एक्सपर्ट काउंसिल कमेटी ने अस्तित्व का चयन किया। अस्तित्व के पिता विनोद डोभाल पेशे से बिजनेसमैन है और उनकी मम्मी योजिता डोभाल, बालावाल देहरादून के एक कॉलेज में असिसटेंट प्रोफेसर है। विनोद डोभाल बताते है कि, “अस्तित्व का चयन अंडर 12 वर्ग में इंटरनेशनल प्रतियोगिता के लिए हुआ है,पिछले 2-3 साल से वो स्केटिंग में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रहा है।” वहीं अस्तित्व की मां योगिता बताती है कि, “स्केटिंग में अस्तित्व का शौक स्कूल में बना और वो हर शाम एक घंटा स्केटिंग को देता है।”

आज भी देहरादून में स्केटिंग को एक स्पोर्ट की तरह लेने के लिए कोई सुविधा नही होने के कारण बच्चों को शौक होते हुए भी सीमित संसाधनों से काम चलाना पड़ता है जो दोनों बच्चो और उनके अभिभावकों को निराश करता है।

अस्तित्व के पिता कहते है, “देहरादून में सीमित सुविधा होने के बावजूद हमारे बच्चे अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर इतना अच्छा परफॉर्म करते है,हम यह चाहते है कि प्रदेश सरकार स्केटिंग के लिए भी हमे सुविधाएं दे ताकि आगे जाकर राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर हमारे बच्चे और बहुत से मैडल जीते और प्रदेश के साथ-साथ देश का नाम भी रौशन करे।”

अस्तित्व और उनके माता पिता उम्मीद करते है कि भविष्य मे अस्तित्व का हुनर और तराशा जाए ताकि आने वाले सालों में अगर ओलंपिक से स्केटिंग को खेल का दर्ज़ा मिले तो अस्तित्व जैसे हजारों बच्चे देश के लिए गोल्ड मैडल जीत सके।