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रोपवे से केदारनाथ पहुंचाने की तैयारी हुई तेज

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अगर सब कुछ ठीक रहा तो द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक श्री केदारनाथ धाम की यात्रा में न तो मौसम खलल बनेगा और न ही हेलीकॉप्टरों की धमाचौकड़ी से केदारनाथ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के वन्य जीवन में परेशानी आएगी। इसे देखते हुए केदरनाथ के केदारपुरी के लिए अब रोपवे (रज्जु मार्ग) निर्माण को मंथन तेज हो गया है। इसके लिए एक बार फिर उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात हो रही है, जिसके तहत 2015 में सर्वे किया गया था। पहले चरण में लिनचोली से केदारनाथ और अगले चरण में रामबाड़ा से लिनचोली तक रोपवे प्रस्तावित है।

करीब 11 किमी लंबे इन रोपवे के अस्तित्व में आने से गौरीकुंड से केदारनाथ तक का सफर एक घंटे में तय हो जाएगा, जबकि अभी तक इस दूरी को पैदल नापने में सात घंटे लगते हैं। हालांकि हेलीकॉप्टर इसका विकल्प है, लेकिन इसका किराया अधिक होने के कारण कई यात्री इसके द्वारा सफर करने में सक्षम नहीं हैं। रोपवे बनने से श्रद्धालुजन किसी भी मौसम में आसानी से और कम किराये पर बाबा केदार के दर्शनों को पहुंच सकेंगे।

2013 में आई आपदा के बाद केदारपुरी के लिए रोपवे निर्माण की मांग ने जोर पकड़ा। 2014 में तत्कालीन सरकार ने दो चरणों में रोपवे की मंजूरी देने के साथ ही 80 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया। इसके बाद पर्यटन विभाग ने दो बार टेंडर आमंत्रित किए, मगर किसी भी कंपनी ने रुचि नहीं ली। नतीजतन, बात आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद 2015 में लिनचोली से केदारनाथ और 2016 में रामबाड़ा से लिनचौली तक सर्वे कराया गया, लेकिन बात सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाई।

इस बीच केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टरों का आना जाना भी खूब होने लगा। इस पर भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) ने केदारनाथ से सटी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में हेलीकॉप्टरों की उड़ान से वन्य जीवन पर पड़ने वाले असर के मद्देनजर अध्ययन किया। डब्ल्यूआइआइ ने अपनी रिपोर्ट में केदारनाथ के लिए हेली सेवाओं को नियंत्रित करने और इसके विकल्प के रूप में रोपवे का सुझाव शासन को दिया।

अब जब एक बार फिर एनजीटी ने केदारनाथ की हेलीकाप्टर सेवा पर सवाल उठाए है तब रोपवे के विकल्प पर गंभीरता से मंथन चल रहा है।

उत्तराखंड में बड़े प्रशासनिक फेरबदल में आईएएस, आईपीएस के हुए तबादले

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उत्तराखंड में सोमवार को आईएएस और आईपीएस की जिम्मेदारियों में हुए बड़े फेरबदल:

आईएएस फेरबदल

  • डा.एस रामास्वामी- केंद्रीय पोषित योजनाएं उच्च शिक्षा तथा कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग वापस लिये गये
  • रणवीर सिंह- नये विभाग – अपर मुख्य सचिव,प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा
  • ओमप्रकाश- नये विभाग-अपर मुख्य सचिव,लोक निर्माण तथा राज्य संपत्ति
  • राधा रतूड़ी- नये विभाग- प्रमुख सचिव, कार्मिक, सर्तकता,सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एंव जनसेवा,महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास
  • मनीषा पवार-नये विभाग- प्रमुख सचिव उद्योग
  • डा.उमाकांत पंवार- प्रमुख सचिव उर्जा,वैकल्पिक उर्जा वापस लिये गये। नये विभाग- प्रमुख सचिव,केंद्रीय पोषित योजनाएं,कार्यक्रम क्रियान्वयन,जलागम खेल एंव परिवहन आयुक्त परिवहन तथा मुख्य परियोजना निदेशक,जलागम
  • आनंद वर्धन- प्रमुख सचिव जलागम तथा मुख्य परियोजना निदेशक,जलागम वापस लिये गये। नये विभाग- प्रमुख सचिव खनन तथा पुनर्गठन
  • डा.भूपिन्दर कौर औलख- सचिव, राज्यपाल,महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास,समाज कल्याण,अध्यक्ष,बहुउद्देशिय वित्त एंव विकास निगम तथा अध्यक्ष,अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम वापस लिये गये।
  • अमित सिंह नेगी- नये विभाग-सचिव,गोपन,गन्ना-चीनी उद्योग एवं आयुक्त,कर
  • चंद्रसिंह नपलच्याल- सचिव राज्य सम्मपत्ति,परिवहन तथा आयुक्त,परिवहन,वापस नये विभाग- सचिव समाज कल्याण,अल्पसंख्यक कल्याण,अध्यक्ष बहुउद्देशिय वित्त एंव विकास निगम तथा अध्यक्ष, अल्पसंख्यक,कल्याण एवं वक्फ विकास निगम
  • आर.मीनाक्षी सुंदरम- नये विभाग- सचिव, पर्यटन तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी,पर्यटन विकास परिषद,धर्मस्व एवं संस्कृति से
  • विनोद शर्मा- सचिव गन्ना, चीनी विबाग वापस से हटाया, नये विभाग- सचिव,प्रोटोकाल एंव उच्च शिक्षा
  • शैलेश बघोली- प्रभारी सचिव,पर्यटन,खनन,प्रटोकाल,संस्कृति,धर्मस्व,खेल युवा कल्याण,ग्रामीण अभियंत्रण सेवा,ग्रमीण सड़के एवं ड्रेनेज निदेशक,खेल तखा मुख्य कार्यकारी अधिकारी,पर्यटन विकास परिषद विभाग वापस। नये विभाग: प्रभारी सचिव आवास,आयुक्त आवास,मुख्य प्रशासन,उत्तराखंड आवास एंव नगर विकास प्राधिकरण
  • डी.सैंथिल पांण्डियन- नये विभाग- प्रभारी सचिव,कृषि उद्धान एंव ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
  • राधिका झा- नये विभाग-प्रभारी सचिव, उर्जा एवं वैकल्पिक उर्जा
  • अरविंद सिंह ह्यांकी- प्रभारी सचिव,गोपन,कार्मिक,सतर्कता,लोक निर्माण,सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा तथा लोक शिकायत वापस लिया गया, नये विभाग- प्रभारी सचिव, वन एंव पर्यावरण
  • उषा शुक्ला- प्रभारी सचिव पुर्नगठन वापस लिया गया।नये विभाग- प्रभारी सचिव संस्कृत शिक्षा
  • मंगेश घिल्डियाल- जिलाधिकारी बागेश्वर से हटा कर जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
  • रंजना- जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से हटाकर जिलाधिकारी बागेश्वर
  • आशीष जोशी- अपर सचिव,नियोजन,सामान्य प्रशासन तथा अल्पसंख्यक कल्याण वापस लिया गया।नये विभाग:- जिलाधिकारी चमोली
  • विनोद कुमार सुमन- जिलाधिकारी चमोली से हटाकर बाध्य प्रतीक्षा

 

आईपीएस फेरबदल

  • यशवन्त सिंह- अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय अभिसूचना विभाग, हल्द्वानी
  • अजय सिंह- अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ, देहरादून
  • प्रमेन्द्र सिंह डोबाल-  उपसेनानायक, 40वी वाहिनी पीएसी हरिद्वार
  • ममता वोहरा-  अपर पुलिस अधीक्षक, नगर हरिद्वार
  • प्रदीप कुमार राय-  अपर पुलिस अधीक्षक नगर देहरादून
  • हरीश चन्द्र सती- अपर पुलिस अधीक्षक, नैनीताल
  • अरुणा भारती- उपसेनानायक, एटीसी, हरिद्वार
  • शाहजहां जावेद खान- पुलिस महानिदेशक के सहायक, पुलिस मुख्यालय, देहरादून
  • प्रकाश चन्द्र आर्य- अपर पुलिस अधीक्षक, यातायात एवं अपराध, हरिद्वार
  • अमित श्रीवास्तव-  अपर पुलिस अधीक्षक, हल्द्वानी
  • दलीप सिंह कुंवर- पुलिस अधीक्षक,पुलिस मुख्यालय, देहरादून
  • पी रेणुका देवी-  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अल्मोड़ा
  • नारायण सिंह नपल्चयाल- पुलिस अधीक्षक, सीआईडी मुख्यालय, देहरादून
  • विमला गुंज्याल- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, टिहरी
  • मुख्तार मौहसिन- सेनानायक, 31वीं वाहिनी, अधमसिंह नगर
  • निवेदता कुकरेती कुमार- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून
  • रिधिम अग्रवाल- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,एसटीएफ, उत्तराखंड
  • अजय जोशी- सहायक पुलिस महानिरिक्षक, पीएंडएम पुलिस मुख्यालय, देहरादून
  • जगतराम जोशी- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी
  • स्वीटी अग्रवाल- पुलिस अधीक्षक, अधिसूचना देहरादून
  • मुकेश कुमार- प्रभारी पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़

 

सीएम जनता कार्यक्रम में 200 से अधिक लोगों की समस्याओं का निस्तारण

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जनता की कसौटियों पर खरा उतरने के लिए सीएम रावत हर महीने के पहले और तीसरे सोमवार को जनता से मिलेगें और इसी कड़ी में सोमवार को सीएम कैम्प कार्यालय के जनता दर्शन हाॅल में आम जन की शिकायतों व समस्याओं के निस्तारण के लिए जनता दर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक-एक कर 200 से अधिक फरियादियों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की और मौके पर मौजूद अधिकारियों को समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए। जनता दर्शन के लिए मुख्यमंत्री का 1 घंटे का समय निर्धारित था परंतु मुख्यमंत्री श्री रावत तीन घंटे से भी अधिक समय तक कार्यक्रम में मौजूद रहे और लगभग सभी फरियादियों की समस्याओं को पूरी गम्भीरता के साथ सुना। जनता दर्शन में मुख्य सचिव एस रामास्वामी, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश सहित शासन व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

जनता दर्शन कार्यक्रम में पेश कि गई शिकायते इस प्रकार है-
  •  पेट्रोल में हेराफेरी की शिकायत आने पर मुख्यमंत्री ने पैट्रोल पम्पों में घटतौली की जांच के लिए अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए।
  • एक शिकायतकर्ता द्वारा प्राईवेट जमीन पर भूमाफिया द्वारा सड़क बना दिए जाने व कुछ अन्य शिकायतकर्ताओं द्वारा भी भू माफिया संबंधी शिकायत किए जाने पर मुख्यमंत्री रावत ने शिकायतें सही पाए जाने पर संबंधित भूमाफिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
  • एक व्यक्ति द्वारा यह कहे जाने पर कि 50 गज के प्लाॅट में मकान बनाने में भी अड़चनें पैदा की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने एमडीडीए के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि आम जन को बिना वजह मकान बनाने में तंग न किया जाए।
  • एक निर्धन बालक विशाल रस्तोगी के ईलाज के लिए मुख्यमंत्री ने 50 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की।
  • सेवानिवृत संबंधी लाभ समय पर न मिलने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में ढीलवाही बरदाश्त नहीं की जाएगी।
  • एक शिकायत यह आने पर कि पद न होने पर भी स्थांनतरण कर दिया गया, मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
  • वर्ष 2013 की आपदा में ब्याज माफी की घोषणा के बावजूद कुछ लोगों को लाभ न मिलने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत सही पाए जाने पर राज्य सरकार स्वयं ब्याज वहन करेगी।
  • वन गुज्र्जरों की समस्याओं पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने जल्द ही एक बैठक अलग से बुलाए जाने के निर्देश दिए।
  • पेंशन संबंधी मामलों पर अगले 15 दिन में पेंशन अदालत लगाई जाएगी।

सीएम रावत ने अधिकारियों को लोगों की शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगाों की वाजिब शिकायतों के हल में किसी तरह की लापरवाही को बरदाश्त नहीं किया जाएगा।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज तीन घंटे से भी अधिक समय तक लोगों की शिकायतों व समस्याओं को न केवल सुना बल्कि अधिकांश के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों  को टाईम बाउंड तरीके से आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। सुबह से ही आम जन अपनी शिकायतों को लेकर मुख्यमंत्री आवास कार्यालय पहुंचना शुरू हो गए। सभी लोगों की शिकायतों को बाकायदा रजिस्टर्ड किया गया। फिर एक-एक कर शिकायताकर्ताओं का नाम पुकारा गया। बारी-बारी से लोगों ने मुख्यमंत्री के रूबरू होकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने भी लोगों की बातों को पूरे गौर से सुना और आवश्यक निर्देश दिए।

ज्वालापुर में अध्यापकों ने स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ खोला मोर्चा

ज्वालापुर हरिद्वार के सेंट मेरी स्कूल के अद्यापक मैनेज्मेंट से विरोध के चलते हड़ताल पर चले गये है। ज़िला अधिकारी से हुई बातचीत में सभी स्टाफ़ को हड़ताल समाप्त करने का फ़ैसला सुनने को मिला था। इसके साथ साथ ही ये आश्वसन भी मिला की वेतन विवाद के संबंध में मैनेज्मेंट से बात की जायेगी। इस स्कूल में लगभग 3000 छात्र हैं, सभी अभीभावकों से इस साल 12% फीस बढ़ा कर जमा कराई गईं। इस धन राशि से शिक्षकों के वेतन में बड़ी बढ़ोतरी होनी थी लेकिन मैनेज्मेंट ने सिर्फ 1500 से 2000 की बढ़ोतरी से ही वेतन बँटवा दिया, जिसके कारण शिक्षक विरोध स्वरूप धरने पर आ गये।

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मैनेज्मेंट ने स्कूल के शिक्षकों के विरोध का स्कूल के पेय जल व शौचालयो सुविधाओं को बंद कर के जवाब दिया। शिक्षकों का कहना है की ईसाई मिशनरी की ये अध्धयन संस्था शिक्षकों का शोषण करने में कभी भी पीछे नही रहती। नए स्टाफ़ को मैनेज्मेंट सरकार द्वारा निर्धारित मान देय से भी वंचित रखती है। शिक्षक बच्चों के भविष्य का निर्माता होता है पर ईसाई मिशनरी की संस्था ने तो शिक्षकों के भविष्य पर ही प्रशन चिन्ह लगा दिया है।

बीजेपी के लिये अपने बने सौतेले! हरक सिंह ने सरकार को खड़ा किया कटघरे में

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18 मार्च को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद डबल इंजन का दावा करने वाली सरकार के दूसरे इंजन के लोको पॉयलेट ने शपथ ली थी। त्रिवेंद्र सिंह रावत को उत्तराखंड राज्य का सीएम बनाया गया इसके साथ ही उन्होने अपनी टीम गठित भी की। उस टीम में कांग्रेस से भाजपा में आए दिग्गजो को भी जगह दी गई। हरीश रावत सरकार को एक बार घुटनों के बल बैठाने की कोशिश कर चुके हरक सिंह रावत को वन, पर्यावरण एवं श्रम मंत्रालय जैसे मंत्रालयों की बागडोर सौंपी गई।

लेकिन लगता है भाजपा से हरक सिंह रावत का मोह भंग हो गया है। आज देहरादून के नगर निगम में हरक सिंह रावत ने ऐसा बयान दिया है जो मुमकिंन है राज्य की टीएसआर सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को असहज कर दे।

गौरतलब है कि अभी त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को तीन महीने पूरे नहीं हुए तीन दिन बाकी हैं बावजूद इसके जज्बाती हरक सिंह रावत ने बड़ा बयान दिया है। हरक ने कहा कि उत्तराखंड अलग राज्य बनने का कोई फायदा नहीं हुआ है। हमने उत्तराखंड मांग कर गलती की है। वहीं हरक ने आज उन दोनों नेताओं भी विकास करने में सक्षम बताया जिनसे कभी उनका 36 का रिश्ता रहा है।

बहरहाल हरक सिंह ने कहा कि प्रदेश का विकास सिर्फ दो ही नेता कर सकते थे। डा. रमेश पोखरियाल निशंक और दूसरे हरीश रावत। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि भाजपा ने डबल इंजन मांगा था और उत्तराखंड की जनता ने मजबूत इंजन दिया। बावजूद इसके केंद्र का इंजन कमजोर दिखाई दे रहा है।

माना जा रहा है कि हरक ने केंद्र के इंजन के बहाने मौजूदा सीएम त्रिवेंद्र रावत पर सवाल उठाया है। क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के लिए भाजपा आलाकमान की पसंद की कसौटी पर त्रिवेंद्र रावत फिट बैठे।

हमेशा से ही बगावत के लिए पहचाने जाने वाले हरक सिंह ने एक बार फिर प्रहार किया है वो भी अपनी ही पार्टी पर। देखना यह होगा कि आगे आने वाले समय में टीएसआर इसका जवाब किस तरह से देते हैं।

 

नही थम रहे गंगा में हादसे,पिछले 5 सालों में 135 पर्यटक गंवा चुके हैं अपनी जान

लहरो की रोमांच का खेल रिवर राफ्टिंग ने ऋषिकेश की पहचान देश -विदेश में इस खेल से बनायीं है, लेकिन पिछले कुछ सालो से यहाँ के राफ्टिंग जोन में हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे है। दिल्ली उत्तराखंड में पर्यटन आर्थिक रीड माना जाता है ऐसे में साहसिक पर्यटन की पहचान पूरे विश्व में रिवर राफ्टिंग से होती है। बीते कुछ सालो में इस साहसिक खेल पर हादसों का ऐसा धब्बा लग गया है जिस में मौज-मस्ती के लिए आया पर्यटक अपनी जान तक गवा चुके है लेकिन हादसे है की रुकने के नाम नहीं ले रहे है।

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बात करें बीते हफ्ते की जो पर्यटकों की जान पर भारी पड़ा है और 6 लोगों की गंगा में डूबने से मौत हो चुकी है ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक पर्यटक मौत के मुंह में समाते रहेंगे और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे रहेंगे। पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड की खास पहचान गंगा में रिवर राफ्टिंग है जिसके लिए ऋषिकेश का रिवर राफ्टिंग जोन देश विदेश में अपनी खास पहचान रखता हैं। गंगा के इस क्षेत्र में वर्ड फेमस 7 इसे रैपिड है जिनका रोमांच पर्यटकों को जिन्दगी भर याद रहता है ,लेकिन बीते कुछ समय से गंगा के ये रैपिड पर्यटकों को की जान के दुश्मन बन गए है जिस में आये दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। पिछले 5 सालों के आंकड़ों को देखा जाए तो गंगा नदी में डूबकर 138 लोग अपनी जान गवा चुके हैं तो वही पिछले 1 महीने में 6 लोगों ने गंगा में डूबने से अपनी जान गवाई है। राफ्टिंग के लिए आए 6 लोगों की गंगा में नहाते वक्त मौत हुई है लेकिन हादसे हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इधर पुलिस प्रशासन का कहना है कि हम इस पूरे क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को जागरुक करते हैं लेकिन बाहर से आए हुए पर्यटक नियमों की अनदेखी करके गंगा में नहाने के लिए उतर जाते हैं जिसके चलते हादसे हो जाते हैं।

पिछले एक माह में गंगा में डूबने से 6 की मौत आंकड़ों पर एक नजर-

  • 13 मई :-    गंगा में डूबने से सुभाष( 34 )निवासी दिल्ली की मौत
  • 12 मई :-    मुनि की रेती में धर्मपाल भंडारी (26) निवासी शिवपुरी की गंगा में डूबने से मौत
  • 7 मई :-      बैराज रोड क्षेत्र में गंगा में डूबने से बलवंत बिष्ट बिष्ट(30) निवासी मुरादाबाद की मौत
  • 4 मई :-      शिवपुरी में गंगा में नहाते समय डूबने से हरीश नौटियाल (25) निवासी टिहरी गढ़वाल की मौत
  • 23 अप्रैल:-  मुनि की रेती में गंगा में डूबने से वीरेंद्र (42) निवासी यमकेश्वर पौड़ी की मौत
  • 30 अप्रैल :-  शिवपुरी क्षेत्र में डूबने से नीरज (26) निवासी गुरुग्राम फरीदाबाद की मौत

बीच कैंपिंग में आए हुए लोग गंगा और उसकी सहायक नदियों पर उतर कर कभी फोटो खिंचाने कभी नहाने के चलते गहरे पानी में समा जाते हैं जिसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और बीच कैंपिंग संचालकों की बनती है जो अपने यहां रुके पर्यटकों को गंगा में नहाने से नहीं रोक पाते। गौरतलब है कि गंगा बीच कैंपिंग में नियमों को ताक पर रखकर पर्यटक शराब और नशाखोरी की महफिल सजाते हैं जो पर्यटकों की मस्ती पर भारी पड़ती है और लगातार गंगा में डूबने से हादसे बढ़ते जाते हैं। ऐसे में वन विभाग का कहना है कि हम नियमों और कायदों की अनदेखी पर जल्द ही एक टीम बनाकर कार्यवाही करेंगे जिसे सभी राफ्टिंग संचालकों और बीच कैंपिंग संचालकों को सकती से को सख्ती से पालन करना पड़ेगा।

नियमो और कायदों की अनदेखी कर गंगा में रिवर राफ्टिंग करना पर्यटकों की जान पर भारी पड रहा है ,लगातार पर्यटन जोन में हो रहे हादसे यहाँ के राफ्टिंग उद्योग के लिए खतरनाक साबित हो रहे है जिसके लिए इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को सचेत हो जाना चाहिए और बीच कैंपों के साथ-साथ रिवर राफ्टिंग के लिए भी स्ख्ति से नियम कायदों का पालन होना चाहिए।

 

गुजरात से आए 3 टूरिस्ट गंगा में डूबे,खोज जारी

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यमकेश्वर प्रखंड के सिरासु क्षेत्र में घूमने आए 15 लोगों के ग्रुप में शामिल तीन लोग नहाते हुए डूब गए जिनका गंगा में पता नहीं चल पाया है। जानकारी के मुताबिक गुजरात से कुछ लोगों का ग्रुप वीकेंड पर सिरासु स्थित एक रिसोर्ट में ठहरा था ।ग्रुप के सदस्य रविवार को सिरासु गंगा तट नावघाट के समीप वॉलीबॉल खेल रहे थे। इस बीच इन सभी दोस्तों ने गंगा में नहाने की तैयारी की।

सभी लोगों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और पानी में चेन बनाकर उतर गए। इस स्थान पर पानी ऊपर से शांत है मगर अंदर से काफी तेज प्रवाह है। पानी में उतरते ही तीन युवक अब्बास भाबरा वाला पुत्र मुस्तफा भाई 23 वर्ष निवासी साइका अपार्टमेंट गोदी रोड जिला दाहोद गुजरात, हुसैन गागरेडी पुत्र सफदर भाई 23 वर्ष निवासी सैफी मोहल्ला दाहोद गुजरात और मोहित रावत पुत्र एमएस रावत 25 वर्ष निवासी एच ब्लॉक कांदिवली रोड निकट बिरला मंदिर नई दिल्ली गंगा की धारा में बह गए ।

इनका एक दोस्त अंकित भी जब बहने लगा तो वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने अंकित को बचा लिया। मौके पर थाना लक्ष्मण झूला थाना मुनिकीरेती की टीम सहित एसडीआरएफ की टीम गंगा में डूबे युवकों को तलाश रही है।

अब ड्रोन करेंगे बाघों की निगरानी

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बाघों के लिहाज से संवेदनशील कॉर्बेट टाइगर (सीटीआर) रिजर्व की निगहबानी अब थल के साथ ही नभ से भी होगी। सुरक्षा के लिए अब सीटीआर में ड्रोन से भी नजर रखी जाएगी। ड्रोन जहां संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देगा, वहीं जंगल के दूरस्थ क्षेत्र में लगने वाली आग की लोकेशन भी बताएगा।

बाघों की मौजूदगी के चलते सीटीआर में हमेशा शिकारी घुसपैठ के प्रयास में रहते हैं। जमीन में वन कर्मी जंगल की निगहबानी तो करते ही हैं। साथ ही अब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण दिल्ली (एनटीसीए) ने सीटीआर को तीन ड्रोन देने के लिए हामी भरी है। एनटीसीए ने भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून को इसके लिए धनराशि जारी की थी। डब्ल्यूआइआइ ने यह ड्रोन खरीदकर कॉर्बेट प्रशासन को देने हैं। इसमें से एक ड्रोन कॉर्बेट प्रशासन को मिल गया है। तीनों ड्रोन से वन कर्मी जंगल के संवेदनशील इलाकों की मॉनिटरिंग करेंगे। ऊचाइयों में उड़ते ड्रोन जंगल की सीधी तस्वीर भी वन कर्मियों को भेजेंगे। अक्सर ऊंचाई वाले व दूरस्थ क्षेत्र में वन कर्मी नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में यह ड्रोन उस क्षेत्र की मॉनिटरिंग के लिए मददगार साबित होंगे। इसके अलावा जंगल में कई इलाके ऐसे हैं जहां आग लगी रहती है। लेकिन वनकर्मियों को जानकारी नहीं हो पाती है। ड्रोन से निगहबानी के बाद वन कर्मी आग दिखने पर आग को काबू कर सकते हैं।

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ई सर्विलांस से भी रहती है नजरः कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ क्षेत्र में ई सर्विलांस सिस्टम से भी संदिग्धों पर नजर रखी जाती है। ऊंचे टावरों में बेहतर गुणवता के कैमरे लगाए गए हैं। जो लाइव तस्वीर कालागढ़ स्थित कार्यालय को भेजते हैं। यदि कैमरों में कोई दिखता है तो तत्काल संबंधित क्षेत्र के वनकर्मी को आगाह कर दिया जाता है।

दो ड्रोन अभी डब्ल्यूआइआइ से मिलने हैं। यह सुरक्षा व्यवस्था व अग्नि दुर्घटनाओें में मददगार साबित होंगे। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से नदी नालों में विशेष नजर रखी जाएगी।

ट्रक से कुचल कर कैदी की मौत 

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हल्द्वानी मे हत्या के मामले में वांछित बंदी की जेल परिसर में ट्रक से कुचल कर मौत हो गयी। जेल में शौचालय निर्माण के लिए ईट उताकर लौट रहे ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। जेल प्रशासन घायल बंदी को बेस अस्पताल ले गए, लेकिन यहां कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने बंदी का शव कब्जे में लेकर परिजनों को सूचित कर दिया है। वहीं डिप्टी जेलर की तहरीर पर ट्रक चालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

जेल में इन दिनों शौचालय निर्माण चल रहा है। शनिवार सुबह ईट से भरा ट्रक जेल में पहुंचा। करीब 10 बजे ईट उतारने के बाद चालक ट्रक लेकर वापस लौट रहा था। जेल परिसर में ही अस्पताल भवन के पास संदिग्ध परिस्थिति में हत्यारोपी बंदी दीन दयाल(40) पुत्र पुत्तू लाल, ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आ गया। इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई। जेल प्रशासन ने तुरंत चालक को हिरासत में लेकर दीन दयाल को बेस अस्पताल पहुंचाया। यहां कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गई। एसएसआइ एमएस दसौनी ने बताया कि शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं जेल प्रशासन ने बताया कि हादसे के समय दीन दयाल फल लेकर वापस लौट रहा था।

दीन दयाल पर खटीमा थाने में वर्ष 2014 में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। वह 15 दिसंबर 2014 को उपकारागार में आया था। देर शाम खटीमा से दीन दयाल के परिजन पहुंच गए। डिप्टी जेल पवन कोठारी की तहरीर पर ट्रक चालक ओम प्रकाश निवासी सिसौना, खजूरिया पीलीभीत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया। वहीं ट्रक को कोतवाली लाकर सीज कर दिया गया।

..तो कहीं जेल से भागने की फिराक में तो नहीं था दीन दयाल

जेल प्रशासन हादसे को लेकर जो कहानी बता रहा है, उसमें कई झोल नजर आ रहे हैं। जिस स्थान पर हादसा हुआ, उससे कुछ ही दूरी पर शौचालय निर्माण हो रहा है। ईट के ढेर के स्थान से लौटते समय पुरुष बैरक की चाहारदीवारी के गेट पर मोड़ है। मोड़ से 20 मीटर की दूरी पर ही दीन दयाल ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आ गया। चर्चा है कि ट्रक के नीचे छिपकर दीन दयाल जेल से फरार होने की फिराक में होगा। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से गिरकर वह पिछले टायर की चपेट में गया होगा। हालांकि जेलर संजीव ह्यांकी का कहना है कि दीन दयाल फल लेकर लौट रहा था, इसी दौरान वह अचानक टायर की चपेट में आ गया।

जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक दीन दयाल से मिलने के लिए काफी समय से उसकी पत्‍‌नी-बच्चे व रिश्तेदार नहीं आए थे। 25 सितंबर 2016 को उसकी पत्‍‌नी माया, बेटा ओंकार व एक अन्य ने दीनदयाल से मुलाकात की थी। इसके बाद 25 दिसंबर 2016 को एक रिश्तेदार महिला सुशीला व सत्यपाल मौर्य निवासी पीलीभीत उससे मिलने आए थे। तब से उससे मिलने के लिए जेल में कोई नहीं आया था।

महिला दारोगा की फाड़ी वर्दी

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कोर्ट के आदेश पर एक परिवार में जसपुर मे जमीन विवाद मामले की जांच करने गई एक महिला दरोगा से मारपीट एवं वर्दी फाड़ने का मामला प्रकाश में आया है। सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसएसपी ने पुलिस क्षेत्राधिकारी को मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं आरोपी महिला के पति ने महिला दरोगा की वर्दी उतरवाने की चेतावनी भी दी।

मोहल्ला चांद मस्जिद, नई बस्ती, निवासी एक महिला का ब्लॉक रोड स्थित, ग्राम गांगूवाला में मकान है। इसके बंटवारे को लेकर पुत्रियों के साथ एक महिला का आपस में विवाद चल रहा है। आरोप है कि एक पुत्री ने मकान पर कब्जा कर रखा है, जबकि न्यायालय ने दोनों पुत्रियों को मकान आधा-आधा बांटने का निर्णय दिया था।

शुक्रवार को इसी मामले की जांच करने सिपाही सुरेश चंद्र के साथ महिला दरोगा रुचिका चौहान मौके पर पहुंची थी। बंटवारे के कागजों एवं मकान निरीक्षण के दौरान महिला उनके सामने ही अपनी पुत्री से लड़ने लगी। इस पर महिला दरोगा ने उन दोनों में बीच-बचाव कराने का प्रयास किया तो महिलाएं दरोगा पर ही हमलावर हो गईं। इस दौरान महिलाओं ने दरोगा की वर्दी के बटन तोड़ दिए। साथ ही वर्दी भी फाड़ दी।

इससे गुस्से में आई महिला दरोगा ने महिला के झापड़ जड़ दिया। इससे माहौल और गरमा गया। इस पर महिलाओं ने दरोगा से जमकर मारपीट शुरू कर दी और यही नहीं गाली-गलौज भी की। यहां तक कि महिला के पति ने महिला दरोगा की वर्दी उतरवाने की तक चेतावनी दे डाली।

मामला बढ़ता देख सिपाही ने किसी तरह बीचबचाव कराकर महिला दरोगा को कोतवाली लाया। सीओ राजेश भट्ट ने बताया कि महिला दरोगा का मेडिकल कराया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उसके बाद ही आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।