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बीजेपी के लिये अपने बने सौतेले! हरक सिंह ने सरकार को खड़ा किया कटघरे में

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18 मार्च को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद डबल इंजन का दावा करने वाली सरकार के दूसरे इंजन के लोको पॉयलेट ने शपथ ली थी। त्रिवेंद्र सिंह रावत को उत्तराखंड राज्य का सीएम बनाया गया इसके साथ ही उन्होने अपनी टीम गठित भी की। उस टीम में कांग्रेस से भाजपा में आए दिग्गजो को भी जगह दी गई। हरीश रावत सरकार को एक बार घुटनों के बल बैठाने की कोशिश कर चुके हरक सिंह रावत को वन, पर्यावरण एवं श्रम मंत्रालय जैसे मंत्रालयों की बागडोर सौंपी गई।

लेकिन लगता है भाजपा से हरक सिंह रावत का मोह भंग हो गया है। आज देहरादून के नगर निगम में हरक सिंह रावत ने ऐसा बयान दिया है जो मुमकिंन है राज्य की टीएसआर सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को असहज कर दे।

गौरतलब है कि अभी त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को तीन महीने पूरे नहीं हुए तीन दिन बाकी हैं बावजूद इसके जज्बाती हरक सिंह रावत ने बड़ा बयान दिया है। हरक ने कहा कि उत्तराखंड अलग राज्य बनने का कोई फायदा नहीं हुआ है। हमने उत्तराखंड मांग कर गलती की है। वहीं हरक ने आज उन दोनों नेताओं भी विकास करने में सक्षम बताया जिनसे कभी उनका 36 का रिश्ता रहा है।

बहरहाल हरक सिंह ने कहा कि प्रदेश का विकास सिर्फ दो ही नेता कर सकते थे। डा. रमेश पोखरियाल निशंक और दूसरे हरीश रावत। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि भाजपा ने डबल इंजन मांगा था और उत्तराखंड की जनता ने मजबूत इंजन दिया। बावजूद इसके केंद्र का इंजन कमजोर दिखाई दे रहा है।

माना जा रहा है कि हरक ने केंद्र के इंजन के बहाने मौजूदा सीएम त्रिवेंद्र रावत पर सवाल उठाया है। क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के लिए भाजपा आलाकमान की पसंद की कसौटी पर त्रिवेंद्र रावत फिट बैठे।

हमेशा से ही बगावत के लिए पहचाने जाने वाले हरक सिंह ने एक बार फिर प्रहार किया है वो भी अपनी ही पार्टी पर। देखना यह होगा कि आगे आने वाले समय में टीएसआर इसका जवाब किस तरह से देते हैं।

 

नही थम रहे गंगा में हादसे,पिछले 5 सालों में 135 पर्यटक गंवा चुके हैं अपनी जान

लहरो की रोमांच का खेल रिवर राफ्टिंग ने ऋषिकेश की पहचान देश -विदेश में इस खेल से बनायीं है, लेकिन पिछले कुछ सालो से यहाँ के राफ्टिंग जोन में हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे है। दिल्ली उत्तराखंड में पर्यटन आर्थिक रीड माना जाता है ऐसे में साहसिक पर्यटन की पहचान पूरे विश्व में रिवर राफ्टिंग से होती है। बीते कुछ सालो में इस साहसिक खेल पर हादसों का ऐसा धब्बा लग गया है जिस में मौज-मस्ती के लिए आया पर्यटक अपनी जान तक गवा चुके है लेकिन हादसे है की रुकने के नाम नहीं ले रहे है।

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बात करें बीते हफ्ते की जो पर्यटकों की जान पर भारी पड़ा है और 6 लोगों की गंगा में डूबने से मौत हो चुकी है ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक पर्यटक मौत के मुंह में समाते रहेंगे और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे रहेंगे। पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड की खास पहचान गंगा में रिवर राफ्टिंग है जिसके लिए ऋषिकेश का रिवर राफ्टिंग जोन देश विदेश में अपनी खास पहचान रखता हैं। गंगा के इस क्षेत्र में वर्ड फेमस 7 इसे रैपिड है जिनका रोमांच पर्यटकों को जिन्दगी भर याद रहता है ,लेकिन बीते कुछ समय से गंगा के ये रैपिड पर्यटकों को की जान के दुश्मन बन गए है जिस में आये दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। पिछले 5 सालों के आंकड़ों को देखा जाए तो गंगा नदी में डूबकर 138 लोग अपनी जान गवा चुके हैं तो वही पिछले 1 महीने में 6 लोगों ने गंगा में डूबने से अपनी जान गवाई है। राफ्टिंग के लिए आए 6 लोगों की गंगा में नहाते वक्त मौत हुई है लेकिन हादसे हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इधर पुलिस प्रशासन का कहना है कि हम इस पूरे क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को जागरुक करते हैं लेकिन बाहर से आए हुए पर्यटक नियमों की अनदेखी करके गंगा में नहाने के लिए उतर जाते हैं जिसके चलते हादसे हो जाते हैं।

पिछले एक माह में गंगा में डूबने से 6 की मौत आंकड़ों पर एक नजर-

  • 13 मई :-    गंगा में डूबने से सुभाष( 34 )निवासी दिल्ली की मौत
  • 12 मई :-    मुनि की रेती में धर्मपाल भंडारी (26) निवासी शिवपुरी की गंगा में डूबने से मौत
  • 7 मई :-      बैराज रोड क्षेत्र में गंगा में डूबने से बलवंत बिष्ट बिष्ट(30) निवासी मुरादाबाद की मौत
  • 4 मई :-      शिवपुरी में गंगा में नहाते समय डूबने से हरीश नौटियाल (25) निवासी टिहरी गढ़वाल की मौत
  • 23 अप्रैल:-  मुनि की रेती में गंगा में डूबने से वीरेंद्र (42) निवासी यमकेश्वर पौड़ी की मौत
  • 30 अप्रैल :-  शिवपुरी क्षेत्र में डूबने से नीरज (26) निवासी गुरुग्राम फरीदाबाद की मौत

बीच कैंपिंग में आए हुए लोग गंगा और उसकी सहायक नदियों पर उतर कर कभी फोटो खिंचाने कभी नहाने के चलते गहरे पानी में समा जाते हैं जिसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और बीच कैंपिंग संचालकों की बनती है जो अपने यहां रुके पर्यटकों को गंगा में नहाने से नहीं रोक पाते। गौरतलब है कि गंगा बीच कैंपिंग में नियमों को ताक पर रखकर पर्यटक शराब और नशाखोरी की महफिल सजाते हैं जो पर्यटकों की मस्ती पर भारी पड़ती है और लगातार गंगा में डूबने से हादसे बढ़ते जाते हैं। ऐसे में वन विभाग का कहना है कि हम नियमों और कायदों की अनदेखी पर जल्द ही एक टीम बनाकर कार्यवाही करेंगे जिसे सभी राफ्टिंग संचालकों और बीच कैंपिंग संचालकों को सकती से को सख्ती से पालन करना पड़ेगा।

नियमो और कायदों की अनदेखी कर गंगा में रिवर राफ्टिंग करना पर्यटकों की जान पर भारी पड रहा है ,लगातार पर्यटन जोन में हो रहे हादसे यहाँ के राफ्टिंग उद्योग के लिए खतरनाक साबित हो रहे है जिसके लिए इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को सचेत हो जाना चाहिए और बीच कैंपों के साथ-साथ रिवर राफ्टिंग के लिए भी स्ख्ति से नियम कायदों का पालन होना चाहिए।

 

गुजरात से आए 3 टूरिस्ट गंगा में डूबे,खोज जारी

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यमकेश्वर प्रखंड के सिरासु क्षेत्र में घूमने आए 15 लोगों के ग्रुप में शामिल तीन लोग नहाते हुए डूब गए जिनका गंगा में पता नहीं चल पाया है। जानकारी के मुताबिक गुजरात से कुछ लोगों का ग्रुप वीकेंड पर सिरासु स्थित एक रिसोर्ट में ठहरा था ।ग्रुप के सदस्य रविवार को सिरासु गंगा तट नावघाट के समीप वॉलीबॉल खेल रहे थे। इस बीच इन सभी दोस्तों ने गंगा में नहाने की तैयारी की।

सभी लोगों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और पानी में चेन बनाकर उतर गए। इस स्थान पर पानी ऊपर से शांत है मगर अंदर से काफी तेज प्रवाह है। पानी में उतरते ही तीन युवक अब्बास भाबरा वाला पुत्र मुस्तफा भाई 23 वर्ष निवासी साइका अपार्टमेंट गोदी रोड जिला दाहोद गुजरात, हुसैन गागरेडी पुत्र सफदर भाई 23 वर्ष निवासी सैफी मोहल्ला दाहोद गुजरात और मोहित रावत पुत्र एमएस रावत 25 वर्ष निवासी एच ब्लॉक कांदिवली रोड निकट बिरला मंदिर नई दिल्ली गंगा की धारा में बह गए ।

इनका एक दोस्त अंकित भी जब बहने लगा तो वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने अंकित को बचा लिया। मौके पर थाना लक्ष्मण झूला थाना मुनिकीरेती की टीम सहित एसडीआरएफ की टीम गंगा में डूबे युवकों को तलाश रही है।

अब ड्रोन करेंगे बाघों की निगरानी

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बाघों के लिहाज से संवेदनशील कॉर्बेट टाइगर (सीटीआर) रिजर्व की निगहबानी अब थल के साथ ही नभ से भी होगी। सुरक्षा के लिए अब सीटीआर में ड्रोन से भी नजर रखी जाएगी। ड्रोन जहां संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देगा, वहीं जंगल के दूरस्थ क्षेत्र में लगने वाली आग की लोकेशन भी बताएगा।

बाघों की मौजूदगी के चलते सीटीआर में हमेशा शिकारी घुसपैठ के प्रयास में रहते हैं। जमीन में वन कर्मी जंगल की निगहबानी तो करते ही हैं। साथ ही अब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण दिल्ली (एनटीसीए) ने सीटीआर को तीन ड्रोन देने के लिए हामी भरी है। एनटीसीए ने भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून को इसके लिए धनराशि जारी की थी। डब्ल्यूआइआइ ने यह ड्रोन खरीदकर कॉर्बेट प्रशासन को देने हैं। इसमें से एक ड्रोन कॉर्बेट प्रशासन को मिल गया है। तीनों ड्रोन से वन कर्मी जंगल के संवेदनशील इलाकों की मॉनिटरिंग करेंगे। ऊचाइयों में उड़ते ड्रोन जंगल की सीधी तस्वीर भी वन कर्मियों को भेजेंगे। अक्सर ऊंचाई वाले व दूरस्थ क्षेत्र में वन कर्मी नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में यह ड्रोन उस क्षेत्र की मॉनिटरिंग के लिए मददगार साबित होंगे। इसके अलावा जंगल में कई इलाके ऐसे हैं जहां आग लगी रहती है। लेकिन वनकर्मियों को जानकारी नहीं हो पाती है। ड्रोन से निगहबानी के बाद वन कर्मी आग दिखने पर आग को काबू कर सकते हैं।

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ई सर्विलांस से भी रहती है नजरः कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ क्षेत्र में ई सर्विलांस सिस्टम से भी संदिग्धों पर नजर रखी जाती है। ऊंचे टावरों में बेहतर गुणवता के कैमरे लगाए गए हैं। जो लाइव तस्वीर कालागढ़ स्थित कार्यालय को भेजते हैं। यदि कैमरों में कोई दिखता है तो तत्काल संबंधित क्षेत्र के वनकर्मी को आगाह कर दिया जाता है।

दो ड्रोन अभी डब्ल्यूआइआइ से मिलने हैं। यह सुरक्षा व्यवस्था व अग्नि दुर्घटनाओें में मददगार साबित होंगे। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से नदी नालों में विशेष नजर रखी जाएगी।

ट्रक से कुचल कर कैदी की मौत 

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हल्द्वानी मे हत्या के मामले में वांछित बंदी की जेल परिसर में ट्रक से कुचल कर मौत हो गयी। जेल में शौचालय निर्माण के लिए ईट उताकर लौट रहे ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। जेल प्रशासन घायल बंदी को बेस अस्पताल ले गए, लेकिन यहां कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने बंदी का शव कब्जे में लेकर परिजनों को सूचित कर दिया है। वहीं डिप्टी जेलर की तहरीर पर ट्रक चालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

जेल में इन दिनों शौचालय निर्माण चल रहा है। शनिवार सुबह ईट से भरा ट्रक जेल में पहुंचा। करीब 10 बजे ईट उतारने के बाद चालक ट्रक लेकर वापस लौट रहा था। जेल परिसर में ही अस्पताल भवन के पास संदिग्ध परिस्थिति में हत्यारोपी बंदी दीन दयाल(40) पुत्र पुत्तू लाल, ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आ गया। इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई। जेल प्रशासन ने तुरंत चालक को हिरासत में लेकर दीन दयाल को बेस अस्पताल पहुंचाया। यहां कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गई। एसएसआइ एमएस दसौनी ने बताया कि शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं जेल प्रशासन ने बताया कि हादसे के समय दीन दयाल फल लेकर वापस लौट रहा था।

दीन दयाल पर खटीमा थाने में वर्ष 2014 में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। वह 15 दिसंबर 2014 को उपकारागार में आया था। देर शाम खटीमा से दीन दयाल के परिजन पहुंच गए। डिप्टी जेल पवन कोठारी की तहरीर पर ट्रक चालक ओम प्रकाश निवासी सिसौना, खजूरिया पीलीभीत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया। वहीं ट्रक को कोतवाली लाकर सीज कर दिया गया।

..तो कहीं जेल से भागने की फिराक में तो नहीं था दीन दयाल

जेल प्रशासन हादसे को लेकर जो कहानी बता रहा है, उसमें कई झोल नजर आ रहे हैं। जिस स्थान पर हादसा हुआ, उससे कुछ ही दूरी पर शौचालय निर्माण हो रहा है। ईट के ढेर के स्थान से लौटते समय पुरुष बैरक की चाहारदीवारी के गेट पर मोड़ है। मोड़ से 20 मीटर की दूरी पर ही दीन दयाल ट्रक के पिछले टायर की चपेट में आ गया। चर्चा है कि ट्रक के नीचे छिपकर दीन दयाल जेल से फरार होने की फिराक में होगा। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से गिरकर वह पिछले टायर की चपेट में गया होगा। हालांकि जेलर संजीव ह्यांकी का कहना है कि दीन दयाल फल लेकर लौट रहा था, इसी दौरान वह अचानक टायर की चपेट में आ गया।

जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक दीन दयाल से मिलने के लिए काफी समय से उसकी पत्‍‌नी-बच्चे व रिश्तेदार नहीं आए थे। 25 सितंबर 2016 को उसकी पत्‍‌नी माया, बेटा ओंकार व एक अन्य ने दीनदयाल से मुलाकात की थी। इसके बाद 25 दिसंबर 2016 को एक रिश्तेदार महिला सुशीला व सत्यपाल मौर्य निवासी पीलीभीत उससे मिलने आए थे। तब से उससे मिलने के लिए जेल में कोई नहीं आया था।

महिला दारोगा की फाड़ी वर्दी

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कोर्ट के आदेश पर एक परिवार में जसपुर मे जमीन विवाद मामले की जांच करने गई एक महिला दरोगा से मारपीट एवं वर्दी फाड़ने का मामला प्रकाश में आया है। सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसएसपी ने पुलिस क्षेत्राधिकारी को मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं आरोपी महिला के पति ने महिला दरोगा की वर्दी उतरवाने की चेतावनी भी दी।

मोहल्ला चांद मस्जिद, नई बस्ती, निवासी एक महिला का ब्लॉक रोड स्थित, ग्राम गांगूवाला में मकान है। इसके बंटवारे को लेकर पुत्रियों के साथ एक महिला का आपस में विवाद चल रहा है। आरोप है कि एक पुत्री ने मकान पर कब्जा कर रखा है, जबकि न्यायालय ने दोनों पुत्रियों को मकान आधा-आधा बांटने का निर्णय दिया था।

शुक्रवार को इसी मामले की जांच करने सिपाही सुरेश चंद्र के साथ महिला दरोगा रुचिका चौहान मौके पर पहुंची थी। बंटवारे के कागजों एवं मकान निरीक्षण के दौरान महिला उनके सामने ही अपनी पुत्री से लड़ने लगी। इस पर महिला दरोगा ने उन दोनों में बीच-बचाव कराने का प्रयास किया तो महिलाएं दरोगा पर ही हमलावर हो गईं। इस दौरान महिलाओं ने दरोगा की वर्दी के बटन तोड़ दिए। साथ ही वर्दी भी फाड़ दी।

इससे गुस्से में आई महिला दरोगा ने महिला के झापड़ जड़ दिया। इससे माहौल और गरमा गया। इस पर महिलाओं ने दरोगा से जमकर मारपीट शुरू कर दी और यही नहीं गाली-गलौज भी की। यहां तक कि महिला के पति ने महिला दरोगा की वर्दी उतरवाने की तक चेतावनी दे डाली।

मामला बढ़ता देख सिपाही ने किसी तरह बीचबचाव कराकर महिला दरोगा को कोतवाली लाया। सीओ राजेश भट्ट ने बताया कि महिला दरोगा का मेडिकल कराया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उसके बाद ही आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तीन लोगों की मौत का जिम्मेदार पुलिस का डंडा

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पुलिस की लापरवाही और पुलिसिया रौबाव के चलते एक बार फिर उधमसिंहनगर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा है। वाहन चैकिंग के दौरान बाईक सवारों को डंडे के बल पर रोकने के प्रयास के देर रात जसपुर क्षेत्र में बडा हादसा घटित हो गया जिसमें तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी। आपको बता दें कि पुलिस की चैकिंग के दौरान बाईक को रोकने के चलते किये गये डंडे के प्रयोग से बाईक सवार दो युवक सडक पर गिर गये पीछे तेजी से आते हुए ट्रक की चपेट में आने से दोनों बाईक सवारों की मौके पर मौत हो गयी जबकी दोनों बाईक सवारों को बचाने के चक्कर में ट्रक पलट गया और ट्रक चालक की भी मौके पर ही मौत हो गयी।

जसपुर कोतवाली क्षेत्र में हुई घटना के बाद क्षेत्र के लोग मौके पर पहुंच गये और पुलिस के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया, वहीं गुस्साये ग्रामीणों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। जिसमें कुछ सिपाही मामुली घायल हुए है जबकि पुलिस के कई वाहनों पर भी तोडफोड की गयी। दुर्घटना के बाद मचे इस कोहराम के चलते परिजनों ने शव को नेशनल हाईवे पर रखकर आरोपी  पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए जाम लगाया वहीं भीड को तितर बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठीयां भी भांजनी पडी। वहीं एसएसपी के मौके पर पहुंचने पर ग्रामीणों को कार्यवाही का आश्वासन देने के बाद किसी तरह से जाम खुलवाया गया, वहीं तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।

एसएसपी ने बताया कि आरोपी सिपाही और थाना इन्चार्ज को फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है वहीं मामले की मजिस्ट्रियल जांच के लिए जिलाधिकारी से वार्ती की गयी है। जबकि इससे पूर्व भी पुलिस हिरासत में पुछताथ के लिए लाए गये युवक की संदिग्ध मौत के मामले में पहले ही पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है, वहीं अब इस हादसे के बाद लोगों में पुलिस को लेकर आक्रोश बना हुआ है।

डोईवाला एडवेंचर ट्रेनिंग में 23 महिला अधिकारी भी शामिल

ग्वालियर के प्रशिक्षु अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों को साहसिक जोखिम तथा आपदाओं से निपटने का प्रशिक्षण बीएसएफ इंस्टिट्यूट ऑफ  एडवेंचर एंड एडवांस ट्रेनिंग  डोईवाला में दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को व्हाइट वाटर राफ्टिंग, ट्रैकिंग रिवर क्रॉसिंग ,रॉक ,क्लाइंबिंग कॉन्फिडेंस जंप, बॉडी सर्फिंग ,पैराग्लाइडिंग बेसिक ,स्लिद रिंग ,माउंटेन बाइकिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है ।

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डोईवाला स्थित बीएसएफ  इंस्टीट्यूट ऑफ एडवेंचर एवं एडवांस ट्रेनिंग में एसटीसी बी एस एफ बेंगलुरु के 111 प्रशिक्षु अधीनस्थ अधिकारी  प्रशिक्षणार्थियों को  साहसिक जोखिम तथा आपदा से निपटने  की ट्रेनिंग दी गई  साहसिक और जोखिम भरी इस एडवेंचर ट्रेनिंग में 23 महिला अधीनस्थ  अधिकारी भी शामिल   रही । बीएसएफ कमांडेंट आर के नेगी ने बताया की  डोईवाला के बीएसएफ ट्रेनिंग संस्थान में टेकनपुर के 788 और अन्य मुख्यालयों से आये 1755 प्रशिक्षु अधिकारी को  यह संस्थान साहसिक प्रशिक्षण की ट्रेनिंग दे चुका है संस्थान के अंतर्गत बी एस एफ के  प्रशिशु  जवानो को देश में होने वाली किसी भी  प्रकार की कठिन से कठिन चुनोतियो से निपटने ,किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा ,भीषण भूकंप जेसी त्ररासदियों से लोगो की जान बचाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

 

उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्टस का नया पता: गरुड़ा कैंप

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मनीष जोशी वो नाम है जिसने छोटी सी उम्र में बहुत से रिकार्ड अपने नाम कर लिए हैं। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के एक छोटे से गाव से संबंध रखने वाले मनीष ने ना केवल अपना नाम बल्कि अपने क्षेत्र का नाम भी रौशन किया है।

दून स्कूल में पढ़ने वाले मनीष जब मात्र 14 साल के थे तो इन्होंने एक एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जिसमें दो लोगों के साथ एक पायलट के बैठने की जगह थी। इस शानदार निर्माण के लिए मनीष का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में आ गया और इस खोज के बाद मनीष ने अपनी जिंदगी में कभी पीछे मुड़ कर नही देखा। एडवेंचर के क्षेत्र में हमेशा नए-नए चीजें करना मनीष का पहला पैशन था। स्पोर्टस बैकग्राउंड होने की वजह से खेल-कूद और एडवेंचर स्पोर्टस में हमेशा सबसे आगे रहने वाले मनीष ने इसको ही अपना कैरियर बना लिया और इसको ही जीने लगे। मनीष को अपने परिवार का साथ और प्यार मिला जिससे वह आगे बढ़ते रहे।

आए दिन नई सोच और नई खोज के साथ मनीष ने अपने गांव की भी तस्वीर बदलने का मन बनाया। लगभग 2 साल पहले अपनी इस सोच को आकार भी दिया। मनीष ने अपने गांव में एक विलेज एडवेंचर कैंप शुरु किया। नाम रखा ‘गरुड़ा एडवेंचर कैंप’। गरुड़ चिड़िया मनीष के कैंप का खास आकर्षण है।

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अगर मनीष के परिवार की बात करें तो उनके पिता मोहन जोशी को गढ़वाल का पहला उद्योगपति कहा जाता हैं क्योंकि सन् 1970 में अपनी बीएचईएल की नौकरी छोड़ कर वह अपने गांव वापस आ गए। उस वक्त शायद ही कोई टरपेनटाईन तेल को जानता हो। तब उन्होंने तारपीन के तेल की फैक्ट्री शुरु की। इस हिसाब से देखा जाए तो मनीष की प्रेरणा उनके पिता जी ही थे। मनीष कहते हैं “शायद रिस्क लेना हमारे परिवार के खून में ही था पहले पिता जी ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ी और मैंने खुद एडवेंचर करने के लिए अपनी जिंदगी पहाड़ में ही निकाल दी।”

विलेज एडवेंचर कैंपः

2 साल पहले मनीष ने पौड़ी से लगभग 20 किमी दूर अपना विलेज एडवेंचर कैंप शुरु किया जिसमें वह आने वाले टूरिस्ट को बहुत से नए अनुभव कराते हैं। इनमे कैंपिंग, विलेज एडवेंचर, बर्ड वाचिंग, एनिमल स्पाटिंग, पैराग्लाइडिंग, और काफी कुछ शामिल है। मनीष का मानना है कि “अंग्रजों के जाने के बाद उत्तराखंड में किसी भी नए हिल स्टेशन का नाम शायद ही सामने आया होगा, लेकिन यह जगह हिल स्टेशन के लिहाज से बेहद खूबसबरत है। उत्तराखंड के टूरिज्म डिर्पाटमेंट से कोई मदद ना मिलने की वजह से यह जगह अभी भी पर्यटकों के लिये दूर है।”

यह कैंप, दिल्ली से 7 घंटे दूर है और एक तरफ पौड़ी की खूबसूरती दूसरी तरफ लैंसडाउन की शांति के बीचों बीच है। इन दोनों जगहों के बीच बसा यह कैंप लोगों के लिए एक शांत और सुंदर माहौल देता है। मनीष का गरुणा एडवेंचर कैंप अपने यहां आने वाले पर्यटकों को ना केवल रोमाचक यादें देता हैं बल्कि आने वाले लोग यहां से नए रिश्ते भी लेकर जाते हैं।आसपास के गांव के लोगों ने भी इस कैंप में अलग अलग एक्टिविटी करके अपने लिये आमदनी का जरिया ढू़ढ लिया है। इनमे स्टोरी टेलिग, आर्ट एंड क्राफ्ट, ट्रेडिशनल म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना आदि शामिल है। 

तो अगर आप भी शहरों के शोर शराबे से दूर खूबसूरत और शांत हिमालय के रंगों से भरपूर जगह पर जाने का पॅोग्राम बना रहे हैं तो यह जगह आपको पसंद आएगी।

उत्तराखंड मे खुले में मांस बेचने पर लगेगा प्रतिबंध

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राज्य सरकार ने खुले में मांस बेचने पर प्रतिभंध लगाने का फैसला किया है। इस बाबत रविवार को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिये।

व्यापार मण्डल और आम जनता की शिकायत पर बुलाई गई बैठक में निर्देश दिये कि शहर में जिनके पास मांस बेचने के लाईसेंस है, उनके लिये खुले में मांस  बेचने पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि “इसके लिये व्यापक अभियान चलाया जायेगा। इससे सम्बंधित जिम्मेदार अधिकारियों के लापरवाही को गम्भीरता से लिया जायेगा।”  कैबिनेट मंत्री ने कहा कि “जो व्यापारी मांस बिक्री की शर्तें पुरी करते हैं, उनके लिये निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए जल्द लाईसेंस जारी किया जायेगा।” इस बारे में उन्होंने अवैध मांस बिक्री को प्रतिबन्धित करने के लिये निर्देश दिये है। 

नगर निगम को निर्देश देते हुए कौशिक ने कहा कि “खुले में मांस बिक्री करने वाले व्यपारियों के लिये गैर विवादित भूमि का चिन्हिकरण किया जाय।” इस चिन्हिकरण में प्रशासन, नगर निगम एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी संयुक्त रूप से सर्वे कर भूमि चयन करने का निर्देश दिया।