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500 क्विंटल पॉलिथीन का सामान व दुकानें सील

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प्रदेश को पाॅलीथीन मुक्त करने और नैनीताल हाईकोर्ट के पॉलिथीन मुक्त प्रदेश बनाने के आदेशों का पालन करते हुए आज लगातार दूसरे दिन नैनीताल प्रशासन ने थोक विक्रेताओं को कई कुंटल माल के साथ दबोच लिया है । हल्द्वानी में आज पालीथीन थोक बिक्री की शिकायत पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही करते हुए मण्डी के पास देशी शराब के गोदाम से भारी मात्रा में मिली पालीथीन जप्त कर ली है  इस छापेमारी में 500 कुन्टल पालीथीन 177 बोरो से बरामद हुई है । शनिवार को भी प्रशासन ने हल्द्वानी में ताबतोड़  छापेमारी करते हुए काफी बड़ी मात्रा में पॉलिथीन व् प्लास्टिक और थरमाकौल से बने उत्पादों को बरामद किया था।

बता दें की कुछ समय पहले उच्च न्यायालय नैनीताल ने प्रदेश में पॉलिथीन पर पूर्णतया रोक लगाने के राज्य सरकार को आदेश दिए थे जिसके बाद शासन ने प्रदेश में रोक लगते हुए न्यायालय को इस बात से अवगत भी कराया था । आज चुनाव से निबटने के बाद जिला प्रशासन ने कुमाऊ के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में बड़ी कार्यवाही की है । इससे पहले भी प्रशासन ने 5 दिसंबर 2014 को पॉलिथीन का इस्तेमाल करने पर विशाल मेगामार्ट पर 28 लाख तो ईजी डे पर 2 लाख रूपये की पेनाल्टी लगाई थी।

हल्द्वानी में आज जिलाधिकारी दीपक रावत द्वारा शहर मे पाॅलीथीन के कई बडे व्यवसाईयो के प्रतिष्ठानो मे छापेमारी की कार्यवाही की गई जिससे नगर के ऐसे व्यवसाइयों में हड़कम्प मच गया ।
जिलाधिकारी का कहना है की नैनीताल हाईकोर्ट ने पाॅलीथीन के प्रयोग पर पूरी तरह से पांबदी लगा रखी है बावजूद इसके बडे पैमाने पर शहर मे पाॅलीथीन की बिक्री की जा रही है थी जो की पूरी तरह से गलत है । आज उन्होंने शहर के कई बडे प्रतिष्ठानो पर छापेमारी की और फिलहाल छापेमारी के दौरान जब्त किया गया सारा माल गिना जा रहा है और सभी पाॅलीथीन थोक विक्रेताओं की दुकानो को सील कर दिया गया है । उन्होंने ये भी बताया कि व्यापरियों से जप्त पाॅलीथीन और थर्माकोल की गिनती के बाद उन सभी व्यवसाईयो पर जुर्माना लगाया जायेगा।

कोहली प्रकरण पर सीएम बदल रहे बयान

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वर्तमान उत्तराखंड सरकार के लिये जाते जाते भी परेशानियां खत्म होती नहीं दिख रही हैं। विराट कोहली और कैलाश खेर को आपदा के फंड में से पैमेंट के मुद्दे पर बीजेपी लगातार मुख्यमंत्री हरीश रावत को घेर रहे हैं। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत विराट कोहली प्रकरण में पूरी तरह से बेनकाब हो गए हैं। इसीलिए वह बार-बार बदल-बदल कर बयान दे रहे हैं । गोयल ने कहा कि वह सार्वजनिक रूप से बयान दे रहे थे कि विराट कोहली करोड़ो रुपये लेते हैं और हमने उन्हें केवल 47 लाख रूपये ही देकर बहुत सस्ते में काम कराया है।

गोयल ने कहा कि जब इस बात का खुलासा कर दिया गया कि विराट कोहली ने अपनी सेवाएं उत्तराखंड के पर्यटन विकास के लिए निशुल्क गुडविल एंबेस्डर के रूप में प्रदान की थी तो अब मुख्यमंत्री हरीश रावत दोबारा बयान बदलने को मजबूर हो गए। अब कह रहे हैं कि हमने केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट दी, इसलिए यह स्पष्ट करना आवश्यक हो जाता है कि वास्तव में पैसा किसकी जेब में गया तथा किस कंपनी ने यह ऐड फिल्म बनाई और पेमेंट किस कंपनी को किया गया ।
कैलाशा एंटरटेनमेंट द्वारा करोड़ों रुपए के 12 एपिसोड भी आज तक किसी को देखने को नहीं मिले और इस सरकार के जाने का समय भी आ गया। निश्चित रुप से आने वाली सरकार बार-बार हरीश रावत जी का चेहरा दिखाने वाली ऐसी किसी ऐड फिल्म का उपयोग कदापि नहीं करेगी ऐसे में इस पैसे की भरपाई के लिए कौन जिम्मेवार होगा।

वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी हरीश रावत को आड़े हाथों लिया। भटट् ने कहा कि मुख्यमंत्री को आपदा पीड़ितों, प्रदेश की जनता और विराट कोहली व कैलाश खेर से माफ़ी मांगनी चहिये न कि अपने गलत कार्य को जबरन सही ठहराने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा राज्य को सहायता न देने के मुख्यमंत्री के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह मुख्य मन्त्री का पुराना रिकॉर्ड है जिसे वे समय समय पर बजाते रहते है, लेकिन उनकी बात को कोई नहीं सुनता। उन्होंने कहा कि भाजपा दस्तावेजों के साथ कांग्रेस को कई बार इस मुद्दे पर आमने सामने बहस करने की चुनोती दे चुकी है, केंद्र के कई मंत्री गण मीडिया के सामने केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य को दी गई सहायता की प्रमाणों सहित जानकारी दे चुके है।लेकिन मुख्यमन्त्री व कांग्रेस नेता बहस से ही भाग रहे है। भाजपा की यह चुनौती आज भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री को तो 12000 करोड़ रूपये के आल वेदर रोड का प्रोजेक्ट भी याद नहीं है जिसके प्रधानमंत्री द्वारा किये गए शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के साथ खुद मौजूद थे।

अतिथि देवो भवः की मिसाल,टैक्सी ड्राइवर ने विदेशी पर्यटक का पर्स और बैग लौटाया 

इंटर नेशनल योगा फेस्टिवल के लिए ऋषिकेश पहुचें पेरिस एन्यूम का एयरपोर्ट से ऋषिकेश आते हुए टैक्सी में पर्स छूट गया था।1 मार्च से शुरू हो रहे इंटर नेशनल योगा फेस्टिवल के लिए ऋषिकेश आये पेरिस के एन्यूम एयरपोर्ट से ऋषिकेश मुनि की रेती पहुंचे। एन्यूम का विदेशी करेंसी और भारतीय रुपये से भरा पर्स टैक्सी में छूट गया और वो जल्बाजी में परमार्थ निकेतन पहुंच गया जंहा उन्होने देखा कि उनका पर्स और बैग गुम हो गया है। बैग में नकदी के अलावा उनका पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड भी था। समझ नहीं आया क्या करे ,कैसे वो पराये देश में रहेगा ,ऐसे में डोईवाला निवासी टैक्सी ड्राईवर कीर्ति सिंह नेगी ने इसे ढूंढ कर उनका बैग वापस करा।

डोईवाला के रहने वाले और पेशे से टैक्सी ड्राईवर कीर्ति सिंह नेगी ने रामझूला में अपनी टैक्सी में सवार विदेशी यात्री को उतार दिया और वापस लौटने लगा तभी उसकी नजर टैक्सी में पड़े एक बैग पर गयी जो उस विदेशी यात्री का था। कीर्ति सिंह ने अपनी गाड़ी में आये दोनों विदेशी यात्रियों को ढूंढना शुरू किया। एक तपोवन में मिला लेकिन बैग उस पर्यटक का नहीं था। दूसरे की तलाश में वो परमार्थ निकेतन गया जंहा कोई मदद नहीं मिली थक हारकर कीर्ति सिंह नेगी ने मुनि की रेती थाने में पहुंच कर पुलिस को सुचना दी। इसके बाद पुलिस की मदद से बैग के मालिक एन्यूम की खोज खबर करवाई और उसके हाथों में सुरक्षित बैग सौंप कर एक बड़ी मिसाल कायम करी।

ऋषिकेश उत्तराखंड में पर्यटन की सबसे प्रमुख जगह है जंहा पर देशी विदेशी पर्यटक आकर यहाँ की आर्थव्यवस्था को मदद पहुंचाते हैं ऐसे में एक टैक्सी ड्राईवर की ईमानदारी सही मायनो में अतिथि देवो भवः की परम्परा को मजबूती प्रदान करती है। ऋषिकेश वैसे तो पूरे विश्व में अपने योग और आध्यात्म के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि यहाँ पूरे विश्व से पर्यटक गंगा के तट पर खिंचे चले आते है। ऐसे में विदेशी सैलानियों के साथ अगर कुछ अनहोनी हो जाए तो यहाँ की छवि को भी बड़ा झटका लगता है। ऐसे में ऋषिकेश निवासी कीर्ति सिंह नेगी ने शहर की छवि को चार चाँद लगा दिये हैं।

फिल्म फेस्टिवल में उत्तराखंड की दो डाक्यूमेंट्री को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

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नेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल में उत्तराखंड की दो डाक्यूमेंट्री फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। निवास ओली की फिल्म ‘शनौला: वाटर टेंपल आफ हिमालयाज’ को स्वतंत्र फिल्म मेकर की श्रेणी में कांस्य पदक हासिल हुआ। इस फिल्म के माध्यम से उन्होंने जल संरक्षण की पारम्परिक तकनीकी के माडल के रूप में नौले को प्रदर्शित किया है। इसके अलावा मनीष ओली की फिल्म ‘कम होती दूरियां’ को बेस्ट आन स्पाट फिल्म के रूप में चुना गया। इस श्रेणी में फेस्टिवल के दौरान साइंस इन डेली लाइफ विषय दिया गया था, जिस पर मोबाइल से पांच मिनट की फिल्म बनानी थी।
मनीष ने यातायात के साधनों पर फिल्म बनाई। नेशनल साइंस फिल्म फेस्टिवल में स्वतंत्र फिल्म मेकर के अलावा स्कूल व कालेज के छात्र-छात्राओं के लिए अलग से एक श्रेणी बनाई गई है। स्कूल या कालेज के छात्र-छात्राएं विज्ञान के विषयों पर आधारित फिल्में बनाकर भेज सकते हैं। उत्तराखंड की झोली में दो अवार्ड आने के बाद अन्य युवा भी इससे प्रेरित होंगे और प्रदेश में विज्ञान फिल्मों को एक नया आयाम मिल सकेगा।

तो आ गया ”लोसर” यानि तिब्बती समुदाय का नया साल

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जिस तरह से भारतीय तिब्बती प्रवासी दुनिया भर में फैल रहे हैं,उसी तरह “लोसर” यानि तिब्बती नया साल दुनिया भर में एक अंर्तराष्ट्रीय त्यौहार बन चुका है। इस साल यह 27 फरवरी को मनाया जा रहा है। लोसर एक तिब्बतन शब्द है जिसका मतलब है नये साल की शुरुआत। “लओ” का मतलब साल और “सर” का मतलब नया। अगर हम इतिहास के पन्नें पलटें और इसके बारे में बात करें तो प्री-बुधिस्ट समय में तिब्बती बोन धर्म को मानते थे तब हर साल सर्दियों के समय में एक धार्मिक समारोह का आयोजन किया जाता था, जिसमें लोग धूप का प्रयोग करके स्थानीय आत्माओं, देवताओं और संरक्षकों को नए साल में लाने के लिए मनाते थे। आज ज्यादा कुछ नहीं बदला है, न्यू यार्क, यूएसए में रहने वाले स्वांग ल्हाट्सो और उनके तीन लोगों के परिवार के लिए लोसर आज भी वही महत्व रखता है जो तब था जब वह स्कूल में मसूरी में थी।उनके लिए घर का बदल जाना तब खलता है जब वह अपने समुदाय के लोगों के साथ अपने घर नए साल का जश्न नहीं मना पाती।

टेनली और उनका परिवार अब टोरोंटो में रहते हैं।कनाडा में मनाया जाने वाला लोसर एक ऐसा त्यौहार है जिसकी वजह से दूर दूर बसे तिब्बती समुदाय के लोग एक साथ आते है, क्योंकि वह सब एक साथ तिब्बती गुरु दलाई लामा के भाषण को सुनते हैं और आने वाले साल में उनके कही हुई बातों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते हैं। लोसर वैसे पूरे चांद के समय पहले महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दिन एक अलग तरह की पूजा अर्चना करने के बाद नए साल के उत्सव की तैयारी शुरु कर दी जाती है। लोसर के दिन की गई सजावट को बहुत ही बारीकियों और खूबसूरती से किया जाता है जिसे लामा लोसर कहते है।उसके बाद लोगों का मनोरंजन करने के लिए नृत्य प्रस्तुत किया जाता है जो आने वाले साल के लिए सभी को शुभकामनाएं देता है। इस दिन अलग अलग तरह की लाइटों से घरों को सजाया जाता है जिससे बुरी आत्माओं को घर से दूर किया जा सके। बलि चढ़ाने के लिए आटें से बनें जानवरों और दुष्ट आत्माओं का प्रयोग किया जाता है जिसको टोरमा कहते हैं।

मसूरी और देहरादून के लगभग सभी तिब्बती समुदाय के लोग,जवान से बुजुर्ग इस दिन अपनी पारंपरिक पोशाक में तैयार होकर एक दूसरे से मिलते और बधाईं देते हैं। बच्चे और औरते अपनी रंग बिरंगी पोशको में घरों से बाहर निकलकर उत्सव मनाते और एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

“जहां भी घर जैसा माहौल,शांति और समृद्धि हो,बस वही जगह है जहां वो अपना घर पा लेते है, मैं जहां भी जाता हूं मुझे मेरा तिब्बत मिल जाता है।” दलाई लामा के यह शब्द हर तिब्बत समुदाय के लिए सच है और हर कोई इनको मानता है। लगभग पूरा तिब्बती समुदाय चाहें जहां भी हो घर में या घर से दूर जब नया साल मनाता है तो ऐसा लगता है मानों उन्होंने अपने घर से दूर एक नया घर बसा लिया हो।

मशरुम गर्ल दिव्या रावत को मिलेगा नारी शक्ति पुरस्कार

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‘’झुक सकता है आसमां भी,अगर तबियत से पत्थर उछाले कोई’’

यह पंक्तियां देहरादून “मशरुम गर्ल” के नाम से मशहूर दिव्या रावत पर बिल्कुल सटीक बैठती है।दिव्या को आने वाले 8 मार्च यानि महिला दिवस पर भारत सरकार द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। दिव्या रावत उत्तराखंड की सभी लड़कियों के लिए मिसाल बनकर सामने आई हैं। दिव्या उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के चमोली जिले के कोटकंडारा गांव की रहने वाली हैं।दिव्या ने एमिटी यूनिर्वसिटी से बैचलर इन सोशल वर्क की डिग्री ली,उसके बाद इग्नू से मार्स्टस इन सोशल वर्क के बाद लगभग दो साल शक्ति वाहिनी एनजीओ में  ह्यूमन राइट और ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर काम किया है।

मशरुम बाकी सब्जियों के मुकाबले स्वास्थ्यवर्धक,स्वादिष्ट और मंहगा है।मशरुम की मंहगाई और डिमांड को देखते हुए दिव्या ने मशरुम को चुना।अपने पहले मशरुम प्लांट की शुरुआत दिव्या ने मोथरावाला देहरादून से की।इसके बाद दिव्या के इस मिशन में लोग इनसे जुड़ते गए और पहले प्लांट से शुरू कर अब तक इन्होंने उत्तराखंड में लगभग 53 सेंटर शुरु कर दिए हैं।यह बात सुनने में तो आसान लगती है लेकिन इसके लिए दिव्या ने दिन रात एक की है और आज दिव्या के साथ 2000 से ज्यादा लोग अपनी इच्छा से जुड़े हुए हैं।दिव्या की सोच सिर्फ इतनी थी कि पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोका जा सके। आज जितने भी लोग दिव्या के साथ काम कर रहे वह आत्मनिर्भर और अपनों के साथ हैं। जहां तक सड़कें नहीं पहुंची,लेकिन जहां इंटरनेट की पहुंच है वहां से भी लोग वाट्सएप और इंटरनेट के माध्यम से दिव्या से जुड़े हैं और काम कर रहे हैं।गढ़वाल के ऊंचाई वाले गांव, जौनसार और दूर दराज़ के गांवों में लोग दिव्या से जुड़कर काम कर रहे हैं। दिव्या यह मानती हैं कि अभी उन्होंने केवल 2 प्रतिशत काम किया है,बाकी 98 प्रतिशत काम करना अभी बाकी है। दिव्या कहती है कि “मैं मशरुम की खेती को पूरे देश में फैलाना चाहती हूं, 2017 के आखिरी तक कम से कम 500 सेंटर का टारगेट लेकर चल रहीं हूं और मुझे पूरा विश्वास हैं कि लोगों का साथ और मेरी मेहनत रंग लाएगी।”

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काम के दौरान  बेरोजगारी और थोड़े से पैसों की वजह से बहुत से लोगों को घर से दूर रहकर काम करते देख दिव्या ने मन में ठान ली की वह कुछ ऐसा करेंगी जिससे लोगों को अपने घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। इस सोच के साथ दिव्या ने अपनी जिंदगी की नई पारी मशरुम की खेती से शुरु की। दिव्या का मानना है कि वो कुछ हटकर नहीं कर रहीं, उन्होंने लोगों की सेवा और सहायता करने के लिए ही सोशल वर्क डिर्पाटमेंट में पढ़ाई की थी और इसी इंटलेक्चुअल फिल्ड में ही वह काम भी कर रहीं हैं। दिव्या आज “मशरुम गर्ल” के नाम से मशहूर हैं लेकिन इस काम की शुरुआत में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इस काम के जरिए लोगों में पहचानी जायेंगी। दिव्या कहती हैं कि “जब मैनें इस काम के बारे में सोचा था तब मुझे सिर्फ यह पता था कि मैं काम करुंगी चाहें मुझे सफलता मिलें या नहीं।” दिव्या कहती हैं कि “यह नेम,फेम जो भी है इसके बारे में मैंने सोचा नहीं बस यही था कि अपने काम पर फोकस करुंगी और और किसी भी कीमत पर अपने पैर वापस नहीं खीचूंगी।”

दिव्या के निरंतर प्रयास और उनकी मेहनत की वजह से हजारों लोगो को रोजगार मिला और सरकार की तरफ से उनके इस प्रयास की सराहना भी की गई है।

 

खाई में गिरी बोलेरो, आठ की मौत

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देहरादून से पौड़ी आ रही एक अनियंत्रित बोलेरो की गहरी खाई में गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई। वाहन में कुल 14 लोग सवार थे।
देहरादून से पौड़ी जनपद के पाबौ की ओर आ रही एक बोलेरो (यूके 07 टीए 7571) सबधार खाल के कुंडाधार में नियंत्रण खो बैठी और गहरी खाई में जा गिरी। हादसे की सूचना मिलते ही नजदीकी पुलिस स्टेशन और राहत बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू चलाया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया की सभी घायलों को श्रीनगर अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे में छह लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। जबकि दो अन्य ने अस्पताल में आखिरी सांस ली।
मृतक में सुमन सिंह (11 वर्ष) पुत्री पदम सिंह ग्राम मल्ली पौड़ी, हिमा सिंह (30 वर्ष )पत्नी पदम सिंह ग्राम मल्ली पौड़ी, श्रीमती सीमा (28 वर्ष) पत्नी रमेश जुनौली रूद्रप्रयाग, दलवीर सिंह (55 वर्ष) पुत्र छोटा जिला पौड़ी, सरदार सिंह (40 वर्ष) पुत्र खेत सिंह पौड़ी, प्रताप सिंह (62 वर्ष) पुत्र अकालू पौड़ी, नागेश ज्योति (25 वर्ष) पुत्र अशोक कुमार चन्द्रावनी पटेलनगर देहरादून, शामिल हैं, जबकि एक शिनाख्त नहीं हो सकी है।
वहीं घायलों में, पदम सिंह 32 वर्ष, सुजल सिंह 8 वर्ष, संजना 3 वर्ष, चांदनी 5 वर्ष, सलोनी 8, अनूप 34 वर्ष का इलाज चल रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पिथौरागढ़ ने सबको पछाड़ा

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पिथौरागढ़ जिले के किसानों ने नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। मैदानी क्षेत्रों को मात देते हुए जिले में सर्वाधिक 20 प्रतिशत किसानों ने इस योजना के तहत अपनी फसल का बीमा करवाया है। राज्य में सर्वाधिक उत्पादन करने वाले हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसे बड़े जिले भी इस मामले में पिथौरागढ़ से पीछे है।
बताते चलें कि मौसम की मार से किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई है। इस योजना से कवर रहने वाले किसानों को सूखा, अतिवृष्टि या आपदा जैसी स्थिति में फसल को हुए नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जाती है। सरकार अधिक से अधिक किसानों को इस योजना में शामिल करने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। इसके बावजूद किसानों ने इस योजना में खास रुचि नहीं दिखाई है। प्रदेश में 7.51 प्रतिशत किसानों ने ही रबी की फसल के लिए योजना में दिलचस्पी दिखाई।
प्रदेश के बड़े जिले इस मामले में काफी पीछे हैं। इन जिलों में पांच से दस प्रतिशत किसानों ने ही अपनी फसलों का बीमा करवाया है। पहाड़ी जिलों में स्थिति संतोषजनक है। प्रदेश के सबसे सीमांत जिले पिथौरागढ़ के किसानों ने इस योजना में खासी दिलचस्पी दिखाई है। जिले के बीस प्रतिशत किसान इस योजना से जुड़े हैं।
मुख्य कृषि अधिकारी अभय सक्सेना ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि विभाग ने इस सफलता के लिए व्यापक अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया था। जिसका नतीजा सामने है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष शीतकालीन वर्षा की कमी से फसलों के प्रभावित होने पर किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ जिले में कुल 79846 किसान है जिसमें से 16394 किसानों ने अपनी फसल का बीमा उक्त योजना के तहत कराया है।
अभय सक्सेना ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को आपदा की स्थिति में हुए नुकसान की भरपाई के लिए शुरू की गई है। योजना में किसानों को अपनी फसल की कीमत का मात्र सवा प्रतिशत प्रीमियम जमा करना होता है। शेष धनराशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। नुकसान होने पर किसान को बीमित राशि का भुगतान किया जाता है।

हल्द्वानी के फौजी परिवार में हुए दोहरे हत्याकाण्ड का खुलासा

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उत्तराखण्ड में नैनीताल जिले की हल्द्वानी पुलिस ने डहरिया सत्यलोक कॉलोनी में रिटायरर्ड कर्नल डी.के.साह की पत्नी और मॉ की लूट के बाद हत्याकाण्ड का खुलासा कर दिया है । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खण्डूरी ने बहुउददेशीय भवन में प्रेस वार्ता कर इस दोहरे हत्याकाणड का खुलासा किया । पुलिस के अनुसार बीते मंगलवार 21 फरवरी की रात को रिटायर्ड कर्नल डी.के.साह के घर में कर्नल के बटमेंन महेन्द्र गोश्वामी, कारपेन्टर अख्तर अली और इनके साथ मल्लू नमक व्यक्ति ने लूट के बाद कर्नल की पत्नी प्रेरणा और मॉ शान्ति की चाकुओ से गर्दन  काटकर और चेहरे पर वार कर हत्या कर दी थी । एस.एस.पी.ने खुलासा करते हुए बताया कि हत्या का मकसद लूट था लेकिन जैसे ही कर्नल का बटमेंन महेन्द्र,अख्तर व मल्लू मिलकर घर की अलमारी खोल रहे थे तो कर्नल की पत्नी उठ गयी और उन्होने बटमेंन महेन्द्र और अख्तर को पहचान लिया । इस लिये प्रेरणा की हत्या कर दी और जब ऊपर दूसरे माले में तीनो आरोपी लॉकर खोल रहे थे तो वहां कर्नल की मॉ के उठकर लाईट जलाने पर तीनो ने मिलकर कर्नल की मॉ शान्ति देवी को भी मौत के घाट उतार दिया ।  21 फरवरी की रात साढे बारह बजे से सुबह चार बजे तक घर से 15 तोला सोना और 25 हजार नगदी लूटकर फरार हो गए ।

पुलिस के अनुसार चॉदी की कटोरी कैश और कर्नल के ए.टी.एम.कार्ड आर्मी कार्ड सहित अन्य कार्ड हत्यारोपी बटमेन महेन्द्र व अख्तर से बरामद कर लिये गये है । पुलिस ने बताया की अभी तीसरा आरोपी मल्लू फरार है । पुलिस के अनुसार सोने के आभूषण दोनो ने मल्लू को बेचने के लिये दिये थे । मल्लू तभी से फरार है और पुलिस की दो टीमें मल्लू की तलाश कर रही है । वही मामले के खुलासे को लेकर डी.आई.जी. ने पॉच हजार और एस.एस.पी. ने ढाई हजार का इनाम पुलिस टीम को दिया है ।

नैनीताल घूमकर लौट रही कार हादसे में युवक की मौत

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नैनीताल से 13 किलोमीटर दूर बेलुवाख़ान के पास देररात इनोवा कार संख्या यू.के.06 वाई 5556 के खाई में गिरने से एक की मौत और दो घायल । लगभग 12:30 रात ज्यूलिकोट में बेलुवाखान के सनराइज़ होटल के समीप हुई इस घटना में युवक नैनीताल से रुद्रपुर की तरफ जा रहे थे जब कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई और उसमें सवार 22 वर्षीय वीरपाल ग्रोवर पुत्र राजेन्द्र सिंह ग्रोवर की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों घायलों कशिश खेरा पुत्र राम किशन खेरा और वैभव ग्रोवर को उपचार के लिए हल्द्वानी के अस्पताल भेज दिया गया । पुलिस ने बताया की उन्हें सूचना मिलने के बाद तल्लीताल और ज्यूलिकोट पुलिस मौके पर पहुंची और देर रात सभी लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया था । बताया की गाड़ी में सवार सभी युवक रुद्रपुर के थे जिनके परिजनों को इसकी सूचना दी गई और सभी मौके पर पहुँच गए थे । सभी युवक नैनीताल घूमकर इंनोवा कार से वापस लौट रहे थे जब ये हादसा हो गया ।

पुलिस की रेस्क्यू टीम में थानाध्यक्ष तल्लीताल प्रमोद पाठक, ज्यूलिकोट चौकी इंचार्ज मनवर सिंह, राजेन्द्र सिंह समेत एस.डी.आर.एफ.की टीम राहत कार्य में जुटी थी