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29वें इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल के रंग मे रंगी योग नगरी

अंतराष्ट्रीय योग नगरी के रूप में पुरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका ऋषिकेश एक बार फिर योग के प्रसार प्रचार के लिए तैयार हो गया है। योग का महाकुंभ कहे जाने वाले अंतराष्ट्रीय योग फेस्टिवल की मेज़बानी के लिये ऋषिकेश पूरी तरह तैयार है। 1 से 7 मार्च तक चलने वाले इस महोत्सव में योग के कई रंग मौजूद रहेंगे, जिसकी तैयारी पूरी हो चूकि है। गंगा के तट पर विश्व के जाने माने योग गुरु अपनी-अपनी योगकलाओं का आदान-प्रदान करेंगे। अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती ने  बताया की इस बार के योग फेस्टिवल में 100 देशों से 1200 से अधिक देशी-विदेशी साधक हिस्सा लेगें। 2 मार्च को प्रधानसंत्री नरेंद्र मोदी योग फेस्टिवल में आये लोगों से विडियो कॉन्फ्रेंस से संभोधित करेंगे। इस के साथ साथ गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा भी गंगा तट पर योग महोत्सव का आयोजन करेंगे। गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंधक अतुल कुमार गुप्ता ने बताया की इस बार के अंतरास्ट्रीय योग महोत्सव को सफल बनाने के लिए सारी तैयारियां कर ली गई है  लिए विभिन्न देशों से योगाचार्यों को बुलाया जायेगा। हर साल की तरह इस साल भी ऋषिकेश के गंगा तट पर देश-विदेश से आये योग प्रेमी योग के इस महा कुम्भ में सम्मलित होते हैं।

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वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते मौसम में बदलाव

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पारे की उछाल के बीच उत्तराखंड में मौसम फिर करवट बदलने जा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक गढ़वाल क्षेत्र में कहीं-कहीं हल्की वर्षा और बर्फ गिरने की संभावना है। एक व दो मार्च को यह सिलसिला कुछ तेज हो सकता है। जाहिर है, इससे पारे पर अंकुश लगने के साथ ही मौसम खुशुनमा बना रहेगा।
ज्ञात है कि सूबे में इन दिनों पारा उछाल भर रहा है। राज्यभर में अधिकतम तापमान सामान्य से दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक अधिक चल रहा है। सोमवार को ही लें तो देहरादून में अधिकतम पारा पांच डिग्री की उछाल के साथ 28.1 डिग्री रहा। ऐसी ही स्थिति मुक्तेश्वर की भी रही। उधर, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तराखंड की ओर रुख कर रहा है। इसके कारण ही पारे में उछाल आया है। उन्होंने बताया कि आज राज्य में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखेगा। उन्होंने बताया कि आज सूबे में आंशिक तौर पर बादल रहेंगे। रात्रि में गढ़वाल मंडल में कहीं-कहीं हल्की वर्षा और चोटियों पर बर्फ गिर सकती है।
उन्होंने बताया कि एक व दो मार्च को राज्य में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। तीन मार्च को दोपहर या शाम से मौसम खुलने के साथ ही तापमान भी सामान्य के करीब आने लगेंगे।

बादल फटने पर तकनीक की मदद से रखी जायेगी नज़र

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पहाड़ों में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं पर गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अब सीधे नजर रखेंगे। साथ ही शोध के माध्यम से वे बादल फटने के कारणों को भी तलाशेंगे। इस शोध में ऊंचाई वाले किसी क्षेत्र विशेष में बादलों के बनने की प्रक्रिया भी शामिल है। आई.आई.टी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक एस. गौतम इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर रहे हैं। इसके लिए जी.बी. पंत इंजीनियरिंग कॉलेज घुड़दौड़ी (पौड़ी) परिसर में बादल भौतिकी प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज के साइंस एंड ह्यूमिनिटी विभाग के साथ सहमति बन चुकी है।

ज्ञातव्य है कि पहाड़ों में बादल फटने की घटनाओं में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। इससे जन-धन की भी बड़ी हानि होती है। इसी को देखते हुए गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग ने आई.आई.टी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के साथ एक साझा प्रोजेक्ट पर शोध अध्ययन कार्य शुरू किया है। भौतिक विज्ञान विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक गौतम ने बताया कि आई.आई.टी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एसएन त्रिपाठी के साथ प्रोजेक्ट पर कार्य हो रहा है।

प्रो. त्रिपाठी भौतिकी प्रयोगशाला के लिए संबंधित सभी उपकरण भी उपलब्ध कराएंगे। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आर्थिक सहयोग से यह शोध अध्ययन होगा। प्रो. गौतम ने बताया कि आगामी मई तक इंजीनियरिंग कॉलेज के परिसर में यह लैब स्थापित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पहाड़ों में कहीं ज्यादा तो कहीं बहुत कम बारिश होने के कारणों का अध्ययन भी इस प्रोजेक्ट के तहत होगा। पांच साल तक डाटा विश्लेषण के आधार पर संबंधित शोध अध्ययन के वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त किए जाएंगे।

पार्सल कारोबार के लिए रेलवे-भारतीय डाक में साझेदारी हुई

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रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सोमवार को यहां रेल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्सल व्‍यवसाय में भारतीय डाक के साथ नई साझेदारी और नई खानपान नीति 2017 की शुरूआत की।
सुरेश प्रभु ने कहा कि नई कैटरिंग नीति में खाद्य सामग्री बनाने और उसके वितरण के काम को अलग-अलग किया जाएगा। खाना आईआरसीटीसी की आधुनिक किचेन जैसी किसी जगह पर भी पकाया जा सकता है और इसके वितरण में आतिथ्‍य उद्योग के पेशेवर लोगों को लगाया जा सकता है।
प्रभु ने कहा कि पार्सल भारतीय रेल का तेजी से बढ़ता मालभाड़ा व्‍यवसाय है। नई व्‍यावसायिक पार्सल नीति के माध्‍यम से न केवल भारतीय डाक बल्‍कि निजी क्षेत्र द्वारा पार्सल भेजने के लिए स्‍थान की बुकिंग कराई जा सकती है। पूरे देश में लागू करने से पहले इस योजना का परीक्षण दो रेलगाड़ियों- हावड़ा और गुवाहाटी के बीच गाड़ी संख्‍या 15959 हावड़ा-गुवाहाटी-डिब्रूगढ़ कामरूप एक्‍सप्रेस तथा हैदराबाद और निजामुद्दीन के बीच गाड़ी संख्‍या 12721 हैदराबाद-निजामुद्दीन डेक्‍कन एक्‍सप्रेस-में किया गया। उन्होंने कहा कि सफल परीक्षण के बाद अखिल भारतीय स्‍तर पर आज इसे लांच किया गया।
इस अवसर पर रेल बोर्ड के अध्‍यक्ष ए.के. मित्‍तल, मेंबर ट्रैफिक मोहम्‍मद जमशेद, रेल बोर्ड के अन्‍य सदस्‍य, डाक विभाग के सचिव बोयापति वी. सुधाकर तथा अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी उपस्‍थित थे।

सितारगंज की तीन कंपनियों को उत्तराखण्ड हाईकोर्ट द्वारा नोटिस

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बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी बहाने के मामले में आज सिडकुल सितारगंज की तीन कंपनियों को उत्तराखण्ड हाईकोर्ट द्वारा नोटिस दिया गया है। उच्च न्यायालय नैनीताल से जिन कम्पनियों को नोटिस जारी किया गया है उनमें हिन्दुस्तान कोकाकोला ब्रेवरेज, पार्ले एग्रो और गोल्डन इंफ्रा शामिल है।  याचिकाकर्ता मनोज तिवारी के अधिवक्ता सुरेश चंद्र भट्ट ने बताया कि हाईकोर्ट ने मामले में सर्व धर्म विकास समिति की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए डी.एम.ऊधम सिंह नगर, पल्यूशन कण्ट्रोल बोर्ड(पी.सी. बी.), उत्तराखंड सरकार और एम.डी.सिडकुल से चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा है कि बगैर ट्रीटमेंट के पानी बहाए जाने के कारण सिडकुल के पास के आठ गांवों सिसैया, कल्याणपुर, मजौरा, जाड़ी, नकुलिया, बूराबाग, चिंति माजरा और उकरौली का पानी जहरीला होता जा रहा है। जिसके कारण गांवों के जानवर मर रहे हैं। और मनुष्यों को त्वचा रोग हो रहे हैं।

केवी एफआरआई को बंद होन से रोकने के लिए अभिवावक लगा रहे एड़ी चोटी का ज़ोर

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देहरादून के के.वी एफ.आर.आई का मामला अब केवल देहरादून तक नहीं रहा इसको बंद होने से रोकने के लिए अभिवावक ऐड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहें हैं।बीते दिनों देहरादून विधानसभा कैंट क्षेत्र के प्रत्याशी ने के.वी. में जाकर अभिभावकों की परेशानी से रुबरु हुए। उसके बाद अभिभावकों ने दिल्ली जाकर टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह से मुलाकात की और स्कूल को बंद होने से बचाने के लिए गुहार लगाई।

आपको बता दें कि आई.सी.एफ.आर.ई ने स्कूल में दिए जा रहे फंड को 24 प्रतिशत कम कर दिया है, जिसका कारण बाहर के बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना है।इस बंदी का मुख्य कारण यह दिया गया कि यह विद्धालय मुख्य रुप से एफ.आर.आई के बच्चों,आई.सी.एफ.आर.ई और इससे जुड़े दूसरे संगठने के बच्चों के लिए है।कुल 1400 दाखिला लेने वाले बच्चों में,.389 बच्चे कर्मचारियों के हैं।इसके अलावा, नियमों के अनुसार आंशिक फंडिंग का कोई नियम नहीं है, या तो आई.सी.एफ.आर.ई इसको प्रोजेक्ट सेक्टर स्कूल की तरह फंड करेगा,या स्कूल को सिविल सेक्टर की श्रेणी में डाला जाएगा और उसकी फंडिंग केंद्रीय विद्धालय संगठन करेगा।

इस मसले पर कैंट विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी सूर्यकांत धस्माना ने प्रधानाचार्य चारू से मुलाकात की व स्कूल के संचालन में आ रही परेशानी के बारे में जाना।शर्मा ने कांग्रेस उपाध्यक्ष को बताया कि के.वी. एफ.आर.आई स्कूल केन्द्रीय विद्यालय संगठन एवं एफ.आर.आई के बीच हुए एक अनुबन्ध के तहत प्रोजेक्ट स्कूल के रूप में संचालित हो रहा है, जिसके तहत एफ.आर.आई स्कूल को वित्त पोषित कर रहा है, किन्तु पिछले वर्ष एफ.आर.आई बोर्ड ऑफ गर्वनेन्स द्वारा एक प्रस्ताव कर स्कूल को केवल 24 प्रतिशत वित्तपोषित करने का प्रस्ताव किया है, जिसके कारण स्कूल संचालन में परेशानी आयेगी व स्कूल को बन्द करना पड़ेगा । जिसकी वजह से इस आगामी सत्र के लिए पहली व छठी कक्षा के लिए प्रवेश प्रक्रिया बन्द कर दी गई है। धस्माना ने स्कूल गेट में एकत्रित बच्चों के अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वे शीघ्र ही दिल्ली जाकर वन एवं पर्यावरण मंत्री से मुलाकात कर समस्या के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर आवश्यकता पड़ी तो वे अभिभावकों एवं जनता के साथ मिलकर आन्दोलन करेंगे। धस्माना ने कहा कि स्कूल को बचाने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे । स्कूल गेट पर छात्रों सहित उनके अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद थे । एक अभिभावक का कहना था कि सभी अभिभावक अपने स्तर से कई प्रयास किये लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली । मामला केवल यहां तक नहीं रहा इस मसले पर आल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन ने यूनियन मिनिस्ट्री आफ हृयूमन रिर्सोसेस को पत्र लिखकर भी अवगत कराया है। देहरादून स्थित केन्द्रीय विद्यालय एफ.आर.आई में पढने वाले बच्चों के अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह से मुलाकात की। टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने इस मामले को मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्री के सामने रखने का भरोसा दिया है। यंहा तक उन्होंने ट्वीट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी इस समस्या से अवगत कराने के साथ, इसका हल निकालने का भी अनुरोध किया था।

उत्तराखंड में आत्महत्या दर में हुई वृद्धि

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उत्तराखंड विकास में मामले में चाहे भले ही पीछे हो लेकिन इस छोटे से राज्य ने आत्महत्या के मामले में देश के बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। एन.सी.आर.बी के आकड़ों ने उत्तराखंड के बड़बोले नेताओं की पोल खोल दी है। जो राज्य को खुशहाली और विकास में नंबर वन बताते नहीं थकते उनको एन.सी.आर.बी की रिपोर्ट ने आईना दिखाया है।

एन.सी.आर.बी के आए ताजे आकड़े के अनुसार उत्तराखंड में आत्महत्या वृद्धि दर देश में सर्वाधिक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी) के आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या के मामले में राज्य में सालाना 129.50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। जान देने वालों में बड़ी तादाद 14 से 30 वर्ष की आयु वालों की है।

आत्महत्या करने वालों की तादाद के मामले में महाराष्ट्र (16970), तमिलनाडु (15,777) और पश्चिम बंगाल (14,602) देश में पहले तीन स्थानों पर हैं। वहीं, अगर इसमें वृद्धि की बात करें तो उत्तराखंड के बाद मेघालय (73.7 फीसद) दूसरे और नागालैंड (61.5 फीसद) तीसरे स्थान पर है।

उत्तराखंड में वर्ष 2015 में कुल 475 मामले सामने आए। इनमें 346 पुरुष और 129 महिलाएं शामिल थीं। जबकि 14 से 30 वर्ष के कुल 202 लोगों ने मौत को गले लगाया। इनमें 132 पुरुष और 70 महिलाएं शामिल थीं।

इस बारे में मनौवैज्ञानिकों का कहना है कि युवाओं में जूझारू प्रवृत्ति कम हो रही है। वे मामूली दबाव भी नहीं झेल पाते हैं। बदलते सामाजिक मूल्यों और टूटते संयुक्त परिवारों की वजह से आपसी संवाद कम हो रहा है। ऐसे में तनाव या दबाव की स्थिति में नैतिक, मानसिक या आर्थिक समर्थन नहीं मिल पाता जो पहले संयुक्त परिवारों में मिलता था। यह आत्महत्या की एक प्रमुख वजह है।

आपदा के खाते से भुगतान आपदा पीड़ितों का अपमान: अजय भटट्

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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट् ने प्रख्यात क्रिकेटर विराट कोहली व् गायक कैलाश खेर को आपदा राहत मद से भुगतान किये जाने को आपदा पीड़ितों के साथ विराट कोहली व् कैलाश खेर का अपमान बताया है।
आज यहाँ जारी एक बयान में बीजेपी नेता ने कहा कि केंद्र सरकार पर सहायता न देने के मुख्य मन्त्री का आरोप उनका पुराना रिकार्ड है जिसे वे बार बार बजाते रहते हैं। भटट् ने मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने आपदा पीड़ितों की राहत की राशि में से विराट कोहली व् कैलाश खेर को भुगतान कर आपदा पीड़ितों का तो अपमान किया ही वहीँ देश के इन लोकप्रिय विशिष्ट महानुभावो का भी अपमान किया है। उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी सम्भावना है कि विराट कोहली व् कैलाश खेर को इस बात का पता ही न हो कि उन्हें उत्तराखण्ड सरकार जो भुगतान कर रही है वह धन आपदा राहत का है। यदि उन्हें यह पता होता तो वे ऐसी राशि स्वीकार ही न करते।

भटट् ने कहा कि मुख्यमंत्री को आपदा पीड़ितों, प्रदेश् की जनता और विराट कोहली व् कैलाश खेर से माफ़ी मांगनी चहिये न कि अपने गलत कार्य को जबरन सही ठहराने की कोशिश करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आज भी आपदा में हुए नुकसान के पुननिर्माण का काफी कुछ काम शेष है और सरकार धन की कमी की बात करती रहती है।बीजेपी नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह आरोप भी विचित्र है कि प्रधानमंत्री सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं ने उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया। जबकि सच यह है कि भाजपा नेताओं ने कभी शिष्टता नहीं छोड़ी जबकि कांग्रेस नेता भाजपा के शीर्ष नेताओं के लिए मोगेम्बो, दाढ़ी वाला बाबा आदि शब्दों का प्रयोग करते रहे।

केंद्र द्वारा राज्य को सहायता न देने के मुख्यमंत्री के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह मुख्य मन्त्री का पुराना रिकॉर्ड है जिसे वे समय समय पर बजाते रहते है, लेकिन उनकी बात को कोई नहीं सुनता। उन्होंने कहा कि भाजपा दस्तावेजों के साथ कांग्रेस को कई बार इस मुद्दे पर आमने सामने बहस करने की चुनोती दे चुकी है, केंद्र के कई मंत्री गण मीडिया के सामने केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य को दी गई सहायता की प्रमाणों सहित जानकारी दे चुके है।लेकिन मुख्यमन्त्री व कांग्रेस नेता बहस से ही भाग रहे है। भाजपा की यह चुनौती आज भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री को तो 12000 करोड़ रूपये के आल वेदर रोड का प्रोजेक्ट भी याद नहीं है जिसके प्रधानमंत्री द्वारा किये गए शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के साथ खुद मौजूद थे।.

मौसम बदलने के साथ ही दून में स्वाईन फ्लू की दस्तक

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मौसम में बदलाव के साथ ही दून में स्वाइन फ्लू ने भी दस्तक दे दी है। जाखन निवासी एक महिला में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रारंभिक लक्षण सामने आने के बाद आठ संदिग्ध मरीजों का ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा था। इसमें से सात जांच में नेगेटिव आए हैं। स्वाइन फ्लू की पुष्टि होते ही सीएमओ कार्यालय ने जिलेभर में अलर्ट जारी कर दिया है।

जानकारी के अनुसार 16 फरवरी को दून की जाखन निवासी महिला को मसूरी रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की ब्लड जांच रिपोर्ट आई तो उसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। अस्पताल ने इसकी सूचना सीएमओ कार्यालय को दी। वहां से सैंपल को उच्च जांच के लिए एनसीडीसी को भेजा गया, वहां भी महिला के ब्लड में स्वाइन फ्लू के वायरस होने की पुष्टि हुई, इसके साथ ही विभिन्न अस्पतालों से ऐसे ही सात अन्य मरीजों के सैंपल जांच के लिए एन.सी.डी.सी को भेजे थे। हालांकि इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। सीएमओ डा. वाईएस थपलियाल ने बताया कि इन सात मामलों में पांच देहरादून के, एक हरिद्वार और एक ऋषिकेश का था।

हालांकि स्वाइन फ्लू की दस्तक नवंबर में सर्दियों की शुरुआत के साथ होती है। लेकिन इस बार फरवरी मध्य तक स्वाइन फ्लू का एक भी मरीज सामने नहीं आया, लेकिन अब कई लोगों में स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

नैनीताल के ए.डी.एम.प्रशासन की हृदयगति रुकने से मौत

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नैनीताल के ए.डी.एम.प्रशासन जे.एस.राठौड़ का हृदयगति रुकने से देहांत हो गया है। मृदुलभाषी राठौड़ ओक पार्क स्थित अपने सरकारी आवास में रहते थे । रात दस बजे उन्होंने खाना खाया और सो गए जिसके बाद उनके निजी कर्मचारी आनंद सिंह ने उठाया तो वो नहीं उठे । आनंद सिंह के अनुसार सवेरे 7:30 बजे जब उसने साहब को उठाया तो वो निर्जीव और ठन्डे पड़े थे । जिसके बाद उसने पड़ोसियों और प्रशासन से जुड़े लोगों को इसकी सूचना दी । ए.डी.एम.राठौर शुगर, ब्लड प्रेसर समेत कुछ अन्य बिमारियों से ग्रसित थे जो ढ़ेर सारी दवाइयाँ लिया करते थे । ए.डी.एम.के परिजनों को इसकी सूचना दी गई जिसके बाद उनकी पत्नी व् अन्य सगे सम्बन्धी लगभग 10:40 पर नैनीताल पहुंचे । उनकी बड़ी बेटी आयुषी ‘निक्की’ राठौर डी.एस.बी.कैंपस में बी.एस.सी.प्रथम वर्ष की छात्रा है और उसका आज प्रैक्टिकल था जहाँ से उन्हें वापस बुला लिया गया । ए.डी.एम.के दो बेटे छह वर्षीय आरब और 14 वर्षीय हैप्पी हैं जो अपनी माँ के साथ रुद्रपुर में रहते हैं । ए.डी.एम.की पत्नी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं । ए.डी.एम.के पार्थिव शरीर को संभवतः हरिद्वार में अंत्येष्टि के लिए ले जाया जाएगा । ए.डी.एम.मूल रूप से हरिद्वार के ज्वालापुर के रहने वाले थे।
2009 के पी.सी.एस.अधिकारी थे जे.एस.राठौर । उनकी पहली पोस्टिंग पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में बतौर एस.डी.एम.हुई थी । इसके बाद वो एस.डी.एम. टनकपुर और फिर चम्पावत जिले के ए.डी.एम. बनाए गए थे । इसके बाद उनका तबादला 2016 में नैनीताल ए.डी.एम.के रूप में हुआ था । राठौर उत्तराखण्ड प्रशासनिक सेवा में आने से पहले आई.वी.आर.आई.बरेली में टैक्नीशियन का काम किया करते थे ।
ए.डी.एम.के आवास में पुलिस के आला अधिकारीयों के साथ प्रशासनिक अमला भी जुटा हुआ है । सी.डी.ओ.प्रकाश चंद, सचिव झील विकास प्राधिकरण श्रीश कुमार, कार्यकारी तहसीलदार प्रियंका रानी, ए.टी.आई. की प्रशसनिक अधिकारी डा.मंजू पाण्डे आदि कई अधिकारी मौजूद रहे । पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्ट मॉर्टम की तैयारी कर ली है । ओक पार्क में सम्बन्धियों और पड़ोसियों का ताँता लगना शुरू हो गया है ।