नववर्ष प्रतिपदा पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने ऋषिकेश में बड़ी धूम धाम से संघ संस्थापक डा हेडगेवार कि जयंती को संकल्प दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर स्वयं सेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचालन किया और शारारिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रांत कार्यवाहक दिनेश सेमवाल ने बताया कि हर साल की तरह नव वर्ष के मौके पर आरएसएस द्वारा पथ सञ्चालन किया जाता है , उन्होंने बताया की ये हमारे लिए बेहद खास दिन है क्योंकि आज के ही दिन संघ के संस्थापक डा हेडगेवार की जयंती भी है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने सुनी आम जनता की फरियाद
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सीएम आवास, न्यू कैंट रोड़ स्थित जनता दर्शन हॉल में सैंकड़ों की संख्या में आए लोगों की शिकायतों व समस्याओं को सुना। मौके पर ही बहुत सी समस्याओं का निस्तारण किया गया। कार्यक्रम में शासन के अधिकारी, देहरादून के जिलाधिकारी, एसएसपी व वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद थे। आज का जनता दर्शन कार्यक्रम पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया गया। प्रत्येक फरियादी की शिकायत व समस्या को रजिस्टर में दर्ज किया गया। इसके बाद एक-एक व्यक्ति को बुलाया गया जिन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने इत्मीनान से हर व्यक्ति की बात को सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। किसी की पेयजल आपूर्ति की समस्या थी तो किसी की अपने गांव, मोहल्लों में मार्ग निर्माण की मांग थी। लोक निर्माण विभाग में मेट बेलदारों की पुनर्नियुक्ति, स्वास्थ्य केंद्र उच्चीकरण, बेकलॉग की भर्ती, भू-अभिलेख में नाम दर्ज करवाने, समय पर वेतन न मिलने, विद्युत की झूलती लाईनों को ठीक करवाने, सार्वजनिक मार्गों से अतिक्रमण हटाने, आदि दर्जनों मामले मुख्यमंत्री के समक्ष जनसाधारण द्वारा रखे गए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाजिब समस्याओं को समयबद्धता से हल किया जाए और संबंधित को अवगत भी कराया जाए।
उत्तराखंड की बसंती बिष्ट को मिला पदमश्री सम्मान
30 मार्च को पद्मश्री पुरस्कार विजेता बसंती बिष्ट को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया।आपको बता दें कि उत्तराखंड की जागर गायिका को उनके भावपूर्ण गायन के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किय गया है।यह केवल बसंती के लिए नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
बसंती देवी बिष्ट को अपनी भावपूर्ण जागर के लिए न केवल उत्तराखंड में बल्कि विदेशों में भी बहुत पुरस्कार मिले है। जागर शैली का गायन देवी देवताओं को जगाने के लिये पारंपरिक तौर पर पुरुषों द्वारा गाया जाता रहा है। बसंती पहली और अकेली ऐसी महिला है जिन्होंने इस प्रथा को दरकिनार कर जागर सीखा और सालों से इस प्राचीन जागर के माध्यम से लोगों को जागृत करती रही हैं। इस कला को इन्होंने अपनी मां से सीखा। चमोली ज़िले केंद्र लुआनी गाँव में जन्मी बसंती ने बचपन से अपनी माँ को घर में जागर गाते सुना था। लेकिन घर ग्रहस्ती के चलते बसंती का जागर गायिका के रूप में करियर उनके 50 के हो जाने के बाद शुरू हो सका। शादी करके चंडीगढ़ जाने के बाद बसंती ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र से ली। और वापस देहरादून आने के बाद बसंती ने अपने करियर की शुरुआत की। बसंती का कहना है कि देवभूमि के सांस्कृतिक जादू ने हमेशा उन्हे प्रेरित किया है।
बसंती देवी बिष्ट ने आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर भी अपनी प्रस्तुतियां दी है।इनकी भावपूर्ण आवाज श्रोताओं को भावविभोर कर देती हैं और श्रोता के मन में इनको सुनने की इच्छा बार बार होती है। उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान में सजी बसंती जब स्टेज पर आती हैं तो उनके गाने के साथ साथ उतनी ही तादाद में लोग उनकी तस्वीरें भी खींचते हैं।
निश्चित तौर पर बसंती ने जागर जैसी लोक कला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है और इसके साथ ही उन्होने राज्य का भी नाम रौशन किया है।
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आखिरकार सीबीएसई को मिल ही गया अपना स्थाई पता
सीबीएसई का स्थाई कार्यालय दून में ही स्थापित होगा। लंबे इंतज़ार के बाद सीबीएसई कार्यालय के लिए दून में जगह मिल गई है। इसके निर्माण के लिए डेढ़ करोड़ रूपये का बजट भी जारी हो गया है। इससे प्रदेश के सीबीएसई सम्बन्ध स्कूलों और छात्र-छात्राओं को फायदा मिलेगा।
पत्रकारिता से एक्टिंग में गए देहरादून के सतीश शर्मा की फिल्म की स्क्रनिंग होगी केंन्स फेस्टिवल में
देहरादून में शूट कि गई फिल्म ‘विराम’ की स्क्रीनिंग 2017 केन्स फेस्टिवल में की जाएगी। इस फिल्म में पत्रकार से एक्टिंग की दुनिया में आए देहरादून के सतीश शर्मा भी होंगे।
देहरादून के सतीश शर्मा ने एक और ऊचांइ को छू लिया है।आपक बता दें कि सतीश ने 2013 में फिल्म माज़ी, सलमान की फिल्म सुल्तान और गैंग्स आफ लिटिल फिल्म में नेता के रुप में बहुत सराहा गया।
सतीश इस समय डायरेक्टर जियाउल्लाह खान, प्रोड्यूसर हरी मलहोत्रा और अमन शाह की फिल्म ‘विराम’ में काम कर रहे हैं। जिसके हीरो नरेंद्र झा हैं और सतीश ने इस फिल्म में हीरो के वकील दोस्त का किरदार निभाया है।इस फिल्म की शूटिंग पिछले 3-4 महीने सर्दियों के दौरान देहरादून के राजपुर रोड पर हुई और अब फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है।
‘विराम’ फिल्म की हीरोईन प्रतिभशाली ऊर्मिला माहांता हैं। ‘विराम’ एक मेनस्ट्रीम कर्मशियल फिल्म है जो फिल्म फेस्टिवल में दुनिया के हर कोने में रिलीज़ कर दी जाएगी।इस फिल्म को 18 मई को कान्स फेस्टिवल में रिलीज किया जायेगा।
सतीश कहते हैं, ‘पत्रकारिता से मेरी पहचान है और मैं उत्तराखंड को फिल्मी जगत के सितारों के साथ साथ विदेशों में भी मशहूर कर रहा हूं, और एक अभिनेता के तौर पर मुझे भी बहुत सराहना मिल रही है।’ सतीश ने बताया कि, ‘अाने वाले काम को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं और अभी बहुत सारे प्रोजेक्ट पर काम मिला है लेकिन उसके बारे में बात करने का अभी सही समय नहीं है।’
अभी के लिए सतीश एक ऐसी फिल्म को हिस्सा बन कर बहुत खुश हैं जो आने वाले मई महीने में कान्स के फिल्म फेस्टिवल में पहली बार दिखाई जाएगी।
रिस्पना, बिंदाल का होगा कायाकल्प
मसूरी, दो दुकानो में शार्ट सर्किट से आग लगी
पहाड़ों की रानी मसूरी में एक बड़ा हादसा होते होते बचा। मसूरी का मशहूर गनहिल जहां शार्ट सर्किट की वजह से गिफ्ट और गेम की दो दुकानों में आग लग गई।
यह दोनों दुकाने पहाड़ की ऊंची चोटी पर होने की वजह से यहां फायर की गाड़ियां नही पहुंच पाई ।लोकल लोगों की हिम्मत और मदद से आग पर काबू पाया गया जिसकी वजह से आसपास की दुकानों में आग को फैलने से रोका जा सका।हालांकि दोनों दुकानों में ज्यादा आग लगने की वजह से दुकानदार मुकेश कुमार और फुरखान को लाखों का नुकसान हो गया।यह दुर्घटना दिन में होने की वजह से और ज्यादा पर्यटक ना होने की वजह से एक बहुत बड़ी अनहोनी टल गई।
सात समंदर पार होली के रंगों से सराबोर हुए उत्तराखंडी
होली रंगों का एक ऐसा त्यौहार है जो दुनिया के हर कोने में जहां भी भारतीय लोग है वहां धूमधाम से मनाया जाता है।जबकि भारत में इस साल होली 13 मार्च को मनाई गई दूसरे देश जैसे कि दुबई, यूएस, जैसे देशों में होली अभी तक मनाई जा रही।
न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के बहुत से लोग रहते हैं, और गढ़वाली जनसंख्या भी अच्छी खासी है।न्यूजीलैंड में रह रहे गढ़वालियों ने 26 मार्च को जमकर होली खेली।मैरीना थपलियाल ने बताया कि इस साल होली मनाने के लिए यह लोग बहुत ही खूबसुरत वाटरफाल हुनुआ रेंज के पास गए।यहां इन्होंने जमकर होली खेली और त्यौहार का लुत्फ उठाया।

वो बताती हैं कि इस साल सभी परिवार एकजुट होकर एक जगह पर मिलते हैं और साथ में हाथ से बनाए हुए अलग अलग तरह के पकवान लाते हैं जिसे वह मिल बांट कर खाते हैं।एक घर निर्धारित किया जाता है जिसमें लोग आते हैं और सबके साथ होली खेलते हैं और जहां पार्लियामेंट के सदस्यों ने भी होली खेली और साथ में न्यूजीलैंड पुलिस ने भी रंगों के त्यौहार का जम कर मज़ा लिया। इस पूरे होली के कार्यक्रम को काउसिंल के सहयोग से ठीक ढ़ंग से पूरा किया गया।मैरीना ने बताया कि वहां पर हर उम्र के लोगों के लिए अलग अलग प्रकार के गेम थे इसके साथ ही एक रेडियो स्टेशन जिसपर बालीवुड म्यूजिक बज रहा था और जिसे सुनकर लोग और ज्यादा खुश हो रहे थे।
त्यौहार लोगों का पास और साथ लाने का एक जबरदस्त माध्यम है,और हर उम्र के लोगों को एक साथ लाने के लिए त्यौहार सबसे अच्छा बहाना है।जो लोग अपने घर से दूर हैं उनके लिए होली के रंग का कुछ ऐसा है कि सबको अपने में मिला लेता है।सात समंदर पार अपने देश से दूर होने के बावजूद लोग इस त्यौहार को उतने ही ह्रर्षौउल्लास के साथ मनाते हैं।
विश्वविधायलों में फहराये जाएंगे 100 फीट लंबे तिरंगेः डॉ धन सिंह रावत
एक कार्यक्रम में ऋषिकेश पहुंचे प्रदेश सरकार में राज्य उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया की प्रदेश की विश्वविधायलों में 100-100 फीट लंबे तिरंगे भी फहराये जाएंगे। उन होने ये भी बताया की प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है जिससे प्रदेश में युवाओं को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके।
पहाड़ो में उच्च शिक्षा की कमी के कारण यहाँ युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त नही हो पाते जिसके कारण युवाओं को प्रोफेशनल शिक्षा और रोजगार के लिए शहरो का रुख करना पड़ता है, लेकिन अब जब प्रदेश में डबल इंजन वाली नई सरकार आ गई है तो उम्मीद यही जताई जा रही है की अब सरकार प्रोफेसनल शिक्षा की तरफ ज्यादा ध्यान देगी।
प्रदेश में अच्छी शिक्षा सरकार के लिए हमेशा ही चुनोती रही है। अभी तक उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कोई निर्णय नही लिए गए है जिससे युवाओं को रोजगार के लिए अच्छे प्रोफेसनल शिक्षा मिले, लेकिन अब इस सरकार से युवाओं की काफी उम्मीदे लगी है जिससे प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारा जा सके।



























































