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उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड में बूचड़खानों की शामत

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अवैध बूचड़खानों के ख़िलाफ़ चलाये जा रहे अभियान का असर देश के कई हिस्सों में होने लगा है। सरकारी अमला अब सड़को पर उतर कर अवैध मीट की दुकानों पर ताले लगाने में लगा है।

देवभूमि उत्तराखंड में भी योगी के इस असर से लोगों और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है । मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में अवैध बूचड़खाने नहीं चलने देने का दावा किया है। बूचड़खानों पर सरकार का रुख भांप कर सरकारी अमले ने सालों से अवैध तरीके से चल रही दुकानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी है।

अहम बात यह है कि देहरादून में चल रहे बूचड़खानों पर छापामारी के दौरान चौकाने वाला सामने अाया, चल रहे बूचड़खानों में किसी के पास भी लाइसेंस नहीं है।

शनिवार को जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की सम्मिलित कार्यवाही में देहरादून में इनामुल्ला बिलडिंग गॉधी रोड, चुक्खु मौहल्ला, कारगी मुस्लिम बस्ती में कार्यवाही की गयी जिसमें  एस0पी0 सिटी, अपर जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी आदि उपस्थित रहे। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग मौजूद था।

श्री पी0सी0जोशी कारगी ग्राम में उपस्थित रहे तथा अधोहस्ताक्षरी इनामुल्ला बिंल्ड्रिग स्थान पर उपस्थित रहे। क्षेत्र में निम्न खाद्य व्यापारकर्ताओं का निरीक्षण कर कार्यवाही की गयीः

इलामुल्ला बिल्डिंग-

  • अब्दुल सलाम पुत्र मौ0 सलीम कुरैशी,
  • नौषाद पुत्र वषीर अहमद कुरैशी
  • मौ0 शहजाद कुरैशी पुत्र मौ0 फारूख कुरैशी
  • इरफान कुरैशी पुत्र रहमत कुरैशी

चुक्खु मोहल्ला-

  • विकास सोनकर पुत्र राजाराम सोनकर

मुस्लिम बस्ती कारगी ग्राम

  • मौ0 गुलफाम अहमद पुत्र श्री मुनफेत अली
  • मुस्तकीम अहमद पुत्र श्री महमू

इन सभी जगहों पर खाद्य व्यापारकर्ता खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनिमय 2006 के अन्तर्गत लाइसेन्स प्रस्तुत नहीं कर सके तथा स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पायी गयी। व्यापारकताओं को अपना पक्ष रखने और समुचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन दिनो का अवसर दिया गया, उसके बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के अन्तर्गत वाद दायर/अन्य अागे की कार्यवाही की जायेंगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी योगी के आदेशों को अपने यहां अमलीजामा पहनाना चाहते है।  यही कारण है कि प्रदेश के तमाम जिलाधिकारियों को उन्होंने निर्देश दे दिए है कि अवैध बूचड़खाना हो तो उसे तुरंत रोका जाये। सीएम का कहना है कि किसी भी तरीके से अवैध बूचडखानों को चलने नहीं दिया जायेगा और सब की जन भावनाओं का ख्याल रखा जायेगा। लिहाजा उधमसिंह नगर हो या हरिद्वार, देहरादून हो या विकास नगर सभी जगह के पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ उन दुकानों पर भी छापेमारी शुरू कर दी जहां अवैध तरीके से मीट बेचा जा रहा था | पुलिस अधिकारियों की माने तो जहां-जहां बिना लाइसेंस की दुकानें चल रही है उन्हें तुरंत बंद करवाया जा रहा है।

बीसीके मिश्रा बनें यूपीसीएल के एमडी

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शुक्रवार को बीसीके मिश्रा ने प्रबन्ध निदेशक, उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड का कार्यभार संभाल लिया है। मिश्रा ने कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही उत्तराखण्ड पावर कारपोरेषन लिमिटेड मुख्यालय विक्रावि गबर सिंह ऊर्जा भवन में अधिकारियों तथा कर्मचारियों को सम्बोधित किया । उन्होंने सभी को उपभोक्ता एक्टिव होते हुए कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के लक्ष्य सभी को 24 घन्टे निर्बाध एवं गुणवक्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिष्चित करने हेतु तत्पर रहने को कहा।

इस दौरान कारपोरेशन के निदेशकगण  एम0के0 जैन, निदेशक (परियोजना),अतुल कुमार अग्रवाल,निदेशक (परिचालन), एम्0ए0 खान, निदेशक (वित्त), पी0सी0 ध्यानी, निदेशक (मा0सं0) एवं कारपोरेशन मुख्यालय में कार्यरत सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इससे पूर्व  मिश्रा  निदेशक(परिचालन) यूजेवीएनएल  के पद पर कार्यरत थे। श्री मिश्रा आईआईटी, बीएचयू, वाराणसी से अभियन्त्रण में स्नातक है।  मिश्रा परियोजना प्रबन्धन संस्थान, पेनसिल्वेनिया से परियोजना प्रबन्धन में प्रमाणन रखते है।  मिश्रा द्वारा टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी से प्रारम्भ करते हुए केन्द्र सरकार के उपक्रम एनएचपीसी लि0 तथा उत्तराखण्ड सरकार के उपक्रम यूजेवीएन लिमिटेड में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुये ऊर्जा क्षेत्र में 32 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

बूढ़े पेड़ो की जंगल छोड़ने की तैयारी

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उत्तराखण्ड के मध्य हिमालय क्षेत्र समेत देश के सभी वनों में सांस न ले पाने वाले बूढ़े और मृत पेड़ो को हटाया जाएगा। पुराने हो चुके सूखे और खोखले पेड़ ऑक्सीजन तो देते नहीं हैं, लेकिन इनके अंदर चल रही बैक्टीरियल क्रिया के कारण सड़न से कार्बन बढ़ रही है। भारतीय वन सर्वेक्षण (एफआरआई) ने देश में पहली बार ऐसे पेड़ो को हटाने के लिए आकलन शुरू कर दिया है। उत्तराखण्ड, यूपी, हरयाणा, पंजाब में आकलन के पहले चरण का कार्य पूरा हो गया है।
विज्ञानिको का कहना हैं की बूढ़े और बीमार पेड़ो में कार्बन स्टार्क तो रहता है, लेकिन इनकी सांस लेने की क्रियाबन्द होने का कारण ये ऑक्सिजन नहीं छोड़ते और न ही वातावरण का कार्बन सोखते हैं। इससे इनकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है। जो पेड़ खोखले हो गए है, उनके अंदर बैक्टेरिया रहते हैं। वे जब पेड़ो की टहनियों व जड़ो को खाकर नष्ट करते हैं तो उससे कार्बन उत्सर्जन होता है। कुछ कार्बन वातावरण में आता है और कुछ मिटटी में जाकर मिलती है। खासतौर पर जड़ो के नष्ट होने के बाद यह कार्बन अंदर मिट्टी में रहता है।
कार्बन उत्सर्जन से बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के मद्देनजर भारतीय वन सर्वेक्षण ने जंगलो में पुराने पेड़ो को हटाने के लिए यह आकलन शुरू किया है। पुराने पेड़ो को हटाने के बाद नई पौध की संख्या हिमालय क्षेत्र में अधिक है। एफआरआई के वैज्ञानिक का कहना है की पेड़ो को काटने के प्रतिबंध होने से भी लोग लकड़ी के लिए पुराने पेड़ो को नहीं काटते। इससे भी पुराने पेड़ो की संख्या बढ़ गई है। देश भर के जंगलों का आकलन होने के बाद एफआरआई अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगा।

ऋषिकेश: कब सुधरेगी सरकारी अस्पताल की दशा

कहने को ऋषिकेश सरकारी चिकत्सालय गढ़वाल के कई जिलों को अपनी सेवा उपलब्ध करवाता है, लेकिन यहाँ काफी लंबे समय से डाक्टर की कमी के चलते मरीजों को काफी दिक्केतें हो रही है, तो वहीँ हॉस्पिटल की व्यवस्था की तरफ भी कोई ध्यान देता नहीं दिख रहा है।

चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार और उत्तराखंड टूरिज्म की रीड की हड्डी कही जाने वाले ऋषिकेश में साल भर दूर दूर से बड़ी संख्या लोग आते है। पर हाल यह है की ऋषिकेश के एकमात्र सरकारी अस्पताल के हालात ऐसे है की यहाँ न तो डॉक्टर है और न ही साफ़ सफाई की कोई प्रॉपर व्यवस्था , हाल तो यह है की पिछले कई हफ्तों से अस्पताल में रेबीज सहित कई दवाइयों की कमी चल रही जिसके जिसके कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों को काफी परेशानिया उठानी पड़ रही है। ऋषिकेश के पहाड़ी जिलों से जुड़े होने के कारण दूर दराज से गांव के लोग इलाज के लिए ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते है परन्तु सरकारी अस्पताल के हाल यह है की यहाँ कई  विभागों में डॉक्टरों की कमी चल रही है जो प्रदेश की स्वास्थ व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। सरकारी अस्पताल की मुख्य अधीक्षक का कहना है की हमने डॉक्टर की कमी के लिए प्रशसन को कई बार भेजा है पर अभी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाए है। उत्तराखंड बने हुए इतने साल हो गए लेकिन अफसोस यह है की अभी तक प्रदेश में स्वास्थ व्यवस्थाएं अपनी बदहाल स्थिति में है न तो अस्पतालों में डॉक्टर्स है और न ही दवाइओं की पूरी आपूर्ति ऐसे में प्रदेश में स्वास्थ सुविधाएँ भगवान भरोसे चल रही है।

ठेके खुले रखने के लिये सरकार ने निकाला डिनोटिफिकेशन का जुगाड़

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शुक्रवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में सरकरा ने शराब बिक्री से जुड़े व्यवसायी को राहत देते हुए राज्य के 63 राज्य मार्गों को डिनोटिफाई करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार राजमार्ग पर शराब के ठेके बंद करने के निर्देश दिए थे और राज्य में नियम पालन भी हुआ यानी ठेके बंद कर दिए गए। लेकिन त्रिवेंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड के हर राजमार्ग को जिला मार्ग बनाकर छोड़ दिया है। जी हां.. अब उत्तराखण्ड सरकार ने हर राजमार्ग का नाम बदलकर कर जिला मार्ग कर दिया है।

पिछले कई दिनों से शराब को लेकर पूरे प्रदेश भर में आंदोलन के बाद त्रिवेंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया है। सरकार के हिसाब से राज्य में लगभग 64 राज्य राजमार्ग है और 40 प्रतिशत शराब की दुकानें इन रास्तों पर है। राज्य सरकार को शराब व खनन से एक बड़ा राजस्व आता है और शायद यही कारण है कि आज शराब कारोबारियों को मुख्यमंत्री ने राहत की सांस दिला दी है।

कैबिनेट में कहा गया कि “राज्य के शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों की सीमा के अंदर आने वाले राजमार्गाें में जनसंख्या दबाव सहित मार्ग के किनारों पर भवन निर्माण, गतिविधियों में अधिक वृद्धि होने, मार्ग में सीवर लाइन, नाली, बिजली के स्तम्भ/ट्रांसफार्मर, टेलीफोन लाइन, स्थानीय निकाय के होर्डिंग आदि होने के कारण मार्ग के इन भागों का रख-रखाव और अन्य विकास व विस्तार ‘राजमार्ग’ की विशिष्टियों के अनुरूप किये जाने में व्यवहारिक कठिनाई आ रही है। इस लिये राज्य मार्गाें के वे भाग जो किसी भी शहरी स्थानीय निकाय यथा नगर निगम, नगर पालिका परिषद अथवा नगर पंचायत की सीमा से गुजरते हों, को राज्यमार्ग की श्रेणी से अवर्गीकृत(डिनोटीफोई) करते हुए इस भाग को अन्य जिला मार्ग में वर्गीकृत किया गया है। राज्य में 64 राज्य मार्ग हैं जिनमें 63 नगर निकाय पड़ते हैं।”

पिछले कुछ दिनों में राज्य में शराब बंदी के समर्थन में कई जगह आवाज़ उठीं थी। लेकिन कयास इस बात के भी लगाये जा रहे थे कि मजबूत लिकर लाॅबी और शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व को ध्यान में रखते हुए सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल सकती है। और ऐसा ही कुछ हुआ भी।

व्यवस्था परिवर्तन मंच और गढ़वाल महासभा द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ऋषिकेश के राजकीय चिकित्सालय में व्यवस्था परिवर्तन मंच एवम गढ़वाल महासभा द्वारा स्वेच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें युवायों में बड़-चड़कर हिस्सा लिया और रक्तदान किया व्यवस्था परिवर्तन मंच के प्रदेश अध्य्क्ष डॉ राजे नेगी ने बताया कि आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ये रक्तदान शिविर लगाया गया है और लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

उत्तराखंड शासन में फेरबदल

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शासन द्वारा जनहित में अपर सचिव, सतर्कता तथा सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा विभाग श्री नितिन सिंह भदौरिया को वर्तमान पदभार से अवमुक्त करते हुए मिशन निदेशक, एन.एच.एम., परियोजना निदेशक, उत्तराखण्ड हैल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एवं संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के पद पर तैनात किया गया है।
कार्मिक विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार डाॅ.रंजीत कुमार सिन्हा को अपर सचिव, नियोजन के पद पर, अपर सचिव, वित्त, नियोजन, खनन, राज्य सम्पत्ति अधिकारी, निदेशक खनन तथा निदेशक, लेखा परीक्षा(आॅडिट) श्री विनय शंकर पाण्डेय को अपर सचिव, नियोजन के पदभार से अवमुक्त किया गया है। श्री पाण्डेय के शेष पदभार यथावत रहेंगे। अपर सचिव, ग्रामीण अभिंयत्रण सेवा, आयुष, मत्स्य पालन तथा ग्रामीण सड़कें एवं ड्रेनेज श्री जी.बी.ओली को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव मा.मुख्यमंत्री एवं स्टाॅफ आफिस, अपर मुख्य सचिव, मा.मुख्यमंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

अब पौड़ी से मेरठ बनेगा फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग

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गढ़वाल मंडल के महत्वपूर्ण मेरठ-पौड़ी राष्टीय राजमार्ग को फोर लेन बनाने के प्रस्ताव को केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद लगभग 135 किमी बड़ा राजमार्ग को फोर लेन में बदल दिया जाएगा। नई दिल्ली में राज्य के वन पर्यावरण तथा आयुष शिक्षा मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिल कर इस बात को उठाया।
डा. रावत ने कहा कि मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग गढ़वाल मंडल का महत्वपूर्ण राजमार्ग है। यह राजमार्ग मेरठ से कोटद्वार तक मैदानी क्षेत्र में 135 किमी लंबा है, लेकिन यह सिर्फ टू लेन है। डा. रावत का कहना था कि अगर मेरठ से कोटद्वार फोर लेन एक्सप्रेस-वे बन जाए तो गढ़वाल मंडल में व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। डा. हरक सिंह रावत ने बताया कि  केंद्रीय मंत्री ने मेरठ से कोटद्वार तक राष्ट्रीय राजमार्ग को फोर लेन बनाने के प्रस्ताव को सहमति देदी है। साथ ही इसके लिए तत्काल डीपीआर बना कर जल्द ही कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कंडी मार्ग ( गेड़ीखाता-लालढांग-कलालघाटी-पाखरौ-कालागढ़-रामनगर) को राष्टीय राजमार्ग घोषित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही कोटद्वार से श्रीनगर के मार्ग को अालवेदर रोड से जोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देशित किया। कोटद्वार में अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध कराने पर अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए हर सम्भव केंद्रीय सहायता देने का आश्वासन दिया है।

तो ये है हरदा का नया पता

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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को सोशल मीडिया टिव्टर के जरिए यह टिव्ट किया कि आखिरकार उन्हें रहने के लिए देहरादून में किराए का घर मिल ही गया, इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि उन्हें निराशा होने लगी है कि शायद लोग उनको घर नहीं देना चाहते।

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जी हां कल तक बीजापुर गेस्ट हाउस में रहने वाले पूर्व सीएम को यह चिंता सता रही थी कि उन्हें रहने के लिए कोई घर नहीं देना चाहता लेकिन गुरुवार को एक टिव्ट के माध्यम से उन्होंने हर जाहिर किया की उनको रहने के लिए आशियाना मिल गया है। चुनाव के परिणाम के घोषणा के बाद हर किसी के मन में यह सवाल था कि हरीश रावत कहां रहेंगे लेकिन शुक्रवार को उनके गर का ठिकाना आखिरकार मिल ही गया। आपको बतातें चले कि मकान मालिक ने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि हरीश रावत उनके घर में शिफ्ट हो रहे हैं।लेकिन रावत के केयर टेकर ने यह बात साफ कर दी है कि पूर्व सीएम इस मकान में आने वाले कुछ दिनों में शिफ्ट कर रहे हैं।

इसके साथ ही मकान में मरम्मत व बिजली की रिपेयरिंग का काम शुरु हो चुका है, और धीरे-धीरे आधा सामान भी शिफ्ट हो चुका है। शहर की भागदौड़ और हल्ले से दूर पूर्व सीएम रावत ने राजपुर स्थित मसूरी रोड पर अपने और अपने परिवार के लिए यह आशियाना ढ़ूढ लिया है।

पर्यटन सीजन शुरू होते ही व्यवस्थाएं बेपटरी

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पर्यटन सीजन शुरू हो ही चूका है, लेकिन रोडवेज की व्यवस्थाएं अभी तक ठीक नहीं हुई हैं। इस भरी गर्मी से राहत के लिए मसूरी घूमने के लिए दून में पर्यटको की जनसंख्या बढ़ने लगी है। लेकिन इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से की गई व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। मांग के बावजूद मसूरी  बस अड्डे पर बसों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। ऐसे में परिवहन निगम को राजस्व में घाटा तो होगा ही साथ ही पर्यटकों को भी खासी परेशानी से गुजरना पड़ेगा।
पहाड़ो की रानी के नाम से जानने वाली मसूरी जाने के लिए हर साल अप्रैल से देवभूमि से सैलानियों की भीड़ शुरू हो जाती है। इनसे रोडवेज को भी काफी लाभ होता है। लेकिन इस बार हालात कुछ चिंताजनक लग रहे हैं। पर्वतीय डिपों में कुल 105 बसें हैं। इनमे से मसूरी बस अड्डे से रोजाना 18 बसे मसूरी के लिए अपना सफर तय करती हैं। ये बसें एक दिन में 88 ट्रिप रोज लगाती हैं। जबकि पिछले सीजन में बसो के कुल 110 ट्रिप रोज लगते थे। जरूरतों के मुताबिक मसूरी के लिए अभी कम से कम 20 और बसों की मांग की गई है। जिसमे बसों के ट्रिप बढ़ाए जाए और साथ ही  राजस्व मे भी इजाफा होने के साथ पर्यटक को भी परेशांनी से छुटकारा मिल सके।
परिवहन निगम के महाप्रबन्धक संचालन दीपक जैन ने बताया कि चालक-परिचालक की भर्ती प्रकिया चल रही है। इसके बाद स्थिति सुधर जाएगी। मसूरी जाने वाली बसों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। गौरतलब यह है कि अभी निगम को 20 बसों की और ज़रूरत है जबकि 30-30 चालक और परिचालक की अभी और जरूरत है।
फिलहाल में पर्वतीय डिपों में कुल 83 चालक हैं, जिनमे 23 अक्षम है। ऐसे में केवल 60 चालक ही बचते हैं। वहीं आउटसोर्स में 61 और संविदा में 21 चालक हैं। 58 स्थायी परिचालक, 82 आउटसोर्स और एक संविदा पर रखे गए परिचालक हैं।