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ऋषिकेश: कब सुधरेगी सरकारी अस्पताल की दशा

कहने को ऋषिकेश सरकारी चिकत्सालय गढ़वाल के कई जिलों को अपनी सेवा उपलब्ध करवाता है, लेकिन यहाँ काफी लंबे समय से डाक्टर की कमी के चलते मरीजों को काफी दिक्केतें हो रही है, तो वहीँ हॉस्पिटल की व्यवस्था की तरफ भी कोई ध्यान देता नहीं दिख रहा है।

चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार और उत्तराखंड टूरिज्म की रीड की हड्डी कही जाने वाले ऋषिकेश में साल भर दूर दूर से बड़ी संख्या लोग आते है। पर हाल यह है की ऋषिकेश के एकमात्र सरकारी अस्पताल के हालात ऐसे है की यहाँ न तो डॉक्टर है और न ही साफ़ सफाई की कोई प्रॉपर व्यवस्था , हाल तो यह है की पिछले कई हफ्तों से अस्पताल में रेबीज सहित कई दवाइयों की कमी चल रही जिसके जिसके कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों को काफी परेशानिया उठानी पड़ रही है। ऋषिकेश के पहाड़ी जिलों से जुड़े होने के कारण दूर दराज से गांव के लोग इलाज के लिए ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते है परन्तु सरकारी अस्पताल के हाल यह है की यहाँ कई  विभागों में डॉक्टरों की कमी चल रही है जो प्रदेश की स्वास्थ व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। सरकारी अस्पताल की मुख्य अधीक्षक का कहना है की हमने डॉक्टर की कमी के लिए प्रशसन को कई बार भेजा है पर अभी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाए है। उत्तराखंड बने हुए इतने साल हो गए लेकिन अफसोस यह है की अभी तक प्रदेश में स्वास्थ व्यवस्थाएं अपनी बदहाल स्थिति में है न तो अस्पतालों में डॉक्टर्स है और न ही दवाइओं की पूरी आपूर्ति ऐसे में प्रदेश में स्वास्थ सुविधाएँ भगवान भरोसे चल रही है।

ठेके खुले रखने के लिये सरकार ने निकाला डिनोटिफिकेशन का जुगाड़

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शुक्रवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में सरकरा ने शराब बिक्री से जुड़े व्यवसायी को राहत देते हुए राज्य के 63 राज्य मार्गों को डिनोटिफाई करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार राजमार्ग पर शराब के ठेके बंद करने के निर्देश दिए थे और राज्य में नियम पालन भी हुआ यानी ठेके बंद कर दिए गए। लेकिन त्रिवेंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड के हर राजमार्ग को जिला मार्ग बनाकर छोड़ दिया है। जी हां.. अब उत्तराखण्ड सरकार ने हर राजमार्ग का नाम बदलकर कर जिला मार्ग कर दिया है।

पिछले कई दिनों से शराब को लेकर पूरे प्रदेश भर में आंदोलन के बाद त्रिवेंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया है। सरकार के हिसाब से राज्य में लगभग 64 राज्य राजमार्ग है और 40 प्रतिशत शराब की दुकानें इन रास्तों पर है। राज्य सरकार को शराब व खनन से एक बड़ा राजस्व आता है और शायद यही कारण है कि आज शराब कारोबारियों को मुख्यमंत्री ने राहत की सांस दिला दी है।

कैबिनेट में कहा गया कि “राज्य के शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों की सीमा के अंदर आने वाले राजमार्गाें में जनसंख्या दबाव सहित मार्ग के किनारों पर भवन निर्माण, गतिविधियों में अधिक वृद्धि होने, मार्ग में सीवर लाइन, नाली, बिजली के स्तम्भ/ट्रांसफार्मर, टेलीफोन लाइन, स्थानीय निकाय के होर्डिंग आदि होने के कारण मार्ग के इन भागों का रख-रखाव और अन्य विकास व विस्तार ‘राजमार्ग’ की विशिष्टियों के अनुरूप किये जाने में व्यवहारिक कठिनाई आ रही है। इस लिये राज्य मार्गाें के वे भाग जो किसी भी शहरी स्थानीय निकाय यथा नगर निगम, नगर पालिका परिषद अथवा नगर पंचायत की सीमा से गुजरते हों, को राज्यमार्ग की श्रेणी से अवर्गीकृत(डिनोटीफोई) करते हुए इस भाग को अन्य जिला मार्ग में वर्गीकृत किया गया है। राज्य में 64 राज्य मार्ग हैं जिनमें 63 नगर निकाय पड़ते हैं।”

पिछले कुछ दिनों में राज्य में शराब बंदी के समर्थन में कई जगह आवाज़ उठीं थी। लेकिन कयास इस बात के भी लगाये जा रहे थे कि मजबूत लिकर लाॅबी और शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व को ध्यान में रखते हुए सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल सकती है। और ऐसा ही कुछ हुआ भी।

व्यवस्था परिवर्तन मंच और गढ़वाल महासभा द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ऋषिकेश के राजकीय चिकित्सालय में व्यवस्था परिवर्तन मंच एवम गढ़वाल महासभा द्वारा स्वेच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें युवायों में बड़-चड़कर हिस्सा लिया और रक्तदान किया व्यवस्था परिवर्तन मंच के प्रदेश अध्य्क्ष डॉ राजे नेगी ने बताया कि आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ये रक्तदान शिविर लगाया गया है और लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

उत्तराखंड शासन में फेरबदल

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शासन द्वारा जनहित में अपर सचिव, सतर्कता तथा सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा विभाग श्री नितिन सिंह भदौरिया को वर्तमान पदभार से अवमुक्त करते हुए मिशन निदेशक, एन.एच.एम., परियोजना निदेशक, उत्तराखण्ड हैल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एवं संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के पद पर तैनात किया गया है।
कार्मिक विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार डाॅ.रंजीत कुमार सिन्हा को अपर सचिव, नियोजन के पद पर, अपर सचिव, वित्त, नियोजन, खनन, राज्य सम्पत्ति अधिकारी, निदेशक खनन तथा निदेशक, लेखा परीक्षा(आॅडिट) श्री विनय शंकर पाण्डेय को अपर सचिव, नियोजन के पदभार से अवमुक्त किया गया है। श्री पाण्डेय के शेष पदभार यथावत रहेंगे। अपर सचिव, ग्रामीण अभिंयत्रण सेवा, आयुष, मत्स्य पालन तथा ग्रामीण सड़कें एवं ड्रेनेज श्री जी.बी.ओली को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव मा.मुख्यमंत्री एवं स्टाॅफ आफिस, अपर मुख्य सचिव, मा.मुख्यमंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

अब पौड़ी से मेरठ बनेगा फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग

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गढ़वाल मंडल के महत्वपूर्ण मेरठ-पौड़ी राष्टीय राजमार्ग को फोर लेन बनाने के प्रस्ताव को केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद लगभग 135 किमी बड़ा राजमार्ग को फोर लेन में बदल दिया जाएगा। नई दिल्ली में राज्य के वन पर्यावरण तथा आयुष शिक्षा मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने केंद्रीय सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिल कर इस बात को उठाया।
डा. रावत ने कहा कि मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग गढ़वाल मंडल का महत्वपूर्ण राजमार्ग है। यह राजमार्ग मेरठ से कोटद्वार तक मैदानी क्षेत्र में 135 किमी लंबा है, लेकिन यह सिर्फ टू लेन है। डा. रावत का कहना था कि अगर मेरठ से कोटद्वार फोर लेन एक्सप्रेस-वे बन जाए तो गढ़वाल मंडल में व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। डा. हरक सिंह रावत ने बताया कि  केंद्रीय मंत्री ने मेरठ से कोटद्वार तक राष्ट्रीय राजमार्ग को फोर लेन बनाने के प्रस्ताव को सहमति देदी है। साथ ही इसके लिए तत्काल डीपीआर बना कर जल्द ही कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कंडी मार्ग ( गेड़ीखाता-लालढांग-कलालघाटी-पाखरौ-कालागढ़-रामनगर) को राष्टीय राजमार्ग घोषित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही कोटद्वार से श्रीनगर के मार्ग को अालवेदर रोड से जोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देशित किया। कोटद्वार में अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध कराने पर अंतरराज्यीय बस अड्डे के लिए हर सम्भव केंद्रीय सहायता देने का आश्वासन दिया है।

तो ये है हरदा का नया पता

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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को सोशल मीडिया टिव्टर के जरिए यह टिव्ट किया कि आखिरकार उन्हें रहने के लिए देहरादून में किराए का घर मिल ही गया, इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि उन्हें निराशा होने लगी है कि शायद लोग उनको घर नहीं देना चाहते।

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जी हां कल तक बीजापुर गेस्ट हाउस में रहने वाले पूर्व सीएम को यह चिंता सता रही थी कि उन्हें रहने के लिए कोई घर नहीं देना चाहता लेकिन गुरुवार को एक टिव्ट के माध्यम से उन्होंने हर जाहिर किया की उनको रहने के लिए आशियाना मिल गया है। चुनाव के परिणाम के घोषणा के बाद हर किसी के मन में यह सवाल था कि हरीश रावत कहां रहेंगे लेकिन शुक्रवार को उनके गर का ठिकाना आखिरकार मिल ही गया। आपको बतातें चले कि मकान मालिक ने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि हरीश रावत उनके घर में शिफ्ट हो रहे हैं।लेकिन रावत के केयर टेकर ने यह बात साफ कर दी है कि पूर्व सीएम इस मकान में आने वाले कुछ दिनों में शिफ्ट कर रहे हैं।

इसके साथ ही मकान में मरम्मत व बिजली की रिपेयरिंग का काम शुरु हो चुका है, और धीरे-धीरे आधा सामान भी शिफ्ट हो चुका है। शहर की भागदौड़ और हल्ले से दूर पूर्व सीएम रावत ने राजपुर स्थित मसूरी रोड पर अपने और अपने परिवार के लिए यह आशियाना ढ़ूढ लिया है।

पर्यटन सीजन शुरू होते ही व्यवस्थाएं बेपटरी

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पर्यटन सीजन शुरू हो ही चूका है, लेकिन रोडवेज की व्यवस्थाएं अभी तक ठीक नहीं हुई हैं। इस भरी गर्मी से राहत के लिए मसूरी घूमने के लिए दून में पर्यटको की जनसंख्या बढ़ने लगी है। लेकिन इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से की गई व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। मांग के बावजूद मसूरी  बस अड्डे पर बसों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। ऐसे में परिवहन निगम को राजस्व में घाटा तो होगा ही साथ ही पर्यटकों को भी खासी परेशानी से गुजरना पड़ेगा।
पहाड़ो की रानी के नाम से जानने वाली मसूरी जाने के लिए हर साल अप्रैल से देवभूमि से सैलानियों की भीड़ शुरू हो जाती है। इनसे रोडवेज को भी काफी लाभ होता है। लेकिन इस बार हालात कुछ चिंताजनक लग रहे हैं। पर्वतीय डिपों में कुल 105 बसें हैं। इनमे से मसूरी बस अड्डे से रोजाना 18 बसे मसूरी के लिए अपना सफर तय करती हैं। ये बसें एक दिन में 88 ट्रिप रोज लगाती हैं। जबकि पिछले सीजन में बसो के कुल 110 ट्रिप रोज लगते थे। जरूरतों के मुताबिक मसूरी के लिए अभी कम से कम 20 और बसों की मांग की गई है। जिसमे बसों के ट्रिप बढ़ाए जाए और साथ ही  राजस्व मे भी इजाफा होने के साथ पर्यटक को भी परेशांनी से छुटकारा मिल सके।
परिवहन निगम के महाप्रबन्धक संचालन दीपक जैन ने बताया कि चालक-परिचालक की भर्ती प्रकिया चल रही है। इसके बाद स्थिति सुधर जाएगी। मसूरी जाने वाली बसों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। गौरतलब यह है कि अभी निगम को 20 बसों की और ज़रूरत है जबकि 30-30 चालक और परिचालक की अभी और जरूरत है।
फिलहाल में पर्वतीय डिपों में कुल 83 चालक हैं, जिनमे 23 अक्षम है। ऐसे में केवल 60 चालक ही बचते हैं। वहीं आउटसोर्स में 61 और संविदा में 21 चालक हैं। 58 स्थायी परिचालक, 82 आउटसोर्स और एक संविदा पर रखे गए परिचालक हैं।

काशीपुर: चैती में लगता है ढोलक का एतिहासिक बाजार

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 काशीपुर- आधुनिक वाध्य यंत्रों की धमक के आगे पौराणिक वाध्य यंत्रों की धुनें खों गयी है। डिस्को की धमक में युवा पीढी वाध्य यंत्रों की धुने भूल रही है, वहीं आज भी उत्तर प्रदेश के अमरोहा के ठोलकों की कभी बेतहासा डिमाण्ड हुआ करती थी मगर आज ढोलक व्यापारियों के सामने अपने पैत्रिक हूनर को बचाना मुश्किल हो गया है।

कभी काशीपुर के चैती मेले में ढोलक का सबसे बडा बाजार लगा करता था जहां खास तौर पर अमरोहा की ढोलकखरीदने लोग दूर दूर से आया करते थे कई किस्म की ढोलक खरीदने मुरादाबाद, बिजनौर, बरेली,रामपुर और मुजफ्फर नगर से मनोरंजन के लिए ले जाते थे, वहीं इस व्यवसाय से जुडे व्यापारियों की इस मेले में सैंकडों ढोलकें बिक जाया करती थी मगर समय के साथ साथ अब इस बाजार की जहां रौनक कम होने लगी है वहीं ढोलक की खरीद कम होने से व्यापारियों के सामने अपना रोजगार बचाना मुश्किल हो गया है।

नहीं बख्शे जाएंगे खनन माफियाः डीएम, उधमसिंहनगर

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 रुद्रपुर-उधमसिंहनगर, में हाई कोर्ट के आदेश का पालन कराने और खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए डीएम नीरज खैरवाल ने फरमान जारी कर कहा, अगर जनपद में कोई वाहन खनन के कार्य में पकड़ा जाता है तो उस वाहन को सरकारी सम्पति घोषित किया जायेगा, साथ ही पकडे गये वाह्न स्वामियों के खिलाफ चोरी करने के जुर्म में एफआईआर दर्ज करवायी जायेगी । डीएम ने कहा हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुरे प्रदेश में चार माह के लिये खनन पर रोक लगी है।

उधमसिंहनगर में भी हाई कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए टीम बनाई गई है और अगर कोई व्यक्ति खनन करता पाया जाता है तो उनके विरुद्ध चोरी का मुकदमा दर्ज कराया जायेगा। वाहन खनन के कार्य में संलिप्त पाया जायेगा उस वाहन को सरकारी सम्पति घोषित कर दिया जायेगा। डीएम के इस आदेश से अवैध खनन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

रुद्रपुर: अतिक्रमण पर गरजी जेसीबी

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 रुद्रपुर में एकाएक बढ़ रहे अतिक्रमण को लेकर प्रशाशन ने कड़ा रुख अख्त्यार करते हुए काशीपुर बाईपास रोड पर जे सी बी से हमला बोल दिया। प्रशासन की इस कार्यवाही से लोगो में हडकंप मच गया, लोगों ने प्रशासन से बात करने की कोशिश की लेकिन अतिक्रमण की हद देखते हुए प्रशासन ने किसी की एक नहीं सुनी और एक तरफ से अतिक्रमण को हटाते चले गए।
गौरतलब है की लम्बे समय से रुद्रपुर जाम की समस्या से जूझ रहा है जिसकी एक बड़ी वजह अतिक्रमण भी थी, आये दिन कुछ लोग ग्रीन बैल्ट को घेरकर पक्के निर्माण कर या अन्य तरीको से अतिक्रमण कर रहे थे, जिससे आम जनता को खासी परेशानिया उठानी पड़  रही थी और प्रशाशन की नाक में भी दम हो रखा था , जिसके तहत प्रशासन ने पुलिस बल सहित एक तरफ से जे सी बी चला कर सड़क से 75 फीट तक किये गए अतिक्रमण को गिरा दिया।
हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में प्रशास की लोगों से नोक झुक भी हुई जिसमे लोगो ने प्रशासन और ए एस पी मंजुनाथ टी सी पर बदतमीजी का आरोप भी लगाया। मुख्य नगर अधिकारी दीप्ति सिंह ने बताया की लोगो को काफी समय से अतिक्रमण हटाने की चेतवानी दी जा रही थी जिसके तहत ये कार्यवाही की गई है।