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वीकेंड पर राफ्टिंग से गुलजार हुई गंगा और ऋषिकेश

ऋषिकेश। राफ्टिंग के नए सीजन ने गंगा में एक बार फिर रौनक बढ़ा दी है, ऋषिकेश का राफ्टिंग जोन पर्यटकों को इस एडवेंचर स्पोर्ट की ओर खीचने लग गया है, जिसके चलते वीकेंड पर पर्यटक राफ्टिंग का लुफ्त उठाने पहुच रहे है। दिल्ली-हरयाणा से काफी संख्या में पर्यटक ऋषिकेश का रुख करते दिख रहे है और राफ्टिंग का रोमांच उठा रहे है। गंगा की लहरों पर सवारी के खेल का नाम है रीवर राफ्टिंग, जिसका अनुभव एक नया रोमांच दे देता है।
उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन की पहचान बन गयी रिवर राफ्टिंग अब नयी उचाईयो को छूने लगी है। ऋषिकेश कि 140 राफ्टिंग कम्पनियों ने नए सीजन कि शुरुवात पर पर्यटकों को राफ्टिंग का रोमांच देना शुरु कर दिया, जिसके चलते एक बार फिर गंगा रंग बिरंगी राफ्टों से गुलजार हो चुकी, और यहाँ के व्यवसायी  से बड़ी उम्मीद से देख रहे है। खासकर वीकेंड पर यहाँ देश के कोने-कोने से पर्यटक इस साहसिक खेल का लुफ्त उठाने के लिए लगातार यहाँ पहुंच रहे है।
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उत्तराखंड में, रीवर राफ्टिंग पर्यटन का मुख्य आधार है, जिसने विश्व के नक़्शे पर ऋषीकेश की पहचान बनायीं है। गंगा के रैपिड पूरे विश्व में अपने रोमांच के कारण जाने जाते है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस अनुभव को लेना नहीं भूलते और बार -बार यहाँ खिचे चले आते है। लहरों कि सवारी का ये अहसास जिंदगी भर उनको रोमांच कि अनुभूति करता रहता है। ऋषिकेश को राफ्टिंग और कयाकिंग के लिए परफेक्ट जॉन मन जाता है, यही कारण है की इस एडवेंचर से रूबरू होने के लिए हर कोई ऋषिकेश का रुख करता है।

शहरों में वार्ड बढ़ाने के लिए 15 मई तक प्रस्ताव मांगे

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राज्य में शहरी विकास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों से 15 मई तक निकायों के सीमा विस्तार मांगे हैं। अप्रैल 2018 में प्रस्तावित निकाय चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर होंगे। निकायों के परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़े इस्तेमाल किए जाने से सभी निकायों में वार्ड संख्या बढ़नी तय है। कारण यह है कि बीते सालो में शहरी क्षेत्रों में आबादी तेजी से बड़ी है। खासकर मैदानी क्षेत्रों के निकायों की आबादी इस दौरान कई गुना बड़ी है, जिस कारण यहां वार्ड की संख्या बढ़नी तय है।
शहरी विकास के प्रभारी सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने सभी जिलाधिकारियों को नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के सीमा विस्तार और परिसीमन का कार्यक्रम भेज दिया है। आदेश में कहा गया है कि निकायों से सटे ग्रामीण क्षेत्र अब काफी विकसित हो चुके हैं। इन्हें जरूरत के अनुसार निकायों में शामिल किया जा सकता है। स्पष्ट किया गया है कि पिछली बार निकाय चुनाव अप्रैल 2013 मव हुए थे, तब तक 2011 की जनगणना के आंकड़े सावर्जनिक नहीं हुए थे। इस कारण तब 2001 की जनगणना आकड़ो के आधार पर वार्डो का परिसीमन कराया गया। लेकिन 2018 में प्रस्तावित चुनाव के लिए परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे। क्योंकि 2011 की जनगणना में भी ओबीसी की गिनती नहीं हो पाई है, इसलिए आरक्षण तय करने से पहले सभी निकाय ओबीसी का सर्वे भी करेंगे।
नगर निगम में फिलहाल अधिकतम वार्ड की संख्या 60 है। इसे 80 करने का प्रस्ताव शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में आ सकता है। इसके बाद सभी नगर निगमो में वार्ड बढ़ाने का निर्णय ही सकता है। ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा,भीमताल पालिका का सीमा विस्तार व हरिद्वार में डंडेरो को नगर पालिका का दर्जा देने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में आ सकता है।

प्राईवेट स्कूलों ने मनमानी की तो होगा एक्शन

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अगर प्राइवेट स्कूलों ने छात्र-छात्राओं से मनमानी फीस वसूलने, कमिशन के लालच में किसी खास दुकना से किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने के साथ स्कूलों में एनसीआरटी की पुस्तकों को लेकर सीबीएससी के नियमों का भी पालन नहीं किया तो उन पर सख़्त एक्शन लिया जायेगा।

प्राईवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के मकसद से उधमसिंह नगर के डीएम डाॅ. नीरज खैरवाल ने प्राईवेट स्कूलों के प्रबन्धकों एवं प्रधानाचार्याें के साथ कलक्ट्रेट में बैठक की। उन्होंने प्राईवेट शिक्षण संस्थानों के प्रबन्धकों को हिदायत दी कि शिक्षा के मन्दिर को लूटपाट का अड्डा न बनाया जाय। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्कूल के खिलाफ नियमों की अनदेखी या मनमाने तरीके से काम करने की शिकायत को सही पाया गया तो सम्बन्धित संस्थान की मान्यता रद्द करवा दी जायेगी।

जिलाधिकारी ने जिलाधिकारी ने कहा कि प्राईवेट स्कूलों को मनमानी नहीं करने दी जायेगी। शिकायत मिलने पर सम्बधित शिक्षण संस्थान के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। उन्होने ने कहा कि यदि प्राईवेट शिक्षण संस्थान ईमानदारी से अपनी संस्था को नहीं चला पा रहे हैं तो वे अपनी शिक्षण संस्था को बन्द कर दे। जिलाधिकारी ने शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये वे प्राईवेट स्कूलों से सीबीएससी के नियमों का कडाई से अनुपालन करवाना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने प्राईवेट स्कूलों के प्रबन्धकों एवं प्रधानाचार्याें को शिक्षण संस्था चलाने के अलावा अन्य जनहित के कार्याें से जुडने की भी नसीहत दी।

मसूरी की सड़कों पर पुलिस का तांडव

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आपने कभी सुना है कि किसी पुलिसवाले ने अपने आप को पुलिस लाकअप में बंद कर लिया हो, वो भी खुद को बचाने के लिए। जी हां कुछ ऐसा ही हुआ बारलौगंज मसूरी में। लोगों का गुस्सा एक पुलिस वाले के उपर निकला और लगभग 100 लोग एक साथ पुलिसवाले को ढूंढने निकले, जिस से ङर कर पुलिसवाले ने अपने को लाॅकअप में बंद कर दिया। यह वाक्या है बारलौगंज, मसूरी का जहां नशे में धुत एक पुलिस वाले ने जिसका नाम बाक्सर है (र्स्पोटस कोटे से पुलिस में भर्ती लेने वाला) अपने दोस्त जो खुद को एसएचओ बता रहा था (देव शर्मा), के साथ मिलकर तीन लोगों को जमकर पीट दिया जिसमें एक महिला भी थी।

बारलौगंज में बारलो टी स्टाल के नाम से दुकान चलाने वाले 35 साल के महेंद्र सिंह मेलवान बताते हैं कि, ‘मैं अपने रेस्टोरंट के सामने खड़ा होकर फोन पर बात कर रहा था जब नशे में धुत नेगी ने पैसे के लिए मेरी जेब में हाथ डाला, और मुझसे कहने लगा कि मेरे पास जुऐं के कुछ पैसे पड़े होंगे क्योंकि इस क्षेत्र में जुआं खेलना आम बात है।जब मैनें उससे कहा कि मैं जुआं नहीं खेलता,उसने गुस्से में मेरे मुंह पर वार किया।’

इसके बाद दोनों ने मिलकर रेहित को मारा जो एटीएम मशीन से अपनी तनख्वाह निकाल रहा था। जब रोहित की 30 साल की आंटी ने नशे में धुत लोगों का विरोध किया तब दोनों ने उसे भी जमीन पर धकेल दिया और डंडे से मारने लग गए।बबिता बताती हैं कि मारते हुए पुलिस वाला बोल रहा था, ‘मैं दबंग हूं और हमें सबक सिखा कर रहेगा।’

सेंट मेरी अस्पताल के डा.टंडन ने तीनों घायलों और तरुण नेगी की प्राइमरी जांच की, उन्होंने बताया, ‘रोहित ने शराब पी रखी थी जबकि तरुण से शराब की महक आ रही थी।’

घायलों के फ्रेकचर और चोटों को इलाज हो चुका है।केस की जांच करने वाले मसूरी एस.एच.ऒ बीडी जुयाल कहते हैं, ‘गलती तरुण की है क्योंकि उसने बिना कारण लोगों को पीटा और मैनें अपनी रिर्पोट इसके आधार पर तैयार की हैं।’ दोषी पुलिसकर्मी का संसपेंशन लेटर शनिवार देर शाम तक आ गया था।

आॅन एयर पढ़ी एंकर ने अपने पति की मौत की खबर

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टीवी एंकर का काम होता है खबरों को बताना, इस दौरान ये जरूरी होता है कि एंकर के अंदर के भाव, विचार उसके चेहरे से जाहिर ना हों। खबरों को पढ़ते वक्त कई न्यूज ऐसी भी आती है जिसे जानकर एंकर दुखी हो सकता है या उसे खुशी हो सकती है, लेकन ये भावनाएं उसे काबू में रखनी पड़ती है। पर छत्तीसगढ़ की एक महिला एंकर के साथ हुआ वाकया ऐसा है जिसे जानकर एक पल के लिए आप दुखी भी होंगे तो अगले ही पल उस महिला एंकर के जज्बे को सलाम करेंगे। दरअसल शनिवार सुबह (8 अप्रैल) छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय चैनल IBC-24 पर एंकर सुरप्रीत कौर लाइव न्यूज पढ़ रहीं थीं, तभी एक ब्रेकिंग खबर आती है कि छत्तीसगढ़ के महासमंद जिले के पिठारा में एक रेनॉ डस्टर का एक्सीडेंट हो गया है और इस हादसे में कार में सवार 5 में से 3 लोगों की मौत हो गयी है।

बता दे की जब सुरप्रीत कौर ने इस खबर को ब्रेक किया तो उन्हें सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि जिन लोगों के मौत की डिटेल वह बता रही हैं उनमें से एक उसका पति भी है। हालांकि जब घटनास्थल पर मौजूद संवाददाता ने उन्हें लाइव बताया कि 5 में से 3 लोग मर गये हैं, तो ऑन एयर मौजूद सुरप्रीत को कुछ खटका। क्योंकि उनके पति भी रेनॉ डस्टर कार से उसी समय उसी रूट से अपने चार साथियों के साथ गुजरने वाले थे। सुरप्रीत घबराई लेकिन उसने पूरी तरह से प्रोफेशनल कमिटमेंट का परिचय दिया और पूरी खबर को विस्तार से लोगों को बताया। लेकिन जैसे ही सुरप्रीत जैसे ही टीवी स्टूडियो से बुलेटिन खत्म कर बाहर निकली उसके आंखों से आंसू छलक पड़े, उसे किसी अनहोनी की आशंका थी। उसने तुरंत अपने रिश्तेदारों को फोन लगाया और उसके बाद जो खबर आई उसने सुरप्रीत कौर की आशंका को सच साबित कर दिया। पता चला कि मरने वालों में शामिल एक शख्स सुरप्रीत कौर का पति है।

बता दे की इस घटना के बाद चैनल के सभी साथियों ने उसके जज्बे की तारीफ की। IBC-24 के एक सीनियर एडिटर ने बताया था सुरप्रीत कौर को बुलेटिन के दौरान ही पता चला चुका था कि हादसे में मरने वाले लोगों में उसका एक पति भी है, लेकिन उसने पूरा बुलेटिन पूरा किया। सीनियर एडिटर ने कहा कि उन लोगों को न्यूजरुम में पता चल चुका था कि हादसे में सुरप्रीत के पति की जान चली गई है, लेकिन किसी को ये हिम्मत नहीं थी कि ये खबर सुरप्रीत को बता सके। भिलाई से ताल्लुक रखने वाली सुरप्रीत कौर (28) ने पिछले ही साल हर्षद कावड़े से शादी की थी, इसके बाद दोनों रायपुर में रहते थे। इस वाकये के बाद न्यूजरुम में सुरप्रीत के साथी सदमे में हैं।

लॉटरी सिस्टम से शुरू हुई 2017 चार धाम यात्रा

देवभूमि के प्रवेश द्वार ऋषिकेश से चार धाम यात्रा के लिए लॉटरी सिस्टम से यात्रा की शुरू हो गई है। इस पुरानी परंपरा के माध्यम से हर साल यात्रा पर जाने वाले पहले वाहन की घोषणा की जाती है। इस साल 1200 गाड़ियों ने इस लॉटरी सिस्टम में हिस्सा लिया।

2016 की सफल चारधाम यात्रा के बाद अब 2017 यात्रा की तैयारीयां शुरू हो गईं है। ऋषिकेश स्तिथ बस अड्डे पर संयुक्त रोटेशन द्वारा पुरानी परंपरा यानि लॉटरी सिस्टम के जरिये यात्रा की शुरुवात हो गई है। आपको बता दे की पिछले काफी समय से संयुक्त रोटेशन यात्रा पर जाने वाली प्रथम गाड़ी के लिए इस परंपरा को करता आ रहा है। ऋषिकेश एआरटीओ अनीता चमोला ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी यात्रा से पहले गाड़ियों के लिए इस लॉटरी का आयोजन किया गया है और आज से यात्रा का शुभराम हो गया है, उन्होंने बताया कि इस साल 1200 गाड़ियों को सेलेक्ट किया गया है जो इस बार यात्रा पर जाएँगी। इस साल कुल 1200 गाड़ियों ने इस लॉटरी में हिस्सा लिया था उसमे से जीएमसीसी की बस यूके014पी8017 को लॉटरी में पहला स्थान मिला और इसी में अब यात्रा का पहला जत्था रवाना होगा। इस बार की चार धाम यात्रा में तीर्थयात्रियों को लेकर जाने का सोभाय्ग अजय मैथानी की वाहन को मिला है, जिसे वो बद्री विशाल की कृपा मानते है और वो काफी खुश है। उन्होंने बताया कि इस साल उनके वाहन सबसे पहले यात्रा पर जायेंगे जो की उनके लिए ख़ुशी की बात है। देश की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा का विधिवत सुभारम्भ ऋषिकेश से हो गया है, गंगोत्री-यमनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए तीर्थ यात्रियों के आने का सिलसिला अब जल्द ही शुरू होने वाला है।

उत्तराखंडी संगीत को नया अंदाज़ दे रहा है ये संगीतकार

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90 के दशक में “माय री” गाने से देश में धूम मचाने वाला यूफोरिया बैंड और डाॅ पलाश सेन शायद ही किसी परिचय के मोहताज हैं। इस गाने ने ना केवल देश के म्यूजिक चार्ट टाॅप किये बल्कि इसने लोगों के सामने यूफोरिया बैंड को एक अलग पहचान भी दिलाई। इस सफलता के बाद डाॅ सेन अपने बैंड के साथ हिट पर हिट गाने और कान्सर्ट संगीत प्रेमियों को दे रहे हैं।

लेकिन शायद हम में से बहुत कम लोग यूफोरिया के उत्तराखंड कनेक्शन के बारे में जानते हैं। बैंड के लीड परक्यूशनिस्ट हैं राकेश भारद्वाज। राकेश पौड़ी जिले से नाता रखते हैं। राकेश खुद एक टैलेंटेड म्यूजिशियन तो है ही साथ ही उनके पिता चंदर सिंह राही आल इंडिया रेडियो पर अपना गढ़वाली गीत गाने वाले पहले गायक थे। 

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राकेश ने फ्यूज़न म्यूजिक को एक नए आयाम तक पहुंचाया है। साल 2014 में राकेश ने पहाड़ी संगीत में जान फूंकने के लिए ‘पहाड़ी सोल’ नाम से एक म्यूजिक कंपनी की शुरुआत की। इस कंपनी के जरिए राकेश पहाड़ के पारंपरिक संगीत और उसके रस को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहें हैं। परंपरा को भूलने वाले युवा वर्ग के लिए राकेश एक मिसाल बनकर सामने आए हैं जो पहाड़ की परंपरा को लोगों के बीच अपने अंदाज में पेश कर रहें है। राकेश के इस अंदाज को लोगों ने सराहा भी है। राकेश बताते हैं कि “मैं हमेशा से अपने पहाड़ी राज्य के लिए कुछ करना चाहता था, खासकर के संगीत के क्षेत्र में जिससे हमारे राज्य को एक अलग पहचान मिल सके।”

“गाडो गुलोबंद” राकेश का नया गाना है जो अभी यूट्यूब पर हाल ही में लांच हुआ है। अगर पहाड़ी संगीत और राकेश के सफर की बात करें तो पहाड़ के ऐंथम के रूप में मशहूर ‘बेड़ पाको, बारह मासा’ से राकेश ने अपनी शुरुआत की और इसको नए रुप में सबके सामने रखा। इस गाने को गढ़वाल के साथ पूरे उत्तराखंड का एंथम माना जाता है और राकेश के पहले गाने ने ना केवल उत्तराखंड में बल्कि पूरी दुनिया में बसे गढ़वाली समाज में धमाल मचा दिया। इस गाने के हिट होने के बाद तो जैसे राकेश के अरमानों को नई उड़ान मिल गई और एक के बाद एक उन्होंने 3 गानों का म्यूजिक विडियो लांच किया,  जिसमें से, ‘सात समंदर पार’ उनके पिता द्वारा 80 के दशक में गाया गया था।

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राकेश कहते हैं, “मेरे लिए यह काम पैसे का माध्यम नही है बल्कि म्यूजिक मेरा जूनून है। संगीत एक ऐसा माध्यम है जो हवाओं के साथ बहता हुआ दुनिया के हर कोने और हर बंधन तोड़कर लोगों तक पहुंचता है और सभी दूरियों को कम कर लोगों के दिलों में बसता है। मैं एक बार फिर से परंपरागत पहाड़ी गाने सुनने की वजह देना चाहता हूं, एक बार फिर से लोगों के ज़हन में वो संगीत पिरोना चाहता हूं जो समय के साथ फीका पङ गया है।”  राकेश ने 13 साल की उम्र संगीत के क्षेत्र में प्रोफेशनल शिक्षा ली। गंधर्व महाविधालय से राकेश ने उस्ताद फय़्याज़ खान गुरु से तबला वादन का प्रशिक्षण लिया। आज उनका मिशन हैं पहाड़ के पारंपरिक संगीत को उस मुकाम तक पहुंचाया जाये ताकि युवा वर्ग के फोन में पंजाबी गाने की ज़गह पहाड़ी गाने चलें। 

NH-74 घोटाला: सरकारी अधिकारियों पर कसता शिकंजा

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नेशनल हाइवे के करीब 300 करोड़ के मुआवजा घोटाले में संविदा पर तैनात तीन डाटा आपरेटरों को बर्खास्त कर दिया गया है, साथ ही तीन रजिस्ट्रार कानूनगो, एक अमीन को निलंबित किया गया है। इसके अलावा तीन नायब तहसीलदारों समेत कई अधिकारियों के खिलाफ सख़्त एक्शन की संस्तुति करके मंडलायुक्त को भेजी जा रही है। फिलहाल 18 लोगों पर एक्शन किया जा रहा है। जिलाधिकारी नीरज खैरवाल ने इस बात की पुष्टी की है।

सूत्रों का कहना है कि चंद्रपाल सिंह समेत तीन रजिस्ट्रार कानूनगो को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही संविदा पर तैनात डाटा आपरेटर अनुज कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा अमीन अनिल कुमार को निलंबित किया गया है। इसके साथ नायब तहसीलदार सितारगंज मोहन सिंह, शेर सिंह ग्वाल गदरपुर एवं रघुवीर सिंह के निलंबन की संस्तुति करके मंडलायुक्त को भेजी जा रही है। सूत्रों की मानें तो सहायक चकबंदी अधिकारी निरंजन कुमार एवं चकबंदी कानूनगो अमर सिंह के निलंबन की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा सेवानिवृत हो चुके दो कानूनगो एवं एक एसडीएम के रीडर को भी नोटिस जारी किया गया है।

एनएच घोटाले में अभी अन्य कर्मचारी भी नप सकते हैं, क्योंकि यह जो चिह्नित कर्मचारी हैं वह पूरे जिले की सभी तहसीलों के नहीं हैं। मामले की जांच व कार्रवाई का सिलसिला जारी है। गौरतलब है कि नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के मुआवजे में खेल किया गया। बैक डेट में जमीनों का भू-उपयोग परिवर्तित करके किसानों को दस गुना अधिक मुआवजा दिया गया। इसमें पटवारी से लेकर एसडीएम तक की मिलीभगत सामने आई। हालांकि एनएच के दो परियोजना निदेशकों एवं क्षेत्रीय अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी इस खेल में शामिल होना पाए गए। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है।

आयुक्त डी सेंथिल पांडियन की जांच रिपोर्ट के बाद करीब एक पखवाड़े पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का ऐलान करते हुए छह पीसीएस अफसरों को निलंबित कर दिया था। एक अन्य सेवानिवृत पीसीएस अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई कर दी थी। हालांकि अभी एनएच के अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ चुकी है।

उत्तराखंड मे मंत्री बने माॅनीटर

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प्रदेशमें सरकार के कामों के प्रचार प्रसार और योजनाओं को सही तरह से लागू करवाने के लिये मुख्यमंत्री ने हर ज़िले के लिये एक मंत्री की ड्यूटी लगा दी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि “राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वन और आम लोगों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचान के लिये राज्य के सभी जनपदों के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किये गये है।”

इस लिस्ट में:

  • जनपद चमोली व हरिद्वार के लिए श्री सतपाल महाराज,
  • ऊधमसिंह नगर व बागेश्वर के लिए श्री प्रकाश पंत,
  • देहरादून व उत्तरकाशी के लिए श्री मदन कौशिक,
  • नैनीताल के लिए डाॅ.हरक सिंह रावत,
  • पौड़ी व रूद्रप्रयाग के लिए मंत्री श्री यशपाल आर्य,
  • पिथौरागढ़ के लिए श्री सुबोध उनियाल,
  • टिहरी के लिए श्री अरविन्द पाण्डेय,
  • चम्पावत के लिए राज्य मंत्री श्रीमती रेखा आर्य,
  • अल्मोड़ा के लिए राज्य मंत्री डाॅ.धन सिंह रावत को प्रभारी मंत्री बनाया गया है।

गौरतलब है कि किसी भी मंत्री को उनके मौजूदा विधानसभा क्षेत्र की ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है। देखना ये गॉहोगा कि सरकार का ये कदम लोगों और सरकार के बीच की दूरी घटाने के लिये कितना कारगर साबित होता है।

काशीपुर,  मेले में अवैध वसूली, निर्धारित शुल्क से अधिक पर की जा रही वसूली

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 काशीपुर- कुमाऊं के सबसे प्रसिद्ध और पौराणिक बाल सुन्दरी के चैती मेले में पण्डा परिवार के आपसी विवाद का खामियाजा यहां आने वाले श्रृधालूओं और बाजार लगाने वाले दुकानदारों को भुगतना पड रहा है। जहा दुकानदारों से मनमाने रुप से वसूली की जा रही है वहीं दुकानदार भी मंहगे दामों पर सामान बेचने को मजबूर हैं, जिससे यहां आने वाले भक्तों की जेबों में खुली डकैती की जा रही है।

चैती मेले के प्रबन्धक पण्डा परिवार का आपसी विवाद इस बार खुलकर सामने आ रहा है और परिवार के विवाद में हर कोई पैसे कमाने के लालच में दुकानदारों से अवैध वसूली पर जुड गया है, जहां प्रशासन द्वारा हर दुकान के मुल्य निर्धारित किये हैं वहीं प्रशासन की नाक के नीचे ही निर्धारित शुल्क से अधिक वसूला जा रहा है।

यही नहीं बडा हुआ शुल्क ना देने पर दुकानदारों को हटाने की धमकी तक दे दी जाती है, कई दुकानदारों ने इस अवैध वसूली का विरोध किया तो उनकी दुकाने ही मेले में नही लगने दी गयी।