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संघर्ष और परेशानियों तले खो गया ऐश्वर्या का बचपन

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गढ़वाल क्षेत्र के सिद्ध पीठ धारी देवी मंदिर का नाम किसने नहीं सुना होगा। माता धारी देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर दूर से आते हैं। बीते दिनों नवरात्रों की हलचल में धारी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। इस भीड़-भाड़ में अपने कैमरे के साथ एक 16 साल की लड़की ऐश्वर्या लोगों से दरखास्त करती है कि एक फोटो खिंचा ले, बस एक फोटो।

जी हां, सिद्ध पीठ धारी देवी मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं का हुजूम उमडा हुआ है। यहां कोई धारी देवी से अपने परिवार की खुशहाली के लिए दुवा कर रहा है। तो कोई देवी से अपने पापों के लिए क्षमा याचना कर रहा है। वही इसी मंदिर परिसर में एक और तस्वीर है जो सबका ध्यान अपनी और आकर्षित करती है।

यह तस्वीर है 16 साल की गोल मटोल सुन्दर सी लड़की की है। जो गले में डीएसएलआर कैमरा टांके हुए लोगों से एक फोटो खींच लेने की अपील करती दिखती है। लोग उससे फोटो खिचवाने से मना कर देेते है तो वह निराश होकर बैठ जाती है जब दूसरे भक्त दाम कम कर देने की शर्त पर फोटो खिचवाते हैं तो वह लड़की खुशी से झूमने लगती है। हमने जब इस दूसरी तस्वीर पर गौर किया तो एक दर्द भरी कहानी सामने आयी। जो इस समाज में जीवित रहने के लिए मानवीय संघर्ष की कहानी को बया करती है। यह संघर्ष भरी कहानी 16 वर्ष की एश्वर्या की है। दरअसल एश्वर्या के पिता इस दुनियां में नही है और एश्वर्या के कंधों पर अपने चार छोटे भाई-बहनों और एक असहाय मां का जिम्मा आ गया। इस खेलने कूदने की उम्र में इतनी बडी जिम्मेदारी से भागने के बजाया एश्वर्या ने यह बोझ अपने कंधों पर ले लिया व समाज में एक मिशाल की तरह सामने आई है।

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श्रीनगर के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली एश्वर्या श्रीनगर से रोजाना दस किलोमीटर दूर धारी मंदिर पहुच जाती है और सुबह से लेकर देर सांय तक वहीं फोटोग्राफी करती है। एश्वर्या बताती है कि उसके पिता की डायबटिज़ से मौत हो गई। जिसके बाद उनके परिवार की 4 नाबालिग बेटियां व 6 वर्षीय छोटे भाई की जिम्मेदारी उसकी मां के कन्धों पर आ गई। मां ने बच्चों को पालने के लिए नौकरी तलाश की लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ आई। उनके घर मे चार-चार स्कूल पढने वाली बेटियां व एक बेटे को जब कई आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा तो एश्वर्या ने अपने हाथों पर कैमरा थाम लिया। एश्वर्या बताती है कि इन दिनों नवरात्रा चल रहे है तो भक्त भी अधिक पहुंच रहे है जिससे उनकी थोडा बहुत कमाई हो जाती है। जो कि इतने बडे परिवार को चलाने के लिए नाकाफी है।

एश्वर्या को आगे की चिंता सताने लगी है क्योंकि नवरोत्रों के बाद धारी देवी मंदिर पर कम श्रद्धालु आते हैं और पहले से ही घर के हालात खराब हैं। अगर आप धारी देवी मंदिर जाते हैं तो ऐश्वर्या से एक फोटो जरुर खिंचवाएं। बहुत ही कम उम्र में परेशानियों का पहाड़ टूटने से अब एश्वर्या को सरकार व समाज से मदद की दरकार है।

 

अगर आप एश्वर्या की मदद करना चाहते हैं तो इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैंः 09997258166

पर्यटकों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस दिलायेगा “पथिक”

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शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिला प्रशासन, उत्तरकाशी द्वारा विकसित सिंगल विन्डो सिस्टम ‘‘पथिक’’ का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल विन्डो सिस्टम ‘पथिक’ के शुरू होने से पर्यटकों को परमीशन लेने में सुविधा होगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस सिस्टम को राज्य के अन्य जनपदों से भी जोड़ा जाय। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये इस प्रकार की अन्य पहल शुरू की जानी चाहिए।

पर्यटन सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में आॅनलाइन सिंगल विन्डो सिस्टम तैयार किया गया हैै। इसके तहत इनर लाइन परमिट गोविन्द पशु विहार, गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क हेतु पूरी तरह से आॅनलाइन इन्ट्री परमिट जारी करता है। यह देश में पहला आॅनलाइन सिस्टम है जो कि इनर लाइन एवं अन्य वाईल्ड लाइफ सम्बन्धी परमिट भी एक ही जगह से जारी करता है। उत्तरकाशी देश का पहला जनपद है जिसने इस प्रकार की पहल की है। इससे पहले इन स्थनों में भ्रमण के लिए पर्यटकों को उत्तरकाशी आना पड़ता था और करीब एक सप्ताह तक परमिट के लिए कार्यालयों में कार्यवाही करनी पड़ती थी जिस कारण पर्यटक इन स्थानों में भ्रमण का ख्याल ही छोड़ देते थे। लेकिन अब आॅनलाइन के माध्यम से घर बैठे ही मात्र तीन दिन में यह प्राप्त किया जा सकता है। 

पर्यटक नीचे दिये लिंक पर क्लिक कर के सभी परमीशनों के लिये आनलाइन अावेदन कर सकते हैं।

www.uttarkashi.nic.in

कूड़े से तैयार होगा ईको एंजाइम

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प्रदेश में बीजेपी की प्रचंड सरकार आने के बाद आए दिन नए प्रस्ताव पारित हो रहे हैं। पीएम मोदी की राह पर निकले सेम त्रिवेंद्र ने स्वच्छता के लिए तो पहले से ही मुहिम छेड़ दी थी लेकिन आने वाले समय में बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं जिससे राज्य को गंदगी से छुटकारा मिलेगा।

इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए गुरुवार को सीएम त्रिवेंद्र ने ट्रंचिंग ग्राउंड में पहुंच कर गंदगी के खिलाफ एक और मुहिम शुरु कर दी है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सहस्त्रधारा रोड स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में इकट्ठा कूड़े से ईको एंजाइम तैयार किया जाएगा। 187 देशों में सफल होने के बाद उत्तराखंड राज्य में पहली बार इसका प्रयोग हो रहा है।सीएम रावत ने बताया कि कचड़े में कई ऐसे कण होते हैं जिसकी वजह से तापमान में लगभग 20 डिग्री सेल्सियस की बढ़तरी होती है।ईको एंजाइम के जरिये इस पर रोक लगेगी।

गुरुवार को सीएम त्रिवेंद्र और मेयर विनोद चमोली ने इसकी शुरुआत की और ट्रंचिंग ग्रांउंड में इको एंजाइम का छिड़काव किया। मेयर विनोद चमोली ने बताया की सीएम की स्वीकृति के बाद यह काम एसएसआरडी (रुरल डेवलेपमेंट) को दिया गया है। इसेक साथ ही सब्जी मंडी, स्कुल और कालेजों में बात की जाएगी जिससे वहां कूड़े से खाद बनाई जा सके।

कैसे बनाते हैं इको एंजाइमः

तीन हजार लीटर पानी में पांच लीटर इको एंजाइम का घोल मिलाया जाता है।

कूड़े पर इको एंजाइम के छिड़काव से इसकी बदबू गायब हो जाती है, साथ ही कांच, लोहा, पालीथिन को छोड़कर बाकी कूड़ा अलग हो जाता है। सीएम रावत ने कहा कि इस योजना के तहत रिस्पना और बिंदाल दोनो को ही फिल्टर करने के बारे में सोचा जा रहा है। इस दौरान मेयर विनोद चमोली ने बताया कि तीन महीने में शीशमबाड़ा प्लांट तैयार हो जाएगा, जिससे कूड़े की परेशानी का समाधान हो जाएगा।

महीने में दो बार होगी कैबिनेट, मंत्रियों को करना पड़ेगा होमवर्क

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हर महीने के दूसरे और चौथे बुधवार को शाम 4 बजे कैबिनेट मीटिंग होगी। इसके लिये विभागीय टिप्पणी एक हफ्ते पहले मंत्रियों को भेजना ज़रूरी किया गया है। शुक्रवार को हुई राज्य मंत्रीमंडल की बैठक में ये तय किया गया। इसके साथ ही

  • राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली में संशोधन-पूर्व में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अध्यक्ष पदेन सदस्य होंगे। अब दोनों आयोग अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों आयोगों के अध्यक्ष पदेन सदस्य होंगे।
  • भारत सरकार की रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम के अंतर्गत एटीएफ(एअर टरबाइन प्यूल) पर VAT घटाकर एक प्रतिशत किया गया था। अभी तक सभी विमानन कम्पनियां इसका फायदा लेती थीं। अब यह लाभ कनेक्टिविटी योजना के अंतर्गत संचालित कम्पनियां से ही एक प्रतिशत VATलिया जायेगा। शेष 20 प्रतिशत VAT देंगी।
  • कृषि भूमि को बंधक बनाकर ऋण लेने वाले कृषकों को 05 लाख रूपये तक सीमा में स्टाम्प शुल्क में छूट अब 05 वर्षाें के लिए।
  • राजभवन संविलन नियमावली में संशोधन 30 सितम्बर 2010 की कट आॅफ डेट बढ़ाकर एक फरवरी 2012 किया गया ।
  • नामिका अधिवक्ताओं की फीस राज्य सरकार द्वारा दिया जाता था। अब राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण फीस देगा।

उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड में बूचड़खानों की शामत

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अवैध बूचड़खानों के ख़िलाफ़ चलाये जा रहे अभियान का असर देश के कई हिस्सों में होने लगा है। सरकारी अमला अब सड़को पर उतर कर अवैध मीट की दुकानों पर ताले लगाने में लगा है।

देवभूमि उत्तराखंड में भी योगी के इस असर से लोगों और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा है । मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में अवैध बूचड़खाने नहीं चलने देने का दावा किया है। बूचड़खानों पर सरकार का रुख भांप कर सरकारी अमले ने सालों से अवैध तरीके से चल रही दुकानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी है।

अहम बात यह है कि देहरादून में चल रहे बूचड़खानों पर छापामारी के दौरान चौकाने वाला सामने अाया, चल रहे बूचड़खानों में किसी के पास भी लाइसेंस नहीं है।

शनिवार को जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की सम्मिलित कार्यवाही में देहरादून में इनामुल्ला बिलडिंग गॉधी रोड, चुक्खु मौहल्ला, कारगी मुस्लिम बस्ती में कार्यवाही की गयी जिसमें  एस0पी0 सिटी, अपर जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी आदि उपस्थित रहे। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग मौजूद था।

श्री पी0सी0जोशी कारगी ग्राम में उपस्थित रहे तथा अधोहस्ताक्षरी इनामुल्ला बिंल्ड्रिग स्थान पर उपस्थित रहे। क्षेत्र में निम्न खाद्य व्यापारकर्ताओं का निरीक्षण कर कार्यवाही की गयीः

इलामुल्ला बिल्डिंग-

  • अब्दुल सलाम पुत्र मौ0 सलीम कुरैशी,
  • नौषाद पुत्र वषीर अहमद कुरैशी
  • मौ0 शहजाद कुरैशी पुत्र मौ0 फारूख कुरैशी
  • इरफान कुरैशी पुत्र रहमत कुरैशी

चुक्खु मोहल्ला-

  • विकास सोनकर पुत्र राजाराम सोनकर

मुस्लिम बस्ती कारगी ग्राम

  • मौ0 गुलफाम अहमद पुत्र श्री मुनफेत अली
  • मुस्तकीम अहमद पुत्र श्री महमू

इन सभी जगहों पर खाद्य व्यापारकर्ता खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनिमय 2006 के अन्तर्गत लाइसेन्स प्रस्तुत नहीं कर सके तथा स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पायी गयी। व्यापारकताओं को अपना पक्ष रखने और समुचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन दिनो का अवसर दिया गया, उसके बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के अन्तर्गत वाद दायर/अन्य अागे की कार्यवाही की जायेंगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी योगी के आदेशों को अपने यहां अमलीजामा पहनाना चाहते है।  यही कारण है कि प्रदेश के तमाम जिलाधिकारियों को उन्होंने निर्देश दे दिए है कि अवैध बूचड़खाना हो तो उसे तुरंत रोका जाये। सीएम का कहना है कि किसी भी तरीके से अवैध बूचडखानों को चलने नहीं दिया जायेगा और सब की जन भावनाओं का ख्याल रखा जायेगा। लिहाजा उधमसिंह नगर हो या हरिद्वार, देहरादून हो या विकास नगर सभी जगह के पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ उन दुकानों पर भी छापेमारी शुरू कर दी जहां अवैध तरीके से मीट बेचा जा रहा था | पुलिस अधिकारियों की माने तो जहां-जहां बिना लाइसेंस की दुकानें चल रही है उन्हें तुरंत बंद करवाया जा रहा है।

बीसीके मिश्रा बनें यूपीसीएल के एमडी

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शुक्रवार को बीसीके मिश्रा ने प्रबन्ध निदेशक, उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड का कार्यभार संभाल लिया है। मिश्रा ने कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही उत्तराखण्ड पावर कारपोरेषन लिमिटेड मुख्यालय विक्रावि गबर सिंह ऊर्जा भवन में अधिकारियों तथा कर्मचारियों को सम्बोधित किया । उन्होंने सभी को उपभोक्ता एक्टिव होते हुए कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के लक्ष्य सभी को 24 घन्टे निर्बाध एवं गुणवक्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिष्चित करने हेतु तत्पर रहने को कहा।

इस दौरान कारपोरेशन के निदेशकगण  एम0के0 जैन, निदेशक (परियोजना),अतुल कुमार अग्रवाल,निदेशक (परिचालन), एम्0ए0 खान, निदेशक (वित्त), पी0सी0 ध्यानी, निदेशक (मा0सं0) एवं कारपोरेशन मुख्यालय में कार्यरत सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इससे पूर्व  मिश्रा  निदेशक(परिचालन) यूजेवीएनएल  के पद पर कार्यरत थे। श्री मिश्रा आईआईटी, बीएचयू, वाराणसी से अभियन्त्रण में स्नातक है।  मिश्रा परियोजना प्रबन्धन संस्थान, पेनसिल्वेनिया से परियोजना प्रबन्धन में प्रमाणन रखते है।  मिश्रा द्वारा टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी से प्रारम्भ करते हुए केन्द्र सरकार के उपक्रम एनएचपीसी लि0 तथा उत्तराखण्ड सरकार के उपक्रम यूजेवीएन लिमिटेड में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुये ऊर्जा क्षेत्र में 32 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

बूढ़े पेड़ो की जंगल छोड़ने की तैयारी

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उत्तराखण्ड के मध्य हिमालय क्षेत्र समेत देश के सभी वनों में सांस न ले पाने वाले बूढ़े और मृत पेड़ो को हटाया जाएगा। पुराने हो चुके सूखे और खोखले पेड़ ऑक्सीजन तो देते नहीं हैं, लेकिन इनके अंदर चल रही बैक्टीरियल क्रिया के कारण सड़न से कार्बन बढ़ रही है। भारतीय वन सर्वेक्षण (एफआरआई) ने देश में पहली बार ऐसे पेड़ो को हटाने के लिए आकलन शुरू कर दिया है। उत्तराखण्ड, यूपी, हरयाणा, पंजाब में आकलन के पहले चरण का कार्य पूरा हो गया है।
विज्ञानिको का कहना हैं की बूढ़े और बीमार पेड़ो में कार्बन स्टार्क तो रहता है, लेकिन इनकी सांस लेने की क्रियाबन्द होने का कारण ये ऑक्सिजन नहीं छोड़ते और न ही वातावरण का कार्बन सोखते हैं। इससे इनकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है। जो पेड़ खोखले हो गए है, उनके अंदर बैक्टेरिया रहते हैं। वे जब पेड़ो की टहनियों व जड़ो को खाकर नष्ट करते हैं तो उससे कार्बन उत्सर्जन होता है। कुछ कार्बन वातावरण में आता है और कुछ मिटटी में जाकर मिलती है। खासतौर पर जड़ो के नष्ट होने के बाद यह कार्बन अंदर मिट्टी में रहता है।
कार्बन उत्सर्जन से बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के मद्देनजर भारतीय वन सर्वेक्षण ने जंगलो में पुराने पेड़ो को हटाने के लिए यह आकलन शुरू किया है। पुराने पेड़ो को हटाने के बाद नई पौध की संख्या हिमालय क्षेत्र में अधिक है। एफआरआई के वैज्ञानिक का कहना है की पेड़ो को काटने के प्रतिबंध होने से भी लोग लकड़ी के लिए पुराने पेड़ो को नहीं काटते। इससे भी पुराने पेड़ो की संख्या बढ़ गई है। देश भर के जंगलों का आकलन होने के बाद एफआरआई अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगा।

ऋषिकेश: कब सुधरेगी सरकारी अस्पताल की दशा

कहने को ऋषिकेश सरकारी चिकत्सालय गढ़वाल के कई जिलों को अपनी सेवा उपलब्ध करवाता है, लेकिन यहाँ काफी लंबे समय से डाक्टर की कमी के चलते मरीजों को काफी दिक्केतें हो रही है, तो वहीँ हॉस्पिटल की व्यवस्था की तरफ भी कोई ध्यान देता नहीं दिख रहा है।

चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार और उत्तराखंड टूरिज्म की रीड की हड्डी कही जाने वाले ऋषिकेश में साल भर दूर दूर से बड़ी संख्या लोग आते है। पर हाल यह है की ऋषिकेश के एकमात्र सरकारी अस्पताल के हालात ऐसे है की यहाँ न तो डॉक्टर है और न ही साफ़ सफाई की कोई प्रॉपर व्यवस्था , हाल तो यह है की पिछले कई हफ्तों से अस्पताल में रेबीज सहित कई दवाइयों की कमी चल रही जिसके जिसके कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों को काफी परेशानिया उठानी पड़ रही है। ऋषिकेश के पहाड़ी जिलों से जुड़े होने के कारण दूर दराज से गांव के लोग इलाज के लिए ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते है परन्तु सरकारी अस्पताल के हाल यह है की यहाँ कई  विभागों में डॉक्टरों की कमी चल रही है जो प्रदेश की स्वास्थ व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। सरकारी अस्पताल की मुख्य अधीक्षक का कहना है की हमने डॉक्टर की कमी के लिए प्रशसन को कई बार भेजा है पर अभी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाए है। उत्तराखंड बने हुए इतने साल हो गए लेकिन अफसोस यह है की अभी तक प्रदेश में स्वास्थ व्यवस्थाएं अपनी बदहाल स्थिति में है न तो अस्पतालों में डॉक्टर्स है और न ही दवाइओं की पूरी आपूर्ति ऐसे में प्रदेश में स्वास्थ सुविधाएँ भगवान भरोसे चल रही है।

ठेके खुले रखने के लिये सरकार ने निकाला डिनोटिफिकेशन का जुगाड़

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शुक्रवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में सरकरा ने शराब बिक्री से जुड़े व्यवसायी को राहत देते हुए राज्य के 63 राज्य मार्गों को डिनोटिफाई करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार राजमार्ग पर शराब के ठेके बंद करने के निर्देश दिए थे और राज्य में नियम पालन भी हुआ यानी ठेके बंद कर दिए गए। लेकिन त्रिवेंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड के हर राजमार्ग को जिला मार्ग बनाकर छोड़ दिया है। जी हां.. अब उत्तराखण्ड सरकार ने हर राजमार्ग का नाम बदलकर कर जिला मार्ग कर दिया है।

पिछले कई दिनों से शराब को लेकर पूरे प्रदेश भर में आंदोलन के बाद त्रिवेंद्र सरकार ने कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया है। सरकार के हिसाब से राज्य में लगभग 64 राज्य राजमार्ग है और 40 प्रतिशत शराब की दुकानें इन रास्तों पर है। राज्य सरकार को शराब व खनन से एक बड़ा राजस्व आता है और शायद यही कारण है कि आज शराब कारोबारियों को मुख्यमंत्री ने राहत की सांस दिला दी है।

कैबिनेट में कहा गया कि “राज्य के शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों की सीमा के अंदर आने वाले राजमार्गाें में जनसंख्या दबाव सहित मार्ग के किनारों पर भवन निर्माण, गतिविधियों में अधिक वृद्धि होने, मार्ग में सीवर लाइन, नाली, बिजली के स्तम्भ/ट्रांसफार्मर, टेलीफोन लाइन, स्थानीय निकाय के होर्डिंग आदि होने के कारण मार्ग के इन भागों का रख-रखाव और अन्य विकास व विस्तार ‘राजमार्ग’ की विशिष्टियों के अनुरूप किये जाने में व्यवहारिक कठिनाई आ रही है। इस लिये राज्य मार्गाें के वे भाग जो किसी भी शहरी स्थानीय निकाय यथा नगर निगम, नगर पालिका परिषद अथवा नगर पंचायत की सीमा से गुजरते हों, को राज्यमार्ग की श्रेणी से अवर्गीकृत(डिनोटीफोई) करते हुए इस भाग को अन्य जिला मार्ग में वर्गीकृत किया गया है। राज्य में 64 राज्य मार्ग हैं जिनमें 63 नगर निकाय पड़ते हैं।”

पिछले कुछ दिनों में राज्य में शराब बंदी के समर्थन में कई जगह आवाज़ उठीं थी। लेकिन कयास इस बात के भी लगाये जा रहे थे कि मजबूत लिकर लाॅबी और शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व को ध्यान में रखते हुए सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल सकती है। और ऐसा ही कुछ हुआ भी।

व्यवस्था परिवर्तन मंच और गढ़वाल महासभा द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ऋषिकेश के राजकीय चिकित्सालय में व्यवस्था परिवर्तन मंच एवम गढ़वाल महासभा द्वारा स्वेच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें युवायों में बड़-चड़कर हिस्सा लिया और रक्तदान किया व्यवस्था परिवर्तन मंच के प्रदेश अध्य्क्ष डॉ राजे नेगी ने बताया कि आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ये रक्तदान शिविर लगाया गया है और लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।