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तीर्थनगरी पहुंचे बॉलीवुड सिंगर और कंपोजर टोनी कक्कड़

उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, यहाँ की पहचान हमेशा से अध्यात्म और योग से रही हो लेकिन वक़्त के साथ-साथ अब यहाँ से हुनर निकलकर बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रहा है। उत्तराखंड से उर्वशी रौतेला,जुबिन नौटियाल, नेहा कक्कड़ सभी ने अपनी एक अलग पेहचान बॉलीवुड में बनाई है। तीर्थनगरी ऋषिकेश से टोनी कक्कड़ ने भी अपने संगीत से बॉलीवुड इंडस्ट्री को अपना दीवाना बना लिया है।

अपने निवास स्थान पर पहुंचे बॉलीवुड सिंगर और कंपोजर टोनी कक्कड़ को देखने के लिए उनके फैंस की भीड़ लग गयी, कहते है अगर किसी के अंदर हुनर हो तो एक न एक दिन पूरी दुनिआ उसकी दीवानी हो जाती है, यही कहावत सटीक बैठती है ऋषिकेश निवासी टोनी कक्कड़ पर। आपको बता दे की टोनी कक्कड़ बॉलीवुड की मशहूर सिंगर नेहा कक्कड़ के भाई है। मीडिया से बात करते हुए टोनी कक्कड़ ने बताया कि शुरुवात में वो अपनी बहन और भाई सोनू कक्कड़ के साथ भजन प्रोग्राम किया करते थे फिर मुंबई पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी को एक नया मोड़ मिला, काफी महनत और लम्बे इन्तजार के बाद उन्हें अपनी मंजिल मिली।

टोनी कक्कड़ ने बताया कि उनको पहला ब्रेक टी-सीरीज ने  दिलवाया, उनके द्वारा लिखे 15 गानों में से 12 गानों को टी सीरीज ने चुना है, वो अभी तक 25 गानों को कंपोज़ कर चुके है। साल 2013 में उनके द्वारा कंपोज़ किया गया गाना ‘सावन आया है’ काफी हिट रहा। उन्होंने बताया की गढ़वाल के वाद्य यंत्रों को भी वो अपने संगीत में प्रयोग करना चाहते है और जल्द ही वो इस तरफ काम करेंगे।

उत्तराखंड का लगातार बॉलीवुड से रिश्ता मजबूत होता जा रहा है यही कारण है कि यहाँ के छोटे-छोटे शहरों से निकलकर युवा मुम्बई जैसे महानगर में अपनी क़ाबलियत के दम पर अलग पहचान बना रहे है।

 

चैती मेले की कमाई ने बनाया परिवारों को खून का प्यासा

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पण्डा परिवार की आपसी रंजीश अब खुनी संघर्ष का रुप लेने लगी है। लाभ कमाने के लालच में मां बाल सुन्दरी के पुरोहितों में जंग का आगाज भले ही काफी दिन पहले हो चुका था, मगर अब तक मुंह जुबानी चलने वाली जंग खुन की प्यासी होने लगी है।वन्दना पण्डा और उसके बेटे की लगातार मेले में बडती गुण्डागर्दी से जहां दुकानदार और भक्त परेशान है जिसको लेकर परिवार की बढती रंजीश के चलते रविवार देर सांय दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई।जिसमें दो महिलाए गम्भीर रुप से घायल भी हो गयी है, जिनको सरकारी में प्राथमिक उपचार के बाद छोड दिया गया। वहीं महिलाओं ने काशीपुर, कटोरातला चौकी में मुकदमा दर्ज कराते हुए कार्यवाही की मांग की, वहीं आरोपी वंदना अग्निहोत्री ने भी दुसरी ओर से मुकदमा दर्ज कराते हुए कार्यवाही की बात कहीं। पण्डा परिवार के बीच छिडी ये जंग जहां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, वहीं दोनों पक्षों की इस जंग से मेले की व्यवस्था बिगडती जा रही हैं जिसका खामियाजा यहां आने वाले भक्तों और व्यापारियों को उठाना पड रहा है।

किशोर को ‘वन्दे मातरम’ पर कोश्यारी की नसीहत

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नैनीताल पहुंचे क्षेत्रीय सासंद भगद सिह कोशियारी ने कांग्रेस पी.सी.सी.अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को ‘वनदे मातरम’ वाले बयांन पर आडे हाथो लेते हुए कहा कि किशोर को वंदे मातरम पर दिए गए बयान पर माफी मागनी चाहिए क्यो कि जो व्यक्ति वंदे मातरम का विरोध करते है और उसका सम्मान नही करते इससे स्पष्ट है कि वो अपनी माॅ का भी सम्मान नही करते।

कोशियारी ने कहा कि किशोर केवल इस तरह के बायन दे कर अपनी चुनाव में हार की भडास निकाल रहे है, किशोर को इस तरह कि बेफिजूल और अनरगल बायनबाजी नही करनी चाहिए। इस तरह की बयानबाजी के लिए प्रदेश के युवा किशोर को किसी दूसरे राज्य में भेज सकते है।

कब मिलेगा उत्तराखंड को अपना मनोरंजन चैनल?

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चर्चित सीरियल लेखक ऐहसान बख्श ने कहा कि इन दिनों बन रहे टीवी सीरियल समाज और घर-परिवार को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहे हैं। इनमें साजिश, सस्पेंस के अलावा कुछ नहीं रह गया है। दूरदर्शन के दौर के सामाजिक सरोकार अब खत्म हो चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में प्रभावी कहानीकारों की कमी नहीं है।

नैनीताल में आयोजित फिल्म फेस्टिवल कौतिक में पहुंचे कलाकार ऐहसान ने बताया कि ससुराल सिमर का, प्रतिज्ञा, अंबरधारा, माता की चौकी समेत करीब तीन दर्जन सीरियल्य की कहानी लिख चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहाड़ की थीम और पहाड़ के बच्चों पर आधारित फिल्म आखिरी मुनादी 18 देशों में आयोजित अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में चयनित हुई। पहाड़ पर आधारित अनाम फिल्म को एक लाख बच्चों ने देखा।

फिल्म निर्माता व शिक्षक मनमोहन चौधरी के अनुसार वर्तमान समय में उत्तराखंडी मे मनोरंजन टीवी चैनल की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार को भले ही निजी क्षेत्र का सहयोग लेना पड़े, इस दिशा में कदम बढ़ाने होंगे, तभी आंचलिक फिल्मों का दायरा बढ़ सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं हैं। लोक कलाकार बेहतर काम कर रहे हैं, मगर संसाधनों की कमी आड़े आ रही है। कहा कि आज जो भी फिल्म या वीडियो बना रहे हैं, सभी शौकिया तौर पर काम रहे हैं।

बागेश्वर में अतिक्रमण पर सख़्त हुए डीएम

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बागेश्वर, डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बाजार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सड़क पर अतिक्रमण करने वाले 15 व्यापारियों को जहां चेतावनी देकर छोड़ा। वहीं कई के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सामान जब्त कराया। इससे बाजार में दुकानदारों व व्यापारियों में हड़कंप मचा रहा।

डीएम मंगेश घिल्डियाल अचानक कस्बा बाजार पहुंच गए। राज्यपाल के कार्यक्रम से वापस लौटने पर बाजार में अतिक्रमण देखकर वहीं रुक गए। दुकानों के सामने सामान लगाने पर व्यापारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी। कहा कि सड़क पर अतिक्रमण बिलकुल न करें। मौके पर कई व्यापारियों की दुकानों का सामान जब्त कराया। नालियों में अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों से कहा कि वह किसी भी सूरत में अब बच नहीं पाएंगे। सड़क पर अतिक्रमण करने वालों का चालान किया जाएगा। तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि वह इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करे। इस मौके पर उनके साथ एसपी सुखवीर सिंह, एसडीएम, तहसीलदार दयाल चंद्र टम्टा, व्यापार संघ अध्यक्ष अखिल जोशी आदि मौजूद रहे।

अब चलान के पैसों से होगी सड़क सुरक्षा

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उत्तराखंड में अब सरकरा ने सड़क सुरक्षा के लिये पैसो के इंतज़ाम के लिये एक रास्ता और निकाल लिया है। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा किये गये चालान की 25 फीसदी रकम सड़क सुरक्षा पर खर्च की जायेगी। इसके साथ ही रोड़ सेफ्टी का थ्री टियर आॅडिट होगा। विशेषज्ञ इंजीनियरों को रोड़ सेफ्टी सेल बनाया जायेगा। दुर्घटना संभावित स्थलों का चयन कर सुरक्षा के उपाय किये जायेंगे।

प्रशासन ने परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में स्टेट रोड़ सेफ्टी काउंसिल का गठन कर दिया गया है। परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में सम्बंधित विभागों की लीड एजेंसी बनाई गयी है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति बनायी गयी है। इसके साथ ही उत्तराखंड ने सड़क सुरक्षा समिति अधिसूचित कर दिया है। आॅटोमेटीड ड्राईविंग टेस्ट ट्रैक के लिए 80 मीटरX50 मीटर और आॅटोमेटेड टेस्टिंग लेन के लिए तीन एकड़ ज़मीन की ज़रूरत है। पायलट के तौर पर देहरादून में 04 मोटर बाइक एम्बुलेंस का संचालन किया जायेगा। लोनिवि और शहरी विकास विभाग को यातायात को प्रभावित करने वाले होर्डिग आदि को हटाने के निर्देश दिये गये है।

राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार इज़ाफा हो रहा है।ऐसे में उम्मीद ये है कि सरकार की इन कोशिशों से सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों को रोकने में कुछ मदद ज़रूर मिलेगी।

अब करंट से खेलेंगी महिलाए

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अभी तक आपने महिलाओं में सिलाई-कढ़ाई और खाना पकाने का हुनर देखा होगा, लेकिन उधमसिंहनगर में पहली बार महिलाएं बिजली तारों से खेलती नजर आएंगी। बाल विकास विभाग महिलाओं को इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण देने जा रहा है, जिसके बाद महिलाएं न सिर्फ अपने घरों में इस हुनर का इस्तेमाल कर पाएंगी, बल्कि खुद सशक्त होकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। कभी बिजली चली जाए या फिर छोटे-मोटे तार टूट जाएं तो महिलाएं झट से उन्हें सही कर पाएंगी।
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आमतौर पर महिलाएं अपने घरों में टीवी, वायरिंग, कूलर, पंखा, प्रेस खराब हो जाने पर उसे मैकेनिक को बुलवाकर सही कराती हैं, लेकिन इस प्रशिक्षण के बाद ऐसा नहीं होगा। इसको जरूरत पड़ने पर रोजगार का माध्यम भी बना सकेंगी। उत्तराखंड महिला कौशल विकास केंद्र में होने वाली इस ट्रेनिंग में किशोरी शक्ति योजना में पंजीकृत युवतियों को मौका दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण 120 दिन का होगा। खास बात यह है कि इस योजना के लिये टाटा मोटर्स बाल विकास विभाग का सहयोग कर रहा हैं। महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए पहले इनकी क्लासेस लगाई जाएगी जिसमें उनको इलेक्ट्रीशियन से संबंधित किताबें भी पढ़ाई जाएंगी। इसके बाद प्रैक्टिकल भी होगा, जिसमें इनको मशीनों के जरिये अभ्यास कराया जाएगा।

बाघ के हमले से हाथी की मौत

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कार्बेट टाइगर रिजर्व में एक हाथी का शव मिला है। माना जा रहा है कि बाघ के हमले से घायल होने के बाद इस हाथी की मौत हुई। कार्बेट के बिजरानी आम श्रोत कमार्टमेंट 10 में वन कर्मी गश्त कर रहे थे। इस स्थान पर दुर्गंध उठने पर उन्होंने आसपास छानबीन की तो झाड़ी में एक हाथी का शव पड़ा देखा। इसकी सुचना उन्होंने कार्बेट के निदेशक सुरेंद्र महरा और उपनिदेशक अमित वर्मा को दी।

उपनिदेशक वर्मा ने मौके पर पहुंचकर शव का निरिक्षण किया। शव 15 दिन पुराना होने के कारण सड़ गल गया है। उसकी उम्र 20 साल आंकी जा रही है। उपनिदेशक ने बताया की हाथी के दांत सुरक्षित है। हाथी की मौत संदिग्ध नहीं है। उन्होंने बताया की हाथी के पिछले पैर को बाघ ने खाया है। माना जा रहा की बाघ के हमले में हाथी ने घायल होकर दम तोड़ा है।

बडी संख्या में नेपाली भक्त पहुचें पूर्णागिरी मेला 

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मां पूर्णागिरि धाम में तीर्थ यात्रियों की भारी संख्या में आवाजाही जारी है। पड़ोसी देश नेपाल से भी इन दिनों समूह के साथ तीर्थ यात्रियों का जत्था मां के दर्शन को पहुंच रहा है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही दिन की अपेक्षा रात्रि के समय श्रद्धालु अधिक संख्या में दर्शन को पहुंच रहे हैं।

नेपाल से जत्थे के रूप में श्रद्धालु प्राइवेट व निजी वाहनों से ब्रह्मदेव मंडी स्थित सिद्धनाथ मंदिर तक पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु ब्रह्मदेव नेपाल से पैदल टनकपुर तक पहुंच रहे हैं। टनकपुर से ठूलीगाढ़ व भैरव मन्दिर तक का क्षेत्र मां के जयकारों से गुंजायमान हो गया है। नेपाल बिलौरी के शिक्षक मदन बहादुर चंद ने बताया कि वह पिछले कई वर्षो से मां के दर्शन को आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्णागिरि क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं। अलबत्ता कालिका मंदिर से लेकर मुख्य मंदिर तक पानी की दिक्कत के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने मेला आयोजकों से इस समस्या का निस्तारण करने को कहा है।

नेपाल से आए अन्य तीर्थयात्री भी धाम व सिद्धनाथ मंदिर क्षेत्र में मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट नजर आए। मां पूर्णागिरि धाम के साथ ही नेपाल के महेंद्रनगर ब्रह्मदेव मंडी स्थित सिद्धनाथ मन्दिर में भी श्रद्वालुओं की चहल-पहल काफी बढ़ गई है।

साढ़े तीन माह में सात बाघों को निगल गया काल

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रामनगर-रामनगर वन प्रभाग के देचौरी रेंज में एक बाघिन की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उसका सड़ा-गला शव नाले में पड़ा मिला। शव सड़ने की वजह से वनाधिकारी उसकी उम्र के बारे में कोई अनुमान नहीं लगा पाए। दूरस्थ क्षेत्र होने व देर होने की वजह से उसका पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया। इससे पूर्व इसी साल 19 जनवरी को इसी रेंज में एक बाघ का शव मिला था।

देचौरी रेंज में वनकर्मी गश्त पर थे। इस बीच सांदनी बीट कंपार्टमेंट नंबर चार में उनको नाले में बाघिन का शव दिखा तो विभागीय अधिकारियों को जानकारी दी। इस पर डीएफओ नेहा वर्मा घटनास्थल पर पहुंचीं। इस दौरान आसपास के क्षेत्र में वनकर्मियों द्वारा छानबीन भी की गई।

मौके पर आपसी संघर्ष के निशान भी नहीं पाए गए। बाघिन का शव पानी में फूल गया था। वनाधिकारी शव को पांच से छह दिन पुराना बता रहे हैं। डीएफओ ने बताया कि शव सड़ने की वजह से बाघिन की मौत की वजह पता नहीं चल पाई है। फिलहाल उसकी मौत को संदिग्ध माना जा रहा है। पोस्टमार्टम शनिवार को किया जाएगा।

एक तरफ बाघ संरक्षण के लंबे चौड़े दावे हो रहे हैं। भारत सरकार लाखों रुपये का बजट भी बाघ सुरक्षा पर खर्च कर रही है। बावजूद इसके धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। केवल कॉर्बेट लैंडस्केप में साढ़े तीन माह में सात बाघों की मौत हो गई।

भले ही कॉर्बेट लैंडस्केप में बाघों की तादाद सुखद मानी जाती हो लेकिन जिस तरह से उनकी मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं उससे बाघ सुरक्षा के दावों पर सवालिया निशान लग रहे हैं। बाघों की मौत की वजह से भले ही वनाधिकारी आपसी संघर्ष बताते आए हैं लेकिन इस पर भी चिंतन नहीं हो रहा कि आखिर बाघों के बीच आपसी संघर्ष की असल वजह क्या है।

कॉर्बेट लैंडस्केप में बाघों की संख्या अच्छी-खासी है, लेकिन विभागीय आंकड़े बताते हैं कि पहले इस तरह आपसी संघर्ष में लगातार बाघों की मौत नहीं हुई। साढ़े तीन माह में ही सात बाघ अब तक मारे जा चुके हैं। यानी हर माह दो बाघों की मौत हो रही है।