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सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखने की जरुरत

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पौराणिक द्वारिका का स्याल्दे-बिखौती कौतिक, द्वाराहाट सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मेले को और अधिक विस्तार देने तथा भागीदारी करने वाले धड़ों व आम लोगों के बीच बेहतर तालमेल कायम करने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। ताकि कौतिक को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के रूप में भव्य रूप दिया जा सके।

यह बात एतिहासिक स्याल्दे मेले, द्वाराहाट,के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि विधायक महेश नेगी ने कही। उन्होंने कहा कि आधुनिक चकाचौंध के बावजूद विरासत में मिली सांस्कृतिक धरोहर को संजोया है। इसके लिए उन्होंने बुजुर्ग संस्कृति व रंगकर्मियों को श्रेय दिया। विधायक ने कहा स्याल्दे-बिखौती मेले को और अधिक विस्तार किया जाएगा। उन्होंने युवा पीढ़ी से मेले के स्वरूप को संजोए रखने के लिए आगे आने का आह्वान किया। विधायक महेश नेगी व मेला समिति अध्यक्ष विमला साह ने संयुक्त रूप से पुरस्कार बांटे। इस दौरान कई सांस्कृतिक व रंग कर्मी मौजूद रहे।

योग और आयुर्वेद सीखने पोलेंड पहुंचा उत्तराखंड

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पोलेंड का ओपोले प्रांत व उत्तराखंड योग व आयुर्वेद के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे। दोनों ही प्रान्तीय सरकारों में इस पर सहमति बन गई है। पोलेंड के विदेश मंत्रालय ने इसकी स्वीकृति दे दी है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त होते ही उत्तराखंड सरकार व पोलेंड के ओपोले प्रान्त की सरकार के बीच स्टेट टू स्टेट समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।  

सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में ओपोले प्रान्त के मार्शल श्री एंड्रजे बुला के प्रतिनिधि के तौर पर पोलेंड स्थित सुलिस्ला योगा आयुर्वेद इंस्टीट्यूट के संस्थापक जेर्जी बार व बिएटा बार ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिह रावत को इस संबंध में आधिकारिक पत्र सौंपा। पोलेण्ड में भारतीय राजदूत अजय बिसारिया द्वारा भी इसके लिए संस्तुति की गई है। सुलिस्ला योगा आयुर्वेद इंस्टीट्यूट पोलेंड में 700 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई है। बार ने मुख्यमंत्री को सुलिस्ला में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योगा व आयुर्वेद सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए भी आमंत्रित किया है। ओपोले मेडिकल काॅलेज द्वारा उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के साथ कार्य करने के लिए भी प्रस्ताव दिया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड  योग की भूमि है। योग व आयुर्वेद के क्षेत्र में मिलकर काम करने से पोलेंड का ओपोले प्रान्त व उत्तराखंड राज्य परस्पर लाभान्वित होंगे। प्रतिनिधिमण्डल में भारत के पूर्व राजदूत सी.एम. भण्डारी भी शामिल थे। भण्डारी मूल रूप से रानीखेत के हैं और वर्तमान में वे अपने गांव मारवा में इको पर्यटन, योगा व आयुर्वेद पर काम कर रहे हैं। तय किया गया कि मारवा गांव की तर्ज पर इको पर्यटन, योगा व आयुर्वेद के माॅडल को कुछ अन्य गांवों में भी विकसित किया जाए। जेर्जी बार ने कहा कि वे प्रयास करेंगे कि अधिक से अधिक पोलेंड के पर्यटक आएं और यहां योग व आयुर्वेद से लाभान्वित हों। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री प्रकाश पंत भी उपस्थित थे। 

अवैध जीव तस्करी के अारोप में एक अभियुक्त गिरफ्तार

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जानवरों की तस्करी रोकने के लिये बनी स्पेशल टास्क फोर्स को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब टीम ने त्यागी रोड से एक अभियुक्त रघुबीर सिंह बिष्ट, को दो भालू की पित्त तथा एक हिरन का सींग के साथ गिरफ्तार किया गया।

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गिरफ्तार रघुबीर ने पूछताछ पर बताया गया कि थराली जनपद-चमोली के किसी व्यक्ति ने उसे बेचने को दिया था तथा अच्छा कमीशन देने को कहा था। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा रही है। भालू की पित्त का उपयोग चीन, जापान, कोरिया, अमेरिका में दवाईयां बनाने में किया जाता है, जिस कारण उक्त पित्ति की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। उक्त बरामद माल की अन्र्तराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 08 से 10 लाख रुपये है। वन्य जीव के अन्तर्गत भालू की पित्त को अनूसूची-1 व हिरन का सींग को अनूसूची-3 में रखा गया है।

एस.टी.एफ. द्वारा वन्य जीव जन्तुओं की अवैध तस्करी के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियानों के अन्तर्गत वर्ष 2017 से वर्तमान तक 9- गुलदार की खाल, 2-भालू के पित्त, एवं हिरन का सींग-1 बरामद किया गया हैं।

हरिद्वार के आश्रम और धार्मिक स्थल होंगे कर मुक्त

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने निरंजनी अखाड़े में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कहा कि संतुलित एवं पारदर्शी विकास के साथ ही दूर दराज़ एवं पिछड़े क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार हटयोग की साधना करेगी। सम्पूर्ण उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त करना राज्य सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि 2021 में होने वाले कुम्भ की तैयारियों को लेकर साधु समाज एवं अखाड़ा परिषद के मार्गदर्शन से नई योजनाएं बनाई जायेंगी। रावत ने कहा कि

  • 2021 में हरिद्वार में सुन्दर, भव्य एवं सुविधायुक्त कुम्भ का आयोजन किया जायेगा।
  • हरिद्वार में जिन आश्रमों एवं धार्मिक स्थलों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होती हैं, उन आश्रमों एवं धार्मिक स्थलों को मुख्यमंत्री ने कर मुक्त करने की घोषणा की।
  • हरिद्वार की निर्मलता एवं स्वच्छता के लिए साधु समाज के योगदान के लिए शहरी विकास मंत्री को संतों से मिलकर समाधान करे
वहीं हरिद्वार सांसद डाॅ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि केन्द्र सरकार की नमामि गंगे, चारधाम योजना से उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। तीर्थ यात्रि एवं पर्यटक देवभूमि उत्तराखण्ड एवं अध्यात्म की राजधानी हरिद्वार में  पूर्ण सुरक्षा के साथ यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टेंड अप एवं स्टार्ट अप योजनाओं से देश ने विश्व में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राज्य सरकार धर्म सत्ता के आशीर्वाद से निरन्तर आगे बढ़ रही है। प्रदेश के सम्पूर्ण विकास एवं भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखण्ड बनाने के लिए राज्य सरकार कृत संकल्प है।

राष्ट्रीय फलक पर चमकें डॉ. प्रकाश जोशी

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रानीखेत, शिक्षा व सामाजिक आर्थिक विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए अबकी उत्तराखंड से पर्यावरणविद् प्रकाश जोशी को ‘ज्वेल ऑफ इंडिया’ अवार्ड से सम्मानित किया गया है। प्रकाश को यह सम्मान दिल्ली में हुए समारोह में पांडिचेरी के पूर्व राज्यपाल डॉ. भीष्म नारायण सिंह ने प्रदान किया।

अपेक्षाकृत शीतोष्ण पर्वतीय अंचल में गर्म प्रदेश के चंदन वृक्ष प्रजाति के सफल पौधारोपण तथा गहन शोध व अध्ययन के बाद पहाड़ में तेजी से जड़ें जमा रही कुर्री घास (लैंटाना) के जरिये औषधीय गुणों वाले चंदन के पेड़ों को बेहतर खुराका का फॉर्मूला ढूंढ चुके पर्यावरणविद् प्रकाश जोशी ने राष्ट्रीय स्तर पर हिमालयी राज्य का गौरव बढ़ाया है। इन दिनों मणिपुरी बाज से ओक, टसर-रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अध्ययन में जुटे प्रकाश ने बाकायदा मंडलकोट (ताड़ीखेत) में हिमालयी बहुपयोगी वृक्ष प्रजाति बांज के साथ मणिपुरी बाज का बगीचा भी तैयार कर लिया है। जून-जुलाई से इसमें टसर-रेशम कीट छोड़ उत्पादन की तैयारी है।

इधर पर्यावरण संरक्षण के साथ ही शिक्षा व सामाजिक आर्थिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए पर्यावरणविद् प्रकाश को इंडियन सॉलिडेरिटी काउंसिल ने उत्तराखंड से चुना था।

दिल्ली स्थित डॉ. कृष्णा मेनन सभागार में पांडिचेरी के पूर्व राज्यपाल डॉ. भीष्मनारायण ने उन्हें ‘ज्वेल ऑफ इंडिया अवार्ड’ से सम्मानित किया। इससे पूर्व हिमालयन पर्यावरण संरक्षण (होप) के निदेशक एवं पर्यावरणविद् प्रकाश जोशी ‘इंडो-जर्मन अवार्ड’ से भी नवाजे जा चुके हैं। जीबी पंत कृषि प्रौद्योगिकी विवि पंतनगर से स्वर्ण पदक प्राप्त प्रकाश वर्तमान में उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) के जिला समन्वयक भी हैं।

पकङी गई देसी मसालेदार शराब की 26 पेटियां

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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया के निर्देशन में, जनपद देहरादून में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे “”सर्वोदय”” अभियान के अन्तर्गत थाना प्रेमनगर पुलिस द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों आदि का चेकिंग अभियान चलाया गया। जिसमे अभियुक्त भूपेंद्र सिंह, पुत्र नत्थू सिंह, निवासी ग्राम कांसवाली, कोठरी थाना, प्रेमनगर, देहरादुन उम्र 50 वर्ष को अवैध 26 पेटी (1248 पव्वे) देशी मसालेदार शराब सहित कांसवाली से आबकारी अधिनियम में गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की गई। बरामद की गई, 26 पेटी, याने कि 1248 पव्वे देसी मसालेदार शराब की कीमत बाजार मे करीब ₹70 हजार मापी गई है।

जल्द गूँजेगा उत्तराखंड में एफ़एम

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आने वाले दिनों में देहरादून और अन्य शहरों में आप भी एफएम पर संगीत और अन्य कार्यक्रमों का लुत्फ़ उठा सकेंगे। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने देहरादून से प्रसारित होने के लिये एक निजी कंपनी को लाइसेंस दे दिया है। ये ही नही ये लाइसेंस देश का दूसरा सबसे महँगा एफ़एम लाइसेंस साबित हुआ है। रेड एफएम ने इसके लिये पंद्रह करोड़ से ज़्यादा का रक़म अदा की है। इससे पहले देश का सबसे महँगा एफ़एम चैनल हैदराबाद का है।

एक दो महीने में लाँच होने वाले इस चैनल को 93.5 की फ्रीक्वेंनसी पर सुना जा सकेगा। इस चैनल की रेंज पचास किमी रहेगी। इसका मतलब की फ़िलहाल इसे देहरादून और आसपास के इलाक़ों में ही सुना जा सकेगा। निजी रेडियो चैनल पर ख़बरें सुनाने की प्रमोशन नही है लेकिन इस चैनल के आने से कम से कम देहरादून और आसपास के इलाक़ों में नये संगीत और मनोरंजन के कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो सकेगा।

सूचना प्रसारण मंत्रालय ने देश भर में एफ़एम रेडियो 3 के तहत 48 शहरों में एफएम चैनल खोलने के लिये लाइसेंस दिये हैं।

मंत्री से लेकर आम लोगों तक ने लगाई रेल मंत्री से गुहार

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देहरादून स्टेशन लाइन और अन्य मरम्मत के कामों के लिये  करीब करीब एक महीना बंद रहेगा। इसके चलते आम लोग तो परेशान होंगे ही साथ ही पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों और सरकार के भी माथे पर परेशानी की लकीरें पड़ रही हैं।  गौरतलब है कि देहरादून स्टेसन के विस्तार और मरम्मत के कामों के चलते 17 अप्रैल से 22 मई तक देहरादून स्टेशन न तो कोई ट्रेन आयेगी न ही यहां से चलेगी। सभी ट्रेनें हरिद्वार से चलेंगी और यहीं खत्म होंगी। पर्यटन मंत्री सतपाल माहराज ने कहा है कि उन्होने केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु से बात की है और निवेदन किया है कि हरिद्वार की जगह ट्रेनों के आखिरी स्टेशन को हर्रावाला स्टेशन रखा जाये। इसके पीछे खास कारण है उत्तराखंड में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा सीजन। लाखों की तादाद में लोग चारघाम यात्रा के लिये ट्रेन से उत्तराखंड पहुंचते हैं। एसे में खासतौर पर गंगोत्री और यमुनोत्री आने वाले श्रद्धालुओं और मसूरी, धनौल्टी, चकराता आने वाले पर्यटकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

वहीं आम लोगों ने भी केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु से इस मामले में ध्यान देने के लिये ट्वीटर के माध्यम से गुहार लगाई जिसके जवाब में मत्री ने संबंधित अधिकारियों को मामले मे ध्यान देने के लिये निर्देशित किया है। वहीं उत्तराखंड होटल एसोसियेशन ने भी राज्य सरकार से इस मामले में उचित कदम उठाने की मांग की है। एसोसियेशन के अध्यक्ष सनी साहनी का कहना है कि ” उत्तराखंड की अरथव्यवस्था में एक बड़ा हिस्सा पर्यटन का है, ऐसे में अगर पीत पर्यटन सीज़न में पर्यटकों को रेल की सुविधी नहीं मिलेगी तो न केवल इससे सड़क पर वाहनों का दबाव बड़ेगा बल्कि पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।”

बहरहाल अब देखना ये होगा केंद्र सरकार राज्य की मागों के लेकर क्या रुख अपनाती है।

ट्रेन की चपेट में आये दो हाथियों की मौत

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उधमसिंह नगर, पंतनगर के हल्दी रेलवे स्टेशन क्षेत्र में ट्रेन की चपेट में आज सुबह आये दो हाथी। रानीखेत एक्सप्रेस की चपेट में आये दो मादा हाथी पानी की तलाश में आये थे, 2 से 3 साल के बताए जा रहे दोनों हाथी, दोनों की मौके पर हुई मौत।

नजर डालते हैं इन आंकड़ों पर जो हाथी ट्रेन से अब तक मारे गए है:

  • 1992 में एक के बाद एक पांच हाथियों की मौत हुई। जिसमें 3 मादा और एक नर शामिल था।
  • 1994 में दो हाथी फिर से ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई।
  • 1998 में लगभग 6 हाथी मारे गए जिसमे से 3 मादा हाथी प्रेग्नेंट थी।
  • 2000 और 2001 में लगभग 4 हाथियों को ट्रेन ने मौत के घाट उतार दिया।
  • 2002 में 2 और 2003 में लगभग 2 हाथी ट्रेन की चपेट में आकर दम तोड़ा।

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जबकि आज भी लालकुआं में दो हाथियों की मौत ट्रेन से ही हुई है। विभाग की जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं है की ट्रेन ही इन हाथियों की मौत का कारण है। इसके साथ ही जंगलो से निकलने वाले हाईटेंशन तार भी हाथियों की मौत की बड़ी वजह है। लगभग 10 हाथी अब तक करंट लगने के कारण दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। जबकि शिकारियों की गोली से भी लगभग 7 हाथी मारे जा चुके हैं। प्राकृतिक मौत से गढ़वाल में ही 100 से ज्यादा हाथीयों की मौत हो चुकी है जबकि सरकारी गोली यानी ट्रेंकुलाइज से भी कई हाथी मरे गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि आप नेशनल पार्क में गति लगभग 30 से 35 किलोमीटर प्रति घण्टा रखे, लेकिन फिर भी यह घटनायें रूकने का नाम नहीं ले रहीं है।

चार धाम के प्रवेश द्धार में गहराने लगा पेयजल संकट

चार धाम यात्रा सर पर है और ऐसे में सरकारी की सिस्टम की लापरवाही वही मुलभुत सुविधाओं को लेकर सामने आ रही है। गर्मियों की दस्तक के साथ ही चार धाम के प्रवेश द्धार ऋषिकेश में जल संकट गहराने लगा है ,ऐसे में चार धाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों को जलसंस्थान की लापरवाही का खमियाजा भुगतना पद सकता है । 2017 की चार धाम यात्रा में काफी काम समय बचा है लेकिन गढ़वाल कॉमिशनर की ऋषिकेश में यात्रा तैयारियों के लिए हुयी बैठक के बाद भी विभाग अपनी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं ला रहे है।

यात्राकाल में देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश पहुंचते है लेकिन गंगा तट पर बसे इस शहर में जल संस्थान की कार्यप्रणाली से जल संकट अभी से गहराने लगा है स्थानीय लोग नाराज होकर लगातार जल संस्थान के चक्कर काट रहे है समस्या है की सुलझने का नाम नहीं ले रही है ,जिसके चलते आम लोगो में गुस्सा बना हुआ है।  लगातार ऋषिकेश के कई छेत्रो में जल संकट गहराने लगा है चार धाम  यात्रा बस टर्मिनल, कुम्हारबाड़ा, भैरव मंदिर, चंद्रेश्वर नगर, चंद्रभागा बस्ती और मायाकुंड  में लगातार जल संकट देखा जा रहा है।

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स्थनीय लोगो का आरोप है कि छेत्र में लगातार पानी की कमी होती जा रही है न पानी आने का कोई समय है और ना ही जलकर्मी समस्याओ को निस्तारण करते है। इधर जल संस्थान का कहना है कि वो अपनी तैयारी पर लगे हुआ है। अधिशासी अभियंता ऋषिकेश के अनुसार हमने ट्यूब वेळ बना दिया है उसमे बिजली का सयोजन होना बाकि है, वो होते ही पानी की कमी का निस्तारण हो जायेगा। सूरज की तपिश अप्रेल माह में ही सितम ढाने लगी है, ऐसे में  बिजली और पानी की समस्या आम लोगो के लिए  मुसीबत बनी हुयी है, ऐसे में सवाल उठता है कि कुछ दिनों बाद जब देश भर से तीर्थ यात्री ऋषिकेश पहुचेगे तो विभाग की कार्य प्रणाली उन पर कितना भारी पड़ेगी।