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एनएच घोटाले की जांच पर संशय

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एनएच मुआवजे घोटाले के दस्तावेज पुलिस ने सीबीआइ के हवाले तो कर दिये लेकिन इसकी जांच को लेकर अभी संशय बरकरार है। सीबीआइ ने अभी तक इस मामले में जांच को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। आखिर जांच पुलिस के पाले में रहेगी या फिर सीबीआइ इसको हल करेगी?

एनएच घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने सीबीआइ से जांच की संस्तुति दी थी। इस दौरान मुख्यमंत्री इस मामले में छह पीसीएस अफसरों को निलंबित कर चुके है। जबकि एक अन्य सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद तो सिलसिला शुरू हो गया। कई कर्मचारी भी इसमें नप गए। उनका भी निलंबन कर दिया गया।

अब पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले से जुड़े दस्तावेजों को सीबीआइ को भेजा गया है, लेकिन सीबीआइ की ओर से अब तक कोई रुख नहीं किया गया। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से गृह मंत्रालय एक रिमाइंडर भेजा गया था, लेकिन फिर भी कोई जबाव न आने से असमंजस की स्थिति बरकरार है। ऐसे में कुछ का कहना है कि यह जांच पुलिस पर ही रहेगी तो कुछ सीबीआइ से ही जांच चाहते है, लोगों के बीच अब तक यह सवाल गोते खा रहा है, लेकिन अभी भी इसको पार नहीं मिल पाया है।

2017 तक राज्य को 100 प्रतिशत विद्युतिकृत

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ऊर्जा विभाग की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वह ग्राम जहाँ अभी तक विद्युत नहीं पहुंची है, उन ग्रामों को वर्ष 2017 तक विद्युतिकृत करना है। इसके लिये अन्य स्रोतों का प्रयोग भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में हमें आत्मनिर्भर होना है। साथ ही विद्युत चोरी को रोकने के लिये कठोर कदम ऊर्जा विभाग को उठाने होंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमें गुड गवर्नेंस का ध्यान रखना है। आम जनता को होने वाली परेशानियों को कम करते हुए ऊर्जा विभाग को कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने देहरादून एवं हरिद्वार में अंडरग्राउण्ड केबलिंग के लिये प्रस्ताव तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिये कि बायो ऊर्जा परियोजना के तहत सरकारी मिलों को शामिल किया जाए। माईक्रो और मिनी हाईड्रो प्रोजेक्ट्स को विशेष तौर पर बढ़ावा दिया जाए। इसमें स्थानीय लोगों एवं संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

अखरोट की खेती के लिये 2 माॅडल फार्म विकसित किये जायें: मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को कैम्प कार्यालय, मुख्यमंत्री आवास में उद्यान एवं ऊर्जा विभागों की समीक्षा बैठक ली। उद्यान विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट की अत्याधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में कागजी अखरोट को प्रोत्साहन दिया जाए। इसके लिये 2 माॅडल फार्म विकसित किये जाएं। इन फाम्र्स को सेंटर आॅफ एक्सीलेंस की तर्ज पर विकसित किया जाए। इसमें प्रशिक्षित लोगों को जोड़ा जाए। इन फाम्र्स के विकसित होने के उपरान्त अन्य स्थानों पर ऐसे फार्म विकसित किये जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने वाॅलनट एवं अदर फ्रूट ग्रोवर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया के अनुभव का लाभ लेते हुए इसमें किसानों को अखरोट की अच्छी प्रजातियों के कलमी पौधे उपलब्ध कराये जाएं। किसानों एवं ग्रामीणों को अखरोट की खेती के लिये प्रोत्साहित करने के लिये प्रचार-प्रसार किया जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में खेती के लिये पानी की व्यवस्था रेन वाटर हार्वेस्टिंग से किया जाना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि किसानों को दी जाने वाली पौध की गुणवत्ता में कोई कमी न हो, इसके लिये विभाग को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने इसके लिये एक्ट तैयार करने की बात भी कही। अखरोट को राज्य का भविष्य बताते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि अखरोट को हमें अपनी प्राथमिकता में रखना होगा।

सीबीआई की ना से रसकूदारों को राहत मिलने के आसार

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सीबीआइ का इन्कार राहत दे सकता है उन ऊचे औहदेवालों को जिनकी कलम से करडों के भुगतान हुए हैं घोटाले में। लंबे समय बाद भी सीबीआइ के इस मामले में खास संज्ञान न लेने से इस बात की आशंका बढ़ गई है कि मामले में नया मोड़ आ सकता है। सरकार सीबीसीआइडी का फैसला भी ले सकती है। अफसरों के मुताबिक, सीबीआइ अभी मामले का अध्ययन कर रही है। मामले की गंभीरता को देखने के बाद ही वह इसमें हाथ डालेगी।

ढ़ाई सौ करोड़ से भी अधिक का मुआवजा घोटाला चर्चा में है। यह साफ हो चुका है कि अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर भू स्वामियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। कृषि भूमि को बैक डेट में अकृषक दर्शाने का खेल चला और खेल में बड़ा सडिकेट लगा रहा। कमीशनखोरी के फेर में आंखें मूंदकर सभी फाइलें आगे बढ़ाते रहे। चार और दस गुना मुआवजा तक दिया गया। ऐसे में एनएच 74 की लागत बढ़कर कई गुना पहुंच गई। कांग्रेस सरकार में हुए इस घोटाले का जिन्न सरकार के जाते-जाते बाहर निकला। खुद कमिश्नर ने बैठक बुलाकर पूरे मामले से परदा उठाया। स्वीकार किया कि एसएलएओ, एसडीएम, तहसील, चकबंदी, एनएचएआइ और न जाने कौन-कौन से विभाग सुर में सुर मिलाकर सरकार को चूना लगा रहे थे। शासन के निर्देश पर इस मामले की एफआइआर कोतवाली में लिखी गई और स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने मामले की जांच शुरू की।

सरकार गठन के साथ ही सीबीआइ जांच के आदेश हुए और सात पीसीएस अफसरों समेत 20 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई की जा चुकी है। आरोप पत्र भी तैयार हो चुके हैं और कार्रवाई का दौर जारी है, क्योंकि सीबीआइ जांच के आदेश हो चुके हैं, इसलिए एसआइटी ने फिलहाल जांच रोक दी है लेकिन खबर है कि सीबीआइ इस मामले का अध्ययन कर रही है। जांच योग्य मामला पाए जाने पर ही सीबीआइ इधर रुख करेगी, वरना उसके इन्कार के बाद सरकार मामले की सीबीसीआइडी जांच का फैसला भी ले सकती है। यहां बता दें कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद खुद पुलिस कप्तान ने इसकी जांच एसआइटी ने न कराकर सीबीसीआइडी से कराने की सिफारिश की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि सीबीसीआइडी जांच से अफसरों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ ने डबल लॉक में रखी गई मुआवजे से संबंधी फाइलों की छायाप्रति तलब की है। हालांकि सीबीआइ की इस कार्रवाई से यह कतई नहीं कहा जा सकता कि सीबीआइ इस केस को अपनी जांच में लेगी भी या नहीं। थ्री डी और जी में भूमि की प्रकृति और प्रकार का अलग-अलग होना ही जांच का आधार बनेगा। सूत्रों की मानें तो अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अधिकांश मामलों में थ्रीडी और जी में गड़बड़झाला किया गया है। नियमानुसार थ्रीडी में यदि कृषि भूमि दर्ज है तो जी में भी वही होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सेटग-गेटग से प्रकृति और आकार दोनों बदले गए। गदरपुर और बाजपुर में ऐसा सर्वाधिक हुआ।

स्थलीय निरीक्षण के नाम पर खनापूर्ति

नियमानुसार 143 दर्ज की गई भूमि का जिम्मेदार अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन निरीक्षण इसलिए नहीं किया गया, क्योंकि रिपोर्ट भी लगानी होती और उसमें अगर झूठ का सहारा लिया होता तो आगे पकड़ा जाता। अब अधिकारी यह कहते नहीं थक रहे कि उन्होंने तो एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी की रिपोर्ट पर भरोसा किया।

फेरों से पहले हेलीकॉप्टर से जाकर इम्तिहान दिया इस दुल्हन ने

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देहरादून के नवविवाहित जोड़े की शादी मिसाल बन गई। राजधानी की युवती ने शादी के सात फेरे लिए और बाकी की रस्म से पहले कॅरियर बनाने की परीक्षा देने के लिए नैनीताल पहुंच गई। जाते समय हेलीकॉप्टर से 400 किमी की दूरी तय कर लौटे व शेष रस्म अदा कर शादी के बंधन में बंध गए।

देहरादून निवासी मनीष उपाध्याय और आरती सिंह रविवार रात परिणय सूत्र में बंध गए, मगर फेरे सोमवार सुबह पांच बजे हुए। आरती का सोमवार को ही नैनीताल उच्च न्यायालय में स्टेनोग्राफर ग्रेड वन पद के लिए फाइनल पेपर था। दो इम्तिहान वो पहले ही पास कर चुकी है।

शादी और परीक्षा एक साथ की दिक्कत आई तो ससुरालपक्ष के लोगों ने उसके लिए सुबह तो देहरादून से नैनीताल के लिए आठ हजार रुपये में टैक्सी बुक की। अभी शादी की बांकी रस्में भी निभानी थीं, इसलिए नैनीताल से लौटने के लिए हैलीकॉप्टर का इंतजाम किया।

आरती के साथ उनके पति मनीष भी नैनीताल आए और आरती ने भारतीय शहीद सैनिक स्कूल में दोपहर दो से पांच बजे तक परीक्षा दी। परीक्षा के बाद नवविवाहित दंपती सीधे बिड़ला स्कूल स्थित हेलीपैड पहुंचे।

आर्यन हैली सेवा के पायलट कर्नल पी.पी.व्यास फोर सीटर हैलीकॉप्टर लेकर पहुंचे थे। आरती के पति मनीष उपाध्याय देहरादून में ही नेटवर्क मार्केटिंग का काम करते हैं। आरती के पिता शेर सिंह, 18 मन्नू गंज, हकीकत नगर, देहरादून के रहने वाले हैं और वहीं एक छोटी सी दुकान चलाकर गुजारा करते हैं।

आरती के तीन भाई व दो बहनें हैं। आरती के मुंहबोले भाई मो.ताहिर ने शादी और उसके ट्रांसपोर्ट में बहुत मदद की जो एक प्रमुख अखबार के टिहरी में संवाददाता हैं। हैलीकॉप्टर का किराया लगभग 2.25 लाख और फायर सर्विस समेत पुलिस को भी 11 हजार रुपये की धनराशि भुगतान की गई।

आरती और मनीष की शादी देहरादून के सहारनपुर रोड स्थित राज वेडिंग पॉइंट में हुई। मनीष देहरादून के खुडबुडा मोहल्ला के रहने वाले हैं। मनीष के पिता जीवन सिंह कृषक हैं। आरती ने बताया कि ये उसकी जिंदगी के यादगार लम्हे हैं और ख़ुशी इस बात की है कि उसकी शादी के साथ वह परीक्षा भी दे सकी।

मनीष का कहना है कि शादी और आरती के पेपर ने पहले तो उनको धर्म संकट में डाल दिया था लेकिन फिर हौसला रखकर सबने मिलकर व्यवस्थाएं की और अब घर जाकर गृह प्रवेश और दूसरी रस्मों के साथ प्रीतिभोज कर सकेंगे।

कैंब्रिज सी साख होगी अल्मोड़ा की आवासीय विश्वविद्यालय

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अल्मोड़ा, लंबे अर्से से आवासीय विश्वविद्यालय की चली आ रही दरकार को आखिरकार पंख लग ही गए। कोसी स्थित पं.गोबिंद बल्लभ पर्यावरण संस्थान पहुंचे राज्यपाल डा.केके पॉल ने आवासीय विश्वविद्यालय का लोगो जारी करते हुए इसका शुभारंभ कर दिया।

उन्होंने कहा कैंब्रिज के छात्रों को नौकरी तलाशने की जरूरत नहीं होती। क्योंकि उस पर कैंब्रिज का ठप्पा होता है। आवासीय विश्व विद्यालय की साख भी कैंब्रिज जैसी होगी। इसमे फैशन डिजाइनिंग, फिल्म मेकिंग, ड्रामा, म्यूजिक, ग्राफिक्स, एनिमेशन सहित अन्य कोर्स चलेंगे। यहां की पारम्परिक लोक संस्कृति संरक्षित रहेगी एवं जड़ी-बूटी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर भू वैज्ञानिक डा. के.एस वाल्दिया, यूकास्ट के निदेशक राजेंद्र डोभाल, प्रो. प्रीति जोशी, निफ्ट की निदेशक विजया देशमुख, निदेशक पं. गोविंद बल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण संस्थान पी.पी ध्यानी, शायर कलकोरिया ने अपने विचार रखे।

आवासीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस धामी ने कहा कि आवासीय विश्वविद्यालय में जहां प्रोफेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे, वहीं स्थानीय परंपरा, ज्ञान और प्राकृतिक विज्ञान, नेचुरल साइंस को विज्ञान के साथ जोड़कर पहाड़ की अपनी पहचान बनाई जाएगी। इसी सत्र से उत्तराखण्ड आवासीय विश्वविद्यालय की कक्षाएं होटल मैनेजमेंट संस्थान व उदयशकर नाटय अकादमी में शुरू की जाएंगी। कार्यक्त्रम के अध्यक्ष विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान ने कहा कि हम सब के लिए सौभाग्य की बात है कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार और पलायन को रोकने के लिए जिस उददेश्य से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है इसका आने वाली पीढ़ी को अवश्य लाभ मिलेगा।

जमीन मिलने पर मिनी एफटीआई बनाया जाएगा: धन सिंह रावत

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राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धन सिंह रावत रविवार को फिल्म फेस्टिवल कौतिक में शिरकत करने आए थे। उन्होंने कहा कि गढ़वाल और कुमाऊं में करीब 96 फिल्में बनाई गई हैं। फिल्म निर्माताओं से उत्तराखंड की संस्कृति पर आधारित फिल्म बनाने का आग्रह किया गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर जमीन मिल जाती है तो मिनी एफटीआई जरूर स्थापित किया जाएगा। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जल्द अस्थाई और स्थायी शिक्षकों की नियुक्तियां भी की जाएंगी। भीमताल परिसर को पूर्ण परिसर का दर्जा देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल को उच्च शिक्षा विभाग की नैनीताल में प्रस्तावित बैठक में तय किया जाएगा।

सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखने की जरुरत

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पौराणिक द्वारिका का स्याल्दे-बिखौती कौतिक, द्वाराहाट सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मेले को और अधिक विस्तार देने तथा भागीदारी करने वाले धड़ों व आम लोगों के बीच बेहतर तालमेल कायम करने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। ताकि कौतिक को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के रूप में भव्य रूप दिया जा सके।

यह बात एतिहासिक स्याल्दे मेले, द्वाराहाट,के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि विधायक महेश नेगी ने कही। उन्होंने कहा कि आधुनिक चकाचौंध के बावजूद विरासत में मिली सांस्कृतिक धरोहर को संजोया है। इसके लिए उन्होंने बुजुर्ग संस्कृति व रंगकर्मियों को श्रेय दिया। विधायक ने कहा स्याल्दे-बिखौती मेले को और अधिक विस्तार किया जाएगा। उन्होंने युवा पीढ़ी से मेले के स्वरूप को संजोए रखने के लिए आगे आने का आह्वान किया। विधायक महेश नेगी व मेला समिति अध्यक्ष विमला साह ने संयुक्त रूप से पुरस्कार बांटे। इस दौरान कई सांस्कृतिक व रंग कर्मी मौजूद रहे।

योग और आयुर्वेद सीखने पोलेंड पहुंचा उत्तराखंड

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पोलेंड का ओपोले प्रांत व उत्तराखंड योग व आयुर्वेद के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे। दोनों ही प्रान्तीय सरकारों में इस पर सहमति बन गई है। पोलेंड के विदेश मंत्रालय ने इसकी स्वीकृति दे दी है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त होते ही उत्तराखंड सरकार व पोलेंड के ओपोले प्रान्त की सरकार के बीच स्टेट टू स्टेट समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।  

सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में ओपोले प्रान्त के मार्शल श्री एंड्रजे बुला के प्रतिनिधि के तौर पर पोलेंड स्थित सुलिस्ला योगा आयुर्वेद इंस्टीट्यूट के संस्थापक जेर्जी बार व बिएटा बार ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिह रावत को इस संबंध में आधिकारिक पत्र सौंपा। पोलेण्ड में भारतीय राजदूत अजय बिसारिया द्वारा भी इसके लिए संस्तुति की गई है। सुलिस्ला योगा आयुर्वेद इंस्टीट्यूट पोलेंड में 700 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई है। बार ने मुख्यमंत्री को सुलिस्ला में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योगा व आयुर्वेद सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए भी आमंत्रित किया है। ओपोले मेडिकल काॅलेज द्वारा उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के साथ कार्य करने के लिए भी प्रस्ताव दिया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड  योग की भूमि है। योग व आयुर्वेद के क्षेत्र में मिलकर काम करने से पोलेंड का ओपोले प्रान्त व उत्तराखंड राज्य परस्पर लाभान्वित होंगे। प्रतिनिधिमण्डल में भारत के पूर्व राजदूत सी.एम. भण्डारी भी शामिल थे। भण्डारी मूल रूप से रानीखेत के हैं और वर्तमान में वे अपने गांव मारवा में इको पर्यटन, योगा व आयुर्वेद पर काम कर रहे हैं। तय किया गया कि मारवा गांव की तर्ज पर इको पर्यटन, योगा व आयुर्वेद के माॅडल को कुछ अन्य गांवों में भी विकसित किया जाए। जेर्जी बार ने कहा कि वे प्रयास करेंगे कि अधिक से अधिक पोलेंड के पर्यटक आएं और यहां योग व आयुर्वेद से लाभान्वित हों। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री प्रकाश पंत भी उपस्थित थे। 

अवैध जीव तस्करी के अारोप में एक अभियुक्त गिरफ्तार

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जानवरों की तस्करी रोकने के लिये बनी स्पेशल टास्क फोर्स को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब टीम ने त्यागी रोड से एक अभियुक्त रघुबीर सिंह बिष्ट, को दो भालू की पित्त तथा एक हिरन का सींग के साथ गिरफ्तार किया गया।

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गिरफ्तार रघुबीर ने पूछताछ पर बताया गया कि थराली जनपद-चमोली के किसी व्यक्ति ने उसे बेचने को दिया था तथा अच्छा कमीशन देने को कहा था। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा रही है। भालू की पित्त का उपयोग चीन, जापान, कोरिया, अमेरिका में दवाईयां बनाने में किया जाता है, जिस कारण उक्त पित्ति की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। उक्त बरामद माल की अन्र्तराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 08 से 10 लाख रुपये है। वन्य जीव के अन्तर्गत भालू की पित्त को अनूसूची-1 व हिरन का सींग को अनूसूची-3 में रखा गया है।

एस.टी.एफ. द्वारा वन्य जीव जन्तुओं की अवैध तस्करी के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियानों के अन्तर्गत वर्ष 2017 से वर्तमान तक 9- गुलदार की खाल, 2-भालू के पित्त, एवं हिरन का सींग-1 बरामद किया गया हैं।