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राज्य में मई से शुरु होगा ई-चालान

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सचिव परिवहन विभाग सीएस नपचियाल ने बताया कि राज्य में अगले महीने यानि मई से वाहनों का ई-चालान की व्यवस्था लागू हो जाएगी। एनआईसी द्वारा ई-चालान का साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। परिवहन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है।

इसका फायदा विभाग को यह होगा कि विभाग के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, पेपर का काम कम होगा और इसके साथ ही सारी सूचना विभाग के सेंट्रल सर्वर में चली जाएगी। सभी जनपदों में आरटीओ और एआरटीओ वाहनों के ई-चालान कटेंगे इसके लिए अधिकारियों को मोबाईल फोन और प्रिंटर उपलब्ध कराया जाएगा जिससे मौके पर ही चालान काटने के बाद स्लिप चालक को दे दिया जाएगा। मौके पर ही जुर्माना अदा करने की व्यवस्था भी कर दी जाएगी, जिसकी रसीद चालक को तत्काल मुहैया कराई जाएगी।

 

इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति से संबंधित याचिका हाई कोर्ट में खारिज

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हाई कोर्ट ने अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में नियुक्त दरोगा की इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति से संबंधित याचिका खारिज कर दी। एसआई सुभाष चंद्र व अन्य ने याचिका दायर कर दरोगा से निरीक्षक पद पर स्थायी नियुक्ति की मांग की थी।

अदालत ने कहा कि सब इंस्पेक्टर पद पर याचिकाकर्ताओं की स्थायी नियुक्ति 2008 में हुई थी। इसलिए उन्हें पूर्व से वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह 1999 में उत्तर प्रदेश में शुरू दरोगा भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे। परीक्षा भी पास कर ली थी, मगर इलाहाबाद हाई कोर्ट से रोक के बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। राज्य बनने के बाद 2003 में हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल को उत्तराखंड के लिए आवंटन कर दिया। इसी बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट का स्टे खारिज हो गया। इस आधार पर वह 1999 से उप निरीक्षक के पद के लिए अहं हो गए थे।

याचिका का विरोध करते हुए 2002 बैच के दरोगाओं ने कहा कि याचिकाकर्ता 2008 में सब इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए हैं, इसलिए वह वरिष्ठता पाने के हकदार नहीं हैं। दोनों पक्षों की सुनवाई व पुलिस एक्ट व रेग्लूलेशन के आधार पर एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता दरोगा पद पर 2008 में नियुक्त हुए हैं, उनकी नियुक्ति भी तभी से मानी जाएगी, वह पूर्व की तिथि से नियुक्ति मांगने के हकदार नही हैं। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ में हुई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ विधायक की जंग

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जनपद  उधमसिंहनगर की किच्छा विधानसभा से भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़गें, क्योंकि जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ही भाजपा को जनादेश दिया है। उन्होंने रुद्रपुर के अटरिया सिडकुल मार्ग के निर्माण की जांच की मांग करते हुए कहा कि इसमें करोड़ों का घोटाला हुआ है। इसके अलावा सिडकुल में नहर के सौंदर्यकरण में भी बड़ा खेल हुआ है। विधायक ने कहा कि जैसे आयुक्त ने एनएच घोटाले का संज्ञान लिया है उसी प्रकार उन्हें चकबंदी में हुए अरबों के खेल का भी संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए।

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए करोडों के कार्यों की जांच की मांग करते हुए शुक्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के कार्यों की जांच कराए। बताया कि उन्होंने 40 करोड़ की लागत से सिडकुल अटरिया रोड स्वीकृत कराई थी। इस सडक़ का निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ। पांच ठेकेदार बदल चुके हैं। जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होने कहा कि सिडकुल में नहर के सौंदर्यकरण के नाम पर बड़ा खेल खेला गया। इसकी जांच भी एसआईटी, सीबीआई या सेवानिवृत न्यायिक अफसर से कराई जानी चाहिए। उन्होंने अरबों के एनएच घोटाले का खुलासा करने वाले कुमाऊं कमिश्नर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें चकबंदी विभाग में हुए बड़े घोटाले का भी खुलासा करना चाहिए। किच्छा क्षेत्र में ही करोड़ों की जमीनों को चकबंदी अधिकारियों ने ठिकाने लगा दिया।

चार धाम यात्रा और मसूरी टूरिस्ट सीजन के लिये बना ट्रैफिक प्लान

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नगर पालिका सभागार मसूरी में एसएसपी देहरादून की अध्यक्षता में आने वाली चार धाम यात्रा और मसूरी में पर्यटक सीजन को देखते हुए एक बैठक करी गई। बैठक के दौरान चार धाम यात्रा और मसूरी सीजन को सफल बनाने के लिये व्यवस्थाओं तथा ट्रैफिक प्लान के संबंध में चर्चा हुई। सीजन के दौरान मसूरी में यातायात का दबाव बढ़ने पर कुछ चिन्हित स्थानों पर मसूरी आने वाले यातायात को रोक दिया जाएगा तथा केवल उन्हीं लोगो को मसूरी की ओर आने दिया जाएगा, जिनके द्वारा मसूरी में पूर्व में होटल बुकिंग आदि की गई हो, जिसके लिए उन्हें स्टीकर उपलब्ध कराए जाएंगे।

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इसके अतिरिक्त घूमने आने वाले लोगों को यातायात का दबाव कम होने तक चिन्हित स्थलों पर रोका जाएगा। बैठक के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष ने बताया कि सीज़न के दौरान पुलिस की सहायता के लिये नो पार्किंग जोन में खड़े वाहनों का नगर पालिका की टीम द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र के तहत अधिकतम ₹850/- का चालान किया जाएगा। इसके अलावा एसएसपी ने कहा कि जल संस्थान के अधिकारियों को सीजन के दौरान चार से पांच टैंक प्रेशर वाटर हर समय उपलब्ध कराए जाने के लिये कहा गया है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिये फायर ब्रिगेड को किसी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े।

9 जुआरी, 1,62,915/- रूपये के साथ गिरफ्तार

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ऋषिकेश में जुआ/सट्टा खेलने वालों के विरूद्ध कार्यवाही कि गई जिसके लिये एसएसपी के नेतृत्व में टीम गठित की गयी। मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि काली कमली बगीचे में कुछ व्यक्ति जुआ खेल रहे हैं। इस सूचना पर पुलिस बल द्वारा मुखबिर के बताये अनुसार देखा तो काली कमली बगीचे में 9 व्यक्ति घेरा बनाकर जुआ खेल रहे थे।

पुलिस टीम द्वारा एकदम घेर घोट कर 8 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया जब की दीनू, उर्फ दिनेश, पुत्र गंगा प्रसाद मौके से फरार हो गया। इन व्यक्तियों के पास से एक ताश की गड्डी व कुल 1,62,915/- रूपये बरामद हुई। समस्त व्यक्तियों के विरूद्ध जुआ अधिनियम का अभियोग पंजीकृत किया गया, जिन्हे प्रातः माननीय न्यायालय पेश किया जायेगा।

दीपक रावत ने ऐसिड बिक्री के खिलाफ छेड़ी मुहिम

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अपने दबंग अंदाज़ और तेज़ तर्रार कार्य शैली के लिये मशहूर नैनीताल के डीएम दीपक रावत एक बार फिर ज़िले की गलियों में एक्शन में दिखे। हल्द्वानी की कई दुकानों पर गुरूवार को डीएम दीपक रावत ने अपनी टीम के साथ छापे मारी की। मकसद था उन दुकानों की पहचान करना जो बिना लाइसेंस ऐसिड की बिक्री कर रही है। देर शाम तक चली इस छापेमारी में आधा दर्जन से ज्यादा दुकानों को सील किया गया और जुर्माना भी किया गया।

पत्रकारों से बात करते हुए डीएम ने बताया कि पिछले कुछ समय से शहर में ऐसिड की खुले में बिक्री की शिकायतें मिल रही थी। रावत के मुताबिक हालात तब और चिंत्ताजनक हो जाते हैं जबकि नैनीताल ज़िले में ही ऐसिड एटैक की करीब 15 पीड़ित महिलाए मौजूद हैं। गौरतलब है कि सरकार पहले ही बिना सरकारी लाइसेंस के ऐसिड की बिक्री पर रोक लगा चुकी है।

उत्तराखंड से लाल बत्तियां हुई गायब

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केंद्र सरकार का लाल बत्तियों के इस्तमाल पर बैन का फैसला 1 मई से लागू होना है लेकिन इसका असर उत्तराखंड में दिखने लगा है। गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सभी गाड़ियों से लाल बत्ती हटा दी गई। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ’’लालबत्ती कल्चर को समाप्त करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है, और इसी क्रम में मेरी गाड़ी से आज से लालबत्ती हटा दी गई है’’। विधानसभा अध्यक्ष व प्रदेश सरकार के सभी मंत्रीयों द्वारा अपनी-अपनी गाड़ियों से लालबत्ती हटा दिए जाने पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने सभी का आभार व्यक्त किया है। राज्य संपत्ति विभाग ने भी उन सभी सरकारी वाहनों से लाल बत्ती हटाने के लिये आदेश जारी कर दिये हैं जिन पर अबी तक लाल बत्तियों का प्रयोग हो रहा था और जो केंद्र सरकार के ताजा आदेश के बाद इसका प्रयोग नहीं कर सकते हैं।

गौरतलब है कि बुधवार को केंद्रीय मंत्रीमडल की एक बैठक में ये फैसला लिया गया कि ऐमरजेंसी वाहनों और पुलिस के वाहनों के अलावा सभी वीआईपी और अन्य अधिकारियों की गाड़ियों पर लगने वाली लाल बत्तियों का इस्तेमाल 1 मई से नहीं होगा। इस बैठक की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस फैसले के दायरे में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी आयेंगे। पिछले महीने ही उत्तरप्रदेश और पंजाब के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अपनी गाड़ियों से लाल बत्तियां हटा दी थी। सराकरी गाड़ियों में लाल बत्ती के प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट भी कई बार तीखी टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट ने कहा था कि लाल बत्तियां सिर्फ बेवजह ताकत और स्टेटस सिंबल का प्रतीक हैं और इन्हें जल्द से जल्द हटा देना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत स्टिंग मामले की अगली सुनवाई तीन मई को

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हाई कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के विधायकों की कथित खरीद फरोख्त की सीबीआइ जांच को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तीन मई नियत कर दी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने याचिका दायर कर स्टिंग मामले की सीबीआई जांच रद करने का आग्रह किया है।

याचिकाकर्ता के अनुसार इस मामले की सीबीआई जांच का कोई औचित्य नहीं है। मामले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा एसआइटी का गठन किया है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ में हुई।

पिछले साल 18 मार्च को राज्य विधान सभा में विनियोग विधेयक पर बहस के दौरान सत्ताधारी कांग्रेस के विधायक विपक्ष के पाले में आगए और हंगामा हो गया। इसके बाद कांग्रेस विधायक ,भाजपा विधायकों के साथ राज्यपाल से मिले और सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

राज्यपाल ने बहुमत साबित करने को कहा तो इसी बीच दिल्ली में स्टिंग जारी हुआ। इसमें कथित तौर पर विधायकों की खरीद फरोख्त से संबंधित बातचीत थी। केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लगाया तो उसमें भी स्टिंग को आधार बनाया। केंद्र ने स्टिंग की सीबीआई जांच के आदेश पारित किए थे। राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल द्वारा केंद्र को सीबीआइ जांच की सिफारिश भेजी गई थी।

शिक्षक पर पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ का आरोप

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हल्द्वानी तिकोनिया स्थित ओरम स्कूल में एक शिक्षक पर पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ का आरोप लगा है। गुस्साए परिजनों के साथ विभिन्न संगठनों के लोगों ने स्कूल पहुंचकर तोड़फोड़ कर डाली। भारी संख्या में पहुंची पुलिस फोर्स ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया।

बताया जा रहा है कि पहली कक्षा की छात्रा से एक शिक्षक पिछले कुछ दिनों से छेड़छाड़ कर रहा था। बच्ची ने जब परिजनों को इसकी शिकायत की तो वे आग बबूला हो गए। इसके बाद परिजनों के साथ ही शहर के तमाम संगठनों के लिए स्कूल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया।

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इस दौरान पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। गुस्साए लोगों ने स्कूल का फर्नीचर तोड़ डाला। साथ ही एसी, स्कूल के बोर्ड पर भी गुस्सा निकाला। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत कराने का प्रयास  किया। जब लोग नहीं माने तो पुलिस को भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां भी फटकारनी पड़ी। शिक्षक के खिलाफ बच्ची के परिजनों की ओर से तहरीर दी गई है।

अब बद्री-केदार का प्रसाद मिलेगा ईको फ्रेंडली तरीके से

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प्लासटिक के इस्तमाल पर हाई कोर्ट के बैन और पर्यावरण को बचाने के लिये अब बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति आगे आई है। आने वाले दिनों में बद्रीनाथ और केदारनाथ आने वाले लाखों भक्तों को प्रसाद आदि सामाग्री प्साटिक के बैग और कंटेनरों में नहीं दिये जायेंगे। इसके लिये लोकल कारिगरों द्वारा बनाई गई बांस की टोकरियों का इस्तेमाल किया जायेगा। इस बारे में बताते हुए मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह ने कहा कि “मंदिर समिति ने लोकल बाज़ारों के दुकानदारों से अपील की है कि वो बांस के इन टोकरियों को जिन्हें रिंगल कहा जाता है अपनी दुकानों में ज्यादा से ज्यादा रखें। इससे न केवल प्लासटिक से देवभूमि के बचाने में मदद मिलेगी साथ ही स्थानीय कारीगरों को स्वरोज़गार का मौका भी मिलेगा।”

गौरतलब है कि बद्रीनाथ आने वाले भक्तों को प्रसाद को तौर पर चंदन, तुलसी और लड्डू दिया जाता है। इस साल भी चारधाम यात्रा मई से शुरू होने वाली है और इसकी तैयारियां पूरे ज़ोरों पर हैं। ऐसे में इस तरह के कदम देवभूमी की पवित्रता को संजोय रखने में काफी कारगर साबित हो सकते हैं।