दोनों ही छात्रों के टापर होने पर विघालय में खुशी का महौल था। शिक्षकों ने छात्रों को मिठाई खिलाकर उनका होसला अफजाई की, यही नही इसी विघालय से करीब 14 बच्चे मेरिट मेें निकले हैं। वहीं परिजन अपने बच्चों की सफलता से फूले नहीं समा रहे थे। अक्षदीप और हर्षवर्धन इन्जिनियरिंग में अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं और दुसरे छात्रों के लिए प्रेरणा बने दोनों छात्रों का कहना है कि मेहनत और लगन से की गयी पढाई कभी व्यर्थ नहीं जाती और गुरुओ के सम्मान के बिना लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।
जसपुर के बेटों ने किया नाम रोशन
1 जून से पर्यटकों के लिए खुलेगी ”फूलों की घाटी”
विश्व धरोहर फूलों की घाटी को पर्यटकों के लिए खोलने की कवायद तेज हो गई है। रविवार को फूलों की घाटी पैदल मार्ग से हिमखंड को काटकर रास्ता तैयार कर दिया गया। अब एक जून से घाटी में पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो जाएगी।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अधिकारियों के नेतृत्व में मजदूरों ने बामणधौड़ समेत फूलों की घाटी तक पैदल मार्ग पूरी तरह दुरुस्त कर दिया है। बामणधौड़ के तकरीबन 500 मीटर क्षेत्र में भारी-भरकम हिमखंड पैदल मार्ग की राह रोके हुए थे। मजदूरों ने कड़ी मशक्कत के बाद हिमखंड को काटकर घाटी तक रास्ता तैयार कर दिया।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि रविवार को घाटी तक का पैदल मार्ग पूरी तरह से खोल दिया गया। इसके अलावा हनुमानचट्टी से कुंडखाल होते हुए भी घाटी के लिए पैदल मार्ग को खोला जाएगा। इसके लिए मजदूरों को कुंडखाल ट्रैक पर भेज दिया गया है। बताया कि दोनों ट्रैक से इस वर्ष पर्यटकों की आवाजाही कराने की योजना पार्क प्रशासन की है।
दून के किन्नर अब लेंगे नहीं देंगे 101 रुपये की बधाई, जानिए क्यों
देहरादून के ट्रासजेंडर कम्यूनिटी ने यह निर्णय लिया है कि आगे से किसी भी भर में लड़की पैदा होने पर वह नियम के अनुसार पैसे लेने के बजाय उस परिवार को 101 रुपये का तोहफा देंगे। इसके अलावा किन्नर समुदाय ने यह फैसला किया है कि वह सोशल वेलफेयर डिर्पाटमेंट से यह निवेदन करेंगे की केंद्र और राज्य सरकार से आने वाले फंड में ऐसे परिवार की मदद की जाए जो आर्थिक रुप से कमजोर है ताकि वह परिवार अपनी बेटियों का पढ़ा लिखा सकें।
देहरादून किन्नर क्मयूनिटी की हेड और उत्तराखंड महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रजनी रावत ने बताया कि इस पहल के जरिए हम कन्या भ्रूण हत्या को रोकना चाहते हैं। हम आशा करते हैं कि हमारे स कदम से लड़की पैदा करने वाले परिवार को मोटिवेशन मिलेगा।उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा दिया गया टोकन मनी परिवार को याद दिलाएगा कि बेटी पैदा होने से उनके परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा हुई है।इसके साथ ही लड़की पैदा होना इस बात का भी सूचक होगा कि उनके परिवार में सुख और समृद्धि का निवास होगा।
रजनी रावत ने कहा कि पहले ट्रांसजेंडर कम्यूनिटी यह मुहिम देहरादून से शुरु करेगी उसके बाद राज्य के अलग-अलग जिलों में भी यह पहल शुरु की जाएगी।उनसे यह पूछने पर कि क्या ऐसा करके उनकी आमदनी को नुकसान नहीं होगा इसपर रावत ने कहा कि यह सच हैं कि हमारी आमदनी का बड़ हिस्सा बधाई(उत्सव के रुपये) से आता है। लेकिन हमने सोचा हमें लिंग अनुमात में लड़कियों के कम होने पर कुछ करना चाहिए। रावत ने कहा कि आमतौर पर हम लड़की पैदा होने वाले परिवार से बधाई नहीं लेते लेकिन अगर कोई अपनी मर्जी और खुशी से हमें कुछ देता है तो हम उसे प्रसन्नता के साथ लेते हैं।
इस दौरान सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट ने भी ट्रांसजेंडर कम्यूनिटी के इस पहल की प्रशंसा की। स्टेट वेलफेयर डिपार्टमेंट के डायरेक्टर विष्णु धनिक ने कहा कि आर्थिक रुप सेकमाजोर परिवार को मदद करने के लिए ट्रासजेंडर कम्यूनिटी का यह सराहनीय प्रयास है। इस पहल से सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओं पहल को भी बल मिलेगा।
उत्तराखंड में शराब की दुकानों के आवेदन में आई 59% की गिरावट
नेशनल हाईवे को 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पांबंदी के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर उत्तराखंड में आबकारी विभाग की कमाई पर पड़ने लगा है। इस साल उत्तराखंड में शराब की दुकानों के लाइसेंस के लिये आनी वाली अर्जियों में करीब 59 % की गिरावट आई है। आबकारी विभाग के अनुसार इस साल उन्हें 503 में से 437 दुकानों के लाइसेंस के लिये मात्र 25,992 अर्जियां ही मिली। वहीं ये आंकड़ा पिछले साल करीब 63,000 का था।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मार्च-अप्रैल के महीनें में सारी कवयाद कोर्ट के आदेश के बाद दुकानों को विस्थापित करने में लग गई। शराब की बिक्री के लिहाज से ये दोनों महीने सबसे ज्यादा बिक्री के होते हैं। ये एक बड़ा कारण हो सकता है नई अर्जियों की संख्या में कमी का।
इसके साथ साथ राज्य सरकार ने पहाड़ों में शराब की दुकानों के खुलने के समय में भी बदलाव किया है। जिसके चलते भी पहाड़ों से आने वाली अर्जियों में खासी कमी आई है। कोर्ट के आदेश के बाद परेशानी से झूझ रहे आबकारी विभाग के लिये ये संकेत अच्छे नहीं। बात और पेचीदा तब हो जाती है जबकी राज्य सरकार ने शराब बिक्री से होने वाली कमाई को बढ़ाने के लिये सभी जिलों को अपने अपने टारगेट दे रखे हैं।
एनएच घोटाला: नेशनल हाईवे के अधिकारियों के बचाव में केन्द्र सरकार
ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के निर्माण में 363 करोड़ के मुआवजा घोटाले में केंद्र सरकार बचाव में उतर आई है। प्राथमिकी से नेशनल हाईवे के तीन अधिकारियों के नाम निरस्त करने की मांग को लेकर केंद्र ने हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर किया। हाईकोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई करते राज्य सरकार से 6 सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ताओं से 28 जुलाई तक प्रतिउत्तर दाखिल करने को कहा है।
उधमसिंह नगर में 363 करोड़ के घोटाले में एनएचएआई के तीन अफसरों के खिलाफ इसी साल दस मार्च को मुकदमा दर्ज किया गया है। इन अफसरों ने खुद को बेकसूर मानते हुए प्राथमिकी निरस्त कारने को याचिका दायर की है।
कुमाऊं आयुक्त डी सैंथिल पांडियन की जांच रिपोर्ट में इस मामले में 363 करोड़ की अनियमितता का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के आधार पर दस मार्च को एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रताप शाह द्वारा आठ से दस गुना मुआवजा लेने वाले भू स्वामी, कृषि भूमि को अकृषि भूमि के लिए 143 की कार्रवाई करने वाले एसडीएम, उनके पेशकार, तहसीलदार, लेखपाल, राजस्व कानूनगो, चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी कानूनगो, परियोजना निदेशक एनएचएआइ रुद्रपुर, नजीबाबाद तथा क्षेत्रीय अधिकारी एनएचएआइ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
राज्य सरकार ने इस मामले में एक रिटायर्ड समेत आधा दर्जन पीसीएस अफसरों को निलंबित कर दिया था। सरकार ने मामले की सीबीआइ जांच की संस्तुति केंद्र को कर दी। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा राज्य सरकार को पत्र भेजकर सीबीआइ जांच से केंद्र के अफसरों के मनोबल पर असर पडऩे का उल्लेख किया था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुरानी बद्री-केदार समिति को बहाल करने के दिए निर्देश
बद्री केदार मंदिर समिति के मामले में आज त्रिवेंद्र सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। जिसमें सरकार द्वारा समिति को भंग करने के फैसले को उच्च न्यायलय ने आज खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब हरीश सरकार में बनी मंदिर समिति ही आगे काम करती रहेगी। मालूम हो कि मामले की सुनवाई एकल खंडपीठ के जस्टिस सुधांशु धुलिया कर रहे थे।
बता दें कि नई सरकार बनने के बाद एक अप्रैल को त्रिवेंद्र सरकार द्वारा बद्री केदार समिति के पदाधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया था। जिसके बाद बद्री केदार मंदिर समिति के सदस्य दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायलय ने बद्री केदार समिति के नए गठन पर रोक लगा दी थी।
उच्च न्यायलय के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि त्रिवेंद्र सरकार द्वारा बनाई गई अधिवक्ताओं की सेना पस्त हो गई है । अब देखने होगा त्रिवेंद्र सरकार डबल बैंच में इस मामले को लेकर कब तक जाती है।
उत्तराखंड के एक चौथाई शहरों मे नही है सीवर लाइनें
उत्तराखंड के एक चौथाई शहरों में सीवर लाइनें और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नही हैं। इस बात से ये साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वच्छता पर जहां केंद्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरा ज़ोर दे रहे हैं वहीं राज्य की बीजेपी सरकार कितना संजीदा है। मंगलवार को देहरादून में एख समीक्षा बैठक के दौरान ये बात निकलकर सामने आई कि प्रदेश के कुल 92 नगरो में से केवल 26 में ही सीवर की व्यवस्था है। न केवल ये बल्कि आने वाले दिनों में इस चुनौती को खत्म करना भी सरकार के लिये टेढ़ी खीर होगा। उसका कारण है कि सभी नगरों में सीवरेज प्रणाली और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए 4229 करोड़ रूपये की ज़रूरत है। कर्जों में ढूबी राज्य सरकार के लिये ये रकम जुटाना कोई आसान काम नही होगा।
वहीं पानी की व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों की बात करे तो इस साल कुल 316 बस्तियों में पीने के पानी की समस्या आई। जिसमें 151 टैंकरो से पानी मुहैया कराया गया। पानी का संकट निहार रहे प्रदेश के सामने पानी से जुड़ी काफी समस्यायें हैं:
- प्रदेश में सभी पेयजल स्रोतो के नये सर्वे और मैपिंग के कार्य में तेजी लाना।
- जल स्रोतो के रख रखाव के बारे में जागरूकता की कमी
- छोटे-छोटे जलाशयों को बनाकर ग्राउण्ड वाॅटर रिचार्ज युनिट की कमी
- जल संस्थान को पानी की टंकियो की नियमित सफाई।
वहीं करीब 40 हजार गांवों में से आधी बस्तियों तक ही पूरी पानी की व्यवस्था हो पाई है। करीब 17 हजार बस्तियों में आंशिक रूप ये व्यवस्थाऐं हो पाई हैं। बाकी बस्तियों में नई योजनाएं शुरू करने के लिए करीब 3402 करोड़ रूपये की जरूरत पडेगी।
उत्तराकंड गंगा और कई छोटी बड़ी नदियों का उदगम स्रोत्र है। लेकिन इसके बावजूद अगर राज्य पानी से जुड़ी किल्लतों का सामना कर रह ैह तो इसे राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी ही कहेंगे।
योग दिवस पर राज्य भर में होगा “वाॅक फाॅर योगा”
21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग कार्यक्रम केवल देहरादून में ही नहीं बल्कि राज्य के हर जिले और जगह जगह पर आयोजित होंगे।योग दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल जो विश्व सत्पर पर अधिक प्रचारित नहीं है, उन जगहों पर योगा कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएगें। इसके साथ ही
- गोविन्द घाट, त्रिवेणी घाट, हेमकुण्ड साहिब, मंदिर परिसरों, धार्मिक स्थलों आदि पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जायगे।
- ‘‘वाॅक फाॅर योगा’’ आयोजित किया जायेगा जिसमें, मंत्री व अधिकारियों की भागीदारी होगी।
- 15 जून से योग सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा।
- नागरिकों द्वारा 21 जून को योग संकल्प लिया जायेगा जिसके अन्र्तगत शपथ लेने वाला अपने जीवन में रोज योगा करने का प्रण लेगा।
- जेलों तथा अनाथालयों में भी योग कार्यक्रम आयोजित करवाए जायेंगे।
21 जून योग दिवस की तैयारियों की जानकारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमें योग दिवस पर तथा भविष्य में योगा को फैशन में लाना होगा।”
सीएमओ को कारण बताओ नोटिस
नैनीताल हाई कोर्ट ने लड़की को भगाने के एक मामले में सीएमओ ऊधमसिंह नगर को दुबारा मेडिकल कराने के आदेश करते हुए मेडिकल प्रमाण पत्र में आयु का साफ उल्लेख करने को कहा है। साथ ही मेडिकल कराने वाली चिकित्सक सेफाली मंडल को कारण बताओ नोटिस थमाने के आदेश सीएमओ को दिए हैं। जिसमें यह साफ होना चाहिए कि मेडिकल परीक्षण के बाद जारी प्रमाण पत्र में आयु का उल्लेख क्यों नहीं किया गया।
पहली जून को ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में पीडि़ता के पिता ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। जिसमें आरोपी बलदेव सिंह, सुरजीत सिंह, छिन्दा व जसवंत सिंह द्वारा उसकी बेटी का अपहरण किया गया। मामला दर्ज होने के बाद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
जिला कोर्ट से जमानत प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद आरोपी बलदेव द्वारा जमानत के लिए हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ द्वारा पीडि़ता की आयु के बारे में जानकारी ली तो पिता व बेटी द्वारा अलग-अलग आयु बताई गई। इस पर पीठ ने मेडिकल प्रमाण पत्र देखा तो उसमें उम्र का उल्लेख ही नहीं था। जिसके बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
रिवाल्वर सहित लाखों की चोरी
घर का ताला तोड़कर चोरों ने काशीपुर के प्रापर्टी डीलर के यहां रिवाल्वर व नकदी सहित लाखों रुपये का सामान साफ कर दिया। पता लगने पर मोहल्ले में हड़कंप मच गया।
मोहल्ला लक्ष्मीपुरपट्टी स्थित, मधुवन नगर निवासी संजीव शर्मा प्रापर्टी डीलिंग का काम करते हैं। बेटा आयुष भारद्वाज ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है। उसका देहरादून में पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में बीएससी में एडमिशन के लिए साक्षात्कार था। इसलिए वह परिवार सहित घर का ताला लगाकर 23 मई को देहरादून गए थे।

देहरादून में भी उनका फ्लैट है। जहां पर बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। रविवार रात चोरों ने घर के मुख्य दरवाजे का ताला तोड़ा। इसके बाद जीना की तरफ रसोईघर में लगे जंगले की जाली उखाड़कर घर के ग्राउंड फ्लोर में प्रवेश किया। वहां उन्होंने दो कमरे खंगाले।
प्रथम तल पर चोरों ने पहले कमरे का दरवाजा तोड़ा। इसके बाद तिजोरी का ताला तोड़कर उसमें रखी 32 एमएम की लाइसेंसी रिवाल्वर, करीब तीन लाख के जेवरात व 80 हजार की नकदी पर हाथ साफ कर दिया।
आसपास के लोगों ने जब मकान का ताला टूटा देखा तो इसकी सूचना मकान मालिक को दे दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल की जानकारी ली। साथ ही दीवार पर लगे चोरों के फिंगर प्रिंट भी ले लिए हैं।




























































