ऋषिकेष में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। हत्या के आरोप में फरार चल रहे आरोपी को ऋषिकेष पुलिस ने धर दबोचा है । पिछले महीने ऋषिकेश में एक कबाड़ी की चाकू मारकर हत्या कर दी गयी थी। घटना के बाद से ही आरोपी फरार चल रहा था,काफी छान बीन के बाद आरोपी अजित जुयाल पुलिस के हट्टे चढ़ा बताया जा रहा है की अजित पर पहले भी चोरी के कई मामले दर्ज है। एसपी रूरल सरिता डोभाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि आरोपी चोरी का काम करता था जिसका सामान वो हेतराम के साथ मिलकर बेचता था। इसी को लेकर दोनों में विवाद हुवा ओर आरोपी ने हेतराम की चाकू मारकर हत्या कर दी गई , फिलहाल आरोपी कीगिरफ्तार हो चूका है ओर उसे जल्द ही कोर्ट में पेश किया जायेगा ।
पीएम मोदी से बर्लिन टूर में मिली प्रियंका चोपड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों चार देखों की यात्रा पर हैं। अपनी इसी यात्रा के दौरान पीएम मोदी जर्मनी पहुंचे हैं और यहां उनकी मुलाकात बॉलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा से हुई है। प्रियंका चोपड़ा दिनों अपनी फिल्म ‘बेवॉच’ के प्रमोशन के लिए बर्लिन पहुंची हुई हैं। ऐसे में जैसे ही प्रियंका चोपड़ा को देश के प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिला वह उनके मिलने पहुंच गईं। प्रियंका चोपड़ा ने इसे एक शानदार संयोग कहा और इस मुलाकात के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है। प्रियंका ने यह फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘खूबसूरत इत्तेफाक कि मैं भी उसी समय बर्लिन में हूं जब प्रधानमंत्री मोदी यहां आए हुए हैं। शुक्रिया पीएम मोदी सर कि आपने अपने बेहद व्यस्त समय में से मुझसे मिलने का समय निकाला’।
बता दें कि पीएम मोदी इन दिनों 6 दिनों की विदेश यात्रा पर हैं। इस दौरान वह जर्मनी, स्पेन, रूस और फ्रांस की यात्रा करेंगे। पीएम मोदी के साथ इस यात्रा में वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर शामिल हैं। पीएम की इस यात्रा के पीछे भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की मंशा है।
प्रियंका चोपड़ा पिछले कुछ समय से बहुत कम समय के लिए भारत आई हैं। पिछले लगभग डेढ़ साल से प्रियंका न्यूयॉर्क में रह रही थीं। वह वहां अपनी अमेरिकन टीवी सीरीज ‘क्वांटिको’ की शूटिंग में बिजी थीं। इसके अलावा प्रियंका की पहली हॉलीवुड फिल्म ‘बेवॉच’ अमेरिका में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म भारत में 2 जून को रिलीज होने वाली है। सोमवार को मुंबई में इस फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा विक्टोरिया लीड्स के किरदार में नजर आई हैं।
सेंसर की कांट-छांट से नहीं बच पाई हनुमान जी की फिल्म
एनिमेशन फिल्म ‘हनुमान दि दमदार’ को रिलिज़ होने में महज कुछ दिन बाकी रह गए हैं। लेकिन आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि इस फिल्म में भी सेंसर ने कांट-छांट की है और इसे यूए सर्टिफिकेट मिला है।
रुचि नारायण की माइथोलॉजिकल ड्रामा एनिमेशन फिल्म ‘हनुमान दि दमदार’ 2 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म को लेकर सेंसर से जुड़ी एक खबर है जो आपको शॉक कर देगी। दरअसल, सेंसर बोर्ड ने हनुमान जी की इस फिल्म में कांट-छांट कर दी है। फिल्म में हनुमान के कैरेक्टर को सलमान ने आवाज दी है। बताया जा रहा है कि, सेंसर बोर्ड को हनुमान के डायलॉग्स पर आपत्ति है। सीबीएफसी के चेयरमैन पहलाज निहलानी का कहना है कि आमतौर पर एनिमेशन फिल्म वो भी माइथोलॉजीकल थीम पर हो तो सेंसर बोर्ड आसानी से फिल्म को पास कर देता है। लेकिन हनुमान के कुछ डायलॉग्स को सुनकर लगा कि इससे बच्चों के रिलिजियस सेंटीमेंट्स को इफेक्ट हो सकता है। चूंकि हमें सिनेमा में रिलिजियस कंटेंट को लेकर सचेत रहना होता है। तो यह कारण है हनुमान जी की फिल्म में कांट-छांट करने का।
आपको बता दें कि, ‘हनुमान दि दमदार’ को सेंसर ने यूए सर्टिफिकेट दिया है। रुचि नारायण की इस फिल्म में सलमान के साथ फिल्म के कैरेक्टर्स को रवीना टंडन, जावेद अख्तर, मकरंद देशपांडे, कुणाल खेमू, चंकी पांडे और विनय पाठक ने आवाज दी है।
टिहरी में खुलेगा राज्य का पहला ”आपदा काॅल सेंटर”
आपदा के दौरान अब प्रशासन एक कॉल पर प्रभावित क्षेत्र में मदद भेज सकेगा। इसके लिए प्रदेश में टिहरी जिले में पहली बार अत्याधुनिक कॉल सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। इस केंद्र में सभी गांवों की भागोलिक जानकारी के साथ ही संबंधित ब्लाक में अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या, ग्राम प्रधान के फोन नंबर के अलावा गांव के प्रमुख लोगों के मोबाइल नंबर का डाटा रखा जाएगा।
यूं तो सभी जिलों में आपदा कंट्रोल रूम सक्रिय हैं, लेकिन इनके लिए सबसे बड़ी समस्या भोगोलिक जटिलता के बीच सही स्थान का पता लगाना है। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील टिहरी जिले में वर्तमान में 58 गांवों को आपदा प्रभावित घोषित किया गया है। इनमें सर्वाधिक 32 गांव घनसाली क्षेत्र में हैं, जबकि प्रतापनगर और धनोल्टी में छह-छह, नरेंद्रनगर में पांच, देवप्रयाग में चार, कंडीसौड़ में तीन, नैनबाग और टिहरी में एक-एक गांव शामिल है। 45 क्षेत्र भूस्खलन संभावित और 48 बाढ़ संभावित हैं।
टिहरी की जिलाधिकारी सोनिका ने बताया कि आपदा कंट्रोल रुम में ही कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी 1862 गांवों की आबादी से लेकर एसडीएम, तहसील कर्मचारी, व्यापारी, स्कूल, प्रधान और ग्राम प्रहरी का डाटा और फोन नंबर कॉल सेंटर में उपलब्ध रहेगा।
कॉल सेंटर में प्रत्येक गांव की भौगोलिक स्थिति भी दर्ज की जाएगी। किसी भी हादसे के दौरान कॉल सेंटर में उस गांव का पूरा डाटा निकाला जाएगा। इससे आपदा के वक्त तत्काल राहत भेजने में मदद मिलेगी। इस दौरान व्यापारियों और निकटतम स्कूल के शिक्षकों का सहयोग लिया जा सकेगा।
इतना ही नहीं सड़क क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी वैकल्पिक रास्तों से मदद भेजी जाएगी। डीएम के अनुसार इन दिनों कॉल सेंटर के लिए साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। संभवत अगले सप्ताह तक कॉल सेंटर काम करना शुरू कर देगा।
हेलीकाॅप्टर न मिलने से भड़के महाराज ने लगाई सीएम से शिकायत
अपने कार्यक्रमों में हेलीकाॅप्टर सेवाओं के न मिल पाने या पायलेट के मनमाने रवैये से सूबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज काफी भड़के हुए हैं। इसके चलते उन्होंने बकायदा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उड्डयन विभाग के खिलाफ शिकायत की है। 29 मई को की गई महाराज की इस शिकायत के मुताबिक:
- 10 मई को चमोली में लाटू देवता मंदिर के कपाट खुलने के कार्यक्रम में महाराज को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था। देहरादून से हेलीकाॅप्टर से गये मंत्री को वापस आना पाड़ा क्योंकि हैलीकाॅप्टर लैंड नहीं किया। कारण बताया गया हैलीपैड का दलदली ज़मीन पर बना होना।
- 23 मई को भविष्य बद्री पहुंचने के लिये पायलेट रैकी करने के नाम पर मंत्री जी को जोशीमठ छोड़कर देहरादून लौट गया।
महाराज ने अपनी शिकायत में कहा है कि मंत्री होने के कारण उनके कार्यक्रमों की जानकारी पहले से ही सभी संबंधित विभागों को दे दी जाती है। इनमें नागरिक उड्डयन विभाग भी शामिल है। और इन सभी जगहों पर पहले भी हैलीकाॅप्टर लैंड किये गए हैं। ऐसे में विभाग के इस रवैये पर मंत्री ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।

गौरतलब है कि सरकारी कामों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिये राज्य के मंत्री समय समय पर हेलीकाॅप्टर की सेवाऐं लेते रहे हैं। लेकिन ये भी विडंबना ही कही जायेगी कि पहाड़ों की राजनीति करने वाले नेताओं को अब पहाड़ों पर चढ़ने के लिये हैलीकाॅप्टर के अलावा कोई और रास्ता नही भाता। मंत्रियों को मिली सुविधाओं के दुरस्त होने की बात पर शायद ही कोई विवाद हो लेकिन ये भी सही है कि अगर मंत्री और अधिकारी सिर्फ देहरादून से उड़कर फीता काट कर वापस आ जायेंगे तो जमीनी हकीकतों से वो कैसे रूबरू होंगे?
लालच में फंसी महिला, लुटाये गहने
लालच बुरी चीज है। यह तो आपने सुना ही होगा, इसका उदाहरण रामनगर में भी देखने को मिला। एक महिला दो हजार की गड्डी के लालच में आ गई। उसने इसके बदले अपने सोने के जेवर दे दिए, लेकिन वह गड्डी कागज निकले। महिला ने पुलिस से शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मोहल्ला भवानीगंज निवासी ममता अपनी बेटी प्राची के साथ कपड़े खरीदने के लिए बाजार आई थी। यहां उन्हें दो महिलाएं मिली। उन्होंने ममता से कहा कि उन्हें पटियाला जाना है। उनके पास दो हजार रुपये के नोटों की गड्डी है। उन्हें भूख लगी है और खाना खाने के लिए खुले पैसे नहीं है।
महिलाओं के आग्रह करने पर ममता ने उन्हें खाना खिला दिया और खुद पैसे दिए। महिलाओं ने उसे नोटों की गड्डी देते हुए उनके एवज में कान में पहने सोने के कुंडल और चैन मांग ली। लालच में आकर महिला ने सोने के जेवर उतारकर उसे दे दिए। उनके जाने पर महिला ने गड्डी खोली तो वे कागज के टुकड़े थे।
ठगी का शिकार हुई महिला कोतवाली पहुंची। पुलिस ने महिला को साथ लेकर बसों में दोनों महिलाओ की तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। इसके अलावा पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली, लेकिन उनका पता नहीं चल पाया।
भ्रष्टाचार की गंदगी में स्वच्छ भारत मिशन
स्वच्छता के मिशन पर भ्रष्टाचार की गंदगी पसरी है। जिम्मेदार लोग ही मिशन को पलीता लगा रहे हैं। मिशन के नाम पर महज खानापूर्ति कर अपनी जेब भर रहे हैं, यह सब देखना है तो ग्राम बाबरखेड़ा, काशीपुर चले आइए। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तो बना दिए गए, लेकिन वह किसी काम के नहीं हैं। इस वजह से आज भी लोग खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं।
केंद्र सरकार ने देश में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वच्छ भारत मिशन चला रखा है। लोग खुले में शौच न करें, इसके लिए शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। गांव बाबरखेड़ा में 11 सौ परिवार हैं। ग्राम प्रधान ने वर्ष 2015-16 में गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 500 शौचालय निर्माण कराने की सूची स्वजल परियोजना को सौंपी। परियोजना से शौचालय तो बनाए गए, मगर शौचालय की हालत देखकर वह कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। हकीकत यह है कि मौके पर शौचालयों का हाल बुरा है। शौचालय आधे-अधूरे बने हैं। शौचालयों के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालयों की गुणवत्ता खराब है और मानक के हिसाब से नहीं बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रोत्साहन राशि उन्हें दी होती तो वह अपने हिसाब से अच्छा शौचालय बनाते। आरोप लगाया कि शौचालय के नाम पर धांधली की गई है। इस मामले की जांच कराई जाए तो निश्चित तौर पर कई लोग जांच में फंस सकते हैं।
ट्रंचिंग ग्रउंग पर छिडा विवाद
प्रस्तावित ट्रंजिग ग्राउंड,रुद्रपुर पर कूड़ा डालने की सुगबुगाहट पर लोग एकत्र हो गए। उन्होंने नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी कर हंगामा काटा। साथ ही सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी।
ब्लॉक के पीछे एएनझा इंटर कालेज की भूमि पर प्रस्तावित ट्रंचिंग ग्राउंड का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह किच्छा मार्ग पर लोगों का जीना मुहाल है। यही हाल प्रशासन मॉडल कालोनी, प्रीत विहार, लोक विहार आदि क्षेत्रों की जनता का भी होगा। साथ ही क्षेत्र में महामारी का भी खतरा पैदा हो जाएगा।
स्थानीय लोगों को प्रस्तावित स्थल पर हलचल के साथ ही कूड़ा फेंके जाने की सूचना मिली तो आनन-फानन उनके फोन घनघनाने शुरू हो गए। सभी एकत्र होकर मौके पर पहुंचे। वहां पर नजूल संघर्ष समिति के एक पदाधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वह प्रस्तावित स्थल देखने आए थे। इस दौरान लोगों ने वहां पर जमकर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। युवा नेता तजेंद्र विर्क ने कहा कि ट्रंजिग ग्राउंड पर किसी भी सूरत में बनने नहीं दिया जाएगा। कहा कि चारों तरफ आबादी के साथ ही स्कूल है।ट्रंजिग ग्राउंड, बनने से उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
राज्य में फल-सब्जी पर मौसम की मार, करोड़ों की फसल को नुकसान
उत्तराखंड में मौसम की मार इस मर्तबा भी कम नहीं है, खासकर औद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। उद्यान महकमे ने अप्रेल में ही अतिवृष्टि, आंधी-तूफान व ओलावृष्टि से हुई क्षति का आकलन कराया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।
आठ जिलों में 33 से 60 फीसद तक फसलें चौपट हो गईं, जबकि बाकी में 33 फीसद से कम। नुकसान 126 करोड़ रुपये का आंका गया है। विभाग के मुताबिक इस बारे में शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। साथ ही मई में हुए नुकसान के संबंध में सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है।

प्री-मानसून सीजन में राज्य में थंडर स्ट्रॉम (गरज-चमक के साथ बारिश, आंधी-तूफान व ओलावृष्टि) अधिक बनते हैं। इस मर्तबा भी अप्रेल में इनकी अच्छी खासी संख्या रही, जिससे औद्यानिकी फसलों विशेषकर सेब समेत अन्य फलों के अलावा सब्जियों व मसालों को भारी नुकसान पहुंचा है। उद्यान निदेशक डॉ.बीएस नेगी के मुताबिक अप्रेल में हुई क्षति का सभी जिलों से ब्योरा मांगा गया। बात सामने आई कि इसमें 13,755 हेक्टेयर क्षेत्र को क्षति पहुंची है।
इसमें केवल 33 फीसद से अधिक प्रभावित क्षेत्र वाले जिलों में क्षति का अनुमानित मूल्य 126 करोड़ रुपये आंका गया है। सबसे अधिक नुकसान उत्तरकाशी जिले में हुआ है। उन्होंने बताया कि शासन से बजट मिलने पर किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
यह हैं नियमः
पूर्व में औद्यानिकी फसल क्षति का मुआवजा किसानों को तभी मिलता था, जब क्षति 50 फीसद से अधिक हो। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद इसके नियमों में शिथिलता बरती गई और क्षति का न्यूनतम मानक 33 फीसद कर दिया गया, इसके आधार पर ही उद्यान महकमे ने अप्रेल की क्षति का आकलन कर शासन को भेजा है।
क्षेत्रीय भाषाओं में यात्रियों को मिलेगी जानकारियां
चारधाम यात्रा में भाषा का बैरियर इस समय हैल्थ डिर्पाटमेंट के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुआ है। इस परेशानी से पार पाने के लिये स्वास्थ विभाग क्षेत्रीय भाषाओं मं भी पर्यटकों को जानकारियां मुहैया करायेगा। इस बारे में जानकारी देते हुए गढ़वाल कमिश्नर विनोद शर्मा,जो कि चारधाम यात्रा के नोडल आॅफिसर हैं उन्होंने बताया कि “सभी स्वास्थ संबंधी और जरुरी सूचनाएं अंग्रेजी और दूसरे क्षेत्रीय भाषाओं में ट्रांसलेट की जाऐंगी।” उन्होंने कहा कि “मैं अधिकारियों से कहूंगा कि सभी दिशानिर्देश और जरुरी सूचनाओं को अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करके बताया जाए। हम सोशल मीडिया के जरिए भी सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।”
चाररधाम यात्रा के दौरान अलग-अलग राज्यों से आने वालों यात्रियों के साथ बातचीत करना राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिए परेशानी की सबब बनते जा रहा है। यह परेशानी सबसे ज्यादा दक्षिण के राज्यों के साथ आ रही है।विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी यात्रियों को यह निर्देश दिया गया है,कि यात्रा के दौरान लगाए गए सभी मेडिकल फिटनेस पर लोग अपना हेल्थ चेकअप कराएं। चेकअप के साथ सभी यात्रियों को ऊचांई वाले स्थान पर जाते समय लेने वाले प्रिकाशन के बारे में भी बताया जा रहा है।
उत्तराखंड हैल्थ डायरेक्टर जनरल डा.डी.एस रावत ने बताया कि “केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले यात्रियों(यहां पहुंचने के लिए ऊंची ट्रेकिंग की जरुरत पड़ती है) का रुटीन चैकअप किया जा रहा। हालांकि बहुत से लोग जो साउथ के राज्यों से आ रहें उन्हें हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी भी समझने में दिक्कत आ रही। ज्यादा दिक्कत तब हो रही जब हम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में पूछ रहें।”
स्वास्थ विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि “हम यह प्लान कर रहे कि जब भी हमें जरुरत हो तो अपने स्टाफ से मदद लें (जो साउथ स्टेट के रहने वाले हैं)”। यात्रियों की सहूलियत के लिए केदारनाथ के रास्ते में कुल 12 मेडिकल रिलीफ पोस्ट के जरिए मेडिकल चेकअप और दूसरी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा यमुनोत्री के रास्ते में कुल 6 फर्स्टएड मेडिकल रिस्पांस पोस्ट में डाक्टर,फार्मासिस्ट,टेक्निशियन और पैरामेडिकल की सुविधांए यात्रियों को दी जा रही हैं।
इस साल चारधाम यात्रा की शुरुआत 28 अप्रैल से हुई और अब तक लगभग 5.5 लाख लोगों ने यह यात्रा कर ली है। इसके अलावा यात्रा के दौरान अब तक कुल 29 लोगों की मौत भी हो चुकी है, जिसमें ज्यादातर जानें दिल का दौरा पड़ने से गई हैं।





























































