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क्यों नहीं पहना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह में गाउन?

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उत्तराखंड के मुक्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को एक युनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए गाउन पहने से मना कर दिया। यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज के 15 वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि “हमें अपने पूर्वजों, प्राचीन ज्ञान, संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। हमें अपनी जड़ों पर विचार करना चाहिए।” मुख्यमंत्री ने गाउन पहने पर सफाी देते हुए कहा कि “दीक्षांत समारोहों के अवसर पर पहने जाने के लिए ऐसा परिधान विकसित किया जाए जिसमें भारतीयता की झलक मिले।”  गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में गाउन पहनने से विनम्रतापूर्वक मना कर दिया ।

कार्यक्रम को उत्तराखंड के राज्यपाल डाॅ. कृष्णकांत पाल, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ.धनसिंह रावत, यूनिवर्सिटी के चांसलर डाॅ.एस.जे. चोपड़ा, कुलपति डाॅ. श्रीहरि होवाड़, अध्यक्ष श्री उत्पल घोष सहित अन्य अतिथि उपस्थित थे। हांलाकि मुख्यमंत्री के अलावा बाकी सभी अतिथियों ने गाउन पहना और कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

योगी की हठ,”जब तक पुलिस नही ले जाएगी तब तक नही उठूंगा अनशन से

ऋषिकेश एम्स में पिछले सात दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती ने अनशन को फिलहाल जारी रखने की बात कही है, आपको बता दे कि अविमुक्तेश्वरा नंद ने जोशीमठ में पूर्णागिरि मंदिर की विधिवत पूजा अर्चना और मंदिर में नहीं जाने देने को लेकर अनशन किया था। जिसके बाद उन्हें पुलिस द्वारा एम्स में भर्ती करवा दिया था।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जोशीमठ पुलिस द्वारा उन्हें जबरदस्ती एम्स में लाया गया है लेकिन अब वो तब तक अनशन में रहेंगे जब तक जोशीमठ पुलिस उन्हें यहां से वापस नही ले जाती । 

वन विभाग अौर पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

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पिछले कई दिनों से वन्यजीव तस्कर देहरादून, राजाजी नेशनल पार्क व अन्य क्षेत्रों के जंगलों में सक्रिय होकर वन्य जीव जंतुओं का शिकार कर रहे हैं एवं उनकी खालों का व्यापार कर रहे है । सूचना पर एसएसपी देहरादून ने थानाध्यक्ष क्लेमनटाऊन के नेतृत्व में क्लेमनटाऊन क्षेत्र से सटे जंगलों व आस-पास के जगलों के वन्य जीव तस्करों एवं अपराधियों के सम्बन्ध में वन्य जीव जंतुओं के तस्करों द्वारा किये जा रहे अवैध व्यापार के सम्बन्ध में सूचना पाने के लिये टीम का गठन किया गया ।

गठित टीम द्वारा आशारोड़ी , दूधली , मोथरोवाला एवं आसपास के जंगलों में रहने वाले गुर्जरों से वन तस्करों अपराधियों के सम्बन्ध में जानकारी एकत्रित की जा रहीं थी इसी क्रम में क्लेमनटाऊन पुलिस को सूचना प्रास हुई कि एक व्यक्ति द्वारा मोथरोवाला नौका पुल के पास खाल को बेचने के लिये जंगल से लाया जा रहा है । इस सूचना पर तुरन्त थानाध्यक्ष क्लेमनटाऊन के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा नौका पुल से पहले बड़कली रोड पर व्यक्ति को घेर घोट कर पकड़ लिया।तलाशी ली गयी तो उसके पास गुलदार की एक खाल बरामद हुई जिस सम्बन्ध में वन्य जीव जंतु संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत गिरफ्तार किया गया। व्यक्ति के विरुद्ध मु0अ0सं0- 90/77 धारा- 9/39/40/448ए / 49वी51 वन्य जीव जंतु संरक्षण अधिनियम पंजीकृत किया गया ।

गिरफ्तार व्यक्ति का नाम इब्राहिम उर्फ मिट्टी है,  बरामदगी- गुलदार की खाल लम्बाई सिर से पूंछ तक 82 इंच , पिछले दोनों पैरों की चौड़ाई 52 इंच , आगे के दोनों पैरों की चौड़ाई 47 इंच , खाल में भूरे रंग के धब्बे , पूंछ व पिछले हिस्से में घाव के निशान है। पुलिस टीम को एसएसपी ने रु2500 / – नगद ईनाम की घोषणा भी की।

उत्तराखंड में बदले मौसम के चलते तेज़ बारिश

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उत्तराखंड में मौसम लगातार रंग बदल रहा है। रविवार को सूबे में कहीं धूप तो कहीं बारिश रही। राजधानी देहरादून में सुबह से आसमान में बादल छाये रहे और सुबह आठ बजे से रिमझिम बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग की मानें तो रविवार को कहीं- कहीं विशेषकर उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग व पिथौरागढ़ जनपदों में हल्की वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

पर्वतीय इलाकों में शुक्रवार को हुई बारिश के बाद मौसम खुशनुमा हो गया है। शनिवार को आंशिक रूप से बादलों की मौजूदगी के बीच चटख धूप निखरी रही, लेकिन हवा में ठंडक के चलते गर्माहट का अहसास नहीं हुआ। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में सूरज की तपिश से अधिकतम तापमान में कुछ बढ़ोत्तरी हुई है। देहरादून में शनिवार को अधिकतम पारा 35.7 और मुक्तेश्वर में 37.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।

ऋषिकेश के पहलवान लाभांशु ने भारत को दिलाया स्वर्ण पदक

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तीर्थनगरी ऋषिकेश के उभरते हुए पहलवान लाभांशु शर्मा ने अपने कॅरियर के पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। नेपाल के काठमांडू में आयोजित हुई इंडो-नेपाल कुश्ती चैंपियनशिप में लाभांशु ने नेपाल आर्मी के पहलवान को पटखनी दी।

काठमांडू नेपाल में 7 से 10 जून तक चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। इसमें लाभांशु शर्मा ने 120 किलोग्राम भार वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व किया, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक हासिल कर चुके पहलवान लाभांशु के कॅरियर का यह पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था।

चैंपियनशिप में उनका पहला मुकाबला नेपाल के पहलवान से हुआ, जिसमे वह 8-0 से विजयी रहे। सेमीफाइनल में उन्होंने भूटान के पहलवान पर एकतरफा जीत (7-0) दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल मुकाबले में नेपाल आर्मी के पहलवान ने लाभांशु को चुनौती दी। रोमांचक रहे इस मुकाबले में लाभांशु ने (4-2) से जीत हासिल कर स्वर्ण पदक जीता।

ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है लक्ष्यः वर्ष 2015 मे,  लाभांशु को राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। नेशनल स्कूल गेम्स में उत्तराखंड को कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले लाभांशु राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती में कई पदक जीत चुके हैं।

लाभांशु का चयन जुलाई में दुबई में होने वाली एशिया यूथ चैंपियनशिप के लिए भी हो चुका है। लाभांशु का लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतना है। 13 जून को वह ऋषिकेश लौटेंगे, जिसकेबाद वह कुनाऊं गांव स्थित अपने कुश्ती के अखाड़े में युवाओं के लिए कैंप भी आयोजित करेंगे।

उत्तराखंड पुलिस करेगी सोशल मीडिया की निगरानी

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उत्तराखंड पुलिस अब पहाड़ी राज्य के कॉलेजों में अध्ययन करने के लिए बाहर से आए छात्रों का ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया खातों की निगरानी करेंगे। देहरादून में अध्ययन कर रहे एक कश्मीरी युवा डेनिश अहमद ने तीन दिन पहले जम्मू और कश्मीर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है जिसके बाद पुलिस ने यह कदम उठाने का फैसला लिया है।

अहमद पर हिज्बुल मुजाहिदीन समूह का सदस्य होने का संदेह है, हालांकि आतंकवादी संगठन, गिरफ्तारी के तुरंत बाद, एक वक्तव्य जारी किया, जिसमें उन्होंने खुद को इस मसले से दूर किया है। अहमद डून पीजी कॉलेज में पढ़ रहा थे।

पुलिस महानिदेशक एम डी गणपति ने कहा, कि “यह मामला उत्तराखंड से नहीं जुड़ा है लेकिन एक सावधानीपूर्वक उपाय के रूप में हम छात्रों से बाहर की गतिविधियों की नज़र रकेंगे और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी करेंगे।”

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया सबसे शक्तिशाली माध्यम था, जिसके माध्यम से छात्रों को संदेहास्पद तत्वों के संपर्क में मिला, जैसा कि अहमद के मामले में हुआ है और इसलिए उन्होंने इस कदम को लेने का फैसला किया। अहमद अपने कॉलेज से 26 मई को अपने सेमेस्टर-एंड परीक्षा के बीच गायब हो गया था। दो दिनों के बाद, यानि की 28 मई को, वह दक्षिण-कश्मीर के रथसुना गांव में आत्म-स्टाइल वाले हिजबुल कमांडर सबसर भट्ट के अंतिम संस्कार में देखा गया, जहां उसकी एक ग्रेनेड चलानेवाले फोटो खिंची गई। उसकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वाइरल हुई, जिसके बाद वह खुफिया अधिकारियों के रडार पर आया।

उत्तर प्रदेश, पंजाब और जम्मू और कश्मीर के कई छात्र राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। जम्मू और कश्मीर के 250 से अधिक छात्र उत्तराखंड में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे हैं।
गणपति ने कहा कि वर्तमान में पुलिस विभाग बाहरी छात्रों के डेटाबेस का रख-रखाव करता है। गणपति ने कहा, “उत्तर प्रदेश को छोड़कर हमारे पास अन्य राज्यों के छात्रों का डेटाबेस है।उन्होंने कहा कि छात्रों की एक रिपोर्ट सत्यापन विभाग से छात्रों के गृह राज्य में पुलिस विभाग को भेजी जाती है, लेकिन प्रतिक्रिया आम तौर पर समय पर नहीं होती है। “

दानिश अहमद के मामले में भी यहीं हुआ, देहरादून पुलिस ने कहा कि उन्होंने 2015 में जम्मू-कश्मीर पुलिस को एक रिपोर्ट भेजी थी और छात्र के सत्यापन की मांग की थी। हालांकि, दो साल बाद भी पुलिस विभाग ने सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुआ है।

गर्भवती डाॅक्टर ने एम्स के टर्मिनेशन के खिलाफ एनसीडब्लू से लगाई गुहार

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उत्तराखंड की एक डॉक्टर ने राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) से संपर्क किया है और कहा है कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) ऋषिकेश ने किसी भी कारण का हवाला ना देते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं, वो भी तब जब उन्होंने मैटरनिटी लीव के लिए बकायदा अप्लाई किया था।

डॉ निहारिका नैथानी धामी जो एम्स ऋषिकेश में दंत चिकित्सा विभाग में सीनियर रेजीडेंट की तरह काम कर रहीं थी, उन्होंने 9 जून को एनसीडब्ल्यू के पास एम्स के 5 अधिकारीयों सहित निर्देशक डॉ रवि कांत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जिसमें उन्होंने मुद्दा बताया है, ‘मेरी सेवाओं को एक सीनियर रेजीडेंट के रूप में समाप्त करना, जब मैं मैटरनिटी लीव पर गयी।’

धामी, जो 35 हफ्ते की गर्भवती हैं, उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उनके टर्मिनेशन लेटर से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी। धामी ने बताया, ‘मेरा टर्मिनेशन लैटर देने से पहले मुझे मेरे काम में कोई गलती नहीं बताई गई और मेरा लेटर भी 12 मई से बनाया गया जबकि मैने 27 मई तक कार्य किया था।”

धामी ने लिखा है कि “मेरे करियर का भविष्य बेरहमी से कम कर दिया गया है। यह मुझे भावनात्मक और मानसिक रूप से बहुत परेशान कर रहा है। मैं अपने वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य और अपने अजन्में बच्चे को किसी भी तनाव से बचाने के लिए न्याय मांग रही हूं जो जुलाई के पहले सप्ताह में पैदा होने वाला है। कृपया मुझे न्याय देने में मेरी मदद करें और दावा करें कि किसी भी औरत को दोबारा इस तरह की चोट ना दी जाए”।

दंत चिकित्सा में एक मास्टर डिग्री, कंजरवेटिव और एंडोडाँटिक्स में (एमडीएस) करने के बाद धामी ने 3 अप्रैल को एम्स में ज्वाइन किया। धामी बताती है कि, ‘मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन करते समय मैं उचित चैनल के माध्यम से 29 मई को मैटरनिटी लीव पर चली गया।” धामी ने कहा, “2 जून को, मुझे अपनी सेवाओं के लिए टर्मिनेशन लैटर मिला, टर्मिनेशन लैटर से पहले इस संबंध में मेरी प्रशासन से कोई भी बातचीत नहीं हुई। दो महीने तक वहां काम करते समय मुझे किसी तरह की कोई चेतावनी भी नहीं मिली।”

कई प्रयासों के बावजूद निर्देशक को उनके संस्करण के लिए संपर्क नहीं किया जा सका,  एम्स के विभिन्न अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एम्स में उप निदेशक (प्रशासन) अंशुमन गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और “सोमवार तक इस पर टिप्पणी करने में सक्षम होगें।”

इस बीच, एनसीडब्ल्यू के सदस्य रेखा शर्मा ने कहा कि महिला पैनल को शिकायत मिली है और इस मामले की जांच के बाद ही मामले में कोई उचित कार्रवाई की जाएगी। शर्मा ने कहा, ‘हम (एनसीडब्ल्यू) ने पहले ही एम्स के अधिकारियों को एक नोटिस जारी कर दिया है और शिकायत के बारे में पूछताछ के लिए उन्हें शीघ्र ही बुला रहे हैं। हम डॉक्टर (धामी) को भी फोन करेंगे।’

धामी से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि वह अभी हल्द्वानी में हैं और अभी इस मामले पर अौर कुछ टिप्पणी नहीं करना चाहती।

क्यों आजादी के बाद भी विकास की बाट जोह रहा गांव

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हल्द्वानी। ये बात सुनने में थोड़ी सी अजीब लग सकती है कि जहां हमारे देश का बड़ा हिस्सा इस समय बारिश का इंतजार कर रहा है, वहीं कई गांव बारिश के नाम से ही डर जाते हैं। उत्तराखण्ड के हल्द्वानी शहर से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा नकायल गांव भी इन्हीं गांवो में से एक है।

इस गांव के ग्रामीणों ने सड़क और पुल बनाने की मांग को लेकर सरकार पर गांव की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, अब यहां के ग्रामीण अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर धरने पर बैठे हैं।

यहां बरसात लाती है मुसिबत
बरसात की काली रात में जब-जब बारिश की तेज बौछारों के साथ बिजली कड़कने की आवाज सुनाई देती है तो नकायल गांव के भयभीत ग्रामीण अपनी सलामती के लिए भगवान से दुआएं मांगने के लिए मजबूर हो जाते हैं। भारी बरसात के कारण हल्द्वानी तक जाने वाले संपर्क मार्ग का टूट जाना आम बात हो गई है। जिससे गांव के लोगों के लिए हफ़्तों तक खाद्य सामग्री और जरूरी सामग्री का अकाल पढ़ जाता है। नकायल गांव के लोग गांव के सड़क और सूखी नदी पर पुल बनाने की मांग को लेकर स्थानीय विधायक, अफसरों से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री तक मिल चुके हैं लेकिन कोई भी उनकी फ़रियाद नहीं सुन रहा। ऐसे में वे जाएं तो जाएं कहां!

सरकार से लगा चुकें हैं गुहार: ग्रामीणों के मुताबिक पिछले 67 सालों से लगातार संघर्ष करने के लिए हम मजबूर है। पहाड़ों के दूरदराज़ सीमान्त इलाके की तरह जहां आज भी अखबार सुबह की बजाय शाम को पहुंचता हो, उस गांव के विकास की उम्मीद करना कितना मुश्किल है, इसका अंदाज़ा लगाना आसान नहीं है। 1952 से लेकर आज तक यहां के बाशिंदों का एक ही सपना रहा है की हल्द्वानी से नकायल गांव को जोड़ने वाली सड़क और उस पर बहने वाली सुखी नदी में पुल बनाया जाए लेकिन सपने हकीकत में नहीं बदल पाए।

आजादी के बाद भी नहीं बदली इस गांव की तस्वीर:1953 से गांव की कई पीढ़ियां सपने देख-देख गुजर गईं लेकिन आज तक ना ही सड़क का निर्माण हुआ है और ना ही सुखी नदी में पुल का निर्माण हो पाया है। स्थानीय लोगों की मानें तो पहाड़ों में हल्की बरसात से सूखी नदी अपना तांडव मचाना शुरू कर देती है। ऐसे में यहां के लोगों का संपर्क शहर से टूट जाता है। यही नहीं नदी के उफान की वजह से लोग जहां के तहां फंस जाते हैं। स्कूल के बच्चों को तो बरसात के दिनों में तीन-तीन माह स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है।

बरसात में नहीं जा पाते स्कूल:बरसात में करीब दो माह के लिए बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं और इससे उनकी पढाई भी प्रभावित होती है, इसके लिए गांव के लोगों ने सरकार को जिम्मेदार मानते हुए गांव के लोगों ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि यदि हमारा भविष्य खराब होता है और उन्हे किसी बेहतर शिक्षम संस्थान में प्रवेश नहीं मिलता है तो उन्हे इच्छा मृतु दी जाए, क्योकि पढाई के बिना वैसे ही उनका जीवन खराब हो रहा है।

एक पुल भी नहीं बनवा पाई यहां सरकार: हल्द्वानी शहर से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर बसा नकायल गांव आज भी मूलभूत चीजों के लिए तरस रहा है। इस गांव के पचास फीसदी लोग भारत माता की रक्षा के लिए या तो सरहदों पर तैनात हैं या फिर सेना से रिटायर्ड हो गए हैं। बावजूद इसके गांव की बदहाल हालत देखने के बाद भी लोगों की उम्मीद अभीतक खत्म नहीं हुई है। ऐसा नहीं की गांव में कोई मंत्री या अधिकारी नहीं पंहुचा हो और सड़क और पुल का शिलान्यास ना किया गया हो बावजूद इस के आज भी गांव की तस्वीर 1952 की तरह जस की तस बनी हुई है।

अधिकारी भी मानते है की नकायल गांव के ग्रामीणों की समस्या गंभीर है, क्योंकि बरसात के दिनों में किसी भी गांव का जिला मुख्यालय या आस-पास के नजदीकी शहर से संपर्क कटना किसी भयावह हालातों से कम नहीं है।

बता दें कि नकायल गांव कोई ऐसा पहला गांव नहीं है जो कई दशकों से सड़क और पुल के लिए तरस रहा हो। उत्तराखण्ड के सैकड़ों गांव ऐसे हैं जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं लेकिन सरकार के पास सिवाय आश्वासनों के अलावा कुछ और नहीं है।

उत्तराखंड में भी किसान सड़कों पर

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मध्यप्रदेश के मंदसौर में किसानों के विद्रोह की आग अब लगता है उत्तराखंड में भी फैल रही है। गन्ने की फसल का बकाया भुगतान नहीं होने से आक्रोशित किसानों ने काशीपुर बाजार में जुलूस निकाला। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर बकाया का भुगतान जल्द कराने की मांग की।

भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले शनिवार को किसान रतन सिनेमा रोड स्थित पार्किंग के पास एकत्रित हुए। यहां से उन्होंने जुलूस निकालकर शासन के खिलाफ नारेबाजी की। जुलूस बाजार, रामनगर रोड होते हुए एसडीएम आवास पहुंचे। जहां पर उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम दयानंद सरस्वती को सौंपा। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में काशीपुर की चीनी मिल बंद हो गई है।

गन्ना किसानों का चीनी मिल पर करीब 30 करोड़ रुपये बकाया है। मिल बंद होने के बाद भी अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। मिल बंद होने से हजारों गरीब मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। किसान गन्ने की खेती करना बंद कर दिया है। उन्होंने बकाया राशि का जल्द भुगतान करने की मांग की।

उत्तराखंड में मुसीबतों के पंख लगाकर आई हैली सर्विस

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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिये हेलीकाॅप्टर सेवाऐं एक बार फिर विवादों में आ गई हैं। डीजीसीए ने राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग से राज्य के ज्यादातर हैलीपैडों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। डीजीसीए ने इस रिपोर्ट के आने तक चारधाम में मौजूद हैलीपैडों के साथ सहस्त्रधारा हैली पैड से उड़ानों पर रोक लगा दी थी। हांलाकि राज्य सरकार और उड्डयन विभाग से बातचीत के बाद ये रोक 16 जून तक हटा दी गई है। इस दौरान उड्डयन विभाग को अपनी रिपोर्ट डीजीसीए को सौंपनी है। गौरतलब है कि शनिवार सुबह बद्रीनाथ में टेकआॅफ करते समय हेलीकाॅप्टर अनियंत्रित हो गया जिसके चलते पंखे की चमेट में आने से एक इंजीनियर की मौत हो गई।

इस मामले में उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के इंजीनियर इन चीफ सितैया ने बताया कि “महानिदेशक नागर विमानन, भारत सरकार के द्वारा चारधाम यात्रा के लिये प्रयोग में लिये जा रहे हेलीपैडों पर सुरक्षित परिचालन के लिए सुझाव दिए गए थे। इन सुझावों को 31 मई 2017 तक लागू करना था। और इसके बाद एक्नश टेकन रिपोर्ट भी देनी थी। जिसके लिये 16 जून तक का समय दिया गया है। इसके चलते राज्य के अंतर्गत समस्त हेलीपैडों से सामान्य रूप से हेलीसेवा जारी है।”

उत्तराखंड में हेलीकाॅप्टर सर्विस शुरू की गई थी पर्यटकों और आम लोगों की सुविधा के लिये। लेकिन निज़ाम बदलते गये हैं पर हेली सर्विस किसी न किसी विवाद में ज़रूर घिरी रही है। हरीश रावत सरकार के दौरान सरकारी हेलीकाॅप्टरों का नाजायज इस्तेमाल हो या नई सरकार में हेली टिकटों की कालाबाज़ारी से लेकर अब हैलीपैडों की गुणवत्ता पर सवाल। इन सब हालातों को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि राज्य में हेलीकाॅप्टर सुविधा के नहीं मुसीबतों के पंख लगा कर आया है।