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बच्चों को कमरे में बंद कर लूट ले गए सामान

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थाना डोईवाला सिद्रपुरम हर्रावाला में सुनील कुमार डोढियाल जो सी.आई,एस.एफ में एसिस्टेंट कमांडेंन्ट के पद पर कार्यरत है। सोमवार दिन में सुनील कुमार की पत्नी तरुणा अपने रिश्तेदार के घर चली गयी थी। घर पर अकेले दोनों बच्चे थे। घर पर रात लगभग 2.30 बजे 5-6 बदमाशों ने घर में घुसकर सुनील कुमार के दोनों बच्चों को घर के एक कमरे में बदं कर घर से लैपटाप, मौबाईल, कैश, ज्वैलरी लूट के ले गये।

सूचना मिलने पर पुष्पक ज्योति पुलिस उपमहानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र ने तत्काल मौके में पहुंचकर जायजा लिया। परिजनों से बातचीत कर पूरी जानकारी ली। साथ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून भी मौजूद थी।

पुष्पक ज्योति पुलिस उपमहानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र द्वारा बताया गया कि घटना के शीघ्र अनावरण करने के लिये विशेष टीम गाठित कर घटना का खुलासा करने के निर्देश दिये गये है।

तो ये दीवार बतायेगी उत्तराखंड के रणबांकुरों की कहानियां

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राज्य की पहली शौर्य दीवार देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में स्थापित कर दी गई है। पर्यटन व सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज दीवार का विधिवत लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि पयर्टन विभाग भी राज्य के प्रमुख पयर्टक स्थलों पर इस तरह की दीवारें स्थापित करवाएगा।

केंद्र सरकार के विद्या वीरता अभियान के तहत यह शौर्य दीवार बनाई गई है। रविवार को बारिश के बीच पयर्टन मंत्री सतपाल महाराज ने शौर्य दीवार का लोकार्पण करते हुए कहा कि शौर्य दीवार देश के महान वीरों के जीवन, वीरता और बलिदानों की जानकारी युवाओं और आमजन तक पहुंचाने में कारगर रहेंगी, पयर्टन विभाग भी इस तरह के प्रयास करेगा। ग्राफिक एरा ग्रुप के मुख्य संरक्षक आरसी घनशाला ने कहा कि यह नई परंपरा की शुरूआत है, जिसे सभी नमन करेंगे।

कुलपति डॉ. एलएमएस पालनी ने बताया कि ग्राफिक एरा में लगी दीवार में दो विक्टोरिया क्रास विजेताओं और 21 परमवीर चक्र विजेताओं के फोटोग्राफ को उनके जीवन वृत्त के साथ प्रदर्शित किया गया है। इस मौके पर रिटायर मेजर ओपी सोनी, रिटायर ब्रिगेडियर हर्षपति थपलियाल और ब्रिगेडियर वीएन चतुर्वेदी को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. संजय जसोला, चांसलर डॉ. आरसी जोशी, महानिदेशक डॉ. वीके तिवारी, एडवाइजर डॉ एके अवस्थी, कुलसचिव एस सी शर्मा, निदेशक (सूचना) डॉ. सुभाष गुप्ता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस रावत, वीके चंद्रा समेत अन्य मौजूद रहे।

आतंकियों से मुठभेड़ में उत्तराखंड का लाल शहीद

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देहरादून के 37 वर्ष के शहीद जीत बहादुर सिंह थापा 4/1 गोरखा राइफल्स में कुपवाड़ा जिले के नोगाम सेक्टर में तैनात थे। 7 जून शाम को सेक्टर में हुई आतंकी मुठभेड़ के दौरान ग्रेनेड के छर्रे लग गए थे, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे। नायक जीत बहादुर को तुरंत श्रीनगर के मिलिट्री अस्पताल लाया गया व फिर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के अस्तपाल में उनका उपचार चल जहां करीब चार दिन जीवन और मौत की जंग से जूझते हुए उन्होंने रविवार शाम को अंतिम सांस ली।

देश की हिफाजत का प्रण लेकर सेना में भर्ती हुए उत्तराखंड के एक और लाल ने अपना वचन और फर्ज निभाते हुए शहादत दी। इस घटना की सूचना के बाद देहरादून में रहने वाले शहीद के परिजनों के बीच शोक की लहर सी बह गई। हालांकि अपने बेटे के बलिदान से उन्हें गौरव की अनुभूति भी हो रही है, लेकिन उसके न रहनें पर गम भी है।

शहीद के पार्थिव शरीर को सोमवार शाम दून लाकर गढ़ी कैंट स्थित मिलिट्री अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है। यहां से पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह अंतिम दर्शन के लिए उनके बंजारावाला स्थित आवास पर लाया जाएगा। इसके बाद शहीद जीत बहादुर सिंह थापा का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ हरिद्वार में किया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार ने जीत बहादुर की शहादत को नमन किया है और उनके परिजनों को सांत्वना दी है।

अगर शादी में शराब नहीं पिलायेंगे तो सरकार से इनाम पायेंगे

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राज्य में शराबबंदी और नशा मुक्ति के लिये कदम उठाते हुए कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत ने ये ऐलान किया है कि जिस भी शादी या बरात में शराब नहीं परोसी जायेगी उसे सरकार की तरफ से 11,000 रुपये का इनाम दिया जायेगा। इसके साथ साथ जो गांव अपने यहां सौ फीसदी नशा मुक्ति पा लेंगे ऐसे गांवों को राज्य सरकार की तरफ से 1 लाख रुपये का इनाम दिया जायेगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से रोज़गार के आभाव में उत्तराखंड के युवाओं में से एक बड़ा तबका शराब और नशे का शिकार होता जा रहा है। राज्य सरकार, स्वयं सेवी संगठन और आम लोग भी इस परेशानी से लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार के इस कदम से राज्य में खासतौर पर महिलायें खासी खुश हैं। उनका कहना है कि पुरुषों के लिये ये एक बेहतर मौका है नशे को छोड़ अपने घर परिवार और गांव को संभालने का।

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईवे से शराब की दुकानों को कस्बों और गावों के अंदर बनाने के चलते पहले से ही राज्य का माहौल गरमाया हुआ है। राज्यभर में महिलओं ने इसके खिलाफ और पूर्ण नशाबंदी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वहीं राज्य सरकार ने शराब की बिक्री रोकने के लिये पहाड़ी इलाकों में शराब की दुकानों के खुलने और बंद होने के समय में फेरबदल तो किया लेकिन इसके साथ ही शराब बिक्री से होने वाली कमाई को बढ़ाने के लिये जिलों को नये टारगेट भी दे दिये।

बहरहाल सरकार की पहल तो अच्छी है लेकिन देखना होगा कि आने वाले दिनों में ये पहल किस हद तक अमली जामा पहनती है।

तो जल्द होगा त्रिवेंद्र मंत्रीमंडल का विस्तार

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त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के तीन महीने पूरे होने के बाद सत्ता के गलियारों में राज्य कैबिनेट में इजाफे की खबरें ज़ोर पकड़ रही हैं। ये अटकलें और तेज़ तब हुई जब हाल ही में मुख्यमंत्री रावत ने दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। राज्य कैबिनेट में खाली पड़ी दो सीटों के लिये राज्य में बीजेपी का कई कद्दावर नेता आस लगाये बैठे हैं।

चर्चा में चल रहे नामों में गढ़वाल से मुन्ना सिंह चौहान और हरबंस कपूर और कुमाऊं से बंसीधर भगत औऱ बिशन सिंह चुफाल के नाम आगे हैं। मौजूदा समय में त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट में  सात कैबिनेट और दो राज्य मंत्रियों के मिलाकर कुल नौ मंत्री हैं।  सात कैबिनेट मंत्रियों में से चार कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में आये बागी नेता हैं।वहीं राज्य मंत्रियों में से भी एक पहले कांग्रेस में रह चुकी हैं। ऐसे में ये तकरीबन तय माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार की स्थिति में कांग्रेस के बागियों को बैलेंस करने के लिये पार्टी के कुछ पुराने नेताओं को लाया जायेगा। वहीं विभागों की बात करें तो ऊर्जा, सूचना, गृह, स्वास्थ, ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के साथ साथ मुख्यमंत्री ने अपने पास कुल 40 विभाग रखे हैं। ये भी उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री इनमें से कुछ बड़े विभाग भी नये मंत्रियों को दे सकते हैं।

वहीं इस मुद्दे पर सभी नेता वेट एंड वाॅच कर रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि ” सीएम दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिले हैं पर किसी को इन मीटिंगो के मुद्दों की जानकारी नही है। इसलिये ये बाते अभी सिर्फ कयास भर ही हैं”

 

 

ऐसिड अटैक के मामलों की हो रोज़ाना सुनवाई: हाई कोर्ट

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एसिड अटैक के रुड़की के एक मामले में फैसला सुनते हुए उच्च न्यायालय ने कड़ा कदम उठाते हुए कहा है कि एसिड अटैक के मामलों को रोजाना सुना जाये और ट्रायल को 90 दिनों के अंदर खत्म किया जाये। अदालत के सामने आये मामले में आरोपी के खिलाफ सात दिन में रिपोर्ट दर्ज कर अदालत में पेश करने के निर्देश जारी किए हैं । वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद शर्मा की खंडपीठ ने इसी माह 5 जून को मामले को सुरक्षित रखा था जिसको आज सुनाया गया।

एसिड अटैक के एक पुराने मामले में रुड़की निवासी शिकायतकर्ता कुंवर सिंह ने 18 दिसंबर 2009 को रुड़की कोतवाली में तहरीर देकर कहा था कि उनकी पुत्री कविता दोपहर ट्यूशन पढ़कर घर आ रही थी । कविता के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने एक मग से उनकी बेटी के ऊपर तेजाब(एसिड) डाल दिया जिससे उसका मुंह जल गया। निचली अदालत से आरोपी बयानों के अभाव में 5 अगस्त 2010 को बरी हो गया था जिसके खिलाफ सरकार उच्च न्यायालय आई थी ।
आज न्यायालय ने

  • राज्य सरकार से एसिड अटैक के पीड़ित के लिए आपराधिक चोट मुआवजा बोर्ड बनाने को कहा है ।
  • राज्य के अन्दर सभी निजी चिकित्सकलयों को निर्देशित किया है कि वो अनिवार्य रूप से सभी पीड़ितों को त्वरित उपचार दें ।
  • कोई भी व्यापारी निजी खरीददार को एसिड ना बेचे और अगर ऐसा कोई करता है तो उसके खिलाफ एफ.आई.आर.दर्ज कराई जाए ।
  • सिस्टम की कमी के चलते एसिड अटैक की अनियंत्रित घटनाओं पर रोक के लिए राज्य के सभी एस.एस.पी.को निर्देशित किया है कि वो घटना के बाद त्वरित आई.पी.सी.की धारा 326A, 326B, 354A, 354B, 354C aur 354D में वाद दायर कर किसी गजेटिड अधिकारी के निर्देशन में जांच कर सात दिन में रिपोर्ट न्यायालय में पेश करे ।
  • एसिड अटैक के गवाह को केस के ट्रायल खत्म होने तक सरकारी सुरक्षा देने को कहा है ।
  • पीड़ित को शारीरिक रूप से अक्षम मानते हुए विकलांग कोटा देकर सरकारी नौकरी का पात्र मानने और दूसरे मुआवजे देने को कहा है ।
  • इसके अलावा पीड़ित को एफ.आई.आर.दर्ज होने के तत्काल बाद एक लाख रुपये की सहायता राशी और थर्ड व फोर्थ डिग्री के घाव वाले पीड़ित को सात हजार रुपये की धनराशि प्रतिमाह देने को भी कहा है ।

शिशु मृत्यु दर के राष्ट्रीय औसत की तुलना में राज्य में कमी: मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री रावत ने सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा का अाज शुभारम्भ किया। कोरोनेशन अस्पताल, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 12 से 24 जून तक चलने वाले सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा का  शुभारम्भ करते हुए कहा कि स्वास्थ्य के कार्यक्रमों में जनजागरूकता से ही सफलता पाई जा सकती है।
श्री रावत ने कहा कि यह सोचकर संतोष किया जा सकता है कि शिशु मृत्यु दर के अखिल भारतीय औसत 43 की तुलना में प्रदेश में 38 ही है, परंतु अन्य देशों से तुलना करें तो प्रदेश में शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है। हमें इसे न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए युद्धस्तर पर काम करना होगा। जन-स्वास्थ्य के बहुआयामी पक्ष पर विचार करना होगा। स्वच्छ पेयजल, पोष्टिक भोजन, शुद्ध वायु की उपलब्धता बहुत जरूरी है। ‘जब जाग जाओ तभी सवेरा’’ हम अब भी पूरी क्षमता से प्रयास करें तो काफी कुछ किया जा सकता है।
राज्य कार्यक्रम अधिकारी डा. सुमन आर्या ने बताया कि प्रदेश में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाले डायरिया के बचाव व नियंत्रण के लिए 12 जून से 24 जून तक सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 10 लाख 29 हजार बच्चों को ओआरएस का पैकेट दिया जाएगा जबकि डायरिया से ग्रसित बच्चों को 14 दिनों तक जिंक की गोलियां निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, द्वारा चिकित्सालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, निजी चिकित्सालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। अभियान के दौरान 2178 ओआरएस काॅर्नर बनाए जा रहे हैं व अति संवेदनशील क्षेत्रों के लिए 148 मोबाईल टीमें गठित की गई हैं जो कि मलिन बस्तियों, घुमंतु आबादियों एवं जनजातिय क्षेत्रों में जाकर काम करेगी।

घर बैठे पायें इलाज, डायल करें 555

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सुदूर गांवों के लोगों को शायद अब डॉक्टर से मदद मिलना आसान हो जाएगा। इसके लिए टिहरी जिले में 555 स्वास्थ्य सेवा शुरू की जा रही है। टोल फ्री नंबर 555 डॉयल करने पर घर बैठे ही डाॅक्टर से बातचीत की जा सकेगी। राज्य में पहली बार इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है। टिहरी की जिलाधिकारी सोनिका ने बताया कि “योजना का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित गांवों तक पहुंचना है।” उन्होंने बताया कि “इसके लिए जिला मुख्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है।कंट्रोल रूम में फोन आने पर संबंधित व्यक्ति का नाम और पता रिकार्ड में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद बीमारी के बारे में बात की जाएगी। तब मरीज की बात कांफ्रेंसिंग के जरिये जिला अस्पताल के चिकित्सक से कराई जाएगी। यदि चिकित्सक को किसी परीक्षण की आवश्यकता महसूस होगी तो मरीज को निकटतम ऐसे स्वास्थ्य केंद्र में जाने को कहा जाएगा जहां परीक्षण की सुविधा मौजूद है।”

इसके अलावा वह पास के स्वास्थ्य केंद्र से दवा भी ले सकता है। जिलाधिकारी के अनुसार कंट्रोल रूम में होने वाली प्रत्येक कॉल की रिकार्डिंग की जाएगी और वह स्वयं इसकी मानीटरिंग करेंगी। कंट्रोल रूम में सभी गांवों की जानकारी और उनके निकटतम अस्पताल का डाटा उपलब्ध है। ये सेवा 16 जून से शुरू कर दी जाएगी। योजना के लिए साफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है।

गौरतलब है कि टिहरी जिले में कुल 1862 गांवों में से करीब 1000 स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं। इतना ही नहीं जिले में डाॅक्चिटरों के कुल 260 पद हैं, जबकि तैनाती महज 60 की है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 19 पदों के सापेक्ष 12 डॉक्टर कार्यरत हैं।

 

क्यों नहीं पहना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह में गाउन?

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उत्तराखंड के मुक्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को एक युनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए गाउन पहने से मना कर दिया। यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज के 15 वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि “हमें अपने पूर्वजों, प्राचीन ज्ञान, संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। हमें अपनी जड़ों पर विचार करना चाहिए।” मुख्यमंत्री ने गाउन पहने पर सफाी देते हुए कहा कि “दीक्षांत समारोहों के अवसर पर पहने जाने के लिए ऐसा परिधान विकसित किया जाए जिसमें भारतीयता की झलक मिले।”  गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में गाउन पहनने से विनम्रतापूर्वक मना कर दिया ।

कार्यक्रम को उत्तराखंड के राज्यपाल डाॅ. कृष्णकांत पाल, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ.धनसिंह रावत, यूनिवर्सिटी के चांसलर डाॅ.एस.जे. चोपड़ा, कुलपति डाॅ. श्रीहरि होवाड़, अध्यक्ष श्री उत्पल घोष सहित अन्य अतिथि उपस्थित थे। हांलाकि मुख्यमंत्री के अलावा बाकी सभी अतिथियों ने गाउन पहना और कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

योगी की हठ,”जब तक पुलिस नही ले जाएगी तब तक नही उठूंगा अनशन से

ऋषिकेश एम्स में पिछले सात दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती ने अनशन को फिलहाल जारी रखने की बात कही है, आपको बता दे कि अविमुक्तेश्वरा नंद ने जोशीमठ में पूर्णागिरि मंदिर की विधिवत पूजा अर्चना और मंदिर में नहीं जाने देने को लेकर अनशन किया था। जिसके बाद उन्हें पुलिस द्वारा एम्स में भर्ती करवा दिया था।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जोशीमठ पुलिस द्वारा उन्हें जबरदस्ती एम्स में लाया गया है लेकिन अब वो तब तक अनशन में रहेंगे जब तक जोशीमठ पुलिस उन्हें यहां से वापस नही ले जाती ।