एसडीएम पंकज उपाध्याय ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी नंद किशोर को एक सप्ताह के अंदर इसकी रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने कहा कि मामला लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए सच्चाई जल्द से जल्द लोगों के सामने आनी चाहिए, ताकि प्लास्टिक के अंडे होने पर लोग जागरूक हो सकें। मिलावटी अंडों को देवस्थली विद्यापीठ के जांच विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार और डॉ. अभिषेक तिवारी ने लैब में तीन तरह से जांच की। पहले अंडे की झिल्ली को हल्की आग में जलाया गया, जिससे वह सिकुड़ गयी और उसमें से दुर्गन्ध आने लगी, इसके बाद अण्डे का ऑसमोसिस टेस्ट किया गया, जिसमें अंडे के अंदर पीली जर्दी को कटोरी में डाला गया, जिससे वह तरल पदार्थ की तरह फैल गया उसको गरम करने पर वह सिकुड़कर गोले जैसा बन गई।मिलावटी अंडे की सूचना पर अंडा कारोबारियों में हड़कंप मच गया। कई विक्रेताओं ने अपनी दुकान से अंडे के करेट गायब कर दिए। विक्रेताओं का कहना है कि मिलावटी अंडा साबित होने पर अंडा विक्रेताओं के व्यापार पर काफी असर पड़ेगा। देखने में असली और नकली अंडे एक जैसे दिखते हैं। देखकर इन दोनों के बीच का अंतर बता पाना बहुत मुश्किल है।
नकली अंडे पक जाने पर भी पानी में नहीं डूबते हैं। अगर आप इन्हें कई दिन तक बाहर खुले में भी छोड़ दें, तब भी इनमें ना तो मक्खियां लगेंगी और ना ही चीटियां ही इनकी ओर आकर्षित होंगी।





























































