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रुड़की देवबंद रेल मार्ग को मिली हरी झंडी

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लम्बे समय से ठंडे बस्ते में पड़े रुड़की-देवबन्द विशेष रेल मार्ग परियोजना प्रस्ताव को आखिरकार हरी झंडी मिल ही गई। गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्हा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में 27 किमी लंबी विशेष रेल मार्ग को मंजूरी दे दी गयी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस परियोजना पर फैसला लेने की मांग की थी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद देहरादून-दिल्ली रेल का सफर 2 घण्टे कम हो जाएगा। यही नहीं इस मार्ग के पूरा होने के बाद चार धाम रेल यात्रा भी आसान हो जाएगी। साथ ही चीन सीमा तक सामरिक दृष्टिकोण से पहुंच भी सुगम होगी।इस हाई लेवल बैठक में उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव एस.रामास्वामी सहित रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, वित्त सचिव और यूपी के मुख्य सचिव भी मौजूद थे।

 

मैड ने जल पुरुष को दिखाया निर्जल रिस्पना का हाल!

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देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन मेकिंग ए डिफ्फेरेंस बाय बीइंग दी डिफ्फेरेंस (मैड) संस्था ने बृहस्पतिवार को जल पुरुष के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह को रिस्पना पुल पर आयोजित संस्था की नुक्कड़ पे चर्चा में आमंत्रित किया। इस चर्चा के माध्यम से मैड ने राजेंद्र सिंह से उनके द्वारा नदियों के पुनर्जीवन पर किये काम की जानकारी एवं उनके प्रेरणा स्त्रोत को पहचान ने की कोशिश की। गौरतलब है की राजेंद्र सिंह पूरे देश में कई जगहों पर विलुप्त होती जलधाराओं में फिर जान फूंकने में कामियाब रहे हैं और इसीलिए उन्हें जल पुरुष के नाम से भी जाना जाता है।

मैड संगठन के छात्र छात्राओं ने राजेंद्र सिंह को रिस्पना, बिंदाल और सुस्वा की जर्जर हालत का विस्तृत ब्यौरा दिया। मैड ने बताया की राष्ट्रीय जलविज्ञान संसथान रुड़की द्वारा बारहमासी पहले ही चिन्हित की जा चुकी रिस्पना नदी पर आज भी बेइंतिहां अतिक्रमण जारी है और जलधारा सिकुड़ती जा रही है। मैड ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी किया अधिनियम भी सिंह से साँझा किया जिसमे स्पष्ट तौर पर रिस्पना और बिंदल को गंगा रिवर बेसिन का अहम् भाग माना गया है।

इसके जवाब में राजेंद्र सिंह ने संस्था के सदस्यों को बताया कि एक सक्रीय सरकारी तंत्र का बिना किसी दबाव के यह अपने आप ही फ़र्ज़ बनता है की वह पर्यावरण संरक्षण हेतु सभी उचित कदम उठाये। उन्होंने यह भी बताया की यह तो स्वाभाविक है कि रिस्पना, सुस्वा एवं बिंदाल ही नहीं बल्कि उत्तराखंड में जनम लेती और बहती हर जलधारा कहीं न कहीं गंगा रिवर बेसिन का ही एक भाग है।

सिंह ने मैड संस्था द्वारा समय समय पर चलाये जा रहे व्यापक अभियानों का संज्ञान लिया और उन्हें यह सुझाव दिया की वह यूँही ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ती रहे और सरकारी तंत्र को भी समय समय पर जनभावना से अवगत कराने का काम करती रहे।

मैड द्वारा आयोजित इस नुक्कड़ पे चर्चा में कई दर्जनों सदस्य एवं आम दून वासी शामिल हुए। इनमें करन कपूर, सम्मानिका रावत, चेतना, मयंक, अंशिका, अभिषेक जौनसारी, श्रेया, हिमानी, शिवांगी, विवेक, आश्रित, विजय और वैशाली ने सक्रीय भूमिका निभाई।

देहरादून में योग के प्रचार के लिए शुरु हुआ ”वाॅक फाॅर योगा”

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गुरुवार से वाक फॉर योगा कार्यक्रम से देहरादून में शुरु हो गया है। इसके अंतर्गत आज आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट द्वारा सुबह 7 बजे रेंजर्स ग्राउंड से रैली की शुरुआत हुई।  विधायक श्री गणेश जोशी और आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने झंडी दिखा कर  रैली का शुभारम्भ किया।

 यह रैली रेंजर्स ग्राउंड से शुरू होकर घंटाघर , गांधीपार्क होते हुए खेल मैदान , परेड ग्राउंड होते हुए रेंजर्स ग्राउंड में जाकर समाप्त हुई। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और योग सफ्ताह को सफल बनाने के लिए डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने लोगों का आह्वान किया कि योग का प्रचार हर घर में हो और लोग तनाव से मुक्त रहें इसलिए विभाग द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस रैली में शामिल लोगों के अपार जनसमूह ने योग से सम्बन्धित पोस्टर और बैनर लिए हुए थे.।उन्होंने वहाँ उपस्थित सैकड़ों लोगों के जनसमूह को योग करने के लिए प्रेरित किया।

 रैली के बाद रेंजर्स ग्राउंड में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट ने इस अवसर पर लोगों को योग की विधि भी बतायी और वहां उपस्थित लोगों के सामने योगासनों के प्रदर्शन किया।

 इस कार्यक्रम में आयुर्वेद विभाग से प्रतिभाग के लिए जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.के.के.सिंह, डॉ.मदनपाल सिंह, डॉ.हर्ष सिंह धामी, डॉ. स्वास्तिक जैन, डॉ. सुशील डिमरी, डॉ. नवीन जोशी, डॉ. कोठियाल, डॉ. विजय सिंह चौहान, डॉ. हरिमोहन त्रिपाठी, डॉ. सुनील डिमरी, डॉ कुसुम खाती उपस्थित थे. भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के हरीश जोहर, सीमा जोहर, मुन्नी वैष्ण , संजीव चंदना, आनंद सिंह रावत, रतन सिंह, विजेंद्र सिंह, सोहन लाल द्विवेदी आदि ने भाग लिया।

तीर्थनगरी ऋषिकेश में दो मासूमों की गला दबाकर हत्या

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श्यामपुर पुलिस चौकी के पास रहने वाली एक महिला की दो मासूम बेटियों की अज्ञात लोगों ने गला घोट कर निर्मम हत्या कर दी। इससे क्षेत्र में दहशत बनी हुई है। श्यामपुर पुलिस चौकी से कुछ ही कदम दूरी पर हुई इस वारदात से लोगों में पुलिस के प्रति भी रोष है। महिला श्रमिक सीता देवी आज सुबह आठ बजे काम पर गई थी। घर वापस आकर देखा तो कमरे में  दोनों बालिका मृत मिली । दोनों मौसूमो में एक 13 साल की ;लड़की थी और एक 4 साल की।  सूचना पाकर एसपी देहात सरिता डोभाल कोतवाली प्रभारी एसपी निहारिका भट्ट घटनास्थल पर पहुंचे।

देहरादून से फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम बुलाई गई है। पुलिस ने बताया कि महिला का पति सूरज किसी मामले में वर्तमान में सुद्धोवाला जेल में है। पुलिस इस घटना को अलग अलग बिंदुओं से जांच कर रही है।

कोतवाली प्रभारी  निहारिका भट्ट ने बताया कि ऋषिकेश में हुए इस डबल मर्डर में  दोनो लड़कियां  एक मनीषा 13 साल और रिया 4 साल की नाबालिक है । देहरादून से फोरेंसिक जांच टीम मोके पर पहुँच चुकी है,  फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता  मगर फिर भी हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

 

रिटायर्ड फौजी के प्रयासों से लोगों को मिल रहा रोजगार

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गरीबी और रोजगार को लेकर पहाड़ पलायन का दर्द झेल रहा है। लेकिन, इसी पहाड़ में ऐसे भी लोग हैं, जो पलायन करने वालों को आईना दिखा रहे हैं। इन्हीं में शामिल हैं बेरीनाग के बर्षायत के धौलकटिया गांव निवासी पूर्व सैनिक गोविंद बल्लभ पंत। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने गांव में ही फलों का बाग तैयार किया। ग्रामीणों को गांव में रोजगार के साधन मुहैया कराए और युवाओं को जैम आदि बनाने का मुफ्त प्रशिक्षण भी देते हैं। उन्हीं के प्रयासों से आज गांव के कई युवा फल उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

असम राइफल में 26 वर्ष की सेवा के बाद गोविंद अब गांव में नई इबारत लिख रहे हैं। अन्य पूर्व सैनिकों की तरह रिटायर होने के बाद किसी कस्बे या नगर में बसने के बजाय उन्होंने गांव को पलायन व विपन्नता से उबारने की ठानी। सौ नाली भूमि में उन्होंने बाग तैयार किया, जिसमें आम, लीची, अमरूद, नींबू, जामिर, कटहल, हरड़, च्यूरा, इलायची आदि के करीब 700 पेड़ अब फल देने लगे हैं।

गुजरात तक पहुंची फलों की खुशबूः पूर्व फौजी गोविंद के बगीचे के फलों की खुशबू गुजरात तक पहुंच चुकी है। अहमदाबाद गुजरात निवासी रवींद्र मजूमदार बेरीनाग आए थे और यहां उनकी भेंट गोविंद से हुई। उनके बाग को देख मजूमदार खासे प्रभावित हुए। गुजरात पहुंचकर उन्होंने गोविंद के बाग का धौलकटिया बायो डाइवर्सिटी फार्म एंड रिसर्च सेंटर के नाम से पंजीकरण कराया और केसीटी कुमाऊं चेरिटेबल ट्रस्ट से आर्थिक मदद दिलाई।

मजूमदार ने पूर्व फौजी की मेहनत को देखते हुए इसे मॉडल गार्डन बनाने का दावा किया है। बगीचे से उत्पादित फलों से उत्पाद तैयार कर उन्हें देश के अन्य राज्यों में बेचने की योजना बनाई है। इसके लिए यहां पर उपकरण और मशीने पहुंच चुकी हैं। इस वर्ष पहली बार आधा क्विंटल जामीर का आचार तैयार कर गुजरात के बाजार तक पहुंच चुका है।

ग्रामीणों को मिला रोजगारः गांव के 15 ग्रामीण स्थायी रूप से उनके बाग में बारहों महीने रोजगार पा रहे हैं। जबकि, 35 से 40 लोगों को समय-समय पर रोजगार मिलता है। पहले उन्हें मजदूरी के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही उन्हें काम मिल जाता है। इसमें तमाम मजदूरों को फल से तैयार उत्पाद बाजारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

 पूर्व सैनिक के प्रयासों से कई लोगों को रोजगार मिल रहा हैःग्राम प्रधान संगठन के अध्‍यक्ष चारु पंत का कहना है कि पूर्व सैनिक के प्रयासों से कई लोगों को रोजगार मिल रहा है। क्षेत्र के लोगों को उनके बगीचे से जैविक उत्पाद मिल रहे हैं और रोजगार भी।

 

मंडुवे की फसल बनेगी किसानों की आमदनी का ज़रिया

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कृषि विभाग की पहल और किसानों की मेहनत रंग लाई तो आने वाले दिनों में पहाड़ों में मंडुवा की फसल न केवल आर्थिकी का जरिया बनेगी बल्कि किसानों को प्रति कुंतल के हिसाब से बोनस भी मिलेगा। वर्ष 2016-17 में किसानों को तीन सौ रुपये के हिसाब से बोनस मिला था। इस बार बोनस को लेकर शासन स्तर पर मंथन चल रहा है।

सरकार की ओर से पहाड़ी क्षेत्रों में शुरु की गई मंडुवा उगाने की मुहिम आने वाले समय में कारगर साबित हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोगों ने जंगली जानवरों से परेशान होकर या फिर रोजगार की तलाश में गांवों से निकल कर खेतों को बंजर छोड़ दिया है। वहां अब मंडुवा की फसल वरदान साबित हो सकती है।

कृषि विभाग की वर्ष 2016-17 की कार्ययोजना पर गौर करें तो तब तीन सौ रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों को बोनस देकर इसका लाभ भी मिला। इस बार हालांकि मंडवे की फसल पर कितना बोनस मिलना है यह शासन स्तर पर तय होना है लेकिन विभाग ने मंडुवा का अत्यधिक उत्पादन हो और अधिक से अधिक किसान मंडुवा उगाने के लिए आगे आए इसके लिए जनपद के सभी पंद्रह ब्लॉक, न्याय पंचायतों में अपने सहायक कृषि अधिकारियों के माध्यम से गोष्ठी, जागरुकता बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कलस्टर भी बनाए जाने हैं।

वर्ष 2016-17 में मिला बोनसःकृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2016-17 में बेहतर मंडुवा उगाने पर थलीसैंण ब्लॉक के सुनार गांव की दर्शनी देवी को बोनस के रूप में 364 रुपये, इसी गांव की अषाड़ी देवी को भी 364 रुपए, खिर्सू ब्लॉक के बुडेसू गांव के रविंद्र सिंह को 280 रुपये, द्वारीखाल ब्लॉक के जवाड गांव की पुष्पा देवी को 560 रुपये तथा यमकेश्वर ब्लॉक के पटना मल्ला गांव की अनिता देवी को 112 रुपये मंडुवा उगाने के एवज में बोनस दिया गया।

जैसे ही शासन से आदेश मिलेंगे, किसानों को इसकी जानकारी देंगेः मुख्य कृषि अधिकारी पौड़ी गढ़वाल डीएस राणा का कहना है कि गत वर्ष मंडुवा उगाने पर प्रति कुंतल तीन सौ रुपये का बोनस किसानों को दिया गया है। इस बार अभी शासन स्तर पर इस संबंध में दिशा-निर्देश प्राप्त होने बाकी है। जैसे ही शासन से आदेश मिलेंगे, सहायक कृषि अधिकारियों के अलावा ब्लॉक स्तर पर भी बैठकें आयोजित कर किसानों को इसकी जानकारी मुहैया करा दी जाएगी।

 

पीएचडी छात्र के सुसाईड की धमकी की खबर पीएमओ तक पहुंची

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Feeling blue
भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो.एचसी चंदोला आदि पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर कुमाऊं विश्वविद्यालय के एक शोध छात्र ने बुधवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आत्मदाह की धमकी दी तो हड़कंप मच गया। उसने राज्यपाल, कुलपति, पीएमओ और यूजीसी को ई-मेल से धमकी दी।

आनन-फानन में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन को खाली कर भारी संख्या में पुलिस फोर्स को मौके पर तैनात कर दिया। घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाकर उसे ज्योलीकोट के पास से हिरासत में ले लिया।

मूल रूप से ओखलकांडा निवासी और भौतिक विज्ञान विभाग के शोध छात्र गिरीश चंद्र ने राज्यपाल, कुलपति, पीएमओ और यूजीसी को भेजे ई-मेल भेजकर आरोप लगाया कि भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो.एचसी चंदोला आदि पर बेवजह उत्पीड़न करने व कैरियर खत्म करने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक भवन में आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी।

आनन फानन में मामले की जानकारी पुलिस को दी गई, दूसरी ओर विवि प्रशासन ने ई-मेल मिलने के बाद विवि के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार को छोड़कर सभी गेटों में भारी संख्या में पुलिस फोर्स और विवि के सुरक्षा गार्ड तैनात करा दिए। दोपहर तक विवि प्रशासन और पुलिस शोध छात्र के विवि आने का इंतजार करती रही लेकिन शोध छात्र नहीं पहुंचा।

इस बीच पुलिस की एक टीम शोध छात्र गिरीश चंद्र के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाकर उसकी लोकेशन तलाशने में जुट गई। सर्विलांस पर मिली लोकेशन के मुताबिक छात्र हल्द्वानी से नैनीताल की ओर आ रहा था। दोपहर डेढ़ बजे के करीब तल्लीताल के थानाध्यक्ष प्रमोद पाठक ज्योलीकोट में एक बस में सवार गिरीश चंद्र को बस से उतारकर अपनी हिरासत में ले लिया।

ट्यूबलाईट फिल्म में सलमान गाऐंगे पहाड़ी गाना ”फूलदेई ”

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सलमान ख़ान की आने वाली फिल्म ट्यूबलाइट “नाच मेरी जान” गाने में उत्तराखण्ड के लोकपर्व फूलदेई को लेकर भी गीत है। फूलदेई उत्तराखंड का काफी बड़ा और लोकप्रिय त्योहार है जिसमे छोटे छोटे बच्चों की टोली सुबह ब्रह्ममहूर्त में लोगों के घरों में जाकर दरवाज़े के बाहर फूल रख कर आते है। इसके बोल हैं…फुलदेई छम्‍मा देई छम्मा देई, कदुका द‌िला सेई, ओ हो होई होई होई, मनुवा का रकम छो ई होई। ईद के मौके पर 25 जून को  सलमान की यह फ‌िल्म  दर्शकों के ल‌िए र‌िलीज होगी। इसमें उत्तराखंड की कुमाउंनी बोली का भी प्रयोग क‌िया गया है।आपको बतादें क‌ि इसके गीत को अम‌िताभ भट्टा चार्य ने ल‌िखा है। साथ ही प्रीतम के संगीत ने इसे और भी अध‌िक लुभावना बना द‌िया है। नाच मेरी जान में दो बार इस पर्व का ज‌िक्र है।

ट्यूबलाइट फ़िल्म उत्तराखंड के एक सैनिक की कहानी जो भारत चाइना की लड़ाई के ऊपर आधारित है। इस फ़िल्म में सलमान खान का नाम लक्ष्मण सिंह बिष्ट है। इस फ़िल्म में उत्तराखंड के जनजीवन की झलक देखने को मिल सकती है। असल में सलमान अपनी आगामी फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ में कुमाऊं रेजिमेंट के सिपाही भरत सिंह बिष्ट (सोहेल खान) के बड़े भाई लक्ष्मण सिंह बिष्ट के किरदार में हैं। उन्होंने बताया कि वे युद्ध में गए भाई के लौटने का इंतज़ार करने के सीन में कई-कई बार सचमुच रो पड़े थे।

लगता है इस बार देश के प्रति उत्तराखंड की वीरता और शौर्य इस फ़िल्म के जरिये लोगों तक पहुँचेगी।

नैनी झील को ”इको-सेंसिटीव ज़ोन” बनाने की कवायद तेज

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नैनीताल झील के पानी के स्तर की कमी के मद्देनजर, विशेषज्ञों ने राज्य सरकार से नैनीताल को एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने और जल निकाय के आसपास किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए कहा है।

यह प्रस्ताव राज्य सरकार के अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच एक हालिया बैठक में किए गए थे। झील के पानी का स्तर इस साल सात फुट नीचे चला गया है,जो एक मुख्य चिंता का विषय है।

3 जून को स्थानीय निवासियों के हजारों की संख्या में झील की हालत को देखते हुए मॉल रोड पर गांधी प्रतिमा से पंत मूर्ति पर एक नंगे पांव चल कर इसकी हालत को उजागर किया था।

यूनाईटेड नेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम के नेशनल एडिशनल सेक्रेटरी राकेश कुमार ने कहा कि ”वे विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत सुझावों को देखेंगे”। उन्होंने यह भी बताया कि ”यूएनडीपी अब झील के कायाकल्प में खुद को शामिल करेगा। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि बारिश का पानी बिना किसा रुकावट के झील में जाना चाहिए”।

इतिहासकार अजय रावत ने कहा कि ”नैनीताल झील से संबंधित समस्याओं के बढ़ने का मुख्य कारण है जगह-जगह अवैध निमार्ण” । उन्होंने कहा,  कि “ग्रीन बेल्ट पर अत्यधिक निर्माण किया गया है और अगर ग्रुप हाउसिंग पर अंकुश लगाया,तो 30% तक समस्या का हल हो जाएगा”। “हमने नैनीताल को एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के रूप में घोषित करने के लिए वन विभाग को आग्रह किया था, लेकिन इसका ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।”

जल निगम के महाप्रबंधक एच.के. पांडे ने कहा कि औसत बर्फबारी और वर्षा का स्तर नीचे आ गया है जो झील की वर्तमान स्थिति के लिए प्राकृतिक कारणों में से एक है।

इस बैठक का संचालन, 9 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नैनीताल दौरे के दौरान झील के संरक्षण के लिए 3 करोड़ रुपये की राशि देने के बाद किया गया था।

अपने प्रशासन के लिए झील की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जल निकाय न केवल उत्तराखंड के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण इकाई है, बल्कि विश्व के लिए भी है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग से झील की जिम्मेदारी को सिंचाई विभाग को हस्तांतरण करने की भी घोषणा की।

न्यूयार्क से साइकिल से उत्तराखंड पहुंची दो बहनें, जानिए क्यों?

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न्यूयार्क से अपनी रिसर्च करने उत्तराखंड पहुंची दो बहनों ने वह कर दिया है जो सुनकर आप दंग रह जाऐंगे। दोनो बहने दो हजार क‌िलो म‌ीटर साइक‌िल चलाकर उत्तराखंड पहुंची हैं।

आपको बता दैं कि यह दोनों बहने संस्कृत‌ि प्रेमी हैं। यहां पर उत्तराखंड की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, कृषि कार्य और धार्मिक स्थलों पर रिसर्च करने के लिए न्यूयार्क की दो बहनें एरिन (24) और कैलीन (22) इन दिनों साइकिल से उत्तराखंड भ्रमण पर हैं।

सोमवार की शाम वह महासू नगरी हनोल पहुंची। यहां दोनों ने देवता के दर्शन कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई। दो साल के लिए भारत आई दोनों बहनों ने अपनी यात्रा की शुरुआत बेंगलुरु से शुरू की। इसके बाद वह तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र होते हुए उत्तराखंड पहुंची। राजधानी देहरादून में कुछ दिन बिताने के बाद वह मसूरी, पुरोला होते हुए महासू मंदिर हनोल पहुंची।

एरिन और कैलीन ने बताया कि उन्हें उत्तराखंड का पहाड़ी स्वादिष्ट भोजन और गीत उन्हें काफी पसंद आये। हिंदी के साथ-साथ गढ़वाली भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। हनोल में ग्रामीणों से बातचीत के दौरान दोनों बहनों ने नौछमी नारायण जैसे गाने भी सुनाएं।

मंगलवार की सुबह मंदिर में दर्शन करने के बाद दोनों बहने हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गई। कहा कि वह साइकिल से भारत दर्शन पर निकली हुई हैं। अब तक वह साइकिल से 2000 किमी से भी अधिक का सफर तय कर चुकी हैं।