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10 साल की उम्र में हार्दिक ने इंग्लिश में लिखा नाॅवेल

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कहते हैं सपने देखने वालों की कभी हार नहीं होती और वो भी तब जब सपना देखने वाला उसको पूरा करने के लिए जी जान लगा दे। एक ऐसा ही सपना पूरा किया है पिथौरागढ़ के पास हुड़ेती गांव के दस साल के हार्दिक उप्रेती ने। दस साल की उम्र में बच्चों को खेलने-कूदने से ही फुरसत नहीं मिलती है, उस उम्र में हार्दिक ने अंग्रेजी भाषा में ”ए क्रिसमस मिरेकल” उपन्यास लिखकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है।

हार्दिक द्वारा लिखे इस पहले उपन्यास को इसी साल मार्च में ब्लू रोज पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है। ”ए क्रिसमस मिरेकल” उपन्यास 59 पृष्ठों का है और नौ चैप्टरों में छपा है। हार्दिक वर्तमान में बीजीएस इंटरनेशनल स्कूल दिल्ली में कक्षा छह का छात्र है। उनके पिता लोकेश उप्रेती एक मल्टीनेशनल कंपनी दिल्ली में डायरेक्टर पद पर कार्यरत हैं। माता रश्मि उप्रेती गृहणी हैं।

केवल आठ साल की उम्र में शुरू कर दिया लिखनाः हार्दिक को 8 वर्ष की उम्र में शार्ट स्टोरी लिखने का शौक हुआ। अभी तक वह 10 लघुकथा लिख चुके हैं। लिखन के साथ-साथ हार्दिक को फुटबाल खेल में विशेष रुचि है। इतिहास विषय से भी उन्हें खासा लगाव है।

यू-ट्यूब पर बनाया चैनलः हार्दिक सोशल साइट्स पर भी ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। पिता लोकेश उप्रेती से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने यू-ट्यूब पर अपना एचएनजेड गेमिंग चैनल भी लांच कर दिया है। जो लोगों को काफी पसंद आया।

 

उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र ने तोड़ा ये रिकाॅर्ड

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उत्तराखंड विधानसभा का गुरुवार शाम को खत्म हुआ बजट सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि विधान सभा का बजट सत्र 11 घंटे 25 मिनट तक चला। ये अवधि उत्तराखंड की आज तक की विधनसभाओं के इतिहास में अब तक का सबसे लंबा चला सत्र रहा। इसके साथ साथ इस सत्र में कुल 39,957.13  करोड़ के विधेयक पास किये। छह दिनों के इस सत्र में कुल 90 मिनट की ही रुकावट दर्ज हुई जो अपने आप में एक रिकाॅर्ड है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “सदन के सभी सदस्यों का इस तरह से सदन में काम करने के लिये वो धन्यवाद करते हैं।”

राज्य बनने के बाद से अब तक की चार विधानसभाओं में सबसे लंबा सत्र 11 घंटे 11 मिनट तक चला था। ये सत्र जून 11, 2002 को हुआ था। ये रिकाॅर्ड जून 15, 2017 को टूटा जब सदन ने 11 घंटे 25 मिनट तक काम किया। गुरुवार को सदन ने रात 11:50 तक काम किया जो अब तक का सबसे लंबा सेशन रहा। कुल मिलाकर सदन ने 43 घंटे 38 मिनट काम किया।

 इस सत्र में 6 बिल पेश किये गये। इनमें
  • उत्तराखंड गुड्स एंड सर्विसेस एक्ट, 2017
  • उत्तराखंड कंटेंजेन्सी एक्ट 2017
  • उत्तराखंड स्टेट एसैम्बली एक्ट, 2017
  • उत्तारखंड वैट एमेंडमेंट
  • उत्तराखंड अंडरग्राउंड वाॅटर और
  • उत्तारखंड एप्रोप्रियेशन बिल 2017 पेश किये गये।

 

“इंग्लिश विंग्लिश” सीखेंगे उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चे

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“कई बार मुझे ऐसा लगा कि अंग्रेजी भाषा में विशेषज्ञता की कमी के कारण मेरे जीवन में कुछ कमी सी है। ऐसा नहीं है कि हम हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं पर गर्व नहीं कर रहे हैं लेकिन मुझे लगता है कि छात्रों को अंग्रेजी समझने और सीखने में सक्षम होना चाहिए ताकि यदि कभी भी आवश्यकता हो वे छोटी-छोटी बातचीत कर सकें, और दूसरे प्राइवेट स्कूलों से वह अपने आप को कम ना समझे।” ये कहना है उत्रातराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का।

इसी परेशानी को दूर करने के लिये राज्य में सरकारी स्कूल के छात्र जो आमतौर पर अंग्रेजी में बातचीत और पढ़ाई नहीं करते हैं उनके लिए राज्य शिक्षा विभाग अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों को तीसरी से बारहवीं क्लास के छात्रों को पढ़ाने की योजना बना रही है। साथ ही उनकी भाषा कौशल बढ़ाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले अंग्रेजी शब्दों और फ्रेजों को पढ़ाने की योजना बना रही है।

कुछ आम अंग्रेजी शब्दों को किस तरह से लोगों के बीच में रखना है के बारे में पूछे जाने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग शुरू में 50 शब्दों की सूची तैयार करने की योजना बना रहा है। इससे छात्रों को भाषा में फ्लूऐंसी बनाने में मदद मिलेगी। नैनीताल जिले के प्रोफेसर शैलेंद्र जोशी को उन शब्दों की सूची तैयार करने के लिए कार्य दिया गया था, उन्होंने बताया कि “मूल रूप से हमारा उद्देश्य छात्रों की शब्दावली बढ़ाने का हैं, इसलिए हम इन शब्दों के उपयोग की बेहतर समझ के लिए वाक्य /वाक्यांशों की एक सूची तैयार कर रहे हैं।अभी इस योजना का रफ ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और अंतिम सूची 18 जून तक तैयार हो जाएगी। इसके बाद इसको ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा, जो इसे स्कूल के शिक्षकों के साथ साझा करेंगे ताकि जुलाई में नए सत्र शुरू होने के बाद वे छात्रों के साथ दैनिक बातचीत में ये शब्द या वाक्यों का उपयोग कर सकें।”

ये हैं वो कुछ वाक्य और शब्द जिन्हें सरकार छात्रों को सिखायेगी

  • How are you doing?
  • That’s interesting.
  • I feel much better.
  • It’s your turn.
  • It’s not difficult.
  • Tell me.
  • I can do it.
  • I am having fun.
  • Slow down.
  • you are wasting my time among others.

सरकार की इस पहल पर एमपीजी कॉलेज मसूरी के अंग्रेज़ी विभाग के एचओडी रह चुके गणेश सैली मानते हैं कि “इस तरह की कोशिशें आधी पकी दाल की तरह हैं। इससे बच्चों को कोई फ़ायदा नहीं होगा।” सैली कहते हैं कि अगर बच्चों को अंग्रेज़ी सिखानी है तो सही तरह से पूरी सिखाई जाये ताकि वो सही मायनों में उनके काम आ सके।छात्रों को इस तरह अंग्रेजी के वाक्य सिखाने को कुछ जानकार बहुत सही कदम नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह छात्रों को आधा अधूरा ग्यान देने ये क्य़ा हासिल होगा?”

खस्ताहाल व्यवस्थाओं से बदहाल होती मसूरी

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पहाड़ों की रानी कही जाने वाली मसूरी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के चलते सालों से पर्यटकों को लुभाती आ रही है। जिसके चलते न सिर्फ ये पर्लेयटन का एक केंद्र बना है बल्कि सरकार के लिये भी राजस्व का बड़ा जरिया है। लेकिन पिछले कुछ सालों से मसूरी में आने वाले पर्यटकों की संख्या तो लगातार बड़ रही है लेकिन यहां के होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों की कमाी नहीं। अगर आप छुट्टियों में या वीकेंड पर मसूरी आयें तो शहर पहुंचने से काफी पहले से ही सड़कों के किनारे गाड़ियों की लंबी कतारें आप देख सकते हैं। ये कतारें इस बात को साबित करती हैं कि शहर में भारी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं लेकिन इनकी तुलना में होटलों के कमरे नहीं बुक होते। इसका कारण बताते हुए होटल एंव रेस्टोरंट व्यावसाई संघ के अध्यक्ष संदीप साहनी कहते हैं कि मैं मानता हूं कि मसूरी सरकार के लिये राजस्व का बड़ा केंद्र है, ऐसे में सरकार को यहां के रखरकाव और सुविधाओं के विकास के लिये खास ध्यान देना चाहिये। पर्यटकों को पार्किंग की जगह न होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और बहुत से पर्यटक वापस देहरादून का रुख कर रहे हैं।”

मसूरी में लगभग आधा दर्जन कार पार्किंग हैं, जिसमें होटलों की कार पार्किंग भी हैं जिसकी क्षमता 1 हजार गाड़ियों की है वो भी यहां आ रहे गाड़ियों के रश को संभालने के लिये नाकाफी है। होटल व्यवसायी के नाखुश होने की वजह, एक तरफ कार की पार्किंग सड़कों के किनारे होती है तो दूसरी तरफ होटल के कमर खाली हैं। मसूरी आने वाले पर्यटकों में ज्यादातर लोग वापस जाना पसंद करते हैं चाहें उन्हें रास्ते में 4-5 घंटे का जाम भी क्यों ना मिले। जो लोग वापस नही जाते वो मसूरी के जहॉगह धनौल्टी, काङाताल, चंबा आदि जगहों पर चले जाते हैं जहां पार्किंग की फिलहाल इतनी दिक्कतें नही हैं।

मसूरी के मेयर मनमोहन मल्ला का कहना है कि, “मसूरी के हालात सुधारने के लिये सरकारें संजीदा नहीं हैं। मैसौनिक लॉज पर 25 करोड़ की लागत से एक पार्किंग का प्रावधान है जिसमें तक़रीबन 600-700 गाड़ियाँ आ सकती हैं लेकिन इसकी फ़ाइल पैसों की कमी के चलते रुकी है। वैसे ही लाइब्रेरी एंड पर भी एक पार्किंग बननी है पर ये फ़ाइल भी पर्यटन विभाग के पास पड़ी है।”

आज मसूरी बहुत से पर्यटकों का फेवरेट डेस्टिनेशन है जो उत्तराखंड राज्य की आर्थिक कमाई में मदद करता है। मसूरी की लोकल अर्थव्यवस्था भी यहां आने वले पर्लेयटकों पर निर्भर है लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि होटल व्यावसायी,दुकानदार और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इटली से देवभूमि आई जार्जिया ने उत्तराकाशी में रची शिव की महिमा

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पश्चिम पर पूरब की लाली छाने लगी है। उत्तरकाशी में भागीरथी के किनारे बनी दीवार पर शिव का सुंदर चित्र यहां आने वालों का ध्यान खींच रहा है। इसे बनाया है कि इटली की जार्जिया बेल्लिग्री ने। पेंटिंग की शौकीन जार्जिया चार माह से भारत भ्रमण कर रही है। जार्जिया कहती है जिंदगी में मेरा लक्ष्य घूमना और पेंटिंग करना है।

मार्च में भारत पहुंची 36 वर्षीय जार्जिया अब तक दक्षिण भारत और मुंबई की सैर कर चुकी हैं। इसी माह वह उत्तराखंड आईं। ऋषिकेश में उनकी मुलाकात मलेशिया के रहने वाले भारतीय मूल के किरन सिंह से हुई। इसके बाद वह 10 जून को किरन के साथ बाइक पर उत्तरकाशी पहुंची।

जार्जिया बताती हैं कि “उत्तरकाशी में भागीरथी के तट पर मुझे असीम शांति का एहसास होता है। यहां गंगा, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूतियां बार-बार ध्यान आकर्षित करती हैं। वह कहती हैं कि जब-जब वह भागीरथी के किनारे बनी दीवार को देखतीं तो उन्हें लगता यहां पर पेंटिंग बनानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन और गंगा आरती समिति के सदस्यों से संपर्क किया।”

समिति के अध्यक्ष उमेश बहुगुणा ने बताया कि “एक विदेशी के भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण को देख उन्होंने भी जार्जिया को प्रोत्साहित किया। इस पर जार्जिया ने दो दिन में दीवार पर शिव की पेटिंग उकेरी।”

अपने परिवार के बारे में जार्जिया ने बताया कि वे दो बहने हैं। बड़ी बहन फिल्म निर्देशक है। वेनिस यूनिवर्सिटी से ड्राइंग में स्नातक जार्जिया के लिए भारत आना भी आसान नहीं था। पिता उनकी घुमक्कड़ी की आदत को पसंद नहीं करते। जार्जिया ने बताया कि यहां से वे गंगोत्री और गोमुख की यात्रा करेंगे। इसके बाद नेपाल यात्रा का कार्यक्रम है।

 

ढेंचा बीज घोटाले में त्रिवेंद्र सिंह को मिली क्लीन चिट

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CM to interact directly with people

सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपने पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से राहत मिलती दिख रही है। शुक्रवार को विधानसभा में सरकार ने ढेंचा बीज घोटाले में जांच के लिये बनी त्रिपाठी कमीश्न की रिपोर्ट को सदन में पेश कर दिया।इस रिपोर्ट में वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को क्लीन चिट दी गई है।

गौरतलब है कि त्रिपाठी कमीश्न को 2013 में त्तकालीन कांग्रेस सरकार ने गठित किया था। 2010 में ढेंचा बीज की खरीद में धांधली की जांच करने के लिये इस कमीशन का घठन किया गया था। ये कथित धोटाला बीजेपी की सरकार में हुआ था और उस समय त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कृषि मंत्री थे। इस धोटाले में नाम उछलने के चलते मुख्यमंत्री पद के लिये नाम आने के बाद कांग्रेस ने रावत का पुर्रजोर विरोध किया था।

हांलाकि जिस तरह से ये रिपोर्ट सदन में पेश की गई उससे विपक्ष सरकार की नियत पर सावल खड़े कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रयहेश का कहना है कि “जिस तरह आनन फानन में बिना विपक्षी दल को बताये सदन के कमामकाज में परिवर्तन कर के ये रिपोर्ट पेश की गई है उससे सरकार की नीयत पर शक होना लाजमी है”

वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ” ये रिपोर्ट 2014 में तैयार हो गई थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे सदन में पेश नही किया। इससे साफ है कि सरकार की नियत में खोट था क्योंकि वो जानती थी कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल गई है।”

इस रिपोर्ट के अलावा ट्रांस्फर एक्ट बिल और लोकायुक्त बिल को भी आनन फानन में सदन में पेश कर दिया गया।

 

ऋषिकेश के पशुलोक में मैदान में लाश मिलने से हड़कंप

शुक्रवार को ऋषिकेश के पशुलोक में लाश मिलने से सनसनी फैल गयी। पशुलोक के फिल्ड में एक डेड बॉडी मिली जिसे आसपास के लोगो ने देखी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गयी। पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला ये बॉडी वही पशुलोक में रहने वाले एक शख्स की है जो पेशे से ठेकदार है।
पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दी, वही मृतक की पत्नी ने बताया की मृतक 2 दिन से लापता था। 2 दिन पहले ही घर में पत्नी से नोंक झोक हुई थी जिस के बाद वो घर से चला गया, फिर 2 दिन तक घर नहीं लौटा और शुक्रवार सुबह एक फिल्ड में उसकी लाश मिली।
वही इस पर पुलिस का कहना है की मृतक शराबी था हो सकता है शराब के नशे में उस की चोट लगी हो बाकि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से पता चलेगा।

सीएम रावत रोज़ा इफ्तार पार्टी में हुए शामिल

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत शुक्रवार को देहरादून के एक स्थानीय वेडिंग पॉइंट में आयोजित रोजा इफ्तार कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि इस पवित्र मौके पर जून के माह में बिना पानी पिए रह कर अपनी प्रार्थना करते हैं, भगवान उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि हम सब भारतवासी हैं हम सब लोग एक छत के नीचे रहते हैं। हम सबका परमात्मा एक ही है, भले ही हमारी पूजा पद्धतियां अलग-अलग हैं इसके बावजूद हम सब भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हम 125 करोड़ लोग सब भाई-भाई हैं। हमारा एक ही नारा है सबका साथ सबका विकास।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि यहां पर छोटे-छोटे बच्चों ने रोजा रखा है, यह बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं उनकी शिक्षा का ध्यान रखा जाएगा। जो आगे पढ़ना चाहते हैं। उनको सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रावत ने घोषणा की कि जो बच्चे अखिल भारतीय परीक्षाओं में शामिल होना चाहते हैं, उनको फ्री कोचिंग दी जाएगी।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, विधायक हरबंश कपूर, खजान दास सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कितना तैयार है उत्तराखंड 2013 जैसी आपदा के लिये?

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16 जून 213 उत्तराखंड के इतिहास में कभी न मिटने वाली भयावह यादें दे कर गई है। इस प्राकृतिक आपदा के 4 साल गुजरने के बाद लरकारों और राजनेताओं ने वादे और बातें तो तमाम की हैं लेकिन सवाल ये है कि प्रदेश 2013 जैसी आपदा के लिये वास्तविक तौर पर कितना तैयार है? पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह जिन्हें भारत के ‘वाॅटरमेन’ के नाम से भी जाना जाता है  कहते हैं कि उत्तराखंड 2013 की तरह एक और आपदा की ओर इशारा कर रहा है। केदार बाढ़ की चौथी वर्षगांठ की संध्या पर एक संवाददाता सम्मेलन में  मैगसेसे अवाॅर्राड विजेता सिंह ने कहा कि “मैं यह देख के परेशान हूं कि केदारनाथ त्रासदी से कोई सबक नहीं सीखा गया है। मैंने एक पखवाड़े से भी कुछ समय पहले केदारनाथ बाढ़ की भविष्यवाणी की थी, और मुझे यह चिंता है कि अनियंत्रित शहरी विकास जो बाढ़ का कारण था वह, फिर भी निरंतर जारी है, जो इसी तरह की एक और त्रासदी के लिए रास्ता बना रहा है।”

उन्होंने कहा कि “बाढ़ से 20 दिन पहले, उन्होंने इस क्षेत्र का दौरा किया और पाया कि केदारनाथ से निचले मैदानों तक सभी तरह के सुरंगों का निर्माण किया गया था, जिसके आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा हुआ था। जब यहां बारिश शुरू हुई, तो सारा मलबा नदी के पानी के साथ मिल गया जिससे इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो गई जो आपदा का कारण बना,” सिंह कहते हैं कि “मैंने यह दावा किया था कि बाढ़ आएगी, लेकिन मुझे यह बिल्कुल नहीं पता था कि यह इतनी भयावह होगी और इतने बड़े पैमाने पर जान माल के नुकसान का कारण बनेगा।”

केदारनाथ आपदा वास्तव में विकास के मॉडल पर सवाल उठाते हैं जो हमारे शहरों में चल रहे हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कोई भी विचार नहीं करते हैं। ऐसे मॉडल केवल विनाश, विस्थापन, बाढ़ और सूखे का कारण बन सकते हैं, और कुछ नहीं। भविष्य में आपदाओं को कैसे टाला जा सकता है विषय पर, सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना कि बाढ़ के मैदानों में पर्याप्त वनस्पति हो और वहां कोई निर्माण नहीं किया जा रहा हो।

“उत्तराखंड सरकार को पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच तालमेल बिठाना होगा। इसके अलावा प्लास्टिक की मात्रा को प्रतिबंधित करना होगा जो पर्यटक उनके साथ ले आ रहे हैं। प्लास्टिक जो नदियों में फेंक दी जाती है उसकी मात्रा धीरे-धीरे काफी बढ़ जाती है।” सिंह का कहना है कि प्राकृतिक आपदाऐं आगे भी आयेंगी और इन को रोक पाना किसी के लिये मुमकिन नहीं है लेकिन अगर राज्य को इनसे कम से कम नुकसान के लिये तैयार करना है तो राजनीतिक इच्छा शक्ति दिकानी होगी। केवल और केवल प्राथमिकता पर्यावरण को बचाने पर रखनी होगी। जब तक सरकार और आम लोग ये नहीं करते तब तक उत्तराखंड को आपदा के लिहाज से एक टाइम बं मानना चाहिये।

मिलना भागवत से था और बनाया सरकारी कार्यक्रम

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क्या वाकई में मुख्यमंत्री का रुद्रपुर का दौरा सरकारी था या फिर महज औपचारिकता के लिए दौरा सरकारी बनाकर निसाना कहीं और सादना था? जी हां, सूत्रों की माने तो ये चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम बनाकर सरसंघ चालक मोहन भागवत से मिलने के लिए ही अपना कार्यक्रम बनाया था, लेकिन सरकारी संसाधनों का उपयोग कर महज संघ केकार्यक्रम में ना जाने की डचन के चलते पहले कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम का समय निर्धारित किया गया और फिर अधिकारियों के साथ समिक्षा बैठक की औपचारिकता भी रखी गयी, लेकिन सभी जगह समय इतना कम दिया कि सभी के समझ आ रहा था कि सीएम का रुद्रपुर दौरा आखिर क्यो था।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जनता इंटर कालेज में करीब 20 मिनट इंतजार करना पड़ा। क्योंकि भागवत से मिलने का 2:15 का समय निर्धारित था तो कार्यकर्ता सम्मेलन से मुख्यमंत्री बिना खाना खाए ही दौड़ पड़े। जनता इंटर कालेज में उन्होंने 20 मिनट का समय अधिकारियों के साथ मंत्रणा कर गुजारा। इसके बाद करीब 25 मिनट उनकी अकेले में भागवत से वार्ता हुई। इस बीच उन्होंने प्रदेश के हालात पर भागवत से चर्चा की और दिशा-निर्देशन प्राप्त किया।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत यहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चल रहे संघ शिक्षा वर्ग में हिस्सा लेने आए हैं। वह पिछले चार दिनों से जनता इंटर कालेज में ठहरे हैं। वह किसी से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। बुधवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट को भी उनकी एक झलक पाने के लिए इंतजार करना पड़ा था। गुरुवार को सीएम का भागवत से मिलने का समय 2:15 बजे निर्धारित था। कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्यमंत्री को काफी समय लग गया। इस बीच उनकी नजर घड़ी की ओर गई तो उन्होंने भोजन करने से इंकार कर जनता इंटर कालेज की ओर रवाना हो गए। मुख्यमंत्री का काफिला इंटर कालेज के बाहर ही रुक गया। खुद मुख्यमंत्री वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के साथ अंदर चले गए। भागवत से मुलाकात को उन्हें करीब 20 मिनट का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद भागवत मिले और उनकी करीब 25 मिनट तक सीएम से बात हुई। सूत्रों की मानें तो भागवत ने मुख्यमंत्री से प्रदेश के हालात पर चर्चा की। सीएम उसके बाद लौट गए। इससे पहले उन्होंने संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की।