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रिटायर्ड फौजी के प्रयासों से लोगों को मिल रहा रोजगार

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गरीबी और रोजगार को लेकर पहाड़ पलायन का दर्द झेल रहा है। लेकिन, इसी पहाड़ में ऐसे भी लोग हैं, जो पलायन करने वालों को आईना दिखा रहे हैं। इन्हीं में शामिल हैं बेरीनाग के बर्षायत के धौलकटिया गांव निवासी पूर्व सैनिक गोविंद बल्लभ पंत। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने गांव में ही फलों का बाग तैयार किया। ग्रामीणों को गांव में रोजगार के साधन मुहैया कराए और युवाओं को जैम आदि बनाने का मुफ्त प्रशिक्षण भी देते हैं। उन्हीं के प्रयासों से आज गांव के कई युवा फल उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

असम राइफल में 26 वर्ष की सेवा के बाद गोविंद अब गांव में नई इबारत लिख रहे हैं। अन्य पूर्व सैनिकों की तरह रिटायर होने के बाद किसी कस्बे या नगर में बसने के बजाय उन्होंने गांव को पलायन व विपन्नता से उबारने की ठानी। सौ नाली भूमि में उन्होंने बाग तैयार किया, जिसमें आम, लीची, अमरूद, नींबू, जामिर, कटहल, हरड़, च्यूरा, इलायची आदि के करीब 700 पेड़ अब फल देने लगे हैं।

गुजरात तक पहुंची फलों की खुशबूः पूर्व फौजी गोविंद के बगीचे के फलों की खुशबू गुजरात तक पहुंच चुकी है। अहमदाबाद गुजरात निवासी रवींद्र मजूमदार बेरीनाग आए थे और यहां उनकी भेंट गोविंद से हुई। उनके बाग को देख मजूमदार खासे प्रभावित हुए। गुजरात पहुंचकर उन्होंने गोविंद के बाग का धौलकटिया बायो डाइवर्सिटी फार्म एंड रिसर्च सेंटर के नाम से पंजीकरण कराया और केसीटी कुमाऊं चेरिटेबल ट्रस्ट से आर्थिक मदद दिलाई।

मजूमदार ने पूर्व फौजी की मेहनत को देखते हुए इसे मॉडल गार्डन बनाने का दावा किया है। बगीचे से उत्पादित फलों से उत्पाद तैयार कर उन्हें देश के अन्य राज्यों में बेचने की योजना बनाई है। इसके लिए यहां पर उपकरण और मशीने पहुंच चुकी हैं। इस वर्ष पहली बार आधा क्विंटल जामीर का आचार तैयार कर गुजरात के बाजार तक पहुंच चुका है।

ग्रामीणों को मिला रोजगारः गांव के 15 ग्रामीण स्थायी रूप से उनके बाग में बारहों महीने रोजगार पा रहे हैं। जबकि, 35 से 40 लोगों को समय-समय पर रोजगार मिलता है। पहले उन्हें मजदूरी के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही उन्हें काम मिल जाता है। इसमें तमाम मजदूरों को फल से तैयार उत्पाद बाजारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

 पूर्व सैनिक के प्रयासों से कई लोगों को रोजगार मिल रहा हैःग्राम प्रधान संगठन के अध्‍यक्ष चारु पंत का कहना है कि पूर्व सैनिक के प्रयासों से कई लोगों को रोजगार मिल रहा है। क्षेत्र के लोगों को उनके बगीचे से जैविक उत्पाद मिल रहे हैं और रोजगार भी।

 

मंडुवे की फसल बनेगी किसानों की आमदनी का ज़रिया

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कृषि विभाग की पहल और किसानों की मेहनत रंग लाई तो आने वाले दिनों में पहाड़ों में मंडुवा की फसल न केवल आर्थिकी का जरिया बनेगी बल्कि किसानों को प्रति कुंतल के हिसाब से बोनस भी मिलेगा। वर्ष 2016-17 में किसानों को तीन सौ रुपये के हिसाब से बोनस मिला था। इस बार बोनस को लेकर शासन स्तर पर मंथन चल रहा है।

सरकार की ओर से पहाड़ी क्षेत्रों में शुरु की गई मंडुवा उगाने की मुहिम आने वाले समय में कारगर साबित हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोगों ने जंगली जानवरों से परेशान होकर या फिर रोजगार की तलाश में गांवों से निकल कर खेतों को बंजर छोड़ दिया है। वहां अब मंडुवा की फसल वरदान साबित हो सकती है।

कृषि विभाग की वर्ष 2016-17 की कार्ययोजना पर गौर करें तो तब तीन सौ रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों को बोनस देकर इसका लाभ भी मिला। इस बार हालांकि मंडवे की फसल पर कितना बोनस मिलना है यह शासन स्तर पर तय होना है लेकिन विभाग ने मंडुवा का अत्यधिक उत्पादन हो और अधिक से अधिक किसान मंडुवा उगाने के लिए आगे आए इसके लिए जनपद के सभी पंद्रह ब्लॉक, न्याय पंचायतों में अपने सहायक कृषि अधिकारियों के माध्यम से गोष्ठी, जागरुकता बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कलस्टर भी बनाए जाने हैं।

वर्ष 2016-17 में मिला बोनसःकृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2016-17 में बेहतर मंडुवा उगाने पर थलीसैंण ब्लॉक के सुनार गांव की दर्शनी देवी को बोनस के रूप में 364 रुपये, इसी गांव की अषाड़ी देवी को भी 364 रुपए, खिर्सू ब्लॉक के बुडेसू गांव के रविंद्र सिंह को 280 रुपये, द्वारीखाल ब्लॉक के जवाड गांव की पुष्पा देवी को 560 रुपये तथा यमकेश्वर ब्लॉक के पटना मल्ला गांव की अनिता देवी को 112 रुपये मंडुवा उगाने के एवज में बोनस दिया गया।

जैसे ही शासन से आदेश मिलेंगे, किसानों को इसकी जानकारी देंगेः मुख्य कृषि अधिकारी पौड़ी गढ़वाल डीएस राणा का कहना है कि गत वर्ष मंडुवा उगाने पर प्रति कुंतल तीन सौ रुपये का बोनस किसानों को दिया गया है। इस बार अभी शासन स्तर पर इस संबंध में दिशा-निर्देश प्राप्त होने बाकी है। जैसे ही शासन से आदेश मिलेंगे, सहायक कृषि अधिकारियों के अलावा ब्लॉक स्तर पर भी बैठकें आयोजित कर किसानों को इसकी जानकारी मुहैया करा दी जाएगी।

 

पीएचडी छात्र के सुसाईड की धमकी की खबर पीएमओ तक पहुंची

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Feeling blue
भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो.एचसी चंदोला आदि पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर कुमाऊं विश्वविद्यालय के एक शोध छात्र ने बुधवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आत्मदाह की धमकी दी तो हड़कंप मच गया। उसने राज्यपाल, कुलपति, पीएमओ और यूजीसी को ई-मेल से धमकी दी।

आनन-फानन में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन को खाली कर भारी संख्या में पुलिस फोर्स को मौके पर तैनात कर दिया। घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाकर उसे ज्योलीकोट के पास से हिरासत में ले लिया।

मूल रूप से ओखलकांडा निवासी और भौतिक विज्ञान विभाग के शोध छात्र गिरीश चंद्र ने राज्यपाल, कुलपति, पीएमओ और यूजीसी को भेजे ई-मेल भेजकर आरोप लगाया कि भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो.एचसी चंदोला आदि पर बेवजह उत्पीड़न करने व कैरियर खत्म करने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक भवन में आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी।

आनन फानन में मामले की जानकारी पुलिस को दी गई, दूसरी ओर विवि प्रशासन ने ई-मेल मिलने के बाद विवि के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार को छोड़कर सभी गेटों में भारी संख्या में पुलिस फोर्स और विवि के सुरक्षा गार्ड तैनात करा दिए। दोपहर तक विवि प्रशासन और पुलिस शोध छात्र के विवि आने का इंतजार करती रही लेकिन शोध छात्र नहीं पहुंचा।

इस बीच पुलिस की एक टीम शोध छात्र गिरीश चंद्र के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाकर उसकी लोकेशन तलाशने में जुट गई। सर्विलांस पर मिली लोकेशन के मुताबिक छात्र हल्द्वानी से नैनीताल की ओर आ रहा था। दोपहर डेढ़ बजे के करीब तल्लीताल के थानाध्यक्ष प्रमोद पाठक ज्योलीकोट में एक बस में सवार गिरीश चंद्र को बस से उतारकर अपनी हिरासत में ले लिया।

ट्यूबलाईट फिल्म में सलमान गाऐंगे पहाड़ी गाना ”फूलदेई ”

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सलमान ख़ान की आने वाली फिल्म ट्यूबलाइट “नाच मेरी जान” गाने में उत्तराखण्ड के लोकपर्व फूलदेई को लेकर भी गीत है। फूलदेई उत्तराखंड का काफी बड़ा और लोकप्रिय त्योहार है जिसमे छोटे छोटे बच्चों की टोली सुबह ब्रह्ममहूर्त में लोगों के घरों में जाकर दरवाज़े के बाहर फूल रख कर आते है। इसके बोल हैं…फुलदेई छम्‍मा देई छम्मा देई, कदुका द‌िला सेई, ओ हो होई होई होई, मनुवा का रकम छो ई होई। ईद के मौके पर 25 जून को  सलमान की यह फ‌िल्म  दर्शकों के ल‌िए र‌िलीज होगी। इसमें उत्तराखंड की कुमाउंनी बोली का भी प्रयोग क‌िया गया है।आपको बतादें क‌ि इसके गीत को अम‌िताभ भट्टा चार्य ने ल‌िखा है। साथ ही प्रीतम के संगीत ने इसे और भी अध‌िक लुभावना बना द‌िया है। नाच मेरी जान में दो बार इस पर्व का ज‌िक्र है।

ट्यूबलाइट फ़िल्म उत्तराखंड के एक सैनिक की कहानी जो भारत चाइना की लड़ाई के ऊपर आधारित है। इस फ़िल्म में सलमान खान का नाम लक्ष्मण सिंह बिष्ट है। इस फ़िल्म में उत्तराखंड के जनजीवन की झलक देखने को मिल सकती है। असल में सलमान अपनी आगामी फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ में कुमाऊं रेजिमेंट के सिपाही भरत सिंह बिष्ट (सोहेल खान) के बड़े भाई लक्ष्मण सिंह बिष्ट के किरदार में हैं। उन्होंने बताया कि वे युद्ध में गए भाई के लौटने का इंतज़ार करने के सीन में कई-कई बार सचमुच रो पड़े थे।

लगता है इस बार देश के प्रति उत्तराखंड की वीरता और शौर्य इस फ़िल्म के जरिये लोगों तक पहुँचेगी।

नैनी झील को ”इको-सेंसिटीव ज़ोन” बनाने की कवायद तेज

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नैनीताल झील के पानी के स्तर की कमी के मद्देनजर, विशेषज्ञों ने राज्य सरकार से नैनीताल को एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने और जल निकाय के आसपास किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए कहा है।

यह प्रस्ताव राज्य सरकार के अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच एक हालिया बैठक में किए गए थे। झील के पानी का स्तर इस साल सात फुट नीचे चला गया है,जो एक मुख्य चिंता का विषय है।

3 जून को स्थानीय निवासियों के हजारों की संख्या में झील की हालत को देखते हुए मॉल रोड पर गांधी प्रतिमा से पंत मूर्ति पर एक नंगे पांव चल कर इसकी हालत को उजागर किया था।

यूनाईटेड नेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम के नेशनल एडिशनल सेक्रेटरी राकेश कुमार ने कहा कि ”वे विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत सुझावों को देखेंगे”। उन्होंने यह भी बताया कि ”यूएनडीपी अब झील के कायाकल्प में खुद को शामिल करेगा। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि बारिश का पानी बिना किसा रुकावट के झील में जाना चाहिए”।

इतिहासकार अजय रावत ने कहा कि ”नैनीताल झील से संबंधित समस्याओं के बढ़ने का मुख्य कारण है जगह-जगह अवैध निमार्ण” । उन्होंने कहा,  कि “ग्रीन बेल्ट पर अत्यधिक निर्माण किया गया है और अगर ग्रुप हाउसिंग पर अंकुश लगाया,तो 30% तक समस्या का हल हो जाएगा”। “हमने नैनीताल को एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के रूप में घोषित करने के लिए वन विभाग को आग्रह किया था, लेकिन इसका ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।”

जल निगम के महाप्रबंधक एच.के. पांडे ने कहा कि औसत बर्फबारी और वर्षा का स्तर नीचे आ गया है जो झील की वर्तमान स्थिति के लिए प्राकृतिक कारणों में से एक है।

इस बैठक का संचालन, 9 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नैनीताल दौरे के दौरान झील के संरक्षण के लिए 3 करोड़ रुपये की राशि देने के बाद किया गया था।

अपने प्रशासन के लिए झील की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जल निकाय न केवल उत्तराखंड के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण इकाई है, बल्कि विश्व के लिए भी है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग से झील की जिम्मेदारी को सिंचाई विभाग को हस्तांतरण करने की भी घोषणा की।

न्यूयार्क से साइकिल से उत्तराखंड पहुंची दो बहनें, जानिए क्यों?

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न्यूयार्क से अपनी रिसर्च करने उत्तराखंड पहुंची दो बहनों ने वह कर दिया है जो सुनकर आप दंग रह जाऐंगे। दोनो बहने दो हजार क‌िलो म‌ीटर साइक‌िल चलाकर उत्तराखंड पहुंची हैं।

आपको बता दैं कि यह दोनों बहने संस्कृत‌ि प्रेमी हैं। यहां पर उत्तराखंड की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, कृषि कार्य और धार्मिक स्थलों पर रिसर्च करने के लिए न्यूयार्क की दो बहनें एरिन (24) और कैलीन (22) इन दिनों साइकिल से उत्तराखंड भ्रमण पर हैं।

सोमवार की शाम वह महासू नगरी हनोल पहुंची। यहां दोनों ने देवता के दर्शन कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई। दो साल के लिए भारत आई दोनों बहनों ने अपनी यात्रा की शुरुआत बेंगलुरु से शुरू की। इसके बाद वह तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र होते हुए उत्तराखंड पहुंची। राजधानी देहरादून में कुछ दिन बिताने के बाद वह मसूरी, पुरोला होते हुए महासू मंदिर हनोल पहुंची।

एरिन और कैलीन ने बताया कि उन्हें उत्तराखंड का पहाड़ी स्वादिष्ट भोजन और गीत उन्हें काफी पसंद आये। हिंदी के साथ-साथ गढ़वाली भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। हनोल में ग्रामीणों से बातचीत के दौरान दोनों बहनों ने नौछमी नारायण जैसे गाने भी सुनाएं।

मंगलवार की सुबह मंदिर में दर्शन करने के बाद दोनों बहने हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गई। कहा कि वह साइकिल से भारत दर्शन पर निकली हुई हैं। अब तक वह साइकिल से 2000 किमी से भी अधिक का सफर तय कर चुकी हैं।

चारधाम यात्रा के पौराणिक मार्गों की होगी मैपिंग

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क्या आपने कभी सोचा है कि सालों पहले जब चारधाम के लिये सड़कों का जाल और हवाई सेवाऐं नहीं थी तो श्रद्धालू कैसे ये कठिन यात्रा पूरी करते थे? उस समय में ये रास्ते इतने सुगम न हो कर हिमालय की पहाड़ियों और कंदराओं से होकर गुज़रते थे। समय के साथ और सड़कों के निर्माण के साथ साथ इन रास्तों को भी भुला दिया गया। लेकिन अब इन रास्तों की दोबारा निशानदेही, पहचान और मैंपिग की जिम्मेदारी उठाई है इंडियन नैशनल ट्रस्ट फाॅर आर्ट एंड कल्चरल हेरीटेज (इनटेक) ने।

जियोग्राफिकल इंफाॅर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) प्राॅजेक्ट के तहत ये काम होगा जिसमें उन पारंपरिक रास्तों की खोज की जायेगी जो पहले इन जगहों तक जाने के लिये इस्तेमाल किये जाते थे और जिन्हें समय के साथ भुला दिया गया है। इसके तहत अभी तक हरिद्वार औऱ केदारनाथ के बीच के ऐसे पौराणिक मार्ग की मैपिंग का काम पूरा हो चुका है। इसकी लंबाई करीब 380 किमी है। इसके बाद अब हरिद्वार और बद्रीनाथ के बीच का मार्ग की पहचान काम शुरू होगा।

संस्था के उत्तराखंड प्रभारी लोकेश ओहरी का कहना है कि ” हम उन पारंपरिक रास्तो ंकी दोबारा तलाश कर रहे हैं जिन्हें समय के साथ भुला दिया गया है। इसके बाद हमारी कोशिश रहेगी कि इन रास्तों को आज के दिन के श्रद्धालुओं के लिये खोला जा सके”।

इन रास्तों की खोज के साथ साथ इन पर पड़ने वाले छोटे धार्मिक स्थलों की भी पहचान साथ साथ की जा रही है। ओहरी बताते हैं कि “आमतौर पर धार्मिक यात्राओं पर जाने वाले लोगों के लिये रास्ते में जगह जगह पर रुक पूजा करके आगे जाने पर ही यात्रा पूर्ण मानी जाती थी। हम उन जगहों को भी पहचानने की कोशिश कर रहे हैं”।

उत्तराखंड में अगले 36 घंटे में मौसम लेगा करवट, हो सकती है बारिश

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उत्तराखंड में मौसम करवट बदलने जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले 36 घंटों में राज्य में कुछ स्थानों में ओलावृष्टि के साथ ही गरज-चमक के बीच अंधड़ और बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक यह सिलसिला गुरुवार दोपहर अथवा शाम से शुरू हो सकता है। इसे देखते हुए लोगों को सलाह दी गई है कि वे ओलावृष्टि व थंडर शॉवर के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

इस बीच बुधवार को राज्यभर में धूप रही और तापमान में भी उछाल रहा। पहाड़ और मैदान सभी जगह अधिकतम तापमान सामान्य से दो से चार डिग्री अधिक रहा। दून की ही बात करें तो यहां अधिकतम पारा 38 डिग्री सेल्सियस के पार रहा, जबकि पंतनगर में तापमान रहा 40.7 डिग्री सेल्सियस।

पहाड़ी इसाकों में मुक्तेश्वर व टिहरी में तापमान 26.2 और 27.3 डिग्री रहा। हालांकि, मौसम विभाग की मानें तो गुरुवार से बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। राज्यभर में आमतौर पर बादल रहेंगे और कुछ जगह हल्की से मध्यम वर्षा व गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक दून में गुरुवार को सुबह से आसमान साफ रहेगा। दोपहर या शाम से बादल छाने और कुछ क्षेत्रों में गर्जन वाले बादल विकसित होने अथवा हल्की वर्षा हो सकती है।

 

शूटिंग में दिक्कत की वज़ह से जाॅन ने अपनी कार के किए 2 टुकड़े

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भारत के मोस्ट फेरवेट टूरिस्ट डेस्टीनेशन मसूरी में बॉलीवुड हंक जॉन अब्राहम की ‘परमाणु’ फिल्म की शूटिंग हो रही है। यहां शूटिंग के दौरान जब संकरे रास्ते पर जॉन अब्राहम की कार चल नहीं पाई तो उसे काट कर दो टुकड़े कर दिए।

पिछले कई दिनों से देहरादून और मसूरी के आसपास के इलाकों में जॉन अब्राहम की फिल्म की शूटिंग चल रही है। जॉन अब्राहम एवं उनकी टीम ने उत्तराखण्ड में शूटिंग के दौरान अपने अनुभव बताये। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड बेहद खूबसूरत है, यहां पर फिल्मों की शूटिंग के लिए काफी संभावनाएं हैं।

फिल्म के कुछ दृश्य लंढौर कैंट, जार्ज एवरेस्ट, हरनाम सिंह मार्ग, झड़ीपानी में फिल्माए गए। फिल्‍म में मसूरी के हरनाम सिंह मार्ग पर स्थित कोठी को जॉन का घर दिखाया गया है। यहां जॉन को अपने घर से कहीं जाने का एक सीन फिल्माया जा रहा था। इसके लिए एक कार की जरूरत थी, लेकिन घर में कार जाने का रास्ता न होने के कारण एक पुरानी एंबेस्डर कार को आधा काटकर घर के पिछले हिस्से तक पहुंचाया गया।

इसके बाद शूटिंग पूरी हो पाई। शूटिंग में उत्तराखंड रोडवेज की बसों का भी इस्तेमाल किया गया है। देहरादून के एक निजी इंस्टीट्यूट के छात्र और शिक्षकों ने फिल्म में छोटे-छोटे रोल भी किए हैं।

आपको बतादें क‌ि अभी तक अजय देवगन प्रोडक्शन द्वारा निर्मित हिन्दी फिल्म ‘‘शिवाय’’, तिग्मांशु धूलिया निर्देशित राग देश, तेलगु फिल्म ‘‘ब्रहमोत्सवम’’, हिन्दी फिल्म ‘‘शुभ मंगल सावधान’’, सोनी टी.वी. पर प्रसारित सीरियल ‘‘बडे भैय्या की दुलहनिया, जी.टी.वी. पर प्रसारित धारावाहिक ‘‘पिया अलबेला’’, एम.टी.वी. पर प्रसारित होने वाला रियलिटी शो स्प्लिट्सविला सीजन  10, तथा उत्तराखण्ड क्षेत्रीय बोली की फिल्म ‘‘गोपी-भिना, भुली ए भुली, बद्री द क्लाउड आदि प्रमुख फिल्में और धारावाहिक की शूटिंग राज्य में हुई है।

 

अब उत्तराखंड के गाड़ियों में रखे जाऐंगे डस्टबिन

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उत्तराखण्ड में वाहनों में डस्टबिन की व्यवस्था अनिवार्य की जाएगी। बुधवार को विधानसभा भवन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व पर्यावरण मंत्री डाॅ.हरक सिंह रावत ने वाहनों में डस्टबिन रखे जाने की योजना का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सड़कों पर कूड़ा, कचरा फैलने पर रोक लगेगी। स्वच्छता को लेकर समाज में विशेष रूप से युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छता के आह्वान पर युवा वर्ग बड़ी संख्या में आगे आया है।