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अब गंगा तट पर अंतिम संस्कार भी होंगे इको-फ्रेंडली

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इस तरह की पहल में, गंगा के साथ ‘ग्रीन’ श्मशानों के गांवों में निर्माण की योजना बनाई गई है। (जिन्हें नाममी गांगे परियोजना के तहत ‘’गंगा ग्राम’’ के रूप में प्रचारित किया गया है)।

ये श्मशान, वह हैं जो ऋषिकेश, हरिद्वार, उत्तरकाशी और गंगोत्री नदी के गांवों में आएंगे, वह ‘इकोलाजिकल-रिस्पांसिबल क्रिमेशन’ प्रदान करेंगे। जिसमें कम लकड़ी का उपयोग होगा अन्य सुरक्षा उपायों के अलावा यह भी तय किया जाएगा कि अंतिम संस्कार प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पर्यावरण और पवित्र नदी प्रदूषित न हो।

सूत्रों ने बताया कि परंपरागत श्मशान पर एक मृत शरीर 600 किलोग्राम लकड़ी का उपभोग करते हैं, जबकि ग्रीन शमशान राशि को कम करने के लिए औऱ लकड़ी को केवल 100 किलो तक सीमित कर देगा जिससे कार्बन उत्सर्जन कम हो जाएगा।

एसी सक्सेना जो राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के तकनीकी सलाहकार हैं और इस परियोजना की देखरेख कर रहे हैं उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार, विशेष रूप से निर्मित “पायर ओवन” का उपयोग करके किया जाएगा, जो कम लकड़ी का उपयोग करेगा, लेकिन शरीर को प्रभावी ढंग से जलाने के लिए पर्याप्त गर्मी पैदा करेगा। “विशेष पायर ओवन को शरीर के सिर और कमर भागों के मुताबिक अधिकतम गर्मी के लिए डिज़ाइन किया गया है क्योंकि शरीर के अंगों को गर्मी के अधिक समय और तीव्रता की आवश्यकता होती है, इसलिए कम लकड़ी के ईंधन के साथ भी, अंतिम संस्कार ठीक से किया जा सकता है।

उत्तराखंड में,यह परियोजना परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश जो यहां सबसे बड़ा आश्रम है। इसके प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस, की देखरेख में शुरू किए जाएगा जो सभी के लिए स्वच्छ पानी, स्वच्छता और स्वच्छता प्रदान करने के लिए एक नई पहल है।

सरस्वती ने कहा, “गंगा का पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान में खतरे में है और इसके लिए ध्यान देने की जरूरत है। इसके बाद के गांवों को अपने बैंक ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) के बनाने के बाद, अगले चरण में गंगा के साथ खुले में शून्य शवों को सुनिश्चित करना है। ग्रीन क्रेमेटोरियम की पहल एक सामान्य संस्कार के बाद उसमें आने वाली सामग्री के कारण नदी प्रदूषित होने से रोकी जाएगी। “

अनुमानों के अनुसार, प्रत्येक अंतिम संस्कार के परिणामस्वरूप कई टन राख और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होते हैं। नदी के तट पर होने वाली संस्कारों के मामले में यह सब गंगा में फेंक दिया जाता है।

सरस्वती के अनुसार, परियोजना का दीर्घकालिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंगा में राख के विसर्जन को सबसे कम न्यूनतम स्तर तक लाया गया। “आगामी गंगा नदी अधिनियम में प्रावधान होने वाला है जिससे गंगा में केवल कुछ मुश्तबी राख बसा सकते हैं। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नदी अपनी पवित्रता बरकरार रखे।”

उत्तराखंड में, जहां से गंगा उत्पन्न होती है,वहां हजारों संस्कारों को प्रतिदिन विभिन्न श्मशानों में आयोजित किया जाता है, जो ज्यादातर गंगा या इसकी सहायक नदियों के किनारे होते हैं। हरिद्वार के विभिन्न घाटों में, हर महीने करीब 1200 से 1500 संस्कार किए जाते हैं। पवित्र शहर वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है और इसके लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है, कई लोगों का मानना है कि नदी के तट पर होने वाले खुले संस्कारों की संख्या बहुत बड़ी है।

हरिद्वार के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए बनेंगे चेंजिंग रुम

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पर्यटन विभाग देश-दुनिया से आने वाली  महिला यात्रियों की सहूलियत के लिए हरिद्वार के दस गंगा घाटों पर प्री-फेब्रिकेटेड चेंजिंग रूम का निर्माण कराएगा। इसके अलावा पर्यटकों व यात्रियों की सुविधा के लिए पर्यटन कार्यालय में रैन बसेरे का निर्माण भी किया जा रहा है।

जिला पर्यटन अधिकारी जसपाल सिंह चौहान ने बताया कि गंगा घाटों पर प्री-फेब्रिकेटेड महिला चेंजिंग रूम का निर्माण जिला योजना में किया जा रहा है। इनकी लागत सात लाख रुपये होगी। इसके अलावा पर्यटन विभाग कार्यालय परिसर में फोटो मैट्रिक पंजीकरण के लिए एक कक्ष का निर्माण, पर्यटकों व यात्रियों की सहूलियत के लिए आठ लाख रुपये की लागत से रैन बसेरा भी बनवा रहा है।

चेंजिंग रूम में क्या है खास:चेंजिंग रूम की फर्श कंक्रीट की होगी। साथ ही यह स्लिप प्रूफ होगा, ताकि कपड़े बदलते समय गिरने की संभावना न रहे। इसमें सैंडविच पैनल होगा और थर्मास्टाटिक टैप रहेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ेंगी सुविधाएंः पर्यटन विभाग ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान फोकस करेगा। इसके तहत रुड़की के रामनगर में केशव पार्क के सौंदर्यीकरण समेत झबरेड़ा के लाठरदेवा, सहदेवपुर बोडाहेड़ी के पीर साहब व ग्राम डाडापट्टी अंबेडकर पार्क में बेंच लगाए जाएंगे। जबकि, ग्राम चुड़ियाला और इकबालपुर में यात्री शेड का निर्माण होगा। इसके अलावा ग्राम शांतरशाह में दो और ग्राम धनौरी व सिडकुल के बेगमपुर में एक-एक यात्री शेड बनेंगे। सभी निर्माण जिला योजना से किए जाएंगे।

बाघों की मौत पर चिंताजनक आंकडे़

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यूं तो कॉर्बेट पार्क व उससे सटे इलाके बाघों की तादाद के हिसाब से सुखद अहसास कराते हैं। इसीलिए पर्यटक देश-विदेश से यहां घूमने आते हैं लेकिन पिछले छह माह में यहां हर महीने औसतन दो बाघों की मौत हो रही है। अब तक 11 बाघ मौत की नींद सो चुके हैं। इससे कॉर्बेट प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। लगातार हो रही बाघों की मौत के बाद बाघों के संरक्षण पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

रामनगर को बाघों की राजधानी कहा जाता है। इनकी अच्छी तादाद के चलते यह क्षेत्र मशहूर है। बाघों के कारण ही साल दर साल सरकार को करोड़ों राजस्व मिलता है। बाघों की सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट हर साल आता है लेकिन पिछले कुछ समय से बाघों की मौत ने रामनगर को सुर्खियों में ला दिया है। कभी आपसी संघर्ष में बाघ जान गंवा रहे हैं तो कभी संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ के सड़े-गले शव बरामद हो रहे हैं। भले ही बाघों की मौत की वजह अलग-अलग हों लेकिन बाघों का लगातार मरना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि कॉर्बेट के अधिकारी बाघों की मौत एक इत्तफाक ही मानते हैं।

सेही के हमले में बाघ की मौत की यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी कॉर्बेट में सही के हमले में बाघ मारे जा चुके हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक, जंगल में सेही अचानक बाघिन के सामने आ गई होगी या बाघिन ने उसे अपना शिकार बनाने का प्रयास किया होगा। इसी वजह से उसने खतरा भांपकर बचाव में अपने शरीर पर लगे तीरनुमा कांटे छोड़ दिए। यही कांटे बाघिन के शरीर पर जगह-जगह घुस गए जिससे घाव बनने के बाद संक्रमण हो गया। अधिक रक्तस्राव बाघिन की मौत की वजह बन गया। सेही के कांटे छह इंच से एक फीट तक होते हैं।

छह माह में कहां-कहां मरे बाघ

1 जनवरी- कालाढूंगी रेंज रामनगर वन प्रभाग।

19 जनवरी-देचौरी रेंज-रामनगर वन प्रभाग।

16 फरवरी-बैलपड़ाव रेंज रामनगर वन प्रभाग।

22 फरवरी-बैलपड़ाव रेंज-रामनगर वन प्रभाग।

16 मार्च- बैलपड़ाव रेंज- तराई पश्चिमी वन प्रभाग।

31 मार्च- सर्पदुली रेंज-कॉर्बेट टाइगर रिजर्व।

14 अपै्रल-देचौरी रेंज-रामनगर वन प्रभाग।

01 मई-बैलपड़ाव रेंज-रामनगर वन प्रभाग।

02 मई- बिजरानी रेंज- कॉर्बेट टाइगर रिजर्व।

23 मई-कालागढ़ रेंज- कॉर्बेट टाइगर रिजर्व।

17 जून-सर्पदुली रेंज-कॉर्बेट टाइगर रिजर्व।

भगवान बद्रीनाथ के शीतकालीन घर पर सरकारी उदासीनता

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उत्तराखंड में आपदा के चार साल बीत जाने के बाद नेताओं ने दावे और वादे तो बहुत किये, यात्रा में आने वाली श्रद्धालुओं की संख्या भी बड़ गई लेकिन क्या सच में नेताओं के दावों और हकीकत में मेल है? भगवान बद्री विशाल के शीतकालीन पूजा स्थल पांडुकेश्वर के योगध्यान मंदिर को जाने वाला बदहाल डेढ़ किमी रास्ता तो इन दावों की कलई खोल रहा है।

बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर भगवान के सखा उद्धव जी व कुबेर जी की उत्सव डोली पांडुकेश्वर के योगध्यान मंदिर में विराजमान होती है। पुरातत्व महत्व के इस मंदिर तक बद्रीनाथ हाईवे पर करुणा गदेरे से डेढ़ किमी लंबी सड़क थी। यह सड़क 2013 में आपदा के दौरान बह गया था। लोनिवि ने सड़क की मरम्मत के लिए 20 लाख का प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन घन की कमी का हवाला देते हुए ये मरम्मत अधर में लटक गई।

सरकारी नियमों और पेचेंदगियों में ऐसा पेच फंसा कि अब तक अधिकारी शासन को प्रस्ताव भेज रहे हैं, परंतु योजना की फाइल शासन में दब कर रह गई है। यात्री बद्रीनाथ यात्रा के दौरान योगध्यान मंदिर के दर्शन के लिए पांडुकेश्वर में रुकते हैं। लेकिन मार्ग से आवाजाही होने के चलते हर यात्री योगध्यान मंदिर नहीं जाता है।

पांडुकेश्वर में साल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कुबेर महोत्सव में आए थे और तत्काल सड़क की मरम्मत की घोषणा की थी, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन साल बाद भी इस मोटर मार्ग के बजट का प्रस्ताव शासन स्तर पर गुम है।

केदारनाथ मंदिर में दर्शनों के समय में ये हुआ है बदलाव

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बदलते मौसम और बारिश के चलते केदारनाथ मंदिर में दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में कमी आने लगी है। इसको देखते हुए मंदिर प्रशासन ने मंदिर में दकॉर्शन के समय में बदलाव कर दिया है। यात्रियों की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने आम दर्शनों के लिए समय सुबह 5 बजे के बजाय 6 बजे कर दिया है।

अब दो से ढाई हजार यात्री ही प्रतिदिन केदारनाथ मंदिर पहुंच रहे हैं। केदारनाथ धाम में अब तक करीब साढ़े तीन लाख यात्री दर्शन कर चुके हैं। शुरूआती दिनों में केदारनाथ में दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या प्रतिदिन करीब 10 हजार से अधिक रही। कुछ दिनों 15 से 16 हजार यात्री दर्शनों को केदारनाथ पहुंचे। अब मौसम को देखते हुए यात्री संख्या में कमी आ गई है। सोमवार को केवल 2680 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए।

मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि “यात्री संख्या अधिक होने पर मंदिर सुबह 5 बजे आम भक्तों के लिए खोला जाता रहा है अब यह समय बदल दिया गया है। कम यात्री के कारण अब सुबह 6 बजे केदारनाथ में आम दर्शन होंगे। अन्य विशेष पूजाएं और व्यवस्थाएं यथावत चलती रहेंगी।”

नैनीताल में पर्यटकों की कार खाई में गिरी

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दिल्ली से नैनीताल घूमने आ रहे पर्यटकों की कार खाई में जा गिरी। हादसे में बच्ची सहित चार लोग घायल हो गए। कार में चालक सहित कुल दस लोग सवार थे। एक की गंभीर हालत को देखते हुए हल्द्वानी रेफर किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, साइकिल मार्केट, चांदनी चौक, नई दिल्ली के गगन, मीना, जान्हवी व आर्यन,  चंदर नगर दिल्ली के रवि माथुर, उसकी पत्नी शुचि, अभिति रात को इनोवा में सवार होकर नैनिताल आ रहे थे।

हनुमानगढ़ी से आगे नगर से तीन किमी दूर मोड़ पर चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इस पर इनोवा करीब 20 फिट गहरी खाई में जाकर अटक गई। इस दौरान हल्द्वानी से आ रही आशा नामक महिला ने पुलिस को हादसे की सूचना दी।

सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को बीडी पांडेय अस्पताल भेजा। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एमएस दुग्ताल ने बताया कि शुचि के सिर में अधिक चोट के कारण हल्द्वानी रेफर किया गया है। रवि, मीना व अभिची को भर्ती किया गया है। शेष अन्य को मामूली उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।

अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार से जानकारी हासिल करने के लिये करे आरटीआई का इस्तेमाल: सीएम

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश के साथ परिसंपत्तियों के बंटवारे के अधिकारियों को पूरी तैयारी कर लेने की हिदायत दी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिसंपत्तियों के बारे में उत्तर प्रदेश से बात करते हुए अपने पक्ष को मजबूती के साथ रखा जाए, साथ ही जिन मामलों पर कोर्ट में कार्यवाही चल रही हैं, उन पर कोर्ट में भी अपने पक्ष को मजबूती के साथ रखा जाए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी परिसंपत्तियों की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। जिनकी जानकारी हमारे पास नहीं है और यदि उत्तर प्रदेश से हमें जानकारी नहीं मिल पाती है, तो इसके लिए सूचना का अधिकार के अंतर्गत जानकारी मांगी जाए। 

गौरतलब है कि संपत्ति बंटवारे में मुख्य मामले हैं:

  • सिंचाई विभाग के अंतर्गत 1399 भवन उत्तर प्रदेश के पास है जिनमें से उत्तर प्रदेश को मात्र 420 की जरूरत है। इनमें से 997 भवन उत्तराखण्ड शासन को दिए जाने हैं।
  • हरिद्वार, उधमसिंहनगर और चंपावत में 5842 हेक्टेयर भूमि उत्तर प्रदेश के नियंत्रण में है जिनमें से 2557.78 हेक्टेयर रिक्त भूमि पर उत्तराखंड का हक बनता है।
  • कुंभ क्षेत्र की 697.5 हेक्टेयर भूमि उत्तर प्रदेश के नियंत्रणाधीन है, यह भूमि राज्य बनने के पूर्व से ही कुंभ मेला कार्य के लिये सुरक्षित की गई थी। इसका उपयोग अन्य किसी कार्य के लिए नहीं किया जा सकता हैइसलिये यह भूमि उत्तराखंड को मिलनी चाहिए।
  • हरिद्वार की 10 में से 4 नहरों एवं उधमसिंहनगर कि 33 में से 25 नहरों का रखरखाव उत्तराखण्ड को मिलना चाहिए।
  • टीएचडीसी भारत सरकार का उपक्रम होने के कारण एवं इसका पंजीकृत कार्यालय एवं प्रोजेक्ट उत्तराखण्ड की परिधि में होने के कारण इसकी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तराखण्ड को मिलनी चाहिए।
  • 198 मेगावाॅट क्षमता वाले कालागढ़ जल विद्युत गृह पूर्ण रूप से उत्तराखंड की परिधि में स्थित है इसलिये इससे बनने वाली बिजली पर उत्तराखंड का हक है।

गौरतलब है कि राज्य बनने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच बंटवारे का मामला चलता आ रहा है। राज्य में बीजेपी औऱ कांग्रेस दोनो की ही सरकारें आ गई लेकिन इस पर कोई समाधान नहीं निकल सका। अब मुख्यमंत्री के लिये ये काम पूरा करना चुनौती भरा है क्योंकि दोनों राज्यों में बीजेपी की ही सरकार है। लेकिन संपत्ति बंटवारे के मामले में अधिकारियों की तैयारी और जानकारी पर पहले भी मुख्यमंत्री अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर चुके हैं। एसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राज्य के अधिकारी अपना होमवर्क कितना पूरा करते हैं।

किसानी छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हुए उत्तराखंडी किसान

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साल 2000 में उत्तराखंड की स्थापना के बाद पहाड़ी जिलों से 2.26 लाख से अधिक किसानों ने पलायन कर लिया है।देश के विभिन्न शहरों में जीवित रहने के लिए “मजदूरों का काम” करने पर मजबूर यह किसान किसकी वजह से इस हद तक जाने को मजबूर हुए हैं।इसकी वजह है राज्य सरकार का रूढ़िवादी रुख, जो किसानों की आवश्यकताओं को अनदेखा कर रहा है।

अखिल भारतीय किसान महासाभा (एबीकेएम) के राज्य अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया,’’ 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, 2,26,949 किसानों ने खेती छोड़ दी और अपने जन्मस्थानों से चले गए, जहां वे पीढ़ियों से रह रहे थे। प्रवासित किसानों को अपने परिवारों के अस्तित्व को बचाने के लिए विभिन्न शहरों में ‘’मैनुअल श्रमिकों’’ या दिहाड़ी मजदूरों का काम करना शुरु दिया है।परेशानियों की वजह से राज्य को छोड़कर अलग-अलग शहरों में रहने पर मजबूर हो गए हैं।उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति गंभीर है और सरकार द्वारा अज्ञानता के कारण और खराब हो रही है’’।

इसके अलावा, शर्मा ने कहा कि 11 पहाड़ी जिलों से जनगणना के आंकड़ों के अनुसार

  • अल्मोड़ा से 36,401 किसानों की संख्या सबसे अधिक है,इसके बाद
  • पौड़ी (35,654)
  • टिहरी (33,68 9)
  • पिथौरागढ़ (22, 9 36)
  • देहरादून (20,625)
  • चमोली (18,536)
  • नैनीताल 15,075)
  • उत्तरकाशी (11,710)
  • चंपावत (11,281)
  • रुद्रप्रयाग (10, 9 70) और
  • बागेश्वर (10,073)

हालांकि, दिसंबर 2016-जनवरी 2017 में एबीकेएम द्वारा किए गए सर्वेक्षण का हवाला देते हुए, शर्मा ने कहा, “पहाड़ों में केवल 20% कृषि भूमि पर खेती की जा रही है, जबकि बाकी 80% या तो बंजर हैं या कर्मशियल कामों के लिए बेचा जा रहा है।”

एबीकेएम के प्रमुख ने आरोप लगाया, “व्यापक किसानों के प्रवास के लिए प्राथमिक कारण पहाड़ी में कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियों की कमी है, जंगली जानवरों द्वारा क्षतिग्रस्त फसलों के बड़े झुंड हैं, और किसानों को पर्याप्त सब्सिडी नहीं मिलती। इसके अलावा, कठोर पहाड़ी इलाके और तेजी से अनियमित मौसम पैटर्न भी कई किसानों के दूर करने की वजह माना जाता है। “

उत्तराखंड रत्न समेत विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित वैज्ञानिक अनिल हाफिज का कहना है कि, “हालात डेटा से भी बदतर हैं, पर्यावरण संबंधी कारणों से सरकार की नीतियों से सब कुछ किसानों के खिलाफ है। सिस्टम ने हमारे किसानों को कर्ज के बोझ से दबा दिया है, जिसकी वजह से किसानों को अपने उत्पाद को कर्ज चुकाने के लिए कम कीमत पर बेचते हैं।”

पदमश्री विजेता अनिल प्रकाश जोशी ने कहा, “सरकार के पास किसानों के लिए एक संगठित नीति नहीं है। अगर हिमाचल में किसान जलवायु की स्थिति का लाभ ले सकते हैं, तो यहां ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता है? सरकार को खेती और किसानों की भलाई के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए।”

फेमिना मिस इंडिया मुकाबले में भिखरेंगे देवभूमि के रंग

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मिस इंडिया के ग्रैंड फिनाले में उत्तराखंड के रंग भी भिखरेंगे। इसमें चारधाम, बुग्याल और ऋषिकेश की झलक दिखाई देगी। फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड अनुकृति गुसाईं ने उत्तराखंड की तस्वीर लोगों तक पहुंचाने के लिये एक वीडियो बनाया है। 25 जून को मुंबई में होने वाले ग्रैंड फिनाले के दिन यह वीडियो दिखाया जाएगा।

फेमिना मिस इंडिया में इस बार हर प्रदेश की प्रतिभागी को अपने राज्य के पर्यटन ओर संस्कृति को प्रमोट करने के लिए एक वीडियो बनाना है। यह वीडियो ग्रैंड फिनाले के दिन दिखाया जाएगा।इसी कड़ी में अनुकृति ने भी एक वीडियो बनाया है। इस वीडियो में चारधाम, बुग्याल, बर्फ से ढकी पहाडि़य़ों को शामिल किया है।इसके साथ साथ राज्य के धार्मिक महत्व वाले श्थान जैसे कि रामझूला, ऋषिकेश, हरिद्वार, बद्रीकेदार आदि भी इस वीडियो का हिस्सा होंगे।

 

सरकारी अस्पताल के डाक्टर बने हैवान

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गर्भवती महिला एलडी भट्ट अस्पताल,काशीपुर मे डिलीवरी के लिए पहुंची तो महिला चिकित्सक ने बच्चा उल्टा होने की बात कहते हुए उसे भर्ती करने से इन्कार कर दिया। इस दौरान महिला तड़पती रही। इस बीच महिला ने अस्पताल परिसर की पार्किंग में बच्चे को जन्म दे दिया। चिकित्सक की लापरवाही से महिला के परिजनों में तीव्र आक्रोश देखने को मिला।

बाजपूर रोड स्थित, आलू फार्म निवासी गर्भवती सुशीला सुबह प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। सुशीला परिजनों के साथ सुबह सात बजे एलडी भट्ट अस्पताल डिलीवरी कराने पहुंची। आरोप है कि वहां मौजूद महिला चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराकर रिपोर्ट दिखाने को कहा। महिला ने जांच रिपोर्ट जब चिकित्सक को दिखाई तो चिकित्सक ने यह कहते हुए भर्ती लेने से मना कर दिया कि पेट में बच्चा उल्टा है। कहा बिना ऑपरेशन का बच्चा पैदा नहीं होगा। यदि बच्चा होगा भी तो जीवित नहीं रहेगा। इस पर सुशीला व उसके परिजन सकते में पड़ गए। चिकित्सक ने नर्स को यह हिदायत देकर आगे बढ़ गई कि यदि महिला ऑपरेशन कराने के लिए राजी होगी, तभी भर्ती करना। इस पर नर्स ने सुशीला को बाहर टहलने की बात कहकर यहां से चले जाने को कहा।

इस बीच सुशीला दर्ज से तड़पती रही और मायूस होकर परिजनों के साथ अस्पताल परिसर के बाहर चली गई। इस बीच महिला ने पार्किंग में बच्चे को जन्म दिया। नार्मल डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को महिला वार्ड में भर्ती कराया गया। अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज व तीमारदार महिला को पार्किंग में बच्चे को जन्म देने की सूचना पर हैरत में पड़ गए। इसे लेकर चिकित्सकों व अस्पताल प्रशासन पर मरीज व तीमारदार तरह-तरह के सवाल उठाने लगे। इस घटना के चलते अस्पताल परिसर में हड़कंप मचा हुआ था, मगर इसकी भनक अस्पताल के सीएमएस को नहीं लग सकी। जब इस मामले में सीएमएस से जानकारी चाही गई तो उन्होंने इस तरह की कोई जानकारी न होने की बात कही।