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ये हैं वो विधायक जिन्होने अपनी ही सरकार पर उठाई उंगली

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कभी विपक्ष में होने का हवाला देकर विकास कार्य ना होने का रोना रोने वाले विधायक अब अपनी ही सरकार में बजट ना होने की दुहाई देकर विकास कार्य ना होने की बात कहकर अपनी ही सरकार पर उंगली ऊठा रहे हैं। जिसमें से एक है काशीपुर के विधायक हरभजन सिंह चीमा, जिनके अनुसार काशीपुर की सड़कें बदहाल हैं मगर बनाने के लिए बजट नहीं है। उनका कहना है कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भाजपा का विधायक होने के नाते काशीपुर क्षेत्र की पुरी तरह से अंदेखी की, मगर अब भाजपा की सरकार में भी जितने धन की जरुरत थी वो नहीं मिल पाया है जिससे क्षेत्र की सडकों कि स्थिती बदहाल बनी है।
विधायक चीमा ने तो यहां तक कह दिया कि उन्ही की सरकार में मिला बजट उनके लिए उंठ के मुंह में जीरे के बराबर है, लिहाजा जहां काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में सडकों की लगातार हो रही बदहाली से जहां आम जनता त्रस्त है वहीं क्षेत्रीय विधायक धन का रोना रोकर सडकों के निर्माण ना होने की बात कह रहे हैं। वहीं अब हरभजन सिंह चीमा के इस बयान ने अपनी ही सरकार पर उंगली उठाकर विपक्ष को घर बैठे एक मुद्दा जरुर दे दिया है।

स्कूल में घुसा मलबा, हादसा टला

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रात गिरीश चंद बडोनी, प्रधानाचार्य एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कालसी ने थाना कालसी को फोन से सूचना दी कि भारी बारिश के कारण उनके स्कूल के प्रशासनिक भवन के भूतल, खेल मैदान तथा मुख्य गेट पर भारी मात्रा में मलबा आ गया है।एसङीअारएफ देहरादून ने तुरंत मौका पर जाकर रिलीफ अौर रेस्क्यू काम शुरु किया।

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प्रशासनिक भवन से कुछ दूरी पर उनका छात्रावास स्थित है, जिसमें कुल 343 छात्र रह रहे हैं। जिनमें से 329 छात्र वर्तमान में उपस्थित थे। उक्त विद्यालय, समाज कल्याण विभाग द्वारा जनजातीय बच्चों के लिए संचालित किया जाता है। पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर बच्चों को स्कूल परिसर से सुरक्षित बाहर निकाला गया।  मलबे से स्कूल के छात्रावास को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँची है, केवल प्रशासनिक भवन में धनहानि हुई है।⁠⁠⁠⁠

पहाड़ के युवाओं को नया जीवन दे रहे ये कर्नल साहब

इस कहानी उन में से एक की हैं जिन होने अपने आसपास की जिंदगी बदल दी हैं और कर्नल कोठियाल इस बात का जीता जागता उदाहरण है। सन 2013 में कर्नल अजय कोठियाल ने एनआईएच, उत्तरकाशी के प्रिंसिपल का कार्यभार संभाला था।जून 2013 में उत्तराखंड में आई दैविक आपदा ने पूरे प्रदेश में कहर ढाया, एनआईएच देश का माउंटेयरिंग इंस्टीट्यूट होने के कारण रिलीफ और रेस्क्यू आपरेशन में लग गया। कर्नल कोठियाल ने 30-32 लोकल युवाओं की मदद से टीम बनाई अौर रेस्क्यू आपरेशन में काम किया, जब खत्म हुआ तो उत्तरकाशी जिले के युवाओं, जिन्होंने कोठियाल की टीम बनाकर उनकी मदद की, उन्होंने कर्नल कोठियाल से बोला कि हमें फौज में भर्ती करवा दिजीए।

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इस बात पर कर्नल कोठियाल ने उनकी पुकार सुनी और अपने खर्चे पर एनआईएच में फौज की भर्ती  के लिये ट्रेनिंग देने को तैयार हो गए। इसके बाद, गौचर में आर्मी में भर्ती होने के लिये कैंप लगा जहाँ 28  युवक चुने गए। यह देखकर कर्नल कोठियाल को थोड़ा ताज्जुब तो हुआ लेकिन यह भी सोचा जगी कि अगर थोड़ा मार्गदर्शन और मेहनत करके आर्मी में हमारे बच्चे चुने जा सकते हैं तो हमारे उत्तराखंड से लोगों का पलायन रुकेगा और राज्य की आर्थिक स्थिति में  धीरे धीरे सुधार आयेगा।

इसी सोच के साथ, 2013 नवंबर-दिसंबर में पहला कर्नल कोठियाल की तनख्वाह और मैडल से मिलने वाली राशि से बड़कोट में शुरु किया गया, जिसके बाद 2015 तक उत्तरकाशी,श्रीनगर,अगस्त्यमुनि,पिथौरागड़ और देहरादून में रिले कैंप लगाए गए।

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29 मई 2015 को यूथ फाउंडेशन एक रजिस्टर्ड एनजीओ बनाया गया, जिससे केवल डोनेशन राशि से शुरु किया गया, आज तक यूथ फाउंडेशन ने तकरीबन 2,220 जवान आर्मी, बीएसएफ, सीआरपीएफ, असम राईफल्स, पैरामिलिट्री फोर्स अौर उत्तराखंड पुलिस को दिए है, जिसमें उत्तराखंड पुलिस की 53 लड़कियां भी शामिल हैं।

कर्नल अजय का मानना है कि अगर किसी भी रुप में देखें तो जो पैसें यह नौजवान युवक और युवतियों कमायेंगे, वह यहीं प्रदेश में लगेगा, चाहें बच्चों की पढ़ाई, घर-खेती, राज्य सरकार का बजट तो बढ़ेगा ही, हमारे बच्चे भी आगे निकलेंगे।

सुरज सिंह नेगी, यूथ फाउंडेशन के कोआर्डिनेटर, बताते है कि, ‘जो बच्चे नहीं निकलते तो हम चाह रहे हैं कि एक सेक्योरिटी ऐजेंसी खोलेंगे और कोशिश करेंगे कि उन्हें इसके लिए ट्रेनिंग दे सके, इसके अलावा किसी और से टाईअप करेंगे तो कमीशन बेस्ड होगा जो हमारे उसूलों के खिलाफ है।’

कर्नल कोठियाल ने आज कई घरों में  अाशा की किरण जलाई  है, उनकी एक छोटी सी पहल ना जाने कितनी जिंदगियां बदल दी है।टीम न्यूज़पोस्ट उनके इस जज्बे को सलाम करती है।

बायोमेट्रिक हाजिरी के विरोध में उतरा इंजीनियर्स महासंघ

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इंजीनियर्स महासंघ, बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज करने के शासन के फरमान को स्वीकार नहीं करेगा। इसके लिए मंडलीय अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर इस बाध्यता को खत्म करने की मांग की है। महासंघ का साफ कहना है कि अभियंताओं का काम अधिकांश समय क्षेत्र में गुजरता है ऐसे में कार्यालय समय से पहुंच कर हाजिरी लगाना संभव नहीं है। अगर हाजिरी लगानी है तो कामों की गुणवत्ता में कमी आयेगी। उन्होंने बताया कि साइड पर काम करने वाले मजदूर सुबह ही काम पर जाते हैं जो देर शाम तक काम करते हैं। ऐसे में उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर अभियंता के काम में परेशानी आ सकती है।
महासंघ के जिलाध्यक्ष इं. आरपी टम्टा ने कहा कि बायोमेट्रिक से उपस्थिति की बाध्यता से कार्यों की गुणवत्ता ओर सीधे असर पड़ेगा। हाजिरी के मामले में शासन की ओर से राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए मानसून और आपदा काल में फील्ड कर्मचारियों और अधिकारियों को 24 घंटे कार्य के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति दर्ज करना और मूवमेंट रजिस्टर को भर पाना संभव नहीं होगा। उन्होंने मंडलीय अध्यक्ष से इस बाध्यता को समाप्त करवाने के लिए अपने स्तर से प्रयास करवाने की गुहार लगाई।

सब्जियों ने बिगाड़ा थाली का स्वाद

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बरसात की वजह से सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। इस वजह से गरीबों की थाली से सब्जियां गायब होने लगी हैं।प्रदेश तथा सीमा के साथ लगते उत्तर प्रदेश में अनेक स्थानों पर सब्जी उत्पादक बाहुल्य क्षेत्र है। बरसात होने के कारण इन क्षेत्रों में सब्जी की पालेज खराब हो गई जिसका सीधा असर सब्जियों की पैदावार पर हुआ है।

रुद्रपुर में सब्जियों का उत्पादन कम होने की वजह से बाजार में सब्जियों के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं। कल तक 10 व 15 रुपये किग्रा में बिकने वाले टमाटर के दाम 60 रुपये हो गए हैं जिसको सुनकर लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा है। वहीं फूल गोभी 50 से 60, खीरा देशी, कद्दू 30 रुपये, अदरक 120 रुपये, नीबू 80 से 90 रुपये में बिक रहा है। इसी प्रकार तोरई, लौकी, शिमला मिर्च आदि के दामों में भी काफी उछाल आ गया है।

सब्जियों के दामों में बढ़ोत्तरी होने से यह धीरे-धीरे गरीबों की रसोई से खिसकने लगी है। यही कारण है कि सब्जी बाजार में पहुंचने वाला गरीब वर्ग सब्जियों के दाम सुन कर खाली हाथ वापस लौटने को मजबूर हो रहा है। वहीं विक्रेताओं का कहना है कि सब्जी की फसलें खराब होने से उनको भी आढ़त व अन्य स्थानों से महंगी सब्जी खरीदनी पड़ रही है।

जारी है एसआईटी की पुछताछ

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एसआइटी के समक्ष पूछताछ के लिए जसपुर के पूर्व एसडीएम एचएस मर्तोलिया पेश हुए। इस दौरान उनसे लंबी पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए। उनसे भू प्रयोग बदले जाने के संबंध में जानकारी हासिल की गई।

एसआइटी ने अब तक साठ से अधिक अधिकारियों से पूछताछ की है। इस दौरान एसआइटी के सामने पेश हुए किसान, अधिकारियों से लेकर राजस्व कर्मियों के बयान दर्ज कर उसकी रिकार्डिग कराई गई। एएसपी क्राइम कमलेश उपाध्याय ने पूर्व एसडीएम जसपुर एचएस मर्तोलिया से पूछताछ की। वह सुबह लगभग साढ़े ग्यारह बजे ही पुलिस ऑफिस पहुंच गए थे। एसएसपी डॉ. सदानंद एस दाते ने पूछताछ के बाद एएसपी क्राइम से उसके संबंध में जानकारी हासिल की। लगभग पांच घंटे तक उनसे सघन पूछताछ एसआइटी टीम ने की जिसमें उनके द्वारा भूमि को कृषक से अकृषक करने संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई की जानकारी ले उसे रिकार्ड किया गया।

सरकार कर रही है ”सर जार्ज ऐवरेस्ट” की यादें संजोने की कोशिश

आज पूरे हर्षोल्लास के साथ मसूरी में सर जार्ज ऐवरस्ट का 227वां जन्मदिन मसूरी स्थित पार्क स्टेट हाथी पांव में मनाया गया।अल्टरनेट एटलस साइकिलिंग टीम ने साइकिल रेस आयोजित की। 35 लोगों के इस दल में टूरिस्ट और आम लोगों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। साइकल सवारों ने 12 किलोमीटर का रुट तय किया, इसमें मिस्टर और मिसेज धीमान सबसे ज्यादा उम्र के सवार रहे जिनकी उम्र 67 साल थी और सबसे कम उम्र के सवार रहे जतिन भट्ट।  इस रेस के आयोजक जतिन कपूर का कहना है कि यह एक छोटी सी श्रद्धांजलि है उस महान सख्श की याद में जिन्होंने मसूरी को एक अलग पहचान दी है।

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गौरतलब है कि सर ऐवरस्ट 19वीं सदी के पहले भाग में करीब एक दशक के लिये मसूरी में रहे थे। 1832 से 1843 के बीच अपनी रिहाईश के दौरान वो पार्क एस्टेट नाम के बंगले में रहे थे जो कि मसूरी के हाथीपांव इलाके में है। लेकिन सालो से बंगला सरकारी उदासीनता की मार झेल रहा है। हांलाकि राज्य सरकार ने इस बंगले का कब्जा ले लिया है लेकिन इस धरोहर को बचाने के लिये कुछ खास नहीं किया गया।

वहीं इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने जाॅर्ज ऐवरेस्ट के जीवन को समर्पित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जिसमें इस महान पर्वतारोही के जीवनकाल में प्रयोग किये गये उपकरण जो ब्रिटिश राज की सीमाऐं नापने और पहाड़ों की ऊंचाई नापने के लिये किये गये सर्वे में इस्तेमाल किये थे दशार्ये गए।

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पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।मौके पर पहुंच कर मंत्री जी ने प्रदर्शनी को बारीकी से देखा और सराहा भी।

उत्तराखण्ड में ऑपरेशन स्माइल के तहत खोजे गए 331 गुमशुदा बच्चे

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उत्तराखण्ड में गुमशुदा बच्चों की तलाश एवं पुनर्वास के लिए ऑपरेशन स्माइल अभियान के तहत कुल 331 गुमशुदा बच्चों को खोजा गया है। जिसमें 280 बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है तथा शेष 51 बच्चों को पुनर्वास हेतु बालगृह दाखिल किया गया है।

पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड के निर्देश पर इस अभियान को एक जून से लेकर 30 जून तक चलाया गया था। जिसमे कुल 331 गुमशुदा बच्चों को तलाशा गया। जिसमें 51 पंजीकृत तथा 280 अपंजीकृत हैं। बरामद बच्चों में 147 बच्चे अन्य राज्यों (उ.प्र.-75, बिहार-13, दिल्ली-4, नेपाल-30, हिमाचल प्रदेश-2, पंजाब-8, हरियाणा-4, राजस्थान-4, झारखण्ड-3, छत्तीसगढ़-2, आसाम-1, पश्चिम बंगाल-1) से सम्बन्धित हैं। उक्त टीमों द्वारा अन्य प्रदेशों के कुल 15 पंजीकृत गुमशुदा बच्चों को बरामद कर उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
प्रदेश के गुमशुदा बच्चों को तलाशने हेतु ऑपरेशन स्माइल की 14 टीमों को मुम्बई, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि स्थानों पर भेजा गया था। उक्त प्रदेशों के सम्बन्धित जनपदों के पुलिस अधिकारियों द्वारा समन्वय स्थापित किया गया, जिनके द्वारा अभियान में टीमों को पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया।
प्रदेश में गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए चलाये जा रहे स्माइल ऑपरेशन की जनता द्वारा काफी प्रशंसा की गयी। गुमशुदा बच्चों को परिजनों से मिलाने पर उनके द्वारा पुलिस का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद किया गया। इस अभियान में जिला हरिद्वार में 05, देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर में 04-04 टीम व शेष जनपदों में 01-01 तलाशी टीम (प्रत्येक टीम में उपनिरीक्षक-1, आरक्षी-4), का गठन किया गया, जिनके सहयोग हेतु एक-एक विधिक व टेक्निकल टीम भी नियुक्त की गयी। प्रदेश स्तर पर ऑपरेशन स्माइल का पर्यवेक्षण नोडल अधिकारी शाहजहां जावेद खान, अपर पुलिस अधीक्षक, एएचटी द्वारा किया गया।
अभियान को शेल्टर होम्स, ढाबों, कारखानों, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन आदि में चलाया गया। इस दौरान अन्य सम्बन्धित विभागों का भी सहयोग लिया गया। उपरोक्त तलाशी टीमों द्वारा अपने जनपद के साथ-साथ अन्य जनपदों व राज्यों के गुमशुदा बच्चों को भी तलाश किया गया। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड द्वारा ऑपरेशन स्माइल अभियान की समीक्षा की गयी। इस दौरान समस्त टीमों को गणपति द्वारा उनके काम की सराहना करते हुए प्रत्येक तलाशी टीम को पांच हजार रुपया तथा तकनीकी टीम को उत्तम प्रवष्टि प्रदान करने की घोषणा की गयी।

पेट्रोल पंपों पर 12 जुलाई को लगेंगे ताले

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तीन सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने 12 जुलाई को पेट्रोल-डीजल की खरीदारी और बिक्री नहीं करने का निर्णय लिया है।

एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी विवेक गोयल ने एक भेंटवार्ता में बताया कि तीन सूत्री मांगों को लेकर पेट्रोल पंप पांच जुलाई को पेट्रोल की खरीदारी नहीं करेंगे। फिर भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 12 जुलाई को एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी। इस दिन पेट्रोल पंप न ही तेल की खरीदारी करेंगे और न ही बेचेंगे।
एसोसिएशन से जुड़े गढ़वाल मंडल पेट्रोल डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि दाम बढ़ने-घटने का नुकसान कंपनी स्वयं वहन करे। साथ ही, भाव निर्धारण का समय व डीजल-पेट्रोल पर भी जीएसटी लागू करने की मांग की, जिससे उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल सस्ता दाम पर मिल सकें। 

विधायक जोशी ने किया दून अस्पताल का निरीक्षण, लगेंगे 150 पंखे

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मसूरी विधायक गणेश जोशी ने मंगलवार को दून अस्पताल का औचक निरीक्षण कर मरीजों का हाल जाना और अस्पताल में अनुभवी चिकित्सकों की कमी की बात कही। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में 150 पंखे लगाये जाने की घोषणा भी की।

विधायक गणेश जोशी ने कहा कि दून अस्पताल को जिला अस्पताल की श्रेणी में रखा जाना अति आवश्यक है और इस बाबत मुख्यमंत्री से भी वार्ता की जाएगी। उन्होंने अस्पताल के सीएमएस डॉ टम्टा को निर्देशित करते हुए कहा कि मरीजों की बैठने एवं उनके बेहतर इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन काम करे। उन्होंने मरीजों एवं अन्य लोगों की समस्या को देखते हुए अस्पताल में 150 पंखे लगाये जाने की भी घोषणा की। इस अवसर पर अस्पताल के कई वरिष्ठ डाॅक्टर सहित भाजपा नेता सिकन्दर सिंह आदि उपस्थित रहे।