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जीएसटी लागू होने से इंस्पेक्टर राज खत्म होगा

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जीएसटी लागू होने से इंस्पेक्टर राज पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इस व्यवस्था से आम उपभोक्ता को वस्तुएं सस्ती मिलेंगी। यह जानकारी वित्तमंत्री प्रकाश पंत ने बिक्री कर मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। हरिद्वार, मसूरी बाइपास पर आयोजित वाणिज्य कर विभाग अधिकारिक व्यावसायिक वेबसाइट जारी कर रहे थे, जिसमें जीएसटी के उपभोक्ताओं के लिए पंजीकरण से लेकर अन्य जानकारियां सरल भाषा में दी गई हैं। वित्तमंत्री प्रकाश पंत ने इस अवसर पर जीएसटी कॉर्नर फेसबुक पेज तथा ट्वीटर पेज का भी लोकार्पण किया।

इस अवसर पर जो प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे, उनमें राधा रतूड़ी, अमित नेगी, यशपाल आर. राजेश कुमार आदि के नाम शामिल हैं। विभाग द्वारा एक पुस्तिका भी प्रकाशित की गई है, जिसमें पृष्ठ 58 से लेकर 64 तक उन सेवा केन्द्रों की जानकारी दी गई है, जो आम जनता की मदद के लिए हैं। इनमें अधिकारी का नाम जिला, क्षेत्र, विकासखंड तथा उनका सचल दूरभाष केन्द्र नम्बर जारी किया गया है। यह 2022 जीएसटी मित्र हैं,जिन्हें प्रशिक्षित किया गया है। हमारे अधिकारी आठ माह से इस जागरूकता और प्रशिक्षण में लगे हुए हैं।
वित्तमंत्री पंत ने कहा कि जीएसटी में 85 प्रतिशत व्यापारियों ने पंजीकृत करा लिया है और 25 प्रतिशत व्यापारी जीएसटी का संचालन कर रहे हैं। 2500 व्यापारियों को तकनीकी कारणों से आईडी नहीं जारी की जा सकी, जिनको एक माह में जीएसटी जारी कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि जीएसटी से पहले जो प्रकरण तीन साल से लंबित थे, उन दो लाख 15 हजार प्रकरणों का निपटारा कर दिया गया है। ई-बिलिंग के माध्यम से व्यवस्था बनाई गई है और सरलीकरण किया जा रहा है। एक्साइज ड्यूटी आधारित पैकेजों के उद्योगों को 58 प्रतिशत पैकेज 2020 तक मिलेगा। इसलिए इन उद्योगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि 2015-16 में 36 करोड़ का राजस्व था, जो जीएसटी के बाद और बढ़ेगा। मनोरंजन कर के 41 अधिकारियों को भी व्यवस्था में समायोजित किया जाएगा। गुड़ जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ को मुक्त कर दिया गया है, जबकि जैम, मुरब्बा, अचार, जैली जैसे खाद्य पदार्थों से जीएसटी 18 प्रतिशत के स्थान पर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ और संशोधन करने के लिए जीएसटी कौंसिल से आग्रह किया जाएगा, जबकि कंपाउंडिग की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार कर दी गई है। 

चमोली जेल के अंदर से हो रही है रंगदारी की डिमांड, पुलिस महकमे में हड़कंप

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चमोली जिला कारागार एक बार फिर से सुर्खियों में बना हुआ है। यहां लंबे समय से बंद कुख्यात सुशील चौधरी द्वारा देवबंद की महिला चिकित्सक डॉ. आशा सनावर को 40 लाख रुपये दिये जाने की धमकी भरा पत्र भेजे जाने का मामला सामने आया है।मामला सामने आते ही चमोली जेल प्रशासन की कार्य प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है हालांकि, जेल अधिकारी जेल में रखे गये कैदियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था कम होने की बात कह रहे हैं। साथ ही मामले को लेकर पत्र अन्य द्वारा लिखे जाने की आशंका जताते हुए, जांच की बात कही जा रही है।

पूर्व में भी हुए है कई मामले
पुरसाड़ी कारागार पूर्व भी में कैदियों द्वारा जेल से धमकी देने व जेल अधिकारियों के साथ मारपीट के मामलों में चर्चाओं में रहा है। बीते वर्ष तीन फरवरी को मधुमिता हत्या कांड के आरोपी संतोष राय द्वारा जेल में मोबाइल और अन्य सुविधाएं दिए जाने की मांग को लेकर जेलर से मारपीट की गई थी जबकि, 25 नवंबर 2016 को जेल में बंद कुख्यात प्रवीण बाल्मीकि द्वारा मोबाइल से रुड़की के व्यवसायी को चैथ वसूली के लिये धमकी देने का मामला भी सामने आया था। इससे पूर्व भी बाक्सर नाम के एक कैदी द्वारा अपनी बैरक में रह रहे अन्य कैदी के साथ मारपीट की थी जबकि 2013 की आपदा के दौरान जेल की सुरक्षा दीवार गिरने के बाद यहां से दो विचाराधीन कैदियों ने भी भागने के प्रयास में जेल में तैनात कर्मचारियों से मारपीट की थी।
जेलर प्रमोद कुमार का कहना है कि जेल में रह रहे कैदियों द्वारा लिखे जाने वाले पत्रों को जांच के बाद ही भेजा जाता है। ऐसे में सुशील चौधरी द्वारा भेजे गये धमकी भरे पत्र अन्य द्वारा लिखे जाने, परिजनों के माध्यम से भेजे जाने सहित अन्य कई कारण हो सकते हैं। जांच के बाद ही मामले का पता चल सकेगा।

दुर्गम स्कूलों में तैनात होंगे लापरवाह शिक्षक

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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लापरवाही का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। विभाग के तमाम कड़े दिशा-निर्देशों का शिक्षक जमकर मखौल उड़ा रहे हैं। आलम यह है कि सोमवार को विभाग मे किए गए आकस्मिक निरीक्षण में 809 स्कूलों के 381 शिक्षक गैर हाजिर पाए गए। विभाग ने अब नई नीति के तहत गैर हाजिर शिक्षकों को दुर्गम स्कूलों में स्थानांतरित करने का फैसला किया है।सरकारी स्कूलों को ढर्रे पर लाने की शिक्षा विभाग की तमाम कोशिशें फेल साबित हो रही है। खास बात यह कि विभाग के प्रयासों को स्कूलों में तैनात शिक्षक ही पलीता लगा रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि विभाग के सोमवार को प्रदेश के सरकारी स्कूलों में किए गए आकस्मिक निरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़े बता रहे हैं। सोमवार को महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड कैप्टन आलेक शेखर तिवारी के निर्देश पर प्रदेश के समस्त जनपदों में विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों व छात्रों की उपस्थिति, शैक्षिक गुणवत्ता, मिड-डे मील आदि का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में सैंकड़ों शिक्षक बिना अवकाश के अनुपस्थित पाए गए। विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है।
महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कै. आलोक शेखर ने बताया कि बिना अवकाश स्वीकृति के अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों को दुर्गम स्थानों में स्थानांतरित किए जाने के लिए नीति बनाए बनाई जा रही है। निकट भविष्य में भी स्कूलों में आकस्मिक निरीक्षण में अनुपस्थित पाए जाने वाले शिक्षकों को दुर्गम स्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्कूलों की गुणवत्ता विभाग की पहली प्राथमिकता है। ऐसे में शिक्षकों की गैरहाजिरी बेहद संजीदा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि शिक्षक के गैर हाजिर रहने से बच्चों को शिक्षित करने का कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में बच्चे भी स्कूलों से गैर हाजिर हो रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो निरीक्षण के दौरान स्कूलों में कुल पंजीकृत 74701 छात्रों में 46409 उपस्थित पाए गए। जबकि 28292 गैर हाजिर पाए गए। यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता के लिए घातक न बने इसके लिए शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी का बोध कराना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि गैर हाजिर शिक्षकों को दुर्गम स्कूलों में भेजे जाने के लिए नीति जल्द तैयार कर ली जाएगी।

निरीक्षण में शिक्षकों की यह रही स्थिति
जनपद-स्कूल- कार्यरत-उपस्थित- अनुपस्थित
पौड़ी-133- 631- 596 – 62
देहरादून-39- 240- 214- 26
चमोली- 74- 273- 255- 18
रुद्रप्रयाग-35- 179- 163- 16
टिहरी- 74- 437- 401- 36
उत्तरकाशी- 43- 229- 208- 21
हरिद्वार- 38- 187- 161- 26
नैनीताल- 102- 530- 492- 38
पिथौरागढ़- 20- 163- 151- 12
अल्मोड़ा- 70- 395- 307- 35
बागेश्वर- 29- 117- 108- 9
चंपावत- 34- 134- 119- 15
उधमसिंहनगर- 108- 706- 639- 67
कुल योग- 809- 4221- 3840- 381

ट्वीट वार : राज्य का राजस्व घाटा, ऋण बढ़ा : पंत

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और वित्त मंत्री प्रकाश पंत के बीच राज्य की वित्तीय स्थिति, ऋण और राजस्व की स्थिति को लेकर ट्वीटर पर वार छिड़ी है। दोनों तरफ से आंकड़ों जरिये हमला किया जा रहा है। पूर्व सीएम ने जहां राज्य में प्रति व्यक्ति आय और ऋण को लेकर मौजूदा सरकार पर हमला बोला तो वित्त मंत्री ने आंकड़े ट्वीट कर उनका जवाब दिया। यह ट्वीट वार अभी जारी रहेगी। हालांकि, ताजा ट्वीट में वित्त मंत्री ने कहा कि हरीश रावत के कार्यकाल में राजस्व कम हुआ और ऋण तेजी से बढ़ा।

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ट्वीटर पर दो दिन पहले यह वार शुरू हुई हरीश रावत के एक ट्वीट से। जीएसटी लागू होने के बाद वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा था कि इससे राज्य को मिलने वाले राजस्व में करीब 20 फीसद की वृद्धि होगी। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य की आय में वृद्धि के वित्त मंत्री प्रकाश पंत के इस बयान के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश पंत जी आप बहुत निष्ठुर हैं। जीएसटी लागू होने के बाद उत्तराखंड को केंद्र से मिलने वाले हिस्से में लगभग 19.5 प्रतिशत वृद्धि होगी। इसका अर्थ है कि आपके पास विकास के लिए, जन कल्याण के लिए प्रयास राशि होगी। यह तभी संभव हुआ जब हरीश रावत और डॉ. इंदिरा हृदेश की सरकार ने वर्ष 2016-17 में राजस्व वृद्धि के नए कीर्तिमान स्थापित किए और पूरे देश में सर्वाधिक राजस्व वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया। कुछ तो धन्यवाद देना सीखो।
इसके जवाब में वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने ट्वीट किया कि उत्तराखण्ड को वित्तीय संकट में धकेलने का दोषी कौन? नॉन टैक्स राजस्व 1600 करोड़ से घट कर 1210 करोड़ रह गया है| उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सीएम झूठे आंकड़े ट्वीट कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दोबारा ट्वीट कर कहा कि प्रकाश पंत जी आपने कहा कि विकास संबंधित आंकड़े झूठे हैं। मैंने यह सभी झूठे आंकड़े आपके बजट भाषण से लिए हैं। आपने अपने बजट भाषण में राज्य की ग्रोथ रेट का जिक्र किया है, मैंने सिर्फ उसे एक साल आगे की अनुमानित ग्रोथ रेट बताई। उसी तरह पर कैपिटा इनकम की वृद्धि के जो आंकड़े आपने दिए हैं, वह भी मैंने दिए हैं। मैंने आपके ही बजट से कैलकुलेट करके निकाला है और मैं आपसे जानना चाहता हूं कि आज सेवा क्षेत्र में राज्य की वार्षिक विकास दर 11:00 प्रतिशत से ऊपर है और औद्योगिक विकास दर 16.5 प्रतिशत से ऊपर है, यदि यह आंकड़े झूठे हैं तो सच्चे आंकड़े जारी करिये।

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इसके बाद मंगलवार को वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने आंकड़े जारी करते हुए ट्वीट किया कि ये आंकड़े ही पूर्व सीएम को जवाब देने लिए काफी हैं। उन्होंने इसमें कहा कि राज्य सरकार की भूमिका वाला नॉन टैक्स रेवन्य 2012-13 के 1602 करोड़ 2016-15 में घटकर 1219 करोड़ रह गया। जबकि, करों से प्राप्त होने वाले राजस्व, जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती इसमें इजाफा हुआ। वर्ष 2011-12 में कर के रूप में 5615.56 करोड़ का राजस्व मिला, जबकि वर्ष 2015-16 में यह बढ़कर 9377.79 करोड़ हुआ। राजस्व में वृद्धि में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी, बल्कि यह केवल कर से प्राप्तियां थी। उन्होने इसी ट्वीट में ऋण के आंकड़े भी दिए। इसमें उन्होंने लिखा कि वर्ष 2007-08 में राज्य पर कुल देनदारियां 16276.21 करोड़ रुपये की थी, जो कांग्रेस के कार्यकाल में बढ़ते हुए वर्ष 2015-16 में 39031.87 करोड़ रुपये हो गई।
ट्वीटर पर यह वार जारी है। आने वाले दिनों में इस वार में कई और रंग देखने को मिल सकते हैं। गौरतलब है कि इस वार को हरीश रावत के राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की मशक्कत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, हाल ही में वे ट्वीट पर इस मामले में भी सफाई दे चुके हैं। इससे पहले पूर्व सीएम हरीश रावत काफल और आम पार्टी देकर भी सुर्खियों में आ चुके हैं। अब उनकी तैयारी हरेला पर्व के माध्यम से मीडिया का ध्यान खींचने की ओर है।

प्रदेश में एक अगस्त से लागू होगा टीचरों के लिये ड्रेस कोड

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सरकारी स्कूलों में एक अगस्त से शिक्षकों के लिए ड्रेसकोड नियम लागू हो जाएगा। शिक्षकों को अनिवार्य रूप से निर्धारित किए गए ड्रेसकोड में ही आना होगा। हालांकि शासन ने शिक्षकों को संवर्गवार स्वैच्छिक ड्रेसकोड तय करने की छूट दी है। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।

मंगलवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में स्कूलों के संचालन, जीर्ण शीर्ण भवनों व शिक्षा की गुणवत्ता आदि मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने बीते दिनों सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए लागू किए गए ड्रेसकोड को लेकर भी बातचीत की गई। दरअसल नियम को लेकर शिक्षकों के बीच भारी रोष व्याप्त था। कई शिक्षकों ने इसका खुलकर विरोध भी किया। इसके बाद शिक्षकों ने अधिकारियों के लिए तय ड्रेसकोड को ही शिक्षकों के लिए रखे जाने की मांग की। इतना ही नहीं कुछ दिन पूर्व ही राजकीय शिक्षक संघ ने समस्याओं का समाधान न होने तक ड्रेस कोड न मानने का ऐलान किया था। इसी को देखते हुए अब शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को संवर्गवार स्वैच्छिक ड्रेस कोड निर्धारित करने की छूट दी है। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने मंगलवार को अपर निदेशक गढ़वाल और कुमाऊं मंडल को आदेश जारी कर उसका पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
महानिदेशक कैप्टन तिवारी ने बताया कि शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक ड्रेस कोड लागू किया गया है। शिक्षक संगठन आपस में बैठकर तय कर सकते हैं कि उन्हें किस रंग की और कैसी ड्रेस पहननी है। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक संगठनों ने अनौपचारिक रूप से अधिकारियों वाली ड्रेस पहनने की इच्छा जताई है। शिक्षकों में सहमति हो तो वही ड्रेस लागू की जा सकती है। साथ ही महिलाओं के लिए साड़ी के साथ ही सलवार सूट का विकल्प भी रहेगा।

महर्षि महेश योगी की तपस्थली को विकसित करेगी सरकार : मंत्री रावत

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उत्तराखण्ड सरकार वर्षों से वीरान महर्षि महेश योगी की चौरासी कुटिय तपस्थली सहित ऋषिकेश की संजय झील का सौंदर्यकरण कर पर्यटन को विकसित करेगी पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने मंगलवार को रेलवे रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान यह बातें कही।

डा. रावत ने कहा कि महर्षि महेश योगी की विचार 84 कुटी का मामला सरकार के संज्ञान में है जिसके लिए एक वैज्ञानिकों की टीम शीघ्र भेजी जा रही है। जो पर्यटन की दृष्टि से उसे विकसित करने के लिए सरकार को सुझाव देगी। उसी के बाद कुछ निर्णय लिया जाएगा।
उनका कहना था कि राज्य में सुरक्षा स्वास्थ्य स्वछता के साथ पर्यावरण को लेकर भी राज्य सरकार काफी गंभीर है। डा. रावत ने कहा कि एनजीटी के निर्देश पर राज्य सरकार ने गंगा मे प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई कर अन्य को चेतावनी दी है। उनका कहना था कि शहरों व गांव में आजकल बंदरों जंगली सुअरों के अतिरिक्त गुलदार का भी आंतक बना है। इसी के साथ उन्होंने जंगलों मे शिकारियों को पकड़ने के लिए लगाये गये। सी सी कैमरों को तोड़ने की घटना को भी गम्भीर बताते हुए शीघ्र कार्रवाई करने की बात कही है। पत्रकार वार्ता में राकेश अग्रवाल, चेतन शर्मा, पंकज शर्मा आदि भी उपस्थित रहे।

आने वाले दिनों में सताएगी दिल्ली की दौड़

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आगामी दिनों में उत्तराखंड से दिल्ली की दौड़ काफी मुश्किल भरी होगी। कावड़ यात्रा के चलते राज्य के परिवहन निगम ने रूट डायवर्ट करने का फैसला किया है। जिसके चलते न सिर्फ गंतव्यों तक पहुंचने में समय अधिक लगेगा बल्कि आर्थिक रूप से भी यात्रियों की जेब पर भार पड़ेगा। 15 जुलाई से रूट डायवर्ट कर दिया जाएगा।

राज्य में श्रावण मास शुरू होने को है, इसके साथ कावड़ यात्रा भी शुरू होनी है। प्रदेश के विभिन्न विभागों ने कावड़ को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी है। पुलिस विभाग की ओर से जहां अतिरिक्त पुलिस बल को यात्रा में सुरक्षा के लिए तैनात किया जाना है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में परिवहन निगम भी यात्रा को लेकर बसों के रूट आदि को लेकर कार्ययोजना तैयार कर रहा है। निगम की ओर से विभिन्न राज्यों के जाने वाली बसों के रूटों को डायवर्ट किया जाने का निर्णय लिया गया है। राज्य से सटे उत्तरप्रदेश व हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के साथ ही हरियाणा, पंजाब व अन्य प्रदेशों के लिए किए जाने बसों के संचालन व उनके रूट को बदला गया है। निगम 15 जुलाई से रूट डायवर्ट प्लान को लागू करेगा।

जेब पर पड़ेगा आर्थिक बोझ
कावड़ यात्रा में होने वाले रूट डायवर्जन से बसों को लंबी दूरी तय कर अपने गंतव्यों तक पहुंचना पड़ेगा। इसमें एक से दो घंटे का समय अतिरिक्त लगेगा। इसके अलावा, बसों को इसके लिए 70 से 80 किलोमीटर की कर दूरी भी अतिरिक्त रूप से तय करन होगी। जिसमें ईंधन की खपत भी अधिक होना तय है। इसके लिए निगम ने किराए में भी बढ़ोत्तरी करने का फैसला किया है। परिवहन निगम के महाप्रबंधक आॅपरेशन दीपक जैन ने बताया कि वोल्वो, एसी, हाई-टेक व साधारण श्रेणी की सभी बस सेवाओं को कावड़ यात्रा में संचालित करने में निगम को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए रूट डायवर्ट किए जाने हैं। रूट डायवर्ट होने से दिल्ली से देहरादून जाने में लगने वाले समय में तकरीबन दो घंटे का समय अधिक लगेगा। बसों को करनाल रूट से डायवर्ट किया जाएगा, यानि बस पांच घंटे की बजाय सात घंटे दिल्ली तक पहुंचने में लेगी। दूरी को देखते हुए हुए निगम ने किराए में बढ़ोत्तरी की है। कावड़ यात्रा के बाद पुन: निर्धारित मार्ग व किराए दर पर बसें संचालित होंगी।

रूट डायवर्ट से किराए में बढ़ोत्तरी
सेवा- किराए में अंतर

वोल्वो- 70 से 80 रुपये
एसी बस- 55 से 60 रुपये
हाई-टेक बस- 50 रुपये
साधारण बस- 40 रुपये

लोन वापसी के नोटिस से किसान की हुई मौत

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नानकमत्ता क्षेत्र, रुद्रपुर के ग्राम बिरिया भूड़ का एक किसान बैंक वालों के ऋण जमा करने के दबाव के आगे इस कदर टूट गया कि पूरी रात रोया। बैंक कार्रवाई होने के सदमे से उसकी मौत हो गई।

क्षेत्र के ग्राम बिरिया भूड़, निवासी मस्सा सिंह, ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की सितारगंज शाखा से क्राप लोन लिया था। बाद में उस लोन को ट्राली के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। दो दिन पहले सितारगंज से बैंक के अधिकारी उसके घर पहुंचे तथा लोन जमा करने के लिए न सिर्फ मौखिक दबाव डाला, बल्कि नोटिस थमा कर 15 दिन में पूरी रकम जमा करने को कहा। साथ ही लोन जमा न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। उसे बैंक का एक लाख इक्यानवें हजार एक सौ बाइस रुपये जमा करने थे, वह 15 दिन में इतनी रकम जुटा पाने में असमर्थ था। बैंक वालों के जाने के बाद से ही मस्सा सिंह के चेहरे पर तनाव आ गया। किसान के पास सिर्फ दो एकड़ जमीन है। मस्सा सिंह के भतीजे जगदीश सिंह ने बताया कि मस्सा सिंह रात भर रोता रहा। परिवार वालों के समझाने के बाद भी उसका तनाव कम नहीं हुआ। कार्रवाई की चेतावनी के सदमे से उसकी गत दिवस मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

जगदीश सिंह का आरोप  है कि मस्सा सिंह की मौत के लिए बैंक प्रबंधन जिम्मेदार है। घटना के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने कहा कि उत्तराखंड का किसान कर्ज में डूबा हुआ है। प्रदेश सरकार को किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए। कर्ज से डूबे किसानों की लगातार मौत हो रही है, जो बेहद शर्मनाक है। जिलाधिकारी नीरज खैरवाल ने कहा कि उनकी परिवार के साथ सहानुभूति है। वह अफसरों को गांव भेजेंगे, परिवार को किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। परिवार को कृषि योजनाओं से लाभांवित किया जाएगा।

नैनीताल के पार्किंग स्पेस ना होने वाले 50 फीसदी होटलों के कमरे होंगे बंद

हाई कोर्ट ने नैनीताल में पर्यटन सीजन के दौरान जाम और वाहनों के अंधाधुंध प्रवेश पर गंभीर चिंता जताते हुए पार्किंग विहीन होटलों में 50 फीसदी कमरे बंद करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने अवैध गेस्ट हाउस तथा पर्यटन सीजन में होटल के तौर पर किराये में दिए जा रहे भवनों को चिह्नित करने तथा नए टैक्सी परमिट जारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जोड़ा है कि यदि परमिट जारी हो तो संबंधित वाहन नैनीताल को प्रवेश ना दिया जाए।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ में नैनीताल निवासी प्रो. अजय रावत की शहर में अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर डीएम दीपेंद्र चौधरी, एसएसपी जन्मेजय खंडूरी, आरटीओ राजीव मेहरा, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा कोर्ट में पेश हुए।

एसएसपी ने कोर्ट के समक्ष बताया कि नैनीताल शहर में अधिकतम डेढ़ हजार वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था है मगर पीक सीजन में एक दिन में हल्द्वानी-भवाली मार्ग से आठ हजार वाहन पहुंचे, जबकि कालाढूंगी रोड से आने वाले वाहनों की संख्या अलग है। इसके अलावा ईद के अगले दिन शहर में हजारों बाइकर्स पर्यटक नैनीताल पहुंच गए।

खंडपीठ ने पर्यटन सीजन की अवधि के दौरान नैनीताल में पर्यटकों की भारी भीड़ व क्षमता से कई गुना अधिक भीड़ के नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों से राय लेने को कहा है। साथ ही तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के समीप संचालित लेक ब्रिज चुंगी को हल्द्वानी, भवाली रोड, कालाढूंगी रोड में शिफ्ट करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि नैनीताल के अधिकांश होटलों के पास पार्किंग नहीं है।

इसके बावजूद होटल संचालक क्षमता से अधिक पर्यटकों को ठहराते हैं। इसलिए भीड़ को कम करने के लिए बिना पार्किंग वाले होटलों में 50 फीसद से अधिक कमरे ना लगाए  जाएं। कोर्ट ने बारापत्थर में अवैध घोड़ा संचालन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश भी दिए।

खंडपीठ ने कहा कि शासन नए परमिट जारी नहीं करे, परमिट जारी करने पर उस वाहन को नैनीताल में प्रवेश नहीं दिया जाए। जिला एवं पुलिस प्रशासन समेत अन्य से कोर्ट के आदेश के अनुपालन की कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है।

वहीं होटल व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप साहनी का कहना है कि,  ”ये एक छोटा समाधान है। पर्यटक स्थलों पर ट्रैफिक की समस्या के समाधान के लिये मूल मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। हिल स्टेशन अपनी क्षमता से ज्यादा बढ़ गये हैं, वहीं पर्यटन राज्य की जीडीपी का करीब 30 प्रतिशत है और राज्य के करीब एक तिहाई लोग इससे सीधे तौर पर जुड़े हैं। सरकार को यहां की मूल भूत सुविघाओं के विकास पर तेजी से ध्यान देने की जरूरत है।”

लोकगायक नेगी दा के स्वास्थ्य में सुधार, खाया दलिया

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उत्तराखण्ड के लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे है और वह आज अपने परिजनों संग बातचीत कर प्रशंसकों व अपनों के चेहरे पर मुस्कान ला दी। वहीं अस्पताल चिकित्सकों का कहना है कि नेगी दा के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।

मंगलवार को नेगी दा ने अस्पताल में परिवार के सदस्यों से बातचीत करते हुए दलिया भी खाया। बीते सोमवार को उन्होंने पहाड़ देखने की इच्छा जताई तो उनका बेड खिसकाया गया। जहां से वह हरे पेड़ और पहाड़ देख सकें। पहाड़ों को देखकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी पिछले कई दिनों से मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं। पौड़ी के बीरोंखाल से एक कार्यक्रम से लौटते वक्त उन्हें हार्ट अटैक पड़ा था। यह खबर सुनते ही नेगी दा के देश-विदेश में मौजूद प्रशंसक चिंतित हो गए थे और कहर कोई उनके लिए दुआ मागने लगा। दुआओं का ही असर रहा कि धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है।