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एम्स मरीजों के लिए सात जुलाई से चलेगी बस

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राज्य परिवहन निगम ने देहरादून से अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान एम्स में अपना उपचार करवाने वाले मरीजों के लिए देहरादून से एम्स तक सीधी बस सेवा सात जुलाई से प्रारंभ कर दी जाएगी।

परिवहन विभाग के सहायक महाप्रबंधक नेतराम ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक एम्स जाने वाले मरीजों के लिए कोई भी बस की सीधी सुविधा उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण मरीजों को दो पहिया वाहन का ही सहारा लेना पड़ता था। जिसे देखते हुए परिवहन निगम ने बस सेवा प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। एम्स शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर होने के साथ देहरादून 56 और हरिद्वार से 30 किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे मरीजों को आने-जाने परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
निगम के महाप्रबंधक नेतराम ने बताया कि बसे शुक्रवार से प्रारंभ हो जाएगी और यह बस नटराज चौक से प्रगति विहार रेलवे रोड से हीर लाल मार्ग तथा पुरानी चुंगी से कोयलघाटी होते हुये एम्स तक जाएगी। जबकि वापसी संयुक्त यात्रा रोडवेज बस अड्डे पर पंहुचेगी। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं का अच्छा रैस्पोंस मिला तो सेवा का विस्तार किया जाएगा।

तराई बीज विकास निगम में करोड़ों का घपला, मंत्री ने दिए एफआईआर के आदेश

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56 करोड़ के घाटे में चल रहे तराई बीज विकास निगम जो देश का सर्वश्रेष्ठ बीज निगम था और इसे 2015-2016 में ही 16 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया है। यह नुकसान गेहूं बीज बिक्री में किया गया है। इस आशय की जानकारी कृषिमंत्री सुबोध उनियाल ने एक पत्रकार वार्ता में दी।

उनियाल ने बताया कि विश्व स्तरीय बीज बनाने वाले इस संस्थान को बर्बाद करने में नौकरशाहों का हाथ है। इसकी जांच के लिए अपर मुख्य सचिव डाॅ. रणवीर सिंह के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की गई थी। जिसमें कृषि निदेशक गौरी शंकर,आईजी गणेश मर्तोलिया तथा अपर सचिव सुनील पांथरी को शामिल किया गया था। इस समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें 10 लोगों को दोषी पाया गया है। इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी तथा मामले को एसआईटी को सौंपा जा सकता है।
मामले के मुख्य आरोपी अभियंता एवं बिक्री प्रभारी मार्केटिंग पीके चौहान जिनका 30 जून को रिटायरमेंट था को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया है। जबकि तत्कालीन अध्यक्ष जीएस बिष्ट को भी जांच में शामिल किया गया है। अन्य लोगों में आरके. निगम कंपनी सचिव, दीपक पाण्डेय मुख्य बीज उत्पादन अधिकारी, एसके. लोहनी, उपमुख्य बिक्री अधिकारी, अजीत सिंह उप मुख्य विपणन अधिकारी, बीडी तिवारी मुख्य वित्तीय अधिकारी, शिव मंगल त्रिपाठी प्रशासनिक अधिकारी, जीसी. तिवारी लेखाकार, अतुल पाण्डेय अकाउंड अफसर का नाम शामिल है। वर्तमान में पीके चौहान निलंबित हैं, जबकि जीएस बिष्ट वर्तमान में कार्यरत नहीं फिर भी आरोपी हैं।
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जो तराई निगम जो अन्तर्राष्ट्रीय बीज की प्रतिष्ठित कंपनी है और बीज के लिए आदेश मिलने पर 10 प्रतिशत अग्रिम जमा तथा 15 प्रतिशत यातायात खर्च मिलने के बाद बीज भेजती है। साथ ही साथ बीज फर्म तक पहुंचने पर 75 प्रतिशत बैंक गारंटी का चैक अथवा राशि प्राप्त कर ली जाती है। इस घपले घोटाले में किसी भी शर्त का अनुपालन किया गया। इतना ही नहीं विभागीय अधिकारियों ने बीज रखने के लिए स्टोर भी दिखाए। बीज का मूल दाम 3188 रुपये प्रति कुन्तल था, लेकिन उत्तर प्रदेश को यही बीज 2150 रुपये प्रति कुन्तल तथा बिहार को 2350 रुपये प्रति कुंतल भेजा गया, जो 17 दिसंबर 2015 को भेजा खराब बीज दिखाकर 14 जनवरी 2016 को एक नई योजना चलाई गई। जिसमें 2350 रुपये की संशोधित दरों पर दो कट्टे के साथ एक कट्टा मुफ्त दिया गया। यह योजना किसानों के लिए दिखाई गई लेकिन इसे बड़े ग्राहकों को दिया गया।
मंत्री का कहना है कि नियमानुसार एक जिले में एक एजेंसी ही हो सकती है,लेकिन किसी जिले में कई एजेंसिया बना दी गई तथा कई जिलों को छोड़ दिया गया। उत्तर प्रदेश में 10623.80 कुन्तल बीज भेजा गया, जबकि बिहार में 6209 कुंतल भेजा गया। जनवरी की नई योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश में 29608 कुन्तल माल बेचा दिखाया गया, जबकि बिहार में यही 52272 कुन्तल बेचा बताया गया। जिन फर्मों को यह माल बेचा गया है, उनमें नेशनल हब बरेली, सांई बदर्स वाराणसी, कृषि सेवा केन्द्र फर्रुखाबाद के नाम शामिल है। इस बीज पर 63 प्रतिशत अनुदान दिखाया गया,जिससे इस अवधि में 16 करोड़ का घाटा हुआ है।
कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 10 वितरक, बिहार में 15 वितरक तथा पश्चिम बंगाल में एक वितरक कुल 26 वितरक दिखाए गए हैं। जिसमें भरपूर लूट खसोट की गई है और तराई बीज विकास निगम को 16 करोड़ का एक वर्ष में ही घाटा हुआ, जिस पर प्राथमिकी दर्जा कराई जा रही है और सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। कृषिमंत्री ने बताया कि इसी तरह बीज प्रमाणीकरण निगम ने भी अच्छा खासा झोल है। उनका कहना है कि वे इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से भी चर्चा करेंगे और भ्रष्टाचारियों को नहीं बख्शा जाएगा। 

ये जानने के बाद शिक्षक से उठ जाएगा विश्वास

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शिक्षक की करतूत सुनकर कहीं एेसा ना हो कि लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने से ही इन्कार कर दें, क्योकि जिन शिक्षकों द्वारा बच्चों को अुशासन का पाठ पढाया जाना चाहिए वही शिक्षक अपने कारनामों से बदनाम होते जा रहे हैं और शिक्षक जैसे गरीमामय पद कि भी गरीमा नहीं रख रहे हैं। जी हां एक बार फिर हल्द्वानी में ही स्कूल छोड़ने का झांसा देकर एक शिक्षक ने 9वीं की छात्रा को कार में बैठा लिया। हल्द्वानी की ओर जबरन लाते समय छात्रा ने शोर मचाया तो राहगीरों में हड़कंप मचा। कमलुवागांजा पर लोगों ने घेराबंदी कर शिक्षक की कार रुकवा ली। इसके बाद लोगों ने शिक्षक की जमकर धुनाई लगाने के साथ ही कार तोड़ डाली।

पुलिस ने शिक्षक को हिरासत में ले लिया है। कालाढूंगी के समीप एक गांव में रहने वाली किशोरी माध्यमिक स्कूल में 9वीं की छात्रा है। उसी स्कूल में कुछ समय पूर्व तक कालाढूंगी के पालीटेक्निक के पास रहने वाला शिक्षक मोबीन पढ़ाता था। इसी साल मार्च में उसका तबादला ग्राम गैड़ा, जूनियर हाईस्कूल में हो गया।

इन दिनों शिक्षक घर आया हुआ था। सोमवार की सुबह उसने छात्रा को स्‍कूल छोडऩे की बात कहकर उसे अपनी कार में बैठा लिया। स्कूल ले जाने के बजाय शिक्षक ने कार हल्द्वानी की ओर दौड़ा दी। घबराई छात्रा ने शोर मचाया तो शिक्षक उसे धमकियां देने लगा। वहीं कमलुवागांजा चौराहे पर लोगों ने कार से चिल्ला रही छात्रा की चीख सुनी। लोगों ने पीछा कर कार को रुकवा लिया।

छात्रा की आपबीती सुन आक्रोशित लोगों ने शिक्षक को जमकर पीटा और कार में पथराव कर तोड़फोड़ कर दी। घटना की सूचना पर मुखानी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शिक्षक को हिरासत में लेकर थाने लाया गया। थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि परिजनों ने थाने पहुंचकर शिक्षक के विरुद्ध तहरीर दी है। आरोपी शिक्षक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

गुरु गोविन्द दोउ खडे काके लागों पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय…इस कहावत तो उन शिक्षकों ने शर्मशार कर दिया है जो हवस के पुजारी निकले, जिन्होने गुरु और शिष्य की मर्यादा को ही लाघ दिया।

राष्ट्रीय खेल 2018 के लोगो में दिखेगी उत्तराखंड की छवि

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उत्तराखंड में आयोजित होने वाले 38वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। साथ ही राष्ट्रीय खेल के लोगो में छलांग मारता व्यक्ति, पहाड़-नदियां होगी तथा मस्कट डिजाइन में सुंदर मोनाल पक्षी दिखाई देगा। यह लोगो पूरी तरह से उत्तराखंड की छवि को दर्शाएगा।


सोमवार को 38वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया जा रहा है, यह राज्य के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इसके साथ खेलों की सार्थकता तभी है, जब इन खेलों के बाद उत्तराखंड में खेल के लिए बेहतर माहौल बने। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड का प्रदर्शन श्रेष्ठ करने के लिए अभी से तैयारी करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विदेशों से ट्रेनर और कोच लाए जाएं।

उत्तराखंड से बैडमिंटन, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल, वाटर स्पोर्ट्स, जूडो-कराटे व एथेलेटिक्स में विशेष प्रदेर्शन की संभावना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से पूर्व न्याय पंचायत, ब्लॉक, जनपद एवं राज्य स्तर पर खेल महाकुंभ का आयोजन किया जाए। खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सभी खिलाड़ियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएं ताकि उत्तराखंड में खेलों का वातावरण तैयार हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चयन प्रक्रिया में विशेष निष्पक्षता व पारदर्शिता बरती जाए। राष्ट्रीय खेलों के लिए अवस्थापना विकास पर बल दिया। उन्होंने खेलों के बाद अवस्थापना सुविधाओं के बेहतर रखरखाव और दुरुपयोग को रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने की बात कही। राष्ट्रीय खेलों का प्रमुख केंद्र देहरादून व हल्द्वानी होंगे, लेकिन इनके अतिरिक्त अन्य खेलों के आयोजन के लिए टिहरी, पिथौरागढ़, ऋषिकेश, अल्मोड़ा व रुड़की का भी उपयोग किया जाएगा। बैठक में खेल मंत्री अरविंद पाण्डेय, सचिव खेल शैलेश बगोली, निदेशक युवा कल्याण प्रशान्त आर्य, अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे

कैलाश मानसरोवर यात्रियों का 58 सदस्यीय छठा दल रवाना

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विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रियों का 58 सदस्यीय छठा दल सोमवार को अपने पड़ाव धारचूला के लिए रवाना हुआ, जहां यात्रियों के दल का भव्य स्वागत किया गया। सोमवार को केएमवीएन के हॉली-डे-होम से निकलने के बाद यात्री दल ने धौलछीना में अल्प विश्राम किया। इस दल में 44 पुरुष और 14 महिलाओं समेत कुल 58 यात्री शामिल हैं, हालांकि इसमे उत्तराखंड का एक भी यात्री नहीं है। यात्री दल में सर्वाधिक 11 यात्री उत्तरप्रदेश से हैं। इसके अलावा राजस्थान से 10, महाराष्ट्र से 09, गुजरात से 06, दिल्ली से 07, मध्य प्रदेश से 04, तमिलनाडु से 03, हरियाणा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल से दो-दो तथा झारखण्ड और केरल से एक-एक यात्री शामिल हैं।
यात्री दल में सबसे अधिक उम्र के यात्री इंदौर निवासी 67 वर्षीय अशोक कपड़नवीश है जो पहली बार यात्रा में जा रहे हैं, जबकि सबसे कम उम्र की यात्री राजस्थान की रुपल जैन 22 वर्ष हैं। रूपल भी पहली बार यात्रा में जा रही हैं। दो भाइयों का परिवार गाजियाबाद निवासी पिंकी त्यागी और उनके पति संजय त्यागी भी यात्रा दल में शामिल हैं।

भांग की खेती से प्रतिबंध हटाने की मांग

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समाजवादी पार्टी (सपा)के जिलाध्यक्ष जसवंत सिंह अधिकारी ने भांग की खेती को प्रतिबंधित करने के निर्णय को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप वापस लेने की मांग की। सपा जिलाध्यक्ष ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन के जरिये मांग करते हुए कहा कि भांग पर्वतीय क्षेत्र का प्रसिद्ध मशाला है। इसका उपयोग काश्तकार मसाले के अलावा तरह-तरह के उत्पाद बनाने में करते हैं और भांग की खेती पर्वतीय क्षेत्रों में प्राचीनकाल से ही होती है। भांग के बीज मशालों के रूप में उपयोग होते हैं तो रेशे से रस्सियां बनायी जाती हैं, जबकि इसके तने को जलावन लकड़ी के रूप में उपयोग किया जाता है।
सपा नेता ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में कभी भी नशे के लिए भांग की खेती नहीं हुई है। कुछ लोगों की करतूत को सभी पर थोपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नशे के सौदागरों पर कार्रवाई की जाए लेकिन भांग की खेती को प्रतिबंधित करने के निर्णय सही नही है इस पर पुर्नविचार किया जाए। 

किसानों के कर्ज में ब्याज माफी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’: प्रीतम

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किसानों द्वारा सहकारी बैंकों से लिए गए ऋण की ब्याज माफी के प्रदेश सरकार के फैसले को कांग्रेस ने नाकाफी बताया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने प्रदेश में साल 2013 में आई आपदा से प्रभावित किसानों के लिए इस फैसले को ‘ऊंट के मुंह में जीरे के समान बताया’। उन्होंने सरकार से किसानों के लिए संपूर्ण ऋण माफी की मांग की।

प्रीतम ने सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत के किसानों के ऋण पर ब्याज माफी संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड के सभी किसान गरीब परिवारों से आते हैं। उनकी आय का एकमात्र साधन मात्र खेती है। पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के किसानों की खेती वर्षा जल पर ही निर्भर करती है। इसके अलावा अधिक बारिश व ओला वृष्टि होने के कारण यहां के किसानों की सब्जी, फल समेत सभी फसलें पूर्ण रूप से बर्बाद हो जाती हैं। ऐसी परिस्थितियो में बैंकों व साहूकारों से लिया गया कर्ज लौटाने में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बैंकों ने जिस प्रकार किसानों पर कर्ज लौटाने के लिए विभिन्न माध्यमों से दबाव बनाया है उससे किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में भी किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था लेकिन अब सरकार उससे विमुख होती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में उत्तराखंड राज्य में आई दैवीय आपदा से प्रभावित लोग बमुश्किल उबर पाए हैं। सरकार की मात्र ब्याज माफी की घोषणा उन्हें राहत पहुंचाने के लिए नाकाफी है। उन्होंने कहा कि राज्य में समय-समय पर हुई अतिवृष्टि व 2013 में आई भीषण आपदा को देखते हुए उत्तराखंड राज्य के किसानों का सम्पूर्ण ऋण माफ किया जाना चाहिए।

जीएसटी लागू होने के चार दिन बाद भी व्यापारी व ग्राहकों में असमंजस

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देशभर में जीएसटी लागू होने के तीन दिन बाद भी दून के बाजारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इससे जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। कुछ सुपर मार्केट को छोड़कर अधिकतर व्यापारी सामानों का बिल देने में असमर्थता जता रहे हैं। कीमतों को लेकर भी व्यापारी से लेकर ग्राहक तक दुविधा में है। एक जुलाई से देशभर में ‘एक देश, एक कर’ व्यवस्था लागू कर दी गई लेकिन, बाजारों में व्यापारियों के बीच दुविधा की स्थिति बनी हुई है। कुछ ने तो अब तक जीएसटी नंबर ही नहीं लिया, जो एक जुलाई से पहले लिया जाना था। वहीं, जीएसटी को लागू नहीं किए जाने जैसी अफवाहों के चलते व्यापारी भ्रमित हो गए। इतना ही नहीं इसे लेकर राजनीति भी जमकर हुई। इसमें कपड़ा व्यापारियों को तो यह तक आश्वासन दिया गया कि इस कारोबार को जीएसटी से बाहर करने की बात चल रही है। इसी कारण इन व्यापारियों ने अपने सिस्टम को अपडेट नहीं कराया और अब परेशानी झेलने को मजबूर है।
अब स्थिति यह है कि व्यापारी ग्राहकों को बिल नहीं दे पा रहे और खुद भी टैक्स भरने को लेकर दुविधा में है। हालांकि, अभी विशेषज्ञ भी इसके नफा-नुकसान का आंकलन करने में जुटे हुए हैं। जीएसटी को लेकर कुछ चीजों पर सीधा असर पड़ रहा है। खासकर वह उत्पाद या सेवाएं जो अभी तक राज्य व केंद्र सरकारों के करों के दायरे के विभाजन से बाहर थी। जैसे भवन निर्माण सामग्री। इसे लेकर इसलिए भी ज्यादा असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि यह दो राज्यों के राजस्व का मामला है। अभी जीएसटी के निर्धारण व जीएसटी नंबर न लिए जाने से यह सप्लाई पूरी तरंह से ठप पड़ी हुई है।
अगर दून के मुख्य बाजारों की बात करें तो अधिकतर व्यापरियों को अपने व्यवसाय की जीएसटी के अनुसार नई टैक्स दर की पूरी तरह से जानकारी नहीं है। दिनभर व्यापारी अपने व्यवसाय से जुड़े लोगों को फोन पर संपर्क कर आंकड़े जुटाने में लगे है। कुछ गलत अफवाहें भी बाजार में फैलाई जा रही हैं। पलटन बाजार में 40 साल से कपड़े का व्यापार कर रहे संजीव अरोड़ा का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार इस व्यवसाय को जीएसटी से बाहर रखेगी, लेकिन अब जीएसटी नंबर के लिए आवेदन करना ही पड़ा। अब भी किस आधार पर कितना टैक्स लगाकर बिल बनाया जाए यह साफ नहीं हो पा रहा है।
धामावाला में जनरल स्टोर मालिक बलदेव सिंह का मानना है कि जीएसटी निश्चित रूप से लोगों के लिए फायदेमंद सबित होगा, लेकिन अभी इसके लागू होने के बाद कुछ परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डिस्पेंसरी रोड पर इलेक्ट्रॉनिक की दुकान चलाने वाले व्यापारी अनिल गोयल का कहना है कि जीएसटी को लेकर जितने भ्रम की स्थिति में व्यापारी हैं, उतने ही ग्राहक भी परेशान है। इसका कारण यह है कि कुछ सामानों का दाम जो कम होना बताया जा रहा है, किन्हीं कारणों से जीएसटी के बाद वह मंहगा हो गया है। अब ग्राहक दुकानदार से जिरह कर रहे हैं कि बिल दो। ग्राहक भी इस नई टैक्स व्यवस्था को लेकर जानकारी के आभाव में व्यापरियों से भिड़ने पर आमादा है।

भवन निर्माण सामग्री पर पड़ा सीधा असर
दून में पहले से ही कीमतों के कारण लोगों की परेशानी का कारण बनी भवन निर्माण सामग्री अब किसी भी कीमत पर नहीं मिल पा रही है। जीएसटी के बाद उत्तराखंड में हालात और भी बदतर हो रहे है। पिछले कुछ माह से एक ओर सरकार को करोड़ो रुपये की राजस्व हानि हुई। वहीं, निर्माण सामग्री में दो से तीन गुना तक बढ़ोत्तरी ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। पहले अदालत के आदेश के बाद खनन बंद होने से और बाद में ट्रकों पर सामग्री के भार तय करने के बाद से ही दामों में भारी उठाल आया। अब बारिश के कारण नदियों में खनन बंद होने और जीएसटी लागू होने के बाद तो किसी भी दाम में लोगों को निर्माण सामग्री नहीं मिल पा रही है।

प्रदेश के ग्राम प्रधानों ने दिए सामूहिक इस्तीफे

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ग्राम प्रधानों का मानदेय 750 रुपये प्रतिमाह से पांच हजार रुपये प्रतिमाह करने, पंचायतीराज एक्ट लागू करने, ग्राम पंचायत को मिलने वाली राज्य वित्त की धनराशी पूर्व की भांति यथावत करने की मांग को लेकर प्रदेश के प्रधानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।सोमवार को प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ग्राम प्रधानों ने सामूहिक इस्तीफे सौंपे। ग्राम प्रधान संगठन ने उनकी मांगें न माने जाने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ उग्र-आंदोलन की चेतावनी भी दी। प्रदेश सरकार ने यह फैसला केंद्र की ओर से जिला पंचायतों के मद में जारी होने वाली विकास योजनाओं की धनराशि को सीधे ग्राम सभा को देने के निर्णय के बाद लिया है। उधर, राज्य सरकार का कहना है कि यह राजनीति से प्रेरित प्रतिक्रिया है। कांग्रेस से जुड़े प्रधान ही इस्तीफे दे रहे हैं।
प्रदेशभर में ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले लगभग 7850 ग्राम प्रधानों ने जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्राम सभाओं के वित्त में कटौती से नाराज ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारियों को अपने इस्तीफे सौंपे। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गिरीवीर परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य वित्त के आधार पर ग्राम पंचायतों को मिलने वाली धनराशि में 60 प्रतिशत की कटौती की है। ग्राम प्रधान संगठन का आरोप है कि इस कटौती से पंचायत स्तर पर चल रही योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
परमार ने कहा कि वे लंबे समय से ग्राम पंचायत को अधिकार संपन्न बनाए जाने और ग्राम प्रधान का मानदेय को बढ़ाकर पांच हजार किए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट राज्य वित से मिलने वाली धनराशि में कटौती कर दी। संगठन के अध्यक्ष परमार ने कहा कि अगर बजट में हुई कटौती को वापस लेने के साथ ही उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन पहले ब्लाक स्तर पर और उसके बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो राजधानी में डेरा डालकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, ग्राम पंचायतों के बजट में हुई कटौती पर जिला पंचायतों का कहना है कि जिला पंचायत के माध्यम से भी ग्राम सभाओं में विकास कार्य किए जाते है। जिला पंचायत देहरादून के अध्यक्ष चमन सिंह ने प्रधान संगठन के इस कदम को अप्रजातांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति जिला पंचायतों के सामने एक वर्ष पूर्व आई थी। इसमें केंद्र सरकार ने जिला पंचायतों को मिलने वाला बजट सीधे ग्राम पंचायतों को देना शुरू कर दिया था लेकिन, जिला पंचायत सदस्यों ने प्रधानों की तरह ऐसे इस्तीफा नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त से विभिन्न योजनाओं का सौ फीसदी बजट भी ग्राम पंचायतों को और राज्य की ओर से जारी होन वाली धनराशि भी अगर सीधे ग्राम सभा को दे दी जाए तो जिला पंचायत की भूमिका क्या रह जाएगी।
उधर, देहरादून में ग्राम प्रधान संगठन से जुड़े ग्राम प्रधान जिला पंचायत राज अधिकारी एवं जिला विकास अधिकारी के कार्यालय पर एकत्रित हुए और प्रदर्शन करते हुए सामूहिक इस्तीफे सौंपे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा कर रही है, जिसे किसी भी दशा में सहन नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि राज्य वित की कटौती को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाएं और उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम 2016 को पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया जाए। 73वें संविधान के लिए अधिकार दिए जाएं। 

बेटी की पर्फोरमेंस पर पिता के बोल

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पिता कुंदन सिंह बोले पाकिस्तान के खिलाफ बेटी अपने देश को जीत दिलाएगी, ये तो विश्वास था। मगर अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन करेगी, ये सोचा भी ना था, पिता कुंदन सिंह बोले, ‘एकता ने आज चैंपियंस ट्रॉफी में पुरुष टीम की हार का बदला ले लिया। और पाकिस्तान को जवाब दे दिया की भारत की महिलाए भी कम नहीं है।’

सांस्कृतिक नगरी, अल्मोड़ा की गलियों में कुछ साल पहले तक अपनी गुगली से मोहल्ले के लड़कों को क्लीन बोल्ड करने वाली एकता बिष्ट ने पाकिस्तान के खिलाफ अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन कर भारतीय पुरुष टीम की हार का भी बदला ले लिया। जैसे-जैसे एकता पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों की गिल्ली बिखेरती रही परिजनों के चेहरों पर खुशी की बढ़ती रही।

खजांची मोहल्ला (अल्मोड़ा) में रहने वाली एकता ने पांच वर्ष पहले भारतीय महिला टीम में जगह बनाई थी। शुरूआत बेशक संघर्षपूर्ण रही पर पिछले दो वर्षों से एकता ने अपनी गेंदबाजी के बूते खुद को स्थापित करने में सफलता हासिल की। रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए रोमांचक मुकाबले में एकता ने पांच विकेट झटके तो अल्मोड़ा खुशी से झूम उठा। खासकर उसके मोहल्ले के उन युवाओं में जबर्दस्त खुशी थी जिनके साथ कभी भारतीय महिला टीम की यह स्टार तंग गली में खुद को कुशल बनाने में जुटी थी।

रिटायर्ड फौजी पिता कुंदन सिंह बिष्ट व माता तारा देवी बिष्ट हों या उसका बड़ा भाई विनीत और दीदी श्वेता, मैच खत्म होने तक सभी टेलीविजन से चिपके रहे। मैच खत्म हुआ और एकता मैन ऑफ द मैच बनी तो खुशी का कोई ठिकाना ना था। लोग घरों से बाहर निकल हुक्का क्लब तक आतिशबाजी करने लगे।