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बीज धोटाले में दस अधिकारियों पर गाज

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उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम लि. (टीडीसी),पंतनगर में वर्ष 2015-16 के दौरान हुए करोड़ों के बीज घोटाले में जांच के बाद एमडी समेत दस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। शासन के निर्देश पर निगम के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीके सिंह ने पुलिस को तहरीर दी। आरोपी अधिकारी में से एक की मौत हो चुकी है। पांच अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, जबकि एक अधिकारी अगस्त में रिटायर होने वाले हैं। एक रिटायरमेंट से पांच दिन पूर्व अन्य मामले में निलंबित हो चुके हैं। वहीं, आरोपी अधिकारी अपने आपको निर्दोष बताते हुए बचाव के लिए कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

टीडीसी में वर्ष 2015-16 के दौरान हुए गेहूं बीज घोटाले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में कृषि निदेशक गौरीशंकर, आइजी पुलिस जीएस मर्तोलिया एवं अपर सचिव सुनील श्रीपांथरी शामिल थे, कमेटी ने जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए लेखाकार से लेकर तत्कालीन एमडी तक 10 लोगों पर कार्रवाई की संस्तुति की थी।

इसके तहत निगम के उपमुख्य काॢमक अधिकारी/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीके सिंह की तहरीर पर पंतनगर थाने में धारा 409 एवं 420 के तहत मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया है। तहरीर में निगम ने आरोपी अधिकारियों पर बीज घोटाले में निगम को 16 करोड़ रुपये की राजस्व हानि का आरोप लगाया गया है।

टीडीसी के प्रबंध निदेशक ज्योति नीरज खैरवाल के मुताबिक कमेटी की जांच में उक्त अधिकारी दोषी पाए गए थे। शासन ने कार्रवाई का आदेश था, जिसके अनुपालन में मुकदमा दर्ज कराया गया।

दून में उमस भरी गर्मी, प्रदेश में बारिश के आसार

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मौसम विभाग की तरफ से भारी बारिश की चेतावनी। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, नैनीताल और चम्पावत जिलों में भारी वर्षा के आसार।आने वाले तीन दिन हो सकती है बारिश। । सभी जनपदों के जिला प्रशासन को किया गया अलर्ट।

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून सहित प्रदेश भर में आज बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक राज्य में इसी तरह का मौसम बना रहेगा। राजधनी देहरादून में शनिवार सुबह आसमान में पूरी तरह बादल छाये हुए थे। जबकि सुबह आठ बजे के बाद धूप ने लोगों को परेशान किया। बादलों और सूर्यदेव का दोपहर तक लुकाछिपी का खेल चलता रहा। जिससे उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल रहे।

मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में शनिवार और रविवार को घने बादल और हल्की बारिश होने की संभावना है। एक सप्ताह तक राज्य के गढ़वाल और कुमाउं दोनों मंडलों में बारिश हल्की व मध्यम गति से होने की उम्मीद है। जबकि मैदानी क्षेत्रों में आसमान में बादल छाये रहेंगे। इन क्षेत्रों में गर्म और आद्रता के कारण उमस भरी गर्मी लोगों को सतायेगी।

 

अब उत्तराखंड के शिक्षक पहनेंगे ग्रे पैंट-आसमानी शर्ट

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शिक्षकों ने स्वैच्छिक ड्रेस कोड को लेकर रुचि नहीं दिखाई तो आखिरकार विभाग ने ही शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड तय कर दिया। विभाग के ड्रेस कोड के अनुसार एक अगस्त से प्रदेश के तमाम स्कूली शिक्षक सिल्वर ग्रे पैंट और गहरे आसमानी रंग की शर्ट में स्कूल पहुंचेंगे। इसी तरह महिला शिक्षकों के लिए गहरी आसमानी रंग साड़ी या शूट सलवार पहनकर स्कूल आना होगा। इतना ही नहीं खुद शिक्षा मंत्री भी बैठकों में इसी ड्रेस कोड में शामिल होंगे।

राज्य के स्कूलों में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने की पहल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने की है। इसको लेकर शिक्षकों ने हल्का विरोध भी रहा। हालांकि, पूर्व में विभाग ने शिक्षकों को छूट प्रदान की थी कि वे अपनी इच्छा से ड्रेस कोड तैयार कर विभाग को अवगत करा दें। लेकिन, शिक्षकों ने इसमें रुचि नहीं ली और निर्धारित तिथि तक शिक्षकों की ओर से विभाग को कोई सुझाव प्राप्त नहीं हुआ। शिक्षा महानिदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने शुक्रवार को अपर निदेशक कुमाऊं व गढ़वाल मंडल को जारी निर्देश में कहा कि शिक्षक संगठनों की ओर से इस मामले में कोई जानकारी नहीं आने के चलते विभाग ने खुद ड्रेस कोड तय कर दिया है। इसका अनुपालन एक अगस्त से सुनिश्चचित करें।

कैलाश हाॅस्पिटल के माइक्रोवैस्क्यूलर सर्जरी ने लौटाई पंकज की बांह

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घटना बीते 16 मई की है, जब पंकज अपने गांव-सेखूपुरा, सहारनपुर में अपने खेत में थ्रेशर मशीन पर काम कर रहा था तभी अचानक पंकज की दाहिनी बाँह थ्रेशर मशीन में फंस कर बुरी तरह कुचल गई। पंकज के दाहिने बाजू की दोनों हडिड्यां फ्रेक्चर हो गई थी, मांसपेशियां तथा त्वचा कुचली गई थी व खून की नाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा था जिससे पंकज के बाजू तथा हाथ में खून पहुंचना बंद हो गया था और उसके दांयें बाजू के कोहनी के कटने का खतरा पैदा हो गया था।

पंकज को सहारनपुर में डाॅक्टर्स ने जांच के बाद बताया कि बाँह में रूका खून की वजह से बाँह काटनी पड़ सकती है। पंकज के परिजनों ने उसे दिल्ली या चंडीगढ़ ले जाने की सलाह दी, लेकिन पंकज ने देहरादून अाने का फैसला किया। देहरादून में काफी जगह से मना होने के बाद अंततः कैलाश अस्पताल में पंकज को डाॅ. सचिन तेवतिया(चिकित्सा अधीक्षक, कैलाश हाॅस्पिटल) के मार्गदर्शन में ट्रामा टीम जिसमें कि सीनियर आॅर्थोपेडिक डाॅ. विनीत त्यागी, सीनियर प्लास्टिक सर्जन डाॅ. हरीश घिल्डियाल एवं चीफ इन्ट्रास्विस्ट डाॅ. संजीव निवारगी द्वारा देखा गया।

पंकज केा तुरंत आॅपरेशन थिएटर भेजा गया जहां उसकी बाँह की टूटी हडिड्यों की नेलिंग की गई तथा उसके बांह की चोटिल खून की नाड़ी को माइक्रोवैस्कुलर तकनीक द्वारा ठीक कर बाजू तथा हाथ में खून का दौरा दोबारा शुरू किया गया। इस इमरजेंसी सर्जरी द्वारा पंकज की बाँह की कई महत्वपूर्ण संरचनाएं बिना किसी मजबूत आवरण के खुली पड़ी थी जिनको तत्पश्चात् माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी तकनीक से शरीर के किसी भाग से उतकों को स्थानांतरित करना अनिवार्य था।

डाॅ. हरीश घिल्डियाल ने 20 मई को 12 घंटे चले माइक्रोवैस्कुलर ऊतक स्थानांतरण सर्जरी को सफल अंजाम दिया। इस सर्जरी में पंकज की पीठ की एक मांसपेशी को उसकी खून की सूक्ष्म नाड़ियों को पंकज की बांह की सूक्ष्म नाड़ियों के साथ माइक्रोस्कोप की मदद से स्थानांतरित किया। 31 मई को पंकज की बाजू पर स्किन ग्राफटिंग का सफल आॅपरेशन किया गया। पंकज की सभी पुनर्रचना संबंधी सर्जरियां सफल रही तथा वह तेजी से सामान्य हो रहा है।

बीएलओ घर-घर जाकर बनाएंगे मतदाता

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जनपद पौड़ी गढ़वाल में 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवाओं के नाम निर्वाचन नामावली में जोड़ने के लिए बीएलओ घर-घर जाएंगे। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिले की छह विधानसभा क्षेत्रों में निर्वाचक नामावली में मतदाताओं के नाम जोड़ने और नाम सत्यापन का कार्य 10 जुलाई से 10 अगस्त तक किया जाएगा।

जिला निर्वाचन अधिकारी व जिला मेजिस्ट्रेट सुशील कुमार ने बताया कि निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या के आंकड़ों में एक लाख से अधिक का अंतर है। आयोग ने आशंका जताई है कि मतदाताओं का यह आंकड़ा अलग-अलग आयु वर्ग के अनुसार अधिक भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में 18 से 21 आयुवर्ग की जनसंख्या के सापेक्ष इस आयु वर्ग में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या बेहद कम है, जो कि चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि अगले एक माह तक ‘‘कोई मतदाता न छूटे‘‘ अभियान के तहत विधानसभावार बीएलओ को घर-घर जाकर नए मतदाताओं को नामावली में पंजीकृत करने और मौजूदा मतदाताओं के नाम सत्यापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बीएलओ निर्वाचक नामावली में किसी भी प्रकार की त्रुटि को संशोधित करने, एक से अधिक मतदेय स्थल पर पंजीकृत नामों को हटाने और संबंधित क्षेत्र से प्रवास कर चुके या जिनकी मृत्यु हो चुकी है ऐसे मतदाताओं के नामों को भी सत्यापित करेंगे।
इसके अलावा बीएलओ एक जनवरी 2017 से 30 जून 2017 के बीच मृत हो चुके मतदाताओं की सूची मतदेय स्थलवार तैयार करेंगे। इस कार्य के लिए सरकारी विभागों के अलावा शिक्षण संस्थानों, स्वयंसेवी संस्थानों युवा एवं महिला मंगल दलों तथा सामाजिक संगठनों से भी सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि संभावित त्रुटियों आदि मामलों के निस्तारण के लिए जिला स्तर पर टीम गठित की जाएगी।

महिला मंगल दल कर रहा सड़कों का रख-रखाव

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राज्य सरकार ने पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों के रख-रखाव का काम महिला मंगल दलों को दिया है। फिलहाल, पायलट के रूप में यह योजना रूद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी जनपदों में चल रही है। महिला मंगल दल के सदस्यों से बातों से पता चला कि महिलाएं राज्य सरकार के प्रति अवसर प्रदान करने के लिए आभार प्रकट कर रही हैं और बड़े कार्याें की मांग कर रही हैं। सुबोधिनी देवी, अध्यक्षा महिला मंगल दल रूद्रप्रयाग, ने कँहा कि, ‘घर का काम निपटा कर अपनी सुविधा के हिसाब से कार्य करने का लाभ मिल रहा है।’
मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए अन्य जनपदों में भी लागू किया जाय। इन्हे ट्रेनिंग देकर रिटेनिंग वाल बनाने, पैच वर्क करने सहित सड़क मरम्मत के और भी कार्य दिये जांय। महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इससे जोड़ा जाय। इन्हे मुख्य मार्गाें का रख-रखाव भी दिया जा सकता है। गौरतलब है कि महिला मंगल दलों को सड़कों की सफाई, मलबा हटाने, नाली की सफाई, पत्थर हटाने आदि सड़कों के देखभाल का कार्य दिया गया है। पीएमजीएसवाई के इंजीनियरों  की देखरेख में ही महिलाएं कार्य करती हैं, चमोली की कविता देवी, अध्यक्षा महिला मंगल दल ने कहां,  ‘हम लोग सक्षम हैं। और काम भी हम कर सकते हैं।’
प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास श्रीमती मनीषा पवांर और अपर सचिव श्री राघव लंगर ने भी दल की महिलाओं से बात की। राज्य सरकार की इस अनुपम पहल की सराहना की मांग की कि उन्हें और भी काम दिये जायं। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

देश के जाने माने पत्रकार मार्क टुली की तबियत बिगड़ी,जाॅली ग्रांट में भर्ती

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बीबीसी के पूर्व भारतीय संवादाता मार्क तुली को शुक्रवार को देहरादून जिले के जॉलीग्रांट हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल ट्रस्ट के गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) में दोपहर में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें एम्बुलेंस सें हरिद्वार से लाया गया, तूली हरिद्वार में एक डाक्यूमेंट्री के सिलसिले में आए थे।

तुली 81 साल के हैं। बताया जा रहा है कि, “मरीज पिछले चार-पांच दिनों से दस्त और उल्टी से पीड़ित थे। शुक्रवार को गुर्दे से रक्तस्त्राव शुरु होने से उन्हे अस्पताल ले जाया गया। उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है और अब उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें निरीक्षण में रखा गया है।डॉक्टर ने कहा कि मरीज को शनिवार को कोलोनोस्कोपी से गुजरना होगा जिसके बाद उसकी स्थिति ज्ञात होगी।

अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी सुशील कप्तियाल ने कहा, “अस्पताल मार्क टुली की  अच्छे से देखभाल कर रहा है।”

आपकों बतादें कि मार्क ने पीएम मोदी पर किताब लिखी है और साथ ही उन्हें राजनिति के कूटनितिज्ञ के नाम से भी जाना जाता है।

अब ”पीएसी” करेगी जंगल में छुपे अपराधियों को ढूंढने में मदद

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उत्तराखंड में कुल भूमि क्षेत्र में जंगल का 60% से अधिक हिस्सा है – जो कि अपराधियों द्वारा अलग-अलग ठिकानों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य पुलिस विभाग ने “जंगल सरवाइवल” में प्रशिक्षण के लिए अपने प्रांतीय सशस्त्र सेना (पीएसी) के कर्मियों को भेजने का निर्णय लिया है। गहन जंगल सरवाइवल में प्रशिक्षण के माध्यम से, पांच बटालियनों में तैनात पीएसी कर्मियों को जंगलों के मुश्किल इलाके से परिचित कराया जाएगा और जंगल में तलाशी अभियान चलाने के लिए भी तैयार किया जाएगा।

डिपार्टमेंट ऑफ पुलिस ऑफिस (डीजीपी) एम ए गणपति ने बताया कि, “शुरू में, प्रत्येक पीएसी बटालियन से एक टुकड़ी को विशेष जंगल सरवाइवल प्रशिक्षण से गुजरना होगा। सप्ताह भर के प्रशिक्षण में उन्हें जंगल के अस्तित्व और आपरेशन तकनीकों के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया जाऐगा।”

यह प्रशिक्षण उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, हरिद्वार और पौड़ी के जंगल में आयोजित किया जाएगा। राज्य में तीन पीएसी बटालियन और दो भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी) हैं जो रुद्रपुर, हरिद्वार और रामनगर में स्थित हैं।

गणपति ने कहा कि इसका उद्देश्य जंगलों को अपराधियों के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना और उत्तराखंड के वन क्षेत्र में शिकार गतिविधियों को रोकना है। डीजीपी ने कहा, “हम वन विभाग के समन्वय में इस प्रशिक्षण का संचालन करने जा रहे हैं।”

सूत्रों के मुताबिक, यह कदम कुमांऊ क्षेत्र के कुछ इलाकों जैसे अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के राजस्व इलाकों में ध्यान केंद्रित करने वाले वामपंथी उग्रवाद को भी कंट्रोल में लेने का इरादा है। हालांकि, कोई आधिकारिक इसकी पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं है।

कर्मियों का चयन उम्र और फिटनेस के स्तर पर आधारित होगा; केवल योग्यतम को ही प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। चयनित कर्मियों को जरूरी बुनियादी चीजों के साथ जंगल भेज दिया जाएगा, और उन्हें वन में प्राप्त भोजन और पानी पर जीवित रहने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।

इसके अलावा, उन्हें आवश्यक उपकरण और जंगल सरवाइवल किट उपलब्ध कराएं जाऐंगे। प्रशिक्षण के दौरान, उन्हें अलग-अलग टास्क जैसे नक्शा पढ़ने, जंगल में मार्ग ढूंढने और शिविरों की स्थापना के लिए कार्य दिए जाएंगे।

यह पता चला है कि पूरा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, इनडोर और आउटडोर ब्रीफिंग सहित पहले चरण के साथ स्वथ; दूसरे चरण में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ जंगल में संयुक्त गश्त को शामिल किया गया; और अंत में, कर्मियों को लगभग एक सप्ताह तक अस्तित्व प्रशिक्षण के लिए जंगल भेज दिया जाएगा।

यह पूरा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, पहले चरण में इनडोर और आउटडोर ब्रीफिंग के साथ; दूसरे चरण में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ जंगल में संयुक्त गश्त को शामिल किया जाएगा और अंत में कर्मियों को लगभग एक सप्ताह तक सरवाइवल प्रशिक्षण के लिए जंगल भेज दिया जाएगा।

पीएसी मुख्यालय अभी प्रशिक्षण के लिए रूपरेखा तैयार कर रहा है, लेकिन कावड़ यात्रा की समाप्ति के बाद ही इस योजना के शुरू होने की उम्मीद है।

उत्तराखण्ड के न्यायालयों में दो लाख से अधिक केस पेंडिंग

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उत्तराखंड के न्यायालयों में कुल 2 लाख 31 हजार 478 केस लंबित है जिसमें 32190 मामले उच्च न्यायालय में लम्बित है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड के न्यायालयों में एक चौथाई से अधिक जजों व मजिस्ट्रेटों के पद रिक्त हैं। यह तथ्य सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से प्रकाश में आया है।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी से उत्तराखंड में लम्बित केसों के विवरण की सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में हाईकोर्ट के लोेक सूचना अधिकारी/उप निबंधक के.सी. सुयाल ने पत्रांक 2441 से सम्बिधित विवरणों की सत्यापित फोटो प्रतियां उपलब्ध करायी है।

नदीम को उपलब्ध कराये गये जनवरी-मार्च 2017 के विवरण के अनुसार 31 मार्च 2017 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 32190 केस लम्बित है जिसमें 22537 सिविल तथा 9653 फौजदारी केस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अधीनस्थ न्यायालय में कुल 1 लाख 99 हजार 288 केस लम्बित है। जिसमें 32770 सिविल तथा 1 लाख 66 हजार 518 फौजदारी मामले शामिल हैं।
सूचना से मिली जानकार के अनुसार 31 मार्च 2017 को उच्च न्यायालय में 11 जजों के स्वीकृत पदों मेें से 4 रिक्त थे तथा अधीनस्थ न्यायालयों में जजों व न्यायिक अधिकारियों के कुल 291 पदों में से 75 पद रिक्त हैं। उल्लेखित है हाईकोर्ट में इसके बाद 3 जजों की नियुक्ति होने से हाईकोर्ट में 1 रिक्त पद रह गया है।

हाईकोर्ट में दिसम्बर 2014 के अन्त में कुल 23105 लम्बित केस लम्बित थे जो दिसम्बर 2015 में बढ़कर 26680, 2016 में बढ़कर 32004 तथा मार्च 2017 में 32190 हो गये है।
अधीनस्थ न्यायालय में दिसम्बर 2014 के अंत कुल लम्बित केसों की संख्या 1 लाख 45 हजार 326 थी, जो दिसम्बर 2015 में 1,66,618 दिसम्बर 2016 में 190948 तथा मार्च 2017 में 1,99,288 हो गयी है।
हाईकोर्ट व अधीनस्थ न्यायालयों में अपराधिक (फौजदारी) के लम्बित केसों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। जहां 2014 के अंत में हाईकोर्ट में अपराधिक मामले केवल 6436 लम्बित थे, 2015 में बढ़कर 8120 तथा 2016 में 9440 हो गये तथा मार्च 2017 में इनकी संख्या 9653 थी।

 इसी प्रकार अधीनस्थ न्यायालयों में 2014 के अंत में कुल 1 लाख 15 हजार 723 अपराधिक मामले न्यायालयों में लम्बित थे जो 2015 में बढ़कर 135736 तथा 2016 में 1,58,886 हो गये तथा मार्च 2017 में 1,66,518 हो गये हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने गंगा को जीवित मनुष्य के दर्जे के हाई कोर्ट के फैसले पर लगाईं रोक

अब गंगा और यमुना नहीं रहेंगी जीवित मानव, गंगा को जीवित मानव का दर्जा दिए जाने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही दिन स्टे लगा दिया है। गंगा और यमुना नदी को जीवित मानव का दर्जा दिए जाने पर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के तहत स्टे लगा दिया है।

बता दे की जनहित याचिका पर कार्यवाही करते हुए हाई कोर्ट ने गंगा और यमुना को जीवित मानव का दर्जा दिया था जिसको त्रिवेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चेलेंज किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल स्टे लगा दिया है जिससे गंगा प्रेमी काफी नाखुश दिखाई दे रहे है।

गौरतलब है कि नैनीताल हाई कोर्ट ने एक याचिका का निस्तारण करते हुए गंगा और यमुना नदी को जीवित का दर्जा दिया था इससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ खनन और  नदी के साथ ही गंदगी फेंकने वालों पर भी अाय.पी.सी. की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश था। गंगा और यमुना को एक जीवित मानव की तरह कानूनी दर्जा देते हुए अदालत ने नमामि गंगे के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश दिए थे और उन्हें गंगा और यमुना और उसकी सहायक नदियों की सुरक्षा करने उनके संरक्षण की जिम्मेदारी दी थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कांग्रेस ने त्रिवेंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जय निर्मला ने त्रिवेंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे सिर्फ खनन माफिया को फायदा पहुंचाने की बात कही है।