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आसन नदी के टापू पर फसें 3 लोग को सकुशल निकाला

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मूसलाधार बारिश से आसन नदी, विकासनगर के जलस्तर मे वृद्धि दिनों दिन हो रही थी लेकिन अाज बैराज पर यमुना नदी का पानी छोड़े जाने से बैराज पर पानी का दबाव बढ गया। नदी मे मछली पकड़ने गये 3 लोग, कंजा मटक माजरीके रहने वाले, नदी के बीच मे टापू पर फंस गये।

सूचना पर प्रभारी निरी. कोतवाली विकासनगर, श्री एस.एस. नेगी, उ.नि. रामनरेश शर्मा, चौकी प्रभारी हरबर्टपुर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा तत्काल बैराज में नियुक्त कर्मचारियो से संपर्क स्थापित कर बैराज के गेट को बंद कराकर पानी के बहाव को कम किया, नहीं तो टापू में फसे व्यक्ति बहाव में बह सकते थे। उसके पश्चात् स्थानीय गोताखोरो की कडी मश्कत के बाद तीनो व्यक्तियो को सकुशल नदी से बहार निकाला गया, जिसकी स्थानीय जनता द्वारा भूरी भूरी प्रशंसा की गयी।

डीएम दीपक रावत ने किया वृक्षारोपण

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जिलाधिकारी दीपक रावत ने आज हरेला पर्व की शुरूआत कलेक्ट्रेट प्रांगण में पौधारोपण के साथ की। जिलाधिकारी कार्यालय रोशनाबाद में प्रेम नर्सिंग होम की संचालिका डा. संध्या शर्मा के सौजन्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजत किया गया। जिलाधिकारी, डा संध्या तथा जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने रूद्राक्ष, नीम, बरगद तथा फलों के पौधे रोपित किये। जिलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि प्रत्येक वर्ष जुलाई माह में मनाये जाने वाले हरेला पर्व को सभी कार्यालयाध्यक्ष व्यापक रूप से मनायंे। क्योंकि यह एक ऐसा पर्व है जो पृथ्वी को हरा भरा बनाने का संदेश देता है।

डा. संध्या शर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर जीवन जीने के लिए हवा, पानी और मिट्टी तीन आधार हैं। और इन तीनों के अभाव स्वस्थ जीवन सम्भव नहीं है।
अवसर पर ज्वांइट मजिस्ट्रेट आर. भण्डारी, सीएमओ डा0 रविन्द्र थपलियाल, डिप्टी सीएमओ डा0 एच0डी0 शाक्य, अध्यक्ष प्रेस क्लब हरिद्वार मनोज सैनी, वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा, राजकुमार, धर्मेन्द्र चैधरी, आशीष मिश्रा, तनवीर अली, राहुल वर्मा, सुनील पाल, आदि उपस्थित थे।

आयुर्वेदिक व्यवसाय के लिए उत्तराखंड में लागू हो सकता है नया कानून

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उत्तराखंड सरकार आयुर्वेद के व्यापार को विनियमित करने के लिए एक अधिनियम पेश करने की योजना बना रही है, जो प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली है जिसे भारत में बड़े पैमाने पर अनुसरण किया जाता है।

यदि लागू किया जाता है, तो उत्तराखंड संभवतः आयुर्वेद उत्पादों और दवाओं की बिक्री की जांच करने के लिए नियमों को लागू करने वाला पहला राज्य होगा। लोकसभा चुनाव से पहले, भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा था कि यह आयुष को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक निवेश में वृद्धि करेगा और भारतीय दवाओं और आधुनिक औषधियों के लिए एकीकृत पाठ्यक्रम शुरू करेगा।

आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि एक बार यह अधिनियम लागू हो गया तो कोई भी चिकित्सा दुकान राज्य में प्रिस्क्रिप्शन के बिना आयुर्वेद की दवा बेचने में सक्षम नहीं होगा।एक्जिम बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय हर्बल उद्योग का अनुमानित बजट 4,205 करोड़ रुपये है। आयुर्वेदिक और संबद्ध हर्बल उत्पाद का निर्यात 440 करोड़ रुपये अनुमानित  है।2020 तक घरेलू व्यापार 7,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।

उत्तराखंड आयुर्वेद की दवाओं और उत्पादों का केंद्र है, योगगुरु रामदेव ने हरिद्वार में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के मुख्यालयों हैं तो श्री श्री रविशंकर द्वारा पदोन्नत कंपनी श्री श्री आयुर्वेद, उत्तराखंड में स्थित है। इसके अलावा, हरिद्वार, कोटद्वार और अलग-अलग हर्बल और आयुर्वेद उत्पादों को बनाने वाली अन्य औद्योगिक स्थलों में कई अन्य छोटे उत्पादन इकाइयां हैं।

एलोपैथिक दवा की दुकानों और यहां तक कि सामान्य दुकानों में आयुर्वेद की दवाएं बेची जाती हैं, जो आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के मुताबिक, सरकार को रोकना है, “काउंटर पर आयुर्वेद उत्पाद खरीदने की प्रवृत्ति को बंद करने की जरुरत है। हम आयुर्वेद के व्यापार को विनियमित करने के लिए एक अधिनियम पर काम कर रहे हैं। एक बार कानून लागू हो जाता है, तो केवल सरकारी दवा भंडार पर ही आयुर्वेद दवाओं को बेचा जा सकेगा।

इसके अलावा, इस अधिनियम में एक और खास बात होगी आयुर्वेद की दवाएं केवल अधिकृत चिकित्सकों द्वारा बेची जा सकती हैं और वह भी एक डॉक्टर के पर्चे देने पर हीं। आयुर्वेद से जुङे लोगों जैसे कि वेद्ध शिखा प्रकाश का मानना है कि, ‘अगर उत्तराखंड सरकार आर्युवेदिक दवांईयों की सुरक्षा के लिए नए नियम लेकर आते हैं तो इससे अच्छा कुछ नहीं होगा। आर्युवेदा का गढ़ माने जाने वाले राज्य में नियमों की कमीं से बहुत नुकसान होता है, नियम लागू होने से दवांईयों के गलत इस्तेमाल को रोका जा सकता है। “

उत्तराखंडः मौसम की मार के बाद,मौसम में बदलाव

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पिछले 48 घंटो से हो रही बारिश ने उत्तराखंड के जीवन क अस्त व्यस्त कर दिया है, चाहें वह पहाड़ी क्षेत्र हो या मैदानी इलाके।जहां देहरादून में भारी बारिश के बाद सड़के नदियों में तब्दील हो गई हैं वहीं पहाड़ी क्षेत्रों नदिंयों ने उग्र रुप ले लिया है। शहर के कुछ स्कूलों में पानी भरने से स्कूलों को बंद करना पड़ा, दूसरी ओर रिस्पना, बिंदाल, सोंग व सुसवा नदियों का जलस्तर बढ़ने की वजह से आसपास के घरों में पानी भर गयें जिसके चलते लोगों के सुरिक्षत जगह ले जाया गया।

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देहरादून जिला भी मौसम के असर से खासा प्रभावित हुआ, कल मसूरी के पास एक पिकअप वाहन पर बोल्डर गिरने से वाहन में सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक घायल हो गया। दून शहर में भी एक व्यक्ति की परसों देर रात रिस्पना नदी में डूब जाने की खबर मिली, देर रात भारी बारिश के बीच वह घर में घुसे बरसाती पानी को निकाल रहा था कि उसका पैर फिसल गया। इसके अलावा सिल्ला गांव में बादल फटने के बाद 10 मवेशी मलबे में दब गए।

मौसम विभाग की सटीक और समय से मिली मौसम की जानकारी के साथ-साथ प्रशासन की पूरी तैयारी ने बारिश की वजह से आने वाली भारी संकट को कुछ हद तक रोक दिया। प्रदेशभर से भूस्खलन, मलबा गिरना, बरसाती नदियां उफान में और जगह-जगह मवेशी और मानव मृत्यु दर्ज की गई; लेकिन जिस तरह जून 2013 में आई तबाही ने प्रदेश को हिला दिया था इस बार अतीत से पाठ पढ़ सरकार और प्रशासन की सूझ-बूझ से भारी तबाही को रोका जा सका हैं। प्रशासन व पुलिस, एसजीएरएफ पूरी तरह मुस्तेद दिखी अौर हर जगह रखी गई पैनी नजर।

इस साल जबसे चारधाम यात्रा शुरु हुई है ,पहली बार ऐसे 48 घंटो के लिए मौसम को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को लिए स्थगित कर  दिया गया जिससे कियी भी प्रकार की अनहोनी ना होने पाए।चार जिलों के डीएम, नैनीताल,रुद्रप्रयाग,हरिद्वार और देहरादून ने समय होते ही स्कूल बंद कर दिए ताकि बच्चों को कोई परेशानी ना हो और वह अपने घरों में सुरक्षित रहें।

मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में अच्छी खबर है।मौसम विभाग के डायरेक्टर विक्रम बक्शी बताते हैं कि आने वाले 13 से 20 के बीच में मानसून की बारिश में कमी आएगी और मौसम खुशनूमा बना रहेगा।

दून सिटी के अंदर दौड़ेगी मेट्रो

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मेट्रो ट्रेन दून शहर के भीतर भी दौड़ेगी और इसके लिए दो रूट प्रस्तावित किए गए हैं, एक रूट आइएसबीटी से कंडोली (राजपुर), जबकि दूसरा रूट एफआरआइ (वन अनुसंधान संस्थान) से रायपुर तक होगा। मेट्रो की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) का प्रस्तुतीकरण मुख्य सचिव के सम्मुख किया जाएगा।

उत्तराखंड मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड, के प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी, के मुताबिक अब तक मेट्रो रेल का प्रस्तावित प्लान देहरादून से हरिद्वार व ऋषिकेश तक मुख्य मार्ग तक सीमित था। हालांकि, इसकी अधिक लागत और मुख्य मार्ग पर उसके अनुरूप पर्याप्त यात्रियों के अभाव को देखते हुए इसका विस्तार संबंधित शहरों के अंदरूनी हिस्सों में भी करने का निर्णय लिया गया है।

इस तरह मेट्रो रेल का जो कुल रूट पहले 73 किलोमीटर के करीब था, वह बढ़कर अब 100 किलोमीटर हो गया है। देहरादून के भीतर के दो रूट के अलावा हरिद्वार में बहादराबाद से हरिद्वार शहर के भीतर का रूट भी इसमें शामिल किया गया है। इसी तरह मेट्रो रेल परियोजना की जो लागत पहले 17 से 20 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी, वह अब बढ़कर 26 से 27 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी। डीपीआर की प्रस्तुति के बाद इस पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी, साथ ही मेट्रो रेल के कोचों की संख्या आदि को लेकर भी काफी कुछ तय कर लिया जाएगा। अगस्त तक डीपीआर को अंतिम रूप देकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

मेट्रो ट्रेन की तुलना बस से की जाए तो मेट्रो में बसों के मुकाबले सातवें हिस्से तक ऊर्जा की कम खपत होगी। इसके साथ ही यह ग्रीन ट्रांसपोर्ट पर आधारित व्यवस्था है और इसमें कार्बन उत्सर्जन का स्तर अपेक्षाकृत काफी कम रहेगा। मेट्रो का संचालन शुरू होने से ट्रैफिक जाम की समस्या पर भी अंकुश लग जाएगा।

दून में कुछ हिस्सा हो सकता है भूमिगतः वैसे तो मेट्रो ट्रेन का ट्रैक सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर वाले भाग पर बनाया जाएगा। इसके लिए सड़क पर पिलर बनाए जाएंगे और उसके ऊपर बने ट्रैक पर मेट्रो चलेगी, लेकिन दून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि यहां कुछ हिस्सों में भूमिगत (अंडरग्राउंड) ट्रैक भी बनाए जाएंगे।

भारी बारिश ने उत्तराखंड में हवाई यातायात पर भी डाला असर

उत्तराखंड में  मौसम विभाग की भविष्यवाणी का सीधा असर पड़ा है। रात से ही तेज बारिश ने उत्तराखंड में नदियों को उफान पर पहुंचा दिया है, साथ ही कई रोड पर जलभराव की स्थिति पर बाढ़ क्षेत्रों में भूस्खलन के चलते रोड ब्लॉक की घटनाएं बढ़ी है।

बारिश का सीधा असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है, लगातार हो रही बारिश के चलते जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर एयर इंडिया  की फ्लाइट लैंड नहीं कर पाई जिसके चलते उसे वापस दिल्ली लौटना पड़ा। तेज बारिश और मौसम की खराबी के चलते जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर नहीं लैंड कर पाई एयर इंडिया की फ्लाइट आसमान से ही वापस लौटी दिल्ली

सुबह 7:00 बजे के बजाए 8:00 बजे आ रही थी जोलीग्रांट एयरपोर्ट।लेकिन बारिश के कारण लैंड नहीं हो पायी और एयर इंडिया दिल्ली  देहरादून फ्लाइट को वापस भेज दिया।

एमडीडीए हुआ जीएसटी के लिये तैयार

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मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) भी जीएसटी (उत्पाद एवं सेवा कर) के लिए तैयार हो गया है। इस दिशा में एमडीडीए कार्यालय में ‘जीएसटी रेडी’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में सीए सौरभ गुप्ता ने प्राधिकरण व उससे जुड़े ठेकेदारों को जीएसटी के बार में विस्तृत जानकारी दी।

आयोजित कार्यशाला में सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) सौरभ गुप्ता ने बताया कि निकट भविष्य में लागू होने वाली जीएसटी एक्ट की धारा-51 में विभिन्न सरकारी विभागों की खरीद पर एक फीसद जीएसटी काटने का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्राधिकरण को तैयार रहने की जरुरत है,  साथ ही सीए गुप्ता ने प्राधिकरण समेत उनसे जुड़े बिल्डरों को फ्लैट बेचते समय जीएसटी लगाने के बारे में भी बताया, उन्होंने कहा कि पहले अधिकतर फ्लैट पर (जिनका निर्माण जनता के पैसे से किया गया है) सेवा कर लगता था, जबकि अब जीएसटी लगाया जाएगा।

कार्यशाला में एमडीडीए के ठेकेदारों को बताया गया कि यदि वह विभिन्न निर्माण समग्री की खरीद पर सभी बिलों का ढंग से हिसाब रखेंगे, तभी उन्हें टैक्स क्रेडिट (टैक्स रिबेट) का लाभ मिल सकेगा। इस अवसर पर मुख्य लेखाधिकारी हर सिंह बोनाल, अधीक्षण अभियंता अनिल त्यागी, अधिशासी अभियंता बीएस नेगी, उद्यान अधीक्षक एआर जोशी, लेखाकार तरुण सक्सेना आदि उपस्थित रहे।

एमडीडीए में एक अगस्त से ई-टेंडरिंग
एमडीडीए के कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है। एमडीडीए उपाध्यक्ष विनय शंकर पांडे ने ई-टेंडरिंग व्यवस्था एक अगस्त से लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही अन्य कार्मिकों को भी इसके लिए नामित किया गया।

एमडीडीए ने की दो दुकानें सील
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण पर कार्रवाई जारी रखते हुए दो दुकानों को सील कर दिया। एमडीडीए सचिव पीसी दुम्का के अनुसार चंद्रबनी रोड पर अनिल राणा ने नियमों को दरकिनार कर दो दुकानों का निर्माण कर दिया था। चालान काटने के बाद भी निर्माण बंद न करने और निर्माण को बिल्डिंग बायलॉज के अनुरुप दुरुस्त ना पाकर दोनों दुकान को सील कर दिया गया।

देश को बिजली देने वाली टीएचडीसी ने धूमधाम से मनाया 30 वा स्थापना दिवस        

देश के मिनी नवरत्नों में शुमार उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश की विद्युत परियोजना, टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन, ने अपनी स्थापना के 30 साल पूरे कर लिए हैं जिस के उपलक्ष में टीएचडीसी के ऋषिकेश मुख्यालय में स्थापना दिवस के उपलक्ष में कई कार्यक्रम किए गए।

विभिन्न सांस्कृतिक ग्रुपों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को प्रस्तुत किया इस अवसर पर टीएचडीसी के महाप्रबंधक और समस्त स्टाफ उपस्थित रहा आपको बता दें टीएचडीसी के भागीरथी नदी पर स्थित टिहरी डाम से जल एवं विद्युत उत्तराखंड उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्सों में भेजी जाती है और भागीरथी पर बनाइए मान विश्व का सबसे ऊंचा बांध है।

टीएचडीसी के निदेशक सभी कर्मचारियों को बधाई दी और कहा कि टीएचडीसी हाइड्रो पावर पैदा आधारित ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार प्रगति करता जा रहा है

आसन नदी में बह कर वन गुज्जर की मौत

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उपजिलाधिकारी विकासनगर को सूचना मिली की आसन नदी में एक वन गुज्जर बह गया है। इस सूचना पर उपजिलाधिकारी विकासनगर और चौकी झाझरा से पुलिस फ़ोर्स रवाना हुआ और झाझरा आडवाणी पुल के पास मौजूद एन.डी.अर.एफ को भी साथ लिया गया।

लगभग 2 किलोमीटर आगे परवल गाव के पास वन गुज्जर को रेस्क्यू कर किनारे लाया गया व मौके पर एन.डी.आर.एफ की टीम ने उक्त व्यक्ति को प्राथमिक उपचार दिया, किन्तु उसे बचा नही पाए। मृतक की पहचान कालू, निवासी सभावाला, थाना सहसपुर देहरादून के रूप में हुई। मृतक का शव चौकी नयागांव, थाना पटेलनगर द्वारा पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया है।

जब पटरी पर दौड़ी बिना इंजन गाड़ी

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पत्थर की गिट्टी से भरी मालगाड़ी की आठ बोगियां बिना इंजन के खटीमा की ट्रैक पर दौड़ने लगी, घटना से रेलवे कर्मियों में अफरा-तफरी मच गई। बनबसा के पास मालगाड़ी की चपेट में आने से चार बकरियों की मौत हो गई। डिब्बे ट्रैक से उतरने के बाद क्षतिग्रस्त हो गए।

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रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी की आठ बोगियां टनकपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ी थीं, इनमें पत्थर लदे हुए थे। यह पत्थर पीलीभीत से टनकपुर तक बिछाई जा रही ब्राडगेज लाइन के निर्माण के लिए भेजा जाना था, आज यह गिट्टी बाहर जानी थी। इसी बीच इंजन के यह डिब्बे अपने आप ही रेलवे ट्रैक पर खटीमा की ओर चलने लगे।  बिना इंजन के मालगाड़ी के डिब्बे 60 से 70 किमी की स्पीड में दौड़ रहे थे। टनकपुर से खटीमा की ओर ढलान होने के कारण मालगाड़ी की स्पीड बढ़ती जा रही थी। घटना के बाद स्टेशन पर तैनात अधिकारी, कर्मचारियों व आसपास खड़े लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना रेलवे स्टेशन के प्रभारी केडी कापड़ी ने बनबसा व खटीमा के अधिकारियों को दी।  इस बीच टनकपुर से खटीमा तक पड़ने वाले फाटकों को भी सूचना देकर सतर्कता बरतने को कहा गया। कापड़ी ने बताया कि खटीमा के पास रेलवे ट्रैक पर चल रहे निर्माण कार्य के लिए खड़ा ट्रैक्टर भी इसकी चपेट में आकर एक किमी तक घसीटते हुए गया। जिससे ट्रैक्टर को नुकसान पहुंचा है। बाद में मालगाड़ी के आगे के डिब्बे का पहिया पटरी से उतरने से डिब्बे रूक सके। बिना इंजन के मालगाड़ी चलने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। रेलवे विभाग द्वारा समय पर सूचना नहीं दी गई होती तो बनबसा रेलवे क्रासिंग ट्रैक पर बड़ा हादसा हो सकता था। दिन के समय इस गेट के पास भारत व नेपाल के लोगों की पैदल व वाहनों में आवाजाही काफी रहती हैं। समय पर सूचना मिलने पर यहां बने क्रासिंग बैरियर को बंद कर दिया गया था। जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।