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सड़कों की खास्ता हालत पर डीएम हुए नाराज

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चमोली जिले की थराली-ग्वालदम मोटर मार्ग की खास्ता हालत पर नाराजगी व्यक्त करते हुए डीएम आशीष जोशी ने एसडीएम थराली को जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। नगर पालिका गोपेश्वर में सड़क मार्गों के किनारों पर जगह-जगह रखी भवन निर्माण आदि सामग्री को शीघ्र हटाने के निर्देश दिए हैं।

डीएम ने नगर पालिका क्षेत्रों में सड़कों के किनारे अनधिकृत दुकानों, अवैध अतिक्रमण को हटाने के सख्त निर्देश दिए। मोटर साइकिल पर तीन व्यक्ति बैठाने, बिना हैलमेट के मोटर साईकिल चलाने पर चालान काटने के निर्देश दिए गए। पेट्रोलियम पदार्थों को ले जाने वाले भारी वाहनों में अावश्यक सुरक्षा उपकरण न होने की जांच करने के निर्देश संभागीय परिवहन एवं पूर्ति अधिकारी को दिए गए।

बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशाुनसार सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले गुड सेमिरिटन व्यक्ति से किसी भी तरह की पूछताछ नहीं की जाएगी क्योंकि घायल को सर्व प्रथम उपचार की आवश्यकता होती है। जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा के संबंध में स्कूल एसेंबली में छात्रों को जागरूक करने को कहा।

डीएम ने शहरों के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने के लिए अनधिकृत पार्किंग वाहनों का चालान करने के निर्देश पुलिस एवं नगर पालिकाओं को दिए हैं। जिला पूर्ति अधिकारी को सभी पेट्रोल पम्पों पर दुपहिया वाहनों को बिना हैलमैट पट्रोल न देने के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।

इजरायल की मदद से उत्तराखंड में बनेंगे चार ”हाईड्रोपोनिक फार्म”

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सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में चार हाइड्रोपोनिक खेतों का विकास होगा – जो कि ‘कमलफोनिक’ के रूप में जाना जाता है।इजरायल की मदद से यह प्रयोगात्मक आधार पर शुरु किया जाएगा, इससे पहाड़ी राज्य में एक्वा खेती को बढ़ावा मिलेगा।

हाइड्रोपोनिक खेती मिट्टी के उपयोग के बिना पानी में उगने वाले फसल को कहते है। महाराज ने कहा, “हम इसे कमलफोनीक खेती कहेंगे क्योंकि यह वैसा ही होगा जिस तरह कमल पानी में स्वाभाविक रूप से उगता है।” उन्होंने कहा कि, “सिंचाई विभाग ने देहरादून, पौड़ी, चमोली और अल्मोड़ा जिले में चार खेतों के लिए बुनियादी ढांचा बनाने के लिए काम शुरू भी कर दिया है।”

सतपाल महाराज ने बताया कि यह खेत इजरायल के कृषि विशेषज्ञों की सहायता से स्थापित किया जा रहे हैं। ये पूरी तरह से पानी पर निर्भर होने वाली खेती हैं, जिन्हें फसलों के बढ़ने के लिए जमीन या मिट्टी की जरुरत नहीं होगी। “यह पहाड़ी किसानों को मात्रा और गुणवत्ता के मामले में बेहतर उपज प्राप्त करने में मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में हमारे पास छोटी-छोटी जमीन होल्डिंग है और हाईड्रोपोनिक खेती किसानों को हर सीढ़ी के निचले हिस्से में पानी को स्टोर करने की सुविधा के साथ अच्छी उपज की गारंटी देंगे।

मंत्री ने कहा कि सिंचाई विभाग कृषि और बागवानी विभागों की मदद से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हाइड्रोपोनिक खेतों का निर्माण और रखरखाव करेगा, विशेष रूप से  पहाडी क्षेत्रों में जहां खेत का आकार छोटा और प्रति इकाई क्षेत्र उपज कम थी।इस नए तकनीक से पहाड़ी क्षेत्र में खेती के नए पैटर्न को बढ़ावा भी मिलेगा।

सिंचाई सचिव आनंद बर्धन ने कहा: “यह (नई प्रणाली) राज्य में खेती के नए तरीकों के लिए नए आयाम ला सकता है और कई तरह से किसानों की कमाई में बढ़ावा कर सकता है।”

हाइड्रोपोनिक खेती इजरायल की खेती टेक्नीक है जो पूरी तरह से पानी पर निर्भर करता है।इसमें पानी को खेत के चारों तरफ घुमाया जाता है जिसमें सारी फसल की जरुरत वाले सभी माइक्रो और मेक्रो पोषक तत्व होते हैं।

इस तरह के प्रयोग से ना केवल किसानों को नए तरह की खेती का ज्ञान होगा बल्कि बरसात के दिनों में होने वाली अथाह बारिक के पानी को सुरक्षित रखकर उसका प्रयोग किया जा सकेगा।

नशे में धुत लड़की का हुड़दंग, देखिये वीडियो

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उत्तराखण्ड के रामनगर में नशे की हालत में एक लड़की ने मौजूद लोगों से हाथापाई कर हंगामा काटा दिया जिसके वीडियो वायरल हो गया है । लड़की के इस हंगामे के बाद इसका वीडियो आग की तरह वाइरल हो गया है ।

नैनीताल जिले के रामनगर में एक मॉल में लड़की ने शराब पीकर जमकर हंगामा किया । लड़की ने ना केवल हंगामा किया बल्कि वहां दूसरी लड़कियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट भी कर दी । बताया जा रहा है कि लखनपुर क्षेत्र में बने मॉल में ये लड़की किसी दूसरी लड़की से बेवजह झगड़ रही थी लेकिन उसके साथ कुछ लड़के थे और वो दोनों उसे समझा रहे थे । बात किस बात पर इतनी बिगड़ी इस बात का तो पता नही चला, लेकिन इस लड़की के उत्पाद के चर्चे कुछ ही मिनट में शहर की फिजा में जरूर होने लगे ।

बताया जा रहा है कि इस पूरे वाक्य का किसी ने वही खड़े होकर वीडियो बना लिया और उसे वायरल कर दिया । ये भी बताया जा रहा है कि लड़की रामनगर की ही रहने वाली है । नशे में धुत लड़की पहले तो दूसरे के साथ मारपीट करती रही और बाद में जब उसका मन नही भरा तो दुकानो के शटर पर भी अपना गुस्सा निकालने लगी । मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उसे समझाया तो वह उल्टा उनपर ही आग बबूला हो गयी और उन्हें थप्पड़ तक जड़ दिया । बाद में उसे किसी तरह से मॉल से बाहर किया गया।

सूत्रों के अनुसार हंगामा करने वाली लड़की छोटे मोटे विज्ञापनों के लिए मॉडलिंग करती है । अबतक रामनगर कोतवाली में किसी भी पक्ष की तरफ से इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नही हुई है । मॉडल के कुछ फोटो घटना के बाद जरूर वाइरल होने लगे हैं ।

उत्तराखंड में नशे की जद में लड़कियों के होने का यह जीता-जागता सबूत है।विडियो के लिए क्लिक करेंः

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर, 17 केस पॉजिटिव

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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। अब तक स्वाइन फ्लू के 21 मामले दिल्ली टेस्ट के लिए भेजे जा चुके हैं, इनमें से 17 केस पॉजिटिव आ चुके हैं। चार मामले अब तक संदिग्ध पाए गए हैं। उधर, पिछले 8 दिनों में 4 मरीजों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी है।

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के कहर से अब तक जनवरी से 21 मामले स्वाइन फ्लू के आ चुके हैं। जिसमें से 17 केस पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि 4 मामले संदिग्ध अवस्था में हिमालयन अस्पताल, मैक्स, सीएमआई व दून अस्पताल में भर्ती हैं। सीएमओ डॉ. टीसी पंत ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। और किसी भी मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इधर जिन 17 केस पॉजिटिव आए हैं उनमें से 10 देहरादून, 3 यूपी और 4 अन्य जिलों से आए हैं। जो संदिग्ध मरीज अस्पताल में भर्ती हैं उनमें से एक टिहरी, एक पौड़ी, दो देहरादून के मरीज हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वाइन फ्लू को देखते हुए आइसोलेशन वार्ड बना दिया गया है। वार्ड में अभी 10 बेड रखे गए हैं। दून अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अभी तक 10 बेड वार्ड में रखे गए हैं। जैसे-जैसे मरीज बढ़ेंगे, वैसे ही बेड बढ़ा दिए जाएंगे।

एम. वेकैया नायडूः परिचय और राजनीतिक सफर

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आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के एक छोटे से गांव चवतपालेम के किसान परिवार में जन्मे एम. वेंकैया नायडू ने अपने संघर्ष के बूते धीरे-धीरे छोटे से कस्बे से निकल राष्ट्रीय सियासत की फलक पर चमकने तक का सफर पूरा किया। उपराष्ट्रपति चुनाव में राजग के उम्मीदवार नायडू का सार्वजिनक जीवन काफी लंबा है। उनके पास लगभग 25 वर्ष का संसदीय अनुभव है। वह मौजूदा समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में सूचना प्रसारण व शहरी विकास मंत्री हैं। इतना ही नहीं, उनको मोदी सरकार में संकटमोचक की भूमिका में भी देखा जाता है।

उपराष्ट्रपति चुनाव में आंकड़ों पर गौर करें तो राजग के पास जीत के लिए पर्याप्त मत हैं। ऐसे में चार बार से राज्यसभा सदस्य रहे नायडू का उच्च सदन का सभापति बनना तय है।
एम. वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले स्थित चवतपालेम में हुआ था। नायडू 2002 व 2004 (दो बार) में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री भी रह चुके हैं।
नायडू ने नेल्लोर के वी.आर. हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और वी.आर. कालेज से राजनीति तथा राजनयिक अध्ययन में स्नातक किया। वे स्नातक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए| तत्पश्चात उन्होंने आन्ध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम से कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की। वह 1974 में वे आंध्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुये। कुछ दिनों तक वे आंध्र प्रदेश के छात्र संगठन समिति के संयोजक भी रहे। 70 के दशक में ही वह संघ से जुड़े।
वेंकैया नायडू की पहचान हमेशा एक आंदोलनकारी के रूप में रही है। वे 1972 में ‘जय आंध्र आंदोलन’ के दौरान पहली बार सुर्खियों में आए। उन्होंने इस दौरान नेल्लोर के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए विजयवाड़ा से आंदोलन का नेतृत्व किया। छात्र जीवन में उन्होने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित होकर आपातकालीन संघर्ष में हिस्सा लिया। वे आपातकाल के विरोध में सड़कों पर उतर आए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 1973-74 आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे। आपातकाल के बाद वे 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के युवा शाखा के अध्यक्ष रहे। नायडू 1978-85 में आंध्र विधानसभा के दो बार सदस्य रहे। वर्ष 1988 से 1993 तक वह आंध्र प्रदेश भाजपा ईकाई के अध्यक्ष रहे। उसके बाद वह 1993 से 2000 तक भाजपा की केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय महासचिव बने। इस अवधि में वह पार्टी की सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड के सचिव, राष्ट्रीय प्रवक्ता समेत कई अहम पदों पर दायित्व निर्वहन किया। 1998 कर्नाटक से वह 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं ।

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह ने किया रोजगार मेले का उद्घाटन

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राज्य के वन एवं आयुष मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत ने सर्वे चौक स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में आयोजित रोजगार मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डाॅ हरक सिंह रावत ने कहा कि, ‘वर्तमान में सरकारी नौकरी में सीमित अवसर हैं, उत्तराखण्ड का अधिकांश क्षेत्र पर्वतीय होने के चलते उद्योग व खेती के लिए अनुकूल न होने केे कारण राज्य सरकार स्किल्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को हुनरमंद बना रही है तथा सेवायोजन विभाग के प्लेटफार्म द्वारा विभिन्न कम्पनियों के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है।’

उन्होने विभागीय अधिकारियों को सम्बन्धित विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए आउटसोर्सिंग वाली सेवाओं का पंजीकरण भी सेवायोजन विभाग के माध्यम से करने सम्बन्धित प्रस्ताव निर्मित करने तथा पंजीकृत बेरोजगार युवाओं के चयन में उचित पारदर्शिता अपनाने के निर्देश दिये।

उन्होने कहा कि राज्य सरकार ऐसे आई.टी.आई विद्यालय तथा ऐसे ट्रेड को बन्द करेंगे जहां पर्याप्त छात्र/छात्रा नही हैं तथा जो क्रमशः व्यापार की मांग आधारित जाॅब की पूर्ति करने में नाकाम है। उन्होने कहा कि हम आई.टी.आई में ऐसे ट्रेड शामिल करेंगे जो युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए ऋण तथा अन्य तकनीक सहयोग साथ करने में सहयोग दिया जायेगा।

इस अवसर पर निदेशक सेवायोजन/अपर सचिव अशोक कुमार ने कहा कि, ‘आज के रोजगार मेले में 15 कम्पनियों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए हैं तथा अपनी-अपनी आवश्यकता के अनुसार युवाओं को प्रेजेन्टेशन दे रही है। उन्होने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करने का कार्य भी किया जा रहा है तथा रोजगार पाने में उनकी हर सम्भव मदद भी की जा रही है।’

काशीपुर में चोर चुस्त और पुलिस सुस्त

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लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने काशीपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक सप्ताह में तीन दुकानों में चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले शातिर चोर अब भी खुले में घुम रहे हैं और लगातार दुकानों से चोरी की वारदातें बढती जा रही है, जबकि चोरों को पकडने के पुलिस के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

ताजा मामला काशीपुर के रामनगर रोड का है जहां चोरों ने एक दुकान से नगदी समेत लाखों का सामान चोरी कर लिया। चोर गोदाम की खिड़की तोड़कर दुकान में घुसे। चोर इतने शातिर थे कि उन्होंने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ डाले। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी ली, पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है। पुलिस ने पूछताछ के लिए दो लोगों को हिरासत में लिया है।

आर्य नगर निवासी नितिन अरोरा की काशीपुर-रामनगर रोड स्थित प्रकाश रेडियम स्टोर नाम से दुकान है। शनिवार रात नितिन रोज की तरह दुकान बंद कर घर चले गए। रविवार सुबह जब उन्होंने दुकान खोली तो दुकान का सारा सामान बिखरा हुआ था। दुकान में तीनों सीसीटीवी कैमरे टूटे हुए थे। इसे देख उनके होश उड़ गए, उन्होंने गल्ले में देखा तो उसमें रखे करीब 30 हजार रुपये भी गायब थे। उन्होंने बताया कि चोर दुकान से कार में लगने वाले म्यूजिक सिस्टम, एलसीडी सहित एक लाख से भी अधिक का सामान ले गए।

नितिन ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर दुकान है और पहली मंजिल पर गोदाम है। चोर दूसरे मकान से गोदाम तक पहुंचे और गोदाम की खिड़की तोड़कर अंदर घुस आए। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले एक कबाड़ी आया था और उसे गोदाम में ले जाकर कबाड़ बेचा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी ली। पुलिस ने पास में ही एक दुकान के चौकीदार व एक कबाड़ी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस आसपास की दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है। सूचना पर व्यापार मंडल अध्यक्ष दीपक वर्मा सहित व्यापारी भी मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली। कटोराताल पुलिस चौकी इंचार्ज जयपाल चौहान ने बताया कि शक के आधार पर कबाड़ी व चौकीदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। चोरों का पता लगाया जा रहा है।

चार सालों से परिनियमावली की बाट जोह रहा तकनीकी विश्वविद्यालय

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उत्तराखंड सरकार लगातार शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के दावे तो करती रही है, लेकिन हकीकत की जमीन पर सभी दावे और वादे धूल फांकते दिखाई देते हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार साल से उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूटीयू) की परिनियमावली शासन में अटकी है। शासन की इस सुस्ती के चलते यूनिवर्सिटी में तमाम अव्यवस्थाएं फैली हैं, इस कारण यूनिवर्सिटी की पूरी कार्यप्रणाली बेहाल हैं।

यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों को भारी टोटा है, अधिकारियों की गिनती भी नाम की है। आलम यह है कि यूनिवर्सिटी में नाम मात्र के अधिकारी ही काम काज को संभाल रहे हैं। दरअसल यूनिवर्सिटी स्थापना के वक्त यूनिवर्सिटी का एक्ट तो तैयार कर दिया गया, लेकिन परिनियमावली तय न होने के कारण एक्ट लागू करने में भी परेशानियां आ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो यूनिवर्सिटी का एक्ट जहां नीति निर्देशक का काम करता है, वहीं एक्ट काम कैसे करेगा यह परिनियमावली तय करती है। इसके अलावा यूटीयू में अभी तक केवल वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और फाइनेंस कंट्रोलर ही नियुक्त हो पाए हैं। जब तक परिनियमावली तय नहीं होगी अन्य पदों पर नियुक्ति संभव नहीं होगी। परिनियमावली के न होने से यूनिवर्सिटी के आंतरिक कार्यो में बाधा आना स्वभाविक है। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पीके गर्ग का कहना है कि यूनिवर्सिटी की ओर से तीन साल पहले ही परिनियमावली तैयार कर शासन को भेज दी गई थी, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। परिनियमावली तय हो जाएगी तो यूनिवर्सिटी को आ रही तमाम परेशानियों को दूर किया जा सकेगा।

परिनियमावली नहीं होने से आने वाली दिक्कतें-
– यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट्स का स्वरूप कैसा हो।
– कॉलेजों को संबद्धता देने का कार्य।
– बोर्ड ऑफ स्टडीज का स्वरुप कैसा हो।
– नई डिग्री या पाठ्यक्रम को कैसा होना चाहिए।
– यूनिवर्सिटी में ग्रुप बी और सी की नियुक्ति प्रक्रिया।
– विभागों को सुविधाओं से संपन्न करना।
– यूनिवर्सिटी में एचओडी और डीन आदि का कार्यकाल।

उत्तराखंड में पहली बार फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी 

उत्तराखंड के लोगों को मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जल्द ही सस्ते में फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी की सहूलियत देने जा रहा है जिसमे दिल के मरीजों को कम समय मे बेहतर ईलाज मिल सकेगा।

ऋषिकेष स्तिथ एक निजी होटल में मैक्स अस्पताल के सिनियर कंसल्टेंट डॉ मनीष मेसवानी ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी। मीडिया से बात करते हुए डॉ मनीष मेसवानी ने बताया कि मैक्स अस्पताल की पहल से फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी शुरू किया है जिसमें प्रदेश के लोगों को कम खर्चे में बाईपास सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी।

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उन्होंने बताया की अभी तक बाईपास सर्जरी के ईलाज में कई दिन लग जाते थे लेकिन अब फास्ट ट्रैक बाईपास सर्जरी के जरिये कुछ घंटों में ही मुमकिन हो सकेगा, साथ ही साथ जरूरतमंदों को 25 से 35 हजार तक की मेडिकल सुविधा की दी जाएगी।

 

 

केदारनाथ के पास जल्द शुरु होंगे जंगल सफारी और होमस्टे

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केदारनाथ मंदिर में आने वाले पर्यटकों को क्षेत्र में स्थानीय लोगों के जीवन का अनुभव कराने के साथ-साथ आस-पास के घने जंगलों के अलग-अलग वनस्पतियों और जीवों से परिचित होने के अवसर प्रदान करने के लिए, जिला प्रशासन जंगल सफारी को शुरू करने की प्रक्रिया में है। जल्द ही केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को जंगल सफारी और ‘रुरल एक्सपिरियेंस पैकेज को अनुभव करने का मौका मिलेगा।

रुद्रप्रयाग डीएम मंगेश घिल्डियाल के अनुसार, जिसके क्षेत्राधिकार में केदारनाथ क्षेत्र आता है, ने कहा कि, ‘यह कदम पर्यटक संख्या में आ रही तेज गिरावट को कम करेगा जो बरसात के मौसम में केदारनाथ में देखा गया है। इतना ही नहीं यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बनाए रखेगा, जो पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है।’ उन्होंने कहा कि, ‘इस कदम से उन जगहों को बढ़ावा मिलेगा जो आज तक लोगों ने देखी भी नहीं हैं और जो पहाड़ों की खुबसूरती से लकदक है, इस पहल से टूरिस्ट का फुटफाल भी अच्छा होगा।’

घिल्डियाल ने कहा, “हम केदारनाथ के आसपास के क्षेत्रों की पहचान करने की प्रक्रिया में हैं जहां जंगल सफारी और ग्रामीण पर्यटन की पहल की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि, ‘रात में सफारी करने के लिए पर्यटकों के लिए चुनिंदा स्थानों पर मचान बनाने की योजना भी है, जिससे रात को पर्यटक तेंदुए, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे जानवरों को देखा सकते हैं। इसके अलावा विलेज होमस्टे के जरिए पर्यटक गांववालों के साथ मधुमक्खी पालन और पहाड़ी खेती जैसी गतिविधियों में भागीदारी करके हिमालयी गांवों में जीवन का अनुभव करने में सक्षम होगें।’ घिल्डियाल का मानना हैं कि, “खेतों में बैलों की खेती करके, पारंपरिक व्यंजनों की बनाने में मदद करने और गांव की रोजमर्रा के कामों में भाग लेने से पर्यटकों को एक अलग तरह का अपना अनुभव मिल सकता है जो किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शायद ही मिलता है। ‘

उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी सतीश बहुगुणा ने कहा कि, ‘इस पहल से बड़ी संख्या में पर्यटकों का आर्कषण मिलेगा, यह सोच अपने आप में बिल्कुल सटीक है क्योंकि आजकल कई पर्यटकों को होटल के बजाय घरों में रहना पसंद हैं और उस जगह की संस्कृति के बारे में जानने और एक परिवारिक माहौल में रहना पसंद हैं।’

स्थानीय एनजीओ की गायत्री देवी ने कहा कि, ‘कई अनुभव हैं जो पर्यटकों के गांवों में हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कई गांववाले मधुमक्खी पालन कर रहें हैं जिसके बारे में वे पर्यटकों को बता सकते हैं और उन्हें अपने मधुमक्खी पालन के ओरिजिनल शहद बेच सकते हैं।’