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फ्लिपकार्ट में सॉफ्टबैंक ने किया भारतीय बाजार का सबसे बड़ा का निवेश

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जापान की कंपनी सॉफ्टबैंक ने ई-रिटेल साइट फ्लिपकार्ट में अपने वीजन फंड के जरिए निवेश किया है जिससे वह अब कंपनी की सबसे बड़ी शेयर होल्डर बन गई है।

फ्लिपकार्ट ने एक बयान में कहा, ‘‘यह भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनी में सबसे बड़ा निजी निवेश है और जो फ्लिपकार्ट में विजन फंड को सबसे बड़ा शेयरधारकों में से एक बना देगा। इस फंडिंग से फ्लिपकार्ट की बैलेंसशीट मजबूत होगी और निरंतर बाजार नेतृत्व बनाये रखते हुए निवेश में तेजी लाने में मदद होगी।’’
हालांकि निवेश राशि का खुलासा नहीं हुआ है लेकिन सूत्रों से पता चला है कि निवेश से फ्लिपकार्ट के पास 400 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त फंड आयेगा। यह एक भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनी में अबतक का सबसे बड़ा निजी निवेश है।
डील के बारे में फ्लिपकार्ट के संस्थापक सचिन और बिन्नी बंसल ने मीडिया को बताया कि, ‘‘विश्व में बहुत कम कंपनियां इतने बड़े निवेशकों को आकर्षित करती हैं। इस कदम से भारत ने विश्व को बता दिया है कि वह तकनीक और ई-कॉमर्स के जगत में विश्व में एक बड़ी शक्ति है। सॉफ्टबैंक के इतिहास को देखें तो हमें पता चलेगा कि सॉफ्टबैंक हमेशा से ही तकनीक संपन्न और मजबूत कंपनियों में निवेश करता आ रहा है।’’
वहीं सॉफ्टबैंक के मुख्य अधिकारी मासायोशी सोन ने बताया, ‘‘हम भारत में समृद्ध और मजबूत कंपनियों की मदद करना चाहते हैं। ऐसी कंपनियां भारत जैसे बड़े बाज़ार में लोगों के हित के लिए काम करती हैं। फ्लिपकार्ट एक ऐसी ही कंपनी है।’’
सॉफ्टबैंक भारत के ई-कॉमर्स बिजनेस की सबसे बड़ी निवेशक कंपनी है। हाल ही में फ्लिपकार्ट के स्नैपडील से मर्जर रद्द होने पर सॉफ्टबैंक ने साफ किया था कि वो फ्लिपकार्ट में निवेश करेगी। 

याचिका खारिज, सहारा की एंबी वैली होगी नीलाम

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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की इस अर्जी को खारिज कर दिया है कि एंबी वैली को नीलाम नहीं किया जाए। सहारा समूह की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सितंबर तक एंबी वैली की नीलामी रोकी जाए। उस समय तक सहारा समूह 15 सौ करोड़ रुपए का इंतजाम कर लेगा।

आज सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि वे तीस चालीस साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई जायज अर्जी ठुकरा दी गई हो। जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि वे भी तीस चालीस सालों से हैं।

कल सहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया था कि एंबी वैली की नीलाम न की जाए। सहारा समूह ने जब इसे सुप्रीम कोर्ट में मेंशन किया तो कोर्ट ने कहा कि हम आपकी अर्जी पर जल्द ही सुनवाई करेंगे। सहारा समूह ने कहा कि वो अपने निवेशकों के पैसे चुकाने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। पिछले 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने सहारा समूह को 7 सितंबर तक 1500 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर सहारा समूह 7 सितंबर तक 1500 करोड़ रुपये जमा नहीं करता है तो लिक्विडेटर एंबी वैली को बेचने की प्रक्रिया शुरु करेंगे।

पिछले पांच जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख से कहा था कि अगर 15 जुलाई तक 552 करोड़ रुपये जमा नहीं किए तो सुब्रत राय को जेल जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर 552 करोड़ जमा नहीं किए गए तो एंबी वैली को नीलाम कर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान सहारा की ओर से कहा गया था कि एंबी वैली को गिद्धों के आगे मत सौंपिए। सुब्रत राय ने 15 जून को 1500 करोड़ की जगह पर 773 करोड़ रुपये सेबी को जमा किए थे।

उसके पहले की सुनवाई के दौरान सहारा ने कोर्ट को बताया कि उसने लंदन के ग्रासवेनॉर होटल को जीएच इक्विटी यूके लिमिटेड को बेच दिया है। सहारा प्रमुख ने 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में दो हजार करोड़ रुपए से अधिक के दो पोस्ट डेटेड चेक जमा कराए थे। एक चेक 1500 करोड़ के और दूसरे चेक 552 करोड़ रुपये के सौंपे गए।

पिछले 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह द्वारा तय समय पर सुप्रीम कोर्ट में रकम जमा न करने पर एंबी वैली की नीलामी के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बांबे हाईकोर्ट को ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया था। ऑफिशियल लिक्विडेटर नीलामी प्रक्रिया को शुरू करेगा। सहारा समूह ने एंबी वैली की कीमत 34 हजार करोड़ रुपए लगाई है।

अक्षय और भूमि ने किया फिल्म ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ का प्रमोशन

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अभिनेता अक्षय कुमार और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर अपनी रिलीज के लिए तैयार फिल्म ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ के प्रमोशन में जी जान से जुटे हैं। इसी सिलसिले में अक्षय और भूमि के साथ अनुपम खेर राजधानी दिल्ली में थे, जहां उन्होंने मीडिया के सामने फिल्म से जुड़ी कई बातें साझा कीं।

इस फिल्म को चुनने के पीछे की वजह क्या रही, के बारे में पूछने पर अक्षय ने कहा, मैंने इसके बारे में किसी तरह का शोध नहीं किया और किसी ने मुझे यह फिल्म करने के लिए भी नहीं कहा| चूंकि इसकी स्क्रिप्ट बहुत अलग थी, जो इस फिल्म का चयन करने का एक कारण था क्योंकि हमने कभी ऐसा शौचालय नहीं देखा था, जिसके जरिये एक प्रेम कहानी को पैदा किया जा सके। यह एक वास्तविक जीवन की कहानी है और यह विषय सीधे हमारे स्वास्थ्य से संबंधित है। न केवल गांवों में, बल्कि शहरों में भी लोगों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शहर को साफ रखने की कुछ जिम्मेदारी हमारी भी बनती है।

भूमि ने कहा कि, “मुझे लगता है कि आज रियल लाइफ से जुड़ी फिल्में काफी सराही जा रही हैं, क्योंकि ऐसी फिल्मों की सामग्री उम्दा होती है। मुझे खुशी है कि मैं भी आज ऐसी फिल्मों का हिस्सा हूं। इस फिल्म में काम करने का अनुभव मेरे जीवन के सबसे अच्छे अनुभवों में से एक रहा है और मेरे जैसे नए कलाकारों के लिए यह एक शानदार उदाहरण भी है। हालांकि, यह मेरी दूसरी फिल्म ही है, लेकिन दूसरी फिल्म में ही अक्षय कुमार और अनुपम खेर जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने का अवसर पाना मेरे लिए एक महान सम्मान है। मेरे लिए इनके साथ काम करना किसी महान उपलब्धि से कम नहीं है, क्योंकि दोनों निहायत प्रोफेशनल और मेहनती कलाकार हैं।”

इस तरह की फिल्मों की आम दर्शकों के बीच स्वीकृति के बारे में पूछने पर अनुपम खेर ने कहा,” मैं व्यक्तिगत रूप से सिनेमा की इस सुनहरे समय को महसूस कर रहा हूं| दर्शक इस तरह की फिल्मों को बड़े ही खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं और यह फिल्म दर्शकों के लिए श्रद्धांजलि है। इस फिल्म की स्क्रिप्ट नि:संदेह शानदार है। ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ सोशल मुद्दे पर बेस्ड फिल्म है, जो देश में महिलाओं के लिए टॉइलट जैसी सुविधाओं में कमी की ओर इशारा करती है। यह एक ऐसा आंदोलन है, जिसे पहले शुरू किया जाना चाहिए था, लेकिन अब जब हम अंत में इस तरह के मुद्दों से निपट रहे हैं, तो मैं खुश हूं और युवाओं पर बहुत विश्वास है कि वे सोच में बदलाव जरूर लाएंगे।”

वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स द्वारा निर्मित, नारायण सिंह द्वारा निर्देशित, अक्षय कुमार और नीरज पांडे द्वारा सह-निर्मित 11 अगस्त को रिलीज होने जा रही ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ में अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की मुख्य भूमिकाएं हैं, जबकि अनुपम खेर, दिव्येंदु शर्मा और सना खान सहायक भूमिकाओं में नजर आएंगी। यह एक व्यंग्यपूर्ण कॉमेडी फिल्म है। जो एक ऐसी महिला की कहानी के चारों ओर घूमती है, जो अपने पति को अपने विवाह के पहले दिन छोड़ने का इरादा कर लेती है क्योंकि उनके पास शौचालय नहीं है।

अब फिल्मी परदे पर बाबा रामदेव

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कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि योग गुरु बाबा रामदेव की जिंदगी पर अजय देवगन की प्रोडक्शन कंपनी में एक सीरियल बनाने की योजना पर विचार चल रहा है। दूसरी ओर, अब खबर आ रही है कि बाबा रामदेव जल्दी ही एक फिल्म के लिए परदे पर नजर आएंगे। ‘ये है इंडिया’ नाम की फिल्म जो 18 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। इसमें बाबा रामदेव की एक छोटी सी झलक नजर आएगी।

इस फिल्म की मुख्य भूमिकाओ में गेवी छहल और डायना उत्पल हैं, जबकि रामदेव के बारे में कहा गया है कि वे फिल्म के साथ प्रमोटर और सपोर्टर के तौर पर जुड़े हैं। मिली जानकारी के अनुसार, फिल्म के एक गीत- सैयां.. सैंया… के दौरान बाबा रामदेव परदे पर नजर आएंगे।

कहा जाता है कि इस फिल्म के दौरान रामदेव राष्ट्रीयता और स्वदेसी वस्तुओं के उपयोग को लेकर भी कुछ बातें बोलेंगे। फिल्म के निर्देशक और लेखक लोम हर्ष इस बात से खुश हैं कि रामदेव जैसी हस्ती उनकी फिल्म के साथ जुड़ी है। संदीप चौधरी इस फिल्म के निर्माता हैं और 18 अगस्त को ये रिलीज होने जा रही है।

छापेमारी से पहले ही अस्पताल छोड भागा डाक्टर

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शातिर झोलाछाप डॉक्टर को स्वास्थ्य विभाग की टीम के छापे पड़ने की सूचना मिल गई। जिस पर वह अस्पताल में ताला लगाकर भाग गया। इस कारण टीम क्लीनिक सील करने गई टीम बैरंग लौट आई।

महुआखेड़ागंज स्थित अलज्मा अस्पताल के फर्जी होने की शिकायत एक व्यक्ति ने जुलाई में की थी। यह अस्पताल झोलाछाप डॉक्टर चला रहा है, इसका पंजीयन भी नहीं है। शिकायत पर एलडी भट्ट अस्पताल के डॉ. मनु पांडे ने 28 जुलाई को जब अस्पताल में छापा मारा तो डॉक्टर नहीं मिले। इस दौरान मौजूद कर्मचारियों से उन्होंने अस्पताल व चिकित्सक से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा तो किसी ने एक भी दस्तावेज नहीं दिखाए। इस पर डॉ. पांडे को शक हुआ और इसकी रिपोर्ट एलडी भट्ट अस्पताल के सीएमएस को दे दी है।

पांच दिन पहले सीएमएस डॉ. वीके टम्टा भी अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल बंद मिला था। पुलिस फोर्स लेकर डॉ. मनु पांडे नायब तहसीलदार जर्नादन प्रसाद गौड़ के साथ बुधवार को अस्पताल को सील करने पहुंचे तो अस्पताल में ताले लगे थे। डॉ. पांडे ने बताया कि डॉक्टर की डिग्री होनी चाहिए, अस्पताल का उत्तराखंड मेडिकल एसोसिएशन में पंजीयन होना चाहिए व बायोमेडिकल वेस्टेज की सुविधा होनी चाहिए। जांच में यह सुविधाएं नदारद मिलीं। बताया कि यह अस्पताल बाजपुर निवासी असगर अली का है। अस्पताल को जल्द सील कर दिया जाएगा।

खाई में गिरी कार, व्यवसायी की मौत

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रानीखेत-कठपुडिया दौलाघट रोड पर बेकाबू कार खाई में जा गिरी। हादसे में व्यवसायी की मौत हो गई। गुरना गांव दौलाघट निवासी योगेश जोशी अपनी अल्टो कार यूके 01- ए- 5092 से मजखाली अल्मोडा हाईवे स्थित शौकियाथल बाजार आए थे। वापसी में कठपुडिया दौलाघट रोड पर कयाला गांव के पास कालिका मंदिर के तीखे मोड पर कार का पिछला टायर नाले में फंस गया।

इस बीच उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो कार खाई में फिसल गई। इसके कार के परखच्चे उड़ गए, व्यापारी क्षतिग्रस्त कार में ही फंसे रहे। उन्हें गंभीर हालत में नागरिक चिकित्सालय पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

कैलाश का किसानों पर कहर 

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बरसात से कैलाश नदी में आई बाढ़ ने रसोईयापुर गांव में तबाही मचा रखी है। अब तक पांच किसानों की करीब साढ़े पांच एकड़ कृषि भूमि कटकर नदी में समा चुकी है। इसके अलावा नौ किसानों की लगभग 32 एकड़ धान की फसल में नदी की सिल्ट भर गई है, जिससे फसल खराब होने के कगार पर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी में कटकर समाई भूमि का मुआवजा देने की मांग की है।
वर्षाकाल के दिनों में कैलाश नदी ने विकराल रूप धारण कर रखा है। चीकाघाट के पास रसोइयापुर गांव में नदी के कटाव करने से नदी गांव के समीप पहुंच गई है।
बीडीसी सूरज नारायण ने ग्रामीणों के साथ नदी का हाल जाना व बताया कि, ‘नदी ने गांव की ओर रुख कर लिया है, जिससे गांव को बाढ़ का खतरा बना हुआ है। नदी द्वारा जमकर भूमि कटाव किया जा रहा है। गांव के वकील अहमद के चार बीघा गन्ने की फसल पूरी तरह नदी में समा गई है। इसके अलावा इरशाद अहमद का एक एकड़ धान, अर्जुन सिंह के तीन बीघा धान, सतनाम सिंह का एक एकड़ धान, बबलू सिंह के ढाई एकड़ धान की फसल नदी लील गई।   किसान जहीर अहमद के 15 एकड़ धान, सतनाम सिंह के चार एकड़, हरबंश सिंह के तीन एकड, प्रकाश सिंह के तीन एकड़, बलजिंदर सिंह के तीन एकड़, जीत सिंह का एक एकड़, फईम के दो एकड़ व परमजीत सिंह एवं चरनजीत सिंह के एक-एक एकड़ धान की फसल में सिल्ट जमा है। जिससे धान की फसलें खराब होने के कगार पर हैं।’
ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी विनोद कुमार से नदी से हो रहे नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि गांव को बाढ़ से बचाने के लिए कटाव रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

भीड़ वाले स्थानों पर स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग

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जिला मुख्यालय गोपेश्वर के व्यापारियों व उम्मींदे ग्रुप ने एसपी चमोली व लोनिवि के अधिकारियों से मुलाकात कर शहर के भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर स्पीड ब्रेकर लगावाने की मांग की है।

जिला मुख्यालय के वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मुरारी लाल, सुरेंद्र सिंह लिंगवाल, व्यापार संघ अध्यक्ष अंकोला पुरोहित सहित अन्य लोगों ने एसपी चमोली व लोनिवि के अधिकारियों से गुरुवार को मुलाकात की। उन्होंने कहा कि शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्पीड ब्रेकर नहीं होने के कारण दुपहिया वाहन सहित अन्य वाहन सपरट भाग रहे हैं, जिससे राह चलने वाले लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
विशेषकर मंदिर मार्ग पर कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित होने की संभावना बनी हुई है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि इन स्थानों पर स्पीड ब्रेकर लगाए जाए ताकि राह चलने वाले लोगों को असुविधा न हो। 

13 अगस्त को एक दिवसीय ‘रंवाई लोक महोत्सव’ का आयोजन

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टिहरी जनपद के थत्यूड़, देहरादून जनपद के कालसी और चकराता, उतरकाशी जनपद के नौगांव, पुरोला व मोरी विकास खण्डो को जोड़कर एक बड़े कलस्टर का परिचय कराती है। इसी रंवाई घाटी के मध्यस्थल, नौगांव विकासखण्ड मुख्यालय है। जहां पर आगामी 13 अगस्त, 2017 को एक दिवसीय ‘रंवाई लोक महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा हैं ।

इस दौरान तीन प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होंगे: –

पहला सम्मान समारोह, दूसरा स्थानीय लोक संस्कृति व साहित्य समाज को लेकर विद्वानजनो के साथ स्थानीय लोगों की चर्चा एवं दस्तावेजीकरण, तीसरा बीट् आॅफ यमुना वैली एक वृहद कल्चरल कार्यक्रम होगा जिसमें कम से सम 45 लोक कलाकार एकसाथ स्टेज पर प्रस्तुति देंगे।

कार्यक्रम के विषेष आकर्षण:

डेढ घंटे का कवि सम्मेलन होगा, जिसमें स्थानीय लोक भाषा पर लिखने वाले कवियों को आमन्त्रित किया गया है। इस कवि सम्मेलन में रवांई-जौनपुरी, जौनसारी-बंगाणी कविताओं के विभिन्न कवियों द्वारा प्रस्तुतिकरण होगा।

डेढ घंटे की एक विशेष चर्चा आमन्त्रित की गयी है जिसमें राज्य के प्रतिष्ठित लोक साहित्यकार भाग ले रहे हैं। इस दौरान रवांई-जौनपुर, जौनसार-बाबर, बंगाण, मोरी क्षेत्र, पर्वत की लोक संस्कृति व लोक साहित्य पर चर्चा व दस्तावेजीकरण होगा।

बीट्स आॅफ यमुना वैली: नाम से एक वृहद सांस्कृतिक समागम का आयोजन होगा। जिसमें 45 लोक कलाकार एक साथ मंच पर प्रस्तुति देंगे। इस प्रकार की प्रस्तुति पहली बार होने जा रही है। लोक संस्कृति को एक बड़े मंच पर लाने के लिए और लोक कलाकारो को मंच उपलब्ध करवाने एवं लोक कला को व्यवसाय के रूप में कैसे विकसित करें इस हेतु इस प्रस्तुति की विशेष तैयारी की गयी है। इस दौरान पहाड़ी वाद्य यंत्रों के साथ गीत-संगीत की अद्भुत जुगलबंदी होगी। जिसमें क्रमशरू – शंक, भाणू (घंटी), रणसिंघे दो, ढोल दो, नगाड़े दो, की-बोर्ड, पैड, ढोलक, तबला, मुरली, हुड़का, हारमोनिय, मशकबीन दो, अलगुजा, डौंर इत्यादि 19 लोक बाध्यान्त्र प्रस्तुत होंगे।

हरिद्वार की सियासी झड़प में विधायकों ने दिया सतपाल महाराज को समर्थन

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हरिद्वार में सतपाल माहराज और मदन कौशिक के समर्थकों के बीच लड़ाई का मामला अब राजनैतिक रंग भी लेता जा रहा है।घटना बे बाद जनपद के भाजपा विधायक श्रीप्रेमनगर आश्रम पहुंचे और आश्रम प्रबंधक पवन को हर मदद का भरोसा दिलाते हुए सतपाल महाराज को समर्थन दिया।
सतपाल महाराज को समर्थन देने हरिद्वार ग्रामीण सीट से विधायक स्वामी यतीश्वरांनद, रानीपुर विधायक आदेश चैहान, लक्सर विधायक संजय गुप्ता व ज्वालापुर विधायक सुरेश राठौर तथा हरिद्वार सांसद प्रतिनिधि राजेश शर्मा ने आश्रम पहुंचकर अपना विश्वास महाराज में जताया। उनका कहना था कि यदि किसी प्रकार का विवाद था तो उसे बातचीत के जरिए निपटाया जा सकता था। जो कुछ भी घटित हुआ, उसको उन्होंने निदंनीय करार दिया। कहा कि शहर की तमाम नालियों पर अवैध कब्जा लोगों ने किया हुआ है। पहले मेयर को वहां का अतिक्रमण हटाना चाहिए था। अगर कोई समस्या थी तो आश्रम में बात की जा सकती थी। संघर्ष के बाद आश्रम के बाहर कूड़ा डलवाना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।

वहीं सवाल ये भी बना हुआ है कि सड़कों से अतिक्रमण हटाने निकले मेयर आखिरकार पुलिस फोर्स के बिना सड़क पर कैसे उतर गए, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। मेयर मनोज गर्ग ने पुलिस प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी और न ही पुलिस फोर्स की कोई मदद ली।
मेयर मनोज गर्ग ने केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम की दीवार को गिराने का निर्णय खुद ही लिया और आदेश भी खुद ही दिया। इस दौरान उन्होंने झगड़े को शांत करने का कोई प्रयास भी नहीं किया।
एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि मेयर मनोज गर्ग की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए कोई सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं दी गई। जब विवाद बढ़ गया तो जनता की सूचना पर पुलिस फोर्स घटनास्थल पर पहुंची। ऐसे हालात में जब भाजपा के ही केबिनेट मंत्री के आश्रम से अतिक्रमण हटाया जाना था तो इस झगड़े को हवा किसने दी। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि इस घटना के पीछे भाजपा की आन्तरिक गुटबाजी का हाथ हो सकता है।