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17 साल, 8 मुख्यमंत्री और विकास की राह देखता उत्तराखंड

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उत्तराखंड आज अपना 17वां जन्मदिन मना रहा है। पहाड़ी राज्य की कल्पना से बने उत्तराखंड को 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाके को काट कर बनाया गया था। राज्य बनाने के लिये एक लंबा और कड़ा संघर्ष उत्तराखंड के लोगों को करना पड़ा। आज राज्य स्थापना दिवस के मौके पर राज्यभर में 13 ज़िलों में तरह तरह के कार्यक्रम आयोजित किये गये। मौजूदी बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री भी इस मौके को राज्य के लिये अपने विज़न को समझाने में लगे हैं। फिर चाहे दिल्ली में हो रहे कार्यक्रम हो या देहरादून में बंद कमरों के अंदर आयोजित किया गया रैबर।

राज्य बनाने की लड़ाई की अनन्य कहानियों में रामपुर तिराहा गोलीकांड के साथ-साथ मसूरी में हुए गोली कांड की भी अहम भूमिका रही। 2 सितंबर 1994 को अलग राज्य की मांग करते हुए मसूरी शहर में हुए गोली कांड में 6 लोगों ने अपनी जान गवांई थी। इन्ही शहीदों को याद करते हुए मसूरी प्रेस क्लब ने शहीद स्थल पर एक सकार्यक्रम का आयोजन भी किया।

इस घटना में अपने पिता को खो चुके नरोत्तम सिंह का कहना है कि, “जिस मकसद से अलग पहाड़ी राज्य के लिये लड़ाई की गई थी वो मकसद कहीं खो सा गया है। वो कहते हैं कि “हांलाकि एक लंबा समय बीत चुका है राज्य बने लेकिन, राज्य ने अभी भी कुछ खास हासिल नहीं किया है। जबतक विकास राज्यभर के गांवों में नहीं पहुंचता है तबतक सही मायने में अलग राज्य के लिये अपनी प्राणों की आहूति देने वालों को श्रद्धांजलि नही मिलेगी।”

“पिछले 17 सालों में उत्तराखंड ने किसी और राज्य की ही तरह सैंकड़ों तरह के वादे और इरादों का राजनीतिक मंचन देखा है, तमाम तरह के राजनीतिक उठा पठक का गवाह बना है, 2013 में केदारनाथ आपदा जैसी परेशानियों का दर्द सहा है। लेकिन इन सबके बीच पहाड़ के आम आदमी के विकास की बात हकीकत से काफी दूर रह गई है,” कहना है लेखक गणेश सैली का जोकि   उत्तराखंड की लड़ाई का एक अभिन्न अंग रहे है।

कालाधान जमा करने वाले खातों पर आयकर की नजर

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देहरादून। नोटबंदी के दौरान खातों में कालाधान जमा करने वालों पर अब आयकर का शिकंजा कसने वाला है। विभाग अब तमाम ऐसे संदिग्ध खातों को शॉटलिस्ट करने का काम कर रहा है। विभाग ने तकरीबन 3500 खाताधरकों को नोटिस जारी किया है।


आयकर के रडार पर हजारों खाते
मंगलवार को हर तरह की रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि (खातों के अनिवार्य ऑडिट के दायरे वाले लोग या कंपनी) समाप्त होने के बाद आयकर विभाग सक्रिय हो गया है। अब तक ऐसे लोगों या कंपनी के पास यह तर्क था कि उनके पास रिटर्न फाइल करने का समय है और वह रिटर्न में बता देंगे कि जमा हुई राशि का जरिया क्या है। नोटबंदी में सामान्य से अधिक राशि जमा करने वाले लोगों या कंपनी को आयकर विभाग ने 3500 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में वह खाताधारक भी शामिल हैं, जिनके रिटर्न फाइल करने की तिथि मंगलवार को समाप्त हो गई है।
नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह तथ्य सामने रखे। उन्होंने कहा कि विभाग अभी तक कुल 3500 नोटिस जारी कर चुका है। इनमें 2500 के करीब ऐसे नोटिस हैं, जिनके खातों में 10 लाख रुपये तक जमा कराए गए। जबकि कुछ खातों में 50 लाख या एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी जमा कराई गई। जो नोटिस आयकर विभाग ने जारी किए हैं, उनमें से 60 फीसद के ही जवाब आए हैं। शेष ने नोटिस का किसी तरह का जवाब नहीं दिया। जिनका जवाब आया भी है, उनमें से अधिकतर लोगों ने यही हवाला दिया कि जब रिटर्न फाइल करेंगे, तब रकम का स्रोत बता देंगे। लेकिन अब मंगलवार के बाद किसी भी तरह का रिटर्न फाइल नहीं किया जाना है। जिसके बाद एक सप्ताह में विभाग ऐसे खातों की जांच शुरू कर देगा। खातों में कितना कालाधन जमा किया गया, उसका पता लगाने के लिए संबंधित के पिछले सालों की आय व अन्य पड़ताल की जाएगी। जरूरत पड़ी तो विभाग छापेमारी करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

स्कीम में 225 करोड़ रुपये कालाधन घोषित
आयकर विभाग ने पूर्व में जो इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (आईडीएस) व प्रधानमंत्री जनकल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) चलाई थी, उसमें करीब 500 लोगों ने 225 करोड़ रुपये कालाधन घोषित किया। मुख्य आयकर आयुक्त गुप्ता ने बताया कि इसमें 195 करोड़ रुपये आईडीएस व 30 करोड़ रुपये कालाधन पीएमजीकेवाई में घोषित किया गया।

2000 अधिक रिटर्न फाइल
नोटबंदी के दौरान खातों में रकम जमा करने को लेकर आयकर विभाग ने जो नोटिस जारी किए थे, उसका असर रिटर्न फाइलिंग की बढ़ी संख्या के रूप में सामने आया। खातों में जमा राशि को जायज बताने के लिए करीब 2000 अतिरिक्त रिटर्न फाइल की गई। इससे निश्चित रूप में टैक्स भी बढ़ा होगा। आने वाले समय में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और इसके बेहतर परिणाम सामने होंगे।

जल संस्थान का वसूली लक्ष्य 66.25 करोड़, अभियान तेज

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देहरादून। पानी के बिलो को लेकर डूब चुके 16 करोड़ रुपये का जल संस्थान अब आखिरी बार जनरल ऑडिट कराएगा। यदि अब भी ये चार हजार दो सौ ग्यारह परिवार अपने ठिकानों पर नहीं मिले और इन्होंने जल संस्थान का बकाया दर्ज नहीं किया तो जल संस्थान इस रकम को बोगस डिमांड में डालने पर विचार करेगा। वहीं, जल संस्थान ने दून में इस साल के लक्ष्य 66.25 करोड़ रुपये की वसूली के लिए अभियान तेज कर दिया है।

पिछले साल जल संस्थान ने पानी के लंबे समय बिल न जमा करने वाले उपभोक्ताओं की आरसी काटकर वसूली के लिए तहसील भेजी थी। वसूली के दौरान राजस्व विभाग की टीम को चार हजार 211 लोग दिए गए पते पर नहीं मिले थे। जिनका पानी का बकाया बिल 15.87 करोड़ रुपये था। इसके बाद राजस्व विभाग ने उक्त आरसी जल संस्थान को वापस भेज दी। अब जल संस्थान ने इस रकम को बोगस डिमांड में डालने से पहले इन लोगों को विभागीय स्तर पर जनरल ऑडिट कराने का फैसला किया है। अब जल संस्थान की टीम इन पतों पर दोबारा निरीक्षण के लिए जाएगी, साथ जो लोग निर्धारित पते पर मिलेंगे उनसे पानी के बिल की वसूली की जाएगी। साथ ही जो लोग बकायेदार अब भी जल संस्थान के हाथ नहीं लगे तो बोर्ड बैठक में उक्त रकम को बोगस में डालने के लिए विचार किया जाएगा। उधर, जल संस्थान ने इस साल के वसूली लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी अभियान शुरू कर दिया है। इस कड़ी में जल संस्थान की ओर से अभियान चलाया गया और बिल जमा नहीं करने वाले कई लोगों के पानी के कनेक्शन काट दिए गए।
इस साल वसूली का लक्ष्य
शाखा, कुल लक्ष्य
उत्तर शाखा, 16.10 करोड़
दक्षिण शाखा, 26.21 करोड़
पित्थुवाला शाखा, 13.11 करोड़
रायपुर शाखा, 10.83 करोड़
कुल, 66.25 करोड़
जल संस्थान की महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग ने बताया कि जिन लोगों ने लंबे समय से पानी के बिल जमा नहीं किए हैं, उनसे जल संस्थान शीघ्र पैसा जमा करने की अपील कर रहा है। ऐसा न करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

एक और किसान की मौत

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उधमसिंह नगर जिले में एक और किसान ने आत्मदाह की राह पकड़ ली, बैंक के कर्ज और सीबीआइ जांच के दोहरे दबाव में बाजपुर क्षेत्र के एक किसान ने खुदकशी कर ली। परिजनों ने जहर खाकर जान देने का दावा जरूर किया है, लेकिन किसान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जानकारी पुलिस व तहसील प्रशासन को नहीं है। अलबत्ता क्षेत्र में किसान के अवसाद में होने और जहर खाने की चर्चा दिन भर तैरती रही।

ग्राम विक्रमपुर के रहने वाले जगदीश सुबह बिस्तर पर अचेतावस्था में मिले। परिजन उन्हें लेकर एक निजी चिकित्सालय पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतक के बेटे भूपेंद्र सिंह के अनुसार उनके पिता ने रात भोजन करने के बाद कोई जहरीला पदार्थ खा लिया। रात में ही उनकी मौत हो गई। सुबह वह सो कर नहीं उठे तब परिवार को आशंका हुई। इस आशंका की बड़ी वजह यह भी कि वह गत सुबह से ही जान दे देने की बात घर वालों से कह रहे थे। उनके बैंक लोन पर आरसी कट गई थी। साथ ही फर्जी बैंक लोन के मामले में वह सीबीआइ जांच की जद में भी थे। इसका उन्हें नोटिस भी आया था। इससे वह गहरे अवसाद में थे। उन्होंने बताया कि गत सुबह उन्होंने आरसी व नोटिस समेत बैंक लोन के कागजात जला दिए थे। रात में यह घटना हो गई।

वहीं पुलिस व प्रशासन को किसान की संदिग्ध मौत से बेखबर है। तहसीलदार केपी सिंह का कहना है कि वसूली आरसी के लिए अमीन जा तो रहे हैं, लेकिन किसी तरह का उत्पीड़न नहीं किया जा रहा है। किसान की मौत की तहसील प्रशासन को जानकारी नहीं है। वहीं बाजपुर कोतवाल बीडी उनियाल ने कहा कि वह सरकारी कार्य से बाहर हैं। कोतवाली पुलिस को किसान की संदिग्ध मौत की न तो सूचना है न ही कोई तहरीर मिली है।

डीपी सिंह के लिए कोर्ट के बाहर खुफिया पुलिस

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रुद्रपुर-एनएच 74 मुआवजा घोटाले में एसआईटी ने पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह को मुख्य आरोपी बनाया है। मंगलवार को सादा कपड़ों में एसआईटी व खुफिया विभाग की टीम जिला एवं सत्र न्यायालय में घेराबंदी किए रही। एसआईटी को यह सूचना मिली थी कि डीपी सिंह आज समर्पण के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक पीसीएस अफसर समेत आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी ने अब डीपी सिंह की तलाश तेज कर दी है। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी हासिल करने की तैयारी है।

एसआईटी ने गत दिवस निलंबित पीसीएस अफसर भगत सिंह फोनिया,  पूर्व तहसीलदार मदन मोहन पलडिय़ा, रिटायर तहसीलदार मोहनलाल, संग्रह अमीन अनिल कुमार, रामसमुझ, स्टांप विक्रेता जीशान सिद्दीकी, किसान ओमप्रकाश व चरन सिंह को करोड़ों के मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार कर लिया था। एसआईटी ने घोटाले में डीपी सिंह को मुख्य आरोपी बनाया है। एसआईटी की टीम सादा कपड़ों में न्यायालय के बाहर डटी रही। एसआईटी को यह खबर मिली थी कि आज डीपी सिंह समर्पण के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि खबर लिखे जाने तक श्री सिंह की ओर से आत्म समर्पण के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया। उधर, एसआईटी की टीमें डीपी सिंह के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्रों ने बताया कि उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि अभी कई और किसान एसआईटी के रडार पर हैं। उनकी तलाश की जा रही है। अभी कई अन्य अफसरों की गिरफ्तारी की जानी है। बाजपुर, गदरपुर, किच्छा व रुद्रपुर के दस्तावेजों की जांच अब एसआईटी कर रही है। इसमें अन्य कई पूर्व एसएलएओ भी फंस सकते हैं।

बड़े मगरमच्छ एसआईटी की जांच से क्यो हैं गायब

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रुद्रपुर, एनएच घोटाले में सोमवार को हुई एक पूर्व एसडीएम सहित 8 लोगों की गिरफ्तारी के मामले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि, “घोटाले की जांच कर रही एसआईटी सिर्फ छोटी मछलियों पर हाथ डाल कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रही है, जबकि इस घोटाले में शामिल बड़े मगरमच्छों पर एसआईटी हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर पा रही है।”

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने कहा कि, “एसआईटी की जांच और एनएच घोटाले में कुछ अधिकारियों और किसानों की गिरफ्तारी कर आम जनता की आखों में धूल झोंकी जा रही है।सभी जानते हैं इस घोटाले के असली साजिशकर्ता इलाके के सफेदपोश व जिले में पूर्व में रहे बड़े स्तर के अधिकारी हैं।एसआईटी राजनैतिक दबाव के कारण किसी भी भ्रष्ट नेता, जनप्रतिनिधि व बड़े अफसरों पर हाथ नहीं डाल पा रही है। सरकार को करोड़ों का चूना लगाने वाले इस घोटाले के तार बहुत ऊपर तक जुड़े हुए हैं।”

बेहड़ ने कहा कि घोटाले की जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक को पत्र लिखे। मगर भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेन्स की बात करने वाली भाजपा ने घोषणा के बाद भी इस घोटाले की सीबीआई जांच नहीं कराई है। घोटाले की जांच कर रही एसआईटी भी सत्ता पक्ष के हाथ की कठपुतली बनकर सिर्फ छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर रही है। असली आरोपियों को छोडऩे की मंशा पाले एसआईटी ने अभी तक बाजपुर, गदरपुर व किच्छा के मामलों को छेड़ा तक नहीं है, जबकि इस घोटाले से संबंधित बड़े मामले इन्हीं तहसीलों हुए हैं।

उन्होंने कहा कि बाजपुर, गदरपुर व किच्छा तहसीलों में ना सिर्फ  बैक डेट में जमीन के उपयोग बदले गये बल्कि कई सफेदपोशों और जनप्रतिनिधियों ने सरकारी जमीनों पर कब्जे दिखाकर सरकार से मुआवजा वसूल लिया।

नशा मुक्त भारत बनाने के लिए युवाओं ने लिया संकल्प

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देहरादून में एसजीआरआर बोम्बे बाग और एसजीआरआर सहस्त्रधारा (नालापानी) के विद्यालयों में राष्ट्र स्तरीय युवा संवाद कार्यक्रम मानवाधिकार संरक्षण समिति और सजग इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में युवाओं के मध्य युवा संवाद के रूप में हुआ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ समिति के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी के विचारों से प्रारम्भ हुआ जिसमे उन्होंने राष्ट्र प्रेम, नशाखोरी, माता-पिता के प्रति आज के युवाओं का कर्तव्य और देश की सुरक्षा में लगे जवान तथा देश की ज्वलंत समस्याओं में जल, जंगल, जमीन, जन, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पलायन, सुशासन, कानून व्यवस्था, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा संस्कृति और सभ्यता के बिषयों पर अपने विचार रखे तथा युवाओं को जागरूक किया। युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं में भी खुलकर अपने विचार रखे जिसमे राष्ट्र सुरक्षा में युवाओं की भूमिका और अन्य संवाद से जुड़े हर बिषय पर अपने अपने विचार रखे। कुछ युवाओं ने पलायन पर गम्भीर चिंता भी व्यक्त की तो कुछ ने संस्कृति और संभ्यता को बचाने की बात अपने विचारों के रूप में रखी। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर प्रतिभाग करने वाले विशिष्ठ सभी स्कूलों के बच्चों को समिति के माध्यम से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूल की प्रधानाचार्य भावना, शिक्षकों में गोविन्द सिंह,शिल्पा जुयाल,रेनू रावत, कमल किशोर तिवारी, एसपी जोशी, अखिलेश भट्ट सहित कई विशेषज्ञों ने विचार रखे। इस दौरान कार्यक्रम में लगभग 2000 से भी अधिक बच्चों ने स्वच्छ भारत बनाने की प्रतिज्ञा ली और मानवाधिकार समिति की सदस्यता भी ग्रहण की।

सेना में भर्ती को यूथ फ़ाउंडेशन गुप्तक़ाशी में करा रहा लिखित परीक्षा की तैयारी

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सेना में भर्ती के लिए मेडिकल परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों के लिए अच्छी ख़बर है। ‘यूथ फ़ाउंडेशन’ की ओर से अभ्यर्थियों को गुप्तक़ाशी में रिटर्न परीक्षा की तैयारियां कराई जा रही है।

यूथ फ़ाउंडेशन के सूरज नेगी ने बताया कि, “28 जनवरी को लेंसडौन में मेडिकल फ़िट अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा होनी है। यूथ फ़ाउंडेशन की ओर से गुप्तक़ाशी में अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए कैम्प लगाया गया है। यहाँ पर उन्हें लिखित परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी।कैंप एक हफ्ते पहले शुरु हो चुका है,सेना की लिखित परीक्षा 28 जनवरी 2018 को है जिसके लिये चार शिक्षक और एक इंस्ट्रक्टर बच्चों की मदद कर रहे हैं।

यह कैम्प पूरी तरह निशुल्क रहेगा व इच्छुक अभ्यर्थी इसके लिए यूथ फ़ाउंडेशन के फ़ेसबुक पेज या फिर वेब साइट से पूरी जानकारी ले अपना आवेदन भर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थीयों द्वारा 7088019651, 52, 53, 54, 56, 57, 58, 59 पर भी सम्पर्क किया जा सकता हैं।

जर्मनी के 342 करोड़ रुपए की मदद से ऋषिकेश में क्लीन गंगा मिशन

ऋषिकेश – लाखों लोगों को जीवन देने वाली मोक्षदायिनी गंगा आज अपने ही घर में मेली हो गई है गोमुख से लेकर ऋषिकेश तक आबादी के बोझ का असर गंगा के पानी पर साफ देखा जा सकता है। गंगा की सफाई में सहयोग के लिए जर्मनी ने मदद का हाथ बढ़ाया है क्लीन गंगा मिशन के लिए उत्तराखंड को 1150 करोड़ का बजट लोन के रूप में मिलने जा रहा है, जिससे उत्तराखंड में गंगा स्वच्छ और निर्मल होगी। ऋषीकेश मे गंगा के तट हमेशा ही विदेशियों को अपनी ओर खींचते है यही कारण है यहाँ साल भर बड़ी संख्या मे विदेशी सेलानी आते रहते है। योग और अध्यात्म मे डूबे इन लोगो पर गंगा नदी के प्रति एक विशेष आकर्षण  देखने को मिलता है , लेकिन गंगा के तटों पर फेले प्लास्टिक के कचरे और पोलीथिन ,बोतल और सीवर और नाले से प्रदूषित होती गंगा से देशी विदेशी श्रधालुओ की आस्था पर इससे ठेस पहुंच रही।ऋषिकेश में गंगा को साफ़ करने के लिए जर्मनी की मदद से ऋषिकेश में क्लीन गंगा मिशन के लिए 342 करोड़ों रुपए का बजट मिलने जा रहा है जिस से ऋषिकेश में गंगा साफ़ होगी। गंगा के संग्रक्षण और निर्मलता के लिए सरकार पहले से ही कई योजनाएं चला रही है लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी ये पवन नदी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। आज गंगा अपने ही घर पे मैली होती जा रही है। गंगा प्रेमियों का मानना है की अब जर्मनी जिस तरह गंगा के लिए निवेश कर रहा है। उससे एक बार फिर गंगा को निर्मल बनाने की उम्मीद जगी है, लोगों को उम्मीद   पहले जैसी साफ़ हो सकेगी। करोडो हिन्दुओ कि आस्था का प्रतीक गंगा एक राष्ट्रीय धरोहर है लेकिन बढ़ते आबादी के बोझ ने इसे प्रदूषित कर दिया है। उत्तराखंड मे ही गंगा धीरे-धीरे मेली होती जा रही है ऐसे मे आखिर कब तक मोक्ष दायनी अपनी इस स्थिति को सुधरने के लिए एक और भगीरथ का इंतज़ार करेगी।

 

कैंसर पीड़ित फिल्मकार कल्पना लाजिमी की सेहत गंभीर

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जानी मानी फिल्मकार कल्पना लाजिमी की तबियत गंभीर है। सोमवार को देर शाम उनकी हालत बिगड़ने पर उनको मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। 61 वर्षीय कल्पना लाजिमी को लेकर जानकारी मिली है कि वे किडनी कैंसर से पी़ड़ित हैं। अस्पताल के सूत्रों के हवाले से संकेत मिले हैं कि उनकी हालत गंभीर है और डाक्टरों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है।

बताया गया है कि कैंसर से उनकी किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी है। उनको आईसीयू में रखा गया है। कैंसर की भयंकर बीमारी के अलावा आर्थिक तंगी से गुजर रहीं कल्पना लाजिमी की मदद के लिए बालीवुड के फिल्मी सितारे आगे आए। मिली जानकारी के अनुसार, सलमान खान, आमिर खान, करण जौहर, रोहित शेट्टी, सोनी राजदान उनकी मदद के लिए आगे आए। कल्पना लाजिमी द्वारा निर्देशित फिल्मों में रुदाली, दमन, दरमियां और चिंगारी के नाम प्रमुख हैं।