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फर्जी आईडी पर भारत-नेपाल सीमा पार करते चार गिरफ्तार

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चंपावत,  नेपाल में सामान सप्लाई करते समय एक किशोरी का फर्जी आधार कार्ड दिखाना तीन लोगों को महंगा पड़ गया। आधार कार्ड फर्जी पाए जाने पर किशोरी समेत तीन लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

ग्लोबल एक्सपोर्ट कंपनी रुड़की के एमडी अरशद हुसैन पुत्र अब्दुल कयूम निवासी गंगनहर, मिस्त्री मोहम्मद अकरम पुत्र अब्दुल अहमद निवासी गंगनहर, मोहित कश्यप पुत्र मेघराज निवासी ग्राम भगवानपुर हरिद्वार और सहारनपुर निवासी 16 वर्षीय एक किशोरी कंपनी का सामान लेकर काठमांडू जा रहे थे।

एसएसबी चेक पोस्ट पर जवानों ने उनसे नेपाल सामान ले जाने का कस्टम क्लीरियेंस मांगा। दस्तावेज न दिखा पाने पर जवानों ने उनसे आईडी मांगी तो किशोरी का आधार कार्ड दिखा दिया। संदेह होने पर जवानों ने चारों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। जांच में आधार कार्ड फर्जी पाया गया। थानाध्यक्ष मनीष खत्री ने बताया कि किशोरी ने पूछताछ में बताया कि आधार कार्ड कंपनी के एमडी ने ही बनवाया था। किशोरी को रीड्स संस्था के पुनर्वास केंद्र में रखा गया है।

एसएसबी की कंपनी प्रभारी तन्वी शुक्ला ने बताया कि उक्त चारों के पास सामान को नेपाल ले जाने का कस्टम क्लीरियेंस नहीं था और किशोरी की आईडी भी फर्जी थी। मामले की जांच जारी है।

वीसी में डीजीपी ने अधिनिस्थों को दिये निर्देश

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रुद्रपुर, पुलिस महानिदेशक अनिल के रतूड़ी ने सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों व अन्य अधीनस्थों की वीडियो कांफ्रेसिंग करके अधूरे पड़े भवन निर्माणों को पूरा करने के लिए चर्चा की। इसके साथ ही अपराधों पर नियंत्रण करने के लिए निरोधात्मक कार्रवाई बढ़ाने पर जोर दिया।

 डीजीपी ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों एवं अन्य अधीनस्थों की बैठक ली। उन्होंने अपराधों पर नियंत्रण करने के लिए कार्य योजना बताई तथा उस कार्य योजना पर अमल करने के निर्देश दिए। इसके अलावा जिलों में निर्माणाधीन पुलिस भवनों का निर्माण पूरा करने के लिए बजट आदि पर चर्चा की तथा निर्माण को पूरा कराने के निर्देश दिए। डीजीपी ने महानगरों की यातायात व्यवस्था में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही सड़क हादसों पर नियंत्रण करने के लिए उचित व प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। वीडियो कांफ्रेसिंग में हर जिले के अधिकारी जुड़े थे। डीजीपी ने जनपदवार सभी जिलों के अफसरों से बातचीत की।

व्यक्ति ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

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कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई की गांधीग्राम में एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। उक्त सूचना पर चौकी प्रभारी लक्ष्मण चौक उ.नि. जितेंद्र कुमार, उ.नि. सुनील नेगी, कॉस्टेबल तेज सिंह मौके पर मकान नंबर 280, न्यू बस्ती, गांधीग्राम, चौकी लक्ष्मण चौक देहरादून पहुंचे।

मौके पर परिजनों से जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि मृतक सत्यनारायण, ग्राम बरखेड़ा, थाना कटरा तहसील बिलखेत, जिला शाहजहाँपुर, उम्र 21 वर्ष, ने कमरे के अंदर चुन्नी से गले में फंदा लगाकर पंखे से लटककर आत्महत्या की गयी है। जिसे मौजूद लोगों की उपस्थिति में उतारकर पंचायतनामा की कार्यवाही की जा रही है।

मृतक अपने परिजनों के साथ उक्त पाते पर किराये पर रहता था तथा पटेलनगर स्थित किसी कंपनी में गॉर्ड की नौकरी करता था। मौके से कोई सुसाईड नोट बरामद नहीं हुआ है। आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है।

सरकारी भवनों में शिफ्ट नहीं होंगे आधार कार्ड केंद्र

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देहरादून, केंद्र सरकार की ओर से सरकारी भवनों में शिफ्ट न करने पर बंद किए गए आधार केंद्रों पर नया विवाद खड़ा हो गया है। अब आधार केंद्र संचालकों ने साफ कर दिया है कि वह अपने आधार केंद्रों को किसी कीमत पर सरकारी भवनों में शिफ्ट नहीं करेंगे। जबकि, सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि केंद्रों को उसी स्थिति खोलने की अनुमति दी जाएगी, जब वह अपने केंद्र शिफ्ट कर देंगे। उधर, आधार केंद्रों के शुरू न होने से लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, दो माह पूर्व केंद्र सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि राज्य में संचालित हो रहे सभी आधार केंद्रों को सरकारी भवनों में शिफ्ट किया जाए। इसका उद्देश्य यह था कि शिफ्ट करने पर इनका संचालन सरकारी अधिकारियों की देखरेख में संपन्न होगा और इससे आधार के नाम पर शहरों में हो रही अवैध वसूली पर लगाम लगेगी। लेकिन, आदेश के बावजूद 200 से ज्यादा केंद्र संचालकों ने अपने आधार केंद्र सरकारी भवनों में शिफ्ट नहीं किए। जिसके बाद 18 अक्टूबर को सरकार ने ऐसे राज्य के दो सौ से ज्यादा आधार केंद्रों की आईडी ब्लाक कर दी।

वर्तमान में भी दून में सिर्फ चकराता रोड, नेहरूग्राम व अजबपुर में तीन आधार केंद्र संचालित हो रहे हैं। इसके बाद सीएससी की ओर से केंद्र संचालकों को शिफ्ट करने को कहा, लेकिन संचालकों ने ऐसा करने से साफ इन्कार कर दिया। संचालकों का तर्क है कि पहले उन्हें केंद्रों को मॉडल सेंटर के रुप में विकसित करने के लिए कहा गया, जिसमें उनका लाखों रुपये खर्च हुए। अब वह आधार के साथ लोगों को अन्य भी कई सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं, इसलिए उन्हें सिर्फ आधार कार्ड के लिए नया सेटअप तैयार करना होगा, जिसमें अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसे वहन करने में आधार केंद्र संचालक समर्थ नहीं है।

संचालकों के इस रुख से लोगों की परेशानी थमने की उम्मीद और कम हो गई है। दून सीएसी एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण अरोड़ा का कहना है कि वे सरकारी भवनों में आधार केंद्र शिफ्ट नहीं करेंगे। इस संबंध में हम शीघ्र ही मुख्य सचिव से मुलाकात कर अपनी समस्या से अवगत कराएंगे।

जीरो टालरेन्स सरकार में दबाव में पुलिस 

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बाजपुर, रसूखदार नेता जी खुले आम घूम रहे हैं, क्योंकि पुलिस के अफसरान सत्ता के दबाव में हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो धोखाधड़ी के आरोपी कुलविंदर सिंह किंदा पर दर्ज मुकदमे में पुलिस की सुस्ती न दिखाती।

यूं तो पुलिस की कार्यशैली पर गाहे बगाहे सवाल उठते ही रहते हैं, मगर इस मामले में पुलिस की खासी फजीहत हो रही है। यदि किसी सामान्य व्यक्ति के खिलाफ थाने में तहरीर भी पहुंच जाए तो पुलिस तत्काल आरोपी को थाने बुला लेती है। मुकदमा दर्ज होने की स्थिति में आम तौर पर आरोपी को गिरफ्तार करके फिर विवेचना की जाती है, लेकिन मामला यदि किसी रसूखदार से जुड़ा हो पुलिस का नजरिया बदल जाता है। रसू्रखदार के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पुलिस जांच के नाम पर गिरफ्तारी को लंबित रखा जाता है। बाजपुर के किंदा के मामले में पुलिस पूरी तरह दबाव में दिख रही है।

कुलविंदर उर्फ किंदा नाम के पहचान रखने वाले के खिलाफ बाजपुर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। खनन का धंधा करने वाले इस रसूखदार पर आरोप है ये ऑटो रिक्शा के नंबर पर डंपर चलवा रहा था। खनन के लिए इस्तेमाल इस डंपर को पुलिस ने पकड़ तो लिया लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। जिस शख्स ने किंदा के खिलाफ  शिकायत की वह इन दिनों खुद भूमिगत है। उसने किंदा और उसके आदमियों से जान का खतरा बताया है। अजीबो गरीब बात है कि जिसे पुलिस सुरक्षा मिलनी चाहिए वो खुद डरा सहमा खुद को छिपाता फिर रहा है और जिसके कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह असलहाधारियों संग खुलेआम घूम रहा है। दरअसल, उक्त नेता प्रदेश के एक काबीना मंत्री का बेहद नजदीकी है, जिस कारण पुलिस उस पर हाथ डालने का साहस नहीं जुटा पा रही है।

कुलविंदर उर्फ  किंदा के खिलाफ  यह कोई पहला आपराधिक मामला नहीं है, उस पर हत्या के प्रयास और मारपीट के कई मुकदमे पहले से दर्ज है। पूर्व में वन विभाग की एक वरिष्ठ अधिकारी भी उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा चुकी है। राजनीति के दिग्गजों तक उसकी पहुंच शुरू से रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद भी पुलिस की चाल इतनी सुस्त क्यों है? क्या सत्ता की हनक के आगे कानून कमजोर पड़ रहा है? यूं तो जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बेहद ईमानदार बताए जाते हैं, लेकिन जब सत्ता में दखल रखने वाले रसूखदारों की बात होती है तो उनकी चुप्पी का क्या कारण है। तकरीबन डेढ़ माह में भी पुलिस इस मामले की विवेचना नहीं कर सकी और न ही आरोपी की गिरफ्तारी कर सकी तो सवाल उठने लाजमी हैं।

एसएसपी डा. सदानंद दाते ने कहा कि, “बाजपुर के कुलविंदर सिंह किंदा पर दर्ज धोखाधड़ी के मुकदमे में जांच चल रही है। कहा कि जांच के लिए पुलिस टीम हरियाणा भेजी जा रही है। जांच के बाद दोषी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ ने कहा कि, “पुलिस सत्ता के दबाव में किंदा को गिरफ्तार नहीं कर रही है, पुलिस में हिम्मत है तो धोखाधड़ी के आरोपी किंदा को गिरफ्तार करके दिखाए, राजनीति व अपराधियों का कॉकटेल बनता जा रहा है।किंदा पर पहले से ही कई मुकदमे कायम हैं बावजूद इसके पुलिस जांच के नाम पर मामले को दबाए हुए है।”

हवाई सेवाएं शुरु नहीं हुई तो उपवासःहरीश रावत

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हल्द्वानी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि खनन एवं जमीनों के खेल में राज्य सरकार के तीन मंत्री व उनके गुर्गे भूमाफिया के साथ मिलकर बड़ा खेल कर रहे हैं। जीरो टॉलरेंस की बात कहने वाली सरकार को चुनौती है कि इस मामले की जांच करके दिखाएं। यही नहीं गौला एवं अन्य नदियों से समय पर खनन शुरू न कराना भी सरकार और मंत्रियों का अवैध खनन के जरिये अपनी जेब भरने की सोची समझी चाल है। नोटबंदी देश का सबसे बड़ा घोटाला है। कमीशन लेकर राजनीतिक संरक्षण में भाजपाइयों ने नोट बदलवाए। देश की अर्थव्यवस्था भी लगातार कमजोर हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोड़ा के बाद हल्द्वानी में कहा कि भाजपा उन पर प्रदेश के खजाने को खाली करने का आरोप लगा रही हैं। यदि ऐसा होता तो प्रदेश सरकार कर्मचारियों को मार्च से लेकर जून तक का वेतन नहीं दे पाती। 

पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा है कि उन्होंने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार का जिम्मा उठाया था। जिनमें कार्य भी शुरू करा दिया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार की मनमानी के चलते कई जगहों पर काम रोक दिया गया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने प्रदेश सरकार को मार्च तक का समय दिया है। अगर हवाई सेवाओं का कार्य शुरू नहीं किया गया तो वह 24 घंटे का उपवास कर सरकार की नीतियों का विरोध जताएंगे।

फिर से परदे पर हेमा-धर्मेंद्र की जोड़ी

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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी एक बार फिर परदे पर लौटने की तैयारियों में हैं। मिली जानकारी के अनुसार, 70 और 80 के दशक की सबसे रोमांटिक कही जाने वाली जोड़ी एक नई फिल्म में काम कर रही है, जिसका नाम मैं तेरा आशिक है और इस फिल्म की शूटिंग का पहला शेड्यूल हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली में शुरु होने जा रहा है।

शूटिंग के लिए धर्मेंद्र और हेमा, दोनों कुल्लू मनाली पंहुच चुके हैं। संयोग ये है कि कुल्लू मनाली में ही सनी देओल के बेटे करण देओल की लांचिंग फिल्म ‘पल पल दिल के पास’ की शूटिंग चल रही है। मैं तेरा आशिक के निर्देशक स्वपन प्रधान ही फिल्म के हीरो हैं और हीरोइन के तौर पर स्नेहा उलाल हैं, जिनको सलमान खान की फिल्म लक में लांच किया गया था। वे सालों के बाद बालीवुड में वापसी कर रही हैं।

कहा जाता है कि इस फिल्म में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी स्नेहा के माता-पिता के रोल में हैं और ये फिल्म अगले साल जुलाई में रिलीज की जाएगी।

बिचौलियों तक पहुंचेगी एसआईटी 

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रुद्रपुर, एनएच 74 में हुए मुआवजा घोटाले में एसआईटी के निशाने पर सॉरसूकदार भी हैं। बतौर मुआवजा किसानों को किए गए भुगतान की राशि कहां और कैसे खर्च हुई? इस सूत्र के जरिए एसआईटी उन लोगों तक पहुंचेगी जिन्होंने बिचौलियों की भूमिका निभाई थी। गत दिवस एलाइड इंफ्रा की एमडी प्रिया शर्मा से हुई पूछताछ इसी कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि उन्हें फिर पूछताछ के लिए तलब किया गया है। यहां बता दें कि जिस दिन पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह के आवास पर आयकर का छापा पड़ा था, उसी दिन एलाइड इंफ्रा के दफ्तर व उनके आवास पर छापा पड़ा था। यानि कहीं न कहीं यह कड़ी आपस में जुड़ रही थी। एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि मनी ट्रेलिंग की जांच की जा रही है। जिसके तहत यह देखा जा रहा है कि किसानों को मुआवजे के तौर पर जो धनराशि दी गई, उसका कहां उपयोग किया गया।

मनी ट्रेलिंग की जांच में कुछ संदिग्ध लोगों तक एसआईटी पहुंची है। उसी आधार पर एलाइड इंफ्रा की प्रिया शर्मा से एसआईटी ने पूछताछ की। उन्हें पुन: पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा उन बिचौलियों तक भी एसआईटी पहुंचेगी, जिन्होंने बैक डेट में जमीनों की 143 कराकर किसानों को लाभ पहुंचाया। बिचौलियों तक पहुंचने के लिए उनके खातों की डिटेल एसआईटी पहले ही खंगाल चुकी है। कई सफेदपोश लोग एसआईटी की जांच में बेनकाव हो सकते हैं।

हालांकि एसआईटी ने अभी दो ही तहसीलों की जांच की है और गदरपुर, बाजपुर, रुद्रपुर व किच्छा की जांच होना अभी बाकी है, लेकिन हर तहसील में गलत तरीके से लाभ लेने वाले किसानों के खातों की डिटेल खंगाली जाएगी। कहीं न कहीं बिचौलियों का खेल यहीं से खुलेगा। उधर, एसआईटी पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह की तलाश कर रही है, मगर उनका कोई सुराग नहीं मिला है।

बैलून नेटवर्क सिस्टम वाला पहला राज्य बनेगा उत्तराखंड

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(पिथौरागढ़), मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पिथौरागढ़ के चीन व नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों को संचार सुविधा के लिए जनवरी से बैलून नेटवर्क सिस्टम को शुरू कर दिया जाएगा। इस सिस्टम को शुरू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को भारत-नेपाल की सांझी संस्कृति के प्रतीक जौलजीवी मेले के शुभारंभ के मौके पर कहा कि विषम भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सदूरवर्ती गांवों को बैलून नेटवर्क सिस्टम से संचार सुविधा प्रदान करने को अंतिम रूप दे दिया गया है। जनवरी से जालीजीवी क्षेत्र के लोगों को संचार की सुविधा मिलने लगेगी। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल की संयुक्त पंचेश्वर बांध परियोजना से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। पिथौरागढ़ के जो गांव इस परियोजना के प्रभावित होंगे, उनके पुनर्वास की व्यवस्था सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में है। सीमांत क्षेत्र के विकास के लिए प्रदेश सरकार संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि सेना और अद्र्धसैनिक बल के किसी जवान के शहीद होने या तैनाती के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित को राजकीय सेवा देने में उत्तराखंड सबसे आगे है। पूर्व सैनिकों के लिए भी अनेक रोजगारपरक योजनाएं संचालित की जा रही हैं

विरोध के बाद बैकफुट पर दून विश्वविद्यालय

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दून विश्वविद्यालय छात्र परिषद अध्यक्ष निष्कासन के बढ़ते विरोध के चलते विवि प्रशासन ने निष्कासन को स्थगित कर दिया है। छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के बाद विवि प्रशासन ने यह निर्णय लिया। विवि के कुलसचिव ने इसकी पुष्टि की।
छह माह के लिए किया था निष्कासित
दून विवि छात्र परिषद अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह चौहान को एक पुराने आरोप में विवि प्रशासन ने सोमवार को छह माह के लिए विवि से निष्कासित कर दिया था। जिसके बाद छात्र ने कुलपति कार्यालय में तालाबंदी कर कैंपस में जमकर हंगामा काटा। दूसरे दिन मंगलवार को भी छात्रों ने विवि कैंपस में वीसी के खिलाफ नारेबाजी कर धरना दिया। विवि के मुख्य गेट पर पुलिस बल तैनात किया गया था और अंदर जाने वाले प्रत्येक छात्र की जांच की जा रही थी। जिसका डीएवी कॉलेज छात्र संघ अध्यक्ष शुभम सेमल्टी ने कड़ा विरोध किया और विवि के कुलसचिव से इस संबंध में बात की। जिसके बाद छात्रों को कैंपस में प्रवेश करने दिया गया। शुभम सेमल्टी ने कैंपस में छात्रों को संबोधित करते हुए वीसी पर आरोप लगाए कि वे अपने शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। जिसका जमकर विरोध किया जाएगा।
वार्ता के बाद निष्कासन किया रद्द
सत्येंद्र चौहान ने आरोप लगाए कि वे छात्र हितों के मुद्दों को लेकर कुलपति से मिले थे छात्रों के मुद्दों का समाधान करने के बजाए उन्हें छह माह के लिए विवि से निष्कासित कर दिया गया जो सरासर गलत हैं। दोपहर बाद छात्र प्रतिनधिमंडल को विवि प्रशासन ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया। जहां सत्येंद्र चौहान ने अपना पक्ष रखा और उनके बाद विवि प्रशासन ने निष्कासन स्थगित करने का निर्णय लिया।
इस मामले में किया था निष्कासित
31 मई 2016 को दून विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नियुक्ति के साक्षात्कार के दौरान छात्रों ने हंगामा किया था। छात्रों का आरोप था कि विवि जानबूझकर गलत नियुक्तियां कर रहा है। इस दौरान प्रो.कुसुम अरुणाचलम व अन्य शिक्षकों के साथ अभद्रता की थी। इसकी तत्कालीन वीसी प्रो.वीके जैन ने जांच बैठाई थी। इसी मामले में सत्येंद्र चौहान पर निष्कासन की कार्रवाई हुई।

बयान
दून विवि छात्र परिषद अध्यक्ष सत्येंद्र चौहान ने प्रोक्टोरियल बोर्ड के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर अपने ऊपर लगे आरोपों पर पुन: विचार करने का आग्रह किया और निर्णय आने तक उसके निष्कासन को स्थगित करने का आग्रह किया। जिसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है।
– डा. मंगल सिंह मंद्रवाल, कुलसचिव, दून विवि
दून विवि प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बाद विवि छात्र परिषद अध्यक्ष सत्येंद्र चौहान का छह माह का निष्कासन स्थगित करने का निर्णय लिया है जिसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। डीएवी कॉलेज छात्र संघ हर मोर्चे पर दून विवि छात्र परिषद अध्यक्ष के साथ खड़ा रहेगा।
– शुभम सिमल्टी, अध्यक्ष, डीएवी पीजी कॉलेज
छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ मंगलवार दोपहर को कुलपति कार्यालय में रजिस्ट्रार की उपस्थिति में वार्ता हुई जिसमें छात्र परिषद ने अपना पक्ष रखा। वार्ता के बाद दून विवि प्रशासन ने मेरा छह माह का निष्कासन फिलहाल स्थगित कर दिया है। विवि प्रशासन के साथ छात्र हितों के मुद्दों पर वार्ता जारी रहेगी।
– सत्येंद्र चौहान, अध्यक्ष, दून विवि छात्र परिषद