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राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों से प्रगाढ़ होंगे भारत-म्यांमार रिश्ते : राष्ट्रपति

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नई दिल्ली, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने म्यांमार की स्टेट काउंसिलर आंग सान सू की से शनिवार को राष्ट्रपति भवन में मुलाकात के दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच व्यवसाय समर्थित राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों से रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत-म्यांमार का मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार हमारे प्रगाढ़ रिश्ते को प्रतिबिंबित नहीं कर रहा है क्योंकि अभी दोनों देशों के बीच महज 2 अरब डॉलर का ही व्यापार हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा, हाइड्रोकार्बन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए बहुत अधिक संभावनाएं हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों के तहत भारत के लिए म्यांमार सर्वोच्च प्राथमिकता रखता है। उन्होंने म्यांमार सरकार को उनकी शांति प्रक्रिया में भारत के निरंतर समर्थन और राष्ट्रीय सामंजस्य और आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयासों का आश्वासन दिया।

बातचीत के दौरान, राष्ट्रपति ने कहा कि भारत गणतंत्र दिवस समारोह और आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन में आंग सान सू की मौजूदगी से सम्मानित महसूस करता है। उन्होंने कहा कि आंग सान सू की और उनके परिवार के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंध रहे हैं। राष्ट्रपति भवन और मुगल गार्डन का भी उनके साथ एक विशेष संबंध है। राष्ट्रपति ने आंग सान सू की को राष्ट्रपति भवन के विशाल गार्डन से पत्तीदार गुलाब भी भेंट किए।

दुुनिया के 400 छात्रों ने परमार्थ गंगा तट पर लिया स्वच्छता महासंकल्प

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ऋषिकेश,  भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों यथा चीन, ब्राजील, अमेरीका, ब्रिटेन, दुबई और कई अन्य देशों के लगभग 400 से अधिक छात्र ने आज परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर ’’स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण’’ का संकल्प ग्रहण किया। इस अवसर पर स्वच्छता का संदेश प्रसारित करने के लिये ’’स्वच्छता जागरूकता रैली’’ का आयोजन किया गया जिसमें देहरादून व विश्व के विभिन्न देशों से आये विद्यार्थी, स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक एवं जिला स्वच्छ भारत प्रेरक बिहार के प्रतिभागी, लद्दाख से आयी बौद्ध भिक्षुुनियां, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और देशी विदेशी सैलानियों ने सहभाग किया।

जीवा एवं गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन द्वारा पपेट शे के माध्यम से ’’स्वच्छता का महत्व’’ विषय पर लघु नाटिका का चित्रण किया गया।

भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों से आया यह छात्रों का दल परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के चिदानन्द महाराज ने पर्यावरण संरक्षण, नदियों को स्वच्छ एवं अविरल बनाने तथा वृक्षारोपण के लिये किये जा रहे प्रयासों के बारे में बताया।

विदेशी छात्रों में गंगा आरती को लेकर भी अत्यधिक उत्सुकता थी। छात्रों ने भारतीय आध्यात्म को परमार्थ निकेतन आकर नजदीक से जाना और यह महसूस किया की वास्तव में परमार्थ तट पर होने वाली आरती के वह पल अमृत के समान है जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता केवल अनुभव किया जा सकता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा, ’’नव सृजन के लिये नये जोश और नये उत्साह की नितांत अवश्यकता है। नई ऊर्जा, नई सम्भावनाओं को जन्म देती है और वर्तमान समय में सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य का निर्माण सबसे बड़ी चुनौती है।  अगर हम सभी जागरूक रहे तो इस भयावह आंकडों को कम किया जा सकता है। स्वामी जी ने सभी युवाओं का आहृवान करते हुये कहा कि परिवर्तन ही जीवन है, अतः नई सोच; नये विचारों के साथ आगे बढ़े और प्रदूषण नामक वैश्विक समस्या के समाधान के लिये स्वच्छता के अग्रदूत बने।’’

गंगा तट पर सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित जनसमुदाय ने प्रदूषण को जड़ से मिटाने तथा स्वच्छता को अंगीकार करने का संकल्प लिया।

खेलो इंडिया ने लांच किया आॅनलाइन क्विज

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नई दिल्ली,  राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख खेल आयोजन स्थलों पर 31 जनवरी से 8 फरवरी तक आयोजित होने वाले पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स (केआईएसजी) के तहत खेलो इंडिया ने एक बिल्कुल अलग क्विज प्रतियोगिता शुरू की है, जिसका नाम ‘अब हर कोई खेलेगा क्विज’ रखा गया है।

इस आॅनलाइन क्विज प्रतियोगिता की शुरुआत 22 जनवरी को हो चुकी है और यह सिर्फ पांच दिनों में 55 हजार प्रतिभागियों को आकर्षित कर चुकी है। यह क्विज 31 जनवरी तक आयोजित होनी है और इसे-www.kheloindia.gov.in/quiz पर जाकर खेला जा सकता है।

इस वेबसाइट पर लॉगइन करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी (यूजर) को 15 राउंड का सामना करना है। एक दिन में चार सवाल उसके सामने आएंगे। हर दिन 10 विजेताओं का चयन होगा। इनका चयन इनके स्कोर के आधार पर होगा। अगर टाई होता है तो फिर लकी ड्रॉ से विजेता का चयन होगा।

इस प्रतियोगिता में जीतने वालों को खेलो इंडिया मर्चेंटडाइड पुरस्कार के तौर पर दी जाएगी। साथ ही टॉप-10 खिलाड़ियों को स्कूल गेम्स के समापन के अवसर पर खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर से मिलने का मौका मिलेगा।

इस क्विज प्रतियोगिता को भारतीय खेलों को प्रोमोट करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और साथ ही इसके माध्यम से भारत के समृद्ध खेल विरासत को लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया गया है। इसके अलावा इसका उद्देश्य युवाओं को खेलों की ओर आकर्षित करना भी है।

हीरक जयंती अंतिम दिन राज्यपाल का रहा सम्बोधन

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भरत मंदिर इंटर कॉलेज के हीरक जयंती उत्सव के अंतिम दिन के सत्र में महामहिम राज्यपाल के के पॉल और हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक तथा शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक में प्रतिभाग किया।

सर्व प्रथम राज्यपाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का आरंभ किया गया जिस में मौजूद 70 वर्ष पूर्ण होने के उत्सव में आए विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों ने अपने अनुभव बांटे साथी राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि, “आज के वक्त में हमें कंप्यूटर और इंटरनेट के द्वारा ज्ञान तो प्राप्त हो सकता है मगर संस्कार हमें विद्यालय में जाकर गुरुकुल परंपरा से ही मिलते हैं आज जरूरत है हमें कि हम ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने गुरुओं के साथ बिताएं और उनसे शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी प्राप्त करें साथ ही महामहिम राज्यपाल में विद्यालय के पुस्तकालय के लिए एक लाख रुपए देने की भी घोषणा की।”

इंडोनेशियाई ओपन के फाइनल में पहुंची साइना नेहवाल

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नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल इंडोनेशियाई ओपन के फाइनल में पहुंच गई हैं। साइना ने सेमीफाइनल मुकाबले में पूर्व विश्व चैम्पियन थाईलैंड की इंथानॉन रैचानॉक को शिकस्त दी। 27 वर्षीय साइना ने रैचानॉक को 21-19, 21-19 से मात देकर छठी बार खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में साइना का सामना चीनी ताइपे की ताई जू इंग और चीन की ही बिंगजिआओ के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा।


रैचानॉक और साइना के बीच अब तक 15 मैच हुए हैं,जिसमें साइना ने 9 बार जीत दर्ज की है व छह में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। उल्लेखनीय है कि साइना ने क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। साइना ने सिंधु को 21-13, 21-19 से मात दी थी।

आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारी, पांच माह से नहीं मिला वेतन

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देहरादून। शिक्षा विभाग में तैनात बीआरसी/सीआरसी समन्वयक इन दिनों भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। बीते पांच माह से वेतन न मिलने के कारण कई कर्मचारियों के बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं हो पाई है। आलम यह है कि कर्मचारियों को परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है। मामले में प्राथमिक शिक्षक संघ ने विभाग से वेतन जारी करने की मांग भी की, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकलने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालांकि, विभाग ट्रेजरी से वेतन जल्द से जल्द जारी करने की बात कर रहा है।

परिवार के भरण-पोषण में भी आ रही परेशानी
शिक्षा विभाग में तैनात बीआरसी/सीआरसी समन्वयक अक्टूबर से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे बच्चों की फीस भी नही भर पा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें अक्टूबर माह से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अधिकांश कर्मी किरानों में रहते हैं। ऐसे में वेतन समय पर नहीं मिलने से कमरों का किराया देना और परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। विभाग भी लगातार उनकी अनदेखी कर रहा है। लगातार वेतन की मांग करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।

दो दिन तालबंदी का भी असर नहीं
शिक्षा विभाग के इस रवैये के खिलाफ प्राथमिक शिक्षक संघ बीआरसी/सीआरसी की पैरवी के लिए आगे आया। संघ ने शिक्षा विभाग से समस्या का समाधान करने की मांग की। मगर इसके बाद भी कोई सकारात्मक कार्रवाई न होती देख संघ ने विरोध दर्ज करते हुए बीते दिनों मंगलवार और बुधवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देते हुए तालाबंदी कर दी। संगठन ने दो दिन तक लगातार तालाबंदी जारी रखी।
संगठन के अध्यक्ष विरेंद्र कृषाली ने कहा कि उत्तराखंड राज्य सर्व शिक्षा अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी रहा है। जिसका श्रेय सर्व शिक्षा अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में बीआरसी-सीआरसी समन्वयकों को जाता है। लेकिन, इन्हें पिछले पांच माह से वेतन ही नहीं मिला। शैक्षिक सत्र में आकस्मिक व्यय की धनराशि भी अवमुक्त नहीं हुई है, जिस कारण बीआरसी-सीआरसी समन्वयक बिना धन काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे कर्मचारी उक्त व्यवस्था से पीड़ित, परिवार के जीवकोपार्जन में कठिनाइयां पैदा हो रही है, परंतु अनुशासन उन्हें आवाज बुलंद करने भी नहीं दे रहा है। शिक्षक नेता धर्मेंद्र रावत ने बताया कि कई बीआरसी/सीआरसी ऐसे हैं जिनके परिवार के खर्च के अलावा सबकुछ सिर्फ वेतन पर निर्भर रहना पड़ता है, ऐसी स्थिति में वेतन में जब भी विलंब होता है, बहुत ही दिक्कत सामने आ जाती हैं।

विभाग को दिया दो दिन का समय
शिक्षक संघ ने विभाग को समस्या के समाधान के लिए दो दिन का समय दिया है। संघ के अध्यक्ष कृषाली ने कहा कि इस विषय में मुख्य शिक्षाधिकारी से बात हुई है लेकिन उनकी तरफ से भी कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि बजट आ गया है, वेतन कब तक जारी होगा इसका अभी अता पता नहीं है। हमारी ओर से बीआरसी-सीआरसी समन्वयकों को ट्रेजरी से वेतन भुगतान और ट्रेजरी कोड आवंटन की भी मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग 29 जनवरी तक बीआरसी-सीआरसी समन्वयकों का वेतन जारी नहीं करता है तो एक बार आंदोलन को उग्र कर दिया जाएगा।

रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षण युवाओं के लिए अवसर

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देहरादून,  जिले के युवाओं को पांच दिवसीय रिवर राफ्टिंग प्रशिक्षण दिया जायेगा। साहसिक खेल अधिकारी देहरादून ने बताया कि, “जिला योजना वर्ष 2017-18 के साहसिक पर्यटन मद में जिले के युवाओं को क्षेत्रीय पर्यटक कार्यालय देहरादून द्वारा फरवरी माह में प्रथम चरण में पांच दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन कौडियाला में करवाया जाना प्रस्तावित है।”

इसमें जिले के कुल 30 युवाओं को उक्तवत साहसिक प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रशिक्षण के लिए 16 वर्ष से 26 वर्ष तक की आयु के युवाओं का चयन कर प्रशिक्षण दिलवाया जाना प्रस्तावित है। उन्होेंने कहा कि इच्छुक छात्र-छात्रा क्षेत्रीय पर्यटक कार्यालय 45 गांधी रोड देहरादून से निर्धारित आवेदन पत्र प्राप्त कर आवेदन पत्र पूर्ण एवं स्पष्ट अक्षरों में भरते हुए क्षेत्रीय पर्यटक कार्यालय में जमा कर सकते है। छात्र-छात्राओं का चयन प्रथम आवत प्रथम पावत के आधार पर किया जायेगा। 

सुबह-सुबह भारतियों के ”गुड मॉर्निंग” से क्यों परेशान है सिलिकॉन वैली के इंजीनियर?

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सिलिकॉन वैली में गूगल शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि ऐसा क्यों हो रहा कि दुनिया के आधे से ज्यादा मोबाईल फोन फ्रीज हो रहे। और भारत में तो हर तीन मोबाईल फोन यूज़र में एक यूज़र के फोन का स्पेस हमेशा भरा रहता है।

”इसका जवाब है, गुड मार्निंग”

जी हां गूगल ने शोध में यह बताया कि सुबह-सुबह लोगों द्वारा एक दूसरे को गुड मार्निंग मैसेज के साथ फूल पत्तियों वाले वॉलपेपर,टैड़ी बियर,जीफ इमेज,विडियो,आडियो आदि इसका सबसे बड़ा कारण हैं।शोध में बताया गया है कि किस तरह भारतीय लोग वाट्सऐप के माध्यम से सैकड़ों की संख्या में सूरज उगने से पहले ही हर सुबह एक दूसरे को गुड मार्निंग मैसेज भेजते हैं और सूरज ढ़लने तक अपने दोस्तों,परिवारजन,ऑफिस में काम करने वालों से लेकर अंजान लोगों तक यह मैसेज भेजते हैं। जहां एक तरफ पहले से 10 गुना ज्यादा लोग गूगल पर गुड मार्निंग ईमेज सर्च यानि की ढ़ूढ़ते हैें वहीं अब लोग पिनट्रेस्ट के कोटेशन वाले ईमेज को भी इस्तेमाल करते नज़र आ रहे हैं।

आपको बतादे कि केवल भारत में एक महीने में व्हाट्सऐप के तकरीबन 200 मिलियन यूज़र है जो भारत को व्हाट्सएप इस्तेमाल का सबसे बड़ा मार्केट बनाता है,पिछले साल व्हाट्सऐप के नए स्टेसस के फंक्शन के माध्यम से यूजर एक साथ सभी तक कोई भी मैसेज पहुंचा सकता है।

जहां एक तरफ व्हाट्सएप का क्रेज युवाओं में बहुत ज्यादा हैं वहीं हम उम्रदराज़ लोगों को भी दरकिनार नहीं कर सकते।इस समय भारत में लगभग हर उम्र के लोग व्हाट्सएप का इस्तमेाल कर रहे हैं और इसके बारे में जानते हैं।

messages 70 साल के प्रोफेसर गणेश सैली से इस बाबत न्यूज़पोस्ट से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि ”सुबह मेरे उठने से भी पहले से लोगों के गुड मार्निंग मैसेज आने लगते हैं,इसलिए मैं अपना वाट्सएप साइलेंट पर रखता हूं।सुबह उठने के बाद फोन में मौजूद लगभग सभी ग्रुप में हजारों गुड मार्निंग मैसेज होते हैं जिसकी कोई जरुरत नहीं होती।एक तो यह फोन की मैमोरी फुल करता हैं दूसरा यह सुबह-सुबह काम में बांधा डालता है।”

दूसरी तरफ 21 साल की स्टूडेंट अर्पिता नेगी से बातचीत में उन्होंने कहा कि ”यह गुड मार्निंग मैसेज भेजने की वजह मुझे आज तक नहीं समझ आई,लोग रंग-बिरंगे फूल,टैडी बियर,चिड़ियो वाली वॉलपेपर सुबह-सुबह भेजना शुरु कर देते हैं।एक तो इससे पढ़ाई में बहुत डिर्स्टबेंस होती है दूसरा यह ईमेंज वाट्सएप की स्पीड कम कर देते हैं।अर्पिता कहती हैं आधी बार तो अंजान लोग भी ग्रुप में लंबे-चौड़े मैसेज और विडियो के माध्यम से गुड मार्निंग और गुड नाईट विश करते हैं जिसकी कोई जरुरत नहीं होती।उन्होंने कहा कि मैं तो सुबह उठते ही अपना फोन म्यूट पर रख देती हूं कि मुझे इन मैसेजेस से पढ़ाई में कोई रुकावट ना हो।”

वाट्सएप पर बने ग्रुप में भी लोग सुबह-सुबह गुड मार्निंग मैसेज भेजने लगते हैं,चाहे वह ऑफिस का ग्रुप ही क्यों ना हो,हालांकि कुछ ग्रुप पर यह भी निवदेन किया जाता है कि सुबह-सुबह ऐसे मैसेज करने से बचे लेकिन फिर भी बहुत से लोग हैं जो गुड मार्निंग और गुड नाईट दोनों मैसेज भेजते हैं।

इतना ही नहीं किसी भी खास मौके पर जैसे कि गणतंत्र दिवस,नया साल,जन्मदिन की शुभकामनाएं,रक्षाबंधन,दीवाली,होली से लिए लगभग हर त्यौहार की शुभकामनाएं लोग व्हाट्सएप के जरिए भेजते हैं और ऐसे छोटे-छोटे बहुत से त्यौहारों पर लोग शुभकामनाओं के मैसेज की झड़ी लगा देते हैं।

आपको बतादें कि एक शोध के अनुसार भारत में 1जनवरी 2018 को 20 मिलियन से ज्यादा नए साल के मैसेज का आदान-प्रदान किया गया था जो कि एक रिकॉर्ड हैं और भारत इसमें सबसे आगे है।

हरिद्वार में 29-30 को रोजगार मेला का आयोजन

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हरिद्वार, पन्नालाल भल्ला इंटर काॅलेज मायापुर हरिद्वार में 29 व 30 जनवरी को सेवायोजन कौशल विकास मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत के निर्देशन में आयोजित होने वाले रोजगार मेला स्थल का कार्यक्रम संयोजक संजय चोपड़ा ने निरीक्षण किया। चोपड़ा ने कंधारी धर्मशाला पुरानी सब्जी मण्डी में कैम्प लगाकर आम नागरिकों को व बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार मेले की विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर संजय चोपड़ा ने बताया कि यह रोजगार मेला उत्तराखण्ड हरिद्वार में प्रथम बार आयोजित किया जा रहा है। रोजगार मेले का उद्देश्य बेरोजगार युवक-युवतियों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार सरकार के संरक्षण में अर्जित कराना है। उन्होंने कहा कि, “स्थानीय युवाओं को औद्योगिक क्षेत्रों में 70 प्रतिशत नौकरी देने की कार्यवाही को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिये। ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल सके।”

उन्होंने कहा कि पूरे उत्तराखण्ड में 70 प्रतिशत औद्योगिक क्षेत्रों में नौकरियां दिलाने के प्रयासों को तेज करते हुए जन जागरूकता एवं कैम्प के माध्यम से जागरूकता फैलाई जायेगी जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त हो सके। 

पेयजल संकट बना पलायन की वजह

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पिथौरागढ़- पलायन के लिए पहाडों पर एक नहीं कई कारण है, सरकार भले ही पलायन रोकने के लिए कई कदम भी उठा रही है, लेकिन शासन की फाईलों में घुमती योजनाएं धरातल पर नहीं उतरती और युवा पीढी को पलायन के लिए मजबूर होना पडता है, एसा ही कि भारत-नेपाल सीमा से लगे गर्खा क्षेत्र का जहां पलायन कि वजह पेयजल समस्या है।

ग्यारह हजार की आवाजी वाले इस क्षेत्र पेयजल समाधान राज्य गठन के 17 वर्षो बाद भी नहीं हो पाया है। इस क्षेत्र के लोगों को गर्मियां तो दूर शीतकाल में भी पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। पानी की कमी के चलते लोग गांव छोड़ रहे हैं। गर्खा क्षेत्र के लिए हालांकि दो पेयजल योजनाएं बनी हैं। एक पेयजल योजना 7 किमी तो दूसरी लगभग 14 किमी दूर से बनी हैं। दोनों स्रोतों में पानी लगातार घट रहा है। स्रोतों पर पानी कम होने से गर्खा क्षेत्र तक पानी नहीं पहुंच पाता है। जिसके चलते गर्खा क्षेत्र के 13 गांव विगत कई वर्षो से पेयजल समस्या झेल रहे हैं।

वर्ष 2007 में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूड़ी ने भागीचौरा में क्षेत्र के लिए चरमा नदी से लिफ्ट पेयजल योजना स्वीकृत की थी। 10 वर्ष गुजर गए पेयजल योजना का निर्माण नहीं हो सका है। इस पेयजल योजना के संबंध में पेयजल निगम के अधिकारी बताते हैं कि लिफ्ट पेयजल योजना की डीपीआर दो बार शासन को भेज दी गई है। वित्तीय स्वीकृति के बाद कार्य प्रारंभ होगा। शीतकाल में ही पेयजल संकट झेल रहे ग्रामीण आने वाली गर्मियों को लेकर अभी से परेशान हैं।