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रंगों से नई नई कहानियां बयां करती हैं सरोजिनी डबराल

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अपने चाहने वाले और कला प्रेमियों के बीच सरू के नाम से पहचाने जाने वाली पेंटर सरोजिनी डबराल अपनी कला से अपने उत्तराखंड प्रेम को लोगों के बीच लाती रहती हैं। सरू सादी के बाद ज़रूर मुंबई शिफ्ट हो गई हैं पर उत्तराीखंड के लिये ुनका प्यार रंगों का रूप लेकर उनकी पेंजिग में झलकता रहता है।

सरू टिहरी के चमरोली गांव की हैं औऱ उनकी परवरिश दिल्ली में हुई है। सरू ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में फैशन डिजाइनर के तौर पर की लेकिन पेंटिंग के प्रति उनके बचपन के प्यार ने उन्हें आखिरकार एक पेशेवर पेंटर बना दिया। गौरतलब है कि सरू ने कभी पेंटिंग की ट्रेनिंग नहीं ली है बल्कि 2010 से शौकिया ऑयल पेंट, ऐक्रेलिक और टर कलर्स से वो खुद पेंटिग करती आ रही हैं।

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सरू कहती हैं कि “मेरा प्रकृति, बच्चों, महिलाओं और इमारतों के प्रति काफी रुझान है लेकिन किसी भी अच्छे विचार से मुझे प्रेरणा मिलती है। यहीं कारण है कि सरू की अधिक्तर पेंटिग्स में हमें पहाड़ औऱ खासतौर पर उत्तराखंड की झलक मिलती है।”
सरू अपने परिवार और काम के बीच समन्वय बिठाने में भी कामयाब हैं। वो कहती हैं कि “अगर आप किसी चीज के प्रति लगन से काम कर रहैं तो बाकी सब चीज़ें खुद ब खुद रास्ते पर आ जाती हैं।”
सरू इसी बात पर अमस करती आ रही हैं। अपने पेंटिग के सौक को उन्होने नहीं चोड़ा है और वो कहती हैं कि “इतने सालों की मेहनत और प्रैक्टिस के बाद मुझमें विश्वास आया है कि मै इस कला में और महारत और नई नई चीज़े कर सकती हूं।”

न्यूजपोस्ट की तरफ से इस युवा कलाकार को ढेरों बधाईयां।

कर्मचारी निघि रकम न जमा कराने के चलते दून की फर्म पर छापा

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कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), देहरादून के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को छापे के बाद एक निजी कंपनी की चल संपत्ति जब्त कर ली। इस कंपनी पर आरोप है कि वो विभाग के कई नोटिस के बावजूद पीएफ मानकों का पालन करने में नाकाम रही थी।

अधिकारियों ने एक कार और कंपनी की कई मशीनरी जब्त की। फर्म के पास कर्मचारियों के पीएफ का 22.47 लाख रुपये बकाया है। गौरतलब है कि ये रकम कंपनी पर पिछले तीन साल से अधिक समय से बकाया है। बार-बार नोटिस के बावजूद फर्म ने पैसे जमा नहीं कराया। ईपीएफ के आयुक्त मनोज यादव ने कहा, “फर्म ने पिछले तीन वर्षों में अपने पीएफ योगदान और उसके कर्मचारियों की रकम भी जमा नहीं की।” मंगलवार की दोपहर, ईपीएफ अधिकारियों की एक टीम ने कंपनी के परिसर में छापा मारा। यादव ने कहा, “हमारी टीम ने एक कार और संयंत्र मशीनरी संलग्न की है। अब, फर्म के मालिकों  को कोई भी काम करने से पहले विभाग में रकम जमाकर एनओसी लेनी पड़ेगी। हाल ही में, ईपीएफ देहरादून कार्यालय ने गुरुकुल कांगड़ी फार्मेसी के बैंक खातों को एक करोड़ की पीएफ देनदारी के चलते सीज़ कर दिया था।

अन्ना हजारे फिर दिल्ली में करेंगे आन्दोलन, 13 को आएंगे उत्तराखंड

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देहरादून,  समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर से जनता की अदालत में जाने का मन बनाया है। अन्ना हजारे जन लोकपाल लोकायुक्त की नियुक्ति आदि मांगों को लेकर 23 मार्च को दिल्ली में एक बड़ा आन्दोलन करेंगे। इसके लिए वह पूरे देश में अपना संगठन बना रहे है, इतना ही नहीं अगले माह पांच फरवरी को दिल्ली में उनके संगठन के कार्यालय का उद्घाटन होना है।

उत्तराखंड टीम अन्ना हजारे के समन्वयक भोपाल सिंह ने उत्तराचंल प्रेस क्लब में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, “दो माह पूर्व अन्ना ने अपने गांव रालेगन सिद्धि में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान यह ऐलान किया था। अन्ना का कहना है कि मतपत्रों व ईवीएम मशीनों में प्रत्याशियों का फोटो लगा हो एवं उस फोटो को देखकर ही जनता अपना प्रतिनिधि चुने।” भोपाल सिंह ने बताया कि अन्ना हजारे ने कहा है कि यह आन्दोलनउनके जीवन का शायद आखिरी अनशन होगा।

भोपाल सिंह ने अन्ना का हवाले से कहा कि, “जो भीसत्ता में आ रही है वही सरकार किसानों एवं आम जनता से धोखा कर रही है। बेमतलब के कानून बनाकर जनता को परेशान कर रही है। पक्ष् पार्टियां चुनाव निशान का सिंबल देकर भ्रष्टाचारी, माफियाओं, गुंडों को देश के पवित्र मंदिरों (सदनों) में भेज रही हैं। इसलिए यह चुनाव के निशान और सिंबल समाप्त होने चाहिए।” फोटो के आधार पर ही चुनाव होना चाहिए।

सरकारों पर दबाव बनाने के लिए अन्ना पूरे देश में पहली बार अपना संगठन बनाने जा रहे हैं जिस की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। दिल्ली में 5 फरवरी को कार्यालय खोल दिया जाएगा। देश के सभी राज्यों में कोर कमेटी बनाई जाएंगी, ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पूरे देश में संगठन खड़ा किया जाएगा।

इस परिपेक्ष में अन्ना उत्तराखंड भ्रमण पर भी आ रहे हैं अन्ना 13 फरवरी को सायं 7:00 बजे जॉली ग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे 14 को 8 बजे श्रीनगर के लिए प्रस्थान करेंगे व 12:00 बजे श्रीनगर में जनसभा को संबोधित करेंगे। 2:00 बजे टिहरी को प्रस्थान करेंगे, रात्रि विश्राम टिहरी में होगा। उसके बाद 15 फरवरी को टिहरी से जनसभा करेंगे। और शाम को दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

आम लोगों के लिए 6 फरवरी से खुलेगा राष्ट्रपति भवन का मुगल गार्डन

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नई दिल्ली, राष्ट्रपति भवन का मुगल गार्डन इस वर्ष 6 फरवरी से आम लोगों के लिए खुलेगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 5 फरवरी को राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन का उद्घाटन करेंगे।

राष्ट्रपति सचिवालय ने एक विज्ञप्ति में बताया कि राष्ट्रपति भवन ने तय किया है कि इस बार मुगल गार्डन 6 फरवरी से 11 मार्च तक जनता के लिए खुला रहेगा। राष्ट्रपति द्वारा मुगल गार्डन का उद्धाटन करने से एक दिन पूर्व अर्थात 4 फरवरी को मीडिया से जुड़े लोगों को मुगल गार्डन के पूर्वावलोकन के लिए आमंत्रित किया गया है।

मुगल गार्डन में विश्व के रंग-बिरंगे फूलों की छंटा देखने को मिलती है। हर वर्ष फरवरी- मार्च माह में यह अाम जनता के दर्शनार्थ खोला जाता है। नियमित रूप से बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं।

आपको अपने गांव के और करीब ले जाएगा यह विडियो ”चलो पहाड़”

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‘चलो पहाड़’ दो मिनट का यह विडिया इन दिनों सोशल मीडिया फेसबुक पर खुब पसंद किया जा रहा है।विडियो को बनाने वाले 21 साल के संदीप रतूड़ी देहरादून के रहने वाले हैं और फिलहाल संदीप हैदराबाद से फिल्म मेकिंग की पढ़ाई कर रहे हैं और उसके साथ डायरेक्शन,एक्टिंग,एडिटिंग और फिल्मेकर भी है।

दून के निवासी का बनाया विडियो ‘चलो पहाड़’ एक छोटा सा विडियो है लेकिन वह अपने आप में एक बहुत बड़ी कहानी कहता है।सोशल मीडिया पर मशहूर विडियो की खास बात है यह कि इसको फोन से शूट किया गया है और बाद में इसमें एडिटिंग कर इसमे बैंकग्राउंड म्यूज़िक लगाया गया है। संदीप रतूड़ी दून इंटरनेशनल स्कूल के पढ़े हुए हैं और आजकल वह हैदराबाद से फिल्म की बारिकियां सीख रहे हैं।

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इस विडियो को उत्तराखंड के लोगों से खासी सराहना मिल रही है और केवल दो-तीन दिन में ही इस विडियो ने हजारों व्यू और लाइक्स अपने नाम कर लिए हैं। इस विडियो के बारे में न्यूजपोस्ट से बातचीत में संदीप ने बताया कि, “यू तो मैं अपनी पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर हूं लेकिन दिल मेरा पहाड़ों में बसता है और जब भी मुझे समय लगता हैं मैं पहाड़ों में समय बिताना पसंद करता हूं।संदीप बताते हैं कि सर्दियों की छुट्टियां बिताने मैं लगभग दस साल बाद अपने नानी के घर जा रहा था जब मैने अपने फोन से छोटे-छोटे शॉट शूट किए।संदीप ने कहा कि मुझे नहीं पता था कि मैं इन विडियो का क्या करुंगा लेकिन मुझे शूट करना पसंद है तो बस मैं करता गया। ‘चलो पहाड़’ के बारे में संदीप कहते हैं कि, “यह एक बीस साल के लड़के की कहानी है जो एक दशक के बाद अपने गांव जाता हैं जहां लोग उसका स्वागत दिल खोल कर करते हैं।इस सफर को तय करते हुए वह अपनी बचपन की यादें ताज़ा करता हैं और बीच-बीच में लोगों से मिलता है जो लोग बहुत ही प्यार और सम्मान से उसका स्वागत करते हैं।

संदीप कहते हैं कि, “मुझे सच मे कोई आइडिया नहीं था कि मैं क्या करुंगा शायद इसलिए मैं अपने फोन से ही शूट करता रहा और बाद में एडिट करके फेसबुक पर लगाया।”

आपको बतादें कि इस विडियो की खास बात है लोगों का भाव जिस भाव से हर कोई संदीप का स्वागत कर रहा है वह वाकई बहुत निर्मल है और जो कोई भी अपने गांव सालों से नहीं गया उसे झकझोर देने वाला है।इस विडियो को शूट करने वाला रास्ता चारीगढ़ है जो चमियाल टिहरी गढ़वाल में आता है, जहां आज से दस साल पहले तक पहुंचने का कोई साधन नहीं था।इस विडियो के माध्यम से एक संदेश मिलता है कि अगर आप बहुत व्यस्त हैं और अपनी जिंदगी शहर में गुज़ार रहे हैं तो एक बार जरुर पहाड़ जाए, अपने गांव जाए, जहां आज भी कुछ नहीं बदला है। वहीं भाव,वही प्यार हर कोई उतना ही निर्मल है जितना पहले था।

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संदीप फिल्ममेकर होने के साथ-साथ एक थिएटर आर्टिस्ट भी हैं।संदीप कहते हैं कि, “हमारे देहरादून में थियेटर की कमी है,टैलेंट से भरा हुआ है शहर लेकिन थियेटर या कोई माध्यम ना होने की वजह से युवाओं को शहर छोड़ दिल्ली,हैदराबाद और दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। संदीप उत्तराखंड में थिएटर और फिल्मों के माध्यम से लोगों को जागरुक करना चाहते हैं और साथ ही गढ़वाली सिनेमा को एक परफेक्शन के साथ लोगों के सामने लाना चाहते है।संदीप कहते हैं, “जिस तरह मुझे अपने शहर को छोड़ कहीं और से थिएटर की शिक्षा लेेनी पड़ी वैसा ना हो इसलिए मैं अपना थिएटर शुरु करना चाहता हूं जिससे लोग अपने घर और शहर में रह कर थिएटर और फिल्म की बारिकियां सीख सकें।संदीप हर किसी को यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर आप सच में कुछ करना चाहते हैं तो इसके लिए बड़े कैमरे और इंस्ट्रूमेंट की जरुरत नहीं हैं आपको फोन आपके संदेश को पहुंचाने के लिए काफी है।”

 ‘चलो पहाड़’ हर एक ऐसे युवा की कहानी है जो सालों से अपने घर अपने गांव पहाड़ नहीं गया और इस विडियो को देखकर एक बाऱ फिर से उसके अंदर अपने पहाड़ जाने की लालसा पैदा हो जाती है।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने कहा, गुरु रविदास की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक

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नई दिल्ली,  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महान संत कवि गुरु रविदास की समानता, एकता और सामाजिक सौहार्द की शिक्षा और संदेश को आज भी प्रासंगिक बताते हुए देशवासियों को उनकी जयंती की शुभकामनाएं दी हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर जारी शुभकामना संदेश में कहा कि सभी देशवासियों को गुरु रविदास जयंती की शुभकामनाएं। समानता, एकता और सामाजिक सौहार्द की उनकी शिक्षा और सन्देश देश को प्रेरणा देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा ‘गुरु रविदास जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। गुरु रविदास जी हमारी भूमि पर जन्मे सबसे महान संतों में से एक थे। वह समानता, न्यायोचित व दयालुपूर्ण समाज की स्थापना में विश्वास करते थे। उनकी शिक्षाएं शाश्वत हैं और समाज के सभी वर्गों के लोगों के लिए प्रासंगिक हैं।’ उन्होंने रविदास की कुछ पंक्तियां भी ट्वीट की हैं। गुरु रविदास ने कहा था, ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिलै सबन को अन्न। छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न।

मोदी ने एक अन्य ट्वीट संदेश में कहा, गुरु रविदास जी ने हमारे समाज में कई सकारात्मक बदलाव किए। उन्होंने उन प्रथाओं पर सवाल उठाया जो पुरानी और प्रतिगामी थी। उन्होंने लोगों को समय के साथ बदलने के लिए प्रेरित किया। उनकी समानता की भावना और समय के साथ आगे बढ़ना ही उन्हें महान बनाता है।

उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी सद्भाव और भाईचारे के मूल्यों में विश्वास रखते थे। वह किसी प्रकार के भेदभाव में विश्वास नहीं करते थे। जब हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ के आदर्श वाक्य के साथ काम करते हैं, तो हम हर इंसान, खासकर गरीबों की सेवा करने के लिए गुरु रविदास जी से प्रेरित होते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी के समृद्ध विचारों के मार्गदर्शन में, हम एक मजबूत, समावेशी और समृद्ध भारत का निर्माण करने के लिए चौबीस घंटे काम कर रहे हैं जहां विकास का फल सभी तक पहुंचता है और गरीबों को सशक्त बनाता है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा ‘गुरु रविदासजी को उनकी जन्म जयंती पर नमन। गुरुजी के आदर्शों ने हमारे समाज को एकता और समानता के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक समरसता के प्रति गुरु रविदासजी के विचार हमें आज भी एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा देते है।’

 

स्कूली पाठ्यक्रम में दिव्यांग खिलाड़ियों पर अध्याय शुरू करने की योजना

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नई दिल्ली, मुख्य धारा में ‘दिव्यांगों’ को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सरकार की स्कूल पाठ्यक्रम में अलग-अलग दिव्यांग खिलाड़ियों पर एक अध्याय शुरू करने की योजना है।

सरकार द्वारा इस तरह की पहली पहल में “विकलांग व्यक्तियों के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध खेल गतिविधियों और अवसरों” पर ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के वर्ष 2019-2020 अकादमिक सत्र के पाठ्यपुस्तकों के अध्याय में खिलाड़ियों को शामिल किया जा सकता है।

इतना ही नहीं, एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में ‘स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा’ विषय का नाम अगले वर्ष से स्कूल के पाठ्यक्रम में ‘स्वास्थ्य, शारीरिक शिक्षा और खेल’ में परिवर्तित किया जा सकता है। एनसीईआरटी केंद्र और राज्य सरकार को स्कूल के पाठ्यक्रम और पाठ की पुस्तकों पर मार्गदर्शन देती है। सभी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) संबद्ध स्कूल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का पालन करते हैं।

इस संबंध में हाल ही में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण (विकलांग व्यक्तियों के सशक्तीकरण विभाग), मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी), भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), पैरालम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) और स्पेशल ओलंपिक भारत (एसओबी) के शीर्ष नौकरशाहों के बीच यहां एक बैठक का आयोजन किया गया था।

अगस्ता हेलिकॉप्टर की खरीद में गड़बड़ी की जांच संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली, अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की खरीदी में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा की गई कथित रुप से गड़बड़ी की एसआईटी जांच की मांग करनेवाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका स्वराज अभियान ने दायर किया है।

इसके पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा था कि वो ये बताए कि इसके लिए सही तरीके से निविदा आमंत्रित की गई थी की नहीं। कोर्ट ने पूछा था कि हम ये जानना चाहते हैं कि आपने पब्लिक मनी के साथ गड़बड़ी तो नहीं की। निविदा के समय ही विदेश में खाता क्यों खोला गया।

पहले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता स्वराज अभियान के वकील प्रशांत भूषण ने 534 पेजों के दस्तावेज कोर्ट को सौंपा था जिसमें सरकारी दस्तावेज और आरटीआई के जवाब शामिल हैं। उन्होंने एक ताजातरीन आरटीआई के मिले जवाब के बारे में बताया कि सरकार बेल हेलिकॉप्टर खरीदना चाहती थी लेकिन अगस्ता हेलिकॉप्टर के खास मॉडल की मांग की गई। तब जस्टिस गोयल ने कहा था कि हम इस पर विचार नहीं कर रहे हैं कि कौन-सा हेलिकॉप्टर खरीदा गया। बल्कि ये है कि निविदा सही तरीके से आमंत्रित की गई कि नहीं।

सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि झारखंड सरकार ने यूरो हेलिकॉप्टर कभी नहीं खरीदा। इसके बारे में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को गलत जानकारी दी है। 16 नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया था कि 2006 में अगस्ता वेस्टलैंड वीआईपी हेलिकॉप्टर की खरीद से संबंधित सभी दस्तावेज कोर्ट में पेश करें। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रधान सचिव की उस राय को महत्त्व क्यों नहीं दिया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि दूसरी कंपनियों के हेलिकॉप्टर पर भी विचार करें।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के आदेश पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास अनुशंसा भेजी गई कि अगस्ता वेस्टलैंड के हेलिकॉप्टर खरीदें जाएं। उन्होंने कहा था कि हेलिकॉप्टर डील में जो कमीशन मिला उससे मुख्यमंत्री के बेटे अभिषेक सिंह का बैंक खाता वर्जिन आइलैंड में खोला गया। इसका जिक्र पनामा पेपर्स में भी है। खाता खोलते समय अभिषेक सिंह का पता नहीं है जो मुख्यमंत्री रमन सिंह के चुनाव हलफ़नामा में है।

केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि, याचिकाकर्ता ने आईटी एक्ट का उल्लंघन कर दस्तावेज प्रस्तुत किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट रुल्स 2013 का जिक्र किया जिसके मुताबिक कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के स्रोत के बारे में जानकारी देनी होगी। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि याचिका अनुमानों पर आधारित है| इसमें कोई तथ्य नहीं है।

इसके पहले की सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि ये राजनीति से प्रेरित याचिका है| इस याचिका के जरिये राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा सकती है। सरकार ने कहा था कि पीएसी और सीएजी की रिपोर्ट संसद और विधानसभाओं में पेश किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब संसद हमारे काम पर चर्चा नहीं करती है तो सवाल है कि क्या हम उनके काम पर चर्चा कर सकते हैं। यह एक संवैधानिक सवाल है| इसलिए इसे बड़ी बेंच को सुनवाई के लिए रेफर किया जाना चाहिए। तब याचिकाकर्ता ने कहा कि ये राजनीतिक भ्रष्टाचार का मसला है| इसलिए इसकी सुनवाई कोर्ट में होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि पनामा पेपर्स भी बताते हैं कि हेलिकॉप्टर खरीदी काम सीधा संबंध छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बेटे से जुड़ा हुआ है। उनके विदेशों में भी खाते हैं जिनमें काफी रकम बटोरी गई है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि अटार्नी जनरल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का बचाव कर रहे हैं क्योंकि उन्हें उसी पार्टी के राजनीतिक नेतृत्व द्वारा नियुक्त किया गया है जिस पार्टी के छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं। अटार्नी जनरल महत्वहीन मुद्दे उठाकर मामले को टालना चाहते हैं ताकि जांच न हो सके।

स्वराज अभियान ने याचिका दायर कर इन गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब और जम्मू एवं कश्मीर पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(सीएजी) की प्रतिकूल रिपोर्ट मिली है, जबकि मीडिया रिपोर्टों से राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ में इस संदर्भ में हुई कथित गड़बड़ियों के संकेत हैं।

नैनीझील के घटते जलस्तर को लेकर राज्यपाल ने जताई चिंता

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नैनीताल, प्रदेश के राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल ने नैनीताल में अधिकारियों के साथ गर्वनर बोट हाउस क्लब से नैनीताल झील का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने नैनी झील के घटते जल स्तर को लेकर चिंता जताई। डॉ. पॉल ने कई अहम सुझाव और दिशा निर्देश भी दिए।

राज्यपाल ने निरीक्षण के दौरान कहा कि, “नैनी-झील नैनीताल के साथ ही प्रदेश व देश की धरोहर है। नैनीताल शहर का अस्तित्व ही झील से है। गत वर्ष गर्मियों में नैनीझील का जलस्तर काफी कम हो गया था जो चिन्तिनीय है, गत वर्ष की भांति झील का जलस्तर कम न हो इसके लिए जागरूकता का प्रसार करने के साथ ही जल संरक्षण पर ध्यान दिया जाय।”

राज्यपाल ने कहा कि, “जल ही जीवन है इसलिए पानी की बर्बादी कतई न हो, इसके प्रयास होने चाहिए यदि जल सरंक्षण में सभी सहयोग करेंगे तो इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।” झील निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल सरंक्षण हेतु स्लोगन, पम्पलेट, साईन बोर्ड के माध्यम से जनता को जागरूक किया जाय। साथ ही वर्षा जल संग्रहण पर विशेष ध्यान दिया जाय। उन्होंने नैनीझील संरक्षण कार्यो में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।

आयुक्त चन्द्रशेखर भट्ट ने राज्यपाल को अवगत कराया कि नैनीताल शहर के घर के छतों का सीवरेज में जाने वाले वर्षा जल को अब अभियान चलाकर नालियों के माध्यम से नैनीझील में पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन, जिलाधिकारी दीपेन्द्र कुमार चैधरी, अधीक्षण अभियन्ता सिंचाई एनएस पतियाल सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। 

लिंक 13 घंटे लेट, काठगोदाम, राप्ती रिशेडयूल

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देहरादून, मैदानी इलाकों में पड़ रहे घने कोहरे के कारण राजधानी देहरादून आने जाने वाली लंबी दूरी की कई गाड़ियां अपने निर्धारित समय से घंटो विलंब से पहुंची। जिस कारण देहरादून से जाने वाली दून काठागोदाम व गोरखपुर राप्ती गंगा को रिषेडयूल किया गया है। ट्रेनों के विलंब होने के कारण यात्रियों को सर्दी के मौसम में कड़ाके की सर्दी में परेषानी झेलनी पड़ी।

स्टेशन अधीक्षक करतार सिंह ने बताया कि, “इलाहाबाद से चलकर देहरादून आने वाले लिंक एक्सप्रेस अपने तय से 13 घंटे लेट चल रही है। जिस कारण देहरादून से जाने वाली दून काठकोदाम को रिषेडयूल किया गया है। जो 10:55 मिनट देर रात्री के स्थान पर 31 जनवरी को 3:30 मिनट पर रवाना होगी। वहीं मुज्जफरपुर राप्ती गंगा साढ़े पांच घंटे विलंब से आई। जिस कारण दोपहर 1:15 मिनट रवाना होने वाली दून गोरखपुर राप्ती गंगा एक्सप्रेस 20:20 मिनट पर रवाना हुई। वहीं अमृतसर से देहरादून आने वाली लाहौरी एक्सप्रेस डेढ़ देरी से पहुंची। जबकि हावडा. से चलकर देहरादून आने वाली हावड़ा दून एक्सप्रेसस अपने तय समय से 4:30 मिनट की देरी पर दून पहुंची।”

ट्रेनों के लेटलतीफी के कारण यात्रियों व उसके परिजनों को भारी परेषानी उठानी पड़ी।  करतार सिंह ने बताया कि, “रेलवे ट्रैक पर चल रहे निर्माण कार्य व कोहरे के कारण कई गाड़िया अपने तय समय से घंटो विलंब से चल रही है। जिस कारण देहरादून से दो ट्रेनें दून काठगोदाम व देहरादून राप्ती गंगा एक्सप्रेस के समय में बदलाव किया गया है। जबकि दून से बाकी अन्य गाड़ियां समय से रवाना किया जा रहा है।”