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तेल एवं गैस क्षेत्र में संक्षारण को लेकर विशेषज्ञों ने किया मंथन

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देहरादून। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने भारतीय पेट्रोलियम उद्योग परिसंघ (एफआईपीआई) के सहयोग से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। ‘तेल एवं गैस क्षेत्र में संक्षारण का प्रबंधन’ विषय पर आयोजित हुई कार्यशाला में विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

सीएसआइआर-मानव संसाधन विकास केंद्र द्वारा गाजियाबाद में आयोजित की गई कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विषय ये जुड़े कई अहम पहलुओं पर अपनी रिसर्च और विचार साझा किए। कार्यशाला का शुभारंभ सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे व महानिदेशक एफआईपीआई आरके मल्होत्रा द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि मल्होत्रा ने संक्षारण के कारण पाइपलाइनों, पुलों, सार्वजनिक भवनों से लेकर वाहनों, जल एवं अपषिष्ट जल-प्रणालियों और घरेलू अनुप्रयुक्तियों तक को पहुंचने वाले खतरों के बारे में चर्चा की। विश्वभर में संक्षारण-अध्ययनों की लागत से प्रकट होता है कि आकलित प्रत्यक्ष लागत 2.5 बिलियन डाॅलर से अधिक है और यह प्रत्येक राष्ट्र के सकल घरेलू उत्पादन का लगभग 3-4 प्रतिशत है। यह आंकलन किया गया है कि संक्षारण की वार्षिक लागत को 25 से 30 प्रतिशत तक बचाया जा सकता है, यदि संक्षारण इष्टतम प्रबंधन पद्धतियां अपना ली जाएं। इस दौरान डॉ. मल्होत्रा ने एक ‘सारांश पुस्तिका’ व ‘स्मारिका’ का भी विमोचन किया। सीएसआइआर-केंद्रीय विद्युत-रासायनिक अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. विजय मोहनन पिल्लै ने ‘संक्षारण अनुुसंधान पर नैनो-प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर पूर्ण-सत्र व्याख्यान दिया। उन्होंने विलेपन सामग्रियों पर नैनो-प्रौद्योगिकी के महत्व पर बल दिया और इलेक्ट्रॅानिक सामग्रियों, स्व-सक्षम सामग्रियों, रासायनिक संवेदकों के लिए सामग्रियों और संक्षारण की रोक-थाम के अनुप्रयोगों के विशिष्ट उदाहरण दिए। इसके अलावा वक्ताओं ने तेल एवं गैस उद्योगों में संक्षारण की समस्याएं, रासायनिक उपचार, धातुकर्मपरक हल, विलेपन एवं कैथोडीय सुरक्षा के माध्यम से संक्षारण का शमन व इसके साथ ही विफलता विश्लेषण और संक्षारण के पहलुओं पर जानकारी दी। डाॅ. आरसी सक्सेना ने वोट आॅफ थैंक्स दिया। कार्यशाला में तेल एवं गैस क्षेत्र के अठारह विशिष्ट वक्ता व साथ ही अग्रणी क्षेत्र के अनुसंधान एवं नवीन तथा महत्वपूर्ण विचारों के प्रयोग में संलग्न राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों के एक पैनल को भी आमंत्रित किया गया था, ताकि वे संक्षारण प्रौद्योगिकीविदों के समक्ष अपने विशेषतापूर्ण विचार रखकर समस्या पर चर्चा कर सकें व फलदायक निष्कर्षों पर पहुंच सकें। इस मौक पर काफी संख्या में वैज्ञानिक व रिसर्च स्कॉलर भी मौजूद रहे।

गणतंत्र दिवस पर झांकी प्रस्तुत करने वाला दल सीएम से मिला

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देहरादून। गुरुवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय स्थित मीडिया सेन्टर में गणतन्त्र दिवस पर नई दिल्ली में उत्तराखंड की ओर से प्रस्तुत झांकी के प्रतिभागियों से भेंट की। सूचना उपनिदेशक केएस चौहान के नेतृत्व में 34 सदस्यों के दल ने गणतन्त्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर ग्रामीण पर्यटन एवं होम स्टे पर आधारित उत्तराखण्ड की झांकी का प्रदर्शन किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राजपथ पर उत्तराखंड की झांकी निकल रही थी, देश के प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा ग्रामीण पर्यटन एवं उत्तराखण्ड की संस्कृति पर आधारित इस झांकी की सराहना की गई। उत्तराखण्ड की झांकी की थीम विशिष्ट थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन एवं होम स्टे को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यटक बदलाव चाहते हैं। उत्तराखण्ड के लोगों के स्वभाव एवं आत्मीयता के आधार पर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन एवं होम स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। टिहरी, पिथौरागढ़ एवं लैंसडोन आदि स्थानों पर होम स्टे योजना से अच्छे प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि होम स्टे पर आधारित पर्यटन का प्रदेश में अच्छा स्कोप है। यह स्थानीय लोगों को कम खर्च पर अधिक आय भी देगा।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक दल को देश में प्रथम 03 राज्यों में चुने जाने एवं पुरस्कृत किये जाने पर भी बधाई दी। राजपथ पर उत्तराखण्ड की झांकी में प्रतिभाग करने वाले कलाकारों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण एवं जनजातीय मंत्री जुएल ओराम से नई दिल्ली में भेंट की। सचिव सूचना डॉ.पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद से 17 सालों में 10वीं बार राजपथ पर उत्तराखण्ड की झांकी दिखाई गई। ग्रामीण पर्यटन एवं होम स्टे की थीम पर आधारित गढवाली म्यूजिक के साथ प्रदर्शित इस झांकी की विशिष्ट पहचान की काफी सराहना की। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक दल को गुजरात एवं महाराष्ट्र सांस्कृतिक दल के साथ सर्वश्रेष्ठ 03 सांस्कृतिक दलों में चुने जाने पर पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर विधायक मुकेश कोली, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, मीडिया समन्यवक दर्शन सिंह रावत, अपर निदेशक सूचना डॉ. अनिल चंदोला, संयुक्त निदेशक सूचना राजेश कुमार, उप निदेशक सूचना नितिन उपाध्याय आदि उपस्थित थे।
अनु कुमार को दी बधाई
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार आयोजित ‘‘खेलो इंडिया’’ नेशनल स्कूल गेम्स में उत्तराखण्ड के अनु कुमार को स्वर्ण पदम जीतने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी और ईश्वर से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रतियोगिता में उत्तराखण्ड को और सफलता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन से खेलों की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ, नई प्रतिभाओं को आगे लाने में मदद करेगा। यह प्रतियोगिता नई प्रतिभाओं को तलाशने और तराशने का एक बहुत बड़ा माध्यम बनेगी।

वेटलैंड डे पर आसन में उतरेगा पक्षी प्रेमियों का संसार

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(विकासनगर)। दो फरवरी को विश्व नम भूमि दिवस पर आसन कंजरवेशन रिजर्व में पक्षी प्रेमियों का संसार उतरेगा। वन विभाग के तत्वावधान में बर्ड वाचिंग का आयोजन किया जाएगा। इसमें पक्षी विशेषज्ञों के साथ ही कई स्कूली छात्र भी हिस्सा लेंगे।
आसन कंजरवेशन रिजर्व भारत का पहला वेटलैंड कंजरवेशन रिजर्व है। यहां हर साल सैकड़ों की संख्या में विदेशी परिदें 2000 किमी से भी अधिक की दूरी तय कर प्रवास पर पहुंचते हैं। अक्तूबर से मार्च तक आसन झील ही इन ‌परिदों का घरोंदा होता है। ऐसे में विश्व नम भूमि दिवस के सफल आयोजन के लिए इन दिनों वन विभाग पूरी तरह से जुटा हुआ है। विभाग के तत्वावधान में बर्ड वाचिंग के साथ ही कई तरह की प्रतियोगि‌ताएं भी आयोजित की जाएंगी। कलेंडर और पोस्टरों के माध्यम से लोगों को जैव विविधिता में पक्षियों की उपयोगिता को समझाया जाएगा। मालूम हो कि इस साल झील में 61 प्रजातियों के करीब 6008 परिदें प्रवास पर पहुंचे हैं। बीते पांच साल में यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में परिदें प्रवास पर पहुंचे हो।
वन बीट अधिकारी प्रदीप सक्सेना ने बताया कि इस साल की थीम ‘वेटलैंड फॉर ए सस्टेनबल अर्बन फ्यूचर’ है। लोगों को जागरूक किया जाएगा कि सतत शहरी भविष्य के लिए झील बेहद जरूरी हैं।
ये परिदें पहुंचे हैं प्रवास पर
इस साल झील में लिटील ग्रेब, ग्रेट क्रिस्टेड ग्रेब, ग्रेट कॉरमेंट, पेंटेड स्टॉक, व्हाइड नेक्ड स्टॉर्क, पेल नेबड आइबिस, बार हेडेड गूस, ग्रे लेग गूज, ब्राह्मी शेलडेक, मलार्ड, नार्दन पिनटेल, मलॉर्ड, कामॅन टील, स्पॉट बिल्ड डक, कॉमन पोचार्ड, फेरू‌ग्यूनस पोचॉर्ड, टफटेड पोचॉर्ड, यू‌रेशियन विगन, गैडवॉल, नॉर्दल शूवेलपर, रेड क्रिस्टेड पोचॉर्ड, कॉमन मेरगेनसर, पर्पल सवॉमपेन, व्हाइट ब्रिस्टेड वॉटरहेन, कॉमन मौरहेन, कॉमन कूट, ब्लेक विंगड स्टिलट, रेड वाटलड लैपविंग, रिवर लैप विंग, मॉरस सैंड पाइपर, कॉमन सैंड पाइपर, प्लॉश गुल, प्लाश फिश इगल, वेस्टर्न मारस हैरियर, स्माल ब्लू किंगफिशर, व्हाइट ब्रिस्टेड किंगफिशर, डस्की ग्रेग मार्टिन, लिटिल सरफि, बूटेड ईगल समेत 61 प्रजातियों के परिदों ने आमाद दर्ज कराई है।

कालाढ़ूंगी के दीपक नेगी ने न्यूजीलैंड में जीता गोल्ड मैडल

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उत्तराखंड के नौजवानों ने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। न्यूजीलैंड में आयोजित 19वीं ओसेनिया मास्टर्स एथेलेटिक्स और फील्ड चैंपियनशिप में कालाढूंगी के दीपक नेगी ने देश का परचम लहराया है। दीपक ने लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीतकर अपने प्रदेश के साथ पूरे देश का नाम ऊंचा किया है। यहां बता दें कि दीपक नेगी न्यूजीलैंड में 20 से 27 जनवरी तक चलने वाली इस एथलेटिक्स चैम्पियनशिप म भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।दीपक ने अपने ऐज ग्रुप में लंबी कूद, त्रिकूद और 110 मीटर बाधा दौड़ में गोल्ड मेडल और 60 मीटर की शॉट रेस में ब्राउंस मेडल जीत कर देश का नाम रोशन किया है।

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पिछले साल भी जीता स्वर्ण

गौरतलब है कि दीपक नेगी ने लंबी कूद प्रतियोगिता में 6.25 मीटर की छलांग लाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। दीपक पिछले साल भी 21 से 28 अक्तूबर तक मलेशिया में तीन स्वर्ण पदक जीतकर हैट्रिक कर चुके हैं। दीपक नेगी मूल रूप से कालाढुंगी के रहने वाले हैं और फिलहाल वे फोर्टिज हेल्थकेयर लिमिटेड गुरुग्राम में  मैनेजर के पद पर तैनात हैं। यहां बता दें कि दीपक अपना नियमित अभ्यास जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम एवं सीडब्लूजी स्टेडियम अक्षरधाम में करते हैं। दीपक के प्रदर्शन पर व्यापार मंडल अध्यक्ष पुष्कर खनायत, वकील अहमद, सभासद आन सिंह गैड़ा, दीनू सती, राजेंद्र नेगी, मनमोहन बसेड़ा, गोविंद पांडे, तनुजा आर्या, महमूद हसन बंजारा ने बधाई दी है।

राज्य की राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं शौर्य डोभाल

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उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कई तरह के नये समीकरण जन्म ले रहे हैं। चाहे वो कांग्रेस में हरीश रावत का अपनी ही पार्टी पर उन्हे अलग थलग करने के आरोप हों या फिर बीजेपी में कैबिनेट मंत्रियों में कलह। इस सबके बीच घीरे घीर राज्य बीजेपी में कुछ नये और युवा चेहरों की सक्रियता ने राजनीतिकर पारा बढ़ा दिया है। दरअसल रुद्रप्रयाग में विश्व हिंदू परिषद के एक समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल की मौजूदगी ने राज्य की राजनीति में उनकी बढ़ती सक्रियता की तरफ इशारा किया है।

बुधवार को शौर्य ने पार्टी केडर और गढ़वाल के भाजपा नेताओं के साथ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर बैठकें की।सूत्रों ने बताया कि वह मंगलवार को देहरादून पहुंचे और रुद्रप्रयाग जिले में अगस्तमुनी गए जहां उन्होंने स्थानीय वीएचपी इकाई द्वारा आयोजित “भागवत कथा” समारोह में भाग लिया। जूनियर डोभाल पिछले कुछ समय से जिस तरह से राज्य की राजनीति में सक्रियता दिखा रहे हैं उससे ये कयास लग रहे हैं कि आने वाले लोकसभा चुनावों के लिये वो अपने आप को तैयार कर रहे हैं। शौर्या डोभाल का परिवार पौड़ी जिले के घिदी गांव से है और अब उत्तराखंड की राजनीति को पास से जानने वाले लोग इसे आने वालवे समय में डोभाल की पौड़ी सीट पर दावेदारी की तरह देख रहे हैं।ये सीट फिलहाल पूर्व सीएम मेजर जनरल बीसी खंडूरी के पास है।

लंदन स्कूल ऑफ बिज़नस के पूर्व छात्र शौर्य दिल्ली में विवेकानंद फाउंडेशन नाम की संस्था चलाते हैं। शौर्या ने पार्टी में शामिल होने के बाद दिसंबर में हल्द्वानी में हुई उत्तराखंड की भाजपा कार्य समिति की बैठक में भाग लिया था। इसके अलावा उन्होंने सीएम द्वारा आयोजित रैबार कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। डोभाल जूनियर डावोस गये प्रधानमंत्री मोदी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

14 साल की युवती के उत्पीड़न मामले में ज़िला जज निलंबित

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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बुधवार को हरिद्वार की सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) दीपाली शर्मा को निलंबित कर दिया है। शर्मा पर 14 साल की एक लड़की के उत्पीड़न का आरोप है। ये लड़की उनके घर पर काम करती थी, और उसे 29 जनवरी को पुलिस ने छुड़ाया था।

बच्चे के उत्पीड़न और यातना का आरोप लगने वाली जज के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि यह गुरुवार को दर्ज किया जा सकता है। गौरतलब है कि “एक अज्ञात शिकायत के बाद ये मामला सामने आया औऱ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मामला संज्ञान लिया, जिसके बाद हरिद्वार जिला न्यायाधीश राजेंद्र सिंह चौहान को मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे। पहली नज़र मेंआरोपों को सही पाया गया जिसके बाद ये एक्शन लिया गया। जिला पुलिस अधीक्षक सहित जिला न्यायाधीश और जिला अधिकारी ने उच्च न्यायालय में रिपोर्ट पेश की थी।

कैसे अनूठा है इस आईपीएस अधिकारी का नाता त्रिजुगीनारायण मंदिर से? 

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कहते हैं कि हर शादी के पीछे एक कहानी होती है। ऐसी है एक छोटी मगर प्रेरणा देने वाली कहानी है रजत कौशिक और अपर्णा गौतम की। ये दोनों ही उत्तराखंड से नहीं है मगर देवभूमि आने पर इन दोनो का यहां से इतना गहरा नाता बन गया कि इन्होने इसी देवभूमि में परिणय सूत्र में बनने की ठान ली, और इसके लिये इस जोड़े ने रुद्रप्रयाग ज़िले में मंदकिनी और सोनगंगा नदियों के संगम पर बने त्रिगुजीनारायण मंदिर को चुना।

इन दिनों सोशल मीडिया और खासतौर पर यू ट्यूब पर “अखंड धुनी” शादी के नाम से एक सात मिनट की क्लिप ट्रैंड कर रही है जो इस जोड़े की कहानी को बेहद खूबसूरत अंदाज में बयां करती है। अपर्णा पेशे से एक आईपीएस अधिकारी हैं और गाज़ियाबाद में तैनात हैं, रजत दिल्ली के कारोबारी हैं। दोनो को अपने परिवारों को शादी के लिये त्रिजुगीनारायण पर मनाने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ी। यही नही, इस मंदिर में शादी करने का फैसला करने के लिये इन दोनों को खासी मेहनत करनी पड़ी क्योंकि आमतौर पर त्रिजुगीनारायण मंदिर आम लोगों की जानकारी में नही है, इसलिये मंदिर के बारे में जानकारी हासिल करना औऱ वहां मौजूद लोगों से संपर्क साधाना आसान नहीं रहा, लेकिन यह भी दोनो ने कर दिखाया।

अपर्णा की मुलाकात रजत से पहली बार, ऋषिकेश के ही गंगा घाट पर हुई जहां दोनो अपने अपने काम से आए थे, और इसी मुलाकात में दोनों का एक दूसरे और देवभूमी से रिश्ता बन गया।अपर्णा आज भी बताती हैं कि “ये संयोग की ही बात रही कि जहां हम दोनो पहली बार मिले थे वहीं से थोड़ी दूर पर हमारी सगई हुई।”

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त्रिजुगीनारायण मंदिर गढ़वाल में एक छोटे से स्थान पर स्थित है। मान्यता के अनुसार इसी मंदिर में भगवान शिव और पार्वती की शादी हुई थी। इस मंदिर की यही मान्यता अपर्णा और रजत को यहां खींच लाई। आज भी यहां आस पास के गांव वालों ने मंदिर में अखंड ज्योति जला रखी है, जिसकी राख भगवान का आशीर्वाद के रुप में मिलता है। गौरतलब है कि कई सेलिब्रिटीज और आम लोगों ने यहां आकर शादी की है और दाम्पत्य जीवन की शुरुआत करते हुए भगवान शिव पार्वती का आशीर्वाद हासिल किया है।

अपने दिल में उत्तराखंड को रखने वाली अपर्णा बताती हैं कि, “एक जोड़े की तरह हम अपने जैसी सोच रखने वाले और जोड़ों की तलाश कर रहे हैं। हम ऐसे लोगों को साथ जोड़ना चाहते हैं जो अपने सामर्थय और हुनर का इस्तेमाल पहाड़ के लोगों का जीवन बेहतर करने में लगा सके। हम शिक्षा,महिला सशक्तिकरण और खेती जैसे क्षेत्रों में यहां काम करना चाहते हैं।”

अपर्णा औऱ रजत के लिये उनकी शादी एक नई शुरुआत है। नई न सिर्फ उन दोनो के लिये बल्कि उस जगह के लिये भी जहां से इन दोनों के प्यार की दांसतां का आगाज़ हुआ। अपर्णा और रजत को न्यूजपोस्ट की तरफ से शादी और उनकी सोच के लिये शुभकामनाएं।

चुनाव आयोग ने निकाय चुनावों में खर्च की सीमा में किये ये बदलाव

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राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को उम्मीदवारों के लिए प्रचार के लिए व्यय सीमा को दोगुना किया, जो उत्तराखंड में आगामी नागरिक चुनाव लड़ना चाहते हैं। राज्य में 92 शहरी स्थानीय निकाय हैं, जिनमें से 86 में अप्रैल के महीने में चुनाव होने वाला है। 

राज्य में पिछला स्थानीय निकाय चुनाव अप्रैल 2013 में हुआ था। बुधवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार,

  • नगर निगमों में महापौरों की उम्मीदवारों की सीमा 8 लाख से बढ़ाकर 16 लाख कर दी गई है। 
  • डिप्टी मेयर के पद के लिए,1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई है।
  • नगरसेवक के लिए यह सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई है। 
  • नगरपालिका परिषदों के लिए, चेयरमैन के लिये उम्मीदवार अब 3 लाख की जगह 6 लाख तक खर्च कर सकते हैं।
  • नगर निगम परिषदों में वार्ड सदस्यों के लिए चुनाव लड़ने वाले लोग 30,000 की पिछली सीमा के मुकाबले 60,000 तक खर्च कर सकते हैं।

नगर पंचायतों में 

  • अध्यक्ष पद के लिए 1 लाख की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख कर दिया गया है। 
  • वार्ड सदस्यों के लिए, सीमा 15,000 से बढ़ाकर 30,000 कर दी गई है।

गौरतलब है कि 5 जनवरी को चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई सर्व पार्टी बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि विभिन्न उम्मीदवारों के लिए अधिकतम व्यय सीमा में वृद्धि होनी चाहिये।

रामनगर में एक और बाघ की लाश मिलने से हड़कंप

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रामनगर वन क्षेत्र में एक व्यस्क बाघ की लाश मिलने से हड़कंप मच गया है। रामनगर वन विभाग में वन अधिकारियों की एक टीम को बाघ की लाश मिली। अधिकारियों के मुताबिक शव एक पेड़ से लटका पाया गया था, औऱ शव के अंदर एक टहनी भी घुसी पाई गई। वन कर्मचारियों ने कहा कि यह संभवतः एक आकस्मिक मृत्यु है और शिकारी की कोई भूमिका नहीं लग रही।

उत्तराखंड में पिछले साल कुल 15 बाघों की मौत हुई, जिनमें से सात कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के थे। रामनगर डिवीजन के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफीसर (डीएफओ) नेहा वर्मा ने कहा, “सोमवार की शाम को यह शव देखा गया था। बाघ के विषाणु और पेट के हिस्सों को विश्व वन्यजीव संस्थान, देहरादून और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली टेस्ट के लिये भेज दिया गया है।”

डीएफओ ने कहा कि बाघ के शरीर के अंग, दांतों और आंखों सहित, बरकरार थे, जिससे शिकारी की भूमिका से इंकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “शव मिलने की जगह के आस पास लड़ाई के निशान दिखे हैं जिससे यह दो बाघों में हुे संघर्ष का मामला भी हो सकता है।”  पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों की एक टीम द्वारा किया गया और इसकी रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। डॉक्टरों ने कहा कि बाघ स्वस्थ था, बिना किसी बीमारी या संक्रमण या किसी कमजोरी का कोई लक्षण नहीं दिखा।

नशीले पदार्थ के साथ पकड़े गये लाल बहादुर शास्त्री अकादमी के कर्मचारी

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अपनी तरह की पहली घटना में पुलिस ने मसूरी के प्रसिद्ध लाल बहादुर शास्त्री अकादमी के दो कर्मचारियों को प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के साथ पकड़ा है। ये दोनों ही अकादमी जूनियर लेवल पर अस्थाई कर्मचारी हैं। इन दोनों के पास से पुलिस को करीब 166 ग्राम चरस बरामद हुई।

पकड़े गये दोनों में से विनय अकादमी की मेस में वेटर का काम करता है वहीं दूसरा शख्स देव सिंह सिक्योरिटी गार्ड का काम करता है। गौरतलब है कि ये वही देव सिंह है जिसे एकादमी के ही चर्चित रूबी चौधरी कांड में एक आरोपी बनाया गया था। इस कांड में रूबी चौधरी नाम कि महिला को अकादमी गैर कानूनी तरह से कई महीनों तक रहते हुए पकड़ा गया था।

मसूरी पुलिस ने एक सूचना के आधार पर इन दोनो को मसूरी कैंप्टी रोड पर जीरो प्वाइंट से पकड़ा। चरस के साथ साथ पुलिस ने इन दोनों द्वारा इस्तेमाल की जा रही मोटर साइकिल को भी जब्त कर लिया है। इन दोनों से ही पुलिस की पूछताछ जारी है और पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके साथ इस धंधे में और कौन कौन शामिल है।

एसएचओ मसूरी भावना कैंथोला ने बताया कि “मसूरी को नशा मुक्त बनाने के लिये पुलिस ने अभियान चला रखा है। इस अभियान की यो तो केवल शुरुआत है।आने वाले दिनों में शहर में सक्रिय नशे के कारोबारियों पर पुलिस अपना शिकंजा और कसेगी।”

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार देव सिंह ये नशीले पदार्थ लाखामंडल से अपने खुद के इस्तेमाल के लिये लाया था। वहीं विनय के मुताबिक वो देव सिंह के साथ सैर सपाटे के मकसद से गया था और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि देव सिंह के पास इस तरह के पदार्थ हैं।

पुलिस को हांलाकि उम्मीद है कि दोने से और पूछताछ करने पर नसे के कारोबार से जुड़ी और जानकारियां मिल सकेंगी।