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लिंक सात घंटे लेट, दून काठगोदाम री-शिड्यूल

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देहरादून। इलाहाबाद से आने वाली लिंक एक्सप्रेस घंटो विलंब होने से देहरादून काठगोदाम एक्सप्रेस को री-शिड्यूल किया गया है। जिससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ेगी, जबकि अन्य बाकी गाड़ियां समय से रवना होगी।

स्टेशन अधीक्षक करतार सिंह ने बताया कि इलाहाबाद से चलकर देहरादून आने वाली लिंक एक्सप्रेस अपने तय समय से सात घंटे देरी से पहुंची। जिस कारण देहरादून से काठगोदाम जाने वाली दून काठगोदाम एक्सप्रेस को री-शिड्यूल किया गया है, जो अब देर रात्री 10:55 मिनट के स्थान पर एक बजे रात्री को रवाना होगी। वहीं हावड़ा से चलकर देहरादून आने वाली हावड़ा दून अप 7:35 मिनट से साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंची। जबकि शताब्दी, जनशताब्दी, मसूरी व नंदा देवी एक्सप्रेस सही समय पर दून पहुंची। स्टेशन अधीक्षक ने बताया कि काठगोदाम को छोड़ा बाकी ग़ाड़ियां समय से दून से रवाना किया जा रहा है। 

आॅपरेशन स्माइल के तहत अब 91 बच्चे बरामद

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देहरादून। प्रदेश में गुमशुदा बच्चों की तलाश एवं पुनर्वास के लिए एक फरवरी से ऑपरेशन स्माइल अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में जनपद देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल में 05-05 टीम ऊधमसिंहनगर में 04 उत्तरकाशी में 02 व शेष जनपदों में 01-01 तलाशी टीम (प्रत्येक टीम में उपनिरीक्षक-1, आरक्षी-4), व तलाशी टीम की सहायता के लिए 01-01 विधिक व टेक्निकल टीम का गठन किया गया है। अपर पुलिस महानिदेशक ने यह जानकारी दी।

अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि मुख्यालय स्तर पर अभियान की नोडल अधिकारी अपर पुलिस अधीक्षक, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल शाहजहां जावेद खान हैं। जिनके द्वारा प्रदेश में चलाये जा रहे इस अभियान का पर्यवेक्षण किया जा रहा है। अभियान ऐसे समस्त सम्भावित स्थान जहां बच्चों के मिलने की सम्भावना अधिक है, जैसे शेल्टर होम्स, ढाबों, कारखानों, बस अड्डा व रेलवे स्टेशन आदि में चलाया जा रहा है। अभियान में अन्य सम्बन्धित विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है। उपरोक्त तलाशी टीमों द्वारा अपने जनपद के साथ-साथ अन्य जनपदों व राज्यों के गुमशुदा बच्चों को भी तलाश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभियान में एक जनवरी से सात फरवरी तक समस्त टीमों के कठिन परिश्रम, लगन व मेहनत से कुल 91 बच्चों को बरामद किया जा चुका है, जिसमें से 14 पंजीकृत (अन्य राज्य पंजीकृत-03) व 77 अपंजीकृत हैं। बरामद कुल 91 बच्चों में 69 बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है। शेष 22 बच्चों को पुनर्वास के लिए बालगृह दाखिल किया गया है, जिनके परिजनों के संबन्ध में आवश्यक जानकारी की जा रही है। बरामद बच्चों में काफी संख्या में ऐसे बच्चे भी हैं, जो काफी समय से अपने परिजनों से बिछुड़े हुए थे। हरिद्वार ऑपरेशन टीम द्वारा उत्तर-प्रदेश में पंजीकृत 02 गुमशुदा बालक तथा रेलवेज टीम द्वारा हरियाणा में पंजीकृत 01 बालक को बरामद किया गया है।
अभियान में जनपद पौड़ी टीम द्वारा थाना धुमाकोट में पंजीकृत मुअसं 01/18 धारा 365 भादवि की गुमशुदा दिया सुन्दरियाल उम्र 14 वर्ष पुत्री भगवती सुन्दरियाल निवासी डुमलोट बसोली पोस्ट डूंगरी पट्टी गुजडू जनपद पौड़ी गढ़वाल को सकुशल बरामद किया गया। बताया कि बालिका को ऑपरेशन टीम ने रामनगर बस अड्डे से बरामद किया गया। गुमशुदा दिया ने बताया कि स्कूल में बच्चे किसी बात को लेकर उसे चिढ़ाते थे, इसलिए वह स्कूल से चली गयी थी। अपनी गुमशुदा बालिका को पाकर दिया के माता-पिता काफी खुश हुए तथा उनके द्वारा ऑपरेशन स्माइल टीम का धन्यावाद किया गया।
अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि ऑपरेशन स्माइल टीम ने 9 फरवरी को थाना हल्द्वानी में पंजीकृत हुए मामले में गुमशुदा पूनम पुत्री होरी लाल निवासी कमलवागांजा हल्द्वानी जिला नैनीताल उम्र 10 वर्ष को उत्तरप्रदेश के बरेली से सकुशल बरामद किया गया। अपनी गुमशुदा बालिका को पाकर पूनम के माता-पिता द्वारा ऑपरेशन स्माइल टीम की काफी प्रशंसा कर धन्यवाद दिया गया।
ऑपरेशन स्माइल टीम चम्पावत ने थाना बनबसा में गुमशुदा रघुवीर राम उम्र 13 वर्ष पुत्र गंगा राम निवासी देवीपुरा मजगांव व विनोद कुमार उम्र 14 वर्ष पुत्र किरन राम निवासी देवीपुरा बनबसा को जनपद हरिद्वार व बनबसा से सकुशल बरामद किया गया। टीम द्वारा उपरोक्त बच्चों की तलाश हेतु सीसीटीवी फुटेज की सहायता, पम्पलेट चस्पा कर बाहरी व सीमावर्ती राज्यों से और रोडवेज से सम्पर्क किया गया तो रोडवेज से जानकारी हुई कि उक्त दोनो बच्चे बस से हरिद्वार गये हैं, जहां दोनो बच्चों को धार्मिक स्थल बस अड्डा होटल व ढाबों, रेलवे स्टेशन में तलाश किया गया, तो ज्योति भोजनालय निकट रेलवे स्टेशन हरिद्वार में रघुवीर राम मिला और उसने बताया कि विनोद आज ही बनबसा की बस में बैठा है, जिसे खटीमा बनबसा बॉर्डर से टीम के अथक प्रयासों द्वारा बरामद किया गया। 

हरीश रावत ने ट्रांसपोर्टर की खुदकुशी पर भाजपा सरकार को घेरा

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देहरादून। देहरादून में एक और ट्रांसपोर्टर की खुदकुशी पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में भाजपा की डबल इंजन सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि व्यापारी और किसान एक के बाद एक आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरी बैठी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार राज्य को साम्प्रदायिकता की प्रयोगशाला न बनाए।

भाजपा सरकार को आड़े हाथ लेते हुए रावत ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का नतीजा यह है कि विवश होकर ट्रांसपोर्टर ने खुदकुशी जैसा कदम उठाया। उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार को ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे और बलवंत भट्ट की आत्महत्या से सबक लेना चाहिए। पहले प्रकाश पांडे और अब बलवंत भट्ट आर्थिक तंगी से जूझते ट्रांसपोर्टर मौत को गले लगा रहे हैं। पूर्व सीएम ने त्रिवेंद्र सरकार और मोदी सरकार को उनकी नीतियों जनविरोधी बताते हुए कहा कि अगर सरकार सही काम करती तो देहरादून के ट्रांसपोर्टर बलवंत भट्ट की आत्महत्या नहीं करते। उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदार राज्य सरकार की नीतियां और वह खुद हैं।
रावत ने कहा कि प्रदेश का हाल बुरा है लेकिन यह गो संरक्षण के नाम पर साम्प्रदायिकता का रंग देने की कोशिश में है। सरकार को गौ से प्रेम है तो प्रदेश में अनुसंधान चिकित्सालय प्रयोगशाल क्यों नहीं खोल रही है। मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट को भी हरीश रावत ने झुनझुना करार देते हुए कहा कि इस बजट में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को कुछ नहीं दिया है। केंद्र सरकार ने ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल लाइन तक के लिए कोई बजट नहीं दिया है, जिससे रेल लाइन अधर में लटकने की संभावना है।
रावत ने कहा कि मोदी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार की बात करते हैं लेकिन मनरेगा के बजट में सरकार ने कोई बढ़ोत्तरी नहीं की, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भी बजट को नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने बजट को आधारहीन बताया। स्वच्छता का जगह-जगह प्रचार करने वाली इस सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान का बजट भी नहीं बढ़ाया। हरीश रावत ने भाजपा अध्यक्ष के गरीबों के घर खाना खाने पर कहा कि वब एक नहीं सौ गरीबों के जाकर खाना खाएंगे और इसकी शुरुआत हरिद्वार से की है। भाजपा सरकार के जनविरोधी कार्यों के खिलाफ विपक्ष पूरी एकजुटता से कार्य करेगा। 

‘आपका बजट आपकी राय’ कार्यक्रम से मुख्यमंत्री ने छोड़ा एक और राजनीतिक तीर

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राज्य सरकार का बजट सत्र गैरसैंण में करवाने के फैसले के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बजट सत्र के ज़रिये लोगों के बीच लोकप्रियता पाने का एक और दांव चला है। अब सरकार राज्य के बजट के लिए आपके सुझाव लेने के लिए आपके पास आ रही है।  यह पहली बार है जब उत्तराखंड में बजट से पहले किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह की पहल की है। इसके लिए राज्य के छह स्थानों पर खुद मुख्यमंत्री  विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच जाकर उनसे बजट के लिए सुझाव लेंगे। 

सरकार ने पहले बजट सत्र भराड़ीसैंण गैरसैंण में करने का फैसला कर और अब बजट पर लोगों की राय लेने के साथ  राज्य आंदोलनकारियों  और गैरसैंण में राजधानी के मुद्दे को अपनी तरफ करने की कोशिश की है। ये बजट सत्र 20 मार्च से शुरू होगा।

मुख्यमंत्री का कहना है कि “एक स्वस्थ और समावेशी बजट वो होता है जिसमें समाज के सभी वर्गों के सुझाव को शामिल किया जाए। इसलिए यह बेहद जरूरी है समाज के सभी वर्गों तक पहुंच कर उनके सुझाव लिए जाएं।” इसके लिए लोगों को अपने सुझाव देने के लिए कहीं नहीं जाना होगा बल्कि मुख्यमंत्री जी खुद लोगों के पास जाकर उनके सुझाव और राय लेंगे।

इस कार्यक्रम को ‘आपका बजट आपकी राय’ नाम दिया गया है। बजट से पहले 6 चरणों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों के बीच जाकर मुख्यमंत्री अलग-अलग विषयों पर बजट के लिए लोगों के सुझाव मांगेंगे। उनमें से महत्वपूर्ण सुझावों को राज्य के बजट में शामिल किया जाएगा। इस कड़ी में

  • सबसे पहले 13 फरवरी को यमुनोत्री में किसानों के बीच जाकर मुख्यमंत्री उनकी राय लेंगे।
  • इसके बाद पिथौरागढ़ में बजट के लिए महिलाओं के सुझाव लेंगे। 
  • अगले चरण में हरिद्वार में फिर से किसानों के बीच होंगे और उनकी बात सुनेंगे।
  • हल्द्वानी में पूर्व सैनिकों के बीच बजट के लिए उनके सुझाव लेंगे।
  • अंतिम दो चरणों में देहरादून में मुख्यमंत्री जी पहले एंटरप्रेन्योर्स से और फिर युवाओं से संवाद कर बजट के लिए उनके सुझाव सुनेंगे।

वहीं बीजेपी के इस पहल पर कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसा है।कांग्रेसी नेता किशोर उपाध्याय ने कहा कि ”मेरे हिसाब से इस पहल की शुरुआत राज्य में हरीश रावत ने की थी और उनसे पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में की थी।पब्लिक भागीदारी एक अच्छी बात हे लेकिन सरकार को लोगों को भ्रमित नहीं करना चाहिए।पहले सरकार यह बताए कि बजट कितने का है क्या है,फिर जनता से राय मांगने की बात पर अमल किया जा सकता है।”

राज्य सरकार की ये पहल तो अच्छी है और कहीं न कहीं इसमें पीएम मोदी के मार्केटिंग अंदाज़ की झलक भी आती है। बहरहाल ये वाकई बजट बनाने में लोगों की रायशुमारी करने की कोशिश है या एक मार्केटिंग स्टंट ये तो इस बात पर निर्भर करेगा कि लोगों के द्वारा बताये गये कितने सुझावों को बजट में जगह मिस पाती है।

राज्य सरकार एैरोमैटिक खेती करने वाले किसानों को देगी समूह आधारित लोन

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देहरादून। कृषि एवं उद्यान मंत्री उत्तराखंड सरकार सुबोध उनियाल द्वारा सेलाकुई स्थित कैप सेन्टर फाॅर एैरोमैटिक प्लांट-सगंध पौध केन्द्र में एैरोमैटिक प्लांट पर आयोजित कार्यशाला में प्रतिभाग करते हुए किसानों को सम्बोधित किया।

मंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि अब खेती करने का तरीका बदलना होगा। खेती समूह में करनी होगी, साथ ही जंगली जानवरों वाले बाहुल्य क्षेत्रों में एैरोमैटिक, आयुर्वेदिक और नकदी फसलें लगानी होगी। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार एैरोमैटिक खेती करने वाले किसानों को समूह आधारित दो प्रतिशत पर लोन सुविधा, निशुल्क प्रशिक्षण, बीज, आपूर्ति स्थानीय स्तर पर कलस्टर स्थापित करते हुए वहां पर शर्टिग बांडिंग, मार्केटिंग, फूड प्रोसेसिंग इत्यादि में हर तरह मदद करेगी। उन्होंने कहा कि हमें उन फसलों की ओर बढना होगा, जिनके लिए कच्चा माल स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो और स्थानीय स्तर पर ही मांग हो। उन्होने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे चारधामों और अनेक मंदिरों में फूल बडे़ पैमाने पर दिल्ली और अन्य बाहरी बाजारों से आयात होता है, इसी तरह अन्य वस्तुओं का भी आयात होता है तो ऐसी वस्तुओं सामग्री की आपूर्ति यदि स्थानीय स्तर पर पूरी हो जाय तो स्थानीय लोगों की आर्थिकी सुधरेगी उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पांच लाख एकड़ क्षेत्र पर और पांच लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखें साथ ही उसे पूरा भी करें। इसी प्रकार जैविक, हर्बल आदि उत्पादों को भी लक्ष्य तय करते हुए प्रस्ताव बनाएं, जो केन्द्र सरकार का भी विजन है। कार्यशाला में सचिव कृषि व उद्यान डी सैंथिल पांडियन ने कहा कि केंद्र सरकार वित्तपोषित किसानों और काश्तकारों का लाभ वाली अनेक योजनाएं हैं और उनका सही लाभ तभी मिल सकता है। जब समूह में खेती होगी, एक जगह एक जैसी खेती होगी, उत्पाद से लेकर विपणन तक अलग-2 समूह बनेंगे, जिससे एक ओर तो योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी, दूसरी ओर समूह में पर्याप्त वित्तीय और अन्य प्रकार की सहायता देने में असानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को अपनी आय बढानी है तो उनको एक साथ एक कलस्टर आधारित चलना ही पड़ेगा, जिससे सरकार को विभिन्न संशाधन ने में आसानी होगी और एक जगह एक जैसी खेती से उत्पादन से लेकर विक्रय तक किसानों की ही भूमिका रहने से बिचौयिलों द्वारा अनावश्यक लाभ नही उठाया जा सकेगा। उन्होने कहा कि कलस्टर आधारित एक जैसी खेती इन्टरक्रौप और बहुत से आयामों कृषि, बागवानी, पशुपालन, डेयरी, कुटीर उद्योग, हथकरघा हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग, एैरोमैटिक, आयुर्वेदिक इत्यादि में अधिक लाभ कमाने के लिए कलस्टर केन्द्र, विक्रय केन्द्र, मार्केटिंग इत्यादि सभी एक जगह एक साथ होना जरूरी है। इस अवसर पर अपर सचिव उद्यान मेहरबान सिंह बिष्ट, निदेशक संगध पौध केन्द्र सेलाकुई नृपेन्द्र चैहान सहित भारी संख्या में किसान एवं काश्तकार उपस्थित थे। 

रेखा आर्य ने छात्राओं और ग्रामीण महिलाओं के साथ देखी ”पैडमैन”

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देहरादून: सस्ते सेनेटरी पैड बनाकर महिला हाइजिन की दिशा में क्रांति लाने वाले अरुणाचलम की कहानी ‘पैडमैन’ शुक्रवार यानि आज रिलीज हो चुकी है और सोशल मीडिया पर इसके रिव्यु भी आ चुके है। फिल्म के जरिये निचले तबके की महिलाओं तक सेनेटरी पैड पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने की भी पहल की गई है। ऐसे में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने भी यह फिल्म ग्रामीण महिलाओं और छात्रओं के साथ देखने का निर्णय लिया है। साथ ही वो उन्हें सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करने को जागरूक भी करेंगी।

गुरुवार को एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची राज्यमंत्री रेखा आर्य ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं में अभी भी हाइजिन को लेकर जागरूकता का अभाव है, जिसके कारण वो सेनेटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करती। जिससे पीरियड्स के दौरान उनमें संक्रमण की आशंका बनी रहती है। कहा कि सरकार ऐसी महिलाओं को सेनेटरी पैड के प्रयोग को लेकर जागरूक करेगी। साथ ही सस्ते सेनेटरी पैड की जानकारी भी उपलब्ध कराएगी।

आपको बतादें कि पहले भी रेखा आर्य ने सैनिटरी नैपकिन के विषय में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से पत्र के माध्यम से बात की ती।उन्होंने चिट्ठी के माध्यम से कहा था कि सैनिटरी नैपकिन पर किसी तरह का कर नहीं लगना चाहिए और राज्य में इसको बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लिहाजा उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से सैनिटरी नैपकिन को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की थी। रेखा ने अपने खत में केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा था कि राज्य में ज्यादातर महिलाएं धनाभाव में जीती हैं और उन्हें सैनिटरी नैपकिन के लिये पैसे असानी से प्राप्त नहीं होते, इस के ऊपर सैनिटरी नैपकिन पर टैक्स इन्हें अाम महिलाअों की पहुँच से दूर कर देता है जिस की वजह से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिये सैनिटरी नैपकिनस को टैक्स के दायरें से बाहर रखना चाहिये, जिससे पहाड़ की महिलांए इसका ज्यादा इस्तेमाल आसानी से कर सकेंगी

इस दिशा में पहल करते हुए 9 फरवरी यानि आज वे 55 छात्रओं और 10 ग्रामीण महिलाओं को लेकर फिल्म देखने पहुंची। उनका उद्देश्य है कि यह फिल्म दिखाकर वो उन्हें सेनेटरी पैड के इस्तेमाल को लेकर जागरूक करने के साथ संक्रमण से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी भी दे सकें। बताया कि इसके लिए क्रॉसरोड मॉल में 11 बजे का शो बुक किया गया था।

इस बात की पुष्टि करते हुए क्रॉसरोड मॉल में काम करने वाले कार्यकर्ता ने बताया कि समय के अनुसार मंत्री रेखा आर्य 11 बजे थियेटर पहुंच गई थी और उनके साथ छात्राएं और ग्रामीण महिलाएं भी थी।वह लोग अभी थिएटर के अंदऱ फिल्म देख रहे हैं और पूरा ऑडी भरा हुआ है।गौरतलब है कि आज पैडमैन रिलीज हो गई है और इसके रिव्यु भी अच्छे आ रहे है।

मिसाल: कैसे किसानों को आत्मनिर्भर कर रहा है ऑर्गेनिक गढ़वाल

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उत्तराखंड से लगातार हो रहा पलायन न केवल एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है बल्कि राज्य की एक दुखद सच्चाई भी है। हमारी कोशिश रहती है आपको लगातार उन अकेली लेकिन दमदार कोशिशों से रूबरू कराना जो पलायन को चुनौती दे रही हैं। ऐसी ही एक कोशिश की है 24 साल के विवेक भंडारी ने।पीपलीथ गांव से पलायन को रोकन और रिवर्स माइग्रेशन के लिए विवेक ने कदम आगे बढ़ाए और फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। विवेक अपने गांव पीपलीथ में पलायन रोकने के लिए अपने प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। विवेक ने ऑर्गेनिक गढ़वाल नाम से एक ब्रॉंड की शुरुआत की जिसमे इन्होने पहाड़ की क्षेत्रीय फसलों को मार्केट मे लाने का प्लेटफॉर्म दिया। उत्तराखंड के दूर दराज़ गांवो मे होने वाली फसलों को मार्केट मे उतारने का एक प्लेटफॉर्म देने के साथ ही उन किसानो को एक मौका दिया जो मार्केटिंग की कमी के कारण महंगी फसलों से आर्थिक लाभ लेने से चूक जाते हैं। ऑर्गेनिक गढ़वाल ने ऐसे कुछ एनजीओ के साथ टाईअप किया है जो दूर-दराज़ के गांव में किसानो को नई तकनीक से फसल उगाने,फूड प्रोसेसिंग और लोकल फसलों को उगाने के बारे मे जानकारी देते है।

vivek bhandari

ऑर्गेनिक गढ़वाल के बारे में बात करते हुए विवेक भंडारी ने कहा कि “अपने इस ब्रॉंड के जरिए हम ऐसे लोगो से जुड़ना चाहते हैं जो अपने काम के जरिए समाज मे अलग पहचान बनाना चाहते हैं और जिन्हे अपना काम मार्केट तक पहुंचाने मे परेशानी हो रही है। हम ऐसे लोगों को एक प्लेटफॉर्म दे रहे है जिसकी वजह से उनके प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ रही है और मार्केट के हिसाब से स्टैंडर्ड पैकिंग और ब्रांड से उनको अपने प्रोडक्ट का सही मुनाफा मिल रहा है। गौरतलब है कि अपने सबसे बड़े प्रयोगों में से एक इस ब्रैंड ने पिछले साल  ”क्यारकि गांव” में कैश क्रॉप और एग्जॉटिक फसल चिया की एक खेप को सफलतापूर्वक उगाया है,जिसकी डिमांड ना केवल देश में बल्कि विदेश मे भी काफी है। और इस साल गर्मियों मे इसे 1000 हेक्टेयर में उगाने का लक्ष्य है।

विवेक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ऋषिकेश से करने के बाद बी.कॉम, एलएलबी की पढ़ाई की है। इसके साथ कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स करते हुए विवेक को ये आइडिया आया और वो सीएस की पढ़ाई आखिरी साल में छोड़ कर वापस अपने घर अपने पहाड़ आ गए और पलायन को रोकने के लिए काम करना शुरु कर दिया। उनके द्वारा शुरू किये गये इस  लघु उद्योग से गांव के सेंकड़ो लोगों को रोजगार मिल रहा है।

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ऑर्गेनिक गढ़वाल शुरु करने के पीछे के कारण पर विवेक कहते हैं कि “मुझे हमेशा एक बात परेशान करती थी कि लोग पलायन क्यों कर रहे हैं और फिर जब मैने गहराई से इस बात को सोचा तो जवाब था रोज़गार के लिए। उसी दिन मैने यह सोच लिया कि अपना कुछ काम करुंगा और अगर मेरे ऐसा करने से 10 लोग भी गांव वापस आते है तो उससे बेहतर कुछ नही होगा।”

शुरुआती दौर में अपना काम शुरु करना विवेक के लिए आसान नही था। अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए विवेक कहते हैं कि “पलायन रोकने के साथ-साथ मेरी सोच थी कि किसानो को नई तकनीक के माध्यम से खेती करना सिखाना लेकिन इसे करते हुए काफी परेशानियो का सामना करना पड़ा। गांव-गांव जाकर वर्कशॉप, लोगों से मिलने के बाद इसपर काम शुरु हुआ। सब होने के बाद भी मार्केट मे लोगों ने हमारी फसल खरीदने से इंकार किया और तब हमने अपना ब्रांड आर्गेनिक गढ़वाल शुरु किया ताकि हमे किसी के पास अपना सामान ना बेचना पड़े।”

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गौरतलब है कि आर्गेनिक गढ़वाल को काम करते हुए दो साल हो गए है और पिछले पांच महीने से यह ब्रांड अपने प्रोडक्ट बेच रहा है।और दो साल बाद आर्गेनिक गढ़वाल ने अच्छी खासी आर्थिक सफलता भी हासिल कर ली है। साथ ही ऑर्गेनिक गढ़वाल खेती मे नई तकनीक के इस्तेमाल से नये आयाम हासिल कर रहा है। फिर चाहे वह कैश क्रॉप हो, फूड प्रोसेसिंग हो या फिर प्राकृतिक फाईबर की खेती हो।

फिलहाल आर्गेनिक गढ़वाल के बहुत से प्रोडक्ट है जैसे लेमन ग्रास ग्रीन टी,एप्रिकोट ऑयल,रॉ हनी ऑफ हिमालया,बाजरा आटा,बाजरा स्नैक्स,रोस्टेड सीड्स मिक्स,तुलसी चाय,हल्दी पाउडर,गुलाब जल,हैंप सीड आदि। भविष्य में विवेक पीपलीथ गांव को मॉडल विलेज की तरह स्थापित करना चाहते है साथ ही पहाड़ के पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए कुछ प्रोजेक्ट पर काम करना चाहते हैं।विवेक कहते हैं ऐसे पेड़ लगाने का फायदा है जिन्हें कम पानी की जरुरत हो इससे हम पानी भी बचा सकते है और पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकते है।

इस समय विवेक की टीम में 4 लोग काम कर रहे हैं जिसमें विवेक खुद भी शामिल है क्योकि विवेक खेती से लेकर प्लानिंग,स्ट्रेटेजी भी देखते हैं।

विवेक कहते है आर्गेनिक गढ़वाल से सबसे ज्यादा फायदा क्षेत्रीय किसानो को हो रहा है जो अपनी ताकत को सही जगह इस्तेमाल कर रहे है और उन्हें यह भी संदेश मिल रहा कि बिना पलायन किए अपने घर और गांव में रहकर भी रोज़गार मिल सकता है।

तो अगर आप आर्गेनिक गढ़वाल के प्रॉडक्ट खरीदना चाहते हैं तो ऋषिकेश लक्ष्मण झूला की सभी दुकानों पर,देहरादून के क्रॉस रोड मॉल के ईज़ी डे,दिल्ली के कुछ दुकानों और आर्गेनिक गढ़वाल के फेसबुक पेज के माध्यम से खरीद सकते है।

फायर ब्रिगेड के लिये पानी उपलब्ध कराने के लिये फायर हाइड्रेंट चिह्नित

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‘अमृत योजना’ के तहत देश भर में शहरों का पुर्नवीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इस क्रम में देहरादून शहर में पेयजल की नई पाइपलाईनें बिछायी जा रही है। जिसके संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर आकस्मिक स्थिति के समय फायर ब्रिगेड के वाहनों को पानी उपलब्ध कराने के लिये फायर हाइड्रेंट लगाने के स्थान चिह्नित करवाये गये हैं। इन चिह्नित स्थानों पर पेयजल लाइनो के माध्यम से जल्द ही अग्निशमन विभाग को आकस्मिता के समय पानी प्राप्त करने में सहयोग प्राप्त होगा।

उल्लेखनीय है कि पुरानी पेयजल लाईनों पर अग्निशमन विभाग के लिये फायर हाइड्रेन्टों का प्राविधान किया गया था लेकिन समय के साथ वह फायर हाइड्रेन्ट रोड के नीचे दब गये या उनमें इतना पानी का प्रेशर नही रहा। श्रीमती निवेदिता कुकरेती कुमार की पहल पर नई पेयजल योजना के लिये बिछाई जा रही लाईनों पर फायर हाइडेन्टों को स्थापित किये जाने के लिये प्रयास किये जा रहे है।

इसी क्रम में अग्निशमन विभाग एवं जल संस्थान ने पूरे देहरादून शहर क्षेत्रान्तर्गत संयुक्त निरीक्षण किया गया तथा शहर के प्रमुख स्थानों पर फायर हाइड्रेन्ट लगाये जाने वाले स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है। राजपुर रोड, रायपुर रोड पित्थूवाला, आर्केडिया ग्रान्ट , जी.एम.एस रोड, धर्मपुर आदि स्थानों पर लगने वाले फायर हाइड्रेन्टों के स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है ।

वर्तमान लाईन में कुल देहरादून नगर क्षेत्रान्तर्गत 59 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है, जिस पर पेयजल लाईन पर हाइड्रेन्ट तथा ओवर टैंको पर आउटलोट वाल्व लगाये जाने है। मसूरी मे भी 12 स्थानों पर पुराने फायर हाइड्रेन्टों के स्थान पर नये फायर हाइड्रेन्ट स्थापित किये जाने के लिये रिपोर्ट जल संस्थान को भेजी गयी है ।

नगर क्षेत्र में काफी समय से अग्निशमन वाहनों के पानी प्राप्त करने के लिये काफी दूरी तय करनी पडती थी। नये फायर हाइड्रेन्ट स्थापित करने की मांग अग्निशमन विभाग काफी समय से कर रहा था। नये फायर हाइड्रेन्ट स्थापित होने पर अग्निशमन वाहनों को अल्प समय में ही पानी मिल सकेगा तथा किसी भी अग्निकाण्ड पर वह प्रभावी कार्यवाही कर सकेंगें।

उत्तराखंड में 13 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

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देहरादून। उत्तराखंड में महाशिवरात्रि पर्व का अवकाश 14 फरवरी के बजाय 13 फरवरी को होगा। इस अवकाश की तिथि में संशोधन के बाद अब राज्य मंत्रिमंडल की बैठक भी 13 फरवरी के बजाय अब 14 फरवरी को होगी।

उत्तराखंड में महाशिवरात्रि पर्व 13 फरवरी को मनाया जाएगा। वहीं देश के कई हिस्सों में यह पर्व 14 फरवरी को होगा। पहले सरकार ने इस पर्व के अवकाश की तिथि 14 फरवरी घोषित की थी। अब अवकाश की तारीख को सरकार ने संशोधित किया है।

इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी ने आदेश जारी किए। इससे पहले राज्य में 15 दिसंबर, 2017 को सार्वजनिक अवकाशों के लिए जारी सूची में महाशिवरात्रि पर्व का अवकाश 14 फरवरी को घोषित किया गया था। उधर, महाशिवरात्रि अवकाश की तिथि में संशोधन होने के बाद मंत्रिमंडल की बैठक को लेकर असमंजस भी खत्म हो गया।

झूलन ने रचा इतिहास, 200 विकेट लेने वाली पहली गेंदबाज बनीं

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किंबर्ले, भारतीय महिला तेंज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने दक्षिण अफ्रीका दौरे पर इतिहास रच दिया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की श्रृंखला के दूसरे एकदिवसीय मैच में झूलन ने अपने एकदिवसीय कैरियर का 200वां विकेट हासिल किया। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दुनिया की पहली महिला गेंदबाज बन गई हैं।

35 वर्षीय झूलन ने सलामी बल्लेबाज लारा वूलवार्ट को आउट कर यह उपलब्धि हासिल की। भारतीय टीम ने यह मैच 178 रन से जीतकर श्रृंखला में 2-0 की अपराजेय बढ़त हासिल कर ली। भारत ने पहला मैच 88 रनों से जीता था।

उल्लेखनीय है कि सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना के बेहतरीन शतकीय पारी (135) की बदौलत भारतीय टीम ने दूसरे एकदिवसीय में दक्षिण अफ्रीका को 178 रन से हरा दिया। भारत 50 ओवर में तीन विकेट पर 302 रन बनाये थे, जिसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 124 रनों पर सिमट गई।