उत्तराखंड आयें तो इन 5 होमस्टे ऑप्शन को आजमाऐं
पिछले महीने दिल्ली के सौरभ गुप्ता अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाने नैनीताल पहुंचे, इस उम्मीद के साथ के यहां कुछ दिन शोर शराबे, प्रदूषण से दूर, वादियों में रहकर थोड़ा तरोताजा हो जाएंगे। लेकिन उनके बजट के हिसाब से जो होटल उन्होंने बुक किया, वो अस्तव्यस्त, तंग गलियों में था, जिसके चलते उन्हें वो सुकून नहीं मिला जो वो तलाश रहे थे।
अब आप सोच रहे होंगे कि अगर सौरभ ने मंहगा रिजोर्ट बुक किया होता तो ये नौबत नहीं आती। बहरहाल किसी महंगे रिजोर्ट की जगह अगर आप होमस्टे बुक करें तो ये आपकी जेब पर हल्का तो पड़ेगा ही, साथ ही ये आपको वादियों और गांवों के बीच परंपरागत तरीकों से रहने का मौका भी देगा। सबसे दिलचस्प बात है कि आप यहां रहकर ठेठ पहाड़ी भोजन का लुत्फ उठा सकते हैं जो आम होटलों में मिलना मुश्किल है। उत्तराखंड में होमस्टे के अच्छे खासे विकल्प मिलते हैं जो अपनी मेहमाननवाजी के लिए मशहूर हैं।
हिमालयन होमस्टे
- नज़ारा- गांव के बीचों बीच, हिमालय की पहाड़ियों से घिरा.
- आर्कषण- लकड़ी के घर, मेहमान नवाज़ी, स्वादिष्ट पहाड़ी खाना
- पता- संकरी गांव, उत्तरकाशी, उत्तराखंड
द व्हाइट पीक्स
- नज़ारा – चीड़ के जंगलों के बीच, हिमालय की पहाड़ियां
- आर्कषण –शांत वातावरण, पालतू जानवर को साथ ला सकते हैं, बेहद खूबसूरत सजावट, पहाड़ी खाना
- पता- मुक्तानिवास, गांव गागर, उत्तराखंड
सुकून होमस्टे
- नज़ारा- गांव के बीच, घाटी, हरियाली
- आर्कषण- कुमाउनी कौटेज, बौन फायर, बारबीक्यू, पहाड़ी खाना
- पता- गांव टोली, लमगढ़, जलना, अलमोड़ा, उत्तराखंड
गोर्रयास होमस्टे
- नज़ारा- जगल के बीच
- आर्कषण- ईको फ्रेंडली, स्वादिष्ट खाना, सुंदर इंटिरियर
- पता- मालसी, सिनौला, देहरादून, उत्तराखंड
हिमालयन अबोड होमस्टे
- नज़ारा- बर्फ से ढ़की वादियां
- आर्कषण- मेहमाननवाज़ी, सादा खाना, बच्चों के लिए उत्तम
- पता- बद्रीनाथ रोड जीआरईएफ कैंप, मारवाड़ी गांव, जोशीमठ उत्तराखंड
तो इस बार होमस्टे के साथ नये दोस्त बनाएं, नई यादें संजोएं और अपने ब्रेक को सही में मायने में चैन और सुकून से बिताएं.
देहरादून। राजधानी देहरादून की रेलवे स्टेशन की दीवारों पर प्रदेश के महापुरुष और कालाकारों के साथ यहां की स्थानीय परंपराओं को चित्रकारी की खूबसूरती के साथ सजाई जाएगी। रेलवे स्टेशन को सजाने-संवारने के काम में दर्जनों छात्र दिन-रात लगे हुए हैं।
हालांकि चित्रकारी करने का काम अभी रेलवे के आरक्षण काउंटर के मुख्य द्वार पर चल रहा है। वहीं इस अनोखी चित्रकारी से आकर्षित होकर स्टेशन परिसर के अन्य हिस्सों में काम करने के लिए अन्य संस्थाएं भी बेहतरीन चित्रकारी उकेरने को तैयार हैं। अलग-अलग संस्थाओं से बातचीत कर रेलवे उनके सुझाव प्राप्त कर रहा है। हालांकि इस कार्य के लिए छात्र और संस्थाएं कोई पारिश्रमिक नहीं ले रही हैं। शुरुआत में उत्तराखण्ड के कालाकारों और यहां के महापुरुषों के चित्र उकेरे जा रहे हैं। इसके बाद यहां के पुष्प और गढ़वाल कुमाउं सहित चारधाम सहित अन्य प्रमुख स्थानों को दर्शाया जाएगा। मिनेरवा संस्था के दर्जनभर छात्र-छात्राएं चित्रकारी में लगे हुए हैं। संस्था के फाइन आर्ट के प्रिंसपल छात्रों के साथ स्वयं चित्रकारी करने में लगे हैं।
स्टेशन अधीक्षक करतार सिंह ने बताया कि दून स्टेशन को स्वच्छ व सुन्दर बनाने की मुहिम में दीवारों को सजाया जा रहा है। यहां आने वाले हर पर्यटक को प्रदेश की खूबसूरती के बारे में पता चल सके। पूरे स्टेशन परिसर के खाली दीवारों पर सुन्दर चित्रकारी कर उसे सजाया जाएगा, ताकि पर्यटक उत्तराखण्ड की खूबसूरती जान-समझ सकें।





























































